शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

आओ नमाज़ सीखे

 

▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 01 ♻️

■ ➞  नमाज़ हर मुकल्लफ़ पर फर्ज़ है। मुकल्लफ़ उसे कहते हैं जिस पर शरीअ़त का हुक्म लागू होता हो या जिस पर शरई हुक्म की पाबन्दी लाज़िम हो।


■ ➞  अगर कोई नाबालिग है या पागल है तो वो मुकल्लफ़ नहीं यानी शरीअ़त का हुक्म उस पर लागू नहीं होता।


■ ➞  ये ऐसा फर्ज़ है कि जो इस की फर्ज़िय्यत का इंकार करे यानी कोई कहे कि मैं नमाज़ को फर्ज़ नहीं मानता तो वो काफ़िर हो जायेगा। नमाज़ ना पढ़ना अलग बात है लेकिन इसे फर्ज़ ना मानना अलग बात है।


■ ➞  जो जान बूझ कर नमाज़ छोड़ते हैं यानी कोई मजबूरी या उज़्र उन के पास नहीं होता तो ऐसा शख्स फासिक़ है।


■ ➞  इस्लामी हुकूमत होती तो ऐसे लोगों को क़ैद करने का हुक्म है बल्कि क़त्ल करने का हुक्म भी है, इस से मालूम होता है कि नमाज़ की अहमिय्यत क्या है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 


📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 02 ♻️


■ ➞  नमाज़ के बारे में शरीअ़त का हुक्म ये है कि जब बच्चा 7 साल का हो जाये तो उसे  नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा सिखायें (अगर खुद जानते हैं तो) आज कल जो खुद नहीं जानते वो भी दूसरों को सिखाने निकल पड़ते हैं। अगर आप नहीं जानते तो पहले अच्छी तरह सीख लें, ताकि बच्चे को सिखा सकें।


■ ➞  जब बच्चा 10 साल का हो जाये तो उसे नमाज़ पढ़ने का कहें, उस पर नर्मी बर्तें और अगर ना माने तो सिद्दत इख्तियार करें और मार मार कर नमाज़ पढ़वायें।


■ ➞  आज कल देखा ये जाता है कि लोग नमाज़ पढ़ने के लिये तो नहीं मारते लेकिन स्कूल भेजते वक़्त काफ़ी सिद्दत दिखाते हैं। हमने देखा है कि कई लोग अपने बच्चों को घसीट कर स्कूल ले जाते हैं लेकिन नमाज़ की बात आये तो बस इतना कह देंगे "बेटा नमाज़ पढ़ा करो" और इस से ज़्यादा कहने की हिम्मत इसीलिये भी नहीं करते क्योंकि दूसरों को कहने से पहले खुद को भी देखना ज़रूरी है।


■ ➞  अब जो बाप खुद बे नमाज़ी हो, वो नमाज़ के लिये  बेटे के साथ कभी मार पीट कर सकता है? 


■ ➞  बेटा भी पलट कर कह सकता है कि आप क्यों नहीं पढ़ते?


■ ➞  नमाज़ के हवाले से नर्मी के साथ सख्ती की भी ज़रूरत है।


■ ➞  जहाँ आप अपने बच्चों को दूसरे कामों के लिये मजबूर करते हैं वहीं नमाज़ के लिये भी उन पर खास प्रेसर दें। उन्हें इसकी अहमिय्यत समझायें और पहले खुद भी अ़मल करें।...✍️ 


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 


📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 03 ♻️


■ ➞  नमाज़ एक ऐसी इबादत है कि इस में नाइबत जारी नहीं हो सकती यानी आप किसी को अपना नाइब (Vice) नहीं बना सकते कि मेरे बदले में तुम पढ़ देना बल्कि जिस पर फर्ज़ है, उसे ही अदा करनी होगी।


■ ➞  अगर किसी ने अपनी ज़िन्दगी में कई नमाज़ें क़ज़ा की और इन्तिक़ाल कर गया और वसीयत की कि उस की तरफ़ से फिदया अदा किया जाये तो ये किया जा सकता है और इसे आगे तफ़सील से बयान करेंगे।


■ ➞  अब हम पहले नमाज़ के शराइत (Conditions) बयान करेंगे।


■ ➞  इन शराइत में से किसी एक में भी कमी हुई तो नमाज़ होना तो दूर की बात, नमाज़ शुरू'अ़ ही नहीं होगी।


■ ➞  ये ऐसी चीज़ें हैं कि अगर आप इन्हें पूरा करते हैं तो ही आप नमाज़ पढ़ने के क़ाबिल कहलायेंगे, वरना आप नमाज़ शुरू'अ़ ही नहीं कर सकते। फिर नमाज़ शुरू'अ़ हो जाने के बाद जो कंडीशन हैं (जिसे फराइज़े नमाज़) कहते हैं, वो अलग हैं।


■ ➞  नमाज़ की 6 शर्तें हैं :


❶ ➪ तहारत

❷ ➪ सित्रे औरत

❸ ➪ इस्तिक़्बाले क़िब्ला

❹ ➪ वक़्त

❺ ➪ निय्यत

❻ ➪ तकबीरे तहरीमा


■ ➞  अब इनकी तफ़सील बयान की जायेगी।..


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 04 ♻️


■ ➞  नमाज़ की पहली शर्त है तहारत यानी पाकी।


■ ➞  नमाज़ पढ़ने वाला, उस का जिस्म नजासतों से, उस के कपड़े और जिस जगह नमाज़ पढ़ रहा है, सब का पाक होना ज़रूरी है।


■ ➞  पाकी नापाकी के बहुत सारे मसाइल हैं, मस्लन हदसे अकबर क्या है? हदसे असगर क्या है? और इन के लिये कौन सी तहारत ज़रूरी है? फिर नजासते खफीफ़ा और गलीज़ा का फर्क़ भी जानना ज़रूरी है कि एक दिरहम और एक चौथाई का क़द्रे माना होना समझ आ जाये।


■ ➞  अब हम नमाज़ की पहली शर्त यानी तहारत पर तफ़सील से कलाम करेंगे फिर दूसरी शर्त की तरफ़ बढ़ेंगे।


■ ➞  सब से पहले आसान लफ्ज़ों में जान लीजिये कि नापाकी दो तरह की होती है, एक को हदसे असगर और एक को हदसे अकबर कहते हैं।


■ ➞  इसे आप यूँ समझ लें कि एक छोटी नापाकी होती है जिसका हुक्म हल्का होता है और एक बड़ी नापाकी होती है जिसका हुक्म भारी होता है।


■ ➞  छोटी नापाकी से पाकी हासिल करने के लिये तहारते सुगरा यानी वुज़ू काम आता है और बड़ी नापाकी को दूर करने के लिये तहारते कुबरा यानी गुस्ल।


■ ➞  अगर छोटी नापाकी हुई तो छोटी तहारत से पाक होंगे और बड़ी नापाकी हुई तो बड़ी तहारत से पाक होंगे।.. 


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 05 ♻️


■ ➞  तहारत के बारे में हम पूरी तफ़सील बयान करेंगे लेकिन उससे पहले कुछ इस्तिलाहात जान लें क्योंकि आगे इनका इस्तिमाल बहुत ज़्यादा होगा।


■ ➞  शरीअ़त में हर काम एक जैसा नहीं है बल्कि उसे कई हिस्सों में बाँटा गया है, सब का नाम अलग है और सब का हुक्म भी अलग है।


■ ➞  कुछ काम अच्छे हैं जिन्हें करने पर सवाब मिलता है और कुछ बुरे हैं जिनसे गुनाह मिलता है।


■ ➞  हर अच्छा काम आपस में बराबर नहीं है यानी किसी में कम नेकी है तो किसी में ज़्यादा और इसी तरह हर बुरा काम भी आपस में बराबर नहीं है किसी में कम गुनाह है तो किसी में ज़्यादा।


■ ➞  अच्छे काम 5 तरह के हैं। :


❶ ➪ फर्ज़

❷ ➪ वाजिब

❸ ➪ सुन्नते मुअ़क्किदा

❹ ➪ सुन्नते गैरे मुअ़क्किदा

❺ ➪ मुस्तहब


■ ➞  और बुरे काम भी पाँच हैं। :


❶ ➪ हराम

❷ ➪ मकरूहे तहरीमी

❸ ➪ इसा'अ़त

❹ ➪ मकरूहे तन्ज़ीही

❺ ➪ खिलाफे अवला


■ ➞  और एक है "मुबाह" ये ना अच्छा है और ना बुरा यानी इस में सवाब भी नहीं और गुनाह भी नहीं।.. 


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 06 ♻️


■ ➞  फर्ज़ : फर्ज़ उसे कहते हैं जो दलीले क़तई से साबित हो यानी ऐसी दलील जिस में कोई शुब्हा ना हो।


■ ➞  फर्ज़ को अदा करना बहुत ज़रूरी है, इस को तर्क करने वाला सख्त गुनाहगार और अज़ाबे जहन्नम का मुस्तहिक़ है और जो इसका इन्कार करे वो काफ़िर है।


■ ➞  वाजिब : वाजिब उसे कहते हैं जो दलीले ज़न्नी से साबित हो, इस का अदा करना भी ज़रूरी है और जो तर्क करे गुनाहगार है, इस का इन्कार करने वाला गुमराह है।


■ ➞  सुन्नते मुअ़क्किदा : जो काम हुज़ूर ﷺ ने हमेशा किया हो, अलबत्ता बयाने जवाज़ के लिये कभी तर्क भी किया हो, उसे सुन्नते मुअ़क्किदा कहते हैं।


■ ➞  इस का अदा करना ज़रूरी है और कभी कभार छोड़ने वाले पर इताब और आदतन छोड़ना इस्तिहक़ाक़े अज़ाब है।


■ ➞  सुन्नते गैरे मुअ़क्किदा : वो जो शरीअ़त की नज़र में पसंदीदा हो लेकिन इसके छोड़ने पर कोई वईद भी नहीं।


■ ➞  इस का करना सवाब लेकिन छोड़ने वाला गुनाहगार नहीं अगर्चे आदतन हो, हाँ इस का तर्क शरीअ़त को ना पसंद है।


■ ➞  मुस्तहब : वो जो शरीअ़त की नज़र में पसंदीदा हो लेकिन इसे छोड़ना नापसंद भी ना हो।


■ ➞  अगर्चे हुज़ूर ﷺ ने किया हो या तरगीब दी हो या उलमा ने पसंद किया हो अगर्चे अहादीस में ज़िक्र ना हो, इस का करना सवाब है और ना करने पर मुत्लक़न कोई हुक्म नहीं।


■ ➞  मुबाह : जिस का करना या ना करना एक जैसा हो यानी ना सवाब ना गुनाह।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 07 ♻️


■ ➞  हराम : इस का एक बार भी करना गुनाहे कबीरा है, ये फर्ज़ के मुक़ाबिल है यानी जो फर्ज़ है उसे तर्क करना हराम और जो हराम है उस से बचना फर्ज़ है।


■ ➞  मकरूहे तहरीमी : ये वाजिब के मुक़ाबिल है, इस का करने वाला भी गुनाहगार है, इस का गुनाह हराम से कम है लेकिन चंद बार इस का करना गुनाहे कबीरा है।


■ ➞  इसा'अ़त : ये सुन्नते मुअ़क्किदा के मुक़ाबिल है, इस का करना सबबे इताब है यानी अल्लाह त'आला और उस के रसूल की नाराज़ी और आदतन करने पर अज़ाब।


■ ➞  मकरूहे तन्ज़ीही : ये सुन्नते गैरे मुअ़क्किदा के मुक़ाबिल है, इस का करना शरीअ़त में नापसंद है लेकिन गुनाह नहीं अगर्चे आदतन हो।


■ ➞  खिलाफे अवला : ये मुस्तहब के मुक़ाबिल है यानी इस का ना करना बेहतर था लेकिन किया तो कुछ नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 08 ♻️


■ ➞  फर्ज़ का मुक़ाबिल (Opposite) हराम है, वाजिब का मकरूहे तहरीमी, सुन्नते मुअ़क्किदा का इसाअ़त, सुन्नते गैरे मुअ़क्किदा का मकरूहे तन्ज़ीही और मुस्तहब का खिलाफे अवला।


■ ➞  इसका ये मतलब भी है कि जो काम फर्ज़ है उसे छोड़ना हराम है और जो हराम है उस से बचना फर्ज़ है।


■ ➞  जो वाजिब है उस का तर्क मकरूहे तहरीमी है और जो मकरूहे तहरीमी है उस से बचना वाजिब है।


■ ➞  जो सुन्नते मुअ़क्किदा है उसे छोड़ना इसा'अ़त है और इसा'अ़त से बचना सुन्नते मुअ़क्किदा है।


■ ➞  जो सुन्नते गैरे मुअ़क्किदा है उसे छोड़ना मकरूहे तन्ज़ीही है और मकरूहे तन्ज़ीही से बचना सुन्नत।


■ ➞  जो मुस्तहब है उस का उल्टा करना खिलाफे अवला है और खिलाफे अवला से बचना मुस्तहब है और आखिर में मुबाह है जिस का करना, ना करना एक जैसा है लेकिन कभी-कभी मुबाह अच्छी निय्यतों की वजह से मुस्तहब भी बन जाता है।


■ ➞  इनका ताल्लुक़ नमाज़ से इस तरह भी है कि नमाज़ में फर्ज़ छूट जाने पर नमाज़ दोहराना फर्ज़ है, वाजिब छूट जाने पर नमाज़ दोहराना वाजिब है, सुन्नत छूट जाने पर सुन्नत और मुस्तहब छूट जाने पर मुस्तहब।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 09 ♻️


■ ➞  अब जब आप ये इस्तिलाहात जान चुके तो फिर आते हैं नमाज़ की पहली शर्त तहारत की तरफ़।


■ ➞  तहारत नमाज़ के लिये इतनी ज़रूरी है कि बगैर इस के नमाज़ होगी ही नहीं।


■ ➞  अगर कोई जान बूझ कर नापाकी की हालत में नमाज़ पढ़ता है तो इसे उलमा ने कुफ्र तक लिखा है यानी वो काफ़िर हो जायेगा क्योंकि उसने नमाज़ को हल्का जाना और इबादत की तौहीन की।


■ ➞  हुज़ूर ﷺ ने तहारत को नमाज़ की कुंजी बताया है।(मुस्नद अहमद) और तहारत को आधा ईमान कहा गया है। (तिर्मज़ी)


■ ➞  अगर तहारत कामिल ना हो तो नमाज़ पढ़ाने वाले इमाम को भी परेशानी होती है मतलब नमाज़ के दौरान उसे शुब्हा होता है और फिर दो रकाअ़त के बाद बैठने के बजाये इमाम खड़ा हो जाता है या सलाम फेरने के बजाये खड़ा होने लगता है, इस की एक वजह ये भी है कि मुक़्तदियों की तहारत कामिल नहीं होती।


■ ➞  ये तो तहारत कामिल ना होने की बात थी तो सोचिये कि जो नापाक हों उसका हुक्म कितना सख्त होगा?


■ ➞  तहारत दो तरह की हैं और नापाकी भी दो तरह की, एक है तहारते सुगरा और एक है तहारते कुब्रा और नापाकी में एक को कहते हैं हदसे असगर और एक को हदसे अकबर यानी एक छोटी और एक बड़ी नापाकी।


■ ➞  छोटी नापाकी के लिये छोटी तहारत और बड़ी नापाकी के लिये बड़ी तहारत।


■ ➞  अगर कोई पेशाब करे या हवा निकाल जाये तो ये नहीं कहा जायेगा कि उसे गुस्ल करना होगा क्योंकि गुस्ल तहारते कुब्रा है और पेशाब और हवा का निकलना हदसे असगर है तो हदसे असगर से पाक होने के लिये वुज़ू किया जायेगा क्योंकि ये तहारते सुगरा है।


■ ➞  इसी तरह अगर किसी ने अपनी बीवी से सोहबत की तो ये नहीं होगा कि वुज़ू कर के पाक हो जाये क्योंकि यहाँ तहारते कुब्रा की ज़रूरत नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 10 ♻️


■ ➞  आसान लफ्ज़ों में ये समझिये कि पेशाब करने या हवा निकलने से भी इन्सान नापाक हो जाता है लेकिन ये नापाकी हदसे असगर होती है यानी छोटी वाली  नापाकी और इसके लिये वुज़ू काफ़ी है।


■ ➞  मनी निकलने पर भी इंसान नापाक हो जाता है लेकिन ये नापाकी हदसे अकबर होती है यानी बड़ी नापाकी और इस से पाक होने के लिये गुस्ल की ज़रूरत होती है।


■ ➞  अब आप आसानी से समझ सकते हैं कि पेशाब करने या हवा निकलने से गुस्ल फर्ज़ नहीं होता क्योंकि ये हदसे असगर है।


■ ➞  आपको वही एप्लाई करना है जिस की ज़रूरत है।


■ ➞  कुछ लोगों के जिस्म से कुत्ता सट गया तो नहाना शुरू कर देते हैं,


■ ➞  कीचड़ लग जाये तो समझते हैं कि नहाना होगा,


■ ➞  पेशाब के क़तरे निकल गये तो समझते हैं कि गुस्ल फर्ज़ हो गया,


■ ➞  सिर्फ़ मज़ी (मनी से पहले निकलने वाली चीज़) निकलने पर ये गुमान करते हैं कि गुस्ल फर्ज़ हो गया, हालाँकि ऐसा कुछ नहीं है।


■ ➞  गुस्ल कब फर्ज़ होता है और कब वुज़ू काफ़ी होता है ये हम तफ़सील से बयान करेंगे, आपको बस ये क़ाइदा याद रखना है कि छोटी नापाकी के लिये वुज़ू और बड़ी नापाकी के लिये गुस्ल।


■ ➞  अब छोटी नापाकी और बड़ी नापाकी कौन कौन सी हैं तो इसे हम आगे बयान करेंगे।


■ ➞  कुछ लोग ऐसी बातों को हदसे असगर समझते हैं, जिनका नापाकी से ताल्लुक़ ही नहीं मस्लन गाली देने से वुज़ू का टूट जाना, तम्बाखू खाने से वुज़ू का टूट जाना, जिस्म का छुपा हुआ हिस्सा दिख जाने से.....वग़ैरह।


■ ➞  ये सब हदस है ही नहीं तो इन से वुज़ू या गुस्ल पर फर्क़ पड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 11 ♻️


■ ➞  पहले बात करते हैं तहारते सुगरा (यानी वुज़ू) और हदसे असगर यानी वुज़ू के तोड़ने वाली चीज़ों के बारे में।


■ ➞  वुज़ू में 4 बातें फर्ज़ हैं यानी इन चारों का करना बहुत ज़रूरी है, अगर इन में से एक भी छूट जाये तो वुज़ू नहीं होगा।


❶ ➪ मुँह धोना।

❷ ➪ कोहनियों समेत दोनों हाथों का धोना।

❸ ➪ सर का मसहा करना।

❹ ➪ टखनों समेत दोनों पाऊँ को धोना।


■ ➞  इनकी तफ़सील जानने से पहले ये जान लीजिये कि धोना किसे कहते हैं?


■ ➞  किसी भी उज़्व (हिस्से, पार्ट) को धोने का ये मतलब है कि उस उज़्व के हर हिस्से पर कम से कम दो बूँद पानी बह जाये। अगर कोई हाथ भिगा कर चेहरे पर मल ले तो इसे धोना नहीं कहा जायेगा या कपड़ा भिगा कर मुँह पोछ ले तो भी धोना नहीं कहा जायेगा जब तक हर हिस्से पर कम से कम 2 बूँद पानी ना बह जाये तब तक वो उज़्व धुला हुआ क़रार नहीं दिया जायेगा।


■ ➞  भीग जाना, तेल की तरह पानी मल लेना या एक बूँद बह जान अलग है और धोना लेना अलग है।


■ ➞  इस पर खास तवज्जोह देना ज़रूरी है कि बाज़ हिस्से ऐसे हैं कि अगर तवज्जोह ना दी जाये तो वहाँ सहीह से पानी नहीं पहुँचता और गुस्ल और वुज़ू नहीं होता और फिर पढ़ी गई नमाज़ें अकारत जाती हैं।


■ ➞  अब इन चारों फराइज़ की तफ़सील ये है कि :


❶ ➪  मुँह धोना : मुँह कहते हैं शुरू पेशानी (यानी जहाँ से बाल निकलते हैं वहाँ) से नीचे ठोड़ी तक, फिर चौड़ाई में एक कान की लौ से दूसरे तक।


■ ➞  ये मुँह है यानी इसे धोना फर्ज़ है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 12 ♻️


■ ➞  मुँह धोना एक बार फर्ज़ है यानी जहाँ से बाल उगते हैं वहाँ से नीचे के दाँत उगने की जगह तक और एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक, ये मुँह की हद (Boundaries) हैं।


■ ➞  अब अगर कोई चंदला है यानी आधे सर के बाद बाल उगते हैं तो उस पर वहाँ तक धोना फर्ज़ नहीं बल्कि वहीं तक है जहाँ से आदतन (Normally) बाल उगते हैं और अगर किसी के ज़्यादा बाल उगते हैं यानी आदत से ज़्यादा हैं तो फिर जो ज़्यादा हैं उन की जड़ों तक धोना फर्ज़ है।


■ ➞  मूँछ, दाढ़ी और बिच्ची (जो बाल होंटों और ठोड़ी के बीच होते हैं) और भवें अगर घनी हो कि जिल्द (चमड़ा) नज़र ना आता हो तो चमड़े का धोना फर्ज़ नहीं बल्कि बालों को धोना फर्ज़ है और अगर बाल घने ना हों तो जिल्द का धोना भी फर्ज़ है।


■ ➞  अगर मूँछें घनी हों और बड़ी हों जो लबों (होंटों) को छुपा ले तो भी उन्हें हटा कर लबों को धोना फर्ज़ है।


■ ➞  दाढ़ी अगर घनी ना हो और जिल्द नज़र आती हो तो जिल्द का धोना फर्ज़ है और अगर दाढ़ी बड़ी और घनी है तो गले की तरफ नीचे दबाने के बाद जो बाल चेहरे के अंदर आते हैं उन का धोना फर्ज़ है यानी उन बालों को धोना है जिल्द को नहीं और जो चेहरे से बाहर नीचे हों उनका धोना ज़रूरी नहीं।


■ ➞  अगर कहीं छोटे बाल और कहीं बड़े हों तो जहाँ छोटे हैं वहाँ जिल्द का और जहाँ बड़े हैं वहाँ बालों का धोना फर्ज़ है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 13 ♻️


■ ➞  लबों (यानी होंटों) का वो हिस्सा जो आदतन (Normally) मुँह बन्द करने, चुप रहने पर दिखाई देता है उसे धोना फर्ज़ है, अगर किसी ने ज़्यादा बन्द कर लिया और उस पर पानी नहीं पहुँचा तो वुज़ू नहीं होगा (हाँ ये हो सकता है कि चेहरा धोते वक़्त ज़ोर से बन्द कर लिया हो जिसकी वजह से पानी नहीं पहुँचा लेकिन कुल्ली करते वक़्त पानी पहुँचा तो वुज़ू हो जायेगा) फिर भी एहतियात ज़रूरी है।


■ ➞  रुख्सार और कान के बीच की जगह जिसे कनपटी कहते हैं, इसे भी धोना फर्ज़ है।


■ ➞  औरतें ख्याल रखें कि नथ का सुराख अगर बन्द नहीं है तो उस में पानी बहाना फर्ज़ है और अगर तंग है तो पानी बहा कर नथ को हरकत दे (यानी हिलाये) वरना ज़रूरी नहीं।


■ ➞  आँख के अंदर पानी डाल कर धोना ज़रूरी नहीं है बल्कि नहीं धोना चाहिये कि इस से नुक़सान है और वुज़ू करते वक़्त बहुत ज़ोर से आँखों को मींच लेना भी नहीं चाहिये क्योंकि इस से मुम्किन है चेहरे का चमड़ा सिमट कर एक हिस्सा बना ले जिस पर पानी ना पहुँचे।


■ ➞  पलक का हर बाल धोना फर्ज़ है अगर इस में कोई सख्त चीज़ जमी हो तो उसे छुड़ाना ज़रूरी है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 14 ♻️


■ ➞  अब आते हैं वुज़ू के दूसरे फर्ज़ की तरफ़ यानी हाथ धोना।


■ ➞  हाथ में कोहनियाँ भी दाखिल हैं अगर कोहनियों से ले कर नाखून तक एक ज़र्रा भी कहीं धुलने से बाक़ी रह जाये तो  वुज़ू नहीं होगा, लिहाज़ा एहतिय्यात ज़रूरी हैं।


■ ➞  हाथ में गहने, छल्ले, कड़ा, कंगन, अँगूठी, चूड़ी वग़ैरह हों तो अगर इनके नीचे पानी नहीं जाता तो इसे उतार कर पानी बहाना फर्ज़ है वरना वुज़ू नहीं होगा और अगर हल्का ढीला है कि हिलाने से पानी चला जाता है तो हिलाना ज़रूरी है और अगर ज़्यादा ढीला है कि बगैर हिलाये पानी चला जाता है तो हिलाना भी ज़रूरी नहीं।


■ ➞  उंगलियों की घैया, करवटें और नाखूनों के अंदर के ऊपर वाला हिस्सा फिर कलाई के बाल और हर गोशे को धोना ज़रूरी है।


■ ➞  अगर किसी की पाँच से ज़्यादा उंगलियाँ हैं तो सबका धोना फर्ज़ है।


■ ➞  अगर एक काँधे से दो हाथ निकले हुये हों तो जो पूरा हो सिर्फ़ उसे धोना फ़र्ज़ है। और अगर उस दूसरे हाथ का वो हिस्सा भी इस में शामिल है जिसे वुज़ू में धोना फर्ज़ है तो उसे भी धोना फर्ज़ है और अलग है तो फर्ज़ नहीं बल्कि मुस्तहब है यानी बेहतर है।


■ ➞  इसके बाद अगला फर्ज़ है सर का मसहा करना।


■ ➞  पूरे सर का मसहा करना सुन्नते मुअ़क्किदा है और एक चौथाई (One Fourth, 1/4) यानी 25% सर का मसहा करना फर्ज़ है। आप के सर के चार हिस्से करने पर जो एक हिस्सा आता है उतना धोना फर्ज़ है वरना वुज़ू नहीं होगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 15 ♻️


■ ➞  सर का मसहा करने के लिये हाथों का तर होना ज़रूरी है अब वो तरी हाथ धोने से हो या अलग से तर किया जाये।


■ ➞  अगर हाथ की तरी से एक बार किसी हिस्से का मसहा कर लिया जाये तो फिर उस पर जो नमी बाक़ी रहती है वो दूसरे मसहा के लिये काफ़ी नहीं है लिहाज़ा अगर कोई हाथ की तरी से हाथ का मसहा कर लेता है तो सर के मसहा के लिये हाथ अलग से तर करना होगा।


■ ➞  हाथों को तर करने के लिये जो कुछ लोग तीन तीन बार दोनों चुल्लू में पानी ले कर कोहनियों की तरफ़ बहाते हैं, ये वुज़ू का हिस्सा नहीं है।


■ ➞  हाथ तर करना है तो बस धो लिया जाये, इस तरह करना मज़्कूर नहीं।


■ ➞  अगर सर पर बाल ना हो तो जिल्द की चौथाई का मसहा करना है और अगर बाल हैं तो बालों का और उन बालों का जो सर पर हैं, जो लटक रहे हैं उन पर करना काफ़ी नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 16 ♻️


■ ➞  इमामा, टोपी या दुपट्टे के ऊपर मसहा करना काफ़ी नहीं है।


■ ➞  अगर दुपट्टा या टोपी का कपड़ा ऐसा है कि पानी फूट कर अन्दर चला जाता है और सर को तर कर देता है तो मसहा हो जायेगा।


■ ➞  अब वुज़ू का चौथा फर्ज़ है पाऊँ का धोना:


■ ➞  पैरों को टखनों समेत अच्छी तरह धोना चाहिये ताकि कोई हिस्सा बाक़ी ना रहे अगर पैर में कोई छल्ला वग़ैरह हो तो वही हुक्म है जो पहले बयान किया गया यानी पानी अंदर नहीं जाता तो उतार कर धोना है, अगर हिलाने से जाता है तो हरकत देना है और अगर ढीला है कि बगैर हरकत के चला जाता है तो हरकत ज़रूरी नहीं।


■ ➞  कुछ लोग पैर में काला धागा बांधते हैं जिसकी वजह या तो बीमारी होती है या फिर चोट से बचने के लिये तो अगर कसकर बंधा हुआ है तो उस पर भी तवज्जोह ज़रूरी है।


■ ➞  उंगलियों की करवटें, घैय्या, एड़ी, पुश्त वग़ैरह सब को धोना फर्ज़ है लिहाज़ा एहतिय्यात ही ज़रूरी है वरना एक ज़र्रा बराबर भी सूखा रह जाने पर वुज़ू नहीं होगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 17 ♻️


■ ➞  जिन हिस्सों पर पानी बहाना फर्ज़ है वहाँ ज़रूरी नहीं कि क़स्दन ही बहे बल्कि बिला क़स्द बह जाने से भी वुज़ू हो जायेगा। 


■ ➞  इसे आसान लफ्ज़ों में यूँ समझें कि जान बूझ कर ही पानी बहाने से नहीं बल्कि अनजाने में भी पानी बह गया तो वुज़ू हो जायेगा।


■ ➞  मिसाल के तौर पर बारिश हुई और वुज़ू में धोये जाने वाले हिस्सों पर दो-दो बूँद पानी बह गया और एक चौथाई सर तर भीग गया तो वुज़ू हो गया अगरचे उसने वुज़ू करने की निय्यत नहीं की थी।


■ ➞  अगर कोई तालाब में गिर गया और वो हिस्से भीग गये जो वुज़ू में धोना फर्ज़ हैं तो भी वुज़ू हो जायेगा।


■ ➞  इसी तरह अगर कोई शख्स मुँह हाथ धोने के लिये गया ताकि फ्रेश हो सके और वुज़ू के हिस्सों को धो लिया अगरचे आगे पीछे ही हो और सर पर हाथ भिगा कर फेर लिया तो भी वुज़ू हो जायेगा।


■ ➞  ऐसा इसीलिये है कि पानी ताहिर है यानी पानी की सिफत (Quality) है कि वो पाक करता है तो अब जान बूझ कर हो या अन्जाने में पानी पाक कर देता है जैसे आग की सिफत है जलाना तो जान बूझ कर आग में हाथ डालिये या अंजाने में हाथ तो जलना ही है।


■ ➞  ऐसा तो नहीं है कि आप ये कहेंगे कि मै निय्यत करता हूँ हाथ जलने की और फिर हाथ डालें तो ही हाथ जले।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 18 ♻️


■ ➞  आटा गूँदने वाले या वाली के हाथ में या कहीं नाखून में आटा जम जाये और सख्त हो जाये या पेंट का काम करने वालों के हाथों में रंग या पुट्टी या पेरिस या कोई और चीज़ जम जाये और सख्त हो जाये या लिखने वालों के हाथों में रौशनाई (इंक) लग जाये या मज़दूर के हाथ में गार, सीमेन्ट या वाइट सीमेन्ट वग़ैरह या आम लोगों की आँखों में सुरमा का जम जाना और इसी तरह बदन का मैल वग़ैरह होने के बावजूद अगर्चे उसके नीचे पानी ना जाये फिर भी वुज़ू हो जायेगा।


■ ➞  इसे फिर से समझें कि जिस चीज़ की आदमी को उमूमन या खुसूसन ज़रूरत पड़ती रहती है और उसकी निगेहदास्त और अह्तियात में हरज हो तो नाखूनों के अंदर, ऊपर या किसी धोने के हिस्से पर लगे रह जाने से वुज़ू हो जायेगा अगर्चे उसके नीचे पानी ना बहे।


■ ➞  ये इसीलिये है कि अगर ऐसा ना हो तो वुज़ू करने में बड़ी दुशवारी होगी।


■ ➞  एक पेन्ट का काम करने वाला अगर अपने हाथों से मुकम्मल तौर पर कलर, पुट्टी, पेरिस वग़ैरह छुड़ाना शुरू करे तो रगड़-रगड़ कर नमाज़ का वक़्त चला जायेगा!


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 19 ♻️


■ ➞  किसी जगह छाला था और वो सूख गया लेकिन चमड़ा जिस्म से जुदा नहीं हुआ तो उसे जुदा कर के पानी बहाना ज़रूरी नहीं है बल्कि उसी के ऊपर पानी बहा लेना काफ़ी है और फिर जुदा कर दिया तो उस पर पानी बहाना ज़रूरी नहीं।


■ ➞  मछली का सिन्ना अगर चिपका रह जाये तो वुज़ू नहीं होगा क्योंकि पानी उसके नीचे नहीं बहता।


■ ➞  अब हम वुज़ू की सुन्नतें बयान करेंगे। 


■ ➞  ये सुन्नत है यानी करना चाहिये और इन्हें छोड़ना सहीह नहीं लेकिन अगर छूट जाये तो भी वुज़ू हो जायेगा।


■ ➞  वुज़ू में सुन्नतें :


❶ ➪  सवाब की निय्यत से और हुक़्मे इलाही बजा लाने की निय्यत से वुज़ू करना ज़रूरी है वरना वुज़ू तो हो जायेगा पर सवाब नहीं मिलेगा लिहाज़ा पहले निय्यत कर लेंं कि मै वुज़ू सवाब के लिये कर रहा हूँ और अल्लाह त'आला के हुक़्म की तामील कर रहा हूँ!


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 20 ♻️


❷ ➪  बिस्मिल्लाह से वुज़ू को शुरू किया जाये और अगर वुज़ू से पहले इस्तिन्जा करे तो इस्तिन्जे से पहले भी बिस्मिल्लाह पढ़े लेकिन अगर बैतुल खला में दाखिल हो चुका है या कपड़े खोल चुका है तो फिर ज़िक्रे इलाही मना है।


❸ ➪  वुज़ू को शुरू यूँ करे पहले हाथों को गट्टों तक तीन बार धोयें।


❹ ➪  अगर पानी किसी बड़े बर्तन में हो और कोई छोटा बर्तन ना हो जिस से पानी निकल सके तो बायें हाथ की उंगलियाँ मिला कर सिर्फ़ उंगलियाँ पानी में डाल कर पानी निकाले और दायें हाथ को गट्टों तक तीन मर्तबा धो ले फिर जहाँ तक दायें हाथ को धोया है वो पानी में डाल सकता है, अब पानी निकाल कर बायें हाथ को धोये।


■ ➞  ऐसा तब किया जा सकता है जब हाथ में कोई नजासत ना लगी हो, अगर नजासत लगी हो तो पूरा पानी नापाक हो जायेगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 21 ♻️


❺ ➪  अगर पानी बड़े बर्तन में है और छोटा बर्तन मौजूद है फिर भी हाथ पानी में डाला या उंगली या नाखून भी डाला तो पानी वुज़ू के क़ाबिल नहीं रहेगा वो माये मुस्तमिल हो जायेगा यानी उसे आप इस्तिमाल कर चुके हैं।


■ ➞  हम बता चुके हैं कि नापाकी दो तरह की होती है एक छोटी और एक बड़ी तो दोनों से पाक होने के लिये अलग अलग तहारत है, दोनों तहारत में पानी की ज़रूरत होती है और एक बार पानी से नापाकी दूर कर ली जाये तो वो पानी फिर इस्तिमाल के क़ाबिल नहीं रहता।


■ ➞  जो बे-वुज़ू हो और हाथ धुला हुआ ना हो तो वो अपना हाथ पानी में डालेगा तो ये पानी को मुस्तमिल कर देगा क्योंकि हदसे असगर (छोटी नापाकी) मौजूद हैं और जब छोटा बर्तन ना हो तो मजबूरी में डालने की इजाज़त दी गई है।


■ ➞  ठंड में जो लोग लोटे में पानी ले कर उस में उंगली डुबा कर देखते हैं कि पानी कितना गर्म है तो इस से पानी मुस्तमिल हो जाता है और वुज़ू के क़ाबिल नहीं रहता लिहाज़ा इस में एहतियात ज़रूरी है वैसे नल वग़ैरह लग जाने से ये सूरत पेश नहीं आती।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 22 ♻️


❻ ➪  अगर किसी शख्स पर हदस है यानी वुज़ू या गुस्ल उस पर लाज़िम है और उसने हाथ धो कर पानी में हाथ डाला तो पानी मुस्तमिल नहीं होगा क्योंकि जितना हिस्सा धोया गया उस पर अब हदस ना रहा और जिस पर गुस्ल फर्ज़ नहीं सिर्फ़ बे-वुज़ू है तो अगर उसने कोहनियों तक हाथ धोये हैं तो पानी में बगल तक हाथ डाल सकता है क्योंकि अब उसके पूरे बाज़ू पर हदस बाक़ी ना रहा लेकिन जिस पर गुस्ल फर्ज़ है वो उतना ही हाथ डाले जितना धोया है क्योंकि उस के पूरे जिस्म पर हदस है।


❼ ➪ सो कर उठने के बाद हाथ धोने चाहिये। इस्तिन्जे से पहले भी और बाद में भी।


❽ ➪  कम से कम तीन तीन मर्तबा ऊपर नीचे, दायें बायें दाँतों पर मिस्वाक करें और हर बार मिस्वाक को धो ले। 


■ ➞  मिस्वाक ना बहुत सख्त हो ना बहुत नर्म मिस्वाक पीलू, ज़ैतून या नीम की कड़वी लकड़ी की होनी चाहिये।


■ ➞  किसी मेवे या खुशबूदार दरख्त की ना हो, मिस्वाक का साइज़ एक बालिश्त होना चाहिये, उससे ज़्यादा रखना सहीह नहीं है और मोटाई इतनी होनी चाहिये जितनी मोटी सब से छोटी वाली उंगली होती है।


■ ➞  जब मिस्वाक इस्तिमाल के क़ाबिल ना रहे तो उसे दफ़न कर देना चाहिये या किसी ऐसी जगह रख देना चाहिये जहाँ उसकी तौहीन ना हो क्योंकि वो एक ऐसा आला है जिस से सुन्नत अदा की जाती है और नापाक जगह पर ना फेंकें क्योंकि पाक चीज़ को नापाक में मिलाना सहीह नहीं है, इसलिये इस्तिन्जे खाने में भी थूकने से मना किया गया है क्योंकि वहाँ नजासत है और थूक पाक है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 23 ♻️


❾ ➪  मिस्वाक दाहिने हाथ से करना चाहिये मिस्वाक इस तरह पकड़े कि सब से छोटी वाली उंगली मिस्वाक के नीचे और बीच की तीन उंगलियाँ मिस्वाक के ऊपर और अँगूठा सिरे पर नीचे हो और मुट्ठी ना बांधे।


❶⓿ ➪ दाँतों की चौड़ाई में मिस्वाक करना चाहिये लम्बाई में नहीं और चित लेट कर मिस्वाक नहीं करना चाहिये।


❶❶ ➪  पहले दाहिनी जानिब ऊपर के दाँत मान्झें फिर बायीं तरफ़ ऊपर के फिर दायीं तरफ़ नीचे और फ़िर बायीं तरफ़ नीचे के।


❶❷ ➪  मिस्वाक करने से पहले उसे धो लेना चाहिये और मिस्वाक करने के बाद भी धो कर रखना चाहिये।


■ ➞  जहाँ भी रखें तो खड़ी कर के रखें और रेशे वाला हिस्सा यानी जिस तरफ़ से मिस्वाक करते हैं उसे ऊपर रखना चाहिये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 24 ♻️


❶❸ ➪  अगर मिस्वाक ना हो तो उंगलियाँ या कोई ऐसा कपड़ा जो इस्तिमाल का नहीं है उसे दाँतों पर रगड़ लें और अगर दाँत नहीं हैं तो मसूड़ों पर कपड़ा या उंगली रगड़ लें।


❶❹ ➪  नमाज़ के लिये मिस्वाक सुन्नत नहीं है बल्कि वुज़ू के लिये है लिहाज़ा अगर कोई एक वुज़ू से चंद नमाज़ें पढ़ता है तो एक मिस्वाक काफ़ी है जो उसने वुज़ू बनाते वक़्त किया था। हर नमाज़ के लिये वुज़ू का मुतालिबा नहीं है।


❶❺ ➪  अगर मुँह में बदबू पैदा हो जाये तो उसे दूर करने के लिये मिस्वाक करना अलग सुन्नत है।


❶❻ ➪  फिर तीन चुल्लू पानी से तीन मर्तबा कुल्ली करे और हर पुर्जे को धोये और रोज़ेदार ना हो तो गरगरा भी करे।


❶❼ ➪  फिर तीन चुल्लू से तीन मर्तबा नाक में नर्म गोश्त तक पानी चढ़ाये और अगर रोज़ेदार ना हो तो जड़ तक पानी पहुँचाये और ये काम दाहिने हाथ से करे फ़िर बायें हाथ से नाक साफ करे।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 25 ♻️


❶❽ ➪  मुँह धोते वक़्त दाढ़ी का खिलाल किया जाये यानी गर्दन की तरफ से उंगलियाँ दाखिल की जायें और सामने की तरफ़ से निकाली जायें, अगर एहराम बांधे हुये हों तो ऐसा ना करें।


❶❾ ➪  हाथ पाऊँ की उंगलियों का खिलाल करें। पैर की उंगलियों का खिलाल हाथ की छोटी वाली उंगली से करें।


■ ➞   उंगलियों का खिलाल इस तरह करें कि बायें पैर की छोटी वाली उंगली से अँगूठे की तरफ़ आयें और दायें पैर में अँगूठे से छोटी वाली उंगली की तरफ़ जायें।


❷⓿ ➪  जो हिस्से धोने के हैं उन्हें तीन मर्तबा धोयें और हर मर्तबा इस तरह धोयें कि कोई हिस्सा बाक़ी ना रहे वरना सुन्नत अदा ना होगी।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 26 ♻️


■ ➞   अगर कोई हिस्सा इस तरह धोया कि पहली मर्तबा में कुछ धुला फिर दूसरी बार में कुछ और फिर तीसरी बार में कुछ मुकम्मल हुआ तो ये एक ही बार धोना कहा जायेगा और वुज़ू हो जायेगा लेकिन सुन्नत अदा ना होगी।


■ ➞   मस्लन आपने चेहरा धोया और कोई हिस्सा बाक़ी रह गया फ़िर दूसरी बार और तीसरी बार धोने पर वो हिस्सा धुला तो ये एक बार चेहरा धोना ही गिना जायेगा।


■ ➞   तीन बार धोने का मतलब है कि हर बार मुकम्मल चेहरा धुल जाये वरना सुन्नत अदा ना होगी।


■ ➞   इस में चुल्लू की कोई गिनती नहीं है चाहे कितने ही चुल्लू पानी लेने पड़ें।


■ ➞   पूरे सर का एक बार मसह करना सुन्नत है और कानों का मसह करना भी।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 27 ♻️


■ ➞   तरतीब भी सुन्नत है यानी पहले चेहरा धोना फिर हाथ धोना फिर मसह करना फिर पैर धोना और अगर इसके खिलाफ़ हुआ तो सुन्नत के खिलाफ़ होगा। 


■ ➞   मस्लन अगर कोई पहले पैर धोये फिर हाथ फिर मुँह और फिर सर का मसह करे तो भी वुज़ू हो जायेगा लेकिन ये खिलाफे सुन्नत है।


■ ➞   वुज़ू में जो सुन्नतें हैं उन को एक आध बार छोड़ दिया तो बुरा है और अगर आदत डाली तो गुनाह है।


■ ➞   दाढ़ी के जो बाल चेहरे के दाइरे से नीचे हैं इन का मसह सुन्नत है और धोना मुस्तहब है।


■ ➞   वुज़ू में ये भी सुन्नत है कि एक हिस्से के सूखने से पहले दूसरा हिस्सा धोया जाये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 28 ♻️


■ ➞  अब हम वुज़ू के मुस्तहब्बात बयान करेंगे यानी इन का करना बेहतर है लेकिन छोड़ने पर कोई गुनाह नहीं है।


■ ➞  वुज़ू में ये बातें मुस्तहब हैं :


❶ ➪ दाहिनी जानिब से इब्तिदा करना यानी पहले दाँया हाथ और पैर धोना।


❷ ➪ रुख्सार को एक साथ धोना।


❸ ➪ दोनों कानों का मसह एक साथ करना।


❹ ➪ अगर एक हाथ हो तो मुँह धोने और,


❺ ➪ मसह करने में दाहिने से करें।


❻ ➪ उंगलियों की पुश्त से।


❼ ➪ गर्दन का मसह करना।


❽ ➪ वुज़ू करते वक़्त काबा रुख बैठना।


❾ ➪ ऊँची जगह वुज़ू करना।


❶⓿ ➪ बैठ कर वुज़ू करना।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 29 ♻️


❶❶ ➪  वुज़ू का पानी पाक जगह गिराना मुस्तहब है।


❶❷ ➪  जिस्म के आज़ा (पार्ट्स) पर पानी बहाते वक़्त हाथ फेरना खास कर जाड़े के मौसम में।


❶❸ ➪  पहले तेल की तरह पानी मल लेना, खुसूसन जाड़े में।


❶❹ ➪  वुज़ू का पानी अपने हाथ से भरना।


❶❺ ➪  दूसरे वक़्त के लिये पानी भर कर छोड़ना।


❶❻ ➪  वुज़ू करने में बगैर ज़रूरत दूसरे से मदद ना लेना।


❶❼ ➪  अंगूठी को हरकत देना अगर ढीली हो और उस के नीचे पानी बह जाना मालूम हो और अगर तंग (Tight) हो कि पानी नहीं जाता तो फर्ज़ होगा।


❶❽ ➪ अगर उज़्र ना हो तो वक़्त से पहले वुज़ू कर लेना।


❶❾ ➪  वुज़ू इत्मिनान से करना चाहिये, जल्दी करना सहीह नहीं है।


❷⓿ ➪  टपकने वाले क़तरों से कपड़े को बचाना।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 30 ♻️


❷❶ ➪  कानों का मसह करते वक़्त छोटी वाली उंगली (भीगी हुई) कान के सुराख में डालना मुस्तहब है।


❷❷ ➪  जो वुज़ू कामिल तौर पर करता हो उसे खास जगहों मस्लन टखनों, एड़ियों, घइयों और करवटों का ख्याल रखना मुस्तहब है और बे-ख्याली करने वालों पर फर्ज़ है।


❷❸ ➪  वुज़ू का बर्तन मिट्टी का हो।


❷❹ ➪  अगर तांबे वग़ैरह का बर्तन हो तो भी हर्ज नहीं पर क़लाई किया हुआ हो।


❷❺ ➪  अगर बर्तन लोटे की क़िस्म का है तो उसे बायें जानिब रखें।


❷❻ ➪  अगर बर्तन तश्त (प्लेट) की क़िस्म का है तो दायीं तरफ़ रखें।


❷❼ ➪  आफ्तबा (एक क़िस्म का लोटा) में दस्ता लगा हो तो दस्ते को तीन बार धो लें।

 

❷❽ ➪  ऐसे लोटे के दस्ते पर हाथ रखें, मुंह पर हाथ ना रखें।


❷❾ ➪  दाहिने हाथ से कुल्ली करना और नाक में पानी डालना।


❸⓿ ➪  बायें हाथ से नाक साफ़ करना।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 31 ♻️


■ ➞  वुज़ू में ये बातें मुस्तहब हैं :


❸❶ ➪  बायें हाथ की छोटी वाली उंगली नाक के सुराख में डालना मुस्तहब है।


❸❷➪  पाऊं को बायें हाथ से धोना।


❸❸➪  मुंह धोते वक़्त माथे के सिरे पर ऐसा फैला कर पानी बहाना कि ऊपर बालों का कुछ हिस्सा भी धुल जाये।


❸❹ ➪   दोनों हाथों से मुंह धोना।


❸❺ ➪  हाथ पाऊं धोने में उंगलियों से शुरू करना।


❸❻  ➪  चेहरे के दायरे से थोड़ा बढ़ा कर पानी बहाना।


❸❼ ➪  हाथ पाऊं धोते वक़्त भी थोड़ा बढ़ा कर ऊपर तक धोना।


❸❽ ➪  सर के मसह का मुस्तहब तरीक़ा ये है कि अंगूठे और कलिमे की उंगली के इलावा बाक़ी दोनों हाथों की तीन-तीन उंगलियों को मिला कर माथे के सिरे पर रखें और पीछे सर की गुद्दी तक ले जायें, इस में हथेलियों को सर से जुदा रखें।


❸❾ ➪  फिर कलिमे की उंगली के पेट से कान के अंदरूनी हिस्से का मसह करें।


❹⓿ ➪  फिर अंगूठे के पेट से कान के पीछे मसह करें और उंगलियों की पुश्त से गर्दन का मसह करें।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 32 ♻️


■ ➞  वुज़ू में ये बातें मुस्तहब हैं :


❹❶ ➪  हर हिस्सा धो कर उस पर हाथ फेर देना चाहिये कि पानी के क़तरे ना टपकें और खास कर मस्जिद में जाते वक़्त क्योंकि मस्जिद में वुज़ू के क़तरे टपकाना मकरूहे तहरीमी है।


❹❷ ➪  बहुत भारी बर्तन से वुज़ू ना करें कि पानी ज़्यादा बहेगा और इसी तरह अगर कोई नल बहुत सख्त है तो उस से भी बचें खास कस कमज़ोर लोग वरना बन्द करने और खोलने में काफ़ी पानी बहेगा।


❹❸ ➪  ज़ुबान से कह लिया जाये कि वुज़ू करता हूं।


❹❹ ➪  हर हिस्से के धोते वक़्त निय्यत का हाज़िर रहना।


❹❺ ➪  बिस्मिल्लाह कहना।


❹❻ ➪  दुरूद पढ़ना।


❹❼ ➪  ये पढ़ना 


 اَشْھَدُ اَنْ لاَّ اِلٰہَ اِلاَّ اللہُ وَحْدَہُ لَا شَرِیْکَ لَہٗ وَاَشْھَدُ اَنَّ سَیِّدَنَا مُحَمَّدًا عَبْدُہٗ وَرَسُوْلُہٗ


❹❽ ➪  कुल्ली करते वक़्त ये पढ़ना :


 اَللّٰھُمَّ اَعِنِّیْ عَلٰی تِلَاوۃِ الْقُرْاٰنِ وَذِکْرِکَ وَشُکْرِکَ وَحُسْنِ عِبَادَتِکَ


❹❾ ➪  नाक में पानी डालते वक़्त ये पढ़ना 


اَللّٰھُمَّ اَرِحْنِیْ رَائِحَۃَ الْجَنَّۃِ وَلَا تُرِحْنِیْ رَائِحَۃَ النَّارِ


❺⓿ ➪  मुंह धोते वक़्त ये पढ़ना :


اَللّٰھُمَّ بَیِّضْ وَجْھِیْ یَوْمَ تَبْیَضُّ وُجُوْہٌ وَ تَسْوَدُّ وُجُوْہٌ


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 32 ♻️


■ ➞  वुज़ू में ये बातें मुस्तहब हैं :


❹❶ ➪  हर हिस्सा धो कर उस पर हाथ फेर देना चाहिये कि पानी के क़तरे ना टपकें और खास कर मस्जिद में जाते वक़्त क्योंकि मस्जिद में वुज़ू के क़तरे टपकाना मकरूहे तहरीमी है।


❹❷ ➪  बहुत भारी बर्तन से वुज़ू ना करें कि पानी ज़्यादा बहेगा और इसी तरह अगर कोई नल बहुत सख्त है तो उस से भी बचें खास कस कमज़ोर लोग वरना बन्द करने और खोलने में काफ़ी पानी बहेगा।


❹❸ ➪  ज़ुबान से कह लिया जाये कि वुज़ू करता हूं।


❹❹ ➪  हर हिस्से के धोते वक़्त निय्यत का हाज़िर रहना।


❹❺ ➪  बिस्मिल्लाह कहना।


❹❻ ➪  दुरूद पढ़ना।


❹❼ ➪  ये पढ़ना 


 اَشْھَدُ اَنْ لاَّ اِلٰہَ اِلاَّ اللہُ وَحْدَہُ لَا شَرِیْکَ لَہٗ وَاَشْھَدُ اَنَّ سَیِّدَنَا مُحَمَّدًا عَبْدُہٗ وَرَسُوْلُہٗ


❹❽ ➪  कुल्ली करते वक़्त ये पढ़ना :


 اَللّٰھُمَّ اَعِنِّیْ عَلٰی تِلَاوۃِ الْقُرْاٰنِ وَذِکْرِکَ وَشُکْرِکَ وَحُسْنِ عِبَادَتِکَ


❹❾ ➪  नाक में पानी डालते वक़्त ये पढ़ना 


اَللّٰھُمَّ اَرِحْنِیْ رَائِحَۃَ الْجَنَّۃِ وَلَا تُرِحْنِیْ رَائِحَۃَ النَّارِ


❺⓿ ➪  मुंह धोते वक़्त ये पढ़ना :


اَللّٰھُمَّ بَیِّضْ وَجْھِیْ یَوْمَ تَبْیَضُّ وُجُوْہٌ وَ تَسْوَدُّ وُجُوْہٌ


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 33 ♻️


■ ➞  वुज़ू में ये बातें मुस्तहब हैं :


❺❶ ➪  दाहिना हाथ धोते वक़्त ये पढ़ना मुस्तहब है 


اَللّٰھُمَّ اَعْطِنِيْ کِتَابِیْ بِیَمِیْنِیْ وَحَاسِبْنِیْ حِسَابًا یَّسِیْراً


❺❷ ➪  बायां हाथ धोते वक़्त ये पढ़ना 


اَللّٰھُمََّ لَا تُعْطِنِیْ کِتَابِیْ بِشِمَالِیْ وَلَا مِنْ وَّرَآءِ ظَھْرِیْ


❺❸ ➪  सर का मसह करते वक़्त ये पढ़ना 


اَللّٰھُمَّ اَظِلَّنِیْ تَحْتَ عَرْشِکَ یَوْمَ لَا ظِلَّ الِاَّ ظِلَّ عَرْشِکَ


❺❹  ➪  कानों का मसह करते वक़्त ये पढ़ना 


اَللّٰھُمَّ اجْعَلْنِیْ مِنَ الَّذِیْنَ یَسْتَمِعُوْنَ الْقَوْلَ فَیَتَّبِعُوْنَ اَحْسَنَہٗ


❺❺ ➪  गर्दन का मसह करते वक़्त ये पढ़ना  


اَللّٰھُمَّ اَعْتِقْ رَقَبَتِیْ مِنَ النَّارِ


❺❻ ➪  दाहिना पाऊं धोते वक़्त ये पढ़ना  


اَللّٰھُمَّ ثَبِّتْ قَدَمِیْ عَلَی الصِّرَاطِ یَوْمَ تَزِلُّ الْاَقْدَامُ 


❺❼  ➪  बायां पाऊं धोते वक़्त ये पढ़ना   


اجْعَلْ ذَنْبِیْ مَغْفُوْرًا وَسَعْیِیْ مَشْکُورًا وَ تِجَارَتِیْ لَنْ تَبُوْرَ


❺❽ ➪  या सब जगह दुरूद शरीफ़ ही पढ़ें और यही अफज़ल है।


❺❾ ➪  वुज़ू से फारिग होकर ये पढ़ें 


اَللّٰھُمََّ اجْعَلْنِیْ مِنَ التَّوَّابِیْنَ وَاجْعَلْنِیْ مِنَ الْمُتَطَھِّرِیْنَ


❻⓿ ➪  वुज़ू से बचा हुआ पानी खड़ा हो कर थोड़ा पी ले कि बीमारियों से शिफ़ा मिलती है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 34 ♻️


■ ➞  वुज़ू में ये बातें मुस्तहब हैं :


❻❶ ➪  आसमान की तरफ मुंह करके ये पढ़ें 


سُبْحَانَکَ اللّٰھُمَّ وَبِحَمْدِکَ اَشْھَدُ اَنْ لَّا اِلٰہَ اِلَّا اَنْتَ اَسْتَغْفِرُکَ وَ اَتُوْبُ اِلَیْکَ


■ ➞ और कलिमा -ए- शहादत और सूरह इन्ना अन्ज़लना पढ़ें।


❻❷ ➪  वुज़ू के आज़ा बगैर ज़रूरत के ना पोछें और अगर पोछें तो पूरा खुश्क ना कर दें बल्कि


❻❸ ➪  थोड़ी नर्मी बाक़ी रहने दें कि ये क़ियामत के दिन नेकियों में शुमार होगी।


❻❹ ➪  वुज़ू के बाद हाथ को ना झटकें कि ये शैतान का पंखा है।


❻❺  ➪  वुज़ू के बाद मियानी (पजामे की रुमाली) पर पानी छिड़क लें।


❻❻ ➪  अगर वुज़ू करने के बाद मकरूह वक़्त ना हो तो दो रकाअत नफ्ल पढ़ लें इसे तहयतुल वुज़ू कहते हैं।


■ ➞  सर का मसह करने का एक तरीक़ा तो हमने बयान किया कि अंगूठे और कलिमे की उंगली को छोड़ कर बाक़ी तीन उंगलियों को मिला लें और पेशानी के सिरे से पीछे सर की गुद्दी तक ले जायें फिर हथेली को सटा कर वापस ले आयें, एक तरीक़ा ये भी है कि हथेली और उंगलियों समेत सटा कर एक ही बार पीछे ले जायें, ये तरीक़ा औरतों के लिये आसान है कि बाल बड़े होने की वजह से पहले तरीक़े में परेशानी हो सकती है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 35 ♻️


■ ➞  वुज़ू में कुछ बातें मकरूह हैं जिनसे बचना चाहिये, वो ये हैं :


❶ ➪  औरत के गुस्ल या वुज़ू से जो पानी बच जाता है उस से वुज़ू करना मकरूह है।


❷ ➪  वुज़ू के लिये नजिस जगह बैठना।


❸ ➪  नजिस जगह वुज़ू का पानी गिराना।


❹ ➪  मस्जिद के अन्दर वुज़ू करना (मगर जो जगह वुज़ू के लिये बनी हुई है वहां हरज नहीं)


❺ ➪  आज़ा -ए- वुज़ू से क़तरे लोटे वग़ैरह में टपकाना।


❻ ➪  पानी में रींठ या खंखार डालना (ये हौज़ के बारे मे है)


❼ ➪  क़िब्ला की तरफ़ थूकना या खंखार डालना या कुल्ली करना।


❽ ➪  बे-ज़रूरत दुनिया की बातें करना।


❾ ➪  ज़्यादा पानी खर्च करना।


 ❶⓿ ➪  इतना कम खर्च करना कि सुन्नत अदा ना हो।.


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 36 ♻️


■ ➞  वुज़ू में कुछ बातें मकरूह हैं जिनसे बचना चाहिये, वो ये हैं :


❶❶ ➪  मुंह पर पानी मारना मकरूह है।


❶❷ ➪  मुंह पर पानी बहाते वक़्त फूंकना मकरूह है।


❶❸ ➪  एक हाथ से मुंह धोना मकरूह है, ये हिन्दुओं का तरीक़ा है।


❶❹ ➪  गले का मसह करना मकरूह है।


❶❺ ➪  बायें हाथ से कुल्ली करना या नाक में पानी डालना।


❶❻ ➪ दाहिने हाथ से नाक साफ करना।


❶❼  ➪  अपने लिये कोई लोटा या नल खास कर लेना।


❶❽ ➪  तीन नये पानियों से तीन बार सर का मसह करना।


❶❾ ➪ जिस कपड़े से इस्तिन्जा का पानी सुखाया हो उस से वुज़ू के आज़ा को पोछ्ना।


❷⓿ ➪  धूप के गर्म पानी से वुज़ू करना जबकि वो पानी सोने या चाँदी के इलावा किसी धात के बर्तन में गर्म हुआ हो और मौसम के साथ साथ इलाक़ा भी गर्म हो इस से बर्स की बीमारी का इह्तिमाल है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 37 ♻️


■ ➞  वुज़ू ना हो तो नमाज़, नमाज़े जनाज़ा, सजदा -ए- तिलावत और क़ुरआन को छूने के लिये वुज़ू करना फर्ज़ है।


■ ➞  तवाफ़ के लिये वुज़ू करना वाजिब है।


■ ➞  गुस्ले जनाबत से पहले वुज़ू करना, जुनूब (नापाक) शख्स को खाने, पीने और सोने से पहले वुज़ू करना सुन्नत है।


■ ➞  अज़ान, इक़ामत, जुम्आ का खुत्बा, ईद का खुत्बा और रोज़ा -ए- रसूल ﷺ की ज़ियारत के लिये, वुक़ूफ -ए- अरफ़ा, सफ़ा व मरवा के दरमियान सई के लिये वुज़ू करना सुन्नत है।


■ ➞  सोने के लिये और सोकर उठने के बाद वुज़ू करना मुस्तहब है।


■ ➞  मय्यित के नहलाने या उठाने के बाद वुज़ू करना मुस्तहब है।


■ ➞  जिमा (सोहबत) से पहले और जब गुस्सा आये तो वुज़ू करना मुस्तहब है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 38 ♻️


■ ➞  जुबानी क़ुरआन पढ़ने के लिये, हदीस और इल्मे दीन पढ़ने और पढ़ाने के लिये, जुम्आ व ईदैन के इलावा खुत्बों के लिये, कुतुबे दीनिया छूने के लिये, झूट बोलने, गाली देने और फहश बोलने के बाद, काफ़िर का बदन छू जाने पर, सलीब या बुत छू जाने पर, कोड़ी या सफ़ेद दाग वाले से मस करने पर, बगल खुजाने से जब कि इस में बदबू हो, गीबत करने, क़हक़हा लगाने, लग्व अशआर पढ़ने और ऊंट का गोश्त खाने के बाद, किसी औरत के बदन से बे-हाइल मस हो जाने पर और बा वुज़ू शख्स के लिये नमाज़ पढ़ने के लिये वुज़ू करना मुस्तहब है।


■ ➞  जब वुज़ू टूट जाये तो वुज़ू कर लेना मुस्तहब है।


■ ➞  नाबालिग पर वुज़ू फर्ज़ नहीं लेकिन उन से करवाना चाहिये ताकि सीखें।


■ ➞  अगर लोटे से वुज़ू करें तो लोटे की टूंटी ना ज़्यादा तंग हो कि कम पानी गिरे ना ज़्यादा फराख हो कि पानी ज़्यादा गिरे बल्की दरमियानी हो। 


■ ➞  नल को भी इतना ही खोलें जितनी ज़रूरत है, ज़्यादा खोल कर पानी बहाना जाइज़ नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 39 ♻️


■ ➞  चुल्लू में पानी लेते वक़्त ख्याल रखें कि पानी बरबाद ना हो। 


■ ➞  जो काम आधे चुल्लू पानी में हो सकता है उस के भर चुल्लू लेना सही नहीं है। मस्लन नाक में पानी डालने के लिये आधा चुल्लू काफ़ी है तो भर कर लेना पानी को बरबाद करना होगा।


■ ➞  हाथ, पाऊं सीना और पुश्त पर ज़्यादा बाल हों तो उसे क्रीम से साफ कर लें या  तरशवा लें, इस से पानी कम खर्च होगा ज़्यादा बाल होने की वजह से पानी ज़्यादा खर्च होता है।


■ ➞  एक वल्हान नामी शैतान है जो वुज़ू में वसवसे डालता है तो इस से बचने के लिये ये काम करें :


■ ➞  रुजू इलल्लाह हों।


■ ➞  अऊज़ु बिल्लाह पढ़ें।


■ ➞  लाहौल पढ़ें।


■ ➞  सूरतुन नास पढ़ें।


■ ➞  आमन्तु बिल्लाहि व रसूलिही पढ़ें।

और ये पढ़ें :


سُبْحَانَ الْمَلِکِ الْخَلَّاقِ اِنْ یَّشَأ یُذْہِبْکُمْ وَیَاْتِ بِخَلْقٍ جَدِیْدٍ لا  وَمَا ذٰلِکَ عَلَی اللہِ بِعَزِیْزٍ


■ ➞  इन से वसवसा जड़ से कट जायेगा और वसवसे पर बिल्कुल ध्यान ना दें और इसका उल्टा करें, इस से भी वसवसा दूर हो जायेगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 40 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❶ ➪  पेशाब करने से।


❷ ➪  पखाना से।


❸ ➪  वदी के निकलने से (ये सफ़ेद क़तरे जो बीमारी की वजह से निकलने हैं।)


❹ ➪  मज़ी के निकलने से (ये पानी की तरह होता है और इस में चिपचिपा पन होता है, ये मनी के निकलने से पहले निकलता है, इस से इंसान नापाक नहीं होता बस वुज़ू टूट जाता है, कुछ लोग जब गन्दी तस्वीरें वग़ैरह देखते हैं या गंदे खयालात की वजह से ये निकल आता है, इसकी एक पहचान ये भी है कि ये सफ़ेद रंग का नहीं होता और इसके निकलने से शहवत खत्म नहीं होती बल्की बढ़ जाती है यानी इसके खारिज होने से जुनून और शहवत कम नहीं होती और इसके बाद जो सफ़ेद पानी उछाल के साथ बाहर आता है जिस से इंसान सुस्त हो जाता है उसे मनी कहते हैं।)


 ❺  ➪  मनी के निकलने से (मनी कभी कभी मेहनत की वजह से निकल जाती है जिस में शहवत नहीं होती यानी बगैर लज़्ज़त (मज़े) के बाहर आ जाती है तो इस से भी इंसान नापाक नहीं होता बस वुज़ू टूट जाता है।)


 ❻  ➪  औरत के आगे के मक़ाम से जो रुतूबात (Liquid) खालिस बे आमेज़िशे खून निकलती है उस से वुज़ू नहीं टूटता और कपड़े में लग जाये तो कपड़ा भी पाक है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 41 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❼ ➪  मर्द या औरत के पीछे के मक़ाम से हवा के निकलने से वुज़ू टूट जाता है।


❽ ➪  खून या पीप या ज़र्द पानी कहीं से निकल कर बहा और उस में ऐसी सलाहियत थी कि बह कर ऐसी जगह पहुँच जाये जिस जगह का गुस्ल या वुज़ू में धोना ज़रूरी है तो वुज़ू टूट जायेगा।


❾ ➪  कहीं सूई चुभ गयी और खून चमका यानी लाल नज़र आया पर बहा नहीं तो वुज़ू नहीं टूटेगा।


❶⓿ ➪  मिस्वाक में खून दिखाई दिया या नाक में उंगली डाली तो खून की सुरखी दिखाई दी तो वुज़ू नहीं टूटेगा जब तक वो बहने के क़ाबिल ना हो।


❶❶ ➪  अगर बहा लेकिन ऐसी जगह नहीं आया जिस का वुज़ू या गुस्ल में धोना ज़रूरी है तो वुज़ू नहीं टूटेगा।


■ ➞  मस्लन आंख में दाना था और फूट कर आँख के अंदर ही बह गया बाहर ना आया या कान के अंदर दाना था और अंदर ही फूट कर बह गया बाहर ना आया तो वुज़ू बाक़ी है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 42 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❶❷ ➪  अगर खून निकला और बहने से पहले पोंछ दिया फ़िर निकला और पोंछते रहा तो अगर ना पोंछने पर वो बह जाता तो वुज़ू टूट जायेगा। इसी तरह मिट्टी या राख डाल कर सुखाता रहा और अगर ना डालता तो बह जाता तो वुज़ू टूट जायेगा।


❶❸ ➪  आँख, कान, नाफ़, पिस्तान वग़ैरह से जो पानी या आँसू बीमारी की वजह से निकले, वो वुज़ू तोड़ देगा।


❶❹ ➪  रोने से वुज़ू नहीं टूटता लेकिन जैसा कि बयान हुआ कि अगर आँखों में दर्द है और उसकी वजह से पानी निकलता है तो वुज़ू टूट जायेगा।


❶❺ ➪  मुंह से खून निकला, अगर थूक पर गालिब है यानी थूक का रंग लाल हो गया तो वुज़ू टूट जायेगा और अगर किसी ने थूक कर देखा ही नहीं बल्कि घूंट लिया तो लाल था या नहीं ये पता करने के लिये देखा जायेगा कि घूंटने में गले में नमकीनी महसूस हुई या नहीं अगर महसूस हुई तो वुज़ू टूट जायेगा वरना नहीं।


❶❻ ➪  नाक साफ की और जमा हुआ खून निकला तो वुज़ू नहीं टूटेगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845



▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 43 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❶❼ ➪  मुंह भर के उल्टी हुई तो वुज़ू टूट जायेगा। मुंह भर का ये मतलब है कि उसे बे तकल्लुफ ना रोक सकता हो।


❶❽ ➪  बल्गम से वुज़ू नहीं टूटता चाहे जितना भी निकले।


❶❾ ➪  सोने से वुज़ू टूट जाता है लेकिन दो शर्तों के साथ 

पहली ये कि दोनों सुरीन अच्छी तरह जमी हुई ना हों और दूसरी ये कि इस तरीक़े से ना सोया हुआ हो जो गाफ़िल हो कर सोने में माने हो यानी डिस्टर्ब करे मस्लन अकड़ू बैठ कर सोया या चित या पट या करवट पर लेट कर सोया या एक कोहनी से तकिये पर टेक लगा कर बैठा और सोया मगर एक करवट को झुका हुआ कि एक या दोनों सुरीन उठे हुये हैं या दो ज़ानू बैठा और पेट रानों पर रखा कि सुरीन ना जमे या चार ज़ानू है और सर रानों पर या पिंडलियों पर है जिस तरह औरतें सजदा करती हैं, इन तरीक़ों पर सोने से वुज़ू टूट जायेगा और अगर नमाज़ में इन सूरतों में से किसी पर जान बूझ कर सोता तो वुज़ू और नमाज़ दोनों गये और अगर अंजाने में सोया तो वुज़ू गया मगर नमाज़ नहीं, वुज़ू कर के वहीं से पढ़े जहाँ सोया था और सिरे से पढ़ना बेहतर है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


🎍 ◾🌹 🔲 ﷽ 🔲  🌹◾ 🎍

     🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

              📮 पोस्ट नम्बर 🅾️1️⃣7️⃣


      💠🤝🏻 सलीका-ए-ज़िंदगी 🤝🏻💠

    

                🌹बीवी के हुकूक 🌹


📚हदीस - हज़रत अबू हुरैरह रदियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया "ईमान में कामिल तरीन वह शख्स है जो सब से ज़्यादा बा अखलाक हो और तुम में सब से ज़्यादा बेहतर वह है जो अपनी औरतों के लिए बेहतर हो।"

📕(तिरमिज़ी शरीफ जिल्द 1, पेज 138)


📚हदीस - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः"औरत टेढ़ी पसली से पैदा की गयी है। अगर कोई शख्स टेढ़ी पसली को सीधी करने की कोशिश करेगा तो पसली की हड्डी टूट जायेगी मगर वह कभी सीधी न होगी और अगर छोड़ देगा तो टेढ़ी बाकी रहेगी। ठीक इसी तरह अगर कोई शख्स अपनी बीवी को बिल्कुल ही सीधी करने की कोशिश करेगा तो टूट जायेगी यानी तलाक की नौबत आ जायेगी। लिहाज़ा अगर औरत से फ़ायदा उठाना है तो उसके टेढ़े पन ही से फ़ायदा उठा लो।"

📕(बुखारी शरीफ जिल्द 2, पेज 779)


📚हदीस- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "तुम में बेहतर वह है जो अपने घर वालों के लिए अच्छा है। और मैं तुम सब में अपने अहल के लिए बेहतर हूँ।"

📕(तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द1, पेज 228)


📚हदीस - एक सहाबी ने हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से दरयाफ्त किया "या रसूलल्लाह! बीवी का उसके शोहर पर क्या हक़ है ?" आपने फ़रमाया :


"जब तू खाये, उसको भी खिलाये, जब तू कपड़ा पहने उसको भी पहनाये, उसके मुँह पर मत मार, उसको गालियाँ न दे और उसको न छोड़ मगर घर में।"

📕(अबु दाऊद पेज 291)


📕सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा  33/34


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/04/blog-post.html?m=1

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 45 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❷❷ ➪  बीमार लेट कर नमाज़ पढ़ रहा था और नींद आ गयी तो वुज़ू टूट जायेगा।


❷❸ ➪  ऊँघने या बैठे बैठे झपकी लेने से वुज़ू नहीं टूटता।


❷❹ ➪ बेहोशी और जुनून से वुज़ू टूट जाता है।


❷❺ ➪ इतना नशा कि चलने में पाऊँ लड़खड़ाये वुज़ू तोड़ देता है।


❷❻ ➪  रुकू और सजदे वाली नमाज़ में क़हक़हा लगा कर हँसने से वुज़ू टूट जाता और नमाज़ भी फासिद हो जाती है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 46 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❷❼ ➪  अगर नमाज़ के अंदर सोते हुये हँसा तो वुज़ू नहीं जायेगा। इसी तरह नमाज़े जनाज़ा में हँसने से भी वुज़ू नहीं जायेगा और ना सजदा -ए- तिलावत में हँसने से लेकिन नमाज़ और सजदा फासिद है, इसे दुहराना होगा।


❷❽ ➪  अगर इतनी आवाज़ से हँसा कि खुद सुना और पास वालों ने नहीं सुना तो वुज़ू नहीं जायेगा लेकिन नमाज़ चली जायेगी।


❷❾ ➪  अगर मुस्कुराया जिस में सिर्फ़ दाँत निकले, आवाज़ बिल्कुल ना निकली तो इस से ना वुज़ू जायेगा ना नमाज़।


❸⓿ ➪  आवाम में जो मशहूर है कि सतर खुलने से यानी घुटने से ऊपर दिख जाने से या किसी के सतर पर नज़र पड़ जाने से वुज़ू टूट जाता है ये गलत है इस से वुज़ू नहीं टूटता। हाँ ये ज़रूर है कि सतर खुला रखना मना है और किसी दूसरे के सामने खोलना हराम है। 


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 47 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❸❶ ➪  जो रुतूबात (Liquid) जिस्म से निकले और वुज़ू ना तोड़े तो वो नापाक नहीं मस्लन खून जो बहकर ना निकले पाक है और थोड़ी क़य (उल्टी) पाक है।

अगर खून बहकर निकले तो नजिस और भर मुँह उल्टी हो तो नजिस है।


❸❷ ➪  सोते हुये मुँह से जो राल गिरे वो चाहे जितनी हो पाक है, अगरचे बदबू आये लेकिन पाक है।


❸❸ ➪  मुर्दे के मुँह से जो पानी बहे वो नजिस है।


❸❹ ➪  दुखती आँख से जो पानी बहता है वो नापाक है और वुज़ू तोड़ देता है।


❸❺ ➪  दूध पीने वाले बच्चे ने दूध उल्टी की तो अगर मुँह भर है तो नापाक है और अगर ये दूध माद्दे (पेट) में नहीं गया था बल्कि सीने से ही लौट आया तो पाक है।


❸❻ ➪  वुज़ू के बीच में हवा निकल जाये तो फ़िर से वुज़ू करना होगा।


❸❼ ➪  चुल्लू में पानी था और हवा निकल गयी तो वो पानी भी अब काम का ना रहा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 48 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❸❽ ➪  अगर वुज़ू के दरमियान किसी हिस्से को धोने पर शक हो तो अगर ये ज़िंदगी का पहला वाक़िया है तो उसे धो ले और अगर बार बार ऐसा होता है कि वुज़ू में शक होता है तो ध्यान ना दे और अगर वुज़ू के बाद ऐसा लगता है तो इस पर तवज्जो ना दे।


❸❾ ➪  अगर किसी ने वुज़ू किया था और अब याद नहीं कि वुज़ू टूटा या नहीं तो वो वुज़ू में है, उसे नमाज़ के लिये वुज़ू करने की ज़रूरत नहीं लेकिन कर लेना बेहतर है जबकि उसे ये मालूम हो कि मैं वुज़ू से हूँ और नया वुज़ू कर रहा हूँ और अगर उसे वसवसे की वजह से दुबारा वुज़ू करने का मन करता है तो ऐसा हरगिज़ ना करे क्योंकि ये एहतियात नहीं बल्कि शैतान की इता'अ़त है।

जब आपको वुज़ू का टूटना याद नहीं तो आप वुज़ू में हैं लिहाज़ा ज़रूरी नहीं कि वुज़ू करें।


❹⓿ ➪  अगर किसी ने वुज़ू नहीं किया था और अब इसे शक है कि मैने किया या नहीं तो वो बे-वुज़ू है, वुज़ू करना ज़रूरी है।


❹❶ ➪  किसी को ये याद है कि वुज़ू करने के लिये बैठा था लेकिन वुज़ू किया या नहीं ये याद नहीं तो उसे वुज़ू करना ज़रूरी नहीं।


❹❷ ➪  ये याद है कि पखाना या पेशाब के लिये बैठा था लेकिन ये याद नहीं कि किया या नहीं तो उसे वुज़ू करना ज़रूरी है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 49 ♻️


■ ➞  अब हम बयान करेंगे कि वुज़ू किन-किन बातों से टूट जाता है।


❹❸ ➪  किसी को ये याद है कि वुज़ू में कोई हिस्सा धोना भूल गया हूँ लेकिन मालूम नहीं कि कौन सा तो बाया पाऊँ धो ले।


❹❹ ➪  अगर मियानी पर तरी देखी और पता नहीं कि पानी है या पेशाब है तो अगर ये ज़िंदगी का पहला वाक़िया है तो वुज़ू कर ले और बार बार ऐसा होता है तो उस की तरफ़ ध्यान ना दे।


❹❺ ➪  नमाज़े जनाज़ा के लिये जो वुज़ू किया गया उस से फर्ज़ नमाज़ें भी पढ़ सकते हैं। ये जो मशहूर है कि नहीं पढ़ सकते गलत है।


❹❻ ➪  जो पानी मुस्तमिल हो उस से वुज़ू या गुस्ल नहीं होता लिहाज़ा दोबारा करना ज़रूरी है।


■ ➞  ये वुज़ू के मसाइल थे और इनके अलावा और भी हैं जो आगे आयेंगे लेकिन अभी गुस्ल के मुताबिक़ बयान किया जायेगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 50 ♻️


■ ➞  गुस्ल में तीन फर्ज़ हैं यानी इन में से कोई एक भी छूट जाये तो गुस्ल नहीं होगा।


❶ ➪  कुल्ली करना : कुल्ली करने का ये मतलब नहीं कि मुँह में पानी लिया और उगल दिया बल्कि मुँह के अंदर हर पुरज़े को तर करना ज़रूरी है, ये कुल्ली फर्ज़ है लिहाज़ा अच्छी तरह तीन बार कुल्ली की जाये और अगर रोज़े से ना हो तो गरारा भी करें।


❷ ➪ नाक में पानी डालना : इस में भी खूब अच्छी तरह पानी डाला जाये कि अंदर नर्म हड्डी तक कोई जगह सूखी ना रह जाये। पानी को सूंघ कर ऊपर चढ़ायें और कोई चीज़ जमी हुई हो तो उसे साफ कर लें।


❸ ➪ तमाम ज़ाहिरी बदन पर पानी बहाना : सर के बाल से ले कर पाऊँ के नाखून तक का हर हिस्सा धुलना चाहिये। कई जगहें ऐसी हैं कि अगर एहतियात ना की जाये तो गुस्ल नहीं होगा लिहाज़ा इस में ज़्यादा एहतियात की ज़रूरत है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 51 ♻️


■ ➞  सर के बाल अगर बड़े हों तो इसे धोने में ख्याल रखना ज़रूरी है कि कोई हिस्सा सूखा ना रह जाये।


■ ➞  औरतों के लिये भी जड़ तक पानी पहुँचाना ज़रूरी है और अगर चोटी ज़्यादा टाइट गुन्दी हुई है कि पानी ना पहुँचे तो खोल कर पहुँचाना ज़रूरी है।


■ ➞  नाक, कान वग़ैरह में ज़ेवर या हाथ में अँगूठी का वही हुक्म है जो वुज़ू के बाद में बयान किया गया यानी अगर ढीला है कि पानी चला जाता है तो हरकत देना ज़रूरी है कि पानी पहुँच जाये।


■ ➞  गुस्ल में दाढ़ी, भवें, पलकों के बाल सब का धोना और उस के नीचे चमड़े का धोना ज़रूरी है।


■ ➞  कान का हर पुर्ज़ा और इस के सुराख के मुँह तक पानी पहुँचाना चाहिये।


■ ➞  कानों के पीछे बाल हटा कर पानी पहुँचाना ज़रूरी है।


■ ➞  हाथ उठा कर बगलों को धोना ज़रूरी है।


■ ➞  बाज़ू और पीठ का हर पहलू अच्छी तरह धोना ज़रूरी है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 53 ♻️


■ ➞  अगर जिस्म में कहीं पट्टी बंधी है और नहाना ज़रूरी हो और पट्टी खोलने से नुक़सान होगा तो पट्टी के ऊपर मसहा कर ले।


■ ➞   बाक़ी बदन पर पानी बहाये लेकिन ख्याल रहे कि पट्टी ने हद से ज़्यादा जगह को ना ढक रहा हो हाँ अगर बाज़ू में एक तरफ़ ज़ख्म है और पट्टी बाँधने के लिये उसे पूरे बाज़ू को गोलाई पर घुमा कर बाँधा गया है तो अगर पट्टी खोलना मुम्किन हो तो खोल कर पानी बहाये और अगर खोलने में तकलीफ़ हो या खोलने के बाद वैसा नहीं बँध पायेगा जैसा बंधा हुआ था तो मसहा कर लेना काफ़ी है, ज़ख्म की वजह से वो सही हिस्सा भी माफ़ हो जायेगा।


■ ➞  अगर कोई हिस्सा है जहाँ पानी पहुँचाने से तकलीफ़ है तो उस पर भी मसहा काफ़ी है।


■ ➞  अगर ज़ुकाम है या आँख से पानी बहता है या और कोई बीमारी है और मालूम है कि सर से नहाने पर तकलीफ़ बढ़ जायेगी तो कुल्ली करे, नाक में पानी डाले और सर को छोड़ कर गले से नीचे नहा ले और सर का अच्छी तरह मसहा कर ले गुस्ल हो जायेगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 54 ♻️


■ ➞   गुस्ल की सुन्नतें :


❶ ➪  गुस्ल की निय्यत करना।


❷ ➪  पहले दोनों हाथ तीन मर्तबा गट्टों तक धोना।


❸ ➪  इस्तिन्जे की जगह धोना, नजासत हो या ना हो।


❹ ➪  बदन पर जहाँ कहीं नजासत हो उसे दूर करना।


❺ ➪  नमाज़ की तरह वुज़ू करना और पाऊँ ना धोये, अगर ऊँची जगह बैठ कर नहाता है तो पाऊँ भी धो ले।


❻ ➪  बदन पर तेल की तरह पानी मलना खास कर जाड़े के मौसम में।


❼ ➪  तीन मर्तबा दाहिने काँधे पर पानी बहायें।


❽ ➪  फिर बायें पर तीन बार।


❾ ➪  सर पर और तमाम बदन पर तीन बार।


❶⓿ ➪  गुस्ल की जगह से अलग हो जाना और फिर पाऊँ धोना।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 55 ♻️


■ ➞  गुस्ल की सुन्नतें :


❶❶ ➪  नहाते वक़्त क़िब्ला की तरफ़ मुंह कर के ना बैठें।


❶❷ ➪  तमाम बदन पर हाथ फेरना।


❶❸ ➪  तमाम बदन पर पानी मलना।


❶❹ ➪  ऐसी जगह नहायें जहाँ कोई ना देखे और अगर ऐसा ना हो तो नाफ़ से लेकर घुटनों तक छुपा कर नहायें।


❶❺ ➪  नहाते वक़्त किसी क़िस्म का कलाम ना करें।


❶❻ ➪  कोई दुआ ना पढ़ें।


■ ➞  कुछ मसाइल :


■ ➞  अगर गुस्ल खाने की छत ना हो या नंगे बदन नहाये तो कोई हर्ज नहीं बशर्ते कि एहतियात वाली जगह हो।


■ ➞  औरतों को पर्दे का खास ख्याल रखना चाहिये और औरतों के लिये बैठ कर नहाना बेहतर है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 56 ♻️


■ ➞  अगर कोई बहते हुये पानी में नहाता है तो उस में थोड़ी देर ठहरने से तीन बार धोने, तरतीब और सारी सुन्नतें अदा हो जाती हैं, अलग से करने की ज़रूरत नहीं और अगर ठहरे हुये पानी में तालाब वग़ैरह में नहाता है तो तीन बार जिस्म को हरकत देने या तीन जगह बदलने से तीन बार धोने की सुन्नत अदा हो जायेगी।


■ ➞  अगर बहते पानी में वुज़ू किया तो बस थोड़ी देर तक आज़ा (पार्ट्स) को पानी में रखने से सुन्नत अदा हो जायेगी और अगर ठहरे पानी में किया तो हरकत देने से अदा हो जायेगी।


■ ➞  वुज़ू या गुस्ल करने के लिये छोटे या बड़े के लिये पानी की कोई मिक़्दार मुअय्यन नहीं है यानी फिक्स नहीं है कि इतने उम्र का आदमी इतने लीटर्स से नहायेगा और इतने उम्र का इतने लीटर्स से बल्कि जितने में अच्छी तरह फराइज़ो सुनन अदा हो जायें, उतना पानी ज़रूरी है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 57 ♻️


■ ➞  गुस्ल किन चीज़ों से फर्ज़ होता है? यानी इंसान कब नापाक होता है? कब नहाना फर्ज़ हो जाता है? इसे अच्छी तरह समझना ज़रूरी है क्योंकि बात-बात पर लोग समझते हैं कि वो नापाक हो गये और अब नहाना होगा फिर नमाज़ें क़ज़ा कर देते हैं।


❶ ➪  मनी का अपनी जगह से शहवत के साथ निकल कर उज़्व से निकलना गुस्ल को फर्ज़ कर देता है यानी मनी अगर शहवत के साथ (मज़े के साथ, जुनून के साथ) निकले यानी लज़्ज़त महसूस हो तो इससे गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा।


 ❷ ➪  अगर शहवत के साथ ना निकले बल्कि बोझ उठाने की वजह से या मेहनत की वजह से निकल जाये तो गुस्ल फर्ज़ नहीं हाँ वुज़ू ज़रूर टूट जायेगा।


 ❸ ➪  अगर मनी अपनी जगह से शहवत के साथ चली और किसी ने अपने आले (आगे की शर्मगाह) को ज़ोर से पकड़ लिया या दबा दिया और मनी ना निकली फिर जब शहवत चली गयी तो निकली, इस से भी गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा क्योंकि मनी अपनी जगह से शहवत के साथ जुदा हुई थी।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 58 ♻️


❹ ➪  मनी के निकलने के बाद अगर ना सोया, ना पेशाब किया और ना 40 क़दम चला और नहा लिया और नमाज़ पढ़ ली फिर बाक़ी मनी निकली तो गुस्ल करे क्योंकि ये उसी मनी का हिस्सा माना जायेगा जो शहवत के साथ जुदा हुई थी और जो नमाज़ पढ़ी थी वो हो गयी, अब दोहराने की हाजत नहीं और अगर सोने, पेशाब करने या 40 क़दम चलने के बाद गुस्ल किया फिर मनी निकले तो ये पहली वाली का हिस्सा नहीं मानी जायेगी और गुस्ल करना ज़रूरी नहीं होगा।


❺ ➪  पेशाब के वक़्त अगर मनी निकल जाये तो गुस्ल वाजिब नहीं। ऐसा मनी का पतला हो जाने से होता है इस से वुज़ू टूट जाता है।


❻ ➪  एहतिलाम हुआ तो इस की चंद सूरतें हैं :


(A) ➞  अगर सो कर उठा और कपड़े या बदन पर तरी पायी और मज़ी या मनी होने का यक़ीन है या शक़ है तो गुस्ल वाजिब हो जायेगा, चाहे ख्वाब देखना याद हो या ना हो।


(B) ➞  अगर यक़ीन है कि ये तरी ना मनी है ना मज़ी बल्कि पेशाब या पसीना या वदी है तो गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा अगरचे ख्वाब याद हो।


(C) ➞  अगर यक़ीन है कि मनी नहीं लेकिन मज़ी होने पर शक है तो अब ख्वाब का एतबार होगा, अगर ख्वाब याद है तो गुस्ल फर्ज़ होगा वरना नहीं।


(D) ➞  अगर एहतिलाम होना याद है मगर कपड़े या बदन पर कोई असर नहीं तो गुस्ल फर्ज़ नहीं।


(E) ➞  अगर सोने से पहले आला (आगे की शर्मगाह) क़ाइम था यानी टुंडी की हालत में था (खड़ा था) चाहे वो गंदे खयालात या गंदी तस्वीरों या वीडियोज़ की वजह से हो और ऐसी हालत में सो गया और जागने पर असर देखा तो अब अगर गालिब गुमान है कि मनी नहीं बल्कि मज़ी पर ज़्यादा शक है और ख्वाब याद नहीं तो गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा और अगर मनी होने का ज़्यादा शक है तो गुस्ल वाजिब है और अगर सोने से पहले टुंडी दब चुकी थी तो फिर पहली सूरत जो बयान हुई कि कपड़े या मनी होने का यक़ीन है या शक है तो गुस्ल वाजिब हो जायेगा, चाहे ख्वाब देखना याद हो या ना हो।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 59 ♻️


■ ➞  एहतिलाम की सूरतें जो बयान की गई उस का खुलासा ये है कि दो सूरतों में गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा पहली ये कि जो तरी दिख रही है उस के बारे में यक़ीन है कि मनी या मज़ी नहीं बल्कि कुछ और है और दूसरी ये कि ख्वाब याद है और कोई असर मौजूद नहीं।


■ ➞  एक सूरत में ख्वाब के एतबार से माना जायेगा कि गुस्ल फर्ज़ हुआ या नहीं और वो ये है कि मनी के ना होने पर यक़ीन है और मज़ी होने पर शक है तो ख्वाब याद है तो गुस्ल फर्ज़ है वरना नहीं।


■ ➞  एक सूरत ये है कि जब कोई नॉरमल हालत में नहीं सोया बल्कि खास हालत में सोया यानी उसका आला क़ाइम था (तुंडी की हालत में था तो ऐसे में मस'अला थोड़ा अलग है और वो ये कि मज़ी पर ज़्यादा शक है और एहतिलाम याद नहीं तो गुस्ल फर्ज़ नहीं हालाँकि नॉरमल हालत में सोता तो मनी का शक होने से भी गुस्ल फर्ज़ हो जाता पर यहाँ मस'अला बदल जाता है और अगर ऐसी हालत में मनी पर ज़्यादा शक है तो गुस्ल फर्ज़ है।


■ ➞  ये मसाइल कई लोग नहीं जानते और हमने आसान लफ्ज़ों में समझाने की पूरी कोशिश की है, अगर इसे दो तीन मरतबा गौर से पढ़ा जाये तो अच्छी तरह समझ में आ जायेगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 60 ♻️


❻ ➪  किसी को ख्वाब हुआ और मनी निकलने से पहले आँख खुल गई और अपने आले को पकड़ लिया जिस से मनी बाहर ना आयी फिर बाद में बाहर आयी तो गुस्ल फर्ज़ है।


❼ ➪  नमाज़ के अन्दर शहवत के साथ मनी निकलती हुई मालूम हुई लेकिन ना निकली और नमाज़ के बाद निकली तो गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा और जो नमाज़ पढ़ी वो हो गयी।


❽ ➪  रात को एहतिलाम हुआ और जागा तो कपड़े पर कोई असर ना था फिर वुज़ू कर के नमाज़ पढ़ ली और उसके बाद मनी खारिज हुई तो गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा और नमाज़ हो गयी।


❾ ➪  अगर औरत को ख्वाब आया तो जब तक मनी फर्जे दाखिल से बाहर ना आये गुस्ल फर्ज़ नहीं।


❶⓿ ➪  लड़का एहतिलाम के साथ बालिग हुआ तो उस पर गुस्ल फर्ज़ है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 61 ♻️


❶❶ ➪  हश्फ़ा औरत के आगे या पीछे के मक़ाम में दाखिल हो जाये तो दोनों पर गुस्ल फर्ज़ हो जाता है। हश्फ़ा यानी ज़कर (मर्द के आले) का सर (आगे का हिस्सा) और सिर्फ़ दाखिल करने से ही गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा चाहे शहवत हो या ना हो, मनी निकले या ना निकले। इस में एक शर्त ये है कि मर्दो औरत दोनों मुकल्लफ़ हों (यानी बालिग और आक़िल हों।)


■ ➞  अगर एक बालिग है और एक नाबालिग तो जो बालिग है उस पर गुस्ल फर्ज़ होगा और नाबालिग पर नहीं लेकिन नाबालिग को भी गुस्ल करने का हुक्म है।


■ ➞  अगर लड़का बालिग है और लड़की नाबालिग तो लड़के पर गुस्ल फर्ज़ होगा और लड़की बालिग है लड़का नाबालिग तो लड़की पर फर्ज़ होगा लेकिन गुस्ल का हुक्म सब को है।


❶❷ ➪ अगर औरत ने अपनी शर्मगाह में उंगली डाली या कोई और चीज़ डाली तो जब तक इंज़ाल ना हो यानी मनी ना निकले गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 62 ♻️


❶❸ ➪  अगर किसी जिन्न ने औरत से जिमा (Sex) किया, वैसे ये मस'अला बहुत कम पेश आता है लेकिन फिर भी इल्म में इज़ाफे के लिये बयान किया जा रहा है तो अगर वो जिन्न आदमी की शक्ल में आया तो हश्फ़ा (सरे ज़कर) के गायिब होते ही गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा और अदर आदमी की शक्ल में ना हो तो जब तक औरत को इंज़ाल ना हो गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा।


❶❹ ➪  अगर किसी मर्द ने परी से जिमा किया और वो इंसानी शक्ल में नहीं थी तो जब तक इंज़ाल ना हो गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा और अगर इंसानी शक्ल में है तो ज़कर का सर गायिब होने यानी अंदर दाखिल होने से गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा।


❶❺ ➪  जिमा के बाद औरत ने गुस्ल किया फिर उसकी शर्मगाह से मर्द की बक़िया मनी निकली तो गुस्ल फर्ज़ नहीं होगा हां वुज़ू टूट जायेगा।


■ ➞  ये जो मसाइल बयान किये गये इन में गुस्ल फर्ज़ होने की तीन वुजूहात में हश्फ़ा का दाखिल होना, एहतिलाम होना, मनी का अपनी जगह से शहवत के साथ निकलना और इन तीनों से फर्ज़ होने वाले गुस्ल को गुस्ले जनाबत कहते हैं और इन वुजूह से नापाक होने वाले शख्स को जुनूब।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 63 ♻️


❶❻ ➪ औरत हैज़ से फारिग हुई, गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा।


❶❼ ➪ निफ़ास के खत्म होने से भी गुस्ल फर्ज़ हो जायेगा।


■ ➞  हैज़ व निफ़ास की तफ़सील आगे बयान की जायेगी।


❶❽ ➪  जुम्आ, ईद, बक़र ईद के दिन और एहराम बांधते वक़्त नहाना सुन्नत है।


❶❾ ➪  गुस्ल इन मौक़ों पर मुस्तहब है : वुक़ूफे अराफात, वुक़ूफे मुज़्दलिफ़ा, हाज़िरी-ए- हरम, हाज़िरी-ए- सरकारे आज़म, तवाफ़, दुखूले मिना, और कंकरिया मारने के लिये तीनों दिन, शबे बराअत, शबे क़द्र, और अरफ़ा की रात, मज्लिसे मीलाद, और दीगर मजालिसे खैर की हाज़िरी के लिये, मुर्दा नहलाने के बाद, मज्नून का जुनून जाने के बाद, गसी के बाद, नशा जाते रहने के बाद, नया कपड़ा पहनने के बाद, तौबा करने के बाद, सफ़र से आने वाले के लिये, इस्तिहाज़ा का खून बन्द होने के बाद, नमाज़े कसूफो खुसूफ व इस्तिस्क़ा के लिये और खौफ़ व तारीकी और सख्त आँधी के लिये, और बदन पर नजासत लगी हो पर मालूम ना हो कि कहां लगी है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 64 ♻️


❷⓿ ➪  हज करने वाले पर दसवी ज़िलहिज्जा को पाँच गुस्ल हैं : वुक़ूफे मुज़्दलिफ़ा दुखूले मिना जमरा पर कंकरियां मारना दुखूले मक्का और तवाफ़ जब कि तीन पिछली बातें भी दसवी को ही करे और अगर जुम्आ का दिन है तो गुस्ले जुम्आ भी। यूं ही अगर अरफ़ा या ईद जुम्आ के दिन पड़े तो यहां वालों पर दो गुस्ल होंगे।


❷❶ ➪  जिस पर चंद गुस्ल हों तो एक ही निय्यत से सब कर लिया, अदा हो गये और सब का सवाब मिलेगा।


■ ➞  अगर आप पर गुस्ल फर्ज़ हो गया और उसी दिन जुम्आ भी है तो आप पर दो गुस्ल हैं, एक तो गुस्ले जनाबत और दूसरा करने की ज़रूरत नहीं है बल्कि एक ही बार निय्यत कर लें तो सब अदा हो जायेंगे, ऐसा नहीं कि पहले गुस्ले जनाबत कर के उठें फिर जुम्आ का गुस्ल करने जायें और फिर आगे ईद भी उसी दिन हो तो ईद का गुस्ल भी करें।


❷❷ ➪  जुनूब ने जुम्आ के दिन गुस्ले जनाबत किया और जुम्आ या ईद वग़ैरह की निय्यत भी कर ली तो सब अदा हो जायेगा।


❷❸ ➪   औरत को अगर नहाने के लिये पानी मोल लेना पड़े तो उस की क़ीमत शौहर के जिम्मे है बशर्ते कि वुज़ू या गुस्ल वाजिब हो या बदन से मैल दूर करने के लिये नहाये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 65 ♻️


■ ➞  जिस पर गुस्ल फर्ज़ है उसे चाहिये कि नहाने में देर ना करे।


■ ➞  सुनन अबू दाऊद की हदीस कि जिस घर में जुनूब हो (यानी जिस पर गुस्ले जनाबत फर्ज़ हो) उस घर में रहमत के फिरिश्ते नहीं आते।


■ ➞  अगर नहाने में इतनी देर हो गयी कि नमाज़ का आखिर वक़्त आ चुका है तो नहाना फर्ज़ है, देर करने पर गुनाहगार होगा।


■ ➞  जो शख्स नापाक हो तो उसे खाना खाने के लिये वुज़ू कर लेना चाहिये।


■ ➞  इसी तरह बीवी से जिमा करने के लिये भी वुज़ू कर लें या हाथ मुंह धो लें और कुल्ली कर लें, अगर इसी तरह खा पी लिया तो गुनाह नहीं लेकिन मकरूह है और ये मुह्ताजी लाता है।


■ ➞  अगर बिना नहाये या बिना वुज़ू किये औरत से जिमा किया तो भी गुनाह नहीं लेकिन बेहतर कर लेना है और जिसे एहतिलाम हुआ हो वो बिना नहाये औरत के पास ना जाये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 66 ♻️


■ ➞  रमज़ान की रात में अगर जुनूब हुआ तो बेहतर यही है कि फज्र से पहले नहा ले ताकि रोज़े का हर हिस्सा जनाबत (नापाकी) से खाली हो।


■ ➞  अगर पहले ना नहा सका और दिन निकल आया और नमाज़ क़ज़ा हो गयी तो इस से रोज़े पर फर्क़ नहीं पड़ेगा। ऐसा करना रमज़ान के इलावा भी गुनाह है और रमज़ान में और ज़्यादा गुनाह है।


■ ➞   अगर फज्र से पहले ना नहा सके तो गरगरा कर ले और नाक में पानी डाल ले, ये दो काम फज्र से पहले कर ले फिर बाद में गुस्ल कर ले क्योंकि रोज़े की हालत में ये दोनों सही से नहीं होंगे और गरगरा करते वक़्त पानी अन्दर जा सकता है।


■ ➞  जिस पर गुस्ल फर्ज़ हो उस का मस्जिद में जाना, क़ुरआन शरीफ़ को छूना, या बिना छुये देख कर या ज़ुबानी पढ़ना, या आयात का लिखना, या तवाफ़ करना, या किसी ऐसी तावीज़ को छूना जिस में आयत लिखी हो, या ऐसी अँगूठी छूना या पहनना, ये सब हराम है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 67 ♻️


■ ➞  अगर क़ुरआने करीम जुज़दान में हो तो जुज़दान को हाथ लगाने में हर्ज नहीं है।


■ ➞  किसी ऐसे कपड़े से भी क़ुरआन को पकड़ सकते हैं जो ना अपना ताबे हो ना क़ुरआन का यानी वो कपड़ा ना क़ुरआन के साथ मुन्सलिक हो ना अपने कपड़ों के साथ जैसे अगर कुर्ते का दामन या आस्तीन, दुपट्टा और चादर जिसका एक कोना काँधे पर हो और दूसरे से क़ुरआन पकड़े तो ये हराम है क्योंकि ये सब इसके ताबे हैं और क़ुरआन मजीद की चोली क़ुरआन के ताबे है लिहाज़ा किसी तीसरे कपड़े की मदद से पकड़ सकते हैं जैसे रुमाल वग़ैरह।


■ ➞  क़ुरआन की आयात को नापाकी की हालत में सना कि निय्यत से पढ़ सकता है जैसे बिस्मिल्लाह पढ़ना और छींक आने पर अल्हम्दु लिल्लाह पढ़ना और किसी के इंतिक़ाल पर इन्ना लिल्लाहि वग़ैरह पढ़ना, इन में हर्ज नहीं लेकिन तिलावत की निय्यत से नहीं पढ़ सकता।


■ ➞   यूं ही क़ुल का लफ्ज़ हटा कर सूरतुल इखलास वग़ैरह पढ़ सकता है जबकि सना की निय्यत हो और क़ुल के लफ्ज़ के साथ नहीं पढ़ सकता अगरचे निय्यत सना की हो क्योंकि अब क़ुरआन होना मुतअय्यन है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 68 ♻️


■ ➞   बे वुज़ू शख्स का क़ुरआने मजीद या किसी आयत का छूना हराम है, ज़ुबानी याद हो तो पढ़ सकता है।


■ ➞   अगर रूपये पर आयत लिखी हो तो, नापाक और बे-वुज़ू शख्स का उसे छूना हराम है। अगर थैली में हो तो थैली छूना जाइज़ है।


■ ➞   जिस बर्तन पर आयत लिखी हो उस का भी छूना जुनूब और बे-वुज़ू को हराम है। और इसे बर्तन का इस्तिमाल सब को मकरूह है, जबकि खास बा निय्यते शिफ़ा हो।


■ ➞   क़ुरआन का तर्जुमा फारसी, उर्दू या किसी और ज़ुबान में हो तो उसे छूने और पढ़ने में क़ुरआने मजीद जैसा ही हुक्म है।


■ ➞   अगर नापाक शख्स क़ुरआन की तरफ़ देखे तो कोई हर्ज नहीं अगरचे हुरूफ़ मालूम होते हों अगरचे मन में पढ़ता हो।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 69 ♻️


■ ➞   नापाक, बे-वुज़ू और हैज़ व निफ़ास वाली औरत को तफ़सीर, फिक़्ह और हदीस की किताब को छूना मकरूह है और इन किताबों में जहां आयत लिखी हो उसे छूना हराम है।


■ ➞   इन सब को (यानी, नापाक, बे-वुज़ू....) तौरात, ज़बूर और इन्जील को पढ़ना छूना मकरूह है।


■ ➞   इन सब को दुरूद और दुआयें पढ़ने के लिये वुज़ू या कम से कम कुल्ली कर लेना बेहतर है अगर ना करे तो भी हर्ज नहीं।


■ ➞   इन सब को अज़ान का जवाब देना जाइज़ है।


■ ➞   क़ुरआन शरीफ़ के कागज़ वग़ैरह पुराने हो जायें कि पढ़ने के क़ाबिल ना रहें तो कफ़ना कर किसी ऐसी जगह दफ़न कर दें जहां किसी के पाऊँ पड़ने का एहतिमाल ना हो।


■ ➞   काफ़िर को क़ुरआने करीम ना दिया जाये और मुत्लक़न हुरूफ़ को उस से बचायें।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 70 ♻️


■ ➞  अगर घर में किताबें हों तो क़ुरआन को तमाम किताबों के ऊपर रखना चाहिये। उसके नीचे तफ़सीर की किताबें फिर हदीस की और फिर दूसरी दीनी किताबें मर्तबे के मुताबिक़ रखें।


■ ➞  किताब के ऊपर कोई चीज़ ना रखी जाये चाहे क़लम दवात ही हो हत्ता कि वो सन्दूक़ जिस में किताब हो उसके ऊपर भी कोई चीज़ ना रखी जाये।


■ ➞  मसाइल या दीनियत के अवराक़ (पन्नों) से पुड़िया बांधना या जिस दस्तर ख्वान पर अशआर वग़ैरह लिखें हो उसे काम में लाना या बिछौने पर कुछ लिखा हो उसे इस्तिमाल करना मना है।


■ ➞  अब हम पानी के बारे में ज़रूरी मसाइल बयान करेंगे कि किस पानी से वुज़ू और गुस्ल जाइज़ है और किस से नहीं।


■ ➞  ये जान लें कि जिस पानी से वुज़ू जाइज़ होगा उस से गुस्ल भी जाइज़ होगा और जिस से वुज़ू जाइज़ नहीं तो गुस्ल भी जाइज़ नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 71 ♻️


■ ➞  बारिश का पानी, नदी का, नाले, चश्मे, दरिया, समुंदर, कुँए और बर्फ़, ओले के पानी से वुज़ू हो जायेगा।


■ ➞  पानी में कोई चीज़ मिल गई जिससे उस का नाम बदल गया मस्लन नीम्बू, चीनी या पॉवडर वग़ैरह डाला जिसे अब शरबत कहा जाये तो उस से वुज़ू जाइज़ नहीं।


■ ➞  पानी में कोई ऐसी चीज़ डाली जिससे मक़सद मैल काटना नहीं (यानी प्यूरीफाय करना करना) तो उस पानी से वुज़ू जाइज़ नहीं जैसे चाय, शोरबा (सीरवा), गुलाब और अर्क़ वग़ैरह।


■ ➞  अगर पानी में कोई ऐसी चीज़ डाल कर पकाई जिससे मक़सद मैल काटना था जैसे बेरी के पत्ते वग़ैरह तो वुज़ू जाइज़ है और अगर पानी की रिक़्क़त (यानी पतलापन) खत्म हो गया और पानी सत्तू की तरह गाढ़ा हो गया तो वुज़ू जाइज़ नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 72 ♻️


■ ➞   अगर पानी में कोई ऐसी चीज़ मिल जाये जिस से पानी का पतलापन ना गया हो जैसे चूना, रेता या थोड़ी ज़ाफ़रान तो इस से वुज़ू जाइज़ है।


■ ➞   अगर दूध मिल गया तो अगर पानी ज़्यादा था, दूध थोड़ा सा था कि पानी पर गालिब ना आ सका तो वुज़ू जाइज़ है वरना नहीं।


■ ➞   बहता पानी कि अगर तिनका डाले तो बहा ले जाये, पाक है और पाक करने वाला है और नजासत पड़ने से भी नापाक ना होगा जब तक कि पानी का रंग, बू (Smell) और मज़ा (Taste) ना बदल जाये।


■ ➞   अगर बहते पानी में इतनी नजासत है कि पानी का रंग, बू या मज़ा बदल गया तो पानी नापाक है।


■ ➞   अब ये पाक तब होगा जब नजासत तह में चली जाये और पानी के अवसाफ़ ठीक हो जायें यानी रंग, बू और मज़ा अपनी हालत में आ जाये।


■ ➞   बारिश में छत का पानी जो परनाले से गिरता है वो पाक है अगरचे छत पर नजासत पड़ी हो।

जब तक नजासत से पानी में तगय्युर ना आ जाये पाक है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 73 ♻️


■ ➞   छत पर नजासत है और बारिश हो रही है तो परनाले से गिरने वाला पानी नापाक नहीं लेकिन बारिश रुक जाने पर वो जमा हुआ पानी नापाक हो जायेगा।


 ■ ➞  बरसात में नालियों में बहने वाला पानी पाक है जब तक कि नजासत से उस का रंग, बू या मज़ा बदल ना जाये।


■ ➞  नाली का बहता पानी बारिश के बाद ठहर गया और नजासत दिखे तो वो नापाक है।


■ ➞  दस हाथ लम्बा और दस हाथ चौड़ा जो हौज़ हो उसे दह दर दह कहते हैं, ऐसे हौज़ में नजासत भी पड़ जाये तो पानी नापाक नहीं होगा जब तक कि रंग बू या मज़ा ना बदल जाये।


■ ➞  लम्बाई और चौड़ाई 100 हाथ होनी चाहिये।


■ ➞  20 हाथ लम्बा 5 हाथ चौड़ा भी (20x5) दह दर दह कहलायेगा।


■ ➞  इसी तरह 25 हाथ लम्बा 4 हाथ चौड़ा (25x4) भी 100 हाथ हो जायेगा यानी एरिया 100 हाथ होना चाहिये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 74 ♻️


■ ➞   हौज़ अगर दह दर दह है यानी जिस की लम्बाई और चौड़ाई को ज़र्ब देने (गुना करने) पर 100 हाथ तक़रीबन (225 स्क़्वेयर फीट) हो जाये वो बड़ा हौज़ कहलाता है और ये बहते पानी के हुक्म में है यानी नजासत पड़ने से नापाक नहीं होगा जब तक कि नजासत से पानी का रंग, बू या मज़ा बदल ना जाये।


■ ➞   अगर हौज़ गोल है तो गोलाई साढ़े 35 हाथ होनी चाहिये।


■ ➞   ये भी जान लें कि हौज़ के बड़ा होने का मतलब सिर्फ हौज़ का बड़ा होना नहीं बल्कि उस में मौजूद पानी को देखा जायेगा यानी पानी की बलाई (ऊपरी) सतह को देखेंगे कि वो सौ हाथ है या नहीं अगर हौज़ सौ हाथ है और पानी कम है तो वो दह दर दह नहीं।


■ ➞   पानी की गहराई इतनी होनी चाहिये कि बीच में कहीं से ज़मीन खुली हुई ना हो वरना ज़मीन खुल जाने पर पानी सौ हाथ से कम हो जायेगा और दह दर दह ना रहेगा।


■ ➞   बड़े हौज़ में अगरचे नजासत पड़ने से पानी नापाक नहीं होगा लेकिन जान बूझ कर उस में नजासत डालना मना है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 75 ♻️


■ ➞   बड़े हौज़ पर कई लोग जमा हो कर वुज़ू करें और पानी उस हौज़ में गिरायें तो कोई हर्ज नहीं लेकिन उस में कुल्ली करना या नाक साफ़ नहीं करना चाहिये, हौज़ से बाहर करें कि लोग इस से घिन करते हैं।


■ ➞   गुस्ल करते वक़्त जो पानी जिस्म से गिरता है वो पाक है लेकिन उस से गुस्ल और वुज़ू जाइज़ नहीं।


■ ➞   अगर पानी में (जो दह दर दह से कम हो) कोई बे वुज़ू शख्स बिना धोये अपने जिस्म के किसी ऐसे हिस्से को पानी में डाल दे जो वुज़ू में धोया जाता है तो पानी वुज़ू और गुस्ल के लायक़ नहीं रहेगा।


■ ➞   जिस पर गुस्ल फर्ज़ है उस के जिस्म का कोई भी हिस्सा पानी में पड़ गया तो पानी वुज़ू और गुस्ल के क़ाबिल ना रहा। अगर धुला हुआ हिस्सा पड़े तो हर्ज नहीं।


■ ➞   अगर हाथ धुला हुआ है लेकिन फिर से धोने की निय्यत से डाला और ये धोना सवाब का काम है जैसे खाना खाने के लिये या वुज़ू के लिये तो पानी मुस्तमल हो जायेगा और अब वो वुज़ू के लाइक़ ना रहा।


■ ➞   अगर ज़रूरत के तहत डाला तो पानी मुस्तमल नहीं होगा मस्लन बड़ा बर्तन है कि झुका नहीं सकता और छोटा बर्तन नहीं तो डाल सकता है और इसका तरीक़ा वुज़ू के बयान में बता दिया गया है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 76 ♻️


■ ➞   अगर मुस्तमल पानी अच्छे पानी में मिल जाये जैसे नहाते वक़्त अगर छीन्टे पड़ जायें तो अगर अच्छा पानी ज़्यादा है तो वो वुज़ू और गुस्ल के लाइक़ रहेगा वरना नहीं।


■ ➞   जिस बर्तन से नहा रहे हैं उस में 10 लीटर पानी है और कुछ क़तरे नहाते वक़्त उस में पड़ जायें तो पानी मुस्तमल नहीं होगा और अगर किसी तरह अच्छे पानी में उस से ज़्यादा मुस्तमल पानी मिल गया तो वो पानी वुज़ू और गुस्ल के लाइक़ ना रहेगा।


■ ➞   अगर पानी में हाथ पड़ गया और वो मुस्तमल हो गया, अब अगर उसे अच्छा बनाना है ताकि वुज़ू और गुस्ल के काम आ सके तो उस में से ज़्यादा पानी मिला देने से पाक हो जायेगा यानी अगर 5 लीटर पानी मुस्तमल था तो 5 लीटर से ज़्यादा अच्छा पानी मिला देने से वो काम का हो जायेगा।


■ ➞   एक तरीक़ा ये है कि मुस्तमल पानी में अच्छा पानी डालता रहे हत्ता कि बर्तन भर कर बहने लगे तो वो पानी काम का हो जायेगा, और यूँ ही नापाक को भी पाक कर सकते हैं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 77 ♻️


■ ➞   एक टंकी है जिस की केपेसिटी 1000 लीटर है और उस में 50 लीटर पानी है जो मुस्तमल हो गया है तो उसे पाक करने के लिये ये नहीं करेंगे कि एक तरफ से अच्छा पानी डालते रहेंगे ताकि भर कर बहने लगे क्योंकि इस में 950 लीटर से ज़्यादा पानी लाना पड़ेगा बल्कि यहाँ पहले वाला तरीक़ा अपनाया जायेगा कि 50 लीटर है तो 51 लीटर अच्छा पानी डाल दिया जाये।


■ ➞   अगर टंकी में 900 लीटर पानी है और मुस्तमल हो गया तो अब उसे पाक करने के लिये 901 लीटर पानी नहीं डालेंगे बल्कि दूसरा तरीक़ा अपनायेंगे यानी 100 लीटर से कुछ ज़्यादा डालेंगे ताकि भर कर बहने लगे।


■ ➞   किसी दरख्त या फ़ल से निचोड़े गये पानी से वुज़ू जाइज़ नहीं।


■ ➞   जो पानी गर्म मुल्क में, गर्म मौसम में सोने चाँदी के इलावा किसी और धात के बर्तन में गर्म हुआ हो तो वो जब तक ठंडा ना हो जाये उस से वुज़ू और गुस्ल नहीं करना चाहिये और ना तो उस को पीना चाहिये, किसी भी तरह से बदन तक नहीं पहुँचना चाहिये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 77 ♻️


■ ➞   एक टंकी है जिस की केपेसिटी 1000 लीटर है और उस में 50 लीटर पानी है जो मुस्तमल हो गया है तो उसे पाक करने के लिये ये नहीं करेंगे कि एक तरफ से अच्छा पानी डालते रहेंगे ताकि भर कर बहने लगे क्योंकि इस में 950 लीटर से ज़्यादा पानी लाना पड़ेगा बल्कि यहाँ पहले वाला तरीक़ा अपनाया जायेगा कि 50 लीटर है तो 51 लीटर अच्छा पानी डाल दिया जाये।


■ ➞   अगर टंकी में 900 लीटर पानी है और मुस्तमल हो गया तो अब उसे पाक करने के लिये 901 लीटर पानी नहीं डालेंगे बल्कि दूसरा तरीक़ा अपनायेंगे यानी 100 लीटर से कुछ ज़्यादा डालेंगे ताकि भर कर बहने लगे।


■ ➞   किसी दरख्त या फ़ल से निचोड़े गये पानी से वुज़ू जाइज़ नहीं।


■ ➞   जो पानी गर्म मुल्क में, गर्म मौसम में सोने चाँदी के इलावा किसी और धात के बर्तन में गर्म हुआ हो तो वो जब तक ठंडा ना हो जाये उस से वुज़ू और गुस्ल नहीं करना चाहिये और ना तो उस को पीना चाहिये, किसी भी तरह से बदन तक नहीं पहुँचना चाहिये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 78 ♻️


■ ➞   छोटे छोटे गढ़ों में पानी जमा हुआ हो और नजासत होने का मालूम ना हो तो उस से वुज़ू जाइज़ है।


■ ➞   अगर कोई काफ़िर कहे कि ये पानी नापाक है तो उसकी बात नहीं मानी जायेगी, पानी पाक ही है (वो अपनी असली हालत में माना जायेगा।)


■ ➞   नाबालिग का भरा हुआ पानी उसकी मिल्क हो जाता है (यानी उस की प्रॉपर्टी में दाखिल हो जाता है) लिहाज़ा उसे उसके माँ बाप के इलावा किसी के लिये इस्तिमाल में लाना जाइज़ नहीं अगर्चे वो इजाज़त दे दे क्योंकि नाबालिग अपनी प्रॉपर्टी से कोई चीज़ दूसरे को नहीं दे सकता।

अगर किसी ने ऐसे पानी से वुज़ू कर लिया तो हो जायेगा पर गुनाहगार होगा।


■ ➞   हज़रते अल्लामा मुफ्ती अमजद अ़ली आज़मी लिखते हैं कि इस मस'अले में मुअल्लिमीन (पढ़ाने वालों) को सबक़ लेना चाहिये कि अक्सर वो नाबालिग बच्चों से पानी भरवा कर काम में इस्तिमाल करते हैं, ये जाइज़ नहीं।


■ ➞   अगर किसी बालिग ने पानी भरा है तो उसकी इजाज़त के बिना इस्तिमाल करना हराम है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 79 ♻️


■ ➞  जो पानी नापाक हो उसे अपने इस्तिमाल में लाना जाइज़ नहीं और जानवरों को पिलाना भी जाइज़ नहीं।


■ ➞  ऐसे पानी से गारा (दीवार खड़ी करने के लिये मसाला वग़ैरह) बनाने के काम में ला सकता है।


■ ➞  पानी को अगर कोई इंसान झूटा कर दे तो वो नापाक नहीं होता अगर्चे आदमी नापाक हो या हैज़ो निफ़ास वाली औरत हो या काफ़िर हो सब का झूटा पाक है।


■ ➞  काफ़िर का झूटा पाक है पर उससे बचना चाहिये और उस से नफ़रत करनी चाहिये जैसे थूक, रीन्ठ और बलगम वग़ैरह पाक है पर लोग घिन करते हैं तो काफ़िर के झूटे से इनसे ज़्यादा घिन करनी चाहिये।


■ ➞  किसी के मुँह से खून आ रहा हो और वो तुरंत पानी पिये तो वो पानी और बर्तन नापाक हो जायेगा लिहाज़ा चाहिये कि पहले मुँह को पाक करे फिर पानी पिये।


■ ➞  मुँह दो तरह से पाक हो सकता है, एक तो ये कि पानी से धो कर खून के असर को खत्म कर ले और दूसरा ये कि कई बार थूके ताकि असर ज़ाइल हो जाये, ज़्यादा थूकने से भी तहारत मिल जायेगी जबकि असर बाक़ी ना रहे।


■ ➞  थूक में खून हो तो उसे घूँटना सख्त मना है। ये नापाक है और घूँटना गुनाह है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 80 ♻️


■ ➞  म'आज़ अल्लाह शराब पी कर अगर कोई फौरन पानी पिये तो पानी नापाक हो जायेगा और अगर रुक कर पिया तो थूक के साथ और अज्ज़ा मिल कर चले जायेंगे तो नापाक नहीं पर शराबी के झूटे से बचना चाहिये।


■ ➞  शराबी की मूँछें बड़ी हों और पानी में लगती हों तो जब तक उन्हें पाक ना करे जो पानी पियेगा वो पानी और बर्तन दोनों नापाक हो जायेंगे।


■ ➞  मर्द को गैर औरत का और औरत को गैर मर्द का झूटा अगर मालूम हो कि फुलाँ या फुलानी का झूटा है तो बतौरे लज़्ज़त उस का खाना पीना मकरूह है लेकिन खाने या पानी में कराहत नहीं आयी और अगर मालूम ना हो तो या लज़्ज़त के लिये ना खाया पिया हो तो हरज नहीं बल्कि बाज़ सूरतों में बेहतर है जैसे बा-शरअ आलिम या पीर का झूटा तबर्रुक के तौर पर पीते हैं।


■ ➞  जिन जानवरों का गोश्त खाया जाता है वो चाहे चौपाये हों या परिंदे उन का झूटा पाक है जैसे गाय, बैल, भैंस, बकरी, कबूतर वग़ैरह।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 81 ♻️


■ ➞  जो मुर्गी छूटी फिरती और गलीज़ पर मुँह मारती हो उस का झूटा मकरूह है और अगर बन्द रहती हो तो पाक है।


■ ➞  गाय अगर गलीज़ पर मुँह मारती हो तो इसका झूटा मकरूह है और अगर मुँह पर नजासत लगी है और बिना पाक किये उसने पानी में मुँह डाल दिया तो पानी नापाक हो जायेगा।


■ ➞  उसका मुँह या तो जारी पानी में मुँह डालने से पाक होगा या फिर गैर जारी पानी में तीन जगह से पीने में।


■ ➞  इसी तरह बैल, भैंस और बकरे नरों ने मादा का पेशाब सूँघा और नज़र से गाइब ना हुये और ना इतनी देर गुज़री कि तहारत हो जाये तो पानी में मुँह डाले तो पानी नापाक है।


■ ➞  घोड़े का झूटा भी पाक है। सूअर, कुत्ता, शेर, चीता, गीधड़, भेड़िया, हाथी और दूसरे दरिन्दों का झूटा नापाक है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 82 ♻️


■ ➞  कुत्ते ने बर्तन में मुँह डाला तो वो बर्तन नापाक हो जायेगा।

अगर वो बर्तन धात या चीनी या चिकना है तो तीन बार धोने से पाक हो जायेगा और अगर चिकना नहीं मस्लन मिट्टी का है या चिकना है लेकिन दरार (Crack) है तो हर बार सुखा कर तीन बार धोना होगा सिर्फ धोने से पाक नहीं होगा।


■ ➞  अगर मटके को कुत्ते ने ऊपर से चाटा तो अन्दर का पानी पाक है।


■ ➞  उड़ने वाले शिकारी जानवर जैसे बाज़ और चील वग़ैरह का झूटा मकरूह है और यही हुक्म कौऐ का है और अगर शिकारी परिंदों को शिकार के लिये रखा है तो उन का झूटा पाक है जब तक कि मुँह पर नजासत ना लगी हो।


■ ➞  घर में रहने वाले जानवर जैसे बिल्ली, चूहा, छिपकली, साँप वग़ैरह का झूटा मकरूह है।


■ ➞  अगर बिल्ली किसी का हाथ चाटे तो चाहिये कि फौरन खींच ले और ना चाटने दे, फिर हाथ को धो ले और बगैर धोये नमाज़ पढ़ ली तो हो गई पर खिलाफ़े अवला यानी अच्छा नहीं है।


■ ➞  बिल्ली ने चूहा खाया और बर्तन में मुँह डाल दिया तो नापाक हो गया और अगर ज़ुबान से साफ़ कर लिया कि खून का असर बाक़ी ना रहा तो पाक है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 83 ♻️


■ ➞  पानी में रहने वाले जानवरों का झूटा पाक है चाहे वो पानी में पैदा होते हों या बाहर।


■ ➞  गधे और खच्चर का झूटा मश्कूक है यानी इस में शक है कि उस से वुज़ू होगा या नहीं लिहाज़ा उस से वुज़ू नहीं हो सकता क्योंकि नापाकी (हदस) यक़ीनी है और पानी में शक है तो यक़ीन को शक से दूर नहीं किया जा सकता।


■ ➞  जो झूटा पानी पाक है उस से वुज़ू और गुस्ल जाइज़ है और जो नापाक है उस से जाइज़ नहीं।


■ ➞  अगर मकरूह पानी है तो अच्छा पानी होते हुये उस से वुज़ू मकरूह है और अगर अच्छा पानी मौजूद नहीं तो उस से वुज़ू कर सकते हैं और खाने की चीज़ों में भी यही है कि मालदार के लिये मकरूह है और मुहताज के लिये नहीं।


■ ➞  अच्छा पानी नहीं है और मश्कूक पानी है तो उस से वुज़ू कर सकते हैं फिर तयम्मुम भी करे, बेहतर यही है कि पहले वुज़ू करे फिर तयम्मुम और अगर वुज़ू किया तयम्मुम ना किया या तयम्मुम किया वुज़ू ना किया तो नमाज़ ना होगी।


■ ➞  मश्कूक झूटा खाना पीना नही चाहिये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 84 ♻️


■ ➞  मश्कूक पानी में अगर अच्छा पानी मिल जाये तो अगर अच्छा पानी ज़्यादा है तो वो वुज़ू के लाइक़ हो गया वरना नहीं।


■ ➞  जिस का झूटा नापाक है उस का पसीना और लुआब भी नापाक है और जिस का झूटा पाक है उस का पसीना और लुआब भी पाक है और जिस का झूटा मकरूह है उस का पसीना और लुआब भी मकरूह है।


■ ➞  गधे, खच्चर का पसीना अगर कपड़े पर लग जाये तो कपड़ा पाक है चाहे जितना ज़्यादा लगा हो।


■ ➞  ये तो पानी का बयान हुआ, इस के बाद ये जानना भी ज़रूरी है कि नजासत की कौन-कौन सी क़िस्में हैं और उन के क्या अहकाम हैं।


■ ➞  अब हम नजासत के बारे में तफ़सीली बयान करेंगे कि कौन सी नजासत कितनी लग जाने पर नमाज़ नहीं पढ़ सकते और कितनी लग जाने पर पढ़ सकते हैं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 85 ♻️


■ ➞  नजासत दो तरह की होती हैं : एक नजासते गलीज़ा और एक नजासते खफ़ीफ़ा।


■ ➞  हमने जिस तरह वुज़ू और गुस्ल की तफ़सील में बताया था कि एक छोटी नापाकी होती है और एक बड़ी नापाकी तो यहाँ भी कुछ ऐसा ही है।


■ ➞  एक है छोटी नजासत यानी हल्की नजासत जिसका हुक्म हल्का है और एक है बड़ी नजासत यानी भारी नजासत जिस का हुक्म सख्त है।


■ ➞  जो बड़ी नजासत है यानी नजासते गलीज़ा उस का हुक्म ये है कि अगर एक दिरहम (के साइज़) से ज़्यादा लग जाये तो उसे पाक करना फर्ज़ है वरना नमाज़ नहीं होगी और अगर जान बूझ कर पढ़े तो गुनाहगार है और अगर नमाज़ को हल्का समझ कर ऐसा करे तो ये कुफ्र है।


■ ➞  अगर नजासते गलीज़ा एक दिरहम के बराबर हो तो पाक करना वाजिब है और बिना पाक किये नमाज़ पढ़ी तो आप जानते हैं कि वाजिब का मुक़ाबिल मकरूहे तहरीमी है लिहाज़ा नमाज़ दोहराना वाजिब हो जायेगी और अगर एक दिरहम से कम है तो पाक करना सुन्नत है और बिना पाक किये नमाज़ पढ़ने पर वो नमाज़ सुन्नत के खिलाफ़ होगी जिसका दोहराना ज़रूरी नहीं पर बेहतर है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 86 ♻️


■ ➞  आसानी से यूँ समझें कि अगर जिस्म या कपड़े पर नजासत लगी हो तो बेहतर यही है कि उसे साफ़ कर के नमाज़ पढ़ें लेकिन मसाइल अपनी जगह हैं।


■ ➞  किसी के कपड़े पर एक दिरहम से कम पखाना लग जाये तो वो बगैर धोये नमाज़ नहीं पढ़ेगा, हम जानते हैं लेकिन मसअला जानना ज़रूरी है कि किस नजासत के कितना लगने पर क्या हुक्म है ताकि मजबूरी की हालत में हम कहीं नमाज़ ना तर्क कर दें या मसअले का इल्म ना होने की वजह से कहीं ऐसा ना हो कि हम खुद को नापाक समझ कर नमाज़ ही ना पढ़ें या पढ़ लेने पर नमाज़ को फासिद समझ बैठें।


■ ➞  जब भी नजासत की बात आये तो पहले आपको ये देखना है कि नजासत कौन सी है,मतलब खफ़ीफा या गलीज़ा और ये जान लेने के बाद ये देखना है कि वो नजासत कितनी लगी है।


■ ➞  पहले नजासत की क़िस्म मालूम होनी चाहिये फिर फैसला होगा कि कितनी लगने पर क्या हुक्म होगा लिहाज़ा पहले ये जानना ज़रूरी है कि कौन कौन सी नजासत खफीफ़ा है और कौन सी गलीज़ा।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 87 ♻️


■ ➞  नजासते गलीज़ा के बारे में आप जान चुके हैं कि एक दिरहम का साइज़ देखना होगा लेकिन इस में ये तफ़सील है कि अगर नजासत पतली ना हो बल्कि गाढ़ी हो जैसे पखाना वग़ैरह तो फिर नजासत का साइज़ नहीं बल्कि वज़न देखा जायेगा कि एक दिरहम के वज़न से ज़्यादा तो नहीं और अगर नजासत पतली है जैसे पेशाब, शराब वग़ैरह तो फिर साइज़ देखा जायेगा।


■ ➞  एक दिरहम का वज़न यहाँ पर साढ़े चार माशा होगा और साइज़ हथेली सीधी करने पर जितने हिस्से पर पानी रुक जाये उतना होगा जो कि यहाँ के रूपये के सिक्के के बराबर है (छोटा वाला सिक्का नहीं बल्कि बड़ा रूपये का पुराना सिक्का तक़रीबन वही साइज़ है।)


■ ➞  अब ज़ाहिर सी बात है कि आप सिक्का ले कर या नजासत को तराज़ू पर तौल कर नापेंगे नहीं लेकिन फिक़्ह में हर मुम्किन सूरत के हर पहलू और उसके हुक्म को बयान किया गया है जो कि ज़रूरी भी है लिहाज़ा यहाँ आप अंदाज़ा लगा सकते हैं और समझ सकते हैं कि अस्ल मसअला क्या है।


■ ➞  नजासते खफीफ़ा में दिरहम नहीं बल्कि ये देखा जाता है कि जिस हिस्से पर लगा है उस के एक चौथाई से ज़्यादा पर है या कम है या बराबर।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 88 ♻️


■ ➞  एक चौथाई यानी 25% तो दामन में लगने पर दामन की एक चौथाई, आस्तीन पर लगे तो उसकी एक चौथाई और हाथ पर लगे तो उसकी एक चौथाई से कम होने पर नमाज़ हो जायेगी और अगर पूरी चौथाई पर लगी हो तो नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞  ये जो नजासत में फर्क़ है और दिरहम और चौथाई का फर्क़ है ये तब है जब बात जिस्म या कपड़े की हो अगर पानी में कोई नजासत गिर जाये चाहे खफीफा हो या गलीज़ा तो ये नहीं देखा जायेगा कि दिरहम है या सिक्का है या फिर बर्तन का एक चौथाई है या नहीं बल्कि एक क़तरे से भी पूरा पानी नापाक हो जायेगा (अगर बड़ा हौज़ ना हो तो)


■ ➞  बड़े हौज़ की तफ़सील बयान हो चुकी है कि उस में नजासत पड़ने से पानी नापाक नहीं होता जब तक कि पानी का रंग, बू या मज़ा बदल ना जाये।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 89 ♻️


■ ➞  अब आइये जानते हैं कि नजासते गलीज़ा कौन-कौन सी हैं और खफीफ़ा कौन-कौन सी।


■ ➞  इंसान के बदन से ऐसी चीज़ निकले जिससे वुज़ू या गुस्ल वाजिब (ज़रूरी) हो जाये तो वो नजासते गलीज़ा है जैसे पेशाब, पखाना, मनी, मज़ी, वदी, बहता खून, पीप, भर मुँह क़य (उल्टी), हैज़, निफ़ास और इस्तिहाज़ा का खून।


■ ➞  दुखती आँखों से जो पानी निकले वो नजासते गलीज़ा है और पिस्तान या नाफ़ से भी दर्द की वजह से जो पानी निजले वो नजासते गलीज़ा है।


■ ➞  बल्गम, नाक की रुतूबात वग़ैरह पाक हैं अगर्चे बीमारी की वजह से निकलें या इसी तरह।


■ ➞  दूध पीते लड़के और लड़की का पेशाब नजासते गलीज़ा है, ये जो आवाम में मशहूर है कि दूध पीने वाले बच्चे का पेशाब पाक होता है, ये गलत है।


■ ➞  इसी तरह अगर बच्चे ने उल्टी की और वो भर मुँह थी तो नजासते गलीज़ा है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 90 ♻️


■ ➞  खुश्की के हर जानवर का बहता खून नजासते गलीज़ा है।


■ ➞  मुरदार जानवर का गोश्त और चर्बी भी नजासते गलीज़ा है (यानी ऐसा जानवर जिस में बहता खून होता है और बिना ज़िबहे शरई के मर जाये)


■ ➞  हलाल जानवर को अगर किसी बुत परस्त या मजूसी ने ज़िबह किया तो उस का गोश्त पोश्त सब नापाक हो जायेगा और अगर किसी हराम जानवर को शरई तरीक़े से मुसलमान ने ज़िबह किया तो गोश्त पाक हो जायेगा लेकिन खाना हराम ही रहेगा। खिन्ज़ीर को ज़िबह जिस तरह किया जाये वो नापाक ही रहेगा क्योंकि वो नजिसुल ऐन है।


■ ➞  हराम चौपाये जैसे कुत्ता, शेर, लौमड़ी, बिल्ली, गधा, चूहा, खच्चर, हाथी, सुअर का पखाना पेशाब और घोड़े की लीद  नजासते गलीज़ा है।


■ ➞  हलाल जानवर का पखाना जैसे गाय भैन्स का गोबर, ऊँट और बकरी की मेंगनी नजासते गलीज़ा है।


■ ➞  जो परिंदे ऊँचा नहीं उड़ते मस्लन मुर्गी, बतख वग़ैरह की बीट नजासते गलीज़ा है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 91 ♻️


■ ➞  हर क़िस्म की शराब और नशा लाने वाली ताड़ी नजासते गलीज़ा है।


■ ➞  साँप का पखाना पेशाब और जंगली मेंढक का खून जिन में बहता खून होता है अगरचे ज़िबह किये गये हों, नजासते गलीज़ा है।


■ ➞  सूअर का गोश्त, हड्डी, बाल सब नजासते गलीज़ा है।


■ ➞  हलाल जानवरों का पेशाब नजासते खफीफ़ा है मस्लन गाय, बैल, भैंस, बकरी, ऊँट वग़ैरह।


■ ➞  हराम परिंदे चाहे शिकारी हों या नहीं, उनकी बीट नजासते खफीफ़ा है जैसे कौआ, चील, बाज़ वग़ैरह।


■ ➞  हलाल परिंदे जो ऊँचा उड़ते हैं उनकी बीट पाक है जैसे कबूतर, मैना वग़ैरह।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 92 ♻️


■ ➞   नजासते गलीज़ा और खफीफ़ा मिल जाये तो कुल नजासते गलीज़ा हो जायेगी।


■ ➞   मछली और पानी के दीगर जानवरों का खून और मच्छर और खटमल का खून पाक है और गधे और खच्चर का पसीना और थूक भी पाक है।


■ ➞   पेशाब की निहायत बारीक (सुई की नोक की तरह) छींटे कपड़े या जिस्म पर पड़ जायें तो कपड़ा और जिस्म पाक रहेगा और ऐसा कपड़ा अगर पानी में गिर जाये तो पानी भी पाक ही रहेगा।


■ ➞   जो खून ज़ख्म में हो बहा ना हो वो पाक है।


■ ➞   जेब में शीशी है और उस में पेशाब, खून या शराब है तो नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞   अगर नजासत कपड़े या जिस्म पर एक जगह नहीं बल्कि दो तीन जगह लगी है और मिलाने पर एक दिरहम से ज़्यादा होती है तो धोना फर्ज़ होगा, बिना धोये नमाज़ नहीं होगी यही मजमूए का हुक्म नजासते खफीफ़ा में भी है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 93 ♻️


■ ➞   हराम जानवरों का दूध भी नजासत है अलबत्ता घोड़ी का दूध पाक है मगर खाना जाइज़ नहीं।


■ ➞   चूहे की मेंगनी अगर गेहूँ में मिल कर पिस गयी तो आटा पाक है या तेल में गिर गयी तो तेल पाक है, हाँ अगर इतनी ज़्यादा है कि मज़े (Taste) में फर्क़ आ जाये तो नापाक है।


■ ➞   अगर पकी हुई रोटी में मिले तो आस-पास का थोड़ा सा हिस्सा हटा दें बाक़ी रोटी में कोई हर्ज नहीं।


■ ➞   अगर पाक कपड़ा और नापाक कपड़ा आपस में लिपटा हुआ है और पाक कपड़ा नम हो जाये तो सिर्फ नमी आने की वजह से नापाक ना होगा जब तक कि पाक कपड़े पर नजासत का रंग या बू ज़ाहिर ना हो जाये।

अगर ज़ाहिर हो गया तो नम होने से भी नापाक हो जायेगा।


■ ➞   ये मसअला उस वक़्त का है जब कपड़ा पानी की वजह से नापाक हुआ हो वरना अगर पेशाब या शराब वग़ैरह नजासत लगी है तो फिर नम होने से भी नापाक हो जायेगा।


■ ➞   अगर नापाक कपड़ा पहन कर सोया या नापाक बिस्तर पर सोया और पसीना आया तो अगर पसीने से वो नापाक जगह भीग गयी फिर उस से तरी जिस्म पर लगी तो नापाक हो जायेगा वरना नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 94 ♻️


■ ➞   रास्ते की कीचड़ पाक है जब तक उस का नापाक होना मालूम ना हो।


■ ➞   अगर कपड़े या जिस्म पर लग जाये तो धो कर नमाज़ पढ़ ले और बगैर धोये पढ़नी पढ़े तो भी नमाज़ हो जायेगी, हाँ अगर नजिस होना मालूम है तो फिर धोना ज़रूरी है।


■ ➞   सड़क पर पानी छिड़का जा रहा हो और छीन्टे उड़ कर कपड़ों पर पड़े तो कपड़े पाक हैं, धो कर नमाज़ पढ़ना बेहतर है।


■ ➞   आदमी की खाल अगर नाखून बराबर भी पानी में गिर जाये तो पानी नापाक हो जायेगा।


■ ➞   कुत्ता अगर कपड़े या जिस्म से सट जाये तो नापाक ना होगा।


■ ➞   अगर कुत्ते का जिस्म तर है यानी वो भीगा हुआ है तो भी जिस्म या कपड़े से सट जाने पर नापाकी का हुक्म नहीं है। हाँ अगर, उसके जिस्म पर नजासत लगी है और वो लग जाये तो नापाक हो जायेगा।


■ ➞   अगर कुत्ते की थूक लग जाये तो नापाक हो जायेगा।


■ ➞   अगर कुत्ता आटे में मुँह डाल दे तो जितना तर हुआ उतना हटा दें बाक़ी पाक है।


■ ➞   जो गोश्त सड़ गया यानी खराब हो गया और बदबू आने लगी उसको खाना हराम है लेकिन नजिस नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 95 ♻️


■ ➞   अब ज़रूरी है कि इस्तिन्जा के मसाइल बयान कर दिये जायें :


■ ➞   (1) जब पखाना और पेशाब के लिये जायें तो बेहतर है कि दाखिल होने से पहले दुआ पढ़ लें :


بِسْمِ اللہِ اللھُمَّ اِنِّیْ اَعُوْذُ بِکَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ


■ ➞   ये दुआ पढ़ने के बाद बाया क़दम पहले दाखिल करें और निकलते वक़्त दाहिना क़दम पहले निकालें।


बाहर निकलते वक़्त ये पढ़ें :


غُفْرَانَکَ اَلْحَمْدُ لِلّٰہِ الَّذِیْ اَذْھَبَ عَنِّیْ مَا یُؤْذِیْنِیْ وَاَمْسَکَ عَلَیََّ مَا یَنْفَعُنِیْ


■ ➞   पखाना या पेशाब करते वक़्त ना पीठ क़िब्ला की तरफ करें ना मुँह।


■ ➞   ये हुक्म घर के अन्दर और बाहर मैदान दोनों का है और अगर गलती से भूल कर बैठ जायें तो याद आने पर घूम जायें।


■ ➞   अगर बच्चे को पखाना या पेशाब कराने वाला उसे क़िब्ला की तरफ कराता है तो गुनाहगार होगा।


■ ➞   हवा के रुख पेशाब करना मम्नूअ है। इस से होगा ये कि क़तरे उड़ कर वापस आयेंगे।


■ ➞   कुएँ, हौज़ या जमे हुये पानी या बहते हुये पानी में पेशाब करना मकरूह है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 96 ♻️


■ ➞   फलदार दरख्त के नीचे या उस खेत में जिस में खेती हो या साये में जहाँ लोग उठते बैठते हों या मस्जिद और ईदगाह के पहलू में या क़ब्रिस्तान या रास्ते में या जिस जगह मवेशी बन्धे हों, इन सब जगहों में पेशाब पखाना मकरूह है।


■ ➞   जिस जगह वुज़ू या गुस्ल किया जाता हो वहाँ पेशाब करना मकरूह है।


■ ➞   खुद नीची जगह बैठना और पेशाब ऐसी जगह करना जो ऊँची हो, ये मम्नूअ (मना) है।


■ ➞   सख्त जमीन या पक्के फर्श पर जिस से क़तरे उड़ कर आयें, उस पर पेशाब करना मम्नूअ है।


■ ➞   अगर सख्त जमीन हो तो कुरेद कर या गाढ़ा करके पेशाब करना चाहिये।


■ ➞   खड़े हो कर या लेट कर या नंगे होकर पेशाब करना मकरूह है।


■ ➞   पेशाब या पखाना करते वक़्त नंगे सर नहीं जाना चाहिये।


■ ➞   साथ में कोई ऐसी चीज़ ना ले जायें किस पर कोई दुआ या अल्लाह व रसूल का नाम रखा हो या किसी बुज़ुर्ग का नाम लिखा हो।


■ ➞   पेशाब के वक़्त बात करना मकरूह है।


■ ➞   पेशाब करने में जितना बदन खोलना चाहिये उतना ही खोलें, हाजत से ज़्यादा ना खोलें।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 97 ♻️


■ ➞   पेशाब करते वक़्त बायें पैर पर ज़ोर दे कर  बैठना चाहिये।


■ ➞   पेशाब या पखाना करते वक़्त किसी दीनी मसअले पर गौरो फिक्र ना करें।


■ ➞   छींक या अज़ान का जवाब ज़ुबान से ना दें और बिला ज़रूरत शर्मगाह को ना देखें और ना ही नजासत की तरफ नज़र करें।


■ ➞   पखाने में ज़्यादा देर तक ना बैठें, इस से बवासीर का अंदेशा है।


■ ➞   बाज़ लोग मोबाइल में गेम खेलना शुरू कर देते हैं और फिर पता ही नहीं चलता कि आधे घंटे से टॉयलेट में हैं।


■ ➞   आज कल तो इंग्लिश सीट का रिवाज भी है जिस में आराम से कुर्सी पर बैठने की तरह बैठे रहते हैं। साथ में अमीरों ने तो बाथरूम में भी टीवी तक लगाना शुरू कर दिये हैं ताकि वहाँ भी टाईम पास कर सकें।


■ ➞   नजासत में थूकना या खंकार डालना जाइज़ नहीं क्योंकि ये पाक हैं और पाक चीज़ को नापाक शय में मिलाना दुरुस्त नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 98 ♻️


■ ➞   जब इस्तिन्जा से फारिग हो जायें तो मर्द बायें हाथ से अपने आले को जड़ से सिरे की तरफ सोन्टे ताकि बाक़ी क़तरे निकल आयें। फिर ढेलों का इस्तिमाल करें, अगर पानी से तहारत करनी है तो पानी से धो लें।


■ ➞   पखाना के बाद पहले पेशाब के मक़ाम को धोयें फिर पखाना के मक़ाम को और साँस को नीचे की तरफ ज़ोर दे कर पखाना का मक़ाम धोयें।


■ ➞   आगे या पीछे से जब नजासत निकले तो ढेलों से तहारत हासिल करना सुन्नत है। 


■ ➞   और अगर सिर्फ पानी से भी तहारत कर लें तो जाइज़ है मगर मुस्तहब ये है कि ढेले लेने के बाद पानी से तहारत करें।


■ ➞   ढेलों की कोई तादाद मुअ़य्यन (Fix) नहीं है, अगर एक से साफ़ हो जाये तो सुन्नत अदा हो जायेगी और अगर तीन ढेलों से साफ़ ना हो तो सुन्नत अदा ना हुई।


■ ➞   बेहतर ये है कि ढेले ताक़ (Odd) हो यानी अगर 2 से तहारत हो गई तो एक और ले कर तीन कर दें और अगर चार से हो हो जाये तो एक और ले कर पाँच कर दें।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 99 ♻️


■ ➞   ढेलों से तहारत उस वक़्त होगी जब नजासत मखरज के आस पास एक दिरहम से ज़्यादा ना लगी हो।


■ ➞   अगर दिरहम से ज़्यादा लग जाये तो अब धोना फर्ज़ है लेकिन ढेले लेना अब भी सुन्नत रहेगा।


■ ➞   कंकर, पत्थर, फटा हुआ पुराना कपड़ा ये सब ढेले के हुक्म में है यानी इन्हें भी इस्तिमाल कर सकते हैं।


■ ➞   इन से भी सफाई बिला कराहत जाइज़ है।


■ ➞   दीवार से भी इस्तिन्जे को सुखा सकता है पर दीवार अपनी होनी चाहिये, किसी दूसरे की दीवार पर नहीं।


■ ➞   अगर दूसरे की है या वक़्फ है तो ऐसा करना मकरूह है पर तहारत हो जायेगी।


■ ➞   हड्डी, खाने की चीज़, गोबर, पक्की ईंट, कोयला, शीशा और जानवर का चारा और ऐसी चीज़ जिस की क़ीमत हो अगर्चे एक आध पैसा ही सही तो उस से इस्तिन्जा करना मकरूह है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 100 ♻️


■ ➞   कागज़ से इस्तिन्जा मना है, अगर्चे कुछ लिखा हुआ ना हो या अबू जहल जैसे काफ़िर का नाम ही क्यों ना लिखा हो।


■ ➞   आज कल टिशू पेपर का इस्तिमाल आम होता जा रहा है।


■ ➞   अल्लामा नसीरुद्दीन मदनी लिखते हैं कि टिशू पेपर भी कागज़ की ही एक क़िस्म है जैसा कि नाम से जाहिर है।


■ ➞   खाना खाने के बाद इस का इस्तिमाल मकरूह है जैसा कि बहारे शरीअ़त में है कि खाने के बाद कागज़ से उंगलियाँ पोछना मकरूह है।


■ ➞   फ़तावा आलमगीरी, फ़तावा रज़विया और उस के हाशिये में मुफ्ती -ए- आज़म रहीमहुल्लाह त'आला ने लिखा है कि खाने के बाद कागज़ से हाथ नहीं पोछना चाहिये।


■ ➞   इस्तिन्जे में इसका इस्तिमाल मकरूहे तहरीमी है कि इस्तिन्जे के लिये मख्सूस चीज़ों के लिये हर मुहतरम और क़ीमती चीज़ का इस्तिमाल मकरूह है, इसके अलावा ये सुन्नते नसारा है और तर्के सुन्नते मुअक्किदा की आदत खुद मोजिबे कराहते तहरीमी है और ये टिशू पेपर का इस्तिमाल उमूमे बलवा भी नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 101 ♻️


■ ➞   टिशू-पेपर से इस्तिन्जा करने के बारे में अ़ल्लामा मुफ़्ती अख़्तर हुसैन क़ादरी लिखते हैं कि टिशू-पेपर के लफ़्ज़ से ही वाज़ेह है कि वो काग़ज़ है और काग़ज़ की ताज़ीम का हुक्म है, अगर्चे सादा हो, और अगर कुछ लिखा है तो और ज़्यादा ताज़ीम की ज़रूरत है, और किसी भी क़ाबिले ताज़ीम या क़ीमत वाली चीज़ से इस्तिन्जा करना मकरूह व मम्नूअ है।


■ ➞   दुर्रे मुख़्तार में है कि किसी क़ाबिले-ताज़ीम चीज़ से इस्तिन्जा करना मकरूहे तहरीमी है।


■ ➞   फिर लिखते हैं कि काग़ज़ से इस्तिन्जा इसीलिये मकरूह है कि पहले तो वो चिकना होता है, दूसरा उसकी क़ीमत होती है, तीसरा ये कि वो आला -ए- किताबत है यानी लिखने के लिये होता है।


■ ➞   टिशू-पेपर में चिकनाहट तो नहीं होती लेकिन लिखने के क़ाबिल होता है और अगर ये बात ना मानी जाये तो फिर भी उसकी क़ीमत तो होती ही है और इसके मकरूह होने की सराहत मौजूद है।


■ ➞   काग़ज़ से इस्तिन्जा करना सुन्नते नसारा भी है लिहाज़ा इसका इस्तिमाल करना मकरूहे-तहरीमी है और मुसलमानों को इससे बचना चाहिये।..✍🏻


📔 فتاوی علیمیہ، ج1، ص103


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 102 ♻️


■ ➞   तनवीरुल फ़तावा में है कि काग़ज़ से इस्तिन्जा मना है और इसकी वजह उसका लिखने के क़ाबिल होना है लेकिन जो टिशू पेपर (Toilet Paper) होते हैं वो ख़ास कर इस्तिन्जे के लिये ही बनाये जाते हैं और लिखने के क़ाबिल नहीं होते तो इनसे इस्तिन्जा करना जाइज़ है।


📕 تنویر الفتاوی، ص122


■ ➞   उलमा ने इसे नाजाइज़ भी लिखा है और जाइज़ भी। ऐसा इसीलिये कि ये काग़ज़ तो है पर ये लिखने के क़ाबिल नहीं होता।


■ ➞   बाज़ ने कहा कि अगर्चे लिखने के क़ाबिल नहीं लेकिन क़ीमती है और ये तरीक़ा नसारा का है तो इस्तिमाल जाइज़ नहीं और बाज़ कहते हैं कि जाइज़ है बेहतर यही है कि टिशू पेपर के इस्तिमाल से बचा जाये और खाने के बाद भी इससे हाथ पोंछने से बचें।


■ ➞   आज कल शादियों में टेबल पर काग़ज़ बिछाने का रिवाज है फिर उससे सब हाथ भी पोंछते हैं, टिशू पेपर का भी इस्तिमाल हो रहा है। इन सब से बचा जाये सिर्फ़ टेबल पर भी खाना खाया जा सकता है और पोंछने के लिये तौलिये, रूमाल वग़ैरह का इन्तिज़ाम करना बेहतर होगा। लेकिन ये भी ज़ेहन में रखें कि ये सिर्फ़ बेहतर सूरत है यानी अगर कोई ऊपर बताई गई सूरतों में काग़ज़ का इस्तेमाल करता है तो भी वो गुनहगार नहीं होगा


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 103 ♻️


■ ➞   दाहिने हाथ से इस्तिन्जा करना मकरूह है, अगर बायें हाथ में कोई तकलीफ़ है तो दाहिने हाथ से जाइज़ है।


■ ➞   आले को दाहिने हाथ से छूना या ढेला लेकर उस पर गुज़रना भी मकरूह है।


■ ➞   जिस ढेले को एक बार इस्तिमाल कर लिया उसे दोबारा इस्तिमाल में लाना मकरूह है, हाँ उसकी करवट जो साफ़ है उससे इस्तिन्जा कर सकते हैं।


■ ➞   पेशाब करने के बाद जिसको ये एह्तिमाल है कि क़तरा आयेगा उस पर इस्तिबरा करना वाजिब है यानी पेशाब करने के बाद कोई ऐसा काम करना जिससे बाक़ी क़तरे आ जायें। इस्तिबरा टहलने से होता है या पाँव के ज़मीन पर मारने से या दाहिने पाँव को बायें या बायें को दाहिने पर रख के ज़ोर देने से या बुलंदी से उतरने में या नीचे से बुलंदी पर चढ़ने से या खंकारने से या बायें करवट पर लेटने से तो इस तरह इस्तिबरा किया जा सकता है और इस्तिबरा उस वक़्त तक करे जब तक इत्मिनान ना हो जाये।


■ ➞   टहलने की मिक़्दार बाज़ उलमा ने 40 क़दम बतायी है यानी 40 क़दम चले और फिर जाकर तहारत कर ले लेकिन बेहतर है कि जितने में इत्मिनान हो जाये उतना चलें और ये हुक्म मर्दों के लिये है। औरतों को चाहिये कि फ़ारिग़ होने के बाद थोड़ी देर रुक कर तहारत कर लें।


■ ➞   पख़ाने के बाद पानी से तहारत का तरीक़ा ये है कि पाँव फैलाकर बैठे और आहिस्ता-आहिस्ता पानी डाले और उंगलियों के पेट से धोये, उंगलियों के सिरे इस्तिमाल ना करे। बीच की उंगली को ऊँची रखे फिर उस के बग़ल वाली फिर सबसे छोटी वाली और अच्छी तरह धोये।


■ ➞   हथेली से भी धोने से तहारत हो जायेगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 104 ♻️


■ ➞   पख़ाने के बाद औरत हथेली से धोये और मर्द के मुक़ाबिल ज़्यादा फैल कर बैठे।


■ ➞   तहारत के बाद हाथ पाक हो गये पर दोबारा मिट्टी से धो लेना मुस्तहब है। आज कल लोग साबुन या हैण्ड वॉश इस्तिमाल करते हैं ये भी जाइज़ है।


■ ➞   जाड़े में पख़ाने के बाद धोने में ज़्यादा एहतियात करें। गर्म पानी से भी करें तो अच्छी तरह धोयें पर ठंडे पानी से ही बेहतर है।


■ ➞   रोज़े के दिनों में ना ज़्यादा फैल कर बैठे और ना धोने में ज़्यादा मुबालिग़ा करे।


■ ➞   मर्द इस्तिन्जा ना कर सकता हो तो बीवी, और बीवी माज़ूर हो तो शौहर करा सकता है। अगर औरत का शौहर नहीं तो बेटा, भाई, बाप, बहन कोई भी करा सकता, फिर माफ़ है।


■ ➞   ज़मज़म के पानी से इस्तिन्जा करना मकरूह है और ढेला ना लिया हो तो नाजाइज़ है।


■ ➞   वुज़ू से बचे हुये पानी से इस्तिन्जा ख़िलाफ़े-अवला है।


■ ➞   तहारत से बचे हुये पानी से वुज़ू कर सकते हैं, इसे फेंक देना इसराफ़ है।


■ ➞   अब तक ये इस्तिन्जे के बारे में ज़रूरी मसाईल बयान किये गये। तहारत में और भी बातें आती हैं जैसे तयम्मुम, तयम्मुम किन चीज़ों से होता है, मोज़ों पर मसहा, मसहा कब टूट जाता है, ये सब नमाज़ के मसाईल बयान करने के बाद बयान होंगे ( ا ن شاء الله عزوجل )। अब अगली पोस्ट से हम शराइते-नमाज़ और फ़राइज़े-नमाज़ की तरफ़ चलेंगे... ا ن شاء الله عزوجل✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 105 ♻️


■ ➞   नमाज़ की पहली शर्त "तहारत" है और इसके अन्दर कई बातें आती हैं जिनमें से तक़रीबन अक्सर पर हमने पिछली Posts में बात की। अब ये जान लें कि नमाज़ी का बदन, उसके कपड़े और जहाँ नमाज़ पढ़ता है उस जगह का पाक होना ज़रूरी है।


■ ➞   अब कुछ और ज़रूरी मसाईल पर बात करते हैं :


■ ➞   अगर किसी ने अपने आप को बे'वुज़ू गुमान कर के नमाज़ पढ़ी और पढ़ने के बाद मालूम हुआ कि वुज़ू था तो नमाज़ नहीं होगी क्योंकि नमाज़ शुरू करते वक़्त वो अपने आप को बे-वुज़ू गुमान करता था।


■ ➞   अगर नमाज़ के दौरान नजासत लग गयी ( ख़फ़ीफ़ा या ग़लीज़ा की तफ़सील बयान हो चुकी है। ), तो तीन बार तस्बीह ( सुब्हान-अल्लाह ) कहने ( में जितना वक़्त लगता है ) का वक़्फ़ा हुआ तो नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞   नमाज़ के दौरान हैज़ो-निफ़ास वाली औरत या कोई नापाक छू जाये तो नमाज़ हो जायेगी।


■ ➞   जिस जगह नमाज़ पढ़ता हो उसका उतना ही पाक होना ज़रूरी है जितने पर सर, पैर और हाथ रखता हो, पूरी जगह का पाक होना शर्ते-सिह्हते-नमाज़ नहीं। इसको इस तरह समझें कि अगर सजदे में पेशानी और हथेलियों के टिकने की जगह और घुटनों के बीच की जगह नापाक है तो उससे नमाज़ पर फ़र्क़ नहीं पड़ेगा क्योंकि इस जगह जिस्म का कोई हिस्सा पूरी नमाज़ के दौरान Touch नहीं होता।


■ ➞   नमाज़ी के एक पैर के नीचे दिरहम से ज़्यादा नजासत हो तो नमाज़ ना होगी।


■ ➞   अगर सजदा करते वक़्त दामन वग़ैरह नजिस (नापाक) ज़मीन पर पड़ता हो तो नमाज़ हो जायेगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 106 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा

पिछली पोस्ट में हमने नमाज़ की पहली शर्त यानि तहारत को समझा, आज नमाज़ की दूसरी शर्त यानि सित्रे-औरत पर बात करते हैं-

■ ➞   नमाज़ की दूसरी शर्त है सित्रे-औरत यानी जिस्म के उन हिस्सों को छुपाना जिनको छुपाना ज़रूरी है।


■ ➞   सित्रे औरत नमाज़ के अलावा भी ज़रूरी है। तन्हा हो या किसी के सामने सित्रे-औरत बिला ज़रूरत खोलना जाइज़ नहीं है।


■ ➞   लोगों के सामने और नमाज़ में तो सित्र बिल इज्मा फ़र्ज़ है यहाँ तक कि अगर अन्धेरा मकान है और कोई नहीं और अपने पाक कपड़े हैं जो सित्रे-औरत के लिये काफ़ी हैं, फिर बग़ैर कपड़ों के नमाज़ पढ़ी तो बिल इज्मा नमाज़ ना होगी।


■ ➞   औरत जब अकेले हो तो पूरे बदन को छुपाना वाजिब नहीं बल्कि नाफ़ से घुटनों तक और महारिम ( यानी जिनसे निकाह नहीं हो सकता, उन ) से सीना,पेट और पीठ छुपाना भी वाजिब है और ग़ैर-मेहरम ( यानी जिनसे निकाह हो सकता है, उन ) के सामने और नमाज़ के लिये ( अगरचे बन्द कमरे में अन्धेरे में हो ) पूरा बदन छुपाना फ़र्ज़ है, सिवाये पाँच उज़्व (Parts) के जिनका ज़िक्र आगे होगा  ا ن شاء الله عزوجل।


■ ➞   जवान औरतों को ग़ैर-मर्दों के सामने मुँह खोलना भी मना है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 107 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞   इतना बारीक कपड़ा जिस से जिस्म झलकता हो, सित्र के लिये काफ़ी नहीं है और अगर इसे पहन कर नमाज़ पढ़ी तो ना हुयी।


■ ➞   अगर चादर या दुपट्टे में से औरतों के बालों की सियाही ( Blackness ) चमकी तो नमाज़ ना होगी।


■ ➞   ऐसा कपड़ा नमाज़ के इलावा पहनना भी हराम है जिससे सित्र-पोशी ना हो सके।


■ ➞   ऐसा कपड़ा जो जिस्म से बिल्कुल चिपका हुआ हो ( जैसे आज कल लड़कों की जीन्स और लड़कियों की लेगिन्ग्स वग़ैरह ) तो इसमें अगर जिस्म ना झलकता हो तो नमाज़ हो जायेगी पर किसी दूसरे को उस तरफ़ नज़र करना जाइज़ नहीं और ऐसा कपड़ा लोगों के सामने पहनना भी मना है।


■ ➞   औरतों को तो हरगिज़ ऐसे चुस्त ( Tight ) कपड़े नहीं पहनना चाहिये।


■ ➞   नमाज़ के लिये कपड़े का पाक होना ज़रूरी है, अगर पाक कपड़ों पर क़ुदरत होते हुये भी नापाक कपड़ों के साथ नमाज़ पढ़ी तो नमाज़ ना होगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 108 ♻️


■ ➞   अगर इल्म में है कि कपड़ा नापाक है और नमाज़ पढ़ ली फिर नमाज़ पढ़ने के बाद मालूम हुआ कि पाक था तो नमाज़ नहीं हुई।


■ ➞   नमाज़ के इलावा नापाक कपड़ा पहना तो हर्ज नहीं जबकि पाक कपड़ा मौजूद हो और अगर पाक मौजूद ना हो तो उसी को पहनना वाजिब है।


■ ➞   ये उस वक़्त है जब कपड़े पर नजासत सूखी हुई हो कि छूट कर बदन पर ना लगे वरना फिर पाक कपड़े के होते हुये ऐसा पहनना मना है कि जिस्म को बिला वजह नापाक करना है।


■ ➞   मर्द के जिस्म में नाफ़ के नीचे से ले कर घुटनों तक का हिस्सा औरत है।


■ ➞   यानी इसे छुपाना फर्ज़ है।


■ ➞   नाफ़ इस में दाखिल नहीं, घुटने दाखिल हैं।


■ ➞   कुछ लोग रान और घुटने को लोगों के सामने खुला रखते हैं, ये हराम है।


■ ➞   और अगर आदत है तो फासिक़ हैं।


■ ➞   आज कल तो ये बुरा ही नहीं समझा जाता मुहल्ले पड़ोस में गर्मी के मौसम में जिसे देखो हाफ़ पेंट (बरमूडा) पहन कर औरतों और मर्दों से बात चीत हँसी मज़ाक़ करते नज़र आते हैं।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 109 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞   औरतों का पूरा जिस्म औरत है यानी छुपाना ज़रूरी है, सिवाये चेहरे की टिकली, हथेलियों और पैरों के तलवों के।


■ ➞   सर से लटके हुये बाल, कलाईयाँ, गर्दन, पीठ वग़ैरह सब छुपाना ज़रूरी है।


■ ➞   अभी हाल ये है कि औरतें बालों को खुला रखती हैं, आधी ( Half ) आस्तीन के सूट पहनती हैं, जिससे आधे से ज़्यादा बाज़ू का हिस्सा नज़र आता है। फिर सूट में गले के ऐसे-ऐसे डिज़ाइन चले हुये हैं कि गला, गर्दन और पीठ का हिस्सा भी नज़र आता है, जो कि बिल्कुल नाजाइज़ो हराम है।


■ ➞   ऐसे कपड़े पहन कर औरतें बाज़ार का चक्कर लगा कर आ जाती हैं पर ग़लत नहीं समझा जाता और ग़लत कहने वालों की निय्यत को ही ग़लत क़रार दिया जाता है।


■ ➞   शादियों पार्टियों में तो पर्दे नाम की चीज़ ही नहीं होती, सिवाये टेन्ट में जो पर्दा इस्तिमाल होता है।


■ ➞   दुपट्टा भी ऐसा होता है कि बस नाम का दुपट्टा होता है वरना उससे छुपता कुछ नहीं।


■ ➞   हमें चाहिये कि अपनी बीवियों, बेटियों को पर्दे का हुक्म दें और बे-पर्दा और बिला ज़रूरत बाहर जाने से रोकें।


■ ➞   आज ऐसा करने वालों को ज़ालिम और औरतों के हुक़ूक़ को दबाने वाला कहा जाता है, हालाँकि ऐसा हरगिज़ नहीं है।


■ ➞   अस्ल में ज़ालिम वो है जो औरतों को बरहना कर के सबके सामने डालना चाहते हैं जबकि शरीअ़त उन्हें इज़्ज़त की ज़िंदगी गुज़ारने का हुक्म देती है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 110 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞   औरत ने अगर इतना बारीक दुपट्टा ओढ़कर नमाज़ पढ़ी जिससे बालों की सियाही (Blackness) चमकी तो नमाज़ ना होगी जब तक उस पे कोई ऐसी चीज़ ना ओढ़े जिससे बालों की रंगत छुप जाये।


■ ➞   जिन आज़ा (हिस्सों) को नमाज़ में छुपाना फ़र्ज़ है, उनमें से किसी हिस्से का एक चौथाई हिस्सा (25%) खुला रहे तो नमाज़ ना होगी।


■ ➞   अगर नमाज़ के दौरान खुल गया और फ़ौरन छुपा लिया तो नमाज़ हो जायेगी।


■ ➞   अगर एक चौथाई हिस्सा खुला और एक रुक्न के बराबर खुला रहा (यानी जितनी देर में तीन बार सुब्हान अल्लाह कहा जा सके ) तो नमाज़ ना होगी।


■ ➞   अगर जानबूझकर खोला और छुपा लिया तो नमाज़ ना होगी।


■ ➞   अगर एक चौथाई से कम खुला था तो नमाज़ हो जायेगी।


■ ➞   अगर एक चौथाई से ज़्यादा हिस्सा खुला हुआ था और इस हालत में नमाज़ शुरू की तो नमाज़ शुरू ही नहीं होगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 111 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞   जिस्म के जिन हिस्सों को छुपाना ज़रूरी है तो मतलब ये है कि दूसरों की नज़र ना पड़े, अपनी पड़ जाये तो नमाज़ हो जायेगी, मसलन किसी ने लम्बा कुर्ता पहना और पजामा नहीं पहना तो कुर्ते के गिरेबान से देखेगा तो आज़ा नज़र आयेंगे, इस हालत में नमाज़ हो जायेगी लेकिन जानबूझकर देखना मकरूहे तहरीमी है।


■ ➞   अब ये सवाल आता है कि कैसे जानेंगे कि एक चौथाई सित्र खुला है या नहीं, तो मर्द के जिस्म में जो हिस्से छुपाना ज़रूरी है उन्हें 9 हिस्सों में बांटा गया है, इन 9 हिस्सों में से जब किसी हिस्से से कुछ खुला हुआ हो तो उसी हिस्से की चौथाई देखी जायेगी।


❶ ➞  पहला है ज़कर (Penis) अपने तमाम आज़ा के साथ यानी ख़तना शुदा हो तो हश्फ़ा, क़स्बा और ग़ैर ख़तना शुदा हो तो क़ुल्फ़ा।


❷ ➞  दूसरा है उन्सयैन ( ख़सियतैन, फ़ौते, दोनों ख़सिये, Testes)


❸ ➞  दुबूर यानी पख़ाने का मक़ाम


❹ ➞  एक सुरीन


❺ ➞  दूसरी सुरीन


❻ ➞  एक रान ( घुटना भी शामिल है )


❼ ➞  दूसरी रान ( घुटना भी शामिल है )


❽ ➞  नाफ़ के नीचे से उज़्वे तनासुल की जड़ तक और इसके पुश्त और करवटों का हिस्सा मिला कर


❾ ➞  दुबूर और ख़सियतैन के बीच की जगह!...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 112 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞   औरत के जिस्म में 5 हिस्सों को छोड़कर ( यानी दोनों हथेली, दोनों पैरों के तलवे और चेहरे की टिकली ) बाक़ी पूरा बदन औरत है, जिसको छुपाना ज़रूरी है और इसे 30 हिस्सों में बाँटा गया है यानी अगर कोई हिस्सा खुला हो तो वो इन 30 हिस्सों के हिसाब से देखा जायेगा कि एक चौथाई है या नहीं।


■ ➞  अगर किसी हिस्से का एक चौथाई खुला हो तो नमाज़ नहीं होगी।


❶ ➞  सर (यानी पेशानी के ऊपर से नीचे गर्दन तक और एक कान से दूसरे कान तक, यानी आदतन जितनी जगह पर बाल जमते हैं।)


❷ ➞  बाल जो लटके हों।


❸ ➞ ❹ दोनों कान।


❺ ➞ गर्दन (इसमें गला भी दाख़िल है।)


❻ ➞ ❼ दोनों शाने (Shoulders)


❽ ➞ ❾ दोनों बाज़ू ( इनमें कोहनियाँ भी दाख़िल हैं। )


❶⓿ ➞ ❶❶ दोनों कलाईयाँ ( यानी कोहनियों के बाद से गट्टों तक )


❶❷ ➞  सीना ( यानी गले के जोड़ से दोनों पिस्तान के नीचे तक )...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 113 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


❶❸ ➞ ❶❹ दोनों हाथों की पुश्त ( हथेली का उल्टा हिस्सा )


❶❺ ➞ ❶❻ दोनों पिस्तान जबकि अच्छी तरह उठे हुये हों और अगर उभरे हुये ना हों तो सीने के ताबे में है।


❶❼ ➞ पेट ( यानी सीने की हद से नीचे नाफ़ के नीचे तक, इसमें नाफ़ भी दाख़िल है। )


❶❽ ➞ पीठ ( यानी पीछे के जानिब सीने की हद से कमर तक )


❶❾ ➞ दोनों शानों के बीच में जो जगह है ( बग़ल के नीचे से सीने की निचली हद तक दोनों करवटों में जो जगह है इसका अगला हिस्सा सीने में और पिछला हिस्सा शानों या पीठ में शामिल है और इसके बाद से दोनों करवटों में कमर तक जो जगह है इसका अगला हिस्सा पेट में और पिछला हिस्सा पीठ में दाख़िल है। )


❷⓿ ➞ ❷❶ दोनों सुरीन।


❷❷ ➞ फ़र्ज़।


❷❸ ➞ दुबूर।


❷❹ ➞ ❷❺ दोनों रानें ( घुटने भी इसमें शामिल हैं। )


❷❻ ➞ नाफ़ के नीचे से शर्मगाह तक जो जगह है वो पीछे समेत पुश्त की तरफ़ वाला हिस्सा मिलाकर एक औरत है।


❷❼ ➞ ❷❽ दोनों पिंडलियाँ टख़नों समेत।


❷❾ ➞ ❸⓿ दोनों तलवे ( बाज़ उलमा ने पाऊँ की पुश्त और तलवों को सित्रे औरत में दाख़िल नहीं किया है। )...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 114 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞  पिछली Posts में बताए गये ये 30 हिस्से वो हैं जिनमें से हर एक मुस्तक़िल सित्र है यानी किसी एक का भी एक चौथाई सित्र खुला हो तो नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞  औरत का चेहरा अगर्चे औरत नहीं ( यानी इसका छुपाना फ़र्ज़ नहीं ) मगर फ़ितने की वजह से ग़ैर-महरम के सामने खोलना मना है।


■ ➞  दुर्रे मुख़्तार में है कि जवान औरतों को चेहरा दिखाने से रोका जाये ( क्योंकि इसमें फ़ितने का ख़ौफ़ है। )


■ ➞  और बुढ़िया के लिये कोई हर्ज नहीं कि इसमें फ़ितने का ख़ौफ़ नहीं।


■ ➞  मर्दों के लिये भी ग़ैर-महरम औरतों की तरफ़ नज़र करना मना है।


■ ➞  अगर किसी मर्द के पास कोई जाइज़ कपड़ा ना हो और रेशम का कपड़ा हो ( जिसका पहनना मर्द के लिये नाजाइज़ है ) तो सित्र छुपाने के लिये उसी को पहनना फ़र्ज़ है और उसी में नमाज़ पढ़ना अलबत्ता जाइज़ कपड़ा होते हुये रेशम का कपड़ा पहनना हराम है।..✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 115 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞  कोई बरहना शख़्स अगर अपना जिस्म सर के साथ एक कपड़े से छुपा कर नमाज़ पढ़े तो नमाज़ ना होगी और अगर सर निकला हुआ है तो नमाज़ हो जायेगी।


■ ➞  किसी के पास बिल्कुल कपड़ा नहीं तो बैठ कर नमाज़ पढ़े। ( ऐसा बहुत कम बल्कि ना के बराबर होता है मगर मस'अला मालूम होना चाहिये, इसलिए ज़िक्र किया गया। )


■ ➞  और बरहना नमाज़ पढ़ते हुये रुकू'अ़ और सजदों की जगह इशारा किया जाये।


■ ➞  बरहना नमाज़ पढ़ते हुये किसी ने कपड़ा दे दिया तो नमाज़ जाती रहेगी अब कपड़ा पहन कर पढ़े और किसी ने कपड़े देने का वादा किया है तो आख़िर वक़्त तक इन्तिज़ार करे और ना मिलने पर बरहना नमाज़ पढ़ ले।


■ ➞  अगर ऐसा कपड़ा है जो पूरा नजिस है तो उसे पहन कर नमाज़ ना पढ़े और अगर एक चौथाई पाक है तो उसे पहन कर नमाज़ पढ़ना वाजिब है।इस सूरत में बरहना नमाज़ पढ़ना जाइज़ नहीं होगा।


■ ➞  ये उस वक़्त है कि जब कपड़े को पाक करने के लिये कोई भी इंतिज़ाम ना हो वरना फिर ऐसा कपड़ा पहन कर नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞  मजबूरी में घास, पत्तों वग़ैरह से सित्र भी किया का सकता है।


■ ➞  अगर इतना कपड़ा है कि पूरा सित्र नहीं होगा बल्कि बाज़ हिस्सा होगा तो उतना ही छुपाना वाजिब है।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 116 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞  जिसने मजबूरी में बरहना ( बिना कपड़ों के ) नमाज़ पढ़ी हो उस पर कपड़ा मिल जाने के बाद नमाज़ को दोहराना ज़रूरी नहीं है।


■ ➞  अगर सित्र का कपड़ा या उसके पाक करने की चीज़ का ना मिलना बन्दों की तरफ़ से हो तो नमाज़ पढ़े लेकिन फिर दोहरा ले।


■ ➞  ये अब तक नमाज़ की दूसरी शर्त की तफ़सील बयान हुई, अब नमाज़ की तीसरी शर्त की बात करते हैं।


■ ➞  नमाज़ के शराइत का मतलब ये है कि नमाज़ शुरू करने से पहले ये ज़रूरी हैं। तभी आप नमाज़ में दाख़िल (Enter) हो सकते हैं यानी इनके पूरा होने पर ही नमाज़ शुरू की जा सकती है। फिर नमाज़ के अंदर जो फ़राइज़ हैं वो अलग हैं।


■ ➞  नमाज़ की तीसरी शर्त हैं "इस्तिक़बाले क़िब्ला" यानी रुख़ क़िब्ला की तरफ़ होना चाहिये वरना नमाज़ शुरू ही नहीं होगी।


■ ➞  इसके बारे में भी कुछ मसाईल हैं जिन्हें जानना ज़रूरी है।


■ ➞  नमाज़ सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ﷻ के लिये ही पढ़ी जाती है, क़िब्ला के लिये नहीं लिहाज़ा अगर कोई क़िब्ला के लिये सजदा करे तो हराम और गुनाहे-कबीरा है और अगर क़िब्ले की इबादत की निय्यत से करे तो काफ़िर है।


■ ➞  क़िब्ला किसी जिहत का नहीं बल्कि का'बा की तरफ़ मुँह करने का नाम है, अब वो इस पर मुन्हसिर है कि पढ़ने वाला कहाँ से पढ़ रहा है।


■ ➞  काबे के अंदर नमाज़ पढ़ी तो जिधर चाहे रुख़ करे नमाज़ हो जायेगी और छत पर भी लेकिन छत पर चढ़ना मम्नूअ है।


■ ➞  का'बे की तरफ मुँह है और 45 डिग्री से कम हटा हुआ है तो भी नमाज़ हो जायेगी। 45 डिग्री से ज़्यादा हटा हुआ हो तो नमाज़ ना होगी।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 117 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞  काबा सिर्फ़ अपनी ज़ाहिरी ऊँचाई तक ही क़िब्ला नहीं बल्कि सातवीं ज़मीन से अर्श तक क़िब्ला है तो कोई कितनी ही ऊँची इमारत पर या बिल्डिंग या पहाड़ पर नमाज़ पढ़े तो काबे की तरफ़ रुख़ करने से नमाज़ हो जायेगी।


■ ➞  अगर काबा किसी वली की ज़ियारत के लिये गया हुआ हो तो महज़ फ़िज़ा की तरफ मुँह करने से नमाज़ हो जायेगी, जहाँ काबा गया है उधर मुँह करने से नहीं होगी।


■ ➞  अगर कोई ऐसा शख़्स है जो क़िब्ला की तरफ़ मुड़ नहीं सकता मसलन बहुत बीमार है या कमज़ोर है और उसे क़िब्ला रुख़ करने वाला कोई नहीं तो जिस तरफ़ चाहे नमाज़ पढ़ ले और दोहराने की भी ज़रूरत नहीं है।


■ ➞  चलती कश्ती में नमाज़ पढ़े तो निय्यत बांधते वक़्त क़िब्ला की तरफ़ मुँह करे और फिर जैसे-जैसे कश्ती घूमती जाये ये भी क़िब्ला की तरफ़ घूमता जाये अगर्चे नफ़्ल नमाज़ हो।


■ ➞  अगर कोई शख़्स क़ैद में है और उसे क़िब्ला की तरफ़ रुख़ करने नहीं दिया जा रहा तो जैसे चाहे नमाज़ पढ़ ले बाद में मौक़ा मिलने पर दोहरा ले।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 118 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞  अगर कहीं ऐसी जगह पर हो जहाँ क़िब्ला की शिनाख़्त ना हो सके, ना कोई मुसलमान हो जो बताये और ना वहाँ मस्जिद हो ना सूरज निकला हुआ हो, ना चाँद-तारे निकले हुये हों या इन सब से क़िब्ला मालूम करने का तरीक़ा मालूम ना हो तो ऐसे में सोचें कि क़िब्ला किधर होना चाहिये और अन्दाज़ा लगायें फिर जिधर दिल जम जाये उधर मुँह कर के नमाज़ पढ़ें।


■ ➞  ऐसे में अगर नमाज़ पढ़ने के बाद मालूम हुआ कि क़िब्ला उधर नहीं था बल्कि दूसरी तरफ़ था तो नमाज़ हो गयी और दोहराने की भी ज़रूरत नहीं।


■ ➞  अगर बिना तहर्री किये ( यानी क़िब्ला की शिनाख़्त के लिये जुस्तजू और सोचे बगैर ) नमाज़ पढ़ी तो नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞  अगर बिना सोचे-समझे नमाज़ पढ़ी और नमाज़ के बाद मालूम हुआ कि क़िब्ला की तरफ़ मुँह था और यक़ीनी तौर पर मालूम हुआ तो नमाज़ हो जायेगी और अगर यक़ीन ना हो महज़ गुमान हो तो नमाज़ नहीं हुई।


■ ➞  अगर सोचा और जिधर दिल जम रहा था उसके ख़िलाफ़ किसी तरफ़ मुँह कर के नमाज़ अदा की तो नमाज़ ना हुयी अगर्चे क़िब्ला की तरफ़ ही पढ़ी हो।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 119 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞  अगर कोई जानने वाला मौजूद था और उससे पूछे बग़ैर अपने दिल से नमाज़ पढ़ ली तो अगर क़िब्ला की तरफ़ था तो हो गयी वरना नहीं।


■ ➞  जानने वाले से पूछा और उसने नहीं बताया फिर ख़ुद से सोच कर नमाज़ पढ़ ली और नमाज़ के बाद उसने बताया तो नमाज़ हो गयी और, दोहराने की हाजत नहीं।


■ ➞  अगर एक शख़्स किसी तरफ़ मुँह कर के नमाज़ पढ़ रहा है तो महज़ उसे देख कर नमाज़ नहीं पढ़ सकते बल्कि ख़ुद सोचना होगा कि क़िब्ला किधर है, अगर महज़ बिना सोचे उसे देख कर नमाज़ पढ़ी तो नहीं होगी।


■ ➞  अगर नमाज़ के दौरान ऐसा लगा कि ग़लती हो गयी है और क़िब्ला इधर नहीं बल्कि उधर है तो फ़ौरन नमाज़ के अन्दर ही घूम जाये और अगर तीन बार سبحان اللہ की तस्बीह कहने जितना रुका रहा तो नमाज़ ना होगी। अगर नमाज़ में सजदा -ए- सहव कर रहा था यानी नमाज़ का बिल्कुल आख़िरी हिस्सा है और लगा कि क़िब्ला उधर है तो भी फ़ौरन उधर घूम जाये और पहले जो भी रकअ़तें पढ़ी उन में कोई ख़राबी नहीं आयी... ا ن شاء الله عزوجل


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 120 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞  अगर नमाज़ी अपना सीना नमाज़ में क़िब्ला से जानबूझकर फेर दे तो नमाज़ नहीं होगी और अगर ग़लती से फेर दिया तो तीन मर्तबा तस्बीह (سبحان اللہ) कहने में जितना वक़्त लगता है उससे पहले वापस आ गया तो ठीक वरना नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞  अगर सिर्फ़ मुँह क़िब्ला की तरफ़ से फिर जाये तो वाजिब है कि फ़ौरन क़िब्ला की तरफ़ कर ले ऐसा बिला उज़्र करना मकरूह है।


■ ➞  ☝🏻ये अब तक नमाज़ की तीन शर्तें और उनके मसाइल बयान हुये। अब चौथी शर्त यानी वक़्त के बारे में बयान किया जायेगा।


❶ ➞  फ़ज्र का वक़्त : सुब्हे सादिक़ के तुलू'अ़ होने से ले कर आफ़ताब की किरन चमकने तक फ़ज्र का वक़्त है।


■ ➞  सुब्हे सादिक़ एक रौशनी है जो पूर्व की तरफ़ से आसमान के किनारों पर दिखाई देती है और बढ़ती जाती है यहाँ तक कि पूरे आसमान पर फैल जाती है और ज़मीन पर उजाला हो जाता है।

सुब्हे सादिक़ से पहले बीच आसमान में एक सफ़ेदी ज़ाहिर होती है और उसके नीचे बिल्कुल सियाह आसमान होता है फिर सुब्हे सादिक़ इसके नीचे से फूट कर आसमान पर फैलने लगता है और ऊपर बढ़ता है, ये जो सफ़ेदी थी वो इसमें ग़ायब हो जाती है और इसे सुब्हे काज़िब कहते हैं और फ़ज्र का वक़्त इससे शुरू नहीं होता।..✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 121 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराइत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा


■ ➞  नमाज़े फ़ज्र के वक़्त के लिये सुब्हे सादिक़ की सफ़ेदी के चमक कर फैलने का ऐतबार किया जाये और इशा व सहरी खाने में इसके तुलू'अ़ होने की इब्तिदा का ऐतबार होगा।


■ ➞  सुब्हे सादिक़ चमकने से तुलूअ़ -ए- आफ़ताब तक इन बलाद ( शहरों ) में कम अज़ कम 1 घन्टा 18 मिनिट ज़्यादा से ज़्यादा 1 घन्टा 35 मिनिट। ना इससे कम होगा ना इससे ज़्यादा।


■ ➞  22 जून को 1 घंटा 35 मिनिट हो जाता है फिर घटना शुरू होता है यहाँ तक कि 22 सितम्बर को 1 घन्टा 18 मिनिट हो जाता है, फिर बढ़ता है यहाँ तक कि 22 दिसम्बर को 1 घन्टा 24 मिनिट हो जाता है, फिर कम होता रहता है यहाँ तक कि 21 मार्च को वही 1 घंटा 18 मिनिट हो जाता है।


■ ➞  जो शख़्स सही वक़्त ना जानता हो उसे चाहिये कि गर्मियों में 1 घन्टा 40 मिनिट बाक़ी रहने पर सेहरी छोड़ दे ख़ास कर के जून और जुलाई में और जाड़ों में डेढ़ घन्टा रहने पर ख़ुसूसन दिसम्बर जनवरी में और मार्च व सितम्बर के आख़िर में जब दिन रात बराबर होते हैं तो सहरी एक घन्टा 24 मिनिट पर छोड़ दे और सेहरी छोड़ने का जो वक़्त कहा गया है उसके 8-10 मिनिट बाद अज़ान कही जाये ताकि सेहरी व अज़ान दोनों तरफ़ एहतियात रहे।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 122 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-



■ ➞  आजकल टाईम-टेबल लिखे हुये होते हैं, हर जगह मस्जिदें मौजूद हैं, जहाँ नहीं हैं वहाँ भी ऐसा इन्तिज़ाम ज़रूर है कि लोग सुब्हे सादिक़ की सफ़ेदी या सुब्हे काज़िब की सफ़ेदी को देखकर अंदाज़ा उमूमन नहीं लगाते। इसके अलावा आजकल मोबाइल में भी एप्लीकेशन्स आ गयी हैं जो वक़्त बताने के साथ-साथ आपको ये भी बताती रहती हैं कि फ़ज्र और बाक़ी नमाज़ों का वक़्त ख़त्म होने में कितना वक़्त बाक़ी है। लिहाज़ा अब ये मसाईल जानना हर आदमी के लिये ज़रूरी नहीं। यही वजह है कि सुबह सादिक़ और सुबह काज़िब की ज़्यादा तफ़सील यहाँ बयान नहीं की जा रही।


■ ➞  अब बाक़ी नमाज़ों के वक़्त के बारे में कुछ बातें जान लें -


❷ ➞  वक़्ते ज़ुहर और जुमुआ : आफ़ताब ढलने के बाद से लेकर उस वक़्त तक है कि हर चीज़ का साया इलावा असली साये के दोगुना हो जाये।


❸ ➞  वक़्ते अस्र: ज़ुहर का वक़्त ख़त्म होने के बाद से सूरज डूबने तक है।


■ ➞  हमारे मुल्क में ज़्यादातर शहरों में अस्र का वक़्त कम से कम 1 घन्टा 35 मिनिट और ज़्यादा से ज़्यादा 2 घन्टा 6 मिनिट है।


❹ ➞  वक़्ते मग़रिब : ग़ुरूबे-आफ़ताब से ग़ुरूबे-शफ़क़ तक है।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 123 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अक्सर लोग इल्म की कमी की वजह से मग़रिब के वक़्त को सिर्फ़ कुछ मिनट्स का ही समझते हैं और थोड़ी सी भी देर हो जाने पर नमाज़ को क़ज़ा कर देते हैं, जबकि मग़रिब की नमाज़ का वक़्त सूरज के डूबने के फ़ौरन बाद से लेकर शफ़क़ डूबने तक यानि इशा से पहले पहले तक होता है। शफ़क़ उस सफ़ेदी का नाम है जो मग़रिब की तरफ़ सुर्ख़ी डूबने के बाद शुमालन जुनूबन सुब्हे सादिक़ की तरह फैली हुयी रहती है और ये वक़्त इन शहरों में कम से कम 1 घन्टा 18 मिनिट और ज़्यादा से ज़्यादा 1 घन्टा 35 मिनिट होता है।


■ ➞  हर रोज़ के सुबह और मग़रिब के वक़्त तक़रीबन बराबर होते हैं।


❺ ➞  वक़्ते इशा : मग़रिब की सफ़ेदी डूबने के बाद से तुलू -ए- फ़ज्र तक होता है। इशा की और वित्र की नमाज़ का वक़्त एक ही है लेकिन इनमें तरतीब फ़र्ज़ है यानी इशा के बाद ही वित्र पढ़नी है, अगर इशा से पहले वित्र पढ़ ली तो होगी ही नहीं अलबत्ता भूल कर पढ़ ली तो हो जायेगी।


■ ➞  फ़ज्र के वक़्त नमाज़ में थोड़ी ताख़ीर करना मुस्तहब है यानी जब ज़मीन रौशन हो तब शुरू करे और इतना वक़्त बाक़ी हो कि चालीस से साठ आयतें तरतील के साथ (ठहर-ठहर कर) तिलावत कर सके फिर अगर नमाज़ में कोई फ़साद हो जाये यानी दोहरानी पड़े तो चालीस से साठ आयतें तरतील के साथ दुबारा पढ़ सके और इतनी ताख़ीर मकरूह है कि तुलू -ए- आफ़ताब का शक हो जाये।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 124 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा-

■ ➞  औरतों के लिये फ़ज्र की नमाज़ हमेशा अव्वल वक़्त में पढ़ना मुस्तहब है यानी देर ना करें और फ़ज्र के अलावा बाक़ी नमाज़ों में बेहतर है कि मर्दों की जमाअ़त का इन्तिज़ार करें, जब जमाअ़त हो जाये उसके बाद पढ़ें।

☝🏻हमारी माँ-बहनों को अक्सर देखा गया है कि इसका ठीक उल्टा करती हैं, यानी ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और इशा में जल्दी करती हैं और मर्दों की जमाअत और कभी कभी तो अज़ान का भी इंतज़ार नहीं करतीं और फ़ज्र के लिए देर से उठती हैं। ( कभी-कभी इस देर के चक्कर में नमाज़ ही क़ज़ा कर बैठती हैं। )

■ ➞  जुमुआ का मुस्तहब वक़्त वही है जो ज़ुहर का है।


■ ➞  अस्र की नमाज़ में ताख़ीर (देर) मुस्तहब है मगर इतनी ना हो कि आफ़ताब पर ज़र्दी आ जाये और बे-तकल्लुफ़ नज़र जमने लगे। तजुर्बे से साबित है कि ये वक़्त मग़रिब से बीस मिनिट पहले तक है लिहाज़ा ये मकरूह वक़्त है।


■ ➞  ठीक इसी तरह तुलू -ए- आफ़ताब के बाद का बीस मिनिट का वक़्त भी मकरूह वक़्त होता है।


■ ➞  इशा की नमाज़ से पहले सोना और नमाज़ के बाद फ़ालतू की बातें करना, क़िस्से-कहानी सुनना मकरूह है।


■ ➞  ज़रूरी बातें, इल्मे-दीन पढ़ना-सीखना, वाज़ो-नसीहत, मेहमान से बातें, ज़िक्र, क़ुरआन की तिलावत में हर्ज नहीं।


■ ➞  तुलू -ए- फ़ज्र से तुलू -ए- आफ़ताब तक ज़िक्रे इलाही के सिवा हर बात मकरूह है।


■ ➞  जिसको भरोसा हो कि जाग जायेगा तो आख़िर रात में वित्र पढ़े वरना सोने से पहले पढ़ ले।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 125 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  कुछ अवक़ात मकरूह हैं यानी इनमें नमाज़ नहीं पढ़ सकते।


■ ➞  सुबह सूरज निकलने के 20 मिनिट बाद तक, मग़रिब से पहले 20 मिनिट तक और दिन का दरमियानी हिस्सा।


■ ➞  इन तीनों वक़्तों में कोई नमाज़ जाइज़ नहीं, ना फ़र्ज़, ना वाजिब, ना नफ़्ल, ना अदा ना क़ज़ा यूँ ही सजदा ए तिलावत भी जाइज़ नहीं।


■ ➞  अगर किसी ने उसी दिन की अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ी और मग़रिब का वक़्त क़रीब हो ( यानी 5-10 मिनिट भी बचे हों ) तो पढ़ ले लेकिन जानबूझकर इतनी ताख़ीर करना हराम है।


■ ➞  दिन का दरमियान हिस्सा जिसे अक्सर लोग 12 बजे समझते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। ये वक़्त हमेशा 12 बजे नहीं होता और ये बदलता भी रहता है, जिसको निकालने का तरीक़ा थोड़ा मुश्किल है। लिहाज़ा नमाज़ के औक़ात के कैलेन्डर या मोबाइल एप्लिकेशन्स वग़ैरह देख कर इसको पता करना चाहिए।


■ ➞  जनाज़ा अगर मकरूह वक़्त में लाया गया तो पढ़ सकते हैं।°


■ ➞  अगर मकरूह वक़्त में आयते-सजदा पढ़ी तो सजदा मकरूह वक़्त ख़त्म हो जाने के बाद करे और अगर कर लिया हो तो हो गया और ग़ैरे मकरूह वक़्त में आयत पढ़ी और मकरूह वक़्त में सजदा किया तो ये मकरूहे तहरीमी है...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 126 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा- 


■ ➞  मकरूह वक़्तों में क़ज़ा नमाज़ पढ़ना नाजाइज़ है, अगर निय्यत बांध ली तो तोड़ दे और मकरूह वक़्त जाने के बाद पढ़े और अगर निय्यत ना तोड़ी और नमाज़ पढ़ ली तो फ़र्ज़ साक़ित हो जायेगा लेकिन गुनाहगार होगा।


■ ➞  अगर मकरूह वक़्त में नफ़्ल नमाज़ शुरू की तो अब वो वाजिब हो गयी मगर उस वक़्त पढ़ना जाइज़ नहीं लिहाज़ा निय्यत तोड़ दे और मकरूह वक़्त जाने के बाद पढ़े और अगर पढ़ ली तो बाद में क़ज़ा वाजिब नहीं पर गुनाहगार होगा।


■ ➞  मकरूह वक़्त में क़ुरआन की तिलावत भी बेहतर नहीं लिहाज़ा ज़िक्र और दुरूद में मशगूल रहे।


■ ➞  12 वक़्तों में नवाफ़िल पढ़ना मना है और इन 12 में से 6 में फ़राइज़ो-वाजिबात और नमाज़े जनाज़ा और सजदा -ए- तिलावत भी मना है।


■ ➞ ❶ तुलू -ए- फ़ज्र से तुलू -ए- आफ़ताब तक (इसमें सिवाये 2 रकअ़त सुन्नते फ़ज्र के कोई नमाज़ जाइज़ नहीं।)


■ ➞  नमाज़े फ़ज्र के बाद तुलू -ए- आफ़ताब में अगर्चे बहुत वक़्त बाक़ी हो और सुन्नते फ़ज्र ना पढ़ी हो और अब पढ़ना चाहे तो जाइज़ नहीं है...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 127 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा- 

■ ➞  ❷ अपने मज़हब की जमाअ़त के लिये इक़ामत हुयी तो इक़ामत से ख़त्मे-जमाअ़त तक सुन्नतो-नफ़्ल पढ़ना मकरूहे तहरीमी है।


■ ➞  सिर्फ़ फ़ज्र की नमाज़ में अगर यक़ीन है कि सुन्नत पढ़कर जमाअ़त के आख़िरी क़ायदे में भी शामिल हो जायेगा तो जमाअत से थोड़ी दूर  सुन्नत पढ़ ले और फिर जमाअ़त में शामिल हो जाये और अगर मालूम है कि सुन्नत में मशगूल होने से फ़र्ज़ छूट जायेगी और सुन्नत में मशगूल हो गया फ़र्ज़ छूट गया तो गुनाहगार होगा


■ ➞  बाक़ी नमाज़ों में अगर जमाअ़त क़ाइम हो चुकी है और मालूम है कि सुन्नत के बाद भी जमाअ़त मिल जायेगी फिर भी पढ़ना नाजाइज़ है।


■ ➞ ❸ नमाज़े अस्र से आफ़ताब ज़र्द होने तक नफ़्ल नमाज़ मना है और अगर पढ़ते हुये तोड़ दी तो क़ज़ा इस वक़्त में अदा नहीं कर सकता और की तो नाकाफ़ी है।


■ ➞ ❹ ग़ुरूबे-आफ़ताब से फ़र्ज़े-मग़रिब तक।


■ ➞ ❺ जिस वक़्त इमाम जुमुआ के ख़ुत्बे के लिये खड़ा हो उस वक़्त से ख़त्मे जुमुआ तक नफ़्ल नमाज़ मकरूह है, यहाँ तक कि जुमुआ की सुन्नतें भी।


■ ➞  ऐन ख़ुत्बा के वक़्त चाहे वो जुमुआ का हो, ईद का हो या निकाह का हर नमाज़ नाजाइज़ है, हत्ता कि क़ज़ा भी, अलबत्ता साहिबे तरतीब के लिये जुमुआ के ख़ुत्बे के वक़्त क़ज़ा की इजाज़त है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 128 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  किसी ने जुमुआ की सुन्नतें शुरू कर लीं और इसके बाद ख़ुत्बा शुरू हो गया तो चाहिये कि 4 रकाअ़त पूरी कर ले।


■ ➞  ❼  ईदैन की नमाज़ से पहले नफ़्ल पढ़ना मकरूह है चाहे घर में पढ़े या ईदगाह में या मस्जिद में।


■ ➞  ❽ ईदैन की नमाज़ के बाद मस्जिद और ईदगाह में नफ़्ल पढ़ना मकरूह है, घर में पढ़ सकते हैं मकरूह नहीं।


■ ➞  ❾ अरफ़ात में जो ज़ुहर और अस्र की नमाज़ें मिलाकर पढ़ते हैं, उनके दरमियान में और बाद में नफ़्ल व सुन्नत मकरूह है।


■ ➞ ❶⓿ मुज़्दलिफ़ा में जो मग़रिब और इशा की नमाज़ें मिलाकर पढ़ते हैं, उनके दरमियान में नफ़्ल या सुन्नत पढ़ना मकरूह है बाद में पढ़ सकते हैं।


■ ➞  ❶❶ फ़र्ज़ का वक़्त तंग हो तो हर नमाज़ यहाँ तक कि फ़ज्र की और ज़ुहर की सुन्नतें तक मकरूह हैं।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 129 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  ❶❷ ऐसी बात जिसकी वजह से दिल बँटे, तवज्जो हटे, और उसे दफ़ा कर सकता है तो बिना दफ़ा किये नमाज़ मकरूह है।


■ ➞  मसलन पेशाब या पख़ाना शिद्दत से लगा हुआ है या रीह (हवा) ख़ारिज होने का ग़लबा है तो पहले इसे दफ़ा करे फिर नमाज़ पढ़े और वक़्त ना हो तो इसी तरह पढ़ ले फिर दोहरा ले।


■ ➞  खाना सामने आ गया और खाने का मन हो तो पहले खाना खाये फिर नमाज़ पढ़े, क्योंकि जिस चीज़ से दिल बँट जाये तो उन वक़्तों में नमाज़ पढ़ना मकरूह होगा।


■ ➞  फ़ज्र और ज़ुहर के वक़्त में अव्वल से आख़िर तक कोई कराहत नहीं यानी ये नमाज़ें अपने वक़्त के जिस हिस्से में पढ़ी जायें असलन मकरूह नहीं।


■ ➞  ये नमाज़ के वक़्तों के बारे में मसाइल बयान किये गये, अब अज़ान के मुतल्लिक़ मसाइल बयान होंगे, इन शा अल्लाह, क्योंकि नमाज़ का अज़ान से एक ख़ास ताल्लुक़ है और इसके बारे में ज़रूरी मसाइल का इल्म हर मुस्लिम को होना चाहिये।..


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 130 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  पाँच वक़्तों की नमाज़ जिनमें जुमुआ भी है, अगर ये जमाअ़ते-मुस्तहब्बा के साथ मस्जिद में वक़्त पर अदा किये जायें तो अज़ान सुन्नते-मुअक्किदा है और इसका हुक्म वाजिब की मिस्ल है, यानी अगर अज़ान ना कही गयी तो इलाक़े के तमाम लोग गुनाहगार होंगे यहाँ तक कि इमाम मुहम्मद रहीमहुल्लाह त'आला ने फ़रमाया कि अगर किसी शहर के तमाम लोग अज़ान कहना छोड़ दें तो मैं उनसे क़िताल करूँगा और अगर एक शख्स छोड़ दे तो उसे मारूँगा और क़ैद कर दूँगा।


■ ➞  मस्जिद में बग़ैर अज़ान और इक़ामत के नमाज़ पढ़ना मकरूह है।


■ ➞  क़ज़ा नमाज़ मस्जिद में पढ़े तो अज़ान ना कहे।


■ ➞  अगर कोई शख़्स शहर में घर में नमाज़ पढ़े और अज़ान ना कहे तो कराहत नहीं है क्योंकि वहाँ मस्जिद की अज़ान उसके लिये काफ़ी है और कह लेना मुस्तहब है।


■ ➞  गाँव में अगर मस्जिद है और अज़ान व इक़ामत होती है तो वहाँ घर में नमाज़ पढ़ने वाले का वही हुक्म है जो शहर में पढ़ने वालों का है और मस्जिद ना हो तो अज़ान व इक़ामत में उसको वही हुक्म है जो मुसाफ़िर को है।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 131 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा-



■ ➞  अगर शहर से बाहर या क़रिया या खेत में है और नमाज़ पढ़नी है तो अगर वो जगह क़रीब है तो अज़ान काफ़ी है, लेकिन कह लेना बेहतर है।


■ ➞  क़रीब होने का ये मतलब है कि अज़ान की आवाज़ पहुँचती हो और अगर ना पहुँचती हो तो फिर शहर की अज़ान काफ़ी नहीं।


■ ➞  लोगों ने मस्जिद में नमाज़ पढ़ी और बाद में मालूम हुआ कि वो नमाज़ सही नहीं हुयी तो उसी मस्जिद में जमाअ़त के साथ पढ़ें और अज़ान को दोहराना ज़रूरी नहीं और फ़स्ल-तवील ना हो यानी फ़ौरन दोबारा जमाअ़त हो रही हो तो इक़ामत की भी हाजत नहीं और अगर वक़्फ़ा ज़्यादा हुआ तो इक़ामत कही जाये और अगर वक़्फ़ा चला गया तो ग़ैरे-मस्जिद में अज़ानो-इक़ामत के साथ पढ़े।


■ ➞  जमाअ़त भर की नमाज़ क़ज़ा हो गयी तो अज़ान व इक़ामत के साथ पढ़ें और अकेले की क़ज़ा हुयी तो भी अज़ान व इक़ामत कह सकता है जबकि कहीं तन्हा हो वरना क़ज़ा नमाज़ का इज़हार करना गुनाह है और इसीलिये मस्जिद में क़ज़ा पढ़ना मकरूह है।

(☝🏻अगर क़ज़ा पढ़ने से किसी को पता चलता हो तो ही मकरूह है, लेकिन अगर किसी को पता न चलता हो तो पढ़ सकता है जैसे कि अस्र या इशा से पहले चार सुन्नतें या निफ़ल की जगह क़ज़ा नमाज़ पढ़ ले तो किसी को पता नहीं चलेगा। )


■ ➞  अगर मस्जिद में क़ज़ा पढ़े तो अज़ान ना कहे और वित्र की क़ज़ा पढ़े तो तीसरी रकअ़त में हाथ ना उठाये (अगर घर में पढ़े और कोई न देखता हो तो तकबीर के लिए हाथ उठाए) और अगर किसी ऐसी वजह से नमाज़ क़ज़ा हुयी कि वहाँ सब उसमें मुब्तिला थे तो अज़ान कही जाये।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 132 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞   अज़ान वक़्त होने के बाद दी जानी चाहिये अगर वक़्त से पहले दे दी या वक़्त होने से पहले शुरू की और अज़ान के दरमियान वक़्त आ गया तो अज़ान दोहरायी जाये।


■ ➞  फ़राइज़ के सिवा बाक़ी नमाज़ों मस्लन, सुनन, नवाफ़िल, तरावीह, जनाज़ा वग़ैरह में अज़ान नहीं।


■ ➞   बच्चे के कान में, मिर्गी वाले और गज़बनाक आदमी, बदमिज़ाज आदमी या जानवर के कान में अज़ान देना और लड़ाई की शिद्दत में और आग लगी हो उस वक़्त या मैय्यत को दफ़न करने के बाद और जिन्न की सरकशी के वक़्त और मुसाफ़िर के पीछे और जंगल में और जब रास्ता भूल जाये और कोई बताने वाला ना हो उस वक़्त अज़ान कहना मुस्तहब है।


■ ➞   औरतों को अज़ानो-इक़ामत कहना मकरूहे-तहरीमी है, कहेंगी तो गुनाहगार होंगी।


■ ➞   वबा के ज़माने में भी अज़ान कहना मुस्तहब है...✍🏻✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 133 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6)तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  औरतें अपनी नमाज़ अदा पढ़ती हों या क़ज़ा, उसमें अज़ानो-इक़ामत मकरूह है।


■ ➞  अगर औरतें जमाअ़त से नमाज़ पढ़ें तो भी अज़ानो-इक़ामत मकरूह है, और ख़ुद औरतों की जमाअ़त ही मकरूह है।


■ ➞  फ़ासिक़ (बेहुक्म, बड़े गुनाह करने वाला) अगर्चे आलिम क्यों ना हो उसकी अज़ान मकरूह है।


■ ➞  पागल, ना-समझ बच्चे की अज़ान भी मकरूह है, लिहाज़ा इनको दोहराया जाये आज-कल गाँव बल्कि शहरों की मस्जिदों में अज़ान देने के लिये कई मस्जिदों में ऐसे लोगों को मुक़र्रर किया जाता है जो फ़ासिक़ होते हैं, ये सही नहीं है।


■ ➞  कुछ लोग बस ये देखते हैं कि अज़ान देने के लिये किसी ऐसे शख़्स को रखा जाये जो रिटायर हो चुका हो और कम पैसों में काम चल जाये फिर ना अज़ान में वो लज़्ज़त मिलती है और ना नमाज़ में।


■ ➞  आज कल दुकानों, मॉल्स और जगह-जगह कस्टमर के साथ डील करने के लिये ऐसे लोग रखे जाते हैं जो अच्छी तरह बोल सकें, लोगों को अपनी तरफ़ माइल कर सकें और पढ़े लिखे हों तो क्या नमाज़ जैसी इबादत के लिये जब बुलाने की बात आती है तो क्या इन्हें ऐसा शख्स नहीं रखना चाहिये जो बा-शरअ़ हो, मसाइल से वाक़िफ़ हो, अच्छी आवाज़ का मालिक हो ताकि अज़ाने-बिलाल तो हम सुन ना सके पर उसे महसूस कर सकें।


■ ➞  काश कि ये लोग बात समझें और ऐसे लोगों को ये मंसब #दें जिनकी आवाज़ लोगों की आँखों को अश्क़बार कर दे।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 134 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  समझदार बच्चे की, वलदुज़्ज़िना की, गुलाम की और बे-वुज़ू की अज़ान सही है पर बे-वुज़ू देना मकरूह है।


■ ➞  जुमुआ के दिन शहर में ज़ुहर की नमाज़ के लिये अज़ान नाजाइज़ है, अगर्चे ज़ुहर पढ़ने वाले माज़ूर हों, जिन पर जुमुआ फ़र्ज़ ना हो।


■ ➞  अज़ान कहने का अहल वो है जो नमाज़ के वक़्तों को पहचानता हो और वक़्त ना पहचानता हो तो उसके लिये वो सवाब नहीं जो मुअज़्ज़िन के लिये है।


■ ➞  आज-कल कुछ मस्जिदों में ऐसे लोगों को अज़ान देने के लिये रखा जाता है कि कभी कभी वो 1 बजे की बजाये 12 बजे अज़ान दे देते हैं क्योंकि नज़र की कमज़ोरी में घंटे और मिनिट वाले कांटे घड़ी में एक जैसे दिखायी देते हैं।


■ ➞  मुस्तहब ये है कि मुअज़्ज़िन मर्दे-आक़िल, सालेह, परहेज़गार, आलिम बिस-सुन्नह, ज़ी-वज़ाहत, लोगों के अहवाल का निगरान और जो जमाअ़त से रह जाने वाले हों उनको ताक़ीद करने वाला हो, अज़ान पर हमेशगी करता हो और सवाब के लिये अज़ान देता हो यानी अज़ान पर उजरत ना लेता हो।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 135 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अगर मुअज़्ज़िन ही इमाम हो तो बेहतर है।


■ ➞  एक शख़्स को एक वक़्त में दो मस्जिदों में अज़ान कहना मकरूह है।


■ ➞  अज़ान व इमामत की विलायत बानी -ए- मस्जिद को है, वो ना हो तो उसकी अवलाद, उसके कुम्बे वालों को और अगर अहले मुहल्ला ने किसी ऐसे को इमाम व मुअज़्ज़िन किया जो बानी या उसकी अवलाद से बेहतर है तो वही बेहतर है।


■ ➞  बैठ कर अज़ान देना मकरूह है, अगर दी तो दोहरा ले और मुसाफ़िर सवारी पर बैठ कर अज़ान दे सकता है मकरूह नहीं।


■ ➞  मुसाफ़िर को इक़ामत सवारी से उतर कर कहनी चाहिये और अगर सवारी पर कह ली तो हो गयी।


■ ➞  अज़ान क़िब्ला की तरफ़ मुँह कर के कही जाये अगर उल्टा किया तो मकरूह है दोहरायी जाये और मुसाफ़िर जब सवारी पर बैठा हो तो क़िब्ला की तरफ़ मुँह ना होने में हर्ज नहीं।


■ ➞  अज़ान कहते वक़्त बिला ज़रूरत खंकारना मकरूह है और अगर गला साफ़ करने के लिये करे तो हर्ज नहीं।


■ ➞  चलते हुये अज़ान देना भी मकरूह है तो किसी ने अगर चलते हुये दी तो दोहरायी जाये।


■ ➞  अज़ान के बीच में बातचीत मना है और अगर ऐसा किया तो अज़ान दोहराये।...✍🏻✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 136 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अज़ान के कलिमात में लहन हराम है। यानी अल्लाह के हम्ज़ा को आल्लाह या अकबर हो आकबर पढ़ना, ये हराम है।

☝🏻आजकल कई ऐसे लोग मस्जिदों में अज़ान देने की जल्दी करते हैं जिनको मख़ारिज का कुछ पता नहीं होता ( ठीक से अलिफ़, बा भी नहीं आते )। ऐसे लोग ज़रा तवज्जो फ़रमायें कि कहीं अपनी ला'इल्मी की वजह से वो अज़ान में या नमाज़ में कोई हराम काम तो नहीं कर बैठे या अभी भी कर रहे हैं ?


■ ➞  अज़ान को मौसिक़ी के क़वाइद पर गाना भी हराम है।


■ ➞  सुन्नत ये है कि अज़ान बुलंद जगह से दी जाये और बुलंद आवाज़ से ताकि मुहल्ले वालों को ख़ूब सुनायी दे।


■ ➞  अज़ान में ताक़त से ज़्यादा आवाज़ बुलंद करना मकरूह है।


■ ➞  अज़ान मीनारे से कही जाये या ख़ारिजे मस्जिद से, मस्जिद में अज़ान ना कहे। मस्जिद में अज़ान कहना मकरूह है। ये हुक्म हर अज़ान के लिये है, किसी भी अज़ान को फिक़्ह की किताबों में मुसतस्ना नहीं किया गया।


■ ➞  जुमुआ को जो दूसरी अज़ान होती है वो भी इसी में दाख़िल है।


■ ➞  अज़ान के कलिमात ठहर-ठहर के पढ़ने चाहिये।


■ ➞  अल्लाहु-अकबर अल्लाहु-अकबर ये एक कलिमा है, इसके बाद सक्ता करे यानी इतनी देर चुप हो जाये कि जवाब देने वाला जवाब दे सके।...✍🏻✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 137 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अगर अज़ान या इक़ामत में कहीं कोई कलिमा आगे-पीछे हो गया तो उतने को सही कर ले, पूरी अज़ान या इक़ामत को दोहराना ज़रूरी नहीं और अगर सहीह किये बिना नमाज़ पढ़ ली तो नमाज़ को दोहराना ज़रूरी नहीं।


■ ➞  कोई भी अज़ान हो, हय्या-अ़लस्सलाह कहते वक़्त दाँयीं तरफ़ मुँह करे और हय्या-अ़लफ़लाह के वक़्त बाँयीं तरफ़ और सिर्फ़ मुँह करे, सीना या जिस्म को ना फेरे।


■ ➞  सुबह की अज़ान में फ़लाह के बाद अस्सलातु-ख़ैरुम्-मिनन्-नौम कहना मुस्तहब यानी बेहतर है।


■ ➞  अज़ान कहते वक़्त कानों के सुराख़ में उंगलियाँ डाले रहना मुस्तहब है और अगर दोनों हाथ कानों पर रख ले तो अच्छा है और कान में उंगली डालना ज़्यादा अच्छा है कि हदीस में है और आवाज़ बुलंद करने में ज़्यादा मदद मिलती है।


■ ➞  इक़ामत भी अज़ान की तरह है यानी जो अहकाम बयान किये गये हैं वो इसके लिये भी हैं सिर्फ़ बाज़ बातों में फ़र्क़ है। इसमें बाद फ़लाह के क़द-क़ा'मतिस्-सलाह दो बार कहें और इसमें भी आवाज़ बुलंद हो।


■ ➞  इसके कलिमात जल्द-जल्द कहें, सक्ता ना करें और ना कानों पर हाथ रखना है ना कानों पर उंगलियाँ रखनी हैं।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 138 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अगर इमाम ने इक़ामत कही तो क़द'क़ा'मतिस्-सलाह कहते वक़्त आगे चला जाये।


■ ➞  इक़ामत में भी हय्या-अ़लस्-सलाह और हय्या-अ़लल फ़लाह कहते वक़्त मुँह फेरे।


■ ➞  जिसने अज़ान कही वो मौजूद नहीं तो जिसे चाहे इक़ामत के लिये आगे कर सकते हैं, इमाम बेहतर है।


■ ➞  अगर मुअज़्ज़िन मौजूद है तो उसकी इजाज़त से दूसरा कह सकता है ये उसी का हक़ है और अगर मुअज़्ज़िन से इजाज़त लिये बग़ैर कही और उसे बुरा लगा तो मकरूह है।


■ ➞  जुनूब या बे-वुज़ू शख़्स की इक़ामत मकरूह है मगर दोहरायी नहीं जायेगी जैसा कि अज़ान दोहराने का हुक्म है।


■ ➞  ऐसा इसीलिये कि अज़ान की तक़रार मशरू है और इक़ामत दो बार नहीं।


■ ➞  इक़ामत के वक़्त कोई शख़्स आया तो खड़े हो कर इन्तिज़ार करना मकरूह है बल्कि बैठ जाये और जब हय्या-अ़लल फ़लाह पर पहुँचे तो खड़ा हो और जो लोग मस्जिद में हैं वो भी और इमाम भी सब हय्या-अ़लल फ़लाह पर खड़े हों।


■ ➞  कुछ लोग इक़ामत के वक़्त दाख़िल होते हैं तो ये सोच कर कि अब तो सब को खड़े ही होना है लिहाज़ा खड़े हो कर ही इन्तिज़ार कर लेते हैं ये मकरूह है।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 139 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  मुसाफ़िर ने अज़ानो-इक़ामत दोनों ना कही या इक़ामत ना कही तो मकरूह है।


■ ➞  अगर अज़ान ना कही और सिर्फ़ इक़ामत कही तो मकरूह नहीं पर बेहतर ये है कि अज़ान भी दे, चाहे अकेला हो या लोग हमराह हों।


■ ➞  शहर के बाहर कहीं मैदान में जमा'अ़त क़ाइम की और इक़ामत ना कही तो मकरूह है और अज़ान ना कही तो मकरूह नहीं पर ख़िलाफ़े-अवला है।


■ ➞  मुहल्ले की मस्जिद में इमाम और मुअज़्ज़िन मुअ़य्यन हैं और मस्नून तरीक़े से जमा'अ़त हो जाये तो दोबारा अज़ान कहना मकरूह है और अगर दोबारा जमा'अ़त की जाये तो इमाम मेहराब से अलग दायें या बायें खड़ा हो ताकि फ़र्क़ हो जाये। उस इमाम को मेहराब में दूसरी जमा'अ़त के लिये खड़ा होना मकरूह है और अगर मुहल्ले की मस्जिद ना हो बल्कि सड़क, बाज़ार, स्टेशन या सराय में कोई ऐसी मस्जिद हो जहाँ चंद लोग आते हैं नमाज़ पढ़कर चले जाते हैं, फिर चंद लोग आते हैं और नमाज़ पढ़ते हैं तो ऐसे में अज़ान की तक़रार मकरूह नहीं है बल्कि अफ़ज़ल यही है कि हर गिरोह जदीद अज़ान व इक़ामत के साथ जमा'अ़त करे।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 140 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  मुहल्ले की मस्जिद में कुछ लोगों ने जमा'अ़त क़ाइम कर ली फिर उसके बाद इमाम साहब और बाक़ी लोग आये तो जमा'अ़त-ए-ऊला इनकी है और पहलों के लिये कराहत।


■ ➞  यूँ ही ग़ैरे-मुहल्ला वाले आये और नमाज़ पढ़ कर चले गये फिर इमाम साहब और मुहल्ले के लोग आये तो यही जमा'अ़त-ए-ऊला है और इमाम साहब मेहराब में ही खड़े होंगे।


■ ➞  अगर अज़ान आहिस्ता कही गयी थी तो फिर से कही जाये और पहली जमा'अ़त जमा'अ़त-ए- ऊला नहीं।


■ ➞  इक़ामत के दरमियान में भी कलाम करना नाजाइज़ है जैसे अज़ान में।


■ ➞  अज़ान और इक़ामत के दरमियान उसको किसी ने सलाम किया तो जवाब ना दे और अज़ानो इक़ामत के बाद भी जवाब देना वाजिब नहीं।


■ ➞  जब अज़ान सुने तो जवाब देने का हुक्म है यानी मुअज़्ज़िन जो कहे जवाब में वही कहा जाये ( सिवाये हय्या-अ़लस्-सलाह और हय्या-अ़लल फ़लाह कहते वक़्त, कि इनके जवाब में ला-हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह पढ़ा जाये। )


لا حَوْلَ وَلَا قُوَّۃَ اِلَّا بِاللّٰہِ


■ ➞  बेहतर ये है कि हय्या-अ़लस्-सलाह और हय्या-अ़लल फ़लाह भी कहे और ये भी और साथ में ये भी मिला ले👇🏻।...✍🏻


مَا شَائَ اللّٰہُ کَانَ وَمَا لَمْ یَشَأْ لَمْ یَکُنْ (درمختار، ردالمحتار، عالمگیری)


■ ➞  अस्सलातु ख़ैरुम्-मिनन्-नौम के जवाब में ये कहे 👇🏻:


صَدَقْتَ وَ بَرَرْتَ وَبِالْحَقِّ نَطَقْتَ


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 141 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अज़ान का जवाब जुनूब ( जिस पर ग़ुस्ले जनाबत फ़र्ज़ है। ) भी दे। हैज़ो-निफ़ास वाली औरत, ख़ुत्बा सुनने वाले, नमाज़े जनाज़ा पढ़ने वाले और जो जिमाअ में मशगूल हों या क़ज़ा-ए-हाजत में हो, इन पर अज़ान का जवाब नहीं यानी इन्हें जवाब नहीं देना है।


■ ➞  जब अज़ान हो तो सलाम-कलाम को इतनी देर के लिये रोक दे, बल्कि क़ुरआने मजीद की तिलावत करने वाले को अज़ान सुनाई दे रही है तो रोक दे और अज़ान को ग़ौर से सुने और जवाब दे यूँ ही इक़ामत में भी करे।


■ ➞  जो अज़ान के वक़्त बातों में मशगूल रहा तो म'आज़ अल्लाह उस पर बुरे ख़ातिमे का ख़ौफ़ है।


■ ➞  रास्ते में चल रहा था और अज़ान की आवाज़ आई तो उतनी देर तक रुक जाये और अज़ान का जवाब दे।


■ ➞  इक़ामत का जवाब मुस्तहब है और फ़र्क़ इतना है कि क़दक़ामतिस्-सलाह के जवाब में इन दोनों में से कोई एक पढ़े-


اَقَامَھَا اللّٰہُ وَ اَدَامَھَا مَا دَامَتِ السَّمٰوٰتُ وَالْاَرْضُ


اَقَامَھَا اللّٰہُ وَاَدَامَھَا وَجَعَلْنَا مِنْ صَالِحِیْ اَھْلِھَا اَحْیَائً وَ اَمْوَاتًا


■ ➞  अगर चंद अज़ानें सुने तो पहली का जवाब देना काफ़ी है और सबका देना बेहतर है।


■ ➞  अगर अज़ान के वक़्त जवाब ना दिया और ज़्यादा वक़्त नहीं हुआ है तो जवाब दे सकता है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 142 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  ख़ुत्बे की अज़ान का जवाब मुक़्तदियों को ज़ुबान से देना जाइज़ नहीं, यानि ख़ामोशी से ख़ुत्बा सुने और चाहे तो दिल में ही जवाब दे ले।


■ ➞  जब अज़ान मुकम्मल हो जाये तो मुअज़्ज़िन और सुनने वाले दुरूद पढ़ें फिर इस दुआ को पढ़ें।


اَللّٰھُمَّ رَبَّ ھٰذِہِ الدَّعْوَۃِ التَّامَّۃِ وَالصَّلٰوۃِ الْقَائِمَۃِ اٰتِ سَیِّدَنَا مُحَمَّدَنِ الْوَسِیْلَۃَ وَالْفَضِیْلَۃَ وَالدَّرَجَۃَ الرَّفِیْعَۃَ وَابْعَثْہُ مَقَامًا مَّحْمُوْدَنِ الَّذِیْ وَعَدْتَّہٗ وَاجْعَلْنَا فِیْ شَفَاعَتِہٖ یَوْمَ الْقِیٰمَۃِ اِنَّکَ لَا تُخْلِفُ الْمِیْعَادَ


■ ➞  जब अज़ान में हुज़ूर ﷺ का नाम आये तो दुरूद पढ़ें और मुस्तहब है कि अँगूठों को चूम कर आँखों से लगा लें और ये पढ़ें।


قُرَّۃُ عَیْنِیْ بِکَ یَا رَسُوْلَ اللّٰہِ اَللّٰھُمَّ مَتِّعْنِیْ بِالسَّمْعِ وَالْبَصَرِ


■ ➞ नमाज़ की अज़ान के इलावा और अज़ानों का भी जवाब दिया जायेगा मस्लन बच्चा पैदा होते वक़्त की अज़ान।


■ ➞  अगर अज़ान ग़लत कही गयी मस्लन लहन के साथ तो ऐसी अज़ान का जवाब नहीं और सुननी भी नहीं चाहिये।


■ ➞  अज़ान के बाद एक बार और नमाज़ के लिये ऐलान करने को तस्वीब कहते हैं और ये मुस्तहसन है और शरीअ़त में इसके लिये कोई अलफाज़ मुक़र्रर नहीं लिहाज़ा उर्फ़ के ऐतबार से इख़्तियार किया जा सकता है मस्लन ये पढ़ना।...✍🏻


اَلصَّلٰوۃُ اَلصَّلٰوۃُ یَا قَامَتْ قَامَتْ یا اَلصَّلوَۃُ وَالسََّلَامُ عَلَیْکَ یَا رَسُوْلَ اللّٰہِ

(درمختار وغیرہ)_


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 143 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  मग़रिब की अज़ान के बाद तस्वीब नहीं होती और दो बार कह लें तो हर्ज नहीं।


■ ➞  अज़ान और इक़ामत के दरमियान वक़्फ़ा करना सुन्नत है।


■ ➞  अज़ान कहते ही इक़ामत कह देना मकरूह है।


■ ➞  मग़रिब में वक़्फा तीन छोटी आयतों या एक बड़ी आयत ( पढ़ने ) के बराबर हो।


■ ➞  बाक़ी नमाज़ों में इतना वक़्फा रखा जाये कि जो जमाअ़त के पाबंद हों वो आ जायें और इतनी देर वक़्फा ना करें कि मकरूह वक़्त आ जाये।


■ ➞  जिन नमाज़ों में पहले सुन्नत या नफ़्ल है उनमें बेहतर है कि मुअज़्ज़िन अज़ान के बाद सुन्नतें-नवाफ़िल पढ़े वरना बैठा रहे।


■ ➞  मुहल्ले के रईस का उसकी रियासत के सबब इंतिज़ार मकरूह है और अगर वो शरीर है और वक़्त में गुंजाइश है तो इन्तिज़ार कर सकते हैं।


■ ➞  पहले के उलमा ने अज़ान पर उजरत लेने को हराम बताया है पर बाद में उलमा ने देखा कि अगर हराम ही का क़ौल किया जाये तो सुस्ती की वजह से नुक़सान होगा तो इजाज़त दी गयी है और अब इसी पर फ़तवा है, मगर हदीस में मुअज़्ज़िन के लिये जो फज़ीलतें बयान की गयी हैं वो उसी के लिये हैं जो उजरत के लिये अज़ान ना दे और अल्लाह त'आला की रज़ा के लिये अज़ान देते हैं।


■ ➞  अगर मुअज़्ज़िन साहिब को लोग अपनी तरफ़ से दे दें तो ये जाइज़ है, बल्कि बेहतर है और ये उजरत नहीं।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 144 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अल्हम्दुलिल्लाह नमाज़ की 6 शर्तों में से 4 का बयान तक़रीबन मुकम्मल हुआ। आइये अब हम नमाज़ की पाँचवी शर्त यानि निय्यत के बारे में बात करते हैं।


■ ➞  हुज़ूर ए अक़दस ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि आमाल का दारोमदार निय्यत पर है और हर शख़्स के लिये वही है जिसकी उसने निय्यत की (सहीह बुख़ारी)


■ ➞  निय्यत का सिर्फ़ नमाज़ में ही नहीं बल्कि दूसरे आमाल में भी बड़ा अहम किरदार है और इसकी अहमिय्यत कई हदीसों में बयान की गयी है।


■ ➞  निय्यत #दिल के पक्के इरादे को कहते हैं, सिर्फ़ जानना निय्यत नहीं जब तक इरादा ना हो और निय्यत में ज़ुबान का ऐतबार नहीं है जैसा कि तारीफ़ में बयान हुआ है कि ये #दिल के पक्के इरादे का नाम है। अगर किसी ने ज़ुहर की निय्यत की और ज़बान से अस्र का लफ्ज़ निकल गया तो भी नमाज़ हो गयी क्योंकि निय्यत नाम है #दिल के पक्के इरादे का।


■ ➞  निय्यत का अदना दर्जा ये है यानी कम से कम निय्यत तब कहेंगे जब कोई पूछे कि तू कौन से वक़्त की नमाज़ पढ़ता है तो बिला रुके बता दे और अगर सोचने लगे तो फिर ये निय्यत नहीं।..✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 145 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  ज़ुबान से निय्यत करना मुस्तहब है यानी बेहतर है और ख़ास अ़रबी में करना ज़रूरी नहीं बल्कि फ़ारसी, उर्दू वग़ैरह में भी की जा सकती है और माज़ी (Past) का सीगा इस्तिमाल करें मस्लन #निय्यत करता हूँ मैं... की जगह #निय्यत की मैंने... या अ़रबी में नवैतु लफ़्ज़ इस्तेमाल करें।


■ ➞   ज़्यादा एहतियात इसमें है कि अल्लाहु-अकबर कहते वक़्त निय्यत हाज़िर हो।


■ ➞   अगर वुज़ु से पहले निय्यत की या बाद में निय्यत की फिर चल कर नमाज़ पढ़ने गया और नमाज़ पढ़ी तो नमाज़ हो जायेगी।


■ ➞  अल्लाहु-अकबर कहने के बाद निय्यत की या सिर्फ़ अल्लाह कहने के बाद अकबर कहने से पहले निय्यत की तो नमाज़ ना होगी।


■ ➞   सहीह ये है कि नफ़्ल, सुन्नत और तरावीह वग़ैरह सबके लिये बस मुत्लक़ नमाज़ की निय्यत काफ़ी है, लेकिन एहतियात इसमें है कि सुन्नत में हुज़ूर की मुताबिअ़त और तरावीह में तरावीह और क़यामुल्लैल ( रात का क़याम ) की निय्यत करे यानी ख़ास इनको भी शामिल करे क्योंकि बाज़ मशाइख़ मुत्लक़ निय्यत को काफ़ी नहीं समझते।


■ ➞   नफ़्ल नमाज़ के लिये मुत्लक़ नमाज़ की निय्यत काफ़ी है अगर्चे नफ़्ल निय्यत में ना हो।


■ ➞   फ़र्ज़ नमाज़ में फ़र्ज़ की निय्यत ज़रूरी है, मुत्लक़न नमाज़ की निय्यत काफ़ी नहीं है।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 146 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अगर कोई इमाम के पीछे ये निय्यत करे कि जो नमाज़ इमाम पढ़ता है वही मैं भी पढ़ रहा हूँ, तो नमाज़ हो जायेगी।


■ ➞  अगर सुन्नतों को फ़र्ज़ की निय्यत से पढ़ लिया मस्लन ज़ुहर की 4 सुन्नतों को फ़र्ज़ की निय्यत से पढ़ा तो फ़र्ज़ साक़ित हो गया और अब वो शख़्स इमामत भी नहीं कर सकता क्योंकि वो फ़र्ज़ पढ़ चुका है।


■ ➞  फ़र्ज़ नमाज़ की निय्यत में ये भी ज़रूरी है कि ख़ास जिस वक़्त की पढ़ रहा है उस वक़्त की निय्यत करे और जुमुआ में ख़ास जुमुआ की निय्यत ज़रूरी है।


■ ➞  अगर नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो गया और किसी ने फ़र्ज़ की निय्यत की तो नहीं होगी, चाहे उसे वक़्त का इल्म हो या ना हो।


■ ➞  फ़र्ज़ नमाज़ में सिर्फ़ ये कहना काफ़ी नहीं कि आज के फ़र्ज़ पढ़ता हूँ बल्कि वक़्त मुअ़य्यन करना ज़रूरी है कि ज़ुहर की या अस्र की फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ रहा हूँ।


■ ➞  अगर किसी ने दूसरा दिन गुमान कर के निय्यत की मस्लन पीर का दिन था और उसने मंगल की नमाज़ की निय्यत कर ली और बाद को मालूम हुआ कि पीर था तो नमाज़ हो जायेगी और अगर आज के दिन का क़स्द ना किया था और मंगल का क़स्द किया तो नमाज़ ना होगी अगर्चे उस दिन मंगल हो क्योंकि मंगल बहुत हैं लिहाज़ा आज की ( यानी उसी दिन ) की निय्यत ज़रूरी है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 147 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  निय्यत में रकअ़त की तादाद का ज़िक्र ज़रूरी नहीं, पर बेहतर है।


■ ➞  अगर किसी ने ग़लती से तीन रकअ़त ज़ुहर या चार रकअ़त मग़रिब की निय्यत कर ली तो भी नमाज़ हो जायेगी।


■ ➞  फ़र्ज़ नमाज़ क़ज़ा हो गयी हो तो उनको अदा करते वक़्त दिन का तअ़य्युन और वक़्त का तअ़य्युन ज़रूरी है, मुत्लक़न सिर्फ़ फ़र्ज़ की निय्यत काफ़ी नहीं या मुत्लक़न सिर्फ़ ज़ुहर, अस्र की निय्यत काफ़ी नहीं।


■ ➞  अगर किसी के ज़िम्मे एक ही दिन की नमाज़ क़ज़ा हो तो दिन के तअ़य्युन की ज़रूरत नहीं। मस्लन मेरे ज़िम्मे जो फ़लाँ नमाज़ है, इतना काफ़ी है।


■ ➞  अगर किसी की बहुत सी नमाज़ें क़ज़ा हों और दिन भी याद नहीं तो उसके लिये आसान तरीक़ा ये है कि निय्यत में ये रखे कि जो नमाज़ मुझसे सबसे पहले क़ज़ा हुई या सबसे पिछली फ़लाँ नमाज़ जो मेरे ज़िम्मे बाक़ी है।


■ ➞  किसी की मंगल की नमाज़ क़ज़ा थी और उसे लगा कि पीर के दिन की नमाज़ थी फिर पीर की निय्यत से पढ़ ली और बाद में मालूम हुआ कि मंगल की नमाज़ थी तो नमाज़ ना हुई।


■ ➞  क़ज़ा या अदा की निय्यत ज़रूरी नहीं है यानी अदा को क़ज़ा की और क़ज़ा को अदा की निय्यत से पढ़ें तो नमाज़ हो जायेगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 148 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  किसी ने ज़ुहर के वक़्त गुमान किया कि वक़्त ख़त्म हो गया है और उसी दिन की क़ज़ा की निय्यत से पढ़ी तो नमाज़ अदा हो गयी क्योंकि वक़्त बाक़ी था। यूँही वक़्त बाक़ी नहीं था और अदा की निय्यत से पढ़ी तो नमाज़ नहीं होगी और अगर वक़्त भी बाक़ी है और नमाज़ क़ज़ा की निय्यत से पढ़ी और उस दिन की निय्यत ना की तो ना हुयी।


■ ➞  मुक़्तदियों को इक़्तिदा की निय्यत करना ज़रूरी है और इमाम के लिये मुक़्तदियों की नमाज़ सही होने के लिये निय्यते इमामत ज़रूरी नहीं यहाँ तक कि अगर इमाम ने क़स्द कर लिया कि मैं फ़लाँ-फ़लाँ  का इमाम नहीं हूँ और उन्होने इक़्तिदा में नमाज़ पढ़ी तो हो गयी।


■ ➞  अगर इमाम ने इमामत की निय्यत ना की तो जमाअ़त का सवाब ना पायेगा।


■ ➞  अगर मुक़्तदी औरत है और वो किसी मर्द के बराबर खड़ी है और वो नमाज़ नमाज़े जनाज़ा नहीं है तो इमाम का निय्यत करना ज़रूरी है और अगर उन औरतों की इमामत की निय्यत ना की तो उन औरतों की नमाज़ ना होगी।


■ ➞  नमाज़े जनाज़ा में औरत चाहे बराबर में हो या ना हो, इमामत के लिये निय्यत ज़रूरी नहीं और जुमुआ व ईदैन में भी हाजत नहीं और बाक़ी नमाज़ों में भी अगर मर्दों के बराबर ना हो तो इमामत की निय्यत के बग़ैर भी उनकी नमाज़ हो जायेगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 149 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  मुक़्तदी ने अगर सिर्फ़ नमाज़े इमाम या फ़र्ज़े इमाम की निय्यत की और इक़्तिदा का क़स्द ना किया तो नमाज़ ना हुई।


■ ➞  मुक़्तदी ने इक़्तिदा के क़स्द से निय्यत की कि जो नमाज़ इमाम की वो मेरी, तो नमाज़ हो गई।इक़्तिदा की निय्यत में ये ज़रूरी नहीं कि इमाम कौन है।


■ ➞  अगर निय्यत की कि इस इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ता हूँ और इल्म में ज़ैद है, और नमाज़ के बाद मालूम हुआ कि उमर है तो नमाज़ हो गई और अगर ये निय्यत करे कि ज़ैद की इक़्तिदा करता हूँ और बाद को मालूम हुआ कि उमर है तो इक़्तिदा सहीह नहीं।


■ ➞  जमाअ़त कसीर हो यानी लोग ज़्यादा हों तो इक़्तिदा में इमाम का तअ़य्युन ना करें और जनाज़े में भी यूँ निय्यत ना करें कि फ़लाँ मैय्यत की नमाज़।


■ ➞  नमाज़े-जनाज़ा की ये निय्यत है कि नमाज़ अल्लाह के लिये और दुआ ए मग़फ़िरत इस मैय्यत के लिये।


■ ➞  मुक़्तदी को शुब्हा हो कि मैय्यत मर्द है या औरत तो ये निय्यत कर ले इमाम के साथ नमाज़ पढ़ता हूँ, जिस पर इमाम नमाज़ पढ़ता है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 150 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अगर जनाज़े की नमाज़ में किसी को पता नहीं था कि मय्यत मर्द है या औरत और मर्द की निय्यत की फिर नमाज़ के बाद मालूम हुआ कि औरत है तो निय्यत सही नहीं हुई और इसी तरह औरत की निय्यत की फिर मर्द हुआ तो भी नहीं हुई बशर्ते कि जनाज़ा-ए-हाज़िरा की तरफ़ इशारा ना हो।


■ ➞  अगर ज़ैद की मय्यत की निय्यत की और बाद में मालूम हुआ कि उमर था तो सहीह नहीं और अगर ये निय्यत की कि इस मय्यत की पढ़ता हूँ और ख़याल में ज़ैद है और बाद को मालूम हुआ कि उमर है तो हो गई।


■ ➞  यूँ ही अगर ख़याल में औरत है और इस मय्यत की निय्यत से नमाज़ पढ़ी बाद में मर्द होना मालूम हुआ तो हो गई।


■ ➞  अगर एक से ज़्यादा जनाज़े हों और सबकी नमाज़ एक साथ पढ़े तो तादाद की निय्यत करना ज़रूरी नहीं और अगर मुअ़य्यन कर ली कि इतने की पढ़ता हूँ और ज़्यादा हुये तो किसी जनाज़े की ना हुई यानी जबकि निय्यत में इशारा ना हो सिर्फ़ इतना हो कि 10 मय्यतों की नमाज़ तो अगर ग्यारह हुये तो किसी की ना हुई और अगर निय्यत में इशारा था कि इन 10 मय्यतों पर नमाज़ और 20 हों तो सबकी हो गई।


■ ➞  ये अहकाम नमाज़े जनाज़ा के इमाम के हैं और मुक़्तदी के भी।


■ ➞  अगर ये निय्यत की कि जिन पर इमाम पढ़ता है मैं भी उन्हीं पर पढ़ रहा हूँ और 10 समझकर पढ़ी तो अगर ज़्यादा हों सब हो गयी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 151 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  वाजिब नमाज़ में वाजिब की निय्यत करें और उसे मुअ़य्यन भी करें, मस्लन नमाज़े ईदुल-फ़ित्र, ईदुल-अज़्हा, नज़्र, बादे तवाफ़ की नमाज़ या नफ़्ल जिसको जानबूझकर फ़ासिद किया गया हो (जब तक निफ़ल को पढ़ना शुरू नहीं किया तब तक वो निफ़ल ही है, लेकिन जब निफ़ल को पढ़ना शुरू कर के किसी भी वजह से पूरा नहीं कर पाया तो अब उस निफ़ल का पढ़ना वाजिब हो गया। ) उसकी क़ज़ा भी वाजिब हो जाती है।


■ ➞  सजदा-ए-तिलावत में निय्यत को मुअ़य्यन करना ज़रूरी है मगर जबकि नमाज़ में फ़ौरन किया जाये।


■ ➞  सजदा-ए-शुक्र अगर्चे नफ़्ल है मगर इसमें भी निय्यत का तअ़य्युन ज़रूरी है कि शुक्र का सजदा करता हूँ और सजदा -ए- सहव में भी।


■ ➞  वित्र की नमाज़ में वित्र की निय्यत काफ़ी है अगर्चे वाजिब की निय्यत हाज़िर नहीं पर अगर वाजिब ना होने की निय्यत से पढ़े तो काफ़ी नहीं।


■ ➞  नज़्र की कुछ नमाज़ें हों तो हर नज़्र को मुअ़य्यन करना ज़रूरी है।


■ ➞  ये निय्यत कि मुँह मेरा क़िब्ला की तरफ़ है, शर्त नहीं है, हाँ क़िब्ला से ऐराज़ की निय्यत ना हो।


■ ➞  अगर नमाज़ फ़र्ज़ की निय्यत से शुरू की और बीच में गुमान किया कि नफ़्ल है और फिर नफ़्ल की निय्यत से पूरी की तो फ़र्ज़ अदा हो गये।


■ ➞  और अगर नफ्ल की निय्यत से शुरू की और दरमियान में फ़र्ज़ का गुमान हुआ और इसी तरह मुकम्मल की तो नफ़्ल हुये।


■ ➞  अगर नमाज़ शुरू करने के बाद दूसरी नमाज़ की निय्यत की तो अगर फिर से तकबीर के साथ की है तो पहली नमाज़ गयी और अब दूसरी शुरू हो गयी वरना पहली ही है।


■ ➞  ये उस वक़्त है कि निय्यत ज़ुबान से ना करे वरना पहली जाती रहेगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 152 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अगर दिल में नमाज़ तोड़ने की निय्यत की तो भी नमाज़ जारी है, नहीं टूटेगी जब तक कोई ऐसा काम ना करे जिससे नमाज़ टूट जाती है।


■ ➞  अल्लाह ﷻ की रज़ा के लिये नमाज़ शुरू की और बीच में दिखावे का ख़याल आया तो शुरू का ऐतबार किया जायेगा।


■ ➞  दिखावा ये है कि लोगों के साथ होने की वजह से नमाज़ पढ़ ली वरना पढ़ता नहीं ( इस सूरत में बहुत गुनाह है ) और अगर अकेले में पढ़ता मगर अच्छी तरह नहीं पढ़ता जैसे लोगों के सामने पढ़ी तो अ़स्ल नमाज़ का सवाब मिलेगा पर जो ख़ूबी से पढ़ी उसका सवाब नहीं मिलेगा और रियाकारी का गुनाह अपनी जगह है।


■ ➞  नमाज़ पढ़ रहा था और दिखावे का ख़याल आया तो नमाज़ ना तोड़े बल्कि पूरी करे और फिर अस्तग़फार करे।


■ ➞  यहाँ नमाज़ की 5 शर्तों का बयान तक़रीबन मुकम्मल हुआ और अब नमाज़ की छठी शर्त के बारे में ज़रूरी मसाईल बयान किये जायेंगे, ا ن شاء الله عزوجل


■ ➞  नमाज़ की छठी शर्त है तकबीरे तहरीमा यानि अल्लाह ﷻ का नाम लेकर नमाज़ शुरू करना।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 153 ♻️


☝🏻नमाज़ की कुल छः शराईत होती हैं, (1) तहारत, (2) सित्रे-औरत, (3) इस्तक़बाले-क़िबला, (4) वक़्त, (5) नियत, (6) तकबीरे-तहरीमा-


■ ➞  अहादीस में है कि नबी-ए-करीम ﷺ अल्लाहु-अकबर कहकर नमाज़ शुरू फ़रमाते।


■ ➞  नमाज़े-जनाज़ा में तकबीरे-तहरीमा एक रुक्न ( One Step/एक हिस्सा ) है बाक़ी नमाज़ों में शर्त है।


■ ➞  तकबीरे-तहरीमा नमाज़ की शर्त भी है और फ़र्ज़ भी इसलिए इसकी मज़ीद तफ़सील नमाज़ के फ़राईज़ में बयान की जायेगी ( ا ن شاء الله عزوجل )।


■ ➞  नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा ये है कि बा'वुज़ू क़िब्ला की तरफ़ मुँह कर के दोनों पैरों के पंजों के दरमियान चार उंगलियों का फ़ासला ( Gap ) रखकर खड़ा हो जाये और दोनों हाथों को सीधा उठा कर कानों तक ले जाये कि दोनों अँगूठे कानों की लौ को छू जायें और उंगलियाँ ना ख़ूब खुली हुयी रखें ना मिली हुयी, बल्कि अपनी हालत पर ( Normal ) छोड़ दें और हथेलियाँ भी क़िब्ला की तरफ़ हों।


■ ➞  फिर अल्लाहु-अकबर कहता हुआ हाथ नीचे लायें और नाफ़ के नीचे बांध लें।


■ ➞  हाथ यूँ बांधें कि दाहिनी हथेली की गुद्दी बाँयें हाथ की कलाई के सिरे पर हो और बीच की तीन उंगलियाँ बाँयीं कलाई की पुश्त पर और अँगूठा और छोटी वाली उंगली कलाई के अगल-बगल।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 154 ♻️


■ ➞  हाथ बाँधने के बाद सना पढ़ें :


سُبْحَانَکَ اللّٰھُمَّ وَ بِحَمْدِکَ وَ تَبَارَکَ اسْمُکَ وَتَعَالٰی جَدُّکَ وَلَا اِلٰـہَ غَیْرُکَ


फिर ये पढ़े (तआवुज़):


اَعُوْذُ بِاللّٰہِ مِنَ الشَّیْطٰنِ الرَّجِیْمِ


फिर ये पढ़ें (तसमिया):


بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ


■ ➞  फिर अल्हम्द (सूरे-फ़ातिहा) पढ़ें और ख़त्म पर आहिस्ता से आमीन कहें।


■ ➞  इसके बाद कोई सूरत या तीन छोटी आयतें पढ़ें या कोई एक बड़ी आयत ( जो तीन छोटी आयतों के बराबर हो ) पढ़ें।


■ ➞  फिर अल्लाहु-अकबर कहते हुये रुकूअ़ में जायें और हाथों से घुटनों को पकड़ें, इस तरह कि हथेली घुटनों पर हो और उंगलियां ख़ूब फैली हुयी हों।


■ ➞  इस तरह ना करें कि सब उंगलियाँ एक तरफ़ हों और इस तरह भी नहीं कि चार उंगलियाँ एक तरफ़ और अँगूठा एक तरफ़ और पीठ बिछी हुयी होनी चाहिये और सर झुका हुआ या पीठ से उठा हुआ ना हो बल्कि बराबर में हो और कम से कम तीन बार ये पढ़ें :


سُبْحَانَ رَبِّیَ الْعَظِیْمِ...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 155 ♻️


■ ➞  फिर रुकूअ़ से ये कहते हुये खड़ा हो जाये :


سَمِعَ اللّٰہُ لِمَنْ حَمِدَہ


■ ➞  अगर अकेला नमाज़ पढ़ रहा हो तो फ़िर ये भी पढ़े :


اَللَّھُمَّ رَبَّنَا وَلَکَ الْحَمْدُ


■ ➞  फिर अल्लाहु-अकबर कहता हुये इस तरह सजदे में जाये कि पहले घुटने ज़मीन पर रखे, फिर हाथ फिर दोनों हाथों के बीच में सर रखे।


■ ➞  सर इस तरह ना रखे कि बस पेशानी छू जाये और नाक की नोक सट जाये बल्कि पेशानी और नाक की हड्डी को ज़मीन पर जमाये।


■ ➞  बाज़ुओं को करवटों और पेट को रानों और रानों को पिंडलियों से जुदा रखे और दोनों पैरों की उंगलियों के पेट क़िब्ला रू जमे हों और हथेलियाँ बिछी हों और उंगलियाँ क़िब्ला की तरफ़ हों और फिर कम से कम तीन बार ये पढ़े :


سُبْحَانَ رَبِّیَ الْاَعْلٰی


■ ➞  फिर सर उठाये, फिर हाथ और फिर दाहिना क़दम खड़ा कर के बायें को बिछा कर उस पर ख़ूब सीधे हो कर बैठ जाये और हथेलियाँ बिछाकर रानों पर घुटने के पास रखे।


■ ➞  दोनों हाथों की उंगलियाँ क़िब्ला की तरफ हों फिर अल्लाहु-अकबर कहता हुआ दूसरे सजदे को जाये।


■ ➞  फिर सजदा कर के सर उठाये फिर हाथ को घुटनों पर रख के पंजों के बल खड़ा हो जाये और बिस्मिल्लाह पढ़कर क़िरअ़त शुरू कर दे फिर इसी तरह दूसरी रकअ़त के सजदे करने के बाद बैठ जाये और फिर ये पढ़े :


اَلتَّحِیَّاتُ لِلّٰہِ وَالصَّلَوٰتُ وَالطَّیِّبَاتُ اَلسَّلَامُ عَلَیْکَ اَیُّھَا النَّبِیُّ وَرَحْمَۃُ اللّٰہِ وَ بَرَکَاتُہٗ اَلسَّلَامُ عَلَیْنَا وَعَلٰی عِبَادِ اللّٰہِ الصَّالِحِیْنَ اَشْھَدُ اَنْ لَّا اِلٰہَ اِلَّا اللّٰہُ وَاَشْھَدُ اَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُہٗ وَرُسُوْلُہٗ


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 156 ♻️


नमाज़ अदा करने का मुकम्मल तरीक़ा :

पिछली पोस्ट से आगे...👇🏻 


■ ➞  अत्तहिय्यात में कोई कमी-बेशी ना करें, ना सय्यिदुना का इज़ाफा करे। अत्तहिय्यात को ही तशह्हुद कहते हैं।


■ ➞  जब कलिमा "ला" पर पहुँचे तो दाहिने हाथ की बीच वाली उंगली और अँगूठे से हल्क़ा (गोल) बनायें और सबसे छोटी वाली उंगली और उस के साथ वाली को हथेली से मिला दें और कलिमा "ला" पर शहादत की उंगली को उठायें पर हरकत ना दें और "इल्लल्ला" पर उंगली गिरा दें और फ़ौरन ही तमाम उंगलियाँ सीधी कर लें।


■ ➞  अब अगर दो से ज़्यादा रकअ़तें पढ़नी हों तो उठ खड़ा हो और फिर पहले की तरह पढ़े मगर फ़र्ज़ नमाज़ है तो अल्हम्द के बाद सूरत मिलाना ज़रूरी नहीं।


■ ➞  अब आख़िरी रकअ़त में तशह्हुद के बाद दुरूदे-इब्राहीमी पढ़े :


اَللّٰھُمَّ صَلِّ عَلٰی سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَّعَلٰی اٰلِ سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ کَمَا صَلَّیْتَ عَلٰی سَیِّدِنَا اِبْرَاھِیْمَ وَعَلٰی اٰلِ سَیِّدِنَا اِبْرَاھِیْمَ اِنَّکَ حَمِیْدٌ مَّجِیْدٌ اَللّٰھُمَّ بَارِکْ عَلٰی سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَّعَلٰی اٰلِ سَیِّدِنَا مُحَمَّدٍ کَمَا بَارَکْتَ عَلٰی سَیِّدِنَا اِبْرَاھِیْمَ وَعَلٰی اٰلِ سَیِّدِنَا اِبْرَاھِیْمَ اِنَّکَ حَمِیْدٌ مَّجِیْدٌ۔


■ ➞  इसके बाद ये दुआ पढ़े :


اَللّٰھُمَّ اغْفِرْلِیْ وَلِوَالِدَیَّ وَلِمَنْ تَوَالَدَ وَلِجَمِیْعِ الْمُؤْمِنِیْنَ وَالْمُؤْمِنَاتِ وَالْمُسْلِمِیْنَ وَالْمُسْلِمَاتِ الْاَحْیَاءِ مِنْھُمْ وَالْاَمْوَاتِ اِنَّکَ مُجِیْبُ الدَّعْوَاتِ بِرَحْمَتِکَ یَا اَرْحَمَ الرَّاحِمِیْنَ


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 157 ♻️


■ ➞  दुरूदे-इब्राहीमी के बाद ये दुआ भी पढ़ सकते हैं या कोई और दुआ-ए-मासूरह :


اَللّٰھُمَّ اِنِّیْ ظَلَمْتُ نَفْسِیْ ظُلْمًا کَثِیرًا وَّ اِنَّہٗ لَا یَغْفِرُ الذُّنُوْبَ اِلَّا اَنْتَ فَاغْفِرْلِی مَغْفِرَۃً مِّنْ عِنْدِکَ وَارْحَمْنِیْ اِنَّکَ اَنْتَ الْغَفُوْرُ الرَّحِیْمُ ۔ 


या ये पढ़ें :


اَللّٰھُمَّ اِنِّیْ اَسْئَلُکَ مِنَ الْخَیْرِ کُلِّہٖ مَا عَلِمْتُ مِنْہُ وَمَا لَمْ اَعْلَمْ وَاَعُوْذُبِکَ مِنَ الشَّرِ کُلِّہٖ مَا عَلِمْتُ مِنْہُ وَمَا لَمْ اَعْلَمْ۔


या ये पढ़ें :


اَللّٰھُمَّ اِنِّی اَعُوْذُبِکَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَ اَعُوْذُبِکَ مِنْ فِتْنَۃِ الْمَسِیْحِ الدَّجَّالِ وَ اَعُوْذُبِکَ مِنْ فِتْنَۃِ الْمَحْیَا وَ فِتْنَۃِ الْمَمَاتِ اَللّٰھُمَّ اِنِّیْ اَعُوْذُبِکَ مِنَ الْمَاْثَمِ وَمِنَ الْمَغْرَمِ وَ اَعُوْذُبِکَ مِنْ غَلَبَۃِ الدَّیْنِ وَ قَھْرِ الرِّجَال


या ये पढ़ें :


اَللّٰھُمَّ رَبَّنَا اٰتِنَا فِی الدُّنْیَا حَسَنَۃً وَّفِی الْاٰخِرَۃِ حَسَنَۃً وَّقِنَا عَذَابَ النَّارِ


■ ➞  और इसको अल्ला हुम्म के बग़ैर ना पढ़ें, फिर पहले दाँयीं तरफ़ सलाम फेरें और फिर बाँयीं तरफ़, ये कहते हुये:


السلام علیکم و رحمۃ اللہ_ 


■ ➞  ये मुख़्तसर तरीक़ा जो हमने समझा, अभी इसमें काफ़ी तफ़सील है। मस्लन मुक़्तदी के लिये इमाम के पीछे अल्हम्द पढ़ना जाइज़ नहीं, फिर और भी कई बातों में मुक़्तदी और मुन्फ़रिद ( तन्हा पढ़ने ) के अलग-अलग अहकाम हैं।


■ ➞  अब हम नमाज़ के फ़राईज़ पर बात करेंगे, ا ن شاء الله عزوجل।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 158 ♻️


■ ➞  नमाज़ में  7 फ़राइज़ हैं, इनमें से एक भी अगर अदा ना हुआ, तो नमाज़ नहीं होगी।


(1) तकबीरे-तहरीमा-

(2) क़ियाम-

(3) क़िरअत-

(4) रुकूअ़-

(5) सजदा-

(6) क़ादा-ए-आख़िरा-

(7) ख़ुरूजे-बिसुनइही-


■ ➞  पहला फ़र्ज़ है तकबीरे तहरीमा-


■ ➞  ये हमने नमाज़ की शराइत में भी देखा था और इसे फ़राइज़ में भी शुमार किया जाता है। इसका नमाज़ के अफ़आल के साथ बहुत इत्तिसाल ( Strong-Connection ) है, इसी वजह से ये शर्त भी है और फ़र्ज़ भी।


■ ➞  जिन नमाज़ों में क़ियाम ( खड़े होना ) फ़र्ज़ है उन नमाज़ों में तकबीरे-तहरीमा के लिये भी क़ियाम फ़र्ज़ है यानी बैठकर नहीं कह सकते।


■ ➞  अगर किसी ने बैठकर अल्लाहु-अकबर कहा और खड़ा हो गया तो नमाज़ शुरू ही ना हुयी।


■ ➞  इमाम को रुकूअ़ में पाया और तकबीरे-तहरीमा कहता हुआ रुकूअ़ में गया यानी तकबीर उस वक़्त खत्म की कि हाथ बढ़ाये तो घुटनों तक पहुँच जाये तो नमाज़ ना हुई।...✍🏻

☝🏻हमारे कई भाई जमाअत में रकअत न निकल जाये, इस जल्दबाज़ी में ऐसी ग़लती कर बैठते हैं। इसलिए पहले बिल्कुल सीधे खड़े होकर इत्मिनान के साथ तकबीरे-तहरीमा कह कर रुकूअ में शामिल हों।


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 159 ♻️


■ ➞  पहला फ़र्ज़ है तकबीरे-तहरीमा-

पिछली पोस्ट से आगे...👇🏻 


■ ➞  निफ़ल नमाज़ के लिये तकबीरे-तहरीमा रुकूअ़ में कही तो नमाज़ नहीं होगी और अगर बैठकर कहता तो हो जाती।


■ ➞  मुक़्तदी ने लफ़्ज़े अल्लाह, इमाम के साथ कहा और अकबर को इमाम से पहले ख़त्म कर लिया तो नमाज़ ना हुई।


■ ➞  अगर इमाम की तकबीर का हाल मालूम नहीं और पता नहीं कि इमाम से पहले तकबीर कही या बाद में तो अगर ग़ालिब गुमान ये हो कि इमाम से पहले कही तो नमाज़ ना हुई और अगर ये हो कि बाद में कही तो हो गई और अगर किसी तरफ़ ग़ालिब गुमान ना हो तो एह्तियात ये है कि क़तअ़ ( निय्यत तोड़ दे ) और फिर से तकबीरे-तहरीमा कह कर हाथ बाँधे।


■ ➞  जो शख़्स तकबीर ना कह सकता हो मस्लन गूँगा हो या किसी और वजह से ज़ुबान बन्द हो तो उस पर तलफ़्फ़ुज़ वाजिब नहीं बल्कि दिल में कह लेना काफ़ी है।


■ ➞  अल्लाहु-अकबर की जगह कोई और लफ़्ज़ ऐसा इस्तिमाल किया जो ख़ालिस ताज़ीमे-इलाही के लिये है तो भी नमाज़ शुरू हो जायेगी पर ऐसा करना मकरूहे तहरीमी है।


■ ➞  यानी सुब्हानअल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह कह कर भी नमाज़ शुरू करे तो हो जायेगी पर ये तब्दीली मकरूहे तहरीमी है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 160 ♻️


■ ➞  पहला फ़र्ज़ है तकबीरे-तहरीमा-

पिछली पोस्ट से आगे...👇🏻 


■ ➞  अगर सिर्फ़ अल्लाह, या अल्लाहु कहकर नमाज़ शुरू की तो नमाज़ शुरू हो जायेगी।


■ ➞  अल्लाहु-अकबर का तलफ़्फ़ुज़ बिगाड़ कर पढ़े तो नमाज़ ना होगी ( हमें चाहिए कि सही तलफ़्फ़ुज़ सीखें ) और अगर उसका फ़ासिद मा'ना जानते हुये क़स्दन ( जानबूझकर ) पढ़े तो काफ़िर है।


■ ➞  पहली रकअ़त में रुकूअ़ मिल जाये तो तकबीरे-ऊला की फ़ज़ीलत मिल जाती है।

☝🏻…लेकिन कुछ लोग जानबूझकर यानि बिना किसी जायज़ वजह के, सुस्ती और काहिली की वजह से नमाज़ में इस तरह देर से शामिल होने की आदत बना लेते हैं, ख़ास कर तरावीह में इमाम के रुकूअ में जाने का इंतज़ार करते हैं, इस तरह करना गुनाह है।


■ ➞  नमाज़ का दूसरा फ़र्ज़- क़ियाम :


■ ➞  क़ियाम यानी खड़ा होना और कम से कम क़ियाम ये है कि हाथ घुटनों तक पहुँचाये तो ना पहुँचें और ज़्यादा से ज़्यादा ये है कि बिल्कुल सीधा खड़ा हो।


■ ➞  क़ियाम इतनी देर तक है जितनी देर तक क़िरअत यानी जो क़िरअत फ़र्ज़ है उसके लिये क़ियाम फ़र्ज़ है, जो क़िरअत वाजिब है उसके लिये क़ियाम वाजिब है और जो क़िरअत सुन्नत है उसके लिये क़ियाम सुन्नत है।


■ ➞  ये हुक्म पहली रकअ़त के इलावा के लिये है, पहली रकअ़त में फ़र्ज़ क़ियाम में तकबीरे-तहरीमा भी दाख़िल है और सुन्नत में सना ( सुब्हान-कल्ला हुम्मा ), तआव्वुज़ ( आऊज़ु-बिल्लाह ), तस्मिया ( बिस्मिल्लाह ) सब दाख़िल हैं।


■ ➞  इसके फ़र्ज़, वाजिब और सुन्नत होने का ये मतलब है कि तर्क होने पर इसी के मुताबिक़ हुक्म होगा, वरना जितनी देर तक क़ियाम किया, जो कुछ पढ़ा सब फ़र्ज़ ही है और फ़र्ज़ का सवाब मिलेगा...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 161 ♻️


■ ➞  नमाज़ का दूसरा फ़र्ज़- क़ियाम-

पिछली पोस्ट से आगे...👇🏻 


■ ➞  फ़र्ज़, वित्र, ईदैन और सुन्नते फ़ज्र में क़ियाम फ़र्ज़ है, तो अगर कोई बिला-उज़रे-सहीह इन्हें बैठकर पढ़ेगा तो नमाज़ ना होगी।


■ ➞  एक पाऊँ पर खड़े होना यानी दूसरे को ज़मीन से उठा लेना मकरूहे तहरीमी है और अगर उज़्र की वजह से ऐसा किया तो हर्ज नहीं।


■ ➞  अगर क़ियाम कर सकता है पर सजदा नहीं कर सकता, तो बेहतर है कि बैठकर इशारे से नमाज़ पढ़े और खड़े होकर भी पढ़ सकता है।


■ ➞  जो शख़्स सजदा तो कर सकता है पर सजदा करने की वजह से ज़ख़्म बहता है, तो वो बैठकर इशारे से नमाज़ पढ़े और खड़ा होकर भी इशारे से पढ़ सकता है।


■ ➞  जिस शख़्स को खड़े होने से क़तरा आता है या ज़ख़्म बहता है और बैठकर नहीं तो उस पर फ़र्ज़ है कि बैठकर पढ़े, अगर किसी और तरीक़े से रोक ना सकता हो।


■ ➞  अगर तन्हा इतना कमज़ोर है कि मस्जिद चल कर जाने पर थक जायेगा और वहाँ खड़े होकर नमाज़ ना पढ़ सकेगा और घर में खड़े होकर पढ़ सकता है तो घर में पढ़े।


■ ➞  खड़े होने से महज़ कुछ तकलीफ़ होना उज़्र नहीं है, बल्कि क़ियाम उस वक़्त साक़ित होगा ( यानी माफ़ होगा ) जब खड़ा ना हो सके या सजदा ना कर सके या खड़े होने या सजदा करने में ज़ख़्म बहता है या खड़े होने में क़तरा आता है।


■ ➞  अगर खड़ा हो सकता है पर पता है कि उससे बीमारी बढ़ सकती है तो बैठकर पढ़े।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 162 ♻️


■ ➞  अगर दीवार या ख़ादिम या असा के सहारे टेक लगाकर खड़ा हो सकता है तो फ़र्ज़ है कि खड़ा हो कर नमाज़ पढ़े।


■ ➞  अगर कुछ देर भी खड़ा हो सकता है, फ़क़त इतना कि अल्लाहु-अकबर कह सके तो फ़र्ज़ है कि खड़े होकर अल्लाहु-अकबर कहे फिर बैठ जाये।


■ ➞  आज कल देखा जाता है कि ज़रा सा बुख़ार आया या हल्की सी तबियत ख़राब हुई तो बैठकर नमाज़ पढ़ना शुरू कर देते हैं और वही लोग कई मिनिटों तक इधर-उधर खड़े होकर बातें कर लिया करते हैं, उनको चाहिये कि मसाईल को सीखें और जितनी नमाज़ें क़ियाम पर क़ादिर होने के बावजूद बैठकर पढ़ी हैं, सबका इआदा करें यानि दुबारा पढ़ें।


■ ➞  अगर कोई ऐसे खड़ा ना हो सकता था और असा, ख़ादिम या दीवार के सहारे खड़ा हो सकता था तो उसने भी जो नमाज़ें बैठकर पढ़ी हैं, सबका इआदा करे (दोहराये)।


■ ➞  अल्लाह त'आला तौफ़ीक़ अ़ता फ़रमाये।🤲🏻


■ ➞  कश्ती पर सवार है और वो चल रही है तो उस पर बैठ कर नमाज़ पढ़ सकता है, जबकि चक्कर आने का ग़ालिब गुमान हो और किनारे पर उतर ना सकता हो।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 163 ♻️


 ■ ➞   नमाज़ का तीसरा फ़र्ज़ है, क़िरअत :


■ ➞   क़िरअत इसका नाम है कि तमाम हुरूफ़ मख़ारिज से अदा किये जायें।


■ ➞   हुरूफ़ में एक-दूसरे से फ़र्क़ ज़ाहिर हो जाना चाहिये।


■ ➞   अगर आहिस्ता पढ़े तो ये ज़रूरी है कि कम से कम ख़ुद सुने। अगर इतनी धीमी आवाज़ से पढ़े कि ख़ुद को सुनाई ना दे और कोई चीज़ मानेअ भी ना हो, ( मस्लन शोर ना हो रहा हो या किसी चीज़ की तेज़ आवाज़ की वजह से सुनाई ना दे रहा हो ) तो नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞   ऊँचा सुनने का मर्ज़ है तो इतनी आवाज़ से पढ़ना ज़रूरी नहीं कि ख़ुद सुन सके, बल्कि इतनी आवाज़ से पढ़े कि अगर ये मर्ज़ ना होता तो ख़ुद सुन लेता।


■ ➞   सिर्फ़ नमाज़ की क़िरअत ही नहीं बल्कि जहाँ भी शरीअ़त में कुछ कहने या बोलने का हुक्म है, इतनी आवाज़ में कि ख़ुद सुन सके, जैसे तलाक़ देना, जानवर ज़िबह करते वक़्त या ग़ुलाम आज़ाद करने में।


फ़र्ज़ की दो रकअ़तों में एक आयत का पढ़ना फ़र्ज़ है, यानी इतनी क़िरअत के बिना नमाज़ नहीं होगी और वित्र व नवाफ़िल की हर रकअ़त में इमाम व मुन्फ़रिद पर फ़र्ज़ है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 164 ♻️


■ ➞   नमाज़ का तीसरा फ़र्ज़ है, क़िरअत :

■➞पिछली पोस्ट से आगे :


■ ➞  मुक़्तदी को किसी नमाज़ में आयत पढ़ने की इजाज़त नहीं, ना सूरे फ़ातिहा ना कोई और आयत।


■ ➞  चाहे इमाम आहिस्ता पढ़े या बुलंद आवाज़ से पढ़ने वाली नमाज़ हो, मुक़्तदी के लिये क़िरअत जाइज़ नहीं। इमाम की क़िरअत ही मुक़्तदी के लिये काफ़ी है।


■ ➞  फ़र्ज़ नमाज़ की पहली दोनों रकअ़तों में क़िरअत ना की या फ़क़त एक में की तो नमाज़ फ़ासिद हो गयी।


■ ➞  छोटी आयत जिसमें दो या दो से ज़्यादा कलिमात हों, उसे पढ़ लेने से फ़र्ज़ अदा हो जायेगा।


■ ➞  अगर एक हर्फ़ वाली आयत पढ़ी मस्लन नून, क़ाफ़ कि बाज़ क़िरअतों में इन को आयत माना है तो फ़र्ज़ अदा ना होगा अगर्चे इसकी तक़रार करे।


■ ➞  अगर एक कलिमे वाली आयत हो तो भी बचना चाहिये।


■ ➞  सूरत के शुरू में बिस्मिल्लाह एक मुकम्मल आयत है पर सिर्फ़ इसके पढ़ने से फ़र्ज़ अदा ना होगा।


■ ➞  ये नमाज़ के तीन फ़राइज़ मुख़्तसर बयान हुये, अब कल की पोस्ट में नमाज़ के चौथे फ़र्ज़ यानि रुकूअ़ पर बात होगी।... ا ن شاء الله عزوجل✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 165 ♻️


■ ➞   नमाज़ का चौथा फ़र्ज़ है, रुकूअ :


■ ➞  कम से कम रुकूअ़ का दर्जा ये है कि झुकने के बाद हाथ बढ़ाये तो घुटनों तक पहुँच जाऐं और पूरा रुकूअ़ ये है कि पीठ को सीधा बिछा दे।


■ ➞  जो कुबड़ा हो तो रुकूअ़ के लिये सर से इशारा करे।


■ ➞  हज़रते हुज़ैफ़ा रदिअल्लाहु त'आला अ़न्हु ने एक शख़्स को देखा कि रुकूअ़ सहीह से नहीं कर रहा है, तो फ़रमाया कि तुमने नमाज़ नहीं पढ़ी और अगर इसी तरह नमाज़ पढ़ते हुये मर गये तो हुज़ूर ﷺ की मिल्लत पर नहीं मरोगे। (सहीह बुखारी)


■ ➞  अबू दाऊद शरीफ़ की रिवायत में इतना इज़ाफ़ा है कि आपने पूछा तुम कितने साल से नमाज़ पढ़ रहे हो तो उसने कहा कि 40 साल से, तो आपने इरशाद फ़रमाया कि तुम ने 40 साल से कोई नमाज़ नहीं पढ़ी।


■ ➞  हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि सबसे बदतर चोर वो है जो नमाज़ में चोरी करता है तो सहाबा ने अ़र्ज़ की कि नमाज़ में चोरी ?


■ ➞  आप ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि हाँ! वो जो रुकूअ़ और सुजूद पूरे नहीं करता।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 166 ♻️


■ ➞   नमाज़ का पाँचवाँ फ़र्ज़ है, सजदा:


■ ➞  हदीसे पाक में है कि सजदे की हालत में बन्दा अल्लाह त'आला के सबसे क़रीब होता है।


■ ➞  पेशानी का ज़मीन पर जमना सजदे की हक़ीक़त है और पैर की एक उंगली का पेट लगना शर्त है, तो अगर किसी ने इस तरह सजदा किया कि दोनों पाऊँ ज़मीन से उठे रहे तो सजदा नहीं होगा।


■ ➞  पैर उठना तो दूर अगर सिर्फ़ उंगली की नोक लगी रही तो भी सजदा नहीं होगा, उंगली के पेट को जमाना ज़रूरी है।


■ ➞  अगर किसी उज़्र के सबब पेशानी को ज़मीन पर नहीं लगा सकता तो सिर्फ नाक से सजदा करे और सिर्फ नाक की नोक को लगाने का नाम सजदा नहीं बल्कि नाक की हड्डी तक उसे जमाना ज़रूरी है।


■ ➞  रुख़सार या थुडी को ज़मीन पर लगाने से सजदा ना होगा, चाहे उज़्र हो या उज़्र ना हो, अगर उज़्र है तो इशारे से पढ़ने का हुक्म है।


■ ➞  हर रकअ़त में दो बार सजदा करना फ़र्ज़ है।


■ ➞  किसी नर्म चीज़ पर अगर सजदा किया मस्लन घांस, क़ालीन वग़ैरह तो अगर पेशानी जम गयी यानी इतनी दब गयी कि अब मज़ीद दबाने से नहीं दबेगी तो सजदा हो गया वरना नहीं।


■ ➞  मोटे गद्दे और स्प्रिंग वाले गद्दों पर पेशानी नहीं जमती लिहाज़ा इन पर नमाज़ ना होगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 168 ♻️


■ ➞   नमाज़ का छठा फ़र्ज़ है क़ा'दा-ए-आख़िरा यानी आख़िरी रकअ़त में बैठना और इतनी देर तक बैठना फ़र्ज़ है कि पूरी अत्तहिय्यात पढ़ ली जाये।


■ ➞   कोई चार रकअ़त पढ़ने के बाद बैठा फ़िर ये गुमान आया कि तीन ही हुई हैं और खड़ा हो गया, फिर याद आया कि चार हो चुकी थीं और बैठ गया फिर सलाम फेर दिया तो अगर दोनों बार का बैठना मिलाकर ब'क़द्रे तशह्हुद (एक बार अत्तहियात पढ़ने की बराबर ) हो गया तो फ़र्ज़ अदा हो गया वरना नहीं।


■ ➞   पूरा क़ा'दा सोते हुये गुज़र गया तो जागने के बाद तशह्हुद जितना बैठना फ़र्ज़ है, यानी जितनी देर में अत्तहिय्यात पढ़ सके इतना बैठना फ़र्ज़ है, वरना नमाज़ नहीं होगी।


■ ➞   इसी तरह क़ियाम में अव्वल से आख़िर तक सोता ही रहा तो बेदारी के बाद इआदा फ़र्ज़ है, वरना नमाज़ ना होगी और सजदा-ए-सहव भी करे, लोग इस मसअले से ग़ाफ़िल हैं, ख़ुसूसन तरावीह में और गर्मियों में।


■ ➞   पूरी रकअ़त सोते में पढ़ ली तो नमाज़ फ़ासिद हो गई।


■ ➞   चार रकअ़त वाली फ़र्ज़ नमाज़ में आख़िर में ना बैठा और पाँचवीं के लिये खड़ा हो गया तो जब तक पाँचवीं का सजदा ना किया हो बैठ जाये और अगर पाँचवी का सजदा कर लिया या फ़ज्र की नमाज़ की दूसरी रकअत में ना बैठा और तीसरी का सजदा कर लिया या मग़रिब की तीसरी रकअत में ना बैठा और चौथी का सजदा कर लिया तो फ़र्ज़ बातिल हो गये।


■ ➞   ऐसे में मग़रिब के इलावा और नमाज़ों में एक रकअ़त मिलाकर पूरी कर ले।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 169 ♻️


■ ➞   नमाज़ का सातवाँ फ़र्ज़ है ख़ुरूजे-बि'सुनईही यानी रकअ़त पूरी करने के बाद क़ा'दा -ए- आख़िरा में कोई ऐसा काम जानबूझकर करना जिससे नमाज़ से बाहर आ जायें।


■ ➞   इसका आसान मा'ना है अपने इरादे से नमाज़ से बाहर आने के लिये कोई ऐसा अ़मल करना जो नमाज़ के मनफ़ी हो मसलन सलाम कलाम।


■ ➞   इसके लिये सलाम फेरने का तरीक़ा बयान किया गया है और सलाम के इलावा कोई तरीक़ा अपनाया तो नमाज़ हो तो जायेगी लेकिन वाजिबुल-इआदा होगी यानी फ़र्ज़ अदा हो जायेगा और बिला-क़स्द कोई अ़मल ऐसा किया तो नमाज़ फ़ासिद हो जायेगी।


■ ➞   पहले क़ियाम, फिर रुकूअ़, फिर सजदे, फिर क़ा'दा-ए-आख़िरा ये तरतीब फ़र्ज़ है, लिहाज़ा अगर किसी ने क़ियाम से पहले रुकूअ़ कर लिया और फिर क़ियाम किया तो रुकूअ़ जाता रहा अब क़ियाम के बाद फिर रुकूअ़ करेगा तो नमाज़ होगी वरना नहीं।


■ ➞   यूँ ही रुकूअ़ से पहले सजदा कर लिया फिर रुकूअ़ और सजदा किया तो नमाज़ हो जायेगी वरना नहीं।


■ ➞   जो चीज़ें नमाज़ में फ़र्ज़ हैं उनमें मुक़्तदी को इमाम की पैरवी करना फ़र्ज़ है। मसलन कोई रुक्न इमाम से पहले अदा कर चुका या इमाम के बाद अदा ना किया तो नमाज़ ना होगी।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 170 ♻️


■ ➞   मुक़्तदी पर फ़र्ज़ है कि इमाम की नमाज़ को अपने ख़याल में सहीह तसव्वुर करता हो।अगर इमाम की नमाज़ को बातिल समझता है तो इसकी नमाज़ ना होगी, अगर्चे इमाम की नमाज़ सहीह हो।


■ ➞   ये नमाज़ के फ़राइज़ का मुख़्तसरन बयान हुआ, अब नमाज़ के वाजिबात की बात होगी ا ن شاء الله عزوجل।


■ ➞   ☝🏻याद रहे ये जो 7 फ़राइज़ बयान किये गये, इनमें से अगर एक भी अदा ना हो तो नमाज़ होगी ही नहीं। अब जो वाजिबात बयान होंगे, उनमें से अगर कोई रह जाये तो नमाज़ हो जाती है यानी फ़र्ज़ अदा हो जाता है लेकिन नमाज़ में एक कमी रह जाती है यानी वो कामिल तौर पर अदा नहीं होती। इन वाजिबात में से अगर जानबूझकर कोई किसी एक वाजिब को छोड़ दे तो नमाज़ दोहराना वाजिब हो जाता है और अगर भूलकर वाजिबात को तर्क कर बैठे तो उसकी तलफ़ी के लिये आख़िर में दो सजदे करने होते हैं जिसे सजदा-ए-सहव या भूल का सजदा कहते हैं।


■ ➞   इन वाजिबात में से कुछ ऐसे होते हैं कि अगर भूलकर भी छोड़े जायें तो सजदा-ए-सहव काफ़ी नहीं होता बल्कि नमाज़ सिरे से वाजिब हो जाती है।...✍🏻


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 171 ♻️



■ ➞   जैसा कि पिछली पोस्ट में ज़िक्र हुआ कि नमाज़ का कोई वाजिब अगर भूल से छूट जाए तो नमाज़ के आख़िर में सजदा ए सहव करने से नमाज़ हो जाती है। लेकिन नमाज़ के वाजिबात में से कुछ ऐसे भी होते हैं कि अगर भूलकर भी छोड़े जायें तो सजदा-ए-सहव काफ़ी नहीं होता बल्कि नमाज़ सिरे से वाजिब हो जाती है। इसलिए नमाज़ के सभी वाजिबात हर मुसलमान को पता होना ज़रूरी है। आइये जानते और समझते हैं कि नमाज़ के वाजिबात कौन-कौन से हैं...👇🏻


■ ➞   नमाज़ के वाजिबात :


■ ➞   (1) तकबीरे तहरीमा में लफ़्ज़े "अल्लाहु अकबर" कहना।


■ ➞   (2 से 8) सूरतुल-फ़ातिहा ( अलहम्दु-शरीफ़ ) की सातों आयतें अलग-अलग वाजिब हैं। अगर एक आयत भी छूटी तो वाजिब छूटा।


■ ➞   (9) सूरतुल फ़ातिहा के बाद सूरत मिलाना यानी एक छोटी सूरत जैसे सूरतुल कौसर ( इन्ना-आतैना )या तीन छोटी आयतें पढ़ना या एक बड़ी आयत पढ़ना जो तीन छोटी आयतों के बराबर हो।


■ ➞   (10,11) फ़र्ज़ नमाज़ की पहली दो रकअ़तों में क़िरअत वाजिब है।


■ ➞   (12,13) अल्हम्द और उसके साथ सूरत मिलाना फ़र्ज़ की पहली दो रकअ़तों में और नफ़्ल व वित्र की हर रकअ़त में वाजिब है।


■ ➞   (14) अल्हम्द को सूरत से पहले पढ़ना वाजिब है।


■ ➞   (15) हर रकअ़त में सूरत से पहले एक ही बार अल्हम्द पढ़ना वाजिब है।


■ ➞   (16) अल्हम्द और सूरत के बीच में कोई अजनबी आ कर दूरी पैदा ना करे। यानि इन दोनों के बीच में आमीन (आहिस्ता से ) और बिस्मिल्लाह शरीफ़ के अलावा कुछ भी नहीं पढ़ना। (अल्हम्द के ख़त्म होने पर आमीन और सूरत से पहले बिस्मिल्लाह अजनबी नहीं है।)...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 172 ♻️


■ ➞   (17) क़िरअत के बाद मुत्तसिलन रुकूअ़ करना।


■ ➞   (18) एक सजदे के बाद फ़ौरन दूसरा सजदा करना यानी दोनों के दरमियान कोई रुक्न (Step) फ़ासिल ना हो।


■ ➞   (19) ता'दीले-अरक़ान यानी हर रुक्न में कम अज़ कम एक बार सुब्हान-अल्लाह कहने की मिक़्दार ठहरना।


■ ➞   कुछ लोग रुकूअ़ करते हैं और फ़ौरन खड़े हो जाते हैं और पूरी तरह खड़े भी नहीं हुये थे कि सजदे में चले जाते हैं और तस्बीह रास्ते में पढ़ते हैं तो ये तर्के वाजिब है और ऐसी नमाज़ का दोहराना वाजिब है।


■ ➞   रुकूअ़, क़ौमा, सजदा और जलसा में कम अज़ कम इतनी देर रुकना वाजिब है जितनी देर में एक बार सुब्हान-अल्लाह कह सकें, इसे ता'दीले अरक़ान कहते हैं और ये वाजिब है।


■ ➞   (20) क़ौमा यानी रुकूअ़ के बाद सीधा खड़ा होना।


■ ➞   (21) जलसा यानी दो सजदों के दरमियान सीधा बैठना।


■ ➞   (22) क़ा'दा-ए-ऊला यानी 4 या 3 रकअ़त वाली नमाज़ में दूसरी रकअ़त के बाद बैठना वाजिब है।


■ ➞   (23) फ़र्ज़, वित्र और सुन्नते-मुअक्किदा नमाज़ के क़ा'दा-ए-ऊला में अत्तहिय्यात से आगे कुछ ना बढ़ाना यानी दुरूद या दुआ ना पढ़ना।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 173 ♻️


▣ ➟ (24, 25) दोनों क़ा'दों में यानी 4 रकअ़त या 3 रकअ़त वाली नमाज़ में दोनों बार बैठने पर पूरा तशह्हुद ( अत्तहियात ) पढ़ना, यूँही जितने क़ा'दे करने पड़े, सबमें पूरा तशह्हुद पढ़ना वाजिब है, अगर एक लफ़्ज़ भी छूटा तो वाजिब तर्क हुआ।


▣ ➟ (26, 27) लफ़्ज़े अस्सलामु दो बार कहना वाजिब है, अलैकुम वाजिब नहीं।


▣ ➟ (28) वित्र की नमाज़ में दुआ-ए-कुनूत ( कोई भी कुनूत की दुआ ) पढ़ना वाजिब है।


▣ ➟ (29) कुनूत के लिये तकबीर कहना वाजिब है।


▣ ➟ (30 से 35) ईदैन की नमाज़ की 6 तकबीरें वाजिब हैं।


▣ ➟ (36) ईदैन में दूसरी रकअ़त की तकबीरे रुकूअ़ और...


▣ ➟ (37) इस तकबीर के लिये लफ़्ज़े अल्लाहु-अकबर होना।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845


▫◾◻ 🔲  ﷽  🔲 ◻◾▫

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

          🕋 आओं  नमाज़  सीखें 🕋

                ♻️ पोस्ट :- 174 ♻️


▣ ➟ (38) हर जहरी नमाज़ ( फ़ज्र, मग़रिब, इशा ) में इमाम को जहर ( यानी बुलंद आवाज़ ) से क़िरअत करना वाजिब है।


▣ ➟ (39) सिर्री यानी ग़ैर-जहरी ( ज़ुहर और अ़स्र ) में क़िरअत आहिस्ता करना वाजिब है।


▣ ➟ (40) नमाज़ के हर वाजिब और फ़र्ज़ का उसकी जगह पर अदा होना वाजिब है।


▣ ➟ (41) रुकूअ़ का हर रकअ़त में एक ही बार होना वाजिब है।


▣ ➟ (42) और सजदों का 2 ही बार होना वाजिब है।


▣ ➟ (43) दूसरी रकअ़त से पहले क़ा'दा ना करना वाजिब है।


▣ ➟ (44) चार रकअ़त वाली नमाज़ में तीसरी पर क़ा'दा ना होना वाजिब है।


▣ ➟ (45) आयते सजदा पढ़ी तो सजदा-ए-तिलावत करना वाजिब है।


▣ ➟ (46) सहव हुआ यानी भूल से कोई वाजिब छूट गया तो सजदा-ए-सहव करना वाजिब है।...


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2021/02/blog-post.html

📝 इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी..... 

➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍 

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप है 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲wa.me/919669988845

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

रमजानुल मुबारक के अहम मसाइल

▪️▫ ◾  🔲   *﷽*   🔲  ◾ ▫    🎍🌹 *गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप* 🌹🎍   ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿    🔅 *रमज़ानुल मुबारक के अहम मसाइल* 🔅               ♻️ *पोस्ट ...