गुरुवार, 20 फ़रवरी 2025

रमजानुल मुबारक के अहम मसाइल

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   🔅 *रमज़ानुल मुबारक के अहम मसाइल* 🔅

              ♻️ *पोस्ट :- 01* ♻️

🤔 *सवाल -* माहे रमजान के रोज़े क्यों रखे जाते है ❓ रमजान के रोजे किस लिए फर्ज किए गए ❓

👉🏻 *जवाब -* अक्सर हमारे नोजवानो का सवाल होता है की हम रोज़ा क्यों रखते है ? शरीअत में रोज़े का मतलब है की मुसलमानो का इबादत की नियत से सुबह सादिक से लेकर सूरज डूबने तक अपने आप को खाने पीने और जिमाअ (हमबिस्तरी) से रोके रखे। माहे रमज़ानुल मुबारक के रोज़े सन 2 हिजरी में फ़र्ज़ हुए, रमजान के रोज़े इसलिए फ़र्ज़ किये गए कि रोज़े से तक़वा परहेजगारी की राह इख्तियार कर सको।(कुरआन ए करीम सूरह बकर, अयत 183)

रोज़े फ़र्ज़ किये गए ताकि तुम गुनाहों से बचो, क्योंकि रोज़ा शहवतों को तोड़ता है, और शहवत ही से गुनाहों की शुरुआत होती है, जैसा के अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया जो निकाह नही कर सकता हो वो रोज़े का एहतिमाम करे, क्योंकि रोज़े उस के लिए (शहवतों को) तोड़ने का जरिया है 


🤔 *सवाल -* क्या रोज़ा जहन्नम और गुनाहों से बचाव के लिए ढाल है❓

👉🏻 *जवाब -* रोज़ा जहन्नम और गुनाहों से बचाव के लिए ढाल है, इससे इबादत की एसी कुव्वत हासिल होती है के आदमी के लिए नफसानी और शैतानी ख्वाहिशात का मुकाबला करना आसान हो जाता है।


🤔 *सवाल -* रोज़े की कितनी किस्म है❓

👉🏻 *जवाब -* रोज़े की 5 किस्म है (1) फ़र्ज़ (2) वाजिब (3) नफ़्ल (4) मकरुहे तंजीही (5) मकरुहे तहरीमी

 *1) फ़र्ज़ की दो किस्मे है -* पहली फ़र्ज़ ए मुअय्यन जैसे अदा ए रमज़ान, दूसरी - फ़र्ज़ ए गैर मुअय्यन जैसे रमजान का क़ज़ा रोज़ा और कफ़्फ़ारा का रोज़ा।

 *2) वाजिब की दो किस्मे है -* पहली वाजिब ए मुअय्यन जैसे नज़ ए मुअय्यन का रोज़ा मसलन पीर या जुमेरात के दिन रोज़ा रखूँगा तो अब खास उसी दिन रोज़ा रखना वाजिब है। दूसरी- वाजिब ए गैर मुअय्यन जैसे नज़ ए मुतलक मसलन की मेरा फुला काम हो जाएगा तो रोज़ा रखूँगा और दिन मुकर्रर नही किया तो किसी भी दिन रखना जाइज है।

 *3) नफिल की दो किस्म है -* पहली - नफिल ए मसनून जैसे आशूरा यानी 10 वी मुहर्रम का रोज़ा उस के साथ 9 वी मुहर्रम का भी। दूसरी - नफिल ए मुस्तहब जैसे हर महीने में 13 वी और 14 वी और 15 वी और अरफा का रोज़ा, पीर और जुम्मेरात का रोज़ा, ईद के बाद शव्वाल के छः रोज़े रखना।

 *4) मकरूह ए तंज़ीहि -* जैसे सिर्फ हफ्ता के दिन रोजा रखना, नैरोज़ यानी (ईरानी ओ फ़ारसी नए साल का पहला दिन) महारगान यानी ईरानी महीने का 16 दिन (जिसमें फ़ारसी जश्न मनाते हैं) का रोजा, सौम ए दहर यानी हमेशा रोजा रखना, सौम ए सुकूत ऐसा रोजा रखना इसमें कुछ बात ना करे, सौम ए विसाल का रोज़ा रखे और ना करें फिर दुसरे दिन रोज़ा रखे।

 *5) मकरूह ए तहरीमी -* जैसे ईद उल फित्र या ईद उल अजहा और अय्याम ए तशरीक के रोज़े रखना।

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              ♻️ *पोस्ट :- 02* ♻️

🤔 *सवाल -* रोज़े के कितने दर्जे है❓

👉🏻 *जवाब -* रोज़े के तीन दर्जे है। *पहला -* आम लोगों का रोज़ा कि यह पेट और शर्मगाह को खाने पीने, जिमआ (हमबिस्तरी) से रोकना। *दूसरा-* खवास का रोज़ा कि उनके अलावा कान, आँख, ज़बान, हाथ, पाँव और तमाम आज़ा को गुनाह से बाज़ रखना। 

 *तीसरा -* खासुल खास का रोज़ा कि अल्लाह तआला के अलावा तमाम चीज़ों से अपने को पूरी तरह जुदा करके सिर्फ उसी की तरफ मुतवज्जेह रहना। (बहारे शरीअत, हिस्सा हिस्सा पांच, रोज़े का बयान, पेज न. 72)

🤔 *सवाल -* रमज़ानुल मुबारक में खुसूसी कितनी इबादते है❓

👉🏻 *जवाब -* रमज़ानुल मुबारक में खुसूसी 5 इबादतें है। (1) रोज़ा (2) तरावीह (3) तिलावत ए कुरआन मज़ीद (4) एतिकाफ (5) शब-ए-कद्र की इबादत (तफ़्सीर-ए-नईमी, जिल्द 2, सफा 125)

🤔 *सवाल -* हर चीज़ शय के लिए जकात है तो बदन की जकात क्या❓

👉🏻 *जवाब -* जिस्म अल्लाह त'आला की अज़ीम नेअमत है, जिस से इंसान हर वक़्त फायदा उठाता रहता है। जिस्म का एक - एक हिस्सा कीमती है, इस नेअमत का हक यह है की जिस तरह माल दौलत की जकात निकाली जाती है इसी तरह जिस्म की भी जकात निकाली जाये और जिस्म की जकात रोज़ा है। हर गंदगी को दूर करने के लिए अल्लाह त'आला ने कोई न कोई चीज़ बनाई है और जिस्म को (अमराज से) पाक रखने के लिए रोज़ा है और रोज़ा आधा सब्र है।

🤔सवाल - रोज़ा किस पर माफ है❓

👉🏻जवाब - नाबालिग बच्चे और पागल पर रोज़े फर्ज नही हैं। औरतों को उनके महावारी (हैज़ व निफ़ास) के दिनों में रोज़े रखने की इजाज़त नहीं है। रमज़ान के बाद इन रोज़ों की कज़ा करे जो कमज़ोर औरत हमल यानि पेट से हो या बच्चे को दूध पिलाती हो और रोज़े रखने की वजह से अपनी या बच्चे की जान जाने या सख्त बीमारी का खतरा महसूस करे वह रोज़े कज़ा कर सकती है यूं ही हर बीमार और कमज़ोर आदमी रमज़ान के रोज़े रखने की वजह से बीमारी खतरनाक होने या जानजाने का सही गुमान करे उसको भी रोज़ा कज़ा करने की इजाज़त है।

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🤔 *सवाल -* क्या मुसाफिर पर रोज़ा माफ़ है❓

👉🏻 *जवाब -* जो शख़्स शरअन मुसाफ़िर है (शरीअत में मुसाफिर वह शख्स है जो अपने रहने के स्थान शहर की हुदूद से बाहर तकरीबन 92 किलो मीटर दूर जाने का इरादा करें) उसको कुरआन व हदीस में रमज़ान के रोज़े न रखने की इजाज़त दी गई है लेकिन सफ़र में अगर आराम हो कोई ख़ास परेशानी न हो तो रोज़ा रख लेना ही बेहतर है हाँ अगर न रखे तब भी वह गुनाहगार नहीं है जबकि रमज़ान के बाद उन रोजो की कज़ा कर ले।


🤔 *सवाल -* क्या बच्चों पर भी रोज़ा रखना फ़र्ज़❓

👉🏻 *जवाब -* बच्चों पर रोज़े रखना फर्ज नही है। बच्चों से मुराद नाबालिग है जो बालिग नही हुए है नाबालिग बच्चों पर कोई इबादत फ़र्ज़ नही। इसका यह मतलब नही की बच्चों को नमाज़, रोज़ा न रखने दे, उन्हें नमाज़, रोज़ा रखने की पहले से ताकीद दिलवाए उन्हें सिखाये ऐसा माहौल बनाये की बालिग होने के बाद वो फ़र्ज़ को तर्क न करे। बच्चे की उम्र 10 साल हो जाये और उसमे रोज़ा रखने की ताकत हो तो उससे रोज़ा रखवाए अगर न रखे तो मारकर रखवाए।


🤔 *सवाल -* सेहरी खाना क्या है क्या बिना सेहरी खाये भी रोज़ा हो जाएगा❓

👉🏻 *जवाब -* सेहरी खाना सुन्नत है। मफ़हूमे हदीस है की सेहरी पूरी की पूरी बरकत है इसे न छोड़ना अगर्चे एक घूंट पानी ही पी ले क्योंकि सहरी खाने वालो पर अल्लाह और उसके फ़रिश्ते दरूद भेजते है।

लेकिन अगर कोई शख्स सेहरी खाये बगैर ही रोज़े की निय्यत कर ले तो भी रोज़ा हो जाएगा, मगर सेहरी की बरकत से महरूम रह जायेगा।


🤔 *सवाल -* रात को निय्यत की सुबह रोज़ा रखूंगा मगर सुबह सेहरी के वक़्त निय्यत नही की तो क्या उस दिन का रोज़ा हो जाएगा❓

👉🏻 *जवाब -* निय्यत दिल के पुख्ता इरादे का नाम है जबान से करना मुस्तहब है जरुरी नही है। बल्कि दिल से इरादा कर लेना काफी है। अगर दिल में इरादा है और जबान से नही कहा तब भी निय्यत सही है रोज़ा हो जाएगा। यहाँ तक की रोज़े के लिए सहरी खाना भी निय्यत की तरह है।


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🤔 *सवाल -* रात को निय्यत की सुबह रोज़ा रखूंगा मगर सुबह सेहरी के वक़्त नींद नही खुली जब नींद खुली तब सेहरी का वक़्त निकल चुका था तो उस दिन का रोज़ा होगा या नही❓

👉🏻 *जवाब -* सेहरी करना रोज़े के लिए शर्त नहीं यानि ज़रुरी नहीं आपने रात में रोज़े की निय्यत कर ली थी यानि दिल में रोज़ा रखने का इरादा था फिर सेहरी में आंख नहीं खुली तब भी रोज़ा हो जायेगा, हाँ जान बूझकर सेहरी न करना अपने आपको अज़ीम सुन्नत से महरुम करना है।


🤔 *सवाल -* गुस्ल वाजिब था हालते नापाकी में सेहरी करके रोज़ा रखा तो रोज़े का क्या हुक्म होगा❓

👉🏻 *जवाब -* गुस्ल वाजिब था इसी हालत में सेहरी कर के रोज़ा रखा तो रोज़ा हो गया, मगर सारा दिन इसी हालत में गुज़ारना कि नमाज़े भी क़ज़ा हो गुनाह ओ हराम है।


🤔 *सवाल -* रोज़े की हालत में भूले से कुछ खाया या पिया या खा-पी रहा था या कि इतने में याद आते ही उगल दिया तो क्या रोज़ा टूट जायेगा❓

👉🏻 *जवाब -* जिस शख्स ने भूल कर खाया या पिया वो अपना रोज़ा पूरा करे उसे अल्लाह त'आला ने खिलाया पिलाया। भूले से खा रहा था, याद आते ही लुकमा उगल दिया तो रोज़ा नही टूटेगा और याद आते हुए निगल लिया तो रोज़ा टूट जाएगा।


🤔 *सवाल -* हालते रोजे में मक्खी, धुंआ, या गुबार हलक में जाने से क्या रोज़ा टूट जाएगा❓

👉🏻 *जवाब -* रोज़ा नही टूटेगा।


🤔 *सवाल -* हालते रोजे में नाखून काटना, बाल कटवाना, चेहरा बनवाना, ज़ेरे नाफ़ और बगल के बाल काटना, बालों में तेल व बदन पर खुश्बू लगाने से क्या रोज़ा टूट जाएगा❓

👉🏻 *जवाब -* इन तमाम कामों को करने से रोज़ा नहीं टूटता है यह तमाम काम रोज़े की हालत में जाइज है।


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