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♻️ *पोस्ट :- 01* ♻️
🤔 *सवाल 01*➖ *कुर्बानी क्या है और ये कहां से साबित है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ *मखसूस जानवर को मखसूस दिन में सवाब की नियत से ज़बह करना कुर्बानी है।*
कुर्बानी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है जो इस उम्मत के लिये बाकी रखी गई, और नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कुर्बानी करने का हुक्म दिया गया।
इरशाद बारी तआला है: *"तुम अपने रब के लिये नमाज पढ़ो और कुर्बानी करो"*
📚 _(सूरह अल- कौसर, आयत-2)_
🔅हुजर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि *"कुर्बानी के दिन इब्ने आदम का कोई अमल ख़ुदा के नज़दीक खून बहाने (कुर्बानी करने) से ज़्यादा प्यारा नहीं, और वह जानवर क्यामत के दिन अपने सींग और बात और खुरों के साथ आयेगा, और कुर्बानी का खून ज़मीन पर गिरने से पहले खुदा के नज़दीक मकामे कुल में पहुंच जाता है। लिहाज़ा इस को खुशदिली से करो।"*
📚 _(अबू दाउद इब्ने माजा)_
🔅हुजूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः *"जिस ने खुशी दिल से तालिबे सवाब हो कर कुर्बानी की वह आति जहन्नम से हिजाब (रोक) हो जायेगी।"*
📚 _(तबरानी शरीफ)_
🔅हुजूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमाया *"जिस में वुसअत हो (यानी साहिबे हैसियत हो) और कुर्बानी न करे वह हमारी ईदगाह के करीब न आये।"*
📚 _(तबरानी शरीफ)_
🔅सहाबा ए किराम रज़ियल्लाहु अंहुम ने अर्ज की या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! ये कुर्बानियां क्या है? फरमाया कि *"तुम्हारे बाप इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है"* लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ! हमारे लिये इस में क्या सवाब है? फरमायाः *"हर बाल के मुकाबिल नेकी है,* अर्ज़ की उन का क्या हुक्म है? फरमाया *"उन के हर बाल के बदले में नेकी है।"*
📚 _(इब्ने माजा)_
🔅हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अंहा से मर्वी कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हुक्म फरमाया कि *"सींग वाला मेंढा लाया जाये जो सिवाही में चलता हो और सिवाही में बैठता हो और सियाही में नज़र करता हो यानी उस के पांव सियाह हों और पेट सियाह हो और आंखें सियाह हों। वह कुर्बानी के लिये हाज़िर किया गया,* हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः *आइशा छुरी लाओ,* फिर फरमायाः *“इलाही! तू इस को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की तरफ से और इन की आल और उम्मत की तरफ से कुबूल फरमा।"*
📚 _(सही मुस्लिम शरीफ)_
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♻️ *पोस्ट :- 02* ♻️
🤔 *सवाल 02*➖ *कुर्बानी वाजिब होने के शराइत क्या हैं?❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ *कुर्बानी वाजिब होने के शराइत ये हैं*
1. *इस्लाम* - यानी गैर मुस्लिम पर कुर्बानी वाजिब नहीं।
2. *इकामत* - यानी मुकीम होना, मुसाफिर पर कुर्बानी वाजिब नहीं।
3. तवंगरीः यानी मालिके निसाब होना। यहां मालदारी से मुराद वही है जिस से सदकाये फित्र वाजिब होता है, वह मुराद नहीं है जिस से ज़कात वाजिब होती है।
4. *हुर्रियत* - यानी आज़ाद होना। जो आज़ाद न हो उस पर कुर्बानी वाजिब नहीं, कि गुलाम के पास माल ही नहीं। लिहाज़ा इबादते मालिया उस पर वाजिब नहीं।
🔅 *मसअलहः* कुर्बानी के लिये मर्द होना शर्त नहीं, कुर्बानी औरतों पर वाजिब होती है जिस तरह मर्दों पर वाजिब होती है।
📚 _(दुर्रे मुखतार)_
🔅 *मसअलहः* नाबालिग़ अगरचे मालदार हो उस पर कुर्बानी वाजिब नहीं।
📚 _(रद्दुल मुहतार)_
🤔 *सवाल 03*➖ क्या वालिद अपने नाबालिग बच्चों की तरफ से कुर्बानी कर सकता है?
👉🏻 *जवाब* ➖ नाबालिग बच्चों की तरफ से कुर्बानी करना वालिद पर वाजिब नहीं, लेकिन नाबालिग बच्चों की तरफ से अपने माल से कुर्बानी करना मुस्तहब अमल है, लिहाज़ा अगर करेगा तो सवाब पायेगा।
📚 _(फतावा आलमगीरी)_
🤔 *सवाल 04*➖ मुसाफिर अगर अपनी तरफ से कुर्बानी करना चाहे तो कर सकता है या नहीं?
👉🏻 *जवाब* ➖ मुसाफिर पर अगरचे वाजिब नहीं मगर नफ़्ल के तौर पर करे तो कर सकता है, सवाब पायेगा।
📚 _(दुर्रे मुखतार)_
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♻️ *पोस्ट :- 03* ♻️
🤔 *सवाल 05*➖ *कुर्बानी के बाब में मालिके निसाब होने का क्या मतलब है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ कुर्बानी वाले मसअलह में मालिके निसाब होने का मतलब ये है कि कुर्बानी के दिनों में जिस शख़्स के पास साढ़े सात तोला सोना, या साढ़े बावन तोला चांदी, या इतनी चांदी की मालियत के बराबर रकम (रुपये) या माले तेजारत, या इतनी चांदी की मालियत के बराबर हाजते असलिया से जाइद सामान वगैरह हो तो वह मालिके निसाब है। 📚 _(मुलख्खस अज़ बहारे शरीअतस)_
🔅अंग्रेज़ी वज़न के हिसाब से 11 ग्राम 664 मि. ग्राम का एक तोला होता है, इस हिसाब से किसी के पास 87.48 ग्राम सोना हो वह मालिके निसाब है। यूंही किसी के पास 612.36 ग्राम चांदी, या इतनी चांदी की कीमत के बराबर हाजते असलिया से जाइद का मालिक है तो वह मालिके निसाब है।
हमारे यहां शहरे इंदौर में आज की तारीख़ में एक ग्राम चांदी की कीमत तकरीबन 79,200 रुपये है। इस हिसाब से साढ़े बावन तोला चांदी की कीमत तकरीबन 48498 रुपये हुई। कुर्बानी के दिनों में जो शख़्स हाजते असालिया के इलावह 48498 या इस से जाइद का मालिक हो उस पर कुर्बानी वाजिब है। वाज़ेह हो कि सोने चांदी की कीमत बढ़ती घटती रहती है लिहाज़ा हिसाब लगाते वक्त मौजूदा कीमत मालूम कर लें।
🤔 *सवाल 06*➖ हाजते असलिया से क्या मुराद है❓
👉🏻 *जवाब* ➖ हाजते असलिया से मुराद वह चीजें हैं जिन की आम तौर पर इंसान को ज़रुरत होती है और उनके बेग़ैर गुज़र औकात में शदीद तंगी और दुशवारी होती है। जैसे रहने का मकान, पहनने के कपड़े, सवारी जैसे साइकिल मोटरसाइकिल कार वगैरह, घरों में इस्तेमाल होने वाले ज़रूरी सामान वगैरह ये सब हाजते असलिया में आते हैं।
📚 _(मुलख्खस अज़ बहारे शरीअतस)_
🤔 *सवाल 07*➖ अगर किसी के पास सिर्फ एक तोला सोना हो तो क्या उस पर कुर्बानी वाजिब होगी❓
👉🏻 *जवाब* ➖ किसी के पास सिर्फ एक तोला सोना हो और उस के इलावह कोई हाजते असलिया से ज़ाइद माल न हो तो कुर्बानी वाजिब नहीं होगी, अगरचे एक तोला सोने की कीमत फी ज़माना साढ़े बावन तोला चांदी की मालियत से जाइद बनती हो।
अलबत्ता अगर एक तोला सोना के साथ उस के पास कोई हाजते असलिया से जाइद माल हो तो उस पर कुर्बानी वाजिब हो जायेगी।
📚 (आम कुतुबे फिक्ह)
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♻️ *पोस्ट :- 04* ♻️
🤔 *सवाल 08*➖ *किसी शख़्स पर कुर्बानी वाजिब हो और वह अपनी तरफ से कुर्बानी करने के बजाए अपने वालिदैन या किसी और की तरफ से कुर्बानी कर दे तो क्या हुक्म है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ जिस शख़्स पर खुद कुर्बानी वाजिब हो और वह अपनी तरफ से कुर्बानी करने के बजाए अपने मां-बाप या किसी और की तरफ से कुर्बानी कर दे तो उनकी तरफ से कुर्बानी दुरुस्त तो हो जायेगी, लेकिन उस पर अपनी तरफ से कुर्बानी करना वाजिब थी और उस ने अपनी तरफ से कुर्बानी नहीं की तो वाजिब को छोड़ने की वजह से गुनहगार होगा और उस के सर से कुर्बानी का बोझ नहीं उतरेगा।
📚 _(फतावा अमजदिया)_
🤔 *सवाल 09*➖ *क्या मालिके निसाब पर हर साल कुर्बानी वाजिब है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ मालिके निसाब पर हर साल कुर्बानी वाजिब है, उसे हर साल अपनी तरफसे कुर्बानी करनी होगी। कुछ लोग एक साल अपनी तरफ से और दूसरे साल अपने बीवी-बच्चों की तरफ से कुर्बानी करते हैं ये नाजाइज़ है।
📚 _(अनवारुल हदीस)_
🤔 *सवाल 10*➖ *अवाम में ये मशहूर है कि पहली कुर्बानी हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के नाम से करनी चाहिये, क्या ये दुरुस्त है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ मालिके निसाब अगर ऐसा करेगा यानी हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की तरफ से कुर्बानी करे और अपनी तरफ से न करे तो वाजिब छोड़ने के सबब गुनहगार होगा।
उस पर वाजिब है कि अपनी तरफ से कुर्बानी करे और इस्तेताअत हो तो हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के लिये दूसरी कुर्बानी का इंतेज़ाम करे।
📚 _(मुलख्खस अज़ फतावा फैजुर्रसूल)_
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♻️ *पोस्ट :- 05* ♻️
🤔 *सवाल 11*➖ *एक शख़्स ऐसा है कि जिस के पास इतना माल नहीं है कि निसाब को पहुंच सके लेकिन उस के पास खेती की ज़मीन इतनी है कि अगर उस को बेच डाले तो निसाब से कई गुना ज़्यादा हो जाता है ऐसे शख़्स को मालिके निसाब समझा जायेगा या नहीं? और उस पर कुर्बानी वाजिब है या नहीं?❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ जिस शख़्स के पास खेती की ज़मीन इतनी है कि अगर उसे बेच डाले तो निसाब से कई गुना ज़्यादा हो जाये तो वह शख़्स मालिके निसाब है और उस पर कुर्बानी वाजिब है। कुर्बानी वाजिब होने के लिये सिर्फ इतना ज़रुर है कि वह ऐयामे कुर्बानी में अपनी तमाम अस्ली हाजतों के इलावह 612.36 ग्राम चांदी की कीमत का मालिक हो, चाहे वह माल नकद हो या सामाने तेजारत वगैरह।
📚 _(मुलख्खस अज़ फतावा फैजुर्रसूल)_
🤔 *सवाल 12*➖ *एक ऐसा शख़्स जिसे मालूम ही नहीं कि वह मालिके निसाब है और उस पर कुर्बानी वाजिब है, इस तरह कई साल गुज़र गये उस ने कुर्बानी नहीं की। बाद में उसे इल्म हुआ। अब कज़ा शुदा कुर्बानी के अदा की क्या सूरत है*❓
👉🏻 *जवाब* ➖हुजूर सदरुश्शरीअह अलैहिर्रहमा तहरीर फरमाते हैं किः “कुर्बानी के दिन गुज़र गये और उस ने कुर्बानी नहीं की और जानवर या उस की कीमत को सदक़ा भी नहीं किया यहां तक कि दूसरी बकरईद आ गई, अब ये चाहता है कि साले गुज़श्ता की कुर्बानी की क़ज़ा इस साल करे ये नहीं हो सकता, बल्कि अब जानवर या उस की कीमत सदका करे।
लिहाज़ा जितने साल की कुर्बानियां कज़ा हुई हैं उन के अदा की सूरत ये है कि हर साल के बदले एक औसत ( दरमियानी) दर्जे का बकरा या उस की कीमत सदका करे।
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♻️ *पोस्ट :- 06* ♻️
🤔 *सवाल 13*➖ *कर्ज ले कर कुर्बानी करना कैसा है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ जिस पर कुर्बानी वाजिब है अगर उस के पास कुर्बानी के वक़्त पैसे न हों तो कर्ज़ ले कर या कोई चीज़ बेच कर कुर्बानी करे और अगर कुर्बानी वाजिब न हो तो कर्ज़ ले कर कुर्बानी करने की ज़रुरत नहीं।
📚 _(फतावा अमजदिया)_
🤔 *सवाल 14*➖ *जिस के ज़िम्मे क़र्ज़ हो उस पर कुर्बानी है या नहीं*❓
👉🏻 *जवाब* ➖जिस के ज़िम्मे लोगों का कर्ज़ा हो उस के पास मौजूद कुल निसाब में से कर्ज को निकाल दिया जाये तो इतना माल बाकी बचे जो साढ़े बावन तोला चांदी की मालियत के बराबर हो तो कुर्बानी वाजिब होगी। और अगर कर्ज़ को निकालने के बाद इतना माल बाकी न बचे तो कुर्बानी वाजिब न होगी।
📚 _(फतावा आलमगीरी)_
🤔 *सवाल 15*➖जिस पर कुर्बानी वाजिब हो और वह कुर्बानी के बजाए किसी ग़रीब को कुर्बानी की रकम दे दे तो क्या हुक्म है❓
👉🏻 *जवाब* ➖जिस पर कुर्बानी वाजिब हो तो उस पर कुर्बानी के दिनों में कुर्बानी करना ही लाज़िम होगा, अगर वह कुर्बानी के बजाए किसी गरीब को कुर्बानी की रकम दे देगा तो तो उस का वाजिब अदा न होगा, और वाजिब को छोड़ने की वजह से गुनहगार होगा।
📚 _(फतावा आलमगीरी)_
🤔 *सवाल 16*➖अगर कोई बेरुने मुल्क (दूसरे बाहर मुल्क में ) हो तो क्या वह अपने आबाई वतन में किसी को कह कर कुर्बानी करवा सकता है❓
👉🏻 *जवाब* ➖चूंकि कुर्बानी में नियाबत ( नाइब बनाना) जाइज़ है।लिहाज़ा अगर कोई बेरुने मुल्क हो तो अपने आबाई वतन में किसी को कह कर कुर्बानी करवा सकता है। याद रहे कि जहां कुर्बानी हो रही हो और जहां कुर्बानी वाला हो दोनों जगह कुर्बानी के दिन का होना ज़रूरी है।
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♻️ *पोस्ट :- 07* ♻️
🤔 *सवाल 17*➖ *कुर्बानी का वक्त कब से कब तक है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ कुर्बानी का वक्त दसवीं जिलहिज्जा के तुलूअ सुब्हे सादिक से बारहवीं के गुरुबे आफताब तक है, यानी तीन दिन और दो रातें। इन दिनों को ऐयामे नहूर (ऐयामे कुर्बानी) कहते हैं।
📚 _(दुर्रे मुख़्तार)_
🤔 *सवाल 18*➖ *क्या रात में कुर्बानी हो सकती है*❓
👉🏻 *जवाब* ➖रात में कुर्बानी (ज़बह) करना मकरूह है।
📚 _(फतावा आलमगीरी)_
🤔 *सवाल 19*➖किस दिन कुर्बानी करना बेहतर है❓
👉🏻 *जवाब* ➖पहला दिन यानी दसवीं तारीख़ सब में अफज़ल है, फिर ग्यारहवीं और पिछला दिन यानी बारहवीं सब से कम दर्जा है।
📚 _(फतावा आलमगीरी)_
🤔 *सवाल 20*➖कुर्बानी नमाज़े ईद से पहले की जाये या बाद में❓
👉🏻 *जवाब* ➖शहर में कुर्बानी की जाये तो शर्त ये है कि नमाज़ हो चुके । लिहाज़ा नमाज़े ईद से पहले शहर में कुर्बानी नहीं हो सकती। और अगर की तो न हुई, बल्कि ये गोश्त का जानवर हुआ। और देहात में चुंकि नमाज़े ईद नहीं है यहां तुलूओ फजर के बाद ही से कुर्बानी हो सकती है। मगर बेहतर ये है कि तुलूओ आफताब के बाद कुर्बानी की जाए।
📚 _(फतावा आलमगीरी)_
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♻️ *पोस्ट :- 08* ♻️
🤔 *सवाल - 21*➖ *किस जानवर की कुर्बानी जाइज़ है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ उंट, गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और दुम्बा की कुर्बानी जाइज़ है। इन में नर और मादा, ख़स्सी और ग़ैरे ख़स्सी सब का एक हुक्म है, यानी सब की कुर्बानी हो सकती है।
📚 _(दुर्रे मुख़्तार)_
🤔 *सवाल - 22*➖ *कुर्बानी के जानवरों की उम्र क्या होनी चाहिये*❓
👉🏻 *जवाब* ➖कुर्बानी के जानवरों की उम्र ये होनी चाहिये। उंट पांच साल का, गाय दो साल की और बकरी एक साल की इन जानवरों की इस से कम उम्र हो तो कुर्बानी जाइज़ नहीं।
दुम्बा और भेड़ की उम्र एक साल होना ज़रूरी नहीं। यहां तक कि छः माह का बच्चा अगर इतना बड़ा हो कि दूर से देखने में साल भर का मालूम होता हो तो उस की कुर्बानी जाइज़ है।
📚(रदुल मुहतार)
🤔 *सवाल - 23*➖ *बकरी का छः माह का बच्चा जो खूब मोटा है और देखने में साल भर का मालूम होता उस की कुर्बानी जाइज़ है कि नहीं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖बकरी का छः माह का बच्चा अगरचे खूब मोटा हो और देखने में साल भर का मालूम होता हो उस की कुर्बानी जाइज़ नहीं।
📚 _(फतावा रजविया)_
🤔 *सवाल - 24*➖ *ग्यारह माह का बकरा देखने में साल भर का मालूम होता है, खूब माटा भी है उस की कुर्बानी जाइज़ है या नहीं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ऐसे बकरे की कुर्बानी जाइज़ नहीं। बकरा की कुबानी के लिये ज़रूरी है कि बकरा एक साल या इस से ज़ाइद उम्र का हो। साल भर में एक दिन भी कम हो तो कुर्बानी जाइज़ न होगी।
📚(मुलख़ख़स अज़ दुर्रे मुख़तार)
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♻️ *पोस्ट :- 09* ♻️
🤔 *सवाल - 25*➖ *जानवर में कोई ऐब हो तो उस की कुर्बानी हो सकती है या नहीं?❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ कुर्बानी के जानवर को ऐब से ख़ली होना चाहिये। थोड़ा ऐब हो तो कुर्बानी हो जायेगी मगर मकरूह होगी और ज़्यादा ऐब हो तो होगी ही नहीं।
🤔 *सवाल - 26*➖ *जिस जानवर के सींग न हों उस की कुर्बानी कैसी है?*❓
👉🏻 *जवाब* ➖जिस के पैदाइशी सींग न हों उस की कुर्बानी जाइज़ हैं और अगर सींग थे मगर टूट गया अगर सर के उपर वाला हिस्सा टूटा हो जो ज़ाहिर होता है तो कुर्बानी जाइज़ है और अगर सर के अंदर जड़ तक टूटे तो कुर्बानी जाइज़ नहीं।
🤔 *सवाल - 27*➖ *अंधे और काने जानवर की कुर्बानी जाइज़ है या नहीं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖अंबे जानवर की कुर्बानी जाइज़ नहीं और काना जिस का कानापन ज़ाहिर हो उस की भी कुर्बानी जाइज़ नहीं।
🤔 *सवाल - 28*➖ *कुर्बानी के वक़्त जानवर उछला कूदा और ऐब पैदा हो गया तो क्या हुक्म है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖कुर्बानी के वक़्त जानवर उछला कूदा जिस की वजह से ऐब पैदा हो गया तो ये ऐब मुज़िर (नुकसानदेह) नहीं, कुर्बानी हो जायेगी।
🤔 *सवाल - 29*➖ *कुर्बानी का बकरा साल भर का है मगर अभी दांत नहीं निकला है तो उसकी कुर्बानी सही है या नहीं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖कुर्बानी के बकरा की उम्र साल भर होना ज़रूरी है दांत निकलना ज़रूरी नहीं। लिहाज़ा बकरा अगर वाकई साल भर का है तो उस की कुर्बानी जाइज़ है अगरचे उस के दांत न निकले हों।
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🤔 *सवाल - 30*➖ *ख़स्सी जिस के खुसिये कटे हों उस की कुबानी जाइज़ है या नहीं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ ख़स्सी जिस के खुसिये कटे होते हैं उस की कुबानी जाइज़ है।
खुसिये का कटा होना ऐब नहीं है, लिहाज़ा ख़स्सी की कुर्बानी जाइज़ है । इस लिये कि ऐब उस को कहते हैं जिस के सबब चीज़ की कीमत ताजिरों की निगाहों में कम हो जाये, और खुसिये काटने के सबब ख़स्सी की कीमत ताजिरों की निगाहों में कम नहीं होती बल्कि बढ़ जाती है, लिहाज़ा वह ऐब नहीं है बल्कि खूबी है। इस लिये उस की कुर्बानी जाइज़ ही नहीं बल्कि अफजल है।
🤔 *सवाल - 31*➖ *बांझ बकरी की कुर्बानी हो सकती या नहीं*❓
👉🏻 *जवाब* ➖बांझ बकरी की कुर्बानी जाइज़ है, कि वह ख़स्सी के मिस्ल है। इसी लिये फुकुहाए किराम ने इसे कुर्बानी के जानवरों मे उयूब नहीं शुमार फरमाया है।
🤔 *सवाल - 32*➖ *खुसा जानवर जिस में नर और मादा दोनों की अलामतें पाई जाती हों उस की कुर्बानी कैसी है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖खुसा जानवर जिस में नर और मादा दोनों की अलामतें पाई जाती हों उस की कुर्बानी जाइज़ नहीं, क्योंकि उस का गोश्त किसी तरह पकाये नहीं पकता।
हां! अगर कोई वैसे खाना चाहे तो खा सकता है लेकिन उस की कुर्बानी जाइज़ नहीं।
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🤔 *सवाल - 33*➖ *कुर्बानी के गोश्त का क्या हुक्म है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ कुर्बानी का गोश्त खुद भी खा सकता है और दूसरे शख़्स गुनी (मालदार) या फक़ीर को दे सकता है खिला सकता है।
बेहतर ये है कि गोश्त के तीन हिस्से करे। एक हिस्सा फुकुरा के लिये, एक हिस्सा दोस्त अहबाब के लिये और एक अपने घर वालों के लिये।
🤔 *सवाल - 34*➖ *अगर किसी ने कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से न किये बल्कि सारा गोश्त खुद ही रख लिया तो क्या हुक्म है*❓
👉🏻 *जवाब* ➖गोश्त को तीन हिस्सों में करने का हुक्म इस्तिहबाबी है यानी तीन हिस्से करना मुस्तहब है वाजिब नहीं पस अगर किसी ने सारा गोश्त खुद ही रख लिया तो ये भी जाइज़ है, उस पर कोई गुनाह न होगा।
🤔 *सवाल - 35*➖ *कुर्बानी की मन्नत मानी थी तो उस का गोश्त खुद खा सकता है या नहीं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖कुर्बानी अगर मन्नत की है तो उस का गोश्त न खुद खा सकता है न अगनिया ( मालदारों) को खिला सकता है। बल्कि उस को सदका कर देना वाजिब है। वह मन्नत मानने वाला फकीर हो या ग़नी दोनों का एक ही हुक्म है कि खुद नहीं खा सकता न गनी को खिला सकता है।
🤔 *सवाल - 36*➖ *किसी मरहूम की जानिब से कुर्बानी की, उस के गोश्त का क्या हुक्म है*❓
👉🏻 *जवाब* ➖मरहूम की जानिब से कुर्बानी की तो उस का गोश्त खुद भी खा सकता है और दोस्त अहबाब को भी दे सकता है। ये जरूरी नहीं कि सारा गोश्त फकीरों ही को दे। क्योंकि गोश्त इस की मिल्क है ये सब कुछ कर सकता है। और अगर मैयत ने कह दिया है कि मेरी तरफ से कुर्बानी कर देना तो उस में से न खाये बल्कि कुल गोश्त सदक़ा कर दे।
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🤔 *सवाल - 37*➖ *कुर्बानी का गोश्त काफिर को देना कैसा है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ कुर्बानी का गोश्त काफिर को देना जाइज़ नहीं।
🤔 *सवाल - 38*➖ *जानवर के वह कौन कौन से अजजा हैं जो खाये नहीं जाते*❓
👉🏻 *जवाब* ➖आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान अलैहिर्रहमा फरमाते हैं: हलाल जानवर के सब अजजा हलाल हैं मगर बअज़ कि हराम या ममनूअ या मकरूह हैं।
1. रगों का खून, 2. पित्ता, 3. फुकना यानी मसाना, 4-5 अलामाते मादा वनर यानी शरमगाह, 6. बैजे यानी कपूरे, 7. गुदूद यानी जिस्म के अंदर की गांठ, गिलटी, 8. हराम मम्ज़ 9. गर्दन के दो पट्ठे जो शानों यानी कंधे तक खिंचे होते हैं, 10. जिगर यानी कलेजी का खून, 11. तिल्ली का खून, 12. गोश्त का खून जो ज़बह के बाद गोश्त में से निकलता है, 13. दिल का खून, 14. पित यानी वह ज़र्व पानी जो पित्ते में होता है, 15. नाक की रतूबत ( तरी, नमी) जो भेड़ में अक्सर होती है, 16. पाखाने का मकाम, 17. ओझड़ी, 18. आंतें, 19. नुतफा, 20. वह नुतफा जो खून हो गया, 21. वह नुतफा जो गोश्त का लोथड़ा हो गया, 22. वह नुताफा जो पूरा जानवर बन गया और मुर्दा निकला या वे ज़बह मर गया।
🤔 *सवाल - 39*➖ *हलाल जानवरों की ओझड़ी और आंतें खाना जाइज़ नहीं तो कुर्बानी के जानवर की ओझड़ी और आंतों का क्या जाये❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ओझड़ी और आंतें दफन कर दी जायें। अलबत्ता भंगी खाना चाहें तो उसे मना न करें।
आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेलवी रज़ियल्लाहु अंह फरमाते हैं: "ओझड़ी आंतें जिन का खाना मकरूह है तकसीम न की जायें बल्कि दफन कर दी जायें, और अगर भंगी उठा लें मना की हाजत नहीं"।
🤔 *सवाल - 40*➖ *कुर्बानी का चमड़ा किन लोगों को देना जाइज़ है*❓
👉🏻 *जवाब* ➖कुर्बानी का चमड़ा हर मुसलमान को देना जाइज़ गरीब हो या अमीर। मगर बेहतर ये है कि किसी नेक काम के लिये दे दे, मसलन मस्जिद या दीनी मदरसा को दे दे।
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🤔 *सवाल - 41*➖ *नमाज़े ईद का तरीका क्या है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ पहले इस तरह नियत करेंः नियत की मैं ने दो रकअत नमाज़े ईद-उल-अज़हा की, छः ज़ाइद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, फिर कानों तक हाथ उठाइये और अल्लाहु अकबर कह कर हस्बे मामूल नाफ के नीचे बांध लीजिये और सना पढ़िये, फिर कानों तक हाथ उठाइये और अल्लाहु अकबर कहते हुये लटका दीजिये। फिर हाथ कानों तक उठाइये और अल्लाहु अकबर कह कर लटका दीजिये। फिर कानों तक हाथ उठाइये और अल्लाहु अकबर कह कर बांध लीजिये। यानी पहली तकबीर (नमाज़ की इब्तिदा वाली) के बाद हाथ बांधिये, उस के बाद दूसरी और तीसरी तकबीर में लटकाइये और चौथी में हाथ बांध लीजिये। इस को यूं याद रखिये कि जहां क्याम में तकबीर के बाद कुछ पढ़ना है। वहां हाथ बांधने है और जहां नहीं पढ़ना वहां हाथ लटकाने हैं। फिर इमाम अउजु बिल्लाह और बिस्मिल्लाह आहिस्ता पढ़कर अल्हम्द शरीफ और सूरह बुलंद आवाज़ के साथ पढ़े फिर रुकूअ और सजदे करे । दूसरी रकअत में पहले अलहम्द शरीफ और सूरह बुलंद आवाज़ के साथ पढ़े, फिर तीन बार कानों तक हाथ उठा कर अल्लाहु अकबर कहिये और हाथ न बांधिये, और चौथी बार बेग़ैर हाथ उठाये अल्लाहु अकबर कह हुये रुकूअ में जाईये और काइदे के मुताबिक नमाज़ मुकम्मल कर लीजिये । हर दो तकबीरों के दरमियान तीन बार "सुब्हानल्लाह" कहने की मिकदार चुप खड़ा रहना है।
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🤔 *सवाल - 42*➖ *कुर्बानी अगर शादी शुदा औरत के नाम हो तो औरत के नाम के साथ उस के शौहर का नाम लिया जाये या उस के बाप का❓*
👉🏻 *जवाब* ➖जिस औरत की तरफ से कुर्बानी हो खुदा-ए-अलीम व ख़बीर खूब जानता है कि वह फलां की लड़की फलां की बीवी है, इस लिये सिर्फ औरत का नाम लेना काफी है। फलां बिन्ते फलां या फलां जौजए फलां कहना ज़रूरी नहीं, और अगर कह दे तो कोई हर्ज भी नहीं।
🤔 *सवाल - 43*➖ *ईद-उल-अज़हा के दिन कुर्बानी कराने वाले हज़रात को कुर्बानी से पहले तक रोज़ा रखना होता है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖ईद-उल-अज़हा के दिन और उस के बाद मजीद तीन दिन का रोज़ा रखना हराम होता है। यानी 10, 11, 12 और 13 जिलहिज्जा के रोज़े हराम हैं। अलबत्ता पहली से नौवीं ज़िलहिज्जा के रोज़े बहुत अफज़ल हैं उस पर कुर्बानी हो या न हो। और सब नफली रोज़ों में बेहतर रोज़े अरफा यानी 9 ज़िलहिज्जा के दिन का रोज़ा है। हां! कुर्बानी करने वाले के लिये मुस्तहब है कि ईद के दिन कुर्बानी से पहले कुछ न खाये, मगर उस में रोज़े की नियत करना जाइज़ नहीं है।
🤔 *सवाल - 44*➖ *कुर्बानी के लिये खस्सी पाला गया, ऐयामे कुर्बानी से पहले ही मर गया, उस का गोश्त गैर मुस्लिमों ने ख़रीद लिया, अब वह पैसा कहां ख़र्च किया जाये ❓*
👉🏻 *जवाब* ➖वह रुपया हलाल व तैयब है किसी भी जाइज़ काम में उसे ख़र्च कर सकते हैं। इस लिये कि इस मुल्क के ग़ैर मुस्लिमों के हाथ मुर्दार का गोश्त बेचना जाइज़ है।
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🤔 *सवाल - 45*➖ *एक शख़्स ऐसा है जो दाहिने हाथ से कुर्बानी नहीं कर सकता तो बायें हाथ से कुर्बानी करने में कोई हर्ज तो नहीं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖कुर्बानी हो जायेगी, मगर अफज़लियत का सवाब नहीं मिलेगा कि दाहिने हाथ से करना अफज़ल है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हर काम दाहिने से करने को पसंद फरमाया है।
🤔 *सवाल - 46*➖ *क्या मस्जिद के इमामों को चर्मे कुर्बानी देना जाइज़ है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖मस्जिद के इमामों को बतौरे नज़राना चर्मे कुर्बानी देना जाइज़ है चाहे वह अमीर हो या गरीब।
🤔 *सवाल - 47*➖ *कुर्बानी का जानवर जबह करने वाले को सिरी और पाया देना जाइज़ है या नहीं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖कुर्बानी का चमड़ा या गोश्त या सिरी पाया कसाब या ज़बह करने वाले को उजरत में देना जाइज़ नहीं। सिरी पाए खुद खाये या किसी दूसरे को बतौरे हदिया दे दे। ये जो जबह करने वालों ने मशहूर कर रखा है कि सिरा हमारा हक है गलत है।
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🤔 *सवाल - 48*➖ *ज़िलहिज्जा का चांद नज़र आने के बाद बाल नाखुन वग़ैरह काटना कैसा है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖जो लोग कुर्बानी का इरादा रखते हैं उन के लिये मुस्तहब ये है जब ज़िलहिज्जा का चांद नज़र आये उस वक़्त से ले कर कुर्बानी हो जाने तक अपने जिस्म का कोई बाल या नाखुन वगैरह न काटे।
हदीस शरीफ में है कि, नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फरमाया किः “तुम में जो शख़्स जानवर को ज़बह करे यानी कुर्बानी करे वह जब ज़िलहिज्जा का चांद देखे तो अपने बाल और नाखुन न कटाये यहां तक कि कुर्बानी हो जाये।"
🤔 *सवाल - 49*➖ *जो शख़्स कुर्बानी का इरादा न रखते हो उस के लिये इन दिनों में क्या हुक्म है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖जो शख़्स कुर्बानी न कर सके वह भी इन दिनों में बाल नाखुन वग़ैरा काटने से रुका रहे, फिर नमाज़े ईद के बाद हजामत वग़ैरा करवा लें तो कुर्बानी का सवाब पायेगा।
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♻️ *पोस्ट :- 17* ♻️
🤔 *सवाल - 50*➖ *नाखुन बाल वगैरह कितने दिनों तक छोड़ने की इजाज़त है❓*
👉🏻 *जवाब* ➖नाखुन बाल वगैरह चालीस दिनों से ज़्यादा छोड़ने की इजाज़त नहीं। पस अगर चालीसवां दिन इन ऐयामे ज़िलहिज्जा में पड़ जाये तो काटना लाज़िम व ज़रुरी होगा।
हदीस शरीफ में है, हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अंह कहते हैं कि "मूंछें और नाखुन तरशवाने, बग़ल और नाफ के नीचे के बाल साफ करने में हमारे लिये ये वक्त मुकर्रर किया गया है कि हम चालीस दिन से ज़्यादा न छोड़ें।"
🤔 *सवाल - 51*➖ *ऐयामे तशरीक़ किसे कहते हैं❓*
👉🏻 *जवाब* ➖9 ज़िलहिज्जा की फजर से 13 जिलहिज्जा की असर तक के ऐयाम, ऐयामे तशरीक कहलाते हैं। इन दिनों में हर फर्ज़ नमाज़े बा - जमाअत पढ़ने के बाद तकबीरे तशरीक पढ़ी जाती है।
तकबीरे तशरीक ये है : अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर ला इला - ह इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द।
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