अस्सलाम वालेकुम व रहमतुल्लाह बरकातहू
में नाजमीन शेख यह मेरी
पहली कोशिश है किसी खास मकसद से और इस हदीसे मुबारक पर ध्यान देते हुए की “इल्मे
दीन हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज है” बस इसी पर गौर-ओ-फिक्र करते
हुए मैंने यह किताब लिखने का फैसला किया इल्मे दीन सीखने में कहीं ना कहीं हम
ख्वातीन बहुत ही पीछे हैं पता नहीं कितने ही मसाइल से अनजान हैं और गलतफहमीयों का
शिकार है।
तो जरूरत है कि हम इल्मे दीन हासिल करें और अपनी गलत फहमियों की इस्लाह करें रोजमर्रा के मसाईल को सीख कर उन पर अमल करने की कोशिश करें ख्वातीन को अपने मसाइल का इल्म होना जरूरी है।
यूं तो ख्वातीन के मसाइल पर बहुत सारी किताबें
बाजार में मिल सकती है लेकिन हर किताब को पढ़ना और उसको समझना सभी के बस की बात
नहीं, किताबों को समझने के लिए आलिम की जरूरत होती है।
इसलिए जरूरी था कि एक आसान अंदाज हिंदी में सवाल
और जवाब की शक्ल में कोई किताब पेश कर दी जाए ताकि ख्वातीन ज्यादा से ज्यादा फायदा
हासिल कर सकें तो मैंने सोचा क्यों न ऐसी किताब लिख दी जाए जिसमें ख्वातीनो के
मसाइल आसानी से एक ही किताब में मिल जाए ज्यादा परेशान ना होना पड़े लिहाजा यह
मैंने एक छोटी सी कोशिश की है।
इस किताब के जरिये मेरी बहनें जो मसाइल नहीं
जानती या कम जानती है वह इस किताब से फायदा हासिल कर संकेंगी इस किताब में ख्वातीनो
के मसाईल व गलतफहमीयों के ताल्लुक से बहुत से सवाल और उनके आसान लफ्जों में जवाब
इस किताब में जमा करने की एक अदना सी कोशिश की है अलग अलग इस्लामी किताबो से बड़ी
मेहनत मशक्कत और काफी वक़्त देकर सोच व फ़िक्र के बाद सवालो को बनाया फिर उनके जवाब
मुकम्मल किये गये इस तरह यह किताब मुकम्मल हुई, इस किताब में अगर किसी तरह की कोई
गलती हो या कुछ समझ न आये या दिए गये सवालो के अलावा कोई और सवाल आपके जहन में हो
तो आप दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर आप हमें अपने सवाल या इस किताब से जुडी जानकारी
हासिल कर सकती है।
“खास तवज्जो”
“खास तौर
पर यह किताब मैंने अपने वालिद मरहूम अब्दुल कादर शेख और मेरी वालिदा मरहूमा बानो बी
और मेरे भाई मरहूम फरीद शेख के इसाले सवाब के लिए लिखी है आप से गुजारिश है कि
उनके हक में दुआ करें अल्लाह तआला उन्हें जन्नत में आला से आला मक़ाम अता फरमाए
आमीन”
|
वुजू के मसाइल |
सवाल – वुजू का तरीका क्या है ?
जवाब - वजू करने का तरीका यह है कि पहले बिस्मिल्ला हिर्रहमा निर्रहीम
पढ़ें, फिर मिसवाक करें अगर मिसवाक ना हो तो उंगली से दांत मल ले ,फिर
दोनों हाथों को कलाइयों समीत तीन बार धोये, पहले दाहिने हाथ पर पानी डालें फिर बाएं हाथ पर दोनों को एक साथ न धोयें, फिर दाहिने हाथ से तीन बार कुल्ली करें, फिर बाएं हाथ की छोटी उंगली से नाक साफ करें और दाहिने हाथ से 3 बार नाक में पानी चढ़ाएं ,फिर पूरा चेहरा धोएं यानी
पेशानी पर बाल उगने की जगह से थोड़ी के नीचे तक और एक कान की लौ से दूसरे कान की
लौ तक हर हिस्से पर तीन बार पानी बहाएं,उसके बाद दोनों हाथ
कोहनियों समेत तीन बार धोये उंगलियों की तरफ से कहानियों के ऊपर तक पानी डालें
कोहनियों की तरफ से ना डालें, फिर एक बार दोनों हाथ से
पूरे सर का मसा करें, फिर कानों का और गर्दन का एक एक बार मसा करें, फिर दोनों पाऊं टखनों समेत तीन बार धोए।
औरत का वजू करने का तरीका
वही है जो आदमी के लिए मगर फर्क इतना है कि अगर औरत चूड़ियां कंगन अंगूठी वगैरह
कुछ पहने हो तो उसके नीचे तक पानी पहुंचाना फर्ज है अगर अंगूठी वगैरा ढीली हो तो
उसे हिला कर उसके नीचे तक पानी पहुंचाना फर्ज है और अगर अंगूठी वगैरा बहुत सख्त हो
तो उसे निकाल कर पानी पहुंचाना फर्ज है अगर किसी ने इस तरह वजू किया कि वह चूड़ी
वगैरा पहने हो और उसके नीचे पानी चला जाए तो बुजु हो जाएगा और अगर पानी उसके नीचे
तक ना गया तो बुजु नहीं होगा बाकी तरीका वही है जो आदमी के लिए है।
सवाल – वुजू किन किन वजह से टूट जाता है ?
जवाब – निचे दी गयी बातो में से कुछ भी होता है तो वुजू टूट
जायेगा।
·
पेशाब, पाख़ाना, करने से
·
वदी, मज़ी, मनी के निकलने
से
·
कीड़ा और पथरी
मर्द या औरत के आगे पीछे से निकलने से
·
मर्द या औरत
के पीछे से हवा निकलने से, जिसको ‘रियाह‘ कहते हैं।
·
ख़ून, पीप या पीला
पानी कहीं से निकल कर बहने से
·
अगर ज़ख़्म से
ख़ून वग़ैरा निकलता रहा और यह बार-बार पोंछता रहा, मिट्टी या राख डाल कर सुखाता रहा कि बहने नहीं दिया तो यह
ध्यान करे कि अगर न पोंछता या सुखाता तो बह जाता तो वुज़ू टूट गया वरना नहीं।
·
फोड़ा या
फुन्सी के निचोड़ने या दबाने पर ख़ून के बहने से
·
छाला नोचने से
अगर उसमें का पानी बह गया तो वुज़ू टूट गया वरना नहीं।
·
थूक के साथ
मुँह से ख़ून निकलने पर अगर ख़ून थूक से ज़्यादा हो तो वुज़ू टूट जायेगा वरना
नहीं। थूक के ज़्यादा और कम होने की पहचान यह है कि थूक का रंग अगर सुर्ख़ हो जाये
तो ख़ून ज़्यादा समझा जाएगा और अगर पीला रहे तो कम।
·
ग़फ़लत की
नींद सो जाने से वुज़ू टूट जाता है।
·
अगर नमाज़ में
जान बूझ कर सोया तो वुज़ू भी गया और नमाज़ भी गई वुज़ू करके दोबारा पढ़े, अगर बिना
इरादा सोया तो वुज़ू टूटा नमाज़ नहीं गई, वुज़ू करके जिस रुक्न में सोया था वहाँ से अदा करेगा और
नमाज़ का दोबारा पढ़ना बेहतर है।
·
नीचे दी गईं
हालतों में सो जाने से भी वुज़ू टूट जाता है-
o
दोनों सुरीन
(कूल्हे) ख़ूब न जमें हों।
o
ऐसी हालत पर न
सोया हो जिस से ग़ाफि़ल होकर नींद न आ सके।
o
उकड़ूँ बैठ
कर।
o
चित, पट या करवट पर
लेट कर।
o
एक कोहनी पर
टेक लगा कर।
o
एक करवट को
झुका हुआ बैठ कर कि एक या दोनों सुरीन उठे हों।
o
जानवर की नंगी
पीठ पर सवार है जो ढाल पर उतर रहा है।
o
दो ज़ानू
बैठकर और पेट रानों पर रखकर कि दोनों सुरीन जमे न रहे।
o
चार ज़ानू
बैठकर और सिर रानों या पिंडलियों पर रखकर।
o
औरतों के सजदा
करने की हालत पर।
·
ज़ोर से हँसने
से वुज़ू टूट जाता हैः- रुकू और सजदे वाली नमाज़ में अगर बालिग़ आदमी इतनी ज़ोर से
हँसे कि आस पास वाले सुन लें तो वुज़ू टूट जायेगा और नीयत भी टूट जायेगी और अगर
इतनी ज़ोर से हँसा कि ख़ुद उसने ही सुना और आस पास वाले न सुन सकें तो वुज़ू नहीं
जायेगा नमाज़ जाती रहेगी।
·
मुँह भर के
उल्टी आने से वुजू़ टूट जाता है।
·
पागल हो जाने
पर।
·
बेहोशी से
चाहे बीमारी से हो या नशे से।
·
नशा जिससे
पाँव लड़खड़ाते हों।
·
दो लोगों का
आपस में शर्मगाहें मिलाने से।
·
नमाज़ वग़ैरा
के इंतज़ार में कभी कभी नींद आ जाती है और नमाज़ी नींद को दूर करना चाहता है तो
कभी ऐसा ग़ाफ़िल हो जाता है कि उस वक़्त जो बातें हुईं उनकी उसे बिल्कुल ख़बर नहीं
बल्कि दो तीन आवाज़ों में उसकी आँख खुली और अपने ख़्याल में वह यह समझता है कि
सोया न था तो उसके इस ख़्याल का एतबार नहीं अगर कोई मोतबर आदमी कहे कि तू ग़ाफ़िल
था यहाँ तक कि तू ऐसा ग़ाफ़िल था कि तुझे पुकारा गया लेकिन तूने जवाब नहीं दिया या
बातें पूछी जायें और वह न बता सके तो उस पर वुज़ू लाज़िम है।
·
दुखती आ़ँख से
पानी बहने पर वुज़ू टूट जाता है। आँख दुखते में जो आँसू बहता है नजिस है और उससे वु़ज़ू टूट
जाता है इससे बचना बहुत ज़रूरी है। इस मसअले से बहुत से लोग ग़ाफ़िल हैं, अक़्सर देखा
गया है कि कुर्ते वग़ैरा से इस हालत में आँख पोंछ लिया करते हैं अगर ऐसा किया तो
कुर्ता वग़ैरा नापाक हो जायेगा।
·
वुज़ू के दरमियान
में अगर रियाह यानि गैस निकले या कोई ऐसी बात हो जिससे वुज़ू टूट जाता है तो नये
सिरे से फिर वुज़ू करे।
·
चुल्लू में
पानी लेने के बाद अगर हदस हुआ यानि पेशाब पाख़ाना या रियाह वग़ैरा चीज़ें निकलीं
तो वह पानी बेकार हो गया और वह किसी उज़्व के धोने के काम नहीं आ सकता।
·
मुँह में इतना
ख़ून निकला कि थूक लाल हो गया अगर लोटे या कटोरे को मुँह से लगाकर कुल्ली के लिए
पानी लिया तो लोटा कटोरा और सब पानी नापाक हो गया। चुल्लू से पानी लेकर कुल्ली करे
और फिर हाथ धोकर कुल्ली के लिये पानी लें।
·
बीमार लेट कर
नमाज़ पढ़ रहा था अगर नींद आ गई तो वुज़ू टूट जायेगा।
सवाल – क्या नींद की झपकी आने से वुजू टूट जाता है ?
जवाब – सिर्फ नींद की झपकी आने से वुजू नही टूटता है जब तक ये सो
न गयी हो मसलन गफलत में चली जाए की इससे पूछा जाए के अभी क्या बात हुई।
सवाल - मैंने अक्सर देखा है कि शादी वगैरह में दुल्हन तय्यार
होने के बाद तयम्मुम कर के नमाज़ पढ़ती हैं
इसके बारे में कुछ बतायें ?
जवाब - इस तरह नमाज़ नहीं होगी बल्कि पानी से वुज़ू करना होगा।
सवाल - क्या शीसा आइना देखने से वुज़ू टूट जाता है कयोकि बहुत
लोग कहते हैं कि आइना देखने से वुज़ू टूट जाता है ये बात कहाँ तक दुरुस्त है
रहनुमाई फरमायें ?
जवाब - आइना देखने से वुज़ू नहीं टूटता है।
सवाल – क्या खुल कर हसने से वुजू टूट जाता है ?
जवाब – हसने से वुजू नही टूटता है
अगर नमाज में इतनी जोर से हंसी की किसी और ने भी आवाज़ सुनी तो फिर नमाज़ और वुजू
दोनों ही टूट जायेंगे।
सवाल - क्या शरमगाह को देखने या हाथ लगाने से वुज़ू टूट जाता है
?
जवाब - शरमगाह को देखने या हाथ लगाने से वुज़ू नहीं टूटता।
सवाल - गुस्ल के साथ जो वुजू किया जाता है क्या उससे नमाज़ पढ़
सकती है ?
जवाब – हा पढ़ सकती है।
सवाल - अगर किसी के
बच्चे ने पाखाना किया तो उसको धोने पर क्या वुज़ू टूट जायेगा?
जवाब - जी नहीं- बच्चे का पाखाना धोने से धोने वाले के वुज़ू पर
कोई असर नहीं पड़ेगा अगर कोई बा वुज़ू थीं और बच्चे का पाखाना धोया तो उसी वुज़ू
से नमाज़ अदा कर सकती हैं।
सवाल – खड़े होकर वेशिंग में वुजू करना केसा है ?
जवाब – खड़े होकर वेशिंग में वुजू बनाने से वुजू तो हो जायेगा
मगर इसकी आदत न बनाई जाए।
सवाल – ख्वातीन को सफ़ेद पानी (बीमारी) आने से क्या वुजू टूट जाता है
?
जवाब – सफ़ेद पानी आने से वुजू नही टूटता है इससे नमाज़ हो
जाएगी।
सवाल - क्या शुगर चेक करने से वुज़ू टूट जाता है?
जवाब – शुगर चेक करने से वुजू नही टूटेगा क्यूंकि जब शुगर चेक
की जाती है तो खून बहता नही है एक ही जगह रहता है।
सवाल - क्या क़ुरआन शरीफ छूने के लिए वुज़ू करना ज़रुरी है ?
जवाब -जी हाँ- क़ुरआन शरीफ को छूने के लिए वुज़ू करना फर्ज़ है
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरआन पाक में इरशाद फरमाता है कि
“कंज़ुल ईमान- इसे न छुयें
मगर बा-वुज़ू”।
सवाल - बे वुज़ू को अगर क़ुरआन पाक उठा कर रखना हो तो वो क्या
करे ?
जवाब - ऐसा कपड़ा जो उसके ताबे न हो यानि दूसरे कपड़े से पकड़ कर
रख सकती हैं।
सवाल - अगर किसी ने वुज़ू करने के बाद झूठ बोला,किसी की गीबत की या किसी को गाली दी तो क्या उस से वुज़ू
टूट जाता है ?
जवाब - पहली बात तो गाली देना,झूठ बोलना,गीबत करना बहुत बड़ा गुनाह है गाली देने वाला फौरन तौबा करे
- रहा सवाल वुज़ू टूटेगा कि नहीं तो उसका वुज़ू बाकी रहता है और अगर उस वुज़ू से
नमाज़ पढ़ ले तो नमाज़ हो जायेगी लेकिन उस नमाज़ की मुकम्मल रुहानियत और कामिल
अज्रो सवाब और बरकत न होगी लिहाज़ा अफ्ज़ल और मुस्तहब ये है कि दुबारा ताज़ा वुजू
कर के नमाज़ पढ़े और अगर चाहते हैं कि उन गुनाहों का असर और नहूस्त पूरी तरह खत्म
हो जाए तो सिद्क़ दिल से अल्लाह तआला के
हुज़ूर तौबा करे।
सवाल – नहाते वक्त नंगे बदन किये गये वुजू से नमाज़ पढ़ सकती है
या नही ?
जवाब – इस वुजू से तमाम इबादते कर सकती है।
सवाल – क्या नमाज से पहले वुजू में मिस्वाक करना औरतों के लिए
भी इसी तरह सुन्नत है जैसे मर्दों के लिए है ?
जवाब – मिस्वाक ख्वातीनो के लिए भी सुन्नत है, ख्वातीन के मसूड़े
कमजोर होते है उनके नर्म मिस्वाक इस्तेमाल करना चाहिए।
सवाल : नाखून पर नेल पॉलिश लगी हुई हो तो क्या वुज़ू हो जाएगा
जवाब – नाख़ून पर अगर नेल पॉलिश लगी हुए हो तो वुजू और गुस्ल
दोनों नही होंगे।
सवाल : क्या बच्चे को दूध पिलाने से वुजू टूट जाता है ?
जवाब - बच्चे को दूध पिलाने से वुज़ू नही टूटता है।
सवाल – बा वुज़ू थी और फिर अपनी बहन से बात करने लगी जिस में
तेज़ हंस दिए और फिर उसी वुज़ू से नमाज़ भी पढ़ ली मेरी बहन कहने लगी की तेज़
हंसने से वुज़ू टूट जाता है तो क्या ये बात सही है?
जवाब - वुज़ू नहीं टूटा कियोंकि नमाज़ के बाहर क़हक़हे लगाने से
वुज़ू नहीं टूटता लिहाज़ा नमाज़ हो गई।
सवाल - असर की नमाज़ पढ़ी और फिर मगरिब की नमाज़ पढ़ते वक्त शक
हुआ कि मेरा वुज़ू बाकी है या नहीं तो अब मैं नमाज़े मगरिब के लिए वुज़ू करुं या
उसी वुज़ू से नमाज़ पढ़ूं तो क्या नमाज़ हो जायेगी और मुझे अक्सर वुज़ू के बाद शक
होता रहता है कि मेरा वुज़ू है या नहीं अब क्या किया जाए?
जवाब - सिर्फ शक से वुज़ू नहीं टूटता- यक़ीनन आप उस वक्त तक बा
वुज़ू हैं जब तक वुज़ू टूटने का ऐसा यक़ीन न हो जाए कि क़सम खा सकें- बहारे शरीयत
में है कि अगर दौराने वुज़ू किसी अज़ू के धोने में शक वाके हो और ये ज़िंदगी का
पहला वाकिया है तो इसको धो लें और अगर अक्सर शक पड़ा करता है तो उसकी तरफ तवज्जो न
दें इसी तरह वुज़ू के बाद भी शक पड़े तो इस का कुछ ख्याल न लें इसी तरह आप बा
वुज़ू थे अब शक आने लगा कि पता नहीं वुज़ू है या नहीं ऐसी सूरत में आप बा वुज़ू
हैं कियोंकि सिर्फ शक से वुज़ू नहीं टूटता।
सवाल - वुज़ू के दौरान सर ढंका नही है
तो क्या वुज़ू नही होगा?
जवाब - हो जाएगा, जहां दीगर आदमी हो वहां नंगे सर वुज़ू नही करना चाहिए, औरत तन्हा हो तो कर सकती है। बेहतर यही है कि सर ढंक
कर वुज़ू करे।
सवाल - बैतुल ख़ला से आने के बाद अगर
साबुन से हाथ नहीं धोया और वैसे ही वुज़ू बना लिया तो हमारा वुज़ू माना जायेगा या
साबुन से हाथ धोना ज़रुरी है ?
जवाब - साबुन से हाथ धोना ज़रुरी नहीं
अगर बगैर साबुन से हाथ धुले ही वुज़ू बना लिया तो वुज़ू हो जायेगा उस वुज़ू से
नमाज़ भी पढ़ सकते हैं पर साबुन से हाथ बैतूल ख़ला के बाद धो लेना चाहिए ताकि
नजासत की बू हाथ से खत्म हो जाए और उसका असर बाक़ी न रहे।
|
गुस्ल के मसाइल |
सवाल : ग़ुस्ल कब फ़र्ज़ होता है ?
जवाब - पांच चीजें हैं
कि उनमें से एक भी पाई जाये तो गुस्ल फ़र्ज़ हो जाता है।
1. मनी का अपनी जगह से शहवत के साथ (यानी मस्ती की हालत में) अलग होकर शर्मगाह से
निकलना। लेहाज़ा अगर मनी शहतूत के साथ अपनी जगह से जुदा न हुई बल्कि बोझ उठाने या
बुलन्दी से गिरने के सबब निकली, या पेशाब के वक़्त या वैसे ही कुछ कतरे बिला शहवत निकल आये
तो उन दोनों सूरतों से गुस्त फर्ज नहीं अल्बत्ता वुजू टूट जायेगा।
2. एहतलाम - यानी सोते से उठी और बदन या कपड़े पर तरी पाये तो गुस्ल वाजिब है अगरचे
ख्वाब याद न हो। हां अगर यकीन है कि यह मनी या मज़ी नहीं बल्कि पेशाब या पसीना है
या कुछ और है तो अगरचे एहतलाम याद हो और ख्याल में इन्जाल (मनी निकलने) की लज़्ज़त
हो, तो गुस्ल वाजिब नहीं।
मसला : - अगर मनी न होने का यकीन है और मज़ी का शक है तो अगर
ख्वाब में एहतलाम होना याद नहीं तो गुस्ल नहीं और याद है तो गुस्ल फर्ज है।
मर्द औरत एक चारपाई पर
सोये और जागे तो बिस्तर पर मनी पाई गई और उनमें से हर एक एहतलाम का इंकार करता है
तो दोनों गुस्ल करें।
फायदा : - शहवत के वक़्त शुरू शुरू में जो चीज़ शर्मगाह से सफेद
रंगत की निकली है और उसके निकलने से जोश कम नहीं होता बल्कि ख्वाहिश और बढ़ जाती
है उसे मज़ी कहते हैं और शहवत के बाद जब खूब लज्जत आती है तो एक गाढ़ी रतूबत
शर्मगाह से निकलती है उसे मनी कहते हैं। मनी निकलने के बाद शहवत व ख्वाहिश खत्म हो
जाती है और जोश ठंडा पड़ जाता है उससे गुस्ल फर्ज हो जाता है। मज़ी निकलने पर
गुस्ल फ़र्ज़ नहीं।
3. हशफा - यानी मर्द की शर्मगाह का सर औरत की शर्मगाह में दाखिल होना शहवत व ख्वाहिश
हो या न हो, इन्ज़ाल हो या न हो दोनों पर गुस्ल फर्ज करता है।
और अगर एक बालिग हो दूसरा
नाबालिग़ तो बालिग पर गुस्ल फ़र्ज़ है और नाबालिग पर अगरचे फर्ज नहीं मगर गुस्ल का
हुक्म दिया जायेगा।
4. हैज़ से फारिग होना, 5. निफास का खत्म होना
सवाल – बीवी का अपने शोहर के साथ बात या प्यार करते वक़्त कुछ
कतरे मजी ख़ारिज हो जाए तो क्या गुसल फर्ज हो जायेगा।
जवाब – मजी के ख़ारिज होने पर गुसल फर्ज नहीं होता है।
सवाल – क्या मनी और वदी के निकलने से गुस्ल फर्ज हो जाता है ?
जवाब – मनी और वदी के निकलने से गुस्ल फर्ज नही होता सिर्फ वुजू
टूट जाता है।
सवाल – गुस्ल का मसनून तरीका क्या है ?
जवाब –
नीयत करना-
पहले नीयत करना यानि दिल में यह इरादा करना कि निजासत से पाक होने, अल्लाह की रज़ा और सवाब के लिये नहाती हूँ न कि बदन साफ़ करने के लिये। ग़ुस्ल में नियत करना सुन्नत है अगर न की तब भी
ग़ुस्ल हो जाएगा। ग़ुस्ल की येह है कि मैं पाक होने और नमाज़ जाइज़ होने के वास्ते
ग़ुस्ल कर रही हूँ।
नियत के बाद पहले दोनों हाथ गट्टे (कलाई) तक तीन मरतबा अच्छी तरह धोए, फिर
शर्मगाह और उसके आस पास के हिस्सों को धोए चाहे वहां गन्दगी लगी हो या न लगी हो, फिर बदन
पर जहाँ जहाँ गन्दगी हो वहाँ धोए, इस के बाद गरारह करे कि पानी हलक़ के आख़िरी हिस्से, दाँतों
की खिड़की, मसूढ़ो
वगै़रा में बह जाए, कोई चीज़ दाँतों में अटकी हो तो लकड़ी वगै़रा से उसे
निकाले फिर नाक में पानी डाले, इस तरह की नाक की आख़िरी हिस्से (हड्डी) तक पानी
पहुँच जाए और वोह नाक में तेज़ लगे फिर चेहरे को धोए इस तरह के पेशानी से लेकर
थुड्डी तक और एक कान से दूसरे कान की लव तक, फिर तीन मरतबा कोहनियो समेत हाथों पर पानी बहाए फिर
सर का मसा करे जिस तरह वुज़ू में करते है उसी तरह मसा करे।
इस के बाद बदन पर तेल की तरह पानी मले। फिर तीन मरतबा सर पर पानी डाले फिर तीन
मरतबा सीधे मोन्ढ़े (कान्धे) पर और तीन मरतबा दाएँ मोन्ढ़े पर लोटे या मग वगै़रा
से पानी डाले और जिस्म को मलते भी जाए इस तरह कि बदन का कोई हिस्सा सूखा न रहे, सर के
बालों की जड़ों, बगल में
शर्मगाह के हर हिस्से वगै़रा सब जगह पानी बहना चाहिये उँगली में अँगूठी हो तो उसे
घुमा कर वहाँ पानी पहुँचाए, इसी तरह औरत अपने कान की बाली, नाक की
नथनी, वगै़रा
को घुमा घुमा कर वहाँ पानी पहुँचाए, सर के बाल खोल ले तो बेहतर है वरना येह अहतियात
ज़रूरी है कि सर के बाल और सर की जड़ों तक पानी ज़रूर पहुँचे (अब आप इस्लामी
शरीअ़त के मुताबिक़ पाक हो गये और आपका ग़ुस्ल सही हो गया) इसके बाद साबुन वगै़रा
जो भी जाइज़ चीज लगाना हो वोह लगा सकते है आखिर में पैर धो कर अलग हो जाए।
सवाल – नंगे बदन नहाने से गुस्ल होगा की नही ?
जवाब – हो जायेगा।
सवाल – मिया बीवी एक साथ एक ही बाथरूम में बरहना (नंगे) बदन हो
कर गुस्ल करे तो गुस्ल होगा की नही ?
जवाब – हा कर सकते है गुस्ल हो जायेगा।
सवाल – औरत को मर्द की तरह अगर शहवत से मनी निकले तो उन पर
गुस्ल फ़र्ज़ है या नही ?
जवाब – गुस्ल फर्ज हो जायेगा।
सवाल – बदन पर नापाक कपडा (अंडरवेयर) पहने हुए गुस्ल किया तो
क्या गुस्ल हो जायेगा ?
जवाब – गुस्ल नही होगा नापाक ही रहेंगी।
सवाल – गुस्ल करते वक़्त क्या किब्ले की जानिब मुंह करके नहा
सकते है ?
जवाब – किबले की तरफ रुख़ कर के नहाना मना है।
सवाल – जो पानी धुप में गर्म हो गया हो उस पानी से वुजू या
गुस्ल करना केसा है ?
जवाब – धुप में गर्म हुए पानी से वुजू और गुस्ल करने से बचना
चाहिए जबतक की वह ठंडा न हो जाए और इसे पानी को पीना भी नही चहिये और अगर इसे पानी
से कपडे भीग गये हो तो जब तक कपड़ा ठंडा न हो तब तक उसे नही पहनना चाहिए या फिर भी
वुजू या गुस्ल कर लिया तो हो जायेगा।
|
पाकी नापाकी के मसाइल |
सवाल : बच्चे ने कपड़े पर पेशाब कर दिया तो कपड़ा पाक होगा और
क्या सूखने पर पाक हो जाएगा
जवाब - बच्चे ने पकड़े
पर पेशाब कर दिया और कपड़ा युही सुख गया बच्चे के पेशाब करने से कपड़ा नापाक हो जाएगा
और सूखने पर भी नापाक ही रहेगा ❕
सवाल : दूध पीते बच्चे का पेशाब पाक है या नापाक ?
जवाब - दूध पीते बच्चे
का पेशाब नापाक है।
सवाल - क्या नापाकी की हालात में औरत
अपने बच्चे को दूध पिला सकती है ?
जवाब - हा पिला सकती है मगर बेहतर यह
है कि ग़ुस्ल से फारिग होकर पाकी की हालात में पिलाये तो बच्चे पर अच्छा असर पड़ेगा।
सवाल – अगर नहाने के पानी में बेवजू शख्स का हाथ, उँगली, नाखून, या बदन का कोई और हिस्सा
पानी में बे धोया चला गया या जिस शख्स पर नहाना (गुस्ल) फर्ज है उस के जिस्म का भी
कोई हिस्सा बे धोए पानी से छू जाए तो क्या उस पानी से वुजू या गुस्ल हो जायेगा?
जवाब – उस पानी से अब वुजू या गुस्ल नही होगा।
सवाल : नापाकी की हालत में जैरे नाफ़ के बाल साफ करना या नाखून
काटना क्या है ?
जवाब - नापाकी की हालत में जैरे नाफ़ के बाल साफ करना या नाखून
काटना मकरुह है।
सवाल – बरतन धोते वक़्त या सफाई करते वक़्त पानी के छींटे कपडे पर
आते है क्या उससे कपडे नापाक हो जायेंगे क्या उसी कपडे में नमाज पढ़ सकती है ?
जवाब – बरतन धोते वक़्त पानी के छींटे कपडे पर आ जाते है तो
उस से कपडा नापाक नही होता है, जबकि पाक पानी से झूटे बरतन ढोए गये हो, और अगर
नापाक पानी से बरतन धोए गये और कपड़े पर छींटे गिरे तो फिर कपड़े नापाक हो जायेंगे, पाक
छींटे पड़े तो उसी कपडे में नमाज भी हो जाएगी यही हुक्म सफाई करते वक़्त आने वाले
छींटे पर भी है।
सवाल – नापाक कपड़े को पाक करने का तरीका क्या है ?
जवाब – निजासत अगर दलदार हो जैसे
पाख़ाना, गोबर और ख़ून वग़ैरा तो धोने में गिनती की
कोई शर्त नहीं बल्कि उसको ख़त्म करना ज़रूरी है जब ही पाक होगा। चाहे एक बार धोने
से ही साफ़ हो जाए या चार पाँच बार धोने से लेकिन अगर तीन बार से कम धोने में
निजासत दूर हो जाये तो तीन बार धोना मुस्तहब है।
निजासत दूर होने के बाद उसका कुछ असर रंग या बू बाक़ी है तो उसे भी दूर करना
ज़रूरी है। लेकिन अगर उसका असर मुश्किल से जाये तो ज़्यादा रगड़ने की ज़रूरत नहीं
बस तीन बार धो लिया पाक हो गया।
अगर निजासत पतली हो तो तीन बार धोने और तीन बार ज़ोर से निचोड़ने से पाक होगा।
ज़ोर के साथ निचोड़ने का मतलब यह है कि कोई शख़्स अपनी ताक़त से इस तरह निचोड़े कि
अगर फिर निचोड़े तो उससे कोई क़तरा न टपके अगर कपड़े का ख़्याल करके अच्छी तरह
नहीं निचोड़ा तो पाक नहीं होगा। पहली और दूसरी बार निचोड़ने के बाद हाथ पाक कर
लेना ज़रूरी है और तीसरी बार निचोड़ने से कपड़ा भी पाक हो गया और हाथ भी और जो
कपड़े में इतनी तरी रह गई हो कि निचोड़ने से एक आध बूँद टपकेगी तो कपड़ा और हाथ
दोनों नापाक हैं।
जो चीज़ निचोड़ने के क़ाबिल नहीं है जैसे चटाई, बर्तन, पकाया हुआ चमड़ा और जूता या बहुत नाज़ुक
कपड़ा वग़ैरा, उनको धोकर छोड़ दें कि पानी
टपकना रुक जाये इस तरह तीन बार धोयें। तीसरी मरतबा जब पानी टपकना बन्द हो गया तो
वह चीज़ पाक हो गई।
सवाल - बरतन रखा हुआ था कुत्ते ने उसे चाट लिया कुत्ते का लुआब
नापाक होता है तो मैं उस बरतन को किस तरह पाक करे ?
जवाब - बरतन पाक करने का तरीक़ा ये है के अगर नजासत किसी ऐसी चीज़
पर लगी हो कि जिस में जज़्ब करने की सलाहियत ना हो जैसे चीनी का बरतन या मिट्टी का
पुराना इस्तेमाली चिकना बरतन या लोहे, तांबा,पीतल, स्टील, पलास्टिक, कांच का बरतन, इसे तीन बार धो लेने से पाक हो जायेगा,नापाक बरतन मिट्टी से मांझ लेना बेहतर है।
सवाल - बच्चों को पेशाब करवाते वक़्त कपड़ों पर निहायत बारीक
बारीक छींटे आजाती हैं तो क्या हमारे कपड़े नापाक हो जायेंगे ?
जवाब - अगर बच्चों को पेशाब वगैरा करवाते वक़्त या वैसे भी अगर
पेशाब के निहायत बारीक छींटे सूई की नोक के बराबर बदन या कपड़े पर लग जायें तो
कपड़ा और बदन पाक ही रहेगा, और अगर ऐसा कपड़ा पानी में भी पड़ जायेगा तो पानी भी नापाक
ना होगा।
|
नमाज़ के मसाइल |
सवाल – फर्ज किसे कहते है ?
जवाब –
फर्ज की दो किस्मे है 1. फ़र्जे ऐन - इसका मतलब
होता है जिसका करना हर एक पर ज़रूरी हो और कुछ लोगों के करने से ज़िम्मेदारी हटती न
हो जैसे नमाज़, रोज़ा
वगैरह
नमाज़ और रोज़ा फ़र्ज़ ऐन है
हर शख्स को करना ज़रूरी है कुछ लोगों के करने से सब की ज़िम्मेदारी ख़त्म नहीं होती।
2. फ़र्जे
किफ़ाया - इसका मतलब है कि अगर कुछ लोगों ने कर लिया तो सब से
जिम्मेदारी हट जाएगी लेकिन अगर किसी ने नहीं किया तो बस्ती सारे के सारे लोग इसके
जिम्मेदार और गुनाहगार होंगे जैसे नमाज़े जनाज़ा ।
नमाज़े जनाज़ा फ़र्ज़ किफ़ाया है उसको अगर
कुछ लोग पढ़ लेते हैं तो पूरी बस्ती के ऊपर से ये ज़िम्मेदारी हट जाती है लेकिन अगर
किसी ने नहीं किया तो पूरी बस्ती वाले ज़िम्मेदार होते हैं।
सवाल – वाजिब किसे कहते है ?
जवाब -
इसको इस तरह समझिये कि अगर नमाज़ में कोई अमल वाजिब है
तो उसके छूट जाने से सज्दए सहव वाजिब होता है जैसे
वित्र में दुआए क़ुनूत पढना
वाजिब है लेकिन आप पढना भूल गए तो आप को सज्दाए सहव कर लें तो इसकी भरपाई हो जाएगी
लेकिन अगर कोई अमल फ़र्ज़ है तो उसके छूटने से आप को नमाज़ दोहरानी पड़ेगी।
सवाल – सुन्नत किसे कहते है ?
जवाब – सुन्नत उस काम को कहते हे जिसको रसूल सलल्ललाहु अलैहि व्
सल्लम ने किया हो करने का हुक्म फ़रमाया हो
सुन्नत की दो किस्म हे-
1. सुन्नते मुअक्किदा : जिसकी
ताकीद की गयी हो जिसको जान बूझ कर छोड़ने वाला गुनाहगार होगा और करने वाला सवाब
हासिल करेगा।
2. सुन्नते गैर मुअक्किदा - जिसकी
ज्यादा ताकीद न हो इसका हुक्म ये है कि करने वाला सवाब हासिल करेगा लेकिन न करने
वाला गुनाहगार नहीं होगा।
लेकिन सही ये है कि जिनकी
ताकीद न हो फिर भी बंदा अल्लाह की रजा के लिए इन अमल को न छोड़े तो अल्लाह उसके
दर्जे बुलंद फरमा देते हैं और वहां उसका मुक़ाम अता फरमा देते हैं जहाँ इन को छोड़ने
वाले नहीं पहुँच पाए । जैसे आपके
ऑफिस में एक बंदा सिर्फ अपनी डयूटी पूरी करता है और दूसरा डयूटी पूरी करने के साथ
साथ थोडा सा वक़्त ऑफिस को और दे देता है तो ज़ाहिर है कि बोस इसी को पसंद करेगा और
प्रोमोशन भी इसे ही देगा।
सवाल – मुस्तहब किसे कहते है
जवाब -उस अमल को कहते हैं कि जिसका करने वाला सवाब हासिल करेगा
लेकिन न करने वाला गुनाहगार नहीं होगा और इसको मन्दूब भी कहते हैं।
सवाल – हराम किसे कहते है ?
जवाब - वो अमल है कि जिसके करने पर सख्त अज़ाब होगा और छोड़ देने
पर सवाब । इसलिए जो चीज़ें इस्लाम में हराम हैं उनको छोड़ना बहुत ज़रूरी है।
सवाल – मकरूह किसे कहते है ?
जवाब - नापसंदीदा को कहते हैं इसकी दो किस्में हैं
1. मकरूह तहरीमी - उस अमल को कहते हैं जो शरीअत में नापसंदीदा हो और हराम के करीब
हो और उसके करने पर अज़ाब हो।
2. मकरूह तन्ज़ीही - जो हलाल के करीब हो उसके करने पर अज़ाब नहीं होगा लेकिन
छोड़ने वाला सवाब हासिल करेगा।
सवाल – ख्वातीन की नमाज पढने का तरीका क्या है ?
जवाब – बावुजू किबला की तरफ मुंह करके दोनों पांवों के पंजों
में चार अंगुल का फासला करके खड़ी हो और नमाज़ की नीयत करे (कि नीयत की मैंने . .
. . . . . . . . रकअत नमाज़ . . . . . . . . . वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरा
काबा शरीफ़ की तरफ ) और अपने दोनों हाथ कांधों तक उठाए लेकिन अपने हाथों को
दोपट्टा चादर से बाहरन निकाले, हाथ की उंगलियां न बिल्कुल मिलाए न उन्हें फैलाए
बल्कि अपने हाल पर छोड़ रखे, हथेलियां किबला की तरफ रखे और अल्लाहु अक्बर कहती हुई
हाथ नीचे लाए। मगर तकबीर के वक्त सर ने झुकाए और तकबीर के बाद फौरन हाथ बांध ले, यूंकि
बायें हथेली सीने पर छाती के नीचे रख कर उसकी पीठ पर दाहिनी हथेली रखे और सना
पढ़े।
फिर तअब्बुज़ यानी अऊजु
बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम पढ़े फिर तस्मीया यानी बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम कहे
फिर अल्हम्दु शरीफ पढ़े और खत्म पर आमीन आहिस्ता कहे, उसके बाद कोई सूर: या तीन
आयतें पढ़े या एक आयत कि तीन के बराबर हो और अल्हम्दु के बाद अगर अव्वल सूरत शुरू
की तो सूरत पढ़ते वक्त बिस्मिल्लाह भी पढ़ ले वरना नहीं, अब अल्लाहु अक्बर कहती
हुई रुकूअ में पहुंच जाए यानी जब रुकूअ के लिए झुकना शुरू करे और रुकूअ में पहुंच
जाए तो तकबीर खत्म करे और रुकूअ के लिए सिर्फ इतना झुके कि हाथ घुटनों तक पहुंच
जाएं। पीठ सीधी न करे और घुटनों पर ज़ोर न दे बल्कि महज़ हाथ रख दे और हाथों की उंगलियां
मिली हुई, बाजू पहलू से चिपके हए और पांव झुके हुए रखे, मर्दो की तरह
खूब सीधे न करे और रुकूअ में कम अज़ कम तीन बार सुबहान रब्बियल अजीम कहे, फिर
समिअल्लाहु लिमन हमिदह कहती हुई खड़ी हो जाए और रबना लकल हम्दु कहे, फिर अल्लाहु
अक्बर कहती हुई सज्दे में जाए इस तरह कि पहले दोनों घुटने जमीन पर रखे,
फिर दोनों हाथ फिर दोनों हाथों के बीच में सर रसे,
न यूं कि सिर्फ पेशानी जमीन से छू जाए और नाक की नोक लग जाए
बल्कि पेशानी और नाक की हड्डी ज़मीन पर जमाए और सिमट कर सज्दा करे,
मदों की तरह नहीं यानी बाजू करवटों से मिलादे और पेट रान से और रान पिंडलियों से और
पिंडलियां ज़मीन से मिलादे और कलाइयां ज़मीन पर बिछादे, यूही दोनों पेर भी और
हथेलियां बिछी हुई और हाथ की उंगलियां किबला को हों और सज्दा में कम अज़ कम तीन
बार या पांच बार सुबहान रब्बियल आला कहे, फिर सर उठाए और दोनों पांवों दाहिनी
जानिब निकाल दे और बायें सुरीन पर बैठे और दाहिना हाथ दाहिनी रान पर और बायां हाथ
बायें रान पर इस तरह रखे कि उंगलियां मिली हुई हों और उनके किनारे घुटनों के पास
और किबला को हों फिर “अल्लाहु अक्बर" कहती हुई सज्दा को जाए और उसी तरह सज्दा
करे, जब दोनों सज्दे करले तो दूसरी रकअत के लिए पंजों के बल,
घुटनों पर हाथ रख कर उठ खड़ी हो, अब जबकि दूसरी रकअत शुरू
हुई, उसमें सना (सुबहान कल्लाहुम्म) और तअव्वुज़ (अऊजुबिल्लाह) न पढ़े बल्कि सिर्फ
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़ कर अल्हम्दु शरीफ पढ़े, फिर कोई सूरत या तीन आयतें
पढ़े और उससे फारिग होने के बाद दोनों पांवों दाहिनी जानिब निकाल कर उसी तरह बैठ
जाए जिस तरह पहली रकअत में दोनों सज्दों के दर्मियान बैठी थी वैसे बेठ जाए, अत्ताहिय्यात और उसको
तशहहुद कहते हैं और जब कलिमा ला के करीब पहुंचे तो दाहिने हाथ की बीच की उंगली और
अंगूठे का हलका बनाए और छंगुली और उसके पास वाली उंगली को हथेली से मिला दे और
लफ्ज़ ला पर कलिमा की उंगली उठाए मगर हिलाए नहीं और कलिमा इल्ला पर गिरादे और सब
उंगलियां फौरन सीधी करले, अब अगर दो से ज़ायद रकअतें पढ़नी हैं तो उठ खड़ी हो मगर
- ज़मीन पर हाथ रख कर न उठे। बल्कि घुटनों पर ज़ोर देकर उठे। (हां अगर उज़र है तो
हर्ज नहीं) और यह नमाज़ फर्ज नमाज़ है तो "इन रकअतों में अल्हम्दु के साथ
सूरत मिलाने की ज़रूरत नहीं अलहम्दु शरीफ पढ़ना काफी है।
अब पिछला
काअदा जिसके बाद नमाज़ खत्म कर देगी उसमें तशहहुद के बाद दूरूदे इब्राहिम शरीफ
पढ़े, फिर दायें शाने (मोंढे) की तरफ मुंह करके अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह कहे
फिर बायें शाने का तरफ मुंह फेर कर यही कहे, सलाम में इतना फेरे कि अपना रुखसार
दिखाई दे, सीना न फेरे
नमाज़
पढ़ने का जो तरीका ज़िक्र किया गया है उसमें बाज़ चीजें फर्ज हैं कि उसके बगैर
नमाज़ होगी ही नहीं। बाज़ वाजिब हैं कि जानबूझ कर उनका छोड़ना और नमाज़ का दुहराना
वाजिब। और भूले से हो तो सज्दा सहव करना पड़ेगा। बाज़ सुन्नते मुवक्किदा हैं कि
उनको छोड़ने की आदत डालना गुनाह है और बाज़ चीजें मुस्तहब हैं कि करें तो सवाब न
करें तो गुनाह नहीं।
सवाल – नमाज़ में अगर कोई वाजिब छुट जाए तो सजदा ए शहव केसे करे ?
जवाब - नमाज़ की आख़िरी रकअत में अत्तहीयात पढ़ने के बाद सिर्फ़
दाहिनी तरफ़ सलाम फेरें अब दो सजदे करें, इसके बाद शुरू से अत्तहीयात, दुरूद शरीफ़ पढ़ कर सलाम फेर दें।
सवाल : क्या औरत चूड़ियां (कांच,
सोने, चांदी की) पहन कर नमाज़ पढ़ सकती है ?
जवाब - ख़्वातीन चूड़ियां
(कांच, सोने, चांदी की) पहन कर नमाज़ पढ़ सकती है।
सवाल : नकली जेवर और घड़ी(चेन वाली) पहन कर नमाज़ पढना कैसा है ?
जवाब - नकली जेवर और घड़ी (चेन वाली) पहन कर नमाज़ पढना मकरुहे तहरिमी
है।
सवाल – नमाज़ की हालत में अगर हैज़ आये तो नमाज़ पर क्या हुक्म है
?
जवाब – नमाज़ पढ़ते में अगर हैज़ आ गया तो नमाज़ टूट गई, जिस नमाज़
में हैज़ आया बस उसी नमाज़ को पाक होकर नमाज़ क़ज़ा अदा करना होगी।
सवाल – क्या वुजू करने के बाद नाख़ून पोलिस लगा कर नमाज़ अदा कर सकती
है और अगर नाख़ून पर मेहँदी लगी हुई हो तो उसका क्या हुक्म है ?
जवाब – वुजू करने के बाद नाख़ून पर नेल पोलिस लगाई है फिर नमाज़
अदा की तो नमाज हो जाएगी उस वुजू से जितनी भी नमाज़ अदा की सभी हो जाएगी, मेहँदी का
रंग नाख़ून पर लगा है तब भी पानी चमड़ी पर पहुँच जाता है जब पानी पहुच गया तो वूज़ू हो
जायेगा उससे नमाज भी हो जाएगी।
सवाल – खुले बालो में नमाज पढने का क्या हुक्म है क्या खुले
बालों में नमाज़ पढने से नमाज़ हो जाएगी ?
जवाब – खुले बाल अगर दुपट्टे से छूपे हुए है और दिखाई नही दे तो
नमाज हो जाएगी।
सवाल : दूध उबलने का खौफ हो या गोश्त तरकारी,
रोटी जल जाने का खौफ हो या कोई चीज़ चोर उचक्का ले भागे इन
सूरतों में नमाज़ तोड़ना क्या है ?
जवाब - दूध उबलने का खौफ हो या गोश्त तरकारी,
रोटी जल जाने का खौफ हो या कोई चीज़ चोर उचक्का ले भागे इन
सूरतों में नमाज तोड़ना जाइज़ है।
सवाल : सांप वगेरा के मारने के लिए जबकि ईजा का अंदेशा सही हो,
या कोई जानवर भाग गया उसको पकड़ने के लिए या बकरियों पर
भेड़िये या किसी जानवर के हमला करने के खौफ से नमाज़ तोड़ देना कैसा है ?
जवाब - सांप वगेरा के
मारने के लिए जबकि ईजा का अंदेशा सही हो, या कोई जानवर भाग गया उसको पकड़ने के लिए या बकरियों पर
भेड़िये या किसी जानवर के हमला करने के खौफ सड़ नमाज़ तोड़ देना जाइज़ है।
सवाल – नमाज की हालत में हो और ऐसे में छोटा बच्चा सामने आ कर
बेठ जाए तो क्या करे ?
जवाब – इस सूरत में अगर कोई और बच्चे को हटाने वाला न हो तो बच्चे
को सामने से हटा सकती है।
सवाल : नमाज़ के लिए कोई ऐसा पतला कपड़ा पहना जिसमे से सत्र(जिसे
छुपाना फ़र्ज़ है) दिखे और पतले दुप्पटे में से बाल की काली स्याही नज़र आने से नमाज़
होगी या नही ?
जवाब - नमाज़ के लिए कोई ऐसा पतला कपड़ा पहना जिसमे से सत्र दिखे
और औरत के पतले दुपट्टे में से बाल की काली स्याही नज़र आने से नमाज़ नही होगी।
सवाल – खवातीन नमाज़ पढ़ती है उसके बाद जानमाज को मोड़ कर रख देती
है यह कहकर की इस पर शेतान नमाज़ पड़ेगा क्या यह सही है ?
जवाब – इस ख्याल में मोड़ना की शेतान नमाज़ पड़ेगा यह यह गलत ख्याल
है शैतान तो नमाज़ पढने से हमे रोकता है हा युही जानमाज़ मोड़ कर रख दे तो कोई हर्ज
नही।
सवाल – औरत का तरावीह पढ़ाने का क्या
हुक्म है ?
जवाब – औरत को इमाम बनाकर औरतों को
तरावीह की जमात कराना मकरूह ए तहरिमी है लिहाजा तरावीह पढने वाली औरत अपनी अपनी
नमाज अदा करे।
सवाल – क्या औरत ईद की नमाज़ पढ़ सकती है ?
जवाब – औरते ईद की नमाज नही पढ़ सकती क्यूंकि ईद की नमाज़ के लिए
जमात शर्त है और औरतो की जमात नही होती।
सवाल – क्या तरावीह की नमाज़ औरतो को भी पढना चाहिए ?
जवाब – जी हा औरतो
को भी तरावीह की नमाज़ पढना चाहिए क्यूंकि ये सुन्नते मोअक्किदा है इसे नही छोड़ना
चाहिए।
सवाल – बिना अस्तीन के कुर्ते, ब्लाउज, या फ्रॉक में नमाज़ पढने
से नमाज होगी या नही ?
जवाब – ऐसी सूरत में अपनी बाहों को अगल चादर से छुपाना जरुरी है
अगर चादर वगेरा से छुपाना भूल गयी तो नमाज़ नही होगी।
सवाल – नहा कर आई और बाल उलझे हुए है और गिले है क्या उसी हालत
में नमाज़ हो जाएगी ?
जवाब – नमाज हो जाएगी शर्त यह है की बाल नमाज में पूरी तरह छुपे
हुए हो।
सवाल – कुछ ख्वातीन को सफ़ेद पानी की शिकायत होती है क्या वह
उसमे नमाज पढ़ सकती है ?
जवाब – हा नमाज पढ़ सकती है इसमें कोई हर्ज नही।
सवाल – बच्चे ने घर में ज़मीन पर फर्श पर पेशाब कर दिया और वो
जगह सुख गयी अब वो जगह पाक है या नापाक वहा नमाज़ पढ़ सकते है या नही ?
जवाब – वो जमीन फर्श सूखने से पाक हो गयी जबकि नजासत का असर (यानि
रंग और बू) ख़त्म हो गया हो और वह नमाज पढना भी जाईज़ है।
सवाल – बच्चे ने पेशाब कर दिया या फिर किसी जानवर के पेशाब के
छींटे कपडे पर गिर गये या फिर कोई नजासत कपड़ो पर लग गई तो क्या बिना नहाये नमाज़
नही पढ़ सकती नहाना जरुरी है?
जवाब – हर नापाकी पर गुस्ल फर्ज नही होता है सिर्फ अपने कपडे
बदल ले या जिस हिस्से पर नापाकी लगी हो उसे धो कर दूर कर ले फिर नमाज पढ़ सकती है।
|
हैज़ व निफ़ास के मसाइल |
सवाल – लड़की कब बालिग होती है ?
जवाब – लड़की को जब हैज़ आना शुरू हो जाए तब से लड़की बालिग हो
जाती है।
सवाल - औरतों को जो खून आता है उसकी
कितनी किस्म है।
जवाब - तीन 1 हैज 2 निफ़ास 3 इसतिहाजा।
सवाल – हैज़ किसे कहते है ?
जवाब – सहतमंद, बालिग औरत को हर माह आगे की राह से जो मामूली
खून आता है इसको हैज़ कहते है।
सवाल – निफ़ास किसे कहते है ?
जवाब – जब बच्चा पैदा होने के बाद आगे की राह से जो खून आता है
इसको निफ़ास कहते है।
सवाल – इस्तेहाजा किसे कहते है ?
जवाब – इस्तेहाजा इस खून कको कहते है जो हैज़ व निफ़ास की बयां
करदा तहरीफ़ के खिलाफ आये मसलन तीन दिन से कम और दस दिन से ज्यादा आने वाला खून हैज
नही इस्तेहाजा है, और नफास में चालीस दिन से ज्यादा आने वाला खून इस्तेहाजा है ।
31) सवाल – ख्वातीन के हैज़ के खून कितने रंग का होता है ?
जवाब – 6 छः रंग का होता है 1. सुरख 2.सियाह 3.खाकी यानि मटयाले
4. जरद 5.सब्ज 6.गदला।
सवाल : हैज की मुद्दत कितने दिन की होती है ?
जवाब - हैज की मुद्दत
कम से कम 3 तीन (दिन-रात) है और ज्यादा से ज्यादा दस दिन-रात है और दो
हैज़ के दरमियान औरत कम अज कम पंद्रह दिन पाक रहती है यानि एक हैज़ के बाद कम अज कम
पंद्रह दिन तक दूसरा हैज़ नही आता, और ज्यादा से ज्यादा पाक रहने की कोई हद मुक़र्रर
नही है के किसी औरत को सारी जिंदगी हैज़ न आए।
सवाल – हैज़ किस उम्र में आना शुरू होता
है ?
जवाब – शरीअत में हैज़ की कम से कम मुद्दत
9 बरस है यानि के लड़की अगर नो साल की उम्र को पहुँच जाए और इस के बाद इस को खून आए
तो हैज़ में शुमार होगा और अगर नो साल से पहले खून आए तो हैज़ में शुमार नही होगा।
सवाल – अगर किसी औरत को हैज़ आए और दस
दिन से मुकम्मल हो जाए तो दस दिन तो हैज़ का खून माना जायेगा लेकिन दस दिन के बाद
आने वाले खून को क्या कहते है ।
जवाब – अगर किसी औरत को दस दिन से
ज्यादा आये तो चूँकि हैज़ की मुद्दत ज्यादा से ज्यादा 10 दिन है तो दस दिन के बाद
आने वाले खून को इस्तेहाजा कहते है।
सवाल : बच्चे की पैदाइश के बाद जो खून आता है उसे निफ़ास कहते है
अगर वह 2 दिन बाद बंद हो जाये या फिर 40 दिन के बाद भी आता रहे तो क्या ख़्वातीन
पाक हो जाएगी ?
जवाब - बच्चे की पैदाइश के बाद जो खून आता हूं उसे निफ़ास कहते
है अगर वह 2 दिन बाद ही बंद हो जाये या फिर 40
दिन के बाद भी आता रहे जिस दिन से बंद हो जाये उस दिन से पाक
और 40 दिन के बाद भी आता रहे तो 40 दिन पूरे करने पर पाक है।
सवाल : निफ़ास की मुद्दत कितने दिन रात की होती है ?
जवाब - ज्यादा से
ज्यादा निफ़ास की मुद्दत 40 चालीस दिन है और कम की कोई हद नही अगरचे कुछ देर आकर खून
बंद हो जाए तो भी वह निफ़ास है और ये भी मुमकिन है की किसी औरत को बिलकुल निफ़ास न
आए।
सवाल : क्या कोई नापाक(हैज व निफ़ास) औरत तबर्रुक फातिहा का खाना
बना सकती है ?
जवाब - हा नापाक (हैज व
निफ़ास) औरत फातिहा का खाना बना सकती है।
सवाल : हैज व निफ़ास वाली कलमा शरीफ और दुरूद शरीफ पढ़ सकती है कि
नही ?
जवाब - हैज व निफ़ास वाली कलमा शरीफ और दुरूद शरीफ पढ़ सकती है।
सवाल - हैज व निफ़ास की हालत में औरत का क़ुरआन को देख कर पढना या
जबानी पढना या क़ुरआन को हाथ लगाना कैसा है ?
जवाब - हैज व निफ़ास की हालत में औरत का क़ुरआन को देख कर पढना या
जबानी पढना या क़ुरआन को हाथ लगाना हराम है।
सवाल - क्या हालते हैज में मसनून दुआए
पढ़ी जा सकती है ?
जवाब - कोई हर्ज नही मसनून दुआए जैसे
पानी पीने की खाना खाने की, सोने की, जागने की दुरूद शरीफ पढ़ सकती है।
सवाल - क्या हालते नापाकी हैज में औरत
नाखून या जैसे नाफ़ कर बाल साफ कर सकती है ?
जवाब - हालते नापाकी हैज में औरत नाखून
या जैसे नाफ़ कर बाल साफ करना मकरुहे तहरिमी है।
सवाल – हालाते हैज़ की हालत में क्या औरत मेहँदी लगा सकती है ?
जवाब – हा लगवा सकती है इसमें कोई हर्ज़ नही है।
सवाल – निफ़ास की मुद्दत ख़त्म होने से पहले खून बंद हो जाने पर
क्या गुस्ल कर पाक हो सकती है?
जवाब – हा निफ़ास की मुद्दत ख़त्म होने से पहले खून बंद हो जाए तो
गुस्ल कर ले पाक हो जाएगी।
सवाल – चालीस दिन से पहले निफ़ास का खून बंद हो जाए तो फिर नमाज
का क्या हुक्म है?
जवाब – अगर चालीस दिन से पहले खून निफ़ास का बंद हो जाए तो फ़ौरन
गुस्ल करले पाक हो जाएगी और नमाज़ अदा करे अगर गुस्ल नुकसान करता है तो तयम्मुम
करके नमाज़ पढना शुरू कर दे और हरगिज नमाज़ क़ज़ा न होने दे।
सवाल – हैज़ की हालत में निकाह हो जायेगा या नही ?
जवाब – हालते हैज़ में निकाह हो जायेगा।
सवाल – हैज ख़त्म हो जाने के बाद क्या बिना गुस्ल किये शोहर के
साथ सोहबत कर सकती है ?
जवाब – कर सकती है जाईज है मगर बेहतर यही है की गुस्ल करने के
बाद शोहर के साथ हमबिस्तरी की जाए।
सवाल – औरतो का जब हैज व निफ़ास बंद हो तो क्या गुस्ल वाजिब है ?
जवाब – औरतो का जब हैज व निफ़ास का खून बंद हो तो गुस्ल वाजिब है।
सवाल – जब हैज आये उस वक़्त नमाज़ और रोज़े रखने दुरुस्त है या नही?
जवाब – हैज़ के ज़माने में नमाज़ और रोज़ा रखना दुरुस्त नही फर्क
इतना है की नमाज़ तो बिलकुल माफ़ हो जाती है, पाक होने के बाद भी इस की कज़ा वाजिब
नही होती, लेकिन रोज़ा माफ़ नही होता पाक होने के बाद कज़ा रखनी पड़ेगी।
|
निकाह के मसाइल |
सवाल – क्या कोई ज्यादा उम्र की औरत कम उम्र के मर्द से निकाह कर
सकती है ?
जवाब – जाईज है इसमें कोई हर्ज नही निकाह कर सकती है।
सवाल – किसी और बिरादरी (जाति) में निकाह होगा की नही ?
जवाब – हो जायेगा किसी भी जाति में निकाह कर सकते है।
सवाल – बेवा औरत किसी दूसरी बिरादरी में अपने से कम उम्र के
मर्द के साथ निकाह कर सकती है या नही ?
जवाब - कर सकती है निकाह हो जायेगा।
सवाल – सुहागरात के आदाब क्या है ?
जवाब - जब दुल्हा, दुल्हन कमरे में जाए और
तन्हाई हो तो बेहतर यह है कि सबसे पहले दोनो वुज़ू कर और फिर जानमाज या कोई पाक
कपडा बिछा कर दो रकाअत नमाज नफिल शुकराना पढ़े । अगर दुल्हन हैज़ (माहवारी) की हालत
में हो तो नमाज़ न पढ़े लेकिन दूल्हा जरुर पढ़े ।
नमाज की निय्यत – निय्यत की मै ने दो रकाअ़त नमाज़ नफील शुक्राने की वास्ते अल्लाह तआला के
मुँह मेरा काबा शरीफ के अल्लाहु अक़बर।
फिर जिस तरह
दूसरी नमाज़े पढ़ी जाती है उसी तरह येह नमाज़ भी पढ़ें। (यानि अलहम्दु शरीफ फिर उस
के बाद कोई एक सूराह मिलाए) नमाज के बाद इस तरह दुआ करें...
ऐ अल्लाह
तेरा शुक्र व एहसान है के तू ने हमें यह दिन दिखाया, और हमें इस खुशी व नेमत से नवाज़ा और हमे अपने प्यारे हबीब ﷺ की इस सुन्नत पर अमल करने की तौफ़ीक़
अता फरमाइए।
अल्लाह मुझे इससे और इसको
मुझसे रोजी अता फरमा हमपर अपनी रहमत और हमेशा कायम रख, और हमे ईमान के साथ सलामत रख आमीन
दुआ और नमाज के बाद दुल्हा, दुल्हन सुकून व इत्मीनान से बैठ जाए फिर उसके बाद दुल्हा अपनी दुल्हन के
पेशानी थोड़े से बाल अपने सीधे हाथ मे नर्मी के साथ मुहब्बत भरे
अंदाज़ में पकड़े और येह दुआ पढ़े
“अल्लाहुम्मा इन्नी अस
अलुका निम खैरे-ह-व-खैरे-म-जबलतहा अलैहि व आउजू बिका मिन शर्री हा व शर्री मा जबलतहा
अलैह”
सवाल – सोहबत करने का इस्लामी तरीका क्या है ?
जवाब - इस बात का हमेशा ख़्याल रखे कि जब कभी भी सोहबत का इरादा
हो तो येह जान ले के कही औरत हैज़ (माहवारी) की हालत में तो नही है ? चुनानचे औरत
से साफ साफ पूछ ले, अगर औरत हैज़ की हालत में हो तो हरगिज हरगिज सोहबत न करे कि इस
हालत में औरत से सोहबत करना बहुत बड़ा गुनाह है।
औरत का
फ़र्ज़ है कि अगर वोह हैज़ की हालत में हो तो बे झिझक अपने शौहर को बता दे।
अक्सर
औरतें शादी की पहली रात (सुहागरात) को शर्म की वजह से बताती नही है या कह भी दे तो
मर्द सब्र नही कर पाते और सोहबत कर बैठते है और फिर इस जल्दबाज़ी की सज़ा उम्र भर
डॉक्टरों और हकीमों की फ़ीस की शक़्ल में भुगते फिरते हैं। लिहाजा मर्द और औरत
दोनों को ऐसे मौक़ों पर सब्र से काम लेना चाहिये।
कुछ मर्द
मतलब प्रस्त होते हैं। उन्हें सिर्फ़ अपने मतलब से ही लेना होता है वोह दूसरे की
खुशी को कोई अहमियत नहीं देते वोह येह ही वुसूल अपनी बीवी के साथ भी रखते हैं
चुनान्चे जब वह सोहबत का इरादा करते है तो येह नही देखते कि औरत सोहबत करना चाहती
है या नही वोह कही किसी बीमारी या दुख, दर्द, मुब्तिला तो नही है। इन सब से उन्हें कोई मतलब नहीं होता वोह बेसब्री के साथ
औरत पर टूट पड़ते है और अपना मतलब पूरा कर लेते इस हरकत से औरत की निगाह में मर्द
की इज्जत कम हो जाती है और वोह मर्द को मतलब प्रस्त समझने लगती है, साथ ही सोहबत
का वो लुफ्त हासिल नही हो पाता।
रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया “तुम मे से कोई
अपनी बीवी के पास जाए तो पर्दा कर ले और गधो की तरह न शुरू हो जाए”
हदीस सैय्यदना
हज़रत इमाम गजाली रदीअल्लाहु तआला अन्हो से रिवायत है की नबी ए करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया “मर्द को न चाहिए
कि अपनी औरत पर जानवर की तरह गिरे, सोहबत से पहले क़ासिद
(पैगाम पहुचाने वाला) होता है,
सहबा
किराम ने अर्ज किया या रसूलुल्लाह वो
कासिद क्या है ? आप ने इरशाद फरमाया वोह बोस व किनार (चुम्मन KISS) वगैरा है
(यानि सोहबत से पहले चुम्मन वगैरा से औरत को राजी करो)
सवाल – शोहर अपनी बीवी को हमबिस्तरी के लिए बुलाये और बीवी मना
कर दे तो क्या यह सही है ?
जवाब – हरगिज नही यह गुनाह का सबब होगा क्यूंकि मफहूम ए हदीस है कि
शोहर अपनी बीवी को जिस वक़्त बिस्तर पर बुलाये और वो आने से मना कर दे तो उस औरत पर
अल्लाह के फ़रिश्ते सुबह तक लानत करते रहते है।
सवाल – क्या शोहर अपनी बीवी के पिस्तान को बोसा व मुह में ले
सकता है ?
जवाब - सोहबत करते वक्त़ अपनी बीवी के पिस्तान (स्तन) मुंह में
लेना जाईज़ है बल्कि नेक निय्यत से हो तो सवाब की उम्मीद है, लेकिन ख़्याल रहे कि
औरत का दूध हलक मे न जाए। अगर हल्क में दूध आ गया तो फौरन थूक दे जान बूझकर दूध
पीना ना जाइज़ व हराम है।
सवाल – सोहबत का कोई वक़्त मुक़र्रर है ?
जवाब - शरीअ़ते इस्लामी मे सोहबत करने के लिए कोई ख़ास वक्त़
नही बताया गया है। शरीअ़त मे दिन और रात के हर हिस्से में सोहबत करना जाइज़ है, लेकिन बुजुर्गों ने कुछ ऐसे अवक़ात (वक्त) बताए है जिन में सोहबत करना सेहत के
लिए फ़ायदेमन्द है।
हदीस हज़रत
इमाम ग़ज़ाली ने अपनी मशहूर किताब “इहयाउल उलूम” में उम्मुलमोमिनीन हजरत आएशा
(रदीअल्लाहु अन्हा) से रिवायत किया है कि फरमाती है “रसूले करीम ﷺ रात के आख़िरी हिस्से में (तक़रीबन
रात के 2 : 30 बजे से लेकर फ़जर की अ़जान से पहले) में जब वित्र की नमाज़
पढ़ चुके होते तो अगर आप को अपनी बीवी की हाजत होती (यानि बीवी से सोहबत का इरादा
होता) तो उन से सोहबत फरमाते।
सवाल – पखाने के मक़ाम में सोहबत करना कैसा ?
जवाब - कुछ कम अक़्ल जाहिल हालते हैज़ मे औरत से उस के पीछे के
मुक़ाम (पखाने के मुकाम) में सोहबत करते है और दीन व दुनिया दोनों अपने ही हाथों
से बरबाद करते है होश में आइये यह एक मामूली सा गुनाह नही बल्कि शरीअत में सख्त
हरम और गुनाहे कबीरा है बल्कि कुछ हदीसो में तो इस फेल को को कुफ़्र तक बताया गया
है।
सवाल – शोहर बीवी के हमबिस्तरी करने से सरे कपडे नापाक हो जाते
है ?
जवाब – पूरी कपडे नापाक नही होंगे सिर्फ जिस कपडे पर जहा नापाकी
लगी हो उतना हिस्सा नापाक होगा हमबिस्तरी करते वक़्त कपड़ो को अलग रख दिया जाए जिससे
की कपडे नापाक न हो।
सवाल – जिस जगह या जिस बिस्तर पर हमबिस्तरी की जाती है क्या वह
नापाक हो जाती है ?
जवाब – जिस जगह पर या जिस बिस्तर पर हमबिस्तरी की जाए तो वह जगह
पाक ही रहती है जहा सिर्फ नजासत लग जाए बस वही हिस्सा नापाक होगा।
सवाल – कमरे में कुरआन शरीफ हो या इस्लामी किताबे हो तो वहा
हमबिस्तरी कर सकते है या नही ?
जवाब - कुरआन शरीफ हो या इस्लामी किताबो को ढँक कर पर्दे में
रखे और खुद भी पर्दा करके ही हमबिस्तरी करे।
सवाल – कुछ ख्वातीन को सोहबत के बाद मनी नही आती है काफी वक़्त
बाद मनी आती है अब यदि सोहबत के बाद गुस्ल कर लिया और बाद में मनी आई तो फिर क्या
फिर से गुस्ल करना होगा?
जवाब – जी हा फिर से गुस्ल करना होगा।
सवाल – मनी, मजी और वदी किसे कहते है ?
जवाब – 1. मनी – मनी (वीर्य)
वह है जो शहवत (मजे) के साथ निकलती है।
2. मजी - वोह है जो बगै़र मज़े के ऐसे ही बेफुज़ूल बेकार ही "ऊजु-ए-तानासुल (लिंग) पर चीपचीपा या मद्दानिकलता है।
3. वदी - गाढ़े पेशाब को कहते है।
सवाल - क्या रमज़ान के महीने में हमबिस्तरी कर सकते है ?
जवाब – हा रमजान के महीने में हमबिस्तरी कर सकते है इसमें कोई
हर्ज नही अगर रोज़े की हालत में सोहबत की तो रोज़ा टूट जायेगा और कफ्फारा भी अदा
करना होगा।
सवाल : हैज व निफ़ास की हालात में जिमाअ(हमबिस्तरी) करना कैसा है ?
जवाब - हैज व निफ़ास की हालत में जिमाअ करना हराम है, हमबिस्तरी
यानी जिमाअ इस हालत में हराम है। उसे जायज़ जानना कुफ्र है और हराम समझकर, कर लिया
तो सख्त गुनाह की बात है।
उस पर तौबा फर्ज है अब अगर
शुरू दिनों में किया तो एक दीनार और आखिर दिनों में किया तो आधा दीनार खैरात करना
मुस्तहब है।
सवाल – जिस औरत से जिना किया और हमल ठहर गया हो वो प्रेगेनेंट हो
चुकी हो तो क्या उससे निकाह जाईज़ है ?
जवाब – जिना इस्लाम में बहुत बड़ा गुनाह है लेकिन अगर किसी औरत
से जिनाकारी सरजद हुई, उससे निकाह किया जाए तो निकाह सही है निकाह अगर उसी शख्स से
हो जिसका हमल है तो निकाह के बाद वह दोनों साथ रह सकते है सुहबत व हमबिस्तरी भी कर
सकते है और किसी दुसरे से निकाह हो तो निकाह हो जायेगा लेकिन जबतक बच्चा पैदा न हो
जाए दोनों को अलग रखा जाए और उनके लिए हमबिस्तरी जाईज नही।
सवाल – ह़ामिला (ह़मल वाली ) औरत से शादी करना कैसा है?
जवाब - ह़ामिला औरत अगर तलाक़ शुदा है तो उसकी शादी नहीं हो
सकती जब तक बच्चा न पैदा हो जाए कियोंकि उसकी इद्दत बच्चा पैदा होने के बाद पूरी
होगी।
सवाल – दो सगे भाई के लड़का लड़की का निकाह हो सकता है या नही ?
जवाब – हा कर सकते है निकाह हो जायेगा।
सवाल – दो सगी बहन के लड़का लड़की का निकाह हो सकता है या नही ?
जवाब – हा कर सकते है निकाह हो जायेगा।
सवाल – सगे मामू, खालू, फुप्पो के लड़के लड़की से निकाह हो सकता
है या नही ?
जवाब - हा कर सकते है निकाह हो जायेगा।
सवाल – मर्द ने अपनी साली से जिना किया तो क्या उसकी बीवी से
उसका निकाह टूट जायेगा ?
जवाब – साली से जिना करना हराम व सख्त गुनाह है उसे चाहिए की वो अपने गुनाह से तौबा करे और जिना
करने से निकाह पर कोई असर नही होगा निकाह दुरुस्त रहेगा।
सवाल – कोई मर्द अपनी सास से जिना कर ले तो उसकी बीवी उसके
निकाह में रहेगी या नही ?
जवाब – निकाह तो नही टूटेगा जबतक की वह उसे तलाक न दे मगर उसकी
बीवी उस पर हमेशा हमेशा के लिए हराम हो जाएगी अब कोई रास्ता नही बचेगा उसे हलाल
करने का अब इस हालत में उसे तलाक देदे ताके वो दूसरी जगह निकाह कर सके।
सवाल – ससुर अगर अपनी बहूँ से जिना करले तो उसके बेटे का निकाह बाकि
रहेगा या नही ?
जवाब – ससुर ने अगर अपनी बहूँ से जिना कर लिया तो बेटे के लिए
हराम हो जाएगी अब कोई रास्ता नही बचेगा उसे हलाल करने का अब इस हालत में उसे तलाक
देदे ताके वो दूसरी जगह निकाह कर सके।
सवाल – क्या तलाक शुदा या इनके शोहर के इन्तेकाल के बाद समधन,
चच्ची और ममानी से निकाह होगा की नही ?
जवाब – समधन चच्ची और ममानी से निकाह में कोई हर्ज नही जाईज़ है
जबकि उनके शोहर ने उन्हें तलाक दे दी हो या वो इन्तेकाल कर चुके हो तो इद्दत के
बाद निकाह जाईज है।
सवाल – मर्द अपनी औरत से चार माह से ज्यादा वक़्त तक दूर रहा
सोहबत न की तो क्या निकाह टूट जाएगा ?
जवाब – मर्द अपनी औरत से चाहे कितने ही वक़्त तक दूर रहे मगर
जबतक वह तलाक नही दे देता तबतक तलाक नही होगा।
सवाल – मर्द ने अपनी औरत से झगडे में कह दिया की तेरा और मेरा
कोई रिश्ता नही तो क्या निकाह टूट जायेगा ?
जवाब – निकाह सही रहेगा इससे निकाह नही टूटेगा।
सवाल – अगर एक औरत को तलाक दी जाए तो वह औरत तलाक देने से कितनी
मुद्दत बाद निकाह कर सकती है ?
जवाब – तलाक के बाद तीन हैज (माहवारी) शुरू हो कर ख़त्म हो जाए
और हैज़ वाली न हो तो तीन महीने और हमिला (पेट वाली) हो तो जब बच्चा पैदा हो जाए उसके
बाद निकाह कर सकती है।
सवाल - अपने शोहर के इंतेक़ाल के बाद औरत को कितने दिन की इद्दत
गुजारना होगी?
जवाब – शोहर के इन्तेकाल के बाद बीवी को इद्दत गुजारना होती है
जो की चार माह दस दिन होती है और इद्दत के दिनों में घर से बाहर निकलना गुन्हा है।
|
मय्यत के मसाइल |
सवाल – क्या शोहर अपनी बीवी को गुस्ले मय्यत दे सकता है ?
जवाब - शोहर अपनी बीवी को ग़ुस्ले मय्यत नही दे सकता है।
सवाल – क्या औरत अपने इन्तेकाल शुदा
शोहर को गुस्ल दे सकती है ?
जवाब – हा औरत अपने इन्तेकाल हुए शोहर
को गुस्ल दे सकती है।
सवाल - क्या ख़्वातीन का कब्रिस्तान में जाना जाइज़ है ?
जवाब – ख्वातीन का कब्रिस्तान जाना मना है।
सवाल – अगर किसी की मौत का वक़्त करीब हो तो यासीन शरीफ की
तिलावत और अगरबत्ती जलाना कैसा है ?
जवाब – जब मौत का वक़्त करीब हो और सब अलामते पाई जाए तो यासीन
शरीफ की तिलावत और खुशबु करना मुस्तहब है मसलम लौबान अगरबत्ती लगाये।
सवाल – मय्यत को नहलाने का तरीका क्या है ?
जवाब - मय्यत को
नहलाने का तरीका यह है कि जिस तख्त पर नहलाने का इरादा हो उस तख्त पर खुश्बू की
तीन, पांच या सात बार धुनी दे। और फिर तख्त पर मय्यत को लिटा कर
नाफ़ से लेकर घुटनों तक कपड़े से छुपा दे, फिर नहलाने वाला अपने हाथ मे कपड़ा लपेट कर पहले इस्तीनजा कराए। फिर वज़ू कराए।
यानी पहले मुँह धोए फिर कुहनियों समेत हाथ धोए। फिर सिर का मसह करे फिर पांव धोए।
मगर मय्यत के वज़ू में गट्टों तक हाथ धोना, कुल्ली करना, नाक में पानी डालना नही है कोई कपड़ा या रुई की फुरेरी भिगो
कर दांतो, मसूड़ो, होटों, और नथनों पर फेर दे, फिर सिर और दाढ़ी को गुले खैरू या पाक साबुन से धोए वरना खाली पानी भी काफी है।
फिर मय्यत को पहले बाये करवट पर लिटा कर पूरे बदन पर बेरी के पत्तों का गर्म किया
पानी बहाए। फिर दायीं करवट पर लिटा कर उसी तरह पानी बहाए। फिर आखिर में सर से पांव
तक काफूर का पानी बहाए। फिर बदन को किसी पाक कपड़े से पोछ कर सूखा दे, एक मरतबा सारे बदन पानी बहाना फ़र्ज़ है और तीन मर्तबा सुन्नत है। जहाँ मय्यत को
ग़ुस्ल दें मुस्तहब है कि वहाँ पर पर्दा कर लें। नहलाने वाली और मददगार के सिवा कोई
दूसरी न देखे, मय्यत को नहलाने वाली पाक साफ हो नापाक या हैज़ वाली औरत ने गुस्ल
दिया तो मकरूह है, मगर गुस्ल हो जायेगा। नहलाने वाली औरत ऐसी हो जो अच्छी तरह
गुस्ल दे । अच्छी बात देखे जैसे चेहरा चमक उठा, या मय्यत के बदन से खुशबू आयी तो उसे लोगों के सामने बयान करें और कोई बुरी
बात देखे तो किसी से न कहे।
सवाल – औरतो का मसनून कफ़न क्या है ?
जवाब - औरत के लिये कफ़ने सुन्नत पाँच कपड़े हैं चादर, तहबन्द, कुर्ता, ओढ़नी, सीना बन्द।
सवाल – औरत को कफनाने का तरीका क्या है ?
जवाब -
पहले चादर यानी लिफाफा बिछाएं उसके बाद सीना बंद रखें
उसके ऊपर इज़ार फिर कमीज़, फिर मैयत को कफ़न पर ले जाकर पहले कुर्ता पहनाऐं और
सर के बालों के दो हिस्से करके कुर्ते के ऊपर सीने पर डाल दें एक हिस्सा दाहिनी
तरफ और एक हिस्सा बाईं तरफ, उसके
बाद सरबंद को सर और बालों पर डाल दें,उसको ना बांधें और ना लपेटें,फिर इज़ार लपेट दें पहले
बाईं तरफ फिर दाहिनी तरफ, उसके
बाद सीना बंद बांधें,फिर चादर लपेटें, पहले बाईं तरफ फिर दाईं तरफ, उसके बाद पैर , सर और कमर के पास से कफन को पट्टियों से बांध दें, ताकि
हवा वगैरा से रास्ते में ना खुले!
सवाल – मय्यत को गुस्ल देने के बाद क्या गुस्ल करना जरुरी है ?
जवाब – मय्यत को गुस्ल देने के बाद गुस्ल करना अच्छा है मगर जरुरी
नही की जिस ने मय्यत को गुस्ल दिया हो वह बाद में खुद गुस्ल करे इसको जरुरी ख्याल
करना गलत है।
|
कुछ अन्य मसाइल |
सवाल – क्या ख्वातीन अपनी भावे (आईब्रो) बनवा सकती है ?
जवाब – नहीं बनवा सकती हराम है।
सवाल - क्या ख़्वातीन इत्र लगा सकती है ?
जवाब - बन सँवरकर घूमने फिरने के साथ खुशबू लगाकर पार्को,
आम रास्तों या गैर मर्दो के पास या आम महफिलों में चाहे
मस्जिद ही में क्यों न हो, वहाँ जाना भी सख्त मना है और इसको भी इस्लाम ने ज़िना कहा
है। एक हदीस में है हुजूर ने फरमायाः औरत जब इत्र लगाकर किसी महफिल से गुज़रती है,
वो ऐसी ऐसी यानी जानिया है। हज़रत अबू हुरैरा रदियल्लाहु
तआला अन्हु के पास से एक औरत गुज़री जिसके बदन से खुशबू फूट रही थी। आपने दरयाफ्त
कियाः मस्जिद से आ रही हो ? कहाः हाँ, फ़रमायाः खुशबू मले हुए हो ?
कहाः हाँ । तो आपने फ़रमायाः मैंने अपने महबूब सरकारे दो
आलम सय्यिदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम को फरमाते हुए सुना कि जो औरत
खुशबू लगाकर मस्जिद आती है उसकी नमाज़ अल्लाह तआला कुबूल नहीं फ़रमाता।
चुनान्चे ये सुनकर वो पलटी
और अच्छी तरह अपने कपड़े को धो डाला। (इब्ने कसीर) अपने शोहर के लिए
लगा सकती है उसकी खुशबु किसी गैर मेहरम तक न जाए|
और जाहिलीयत का तरीका ये
भी है कि औरत इतने बारीक कपड़े पहने जिससे बदन झलकता हो। (अहकामुल कुरआन / इब्नुल
अरबी, बहारे शरीअत, हिस्सा 2)
यह एक बहुत बड़ी गलत फहमी
है, यह गैर मुस्लिम हिन्दुओ का तरीका है की हैज व निफ़ास औरत को बुरा जाना जाता है
इन दिनों में उन्हें किचन से भी दूर रखा जाता है इससे हमें बचना चाहिए।
सवाल – जब जुड़वाँ बच्चे पैदा हो तो किस बच्चे की पैदाइश से
निफ़ास के खून की मुद्दत को माना जायेगा ?
जवाब – पहले बच्चे की पैदाइश से ही निफ़ास के खून को मुद्दत को
माना जायेगा।
सवाल – क्या औरते मेकअप कर सकती है ?
जवाब- हा कर सकती है मगर वह किसी और को दिखाने के लिए नही वह मेकअप
खुद के लिए हो या फिर शोहर के लिए किया जाए तो और साथ ही इस बात का ध्यान रखना
होगा की जो सामान आप इस्तेमाल कर रही है मेकअप करने के लिए उसमे कुछ हरम चीज़ तो
मिली हुई नही है।
सवाल – क्या औरत बालों में खिजाब या ब्लैक (काला) कलर लगा सकती
है ?
जवाब – नहीं लगाना चाहिए मना है, मेहँदी लगाना जाईज है हा अगर
कोई किसी वजह से लगाये तो लगा सकती है।
सवाल – क्या ख्वातीन फातिहा दे सकती है
जवाब – हा औरत फातिहा दे सकती है इसमें कोई हर्ज़ नही।
सवाल – क्या ख्वातीन जानवर को जिबह कर सकती है ?
जवाब – जी हा ख्वातीन कुरबानी का जानवर हो या कोई दूसरा जानवर
जिबह कर सकती है इसमें कोई हर्ज़ न है मगर जिबह के मसाइल का इल्म होना चाहिए।
सवाल - शरीयत में बच्चे को कितनी उम्र
तक दूध पिलाना दुरुस्त है ?
जवाब - 2 साल तक कि उम्र तक बच्चे को दूध पिला सकती है।
सवाल - क्या औरत सर के बाल कटवा सकती
है ?
जवाब – औरत को सर के बाल कटवाना मना है।
सवाल - क्या औरत आइब्रो (भावे) बनवा
सकती है?
जवाब - नही बनवा सकती सख्त गुनाह है।
सवाल - क्या औरत लिपिस्टिक लगा सकती है ?
जवाब – लीपिस्टिक लगाना जाईज़ नही मगर सिर्फ शोहर के लिए लगा
सकती है।
सवाल – क्या औरत चूड़ी पहनाने वाले के हाथो चूड़ी पहन सकती है ?
जवाब – औरत का गेर मेहरम के हाथ से चूड़ी पहनना हराम है।
सवाल – औरत का बजने वाले (आवाज़ करने वाले) जेवर पहनना कैसा है ?
जवाब – बजने वाले जेवर औरत इस हालत में पहन सकती है की उसकी
आवाज़ किसी गेर मेहरम तक न जाए तो जाईज है।
सवाल – तलाकशुदा औरत को कितने दिन तक की इद्दत गुजारना होगी ?
जवाब – जिस औरत को तलाक दी गयी अगर वो हमिला औरत है तो जब तक
बच्चा पैदा नही जो जाता तबतक इद्दत गुजारना होगी, और अगर हैज़ आता है तो तीन हैज़
मुकम्मल होने तक इद्दत गुजारना होगी और जिन्हें हैज़ नही आता है उन्हें तीन महीने
इद्दत गुजारना होगी।
सवाल - औरत को किन रिश्तेदारों से पर्दा करना चाहिए और किन
रिश्तेदारों से नही?
जवाब – औरत अपने मेहरम मर्दों से पर्दा नही करेगी और औरत का
मेहरम वो होता है जिससे हमेशा के लिए निकाह हराम हो (जैसे-अबू अजदाद, बेटे,औरतो के
भाई, भांजे भतीजे, चाचा और मामू, दूध का रिश्ता इत्यादि) ।
सवाल - क्या औरत बच्चे के कान में आज़ान दे सकती है ?
जवाब – जी हा औरत बच्चे के कान में आजान दे
सकती है इसमें कोई हर्ज़ नही है।
सवाल - क्या औरत किसी नमेहरम को सलाम कर सकती है या नही ?
जवाब – गैर नमेहरम (अजनबी मर्द) को सलाम नही करना सकती है, मगर
बदगुमानी और किसी तरह के फितने से बचने के लिए सलाम का जवाब दे सकती है।
सवाल - क्या औरत दरगाह मज़ारात पर हाज़री देने के लिए जा सकती है ?
जवाब- औरत पर लानत होती है अल्लाह तआला और फ़रिश्ते की लानत होती
है जब घर से बाहर निकलती है तो सब तरफ से शैतान घेर लेता है जब मजारात पर पहुचती
है तो साहिबे मज़ार की रूह उस पर लानत करती है जबतक वापिस आती है तबतक अल्लाह तआला की
लानत में होती है।
सवाल - क्या औरत मिलाद और नात पढ़ सकती है ?
जवाब – पढ़ सकती है मगर औरत की आवाज़ अगर किसी गेर महरम को
सुनाई दी तो सवाब नही गुनाह होगा।
सवाल – कुछ लोगो को हाज़री आती है बहुत सारे लोग औरतें उनके पास
जाती है की उन्हें किसी वली की हाज़री (सवारी) आती है क्या यह सही है ?
जवाब – यह सब जहिलाना बाते है वली किसी के जिस्म में नही आते है
या तो वो झूट बोल रहे होते है या फिर उन पर जिन जिन्नात का असर होता है ऐसे लोगो
से बचना चाहिए।
सवाल – क्या असर के बाद घर में झाड़ू दे सकती है ?
जवाब – हा लगा सकते है इसमें कोई हर्ज नही किसी भी वक़्त झाड़ू
लगाने में कोई हर्ज़ नही मगर रात में झाड़ू सिर्फ जरुरत के हिसाब से ही दे अपनी आदत
न मनाये बुजुर्गो ने एहतियात बरतने के लिए कहा है की रात में झाड़ू न लगाये।
सवाल – औरतो को आजान का जवाब देना चाहिए या नही ?
जवाब – औरतों को भी आजान का जवाब देना चाहिए।
सवाल – क्या औरत अपने शोहर का नाम ले सकती है या फिर नाम से
पुकार सकती है ?
जवाब – औरत अगर शोहर का नाम लेती है और शोहर को बुरा लगता हो और
उनके खानदान में भी इस तरह का रिवाज न हो तो फिर नाम लेना गुनाह होगा, और अगर माहोल ऐसा
है की शोहर को भी बुरा न लगे खानदान में भी किसी को परेशानी न हो तो फिर ले सकती
है।
सवाल – औरतों के हाथ या पैर के नाख़ून छोड़ना केसा है?
जवाब – औरतो के हाथ या पैर के नाख़ून छोड़ने की 40 दिन से ज्यादा
की इजाजत नही।
सवाल – औरतें मन्नत के नाम पर अपने लड़के के कान छिदवा देती है
क्या ऐसा करना सही है ?
जवाब – जी नही यह जहालत है ऐसा नही करना चाहिए।
सवाल – कुछ ख्वातीन घर में कुरान की तिलावत करती है तो कुरान को
या जो सिपारा पढ़ रही होती है उसे अपनी रानो पर रख कर पढ़ती है क्या यह सही है ?
जवाब – यह तरीका सही नही है यह बेअदबी है।
सवाल – जब औरत सर में कंघी करती है तो औरतें कहती है के बाल फेंकना
नही चहिये इन को इक्टठा करके कब्रिस्तान में दबा देना चाहिए ?
जवाब – औरत के सर के बाल भी सतर में दाखिल है और जो बाल कंघी
में आजाते है इन को देखना भी न मेहरम को जाईज नहीं, इस लिए इन बालो को फेंकना नही
चाहिए बल्कि किसी जगह दबा देना चाहिए, कब्रिस्तान में दफनाना जरुरी नही।
सवाल – औरत को भी आजान का जवाब देना चाहिए या नही ?
जवाब – जी हा मगर हैज़ व निफ़ास की हालत में जवाब न दे।
सवाल – वाशिंग मशीन में पाक और नापाक कपडे एक साथ दोनों से पाक
हो जायेंगे ?
जवाब – नही पाक और नापाक कपड़ो को अगर एक साथ धो दिया तो पाक
कपडे भी नापाक हो जायेंगे।
सवाल – सोलह सय्यद का रोज़ा रखना कैसा है ?
जवाब – सोलह सय्यद का रोज़ा रखना दुरुस्त नही है इससे बचना चाहिए।
सवाल – सोलह सय्यद की किताब, दस बीवियों की किताब, नूर नामा,
अहद नामा पढना केसा है?
जवाब – इन किताबो की कोई अस्ल नही है इसमें दिए गये वाकियात मनघडत
है गुन्हेगार होगी।
सवाल – क्या इस्लाम में बद सगुनी होती है? जैसे छींक आने पर कोई
काम रोक देना, बिल्ली रास्ता काट जाए, दूध का उबल कर गिर जाना और भी बहुत सी बाते
इनकी क्या अस्ल है ?
जवाब - इस्लाम में बद सगुनी नही होती है यह सिर्फ जहालत है।
सवाल : क्या ख़्वातीन जैरे नाफ़ के बाल रेजर से दूर कर सकती है ?
जवाब - ख़्वातीन जैरे नाफ़ के बाल रेजर से दूर कर सकती है इसमे कोई
हर्ज नही है।
सवाल: जिस्म पर मौजूद गैर जरूरी बाल को साफ करने की
मुद्दत(ज्यादा से ज्यादा) कितने दिन तक कि होती है ?
जवाब - जिस्म पर मौजूद गैर जरूरी बाल को साफ करने की मुद्दत
(ज्यादा से ज्यादा) 40 चालीस दिन की होती है।
सवाल : क्या बच्चे को दूध पिलाने से रोज़ टूट जाता है ?
जवाब - बच्चे को दूध पिलाने से रोज नही टूटता है।
सवाल – टॉयलेट पखाने में थूकना कैसा है ?
जवाब – पखाने में थूकना मना है की मुसलमान का मुंह कुरान ए करीम
का रास्ता है इससे जिक्र इलाही करता है तो उसका लुआब (थूक) नापाक नही रखना चाहिए अलबत्ता
वहा की दीवारों वगेरा जहा नजासत न हो वहा थूकने में हर्ज नही।
सवाल – अगर पानी में नाख़ून जाए तो क्या उस पानी को पी सकते है ?
जवाब – हा उस पानी को पी सकते है।
सवाल – शरीअत के दायरे में मन्नत किस तरह की रखना चाहिए ?
जवाब – मन्नते नफ्ली रोज़ा, नमाज, तिलावत, सदका, खैरात की रखना
चाहिए।
सवाल – औरतो को साड़ी पहनना जाईज़ है या नही ?
जवाब – साड़ी अगर इस तरह पहनी जाए के बे पर्दगी न हो तो जाईज़ और
बे पर्दगी हो तो नजाईज़ और निचे की जानिब से खुली रहने से कोई क़बाहत नही है इस लिए
के शरीअत ने तहबन्द और साड़ी पहन कर नमाज पढने को जाईज़ करार दिया है।
सवाल – कुरआन पढने में सिर्फ होंट हिलाना और आवाज़ न निकालना
कैसा है कुरआन पढने का सवाब मिलेगा या नही ?
जवाब – अक्सर देखा जाता है की कुरआन की तिलावत और नमाज़ में या
नमाज़ के बहत कुछ पढ़ते है तो सिर्फ होंट हिलती और आवाज़ बिलकुल नही निकलती है उनका
यह पढना पढना नही है और इस तरह पढने से नमाज नही होगी और इस तरह कुरआन की तिलावत की
तो तिलावत का सवाब भी नही मिलेगा । आहिस्ता पढने का मतलब यह है कि कम से कम इतनी
आवाज़ जरुर निकले की कोई रुकावट न हो तो खुद सुन ले।
सवाल – काला कपडा पहनना केसा है यह जाईज़ है या नही ?
जवाब - काला कपड़ा पहनना जायज़ है मगर अय्यामे मुह़र्रम में
पहनना मना है। आला हज़रत इमाम अहले सुन्नत इमाम अह़मद रज़ा खान मुह़द्दिसे बरेलवी अलेहिर्रह़मा फरमाते हैं कि मुह़र्रम में
खुसूसन 1 तारीख से 10 मुह़र्रम तक तीन रंग के
कपड़े न पहने जाऐं- सब्ज़ रंग का लिबास न पहनें जाऐं कि ये ताज़िया दारों का
तरीक़ा है- लाल रंग का लिबास न पहना जाए कि ये अहले बैत से अदावत रखने वालों का
तरीक़ा है और काले कपड़े न पहने जाऐं कि ये राफज़ियों का तरीक़ा है लिहाज़ा मुसलमानों
को इस से बचना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें