बुधवार, 24 मई 2023

औरतों के जदीद और अहम मसाईल

 

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🧕🏻 *औरतों के जदीद और अहम मसाईल*

             ✍🏻 *(सवाल - जवाब)* ✍🏻

                 ♻️ *पोस्ट :- 01* ♻️

🤔 *सवाल 01*➖क्या एक से ज्यादा नग वाली अंगूठी औरतों के लिए जाइज़ है जबके मर्दों के लिए ममनूअ् व नाजाइज़ है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ औरतों के लिए ऐसी अंगूठी पहनना जाइज़ है, अगरचे कई नग हों और उन्हीं के साथ मख़सूस है,

📘 _(रद्दुल मोहतार जिल्द 9 सफ़ह 521)_ 

📗 _(आलमगीरी जिल्द 5 सफ़ह 335)_ 


और आला हज़रत अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान रक़म तराज़ हैं,

एक से ज़्यादा नग होना के यह सूरत औरतों के साथ मख़सूस है,

📚 फ़तावा रज़वियह जिल्द 9. सफ़ह 14)


लिहाज़ा मालूम हुआ कि एक से ज़्यादा नग वाली अंगूठी औरतों के साथ मख़सूस और जाइज़ है मगर मर्दों के लिए ममनूअ् और ना जाइज़ है❗


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             ✍🏻 *(सवाल - जवाब)* ✍🏻

                 ♻️ *पोस्ट :- 02* ♻️

 

🤔 *सवाल 02*➖क्या सोने और चांदी के अलावा धात, मसलन लोहा, पीतल, तांबा, स्टील, गिलट, और अल्मुनियम की अंगूठी और ज़ेवर औरतों के लिए जाइज़ है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ औरतों को सोने और चांदी के जे़वरात के सिवा दूसरी तमाम धातों का ज़ेवर पहनना नाजाइज़ व हराम है, और मर्दों के लिए भी, मर्दों को सिर्फ 4.5 माशा से कम चांदी की एक अंगूठी जाइज़ है।


📚 _रद्दुल मोहतार जिल्द 9 सफ़ह 518_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

अंगूठी सिर्फ़ चांदी ही की पहनी जा सकती है, दूसरी धात की अंगूठी पहनना हराम है, मसलन लोहा पीतल, तांबा जस्त वग़ैरहा इन धातों की अंगूठियां मर्द व औरत दोनों के लिए नाजाइज़ हैं, फ़र्क़ इतना है कि औरत सोना भी पहन सकती है और मर्द नहीं पहन सकता।


📚 _बहारे शरीयत हिस्सा 3, सफ़ह 426_ 


ख़्वाह औरत हो या मर्द अगर इन धातों को पहनकर नमाज़ पढ़ेंगे तो नमाज़ भी मकरूहे तहरीमी होगी।

जैसा के आला हज़रत अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान फ़रमाते हैं

तांबा, पीतल, कांसा, लोहा तो औरत को भी ममनूअ् है, और उससे नमाज़ उनकी भी मकरूह है।


📚 _(फ़तावा रज़वियह जिल्द 9 सफ़ह 279) निस्फ़ आख़िर)_ 

📔 _(औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफ़ह 23--24)_ 


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             ✍🏻 *(सवाल - जवाब)* ✍🏻

                 ♻️ *पोस्ट :- 03* ♻️

 

🤔 *सवाल 03*➖कांचकी चूड़ियां औरतों के लिए जाइज़ हैं या नाजाइज़❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ कांच की चूड़ियां औरतों के लिए जाइज़ हैं, इसलिए के उस के बारे में शरअ में कोई मुमानअ्त नहीं।

फ़तावा रज़वियह शरीफ़ में है,

जाइज़ हैं,

لعدامنع الشرعى،،


बल्कि शौहर के लिए सिंगार की नियत से मुस्तहब है,


وانماالاعمال بالنيات،،


बल्कि शौहर या मां-बाप का हुक्म हो तो वाजिब,


لحرمةالعقوق ولوجوب طاعةالزوج فيما يرجع الى الزوجية،،


📘 ج.٩، ص ٢٣٥, نصف اول)


📔 _(औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफ़ह 23-24)_ 


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                 ♻️ *पोस्ट :- 04* ♻️

 

🤔 *सवाल 04*➖क्या घुंगरू वाले पाज़ेब (पायल) औरतों के लिए जाइज़ हैं❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ औरतों के लिए घुंगरू वाले पाज़ेब पहनना हराम व नाजाइज़ है❕

हदीस शरीफ़ में है

हजरत अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर रज़िअल्लाहु तआला अन्ह से रिवायत है कि हमारे यहां की लड़की हज़रत ज़ुबैर (रज़िअल्लाहु तआला अन्ह) की लड़की को हज़रत उमर रज़िअल्लाहु तआला अन्ह के पास लाई और उसके पांव में घुंगरू थे तो हज़रत उमर ने काट दिया और फ़रमाया कि मैंने रसूलल्लाह सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम से सुना है कि *हर घुंगरू में शैतान होता है।* 


📓 _मिश्कात सफ़ह 379_ 


और हजरत बनानह जो कि हज़रत अब्दुर्रहमान बिन हयानुल अंसारी की बांदी हैं रिवायत करती हैं कि वह हजरत आयशा रज़िअल्लाहु तआला अन्हा के पास थीं,

के हज़रत आयशा रज़िअल्लाहु तआला अन्हा के पास एक लड़की आई जिसके पांव में घुंगरू बज रहे थे फ़रमाया के उसे मेरे पास ना लाना जब तक के उसके घुंगरू काट ना देना मैंने रसूलल्लाह सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम से सुना है कि *जिस घर में जर्स से यानी घंटी या घुंगरू होते हैं उसमें फ़रिश्ते नहीं आते।* 


📚 _अल मरजाउस्साबिक़_ 

📘 _अबू दाऊद बाबुल ख़ातिम_ 


 *लिहाज़ा घुंगरू वाले पाज़ेब वगैरह को पहनने और पहनाने से बचना चाहिए वरना बाइसे मेहरूमी ए रहमत व बरकत होगी और मज़ीद गुनाह भी मिलेगा❕* 


📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 24--25_ 


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                 ♻️ *पोस्ट :- 05* ♻️

 

🤔 *सवाल 05*➖लोहा, पीतल और तांबा वगैरह धात की चीजें सोना और चांदी से मिलमा हो तो बतौरे ज़ेवर उनका इस्तेमाल औरतों के लिए जाइज़ है या नही❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ हा, तांबा, पीतल वगैरह धातों के जे़वरात का नाजाइज होना आहादीस व फ़िक़ह में सराहतन मज़कूर है जैसा कि तिरमिज़ी, अबू दाऊद और निसाई वगैरह की हदीस है, हजरत बुरीदा रज़िअल्लाहू तआला अन्ह रिवायत करते हैं,

नबी ए पाक सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम ने एक शख़्स से फ़रमाया जो पीतल की अंगूठी पहने हुए था के क्या बात है कि तुझसे बुतों की बू आती है, उन्होंने वह अंगूठी फेंक दी, फिर लोहे की अंगूठी पहन कर आए, हुज़ूर ने फ़रमाया कि क्या बात है मैं देखता हूं कि तुम जहन्नमियों का ज़ेवर पहने हुए हो, उस शख़्स ने वह अंगूठी भी फेंक दी, फिर अर्ज़ किया या रसूलल्लाह सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम किस चीज़ की अंगूठी बनवाऊं, फ़रमाया के चांदी की बनवाओ, और एक मिसक़ाल पूरा ना करो यानी वज़न में पूरे साढ़े चार 4.5, मासे ना हो बलके कुछ कम हो।

📘 _मिश्कात शरीफ़ सफ़ह 378_ 


और जोहरा नीरह में है:-

लोहा, पीतल, तांबा और शीशा की अंगूठी पहनना मर्दों और औरतों को नाजाइज़ है इसलिए कि वह जहन्नमियों का पहनावा है, लिहाज़ा सोने और चांदी को मिलमा कर देने से बतौरे ज़ेवर उन धातों का इस्तेमाल जाइज़ ना हो जाएगा, के हुक्म असल सै का होता है, ना के मिलमा का, खुलासा यह है कि मुज़कूरा धातों के ज़ेवरात औरतों के लिए भी जाइज़ नहीं अगरचे वह मिलमा किए हुए हों।


📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 26_ 

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                 ♻️ *पोस्ट :- 06* ♻️

 

🤔 *सवाल 06*➖अगर धात की चीज़ों को मिलमा ना किया बल्कि चांदी का खोल चढ़ा दिया तो क्या उसका इस्तेमाल जाइज़ है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ *जाइज़ है मसलन लोहे की अंगूठी पर चांदी का खोल चढ़ा दिया के लोहा बिल्कुल दिखाई ना दे तो इस तरह उसका इस्तेमाल जाइज़ है❕* 


📚 _आलमगीरी जिल्द 5, सफ़ह 335_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

🔅 _लोहे की अंगूठी पर चांदी का खोल चढ़ा दिया के लोहा बिल्कुल ना दिखाई देता हो, उस अंगूठी के पहनने की मुमानअत नहीं❕_ 

इससे मालूम हुआ के सोने के जेवरों में जो बहुत लोग अंदर तांबे या लोहे की सलाख रखते हैं और ऊपर से सोने का पत्तर चढ़ा देते हैं उसका पहनना जाइज़ है❕


📚 _बहारे शरिअत हिस्सा 3, सफ़ह 427_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 25-26_ 


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                 ♻️ *पोस्ट :- 07* ♻️

 

🤔 *सवाल 07*➖क्या जुड़ा हुआ छल्ला सोने और चांदी का पहनना जाइज़ है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ औरत के लिए तो जाइज़ है लेकिन मर्द के लिए जुड़ा हुआ छल्ला पहनना हराम व नाजाइज़ है❕

📚 _तनवीरुल अबसार जिल्द 6, सफ़ह 516_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह अल्लामा अमजद अली आज़मी अलैहिर्रहमा तहरीर फ़रमाते हैं

छल्ला एक हो या दो जुड़े हुए, मर्द पर हराम है,

📗 _फ़तावा अमजदियह जिल्द 4, सफ़ह 13_ 


लिहाज़ा मालूम हुआ कि औरतों को छल्ला एक हो या दो जुड़े हुए जाइज़ है, लेकिन मर्द पर हराम है❕


🤔 *सवाल 08*➖औरत और मर्द की अंगूठी का नगीना किस तरफ़ होना चाहिए❓

👉🏻 *जवाब* ➖मर्द को चाहिए कि वह जब अंगूठी पहने तो उसका नगीना हथेली की तरफ़ रखे, और औरतें हाथ की पीठ की तरफ़ रखें, क्योंकि उनका पहनना ज़ीनत के लिए है

📚 _फ़तावा आलमगीरी, जिल्द 5 सफ़ह 335_ 


और मुसन्निफ़े बहारे शरिअत हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

मर्द को चाहिए कि अगर अंगूठी पहने तो उसका नगीना हथेली की तरफ रखे, और औरतें नगीना हाथ की पुश्त की तरफ़ रखें, कि उनका पहनना ज़ीनत के लिए है और ज़ीनत इस सूरत में ज़्यादा है कि नगीना बाहर की जानिब रहे।

📚 _बहारे शरिअत जिल्द 3, सफ़ह 427_ 


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                 ♻️ *पोस्ट :- 08* ♻️

 

🤔 *सवाल 09*➖जिसकी नाक कट गई हो वह सोने की नाक लगवाए, नीज़ अगर कोई दांतों में सोने का तार बंधवाए तो क्या हुक्म है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ जिसकी नाक कट गई हो वह सोने की नाक लगवा सकता है और हिलते हुए दांतों को सोने के तार से बंधवाना भी जाइज़ है।

📚 _आलमगीरी जिल्द 5 सफ़ह 328_ 


और बहारे शरिअत में है,

हिलते हुए दांतों को सोने के तार से बंधवाना जाइज़ है, और अगर किसी की नाक कट गई हो तो सोने की नाक बनवाकर लगा सकता है, इन दोनों सूरतों मैं ज़रूरत की वजह से सोने को जाइज़ कहा गया है।

📘 _बहारे शरिअत जिल्द 3 सफ़ह 428_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 27--28_ 


🤔 *सवाल 10*➖सोने का बटन लगाना कैसा है❓

👉🏻 *जवाब* ➖मर्द व औरत दोनों के लिए जाइज़ है, लेकिन मर्द के लिए यह है कि बटन बग़ैर ज़ंजीर के हों।

📘 _दुर्रे मुख़्तार जिल्द 9, सफ़ह 511_ 


और मुसन्निफ़े बहारे शरिअत हुज़ूर सदरुश्शरिअह अल्लामा अमजद अली आज़मी अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

सोने के बटन बग़ैर ज़ंजीर के जाइज़ हैं और उसमें डोरा लगाना भी जाइज़ है।

📗 _फ़तावा अमजदियह जिल्द 4 सफ़ह 23_ 


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🤔 *सवाल 11*➖पीतल वगैरह धात की कमानी वाले चश्मा का इस्तेमाल कैसा है, अगर पहनकर नमाज़ पढ़े तो होगी या नहीं❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ धात की कमानी वाले चश्मा का इस्तेमाल जाइज़ है, जिस तरह बटन का इस्तेमाल जाइज़ है, क्योंकि कमानी ताबेअ् है, खुद मुलब्विस नहीं, और पहनकर नमाज़ पढ़ने में भी कोई कराहत नहीं।


हुज़ूर सदरुश्शरिअह अल्लामा अमजद अली आज़मी अलैहिर्रहमा रक़म तराज़ हैं

चश्मा लगा कर नमाज़ पढ़ने में कराहत नहीं, कमानी अगरचे किसी चीज़ हो कि कमानी ताबेअ् है खुद मुलब्विस नहीं तो जिस तरह बटन का इस्तेमाल जाइज़ है, उसका भी जाइज़ कि ईल्लत मुश्तरिक है।

📘 _फ़तावा अमजदियह जिल्द 4 सफ़ह 92_ 


🤔 *सवाल 12*➖बअ्ज़ मर्द व औरत अपने लड़कों को सोने चांदी का ज़ेवर ब्रेसलेट (कंगन) वगैरह पहनाते हैं, तो क्या हुक्म है❓

👉🏻 *जवाब* ➖ *लड़कों को ज़ेवर पहनाना हराम है, ख़्वाह वह सोने चांदी का हो या किसी और चीज़ का, और जिसने पहनाया वह गुनहगार भी होगा।* 

📔 _तनवीरुल अबसार मअ् शामी जिल्द 9 सफ़ह 522_ 


और इस तरह बिला ज़रूरत बच्चों के हाथ में मेंहदी लगाना भी हराम व नाजाइज़ है।

📘 _रद्दुल मोहतार जिल्द 9 सफ़ह 522_ 


और शहज़ादा ए आलाहज़रत  इमामुल फ़ुक़हा हुज़ूर मुफ़्ती ए आज़म हिंद अलैहिर्रहमा तहरीर फ़रमाते हैं

 *मर्द को हाथ पांव में मेंहदी लगाना नाजाइज़ है, ज़ेवर पहनना गुनाह है, कंगना हिन्दुओं का रस्म है।* 

📗 _फ़तावा मुस्तफ़वियह सफ़ह 452_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

लड़कों को सोने चांदी के ज़ेवर पहनाना हराम है, और जिसने पहनाया वह गुनाहगार होगा, इसी तरह बच्चों के हाथ पांव में बिला ज़रूरत मेहंदी लगाना नाजाइज़ है।

📚 _बहारे शरिअत जिल्द 3 सफ़ह 428_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 29-30_ 


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🤔 *सवाल 13*➖शीशा (यह एक धात का नाम है) की अंगूठी और झन्कार वाला पायल पहनना कैसा है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ शीशा की अंगूठी और बजने वाला या ख़ूब झन्कार वाला पायल पहनना दोनों शरअ् में ममनूअ् हैं।


अल्लाह तआला फ़रमाता है

ولا يضربن بارجلهن ليعلم ما يخفين من زينتهن،،

📚 _पारा 18, सूरह नूर, आयत 31_ 


यानी औरतों को हुक्म दिया जा रहा है कि वह ज़मीन पर दोनों पांव या एक पांव दूसरे पर ना मारा करें ताकि पाज़ेब की झन्कार पैदा हो और लोगों को पता चल जाए कि यह औरत पाज़ेब पहने हुए है,

क्योंकि ऐसा करने में मर्दों में ऐसी औरत की तरफ़ मीलान पैदा होता है।


मरवी है कि अरब में यह रिवाज था कि औरत चलते वक़्त ज़मीन पर आम रफ़्तार की बानिस्बत ज़रा ज़ोर से पांव रखती थी ताकि लोगों को मालूम हो जाए कि उसने पाज़ेब पहनी हुई है, या एक पांव दूसरे पर ज़ोर से मारती ताकि झन्कार से लोगों को पहने हुए ज़ेवरात का इल्म हो जाए, तो अल्लाह तआला ने औरतों को इससे मना फ़रमाया।

📚 _तफ़्सीराते अहमदिया, उर्दू सफ़ह 757_ 


जब ख़ालिस पाज़ेब पहनी हुई औरत को मना किया जा रहा है कि ज़ोर से एक पांव दूसरे पर ना मारे इसलिए के उससे आवाज़ पैदा होगी जो मर्दों के मीलान का सबब होगा, तो वह पाज़ेब जो झन्कार और बजने वाला है और मीलान का सर चश्मा से वह पहनना क्यों कर दुरुस्त होगा, और अल्लाह तआला ऐसे शख़्स की दुआ भी क़ुबूल नहीं फ़रमाता है, जो अपनी औरत को झन्कार दार बजने वाला पाज़ेब पहनाए।


जैसा के तफ़्सीराते अहमदिया मैं मज़कूरा आयते करीमा के तहत हदीसे पाक हैं,


ان الله يستجب دعاء يلبسون الخلخال نساءهم،


📚 _तफ़्सीराते अहमदिया, अरबी, सफ़ह 307_ 


और शीशा की अंगूठी के मुताल्लिक़ जोहरा नीरह में है।

लोहा, तांबा, पीतल, और शीशे की अंगूठी पहनना मर्दों और औरतों के लिए नाजाइज़ है इसलिए कि वह जहन्नमियों का पहनावा है।


📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 31_ 


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🤔 *सवाल 14*➖क्या सोने और चांदी के दांत बनवाना जाइज़ है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ चांदी के दांत बनवाना तो औरत व मर्द सबके लिए जाइज़ है, लेकिन सोने का दांत बनवाना किसी के लिए जाइज़ नहीं,

इमामे आज़म अबू हनीफ़ा  रज़िअल्लाहू तआला अशन्ह के नज़दीक।


जैसा कि दुर्रे मुख़्तार में है

अरबी इबारत असल किताब में मुलाहिज़ा हो।


🤔 *सवाल 15*➖औरत को जिस तरह सोने की घड़ी पहनना जाइज़ है, क्या उसमें वक़्त (टाइम) देखना भी जाइज़ है, और सोने चांदी का पानी चढ़ा हुआ अश्या का इस्तेमाल कैसा है❓

👉🏻 *जवाब* ➖औरतों को फ़क़त सोने की घड़ी पहनना जाइज़ है और रहा उसमें वक़्त (टाइम) देखना तो यह औरत और मर्द दोनों के लिए नाजाइज़ वा हराम है, इसी तरह चांदी में भी।


आला हज़रत अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

सोने की घड़ी या चांदी की घड़ी में वक़्त (टाइम) देखना मर्द व औरत सबको हराम है, कि औरतों को पहनने की इजाज़त है ना और तरीक़ा ए इस्तेमाल की

📚 _फ़तावा रज़वियह जिल्द 9, सफ़ह 134, निस्फ़ आख़िर_ 


और जिन चीज़ों पर सोना या चांदी का पानी चढ़ा हुआ हो उसके इस्तेमाल में कोई हर्ज नहीं फ़तावा रज़वियह शरीफ़ में है

सोने या चांदी का पानी वजहे मुमानअत नहीं हां अगर वह शै फ़ी नफ़्सिही ममनू हो तो दूसरी बात है, जैसे सोने का मिलमा (मिक्स) की हुई तांबे की अंगूठी।


📚 _दुर्रे मुख़्तार जिल्द 5, सफ़ह 521_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफा 30-31_ 


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🤔 *सवाल 16*➖नाक कान छिदवाने का रिवाज कब से है, और क्या लड़कियों का कान छेदने के लिए कोई खास हिस्सा मुक़र्रर है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ एक रिवायत में है के सबसे पहले नाक कान हज़रत सारह ने हज़रत हाजिरह (रज़िअल्लाहू तआला अन्हुमा) के छेदे थे, दोनों ही हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की बीवियां थी, तभी से औरतों में कान नाक छिदवाने का रिवाज चला आ रहा है।

📗 _मेराजुन्नबुव्वह जिल्द 1, सफ़ह 621_ 


और शरअ् में लड़कियों के नाक कान छेदने का कोई खास हिस्सा मुक़र्रर नहीं, जहां चाहे जैसे चाहे छिदवा सकती हैं।


मुजद्दिदे आज़म आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान फ़रमाते हैं

कोई ख़ास हिस्सा मुक़र्रर नहीं, हां मुशाबिहते कुफ़्फ़ार से बचना ज़रूरी है, बाज़ तरीक़े ख़ास कुफ़्फ़ार के यहां हैं, जिसे अन्वट कहते हैं, उन से बचें

📚 _फ़तावा रज़वियह शरीफ़ जिल्द 9, सफ़ह 228_ 


अल इन्तिबाह, नोट👇


कुछ लोग किसी मन्नत

के तहत या फिर फ़िरंगी फैशन की पैरवी में लड़कों के कान छेदते हैं, और कुछ किसी बुज़ुर्ग़ के मन्नत के तहत लड़कों के चोटी रखते हैं, यह सख़्त नजाइज़ व हराम है, और ऐसी मन्नत की शरीयत में कोई हैसियत व हक़ीक़त नहीं।


इमामे अहले सुन्नत आला हज़रत अलैहिर्रहमा फ़तावा अफ़्रीक़ा में फ़रमाते हैं

बाज़ जाहिल औरतों में दस्तूर है कि के बच्चे के सर पर बाज़ औलिया ए किराम के नाम की चोटी रखती हैं, और उसकी कुछ मियाद मुक़र्रर करती हैं, और उस में मियाद तक कितने ही बार बच्चे का सर मुंडे मगर चोटी बरक़रार रखती हैं, फिर मियाद गुज़ार कर मज़ार पर ले जाकर बाल उतारती हैं, यह ज़रूर महज़ बे असल व बिदअत है।


📘 _फ़तावा अफ़्रीक़ा सफ़ह 83_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 32-33_ 


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🤔 *सवाल 17*➖तांबे और पीतल का ख़िलाल गले में लटकाना कैसा है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ तांबे पीतल और लोहा वगैरह का खिलाल गले में लटकाना जिस तरह आजकल की बाज़ औरतें बहुत ज़्यादा अपने दांतो को तांबे और पीतल के आलाय ख़िलाल से साफ़ करती हैं, और गले में लटकाए रहती हैं जो नाजाइज़ व ममनूअ् है, आला हज़रत इमामे इश्क़ो मुहब्बत मुजद्दिदे दीनों मिल्लत अश्शाह इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िले बरेलवी अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान तांबे और पीतल के ख़िलाल के मुताल्लिक़ एक इस्तिफ़ता के जवाब में तहरीर फ़रमाते हैं,

नाजाइज़ है।

क्योंकि यह तअलीक़ के हुक्म में है, वैसे जाइज़ है और सोने चांदी का हराम है।

बल्कि औरतों को भी ऐसे ही सोने चांदी के ज़ुरूफ़ में खाना ना जाइज़ है,

और घड़ी की चैन भी आम अज़ीं के चांदी की हो या पीतल की हां डोरा बांध सकता है।

📗 _अल मलफ़ूज़ शरीफ़, जिल्द 3, सफ़ह 18_ 


*अल इन्तिबाह, नोट👇*


खाना खाने के बाद ख़िलाल करने में जो कुछ दांतों में से रेशा वगैरा निकला बेहतर यह है कि उसे फेंक दे निगल गया तो उसमें भी हर्ज नहीं और खिलाल का तिनका या जो कुछ ख़िलाल से निकला उसको लोगों के सामने ना फेंके बलके उसे लिए रहे जब उसके सामने तश्त (यानी हाथ धोने का बर्तन थाल) आए उसमें डाल दे फूल और मेवा के तिनके से खिलाल ना करे, 

बेहतर ख़िलाल, ख़िलाल के लिए नीम की सींख़ बहुत बेहतर है कि उसकी तल्खी से मुंह की सफ़ाई होती है और यह मसूड़ों के लिए भी मुफीद है झाड़ू की सीख़ें भी इस काम में ला सकते हैं जब के वह कोरी (यानी पाक व साफ़) हों मुस्तअमल ना हो।

📚 _बहारे शरिअत जिल्द 3, सफ़ह 382_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 33-34_ 


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🤔 *सवाल 18*➖औरतों को रेशमी कपड़ा पहनना कैसा है जबकि मर्दों के लिए हराम है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ औरतों को रेशमी कपड़ा पहनना जाइज़ है, अगरचे ख़ालिस रेशम हो।


हदीस शरीफ़ में है

तिरमिज़ी, व निसाई ने अबू मूसा अशअरी रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से रिवायत की के नबी ए अकरम सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया

सोना और रेशम मेरी उम्मत की औरतों के लिए हलाल है, और मर्दों पर हराम।

📚 _निसाई शरीफ़, किताबुज़्ज़ीनत, बाब तहरीमुज़्ज़हाब अलर्रजुल, सफ़ह 721_ 


और बहरुर्राइक़ में है,


حرام للرجل لا للمر اةلبس الحرير الا قدر اربع اصابع،،

📚 _जिल्द 8, सफ़ह 367_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान तहरीर फरमाते हैं

औरतों को रेशम पहनना जाइज़ है अगरचे ख़ालिस रेशम हो, उसमें सूत की आमेज़िश (मिलावट) ना हो,

मर्दों के कपड़ों में रेशम की गोट चार अंगुल तक की जाइज़ है, उससे ज्यादा ना जाइज़, यानी उसकी चौड़ाई तक हो लंम्बाई का शुमार नहीं।

📚 _बहारे शरिअत जिल्द 3, सफ़ह 411_ 


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🤔 *सवाल 19*➖औरतों को चूड़ी दार पायजामा पहनना कैसा है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ औरतों को चूड़ीदार पायजामा पहना यूं ही अपनी लड़कियों को पहनाना ख्वाह वह छोटी हों या बड़ी हराम व नाजाइज़ है।


आलाहज़रत अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

यूं ही तंग पायचे भी ना चूड़ियों दार हों ना टखनों से नीचे ना खूब चुश्त बदन से सिले के यह सब वज़अ फ़ुस्साक़ है, और सातर औरत का बदन से ऐसा चुश्त होना के उज़ू का पूरा अंदाज़ बताए यह भी एक तरह की बेशतरी है,

हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने जो पेशनगोई फ़रमाई के

निसअ का सियात आरयात औरतें होंगी कपड़े पहने तंगियां उसकी वुजूह तफ़्सीर से एक वजह यह भी है कि कपड़े ऐसे तंग चुश्त होंगे कि बदन की गोलाई फ़रबही (यानी बदन की बनावट) अंदाज़ ऊपर से बताएंगे, जैसे बअज़ लख़नऊ वालियों की तंग शलवारें चुश्त कुर्तियां।

📚 _अर्रज़वियह जिल्द 9. सफ़ह 84_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान तहरीर पर हैं

औरतों को बिल ख़ुसूस चूड़ीदार पायजामा नहीं पहनना चाहिए औरतों के पायजामे ढीले ढाले हों और नीचे हों के क़दम छुप जाएं, उनके लिए जहां तक पांव का ज़्यादा हिस्सा छुपे अच्छा है।


📚 _बहारे शरिअत जिल्द 3, सफ़ह 417_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 35-36_ 


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🤔 *सवाल 20*➖औरतों को बारीक दोपट्टा ओढ़ना कैसा है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖  बारीक दोपट्टा ओढ़ना दुरुस्त नहीं बल्कि ना जाइज़ व हराम है।


जैसा कि हदीस शरीफ़ में है

हजरत अलक़मा बिन अबू अलक़मा अपनी मां से रिवायत करते हैं कि हफ़्सा बिन्ते अब्दुर्रहमान हज़रत आयशा रज़िअल्लाहू तआला अन्हा के पास बारीक दोपट्टा ओढ़ कर आईं तो हज़रत आयशा रज़िअल्लाहू तआला अन्हा ने उनका दोपट्टा फाड़ दिया और मोटा दोपट्टा उढ़ा दिया।

📘 _मिश्कात शरीफ़ किताबुल्लिबास सफ़ह 377_ 


और बहारे शरीअत में है

बाज़ औरतें बहुत बारीक कपड़े पहनती हैं, मसलन आबेरवा (एक क़िस्म का निहायत अच्छा और बारीक कपड़ा) या जाली या बारीक मलमल ही का दोपट्टा जिससे सर के बाल या बालों की स्याही या गर्दन या कान नज़र आते हैं और बाज़ बारीक तंज़ीब या जाली के कुर्ते पहनती हैं कि पेट और पीठ बिल्कुल नज़र आती है, इस हालत में नज़र करना हराम है और ऐसे मौक़ा पर उनको इस क़िस्म के कपड़े पहनना भी ना जाइज़।

📚 _बहारे शरीअत जिल्द 3, सफ़ह 448_ 


*अल इन्तिबाह,👇*


लिहाज़ा इतना बारीक दोपट्टा जिससे बालों की स्याही (कालापन यानी बालों की रंगत) चमकती हो और इतना बारीक लिबास जिससे जिस्म की साख़्त, बनावट, हैइयत, रंगत, उतार चढ़ाव, नशीब व फ़राज़ और लंबाई व गोलाई ज़ाहिर हो ऐसा कपड़ा पहनना हराम है, ऐसे दोपट्टे और कपड़े पहनकर ओढ़कर अगर नमाज़ पढ़े तो नमाज़ भी ना होगी क्योंकि सतरे औरत नमाज़ में फ़र्ज़ है, और ऐसे कपड़े से सतर नहीं होती है, आज कल मर्द भी स्टबल वगैरह का हल्का तहबंद पहनने लगे हैं जिससे बदन की रंगत झलकती है और सतर नहीं होता, मर्दों को भी ऐसा तहबंद हराम है, और बाज़ लोग उसको पहनकर नमाज़ पढ़ते हैं, उनकी नमाज़ नहीं होती, और बाज़ लोग धोती बांधते हैं, धोती बांधना हिंदुओं का तरीक़ा है, और उससे सतर भी नहीं होता के चलने में रान की पिछला हिस्सा खुल जाता है, मुसलमानों को इससे बचना ज़रूरी है, और नेकर जांघिया पहनना के जिससे घुटना खुला रहता है हराम है।

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 37_ 


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🤔 *सवाल 21*➖ज़अफ़रान का रंगा हुआ कपड़ा औरत के लिए जाइज़ है या नाजाइज़❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖  औरतों को कुसुम या ज़अफ़रान का रंगा हुआ कपड़ा पहनना जाइज़ है, चाहे वह गहरा रंग होकर सुर्ख़ हो जाए या हल्का हो कर ज़र्द रहे, लेकिन मर्द के लिए नाजाइज़ है जैसा के तनवीरुल अबसार में है


अरबी इबारत असल किताब में मुलाहिज़ा हो और बहारे शरीअत में है

कुसुम या ज़अफ़रान का रंगा हुआ कपड़ा मर्द को मना है, गहरा रंग हो के सुर्ख़ हो जाए या हल्का होकर ज़र्द रहे, दोनों का एक हुक्म है, औरतों को यह दोनों क़िस्म के रंग जाइज़ हैं, इन दोनों रंगों के सिवा बाक़ी हर क़िस्म के रंग, ज़र्द, सुर्ख़, धानी, बसंती, चंपई, नारंगी, वगैरहा मर्दों को भी जाइज़ हैं, अगरचे बेहतर यह है कि सुर्ख़ रंग या शोख़ रंग के कपड़े मर्द ना पहने खुसूसन जिन रंगों में ज़नाना पन हो मर्द उसको बिल्कुल ना पहने।


📚 _बहारे शरीअत जिल्द 3 सफ़ह 415_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 36-37_ 


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🤔 *सवाल 22*➖औरत मर्द की तरह लिबास पहने तो क्या हुक्म है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖  *औरतों को मर्द की तरह लिबास पहनना हराम है, जिस तरह आजकल की नव उम्र नौजवान लड़कियां और औरतें पहनती हैं मसलन, पैंट, जीन्स, टी शर्ट वग़ैरह, और नबी करीम सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने एसी औरतों पर लानत फ़रमाई है।* 


हदीस शरीफ़ में है

हज़रत उमर बिन हसीन रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से रिवायत है कि

नबी करीम सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने *उस मर्द पर लानत फ़रमाई जो औरत का लिबास पहनता है, और उस औरत पर लानत फ़रमाई जो मर्दाना लिबास पहनती है।* 

📚 अबू दाऊद किताबुल्लिबास, बाब फ़ी लिबास्सुन्निसा, जिल्द 4, सफ़ह 83


*अल इन्तिबाह👇*


 *लिहाज़ा मालूम हुआ कि मर्दों को औरतों का लिबास और औरतों को मर्दों का लिबास जैसे पैंट, शर्ट, टी शर्ट, जीन्स, कैपरी, लोवर, और जांघिया, वग़ैरह पहनना और पहनकर घूमना यह हराम व नाजाइज़,  और एसों पर अल्लाह व रसूल और मलायका वग़ैरहुम की लानत है, और जो मुसलमान अपनी लड़कियों को मर्दाना लिबास पहनाते हैं, वह सख़्त गुनाहगार और मुस्तहिक़े वईदो नार हैं, (यानी अल्लाह तआला के ग़ज़ब व जहन्नम में जलने के हक़दार हैं)* 


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🤔 *सवाल 23*➖ग़रारा (यानी जिसमें कलिंया डालकर घेर बढ़ा दिया जाता है) क्या औरतों के लिए मख़्सूस है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖  हां, ग़रारा यानी जिसमें कलिंया डालकर घेरा बढ़ा दिया जाता है यह औरतों के लिए मख़्सूस है, और मर्दों के लिए ना जाइज़ है।


जैसा कि आलाहज़रत अलैहिर्रहमा तहरीर फ़रमाते हैं

ग़रारे दार जिसमें कलिंया डालकर घेर बढ़ा दिया जाता है, यह मर्दों के लिए बिला शुबा नाजाइज़ है, कि इन बिलाद में कलियोंदार पायजामे ख़ास लिबासे औरत हैं, और औरतों से तश्बीह हराम मर्द अगर पहनते हैं तो वही ज़नाने या नक़ाल या बद वज़अ् फ़ुस्साक़ इन लोगों से भी मुशाबहत ममनू है,


📚 _फ़तावा रज़वियह, जिल्द 9, सफ़ह 84_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 38-39_ 


🤔 *सवाल 24*➖क्या आक़ा सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी उम्मत में से पायजामा पहनने वाली औरतों के लिए दुआ ए मग़फ़िरत फ़रमाई❓

👉🏻 *जवाब* ➖ बिला शुबा नबी ए पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने दुआ ए मग़फ़िरत की,

जैसा के आलाहज़रत अलैहिर्रहमा, तिरमिज़ी व अक़ैली के हवाला से नक़ल फ़रमाते हैं

हुजूर सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम ने अपनी उम्मत से पायजामा पहने वाली औरतों के लिए दुआ ए मग़फ़िरत की और मर्दों को ताकीद फ़रमाई के खुद भी पहनें और अपनी औरतों को पहनाएं कि इसमें सतर (पर्दा पोशी) ज़्यादा है।

📚 _फ़तावा रज़वियह जिल्द 9, सफ़ह 84_ 


और पायजामा पहनना मुस्तहब बल्के सुन्नत भी है।

📚 _फ़तावा आलमगीरी, जिल्द 5, सफ़ह 333_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह तहरीर फ़रमाते हैं

पायजामा पहना सुन्नत है क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा सतरे औरत है, उसको सुन्नत बाय माना कहा गया है कि हुजूरे अक़दस सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम ने उसे पसंद फ़रमाया और सहाबा ए किराम रज़िअल्लाहू तआला अन्हुम ने पहना, ख़ुद हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम तहबंद पहना करते थे पायजामा पहनना साबित नहीं।

📚 _बहारे शरीअत जिल्द 3, सफ़ह 416_ 


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🤔 *सवाल 25*➖औरतों को लहंगा और साड़ी पहनना कैसा है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖  औरतों को लहंगा और साड़ी पहनना जाइज़ है, मगर उन जगहों पर जहां लोग उसे लिबासे कुफ़्फार जानते हों वहां पहनना ममनू व गुनाह है कुफ़्फ़ार से मुशाबिहत की बिना पर।

इस लिए कि हदीस शरीफ़ में है


 من تشبه بقوم فهو منهم،،


 यानी जो किसी क़ौम से मुशाबिहत रखे तो वह उन्ही में से है।

📚 _मिश्कात शरीफ़ किताबुल्लिबास सफ़ह 375_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमा तहरीर फ़रमाते हैं

लहंगा ख़ास कर हिन्दुओं की औरतें पहनती हैं, और साड़ियां भी,

इस मुल्क (यानी हिन्दुस्तान) में सिर्फ हिन्दू औरतें बांधती हैं, और हिन्दू मुसलमान औरतों में इसी लिबास का फ़र्क़ है कि पायजामा पहने हो तो मालूम होगा कि मुसलमान है और लहंगा साड़ी बांधे हो तो हिन्दू समझते हैं।

लिहाज़ा मुसलमान औरतों को हर गिज़ कुफ़्फ़ार के यह लिबास पहनने ना चाहिए।

📗 _फ़तावा अमजदयह जिल्द 4, सफ़ह 144_ 


और इसके तहत इसी के हाशिया में फ़क़ीहे अहले सुन्नत हुज़ूर मुफ़्ती आले मुस्तफ़ा साहब क़िब्ला तहरीर फ़रमाते हैं

जहां लोग इसे लिबासे कुफ़्फार जानते हों वहां मुस्लिम औरतों को यह लिबास पहनना ममनू व मकरूह और गुनाह है, और जहां मुस्लिम व ग़ैर मुस्लिम सभी पहनती हों वहां इन लिबासों का इस्तेमाल बिला शुबा जाइज़ है।

📗 _अल मरजउल्लिबास_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 39-40_ 


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🤔 *सवाल 26*➖औरतों को मर्दों की तरह ऊंची एड़ी की जूती पहनना कैसा है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖जिस तरह मर्द ऊंची एड़ी का जूता पहनता है, औरतों इसी तरह ऊंची एड़ी की जूती पहनना हराम व नाजाइज़ है, कि इसमें मर्दों की मुशाबिहत है।


हदीस शरीफ़ में है

हज़रत अबू दाऊद ने हज़रत इब्ने अबी मलीका से रिवायत की के किसी ने हज़रत आयशा रज़िअल्लाहू तआला अन्हा से कहा के एक औरत (मर्दों की तरह) जूते पहनती है, उन्होंने फ़रमाया कि रसूल्लाह सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने मर्दानी औरत पर लानत फ़रमाई है।

📚 _अबू दाऊद किताबुल्लिबास बाब फ़ी लिबास्सुन्निसा जिल्द 4, सफ़ह 84_ 


यानी औरतों को मर्दाना जूता नहीं पहनना चाहिए, बल्कि वह तमाम बातें जिनमें औरतों और मर्दों का इम्तियाज़ होता है, उनमें से हर एक को दूसरे की वज़अ् इख़्तियार करने की मुमानअ्त है, न औरत मर्द की वज़अ् इख़्तियार करे, और ना मर्द औरत की


हदीसे पाक में है,

नबी ए पाक सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं

अल्लाह तआला ने उस औरत पर लानत फ़रमाई जो मर्द की तरह लिबास पहने और उस मर्द पर भी जो औरत की तरह लिबास पहने।

📘 _मिश्कात किताबुल्लिबास सफ़ह 380_ 


और इस हदीस शरीफ़ के तहत हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

इस बिना पर उम्मुल मोमिनीन सिद्दीक़ा रज़िअल्लाहू तआला अन्हा ने औरतों को एड़ी बैठाकर जूती पहनने का हुक्म दिया कि चढ़वीं जूते में मर्दों की मुशाबिहत है।

📗 _फ़तावा अमजदयह जिल्द 4 सफ़ह 146_ 


और शहज़ादा ए हुज़ूर आलाहज़रत इमामुल फ़क़्हा मुफ़्ती ए आज़म हिन्द हज़रत अल्लामा अश्शाह मुहम्मद मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान क़ादरी नूरी रहमतुल्लाहि तआला अलैहि फ़रमाते हैं

जो जूता मर्दाना हो यानी जिस वज़अ् का मर्दों के साथ ख़ास हो औरतों को उसका पहनना दुरुस्त नहीं।

📚 _फ़तावा मुस्तफ़वियह सफ़ह 451_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफ़ह, 41_ 


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🤔 *सवाल 27*➖आजकल के नक़ाब जो इन्तिहाई चुस्त और तंग होते हैं, जिससे अअ्ज़ा ए जिस्म की बनावट साफ़ ज़ाहिर होती है और जिसमें तरह तरह के बेल बूटे और नक़्श व निगार मनक़ूस होते हैं, जो बहुत ही दिलकश मालूम होते हैं, तो क्या इस तरह के नक़ाब औरतों को पहनना जाइज़ है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ *औरतों को इस तरह का नक़ाब पहनना हराम और अशद हराम है, इसलिए के शरअ् ने औरतों के लिए इतना चुस्त लिबास पहनना जिससे बदन के अअ्ज़ा की बनावट, साख़्त व हैइयत, नशीब व फ़राज़, उतार चढ़ाव खूब ज़ाहिर हो हराम फ़रमाया है, और फिर ऊपर से उसमें तरह तरह के बेल बूटे नक़्श व निगार और बहुत ही खूबसूरत, दिलकश व दिल फ़रेब डिज़ाइन मनक़ूस हों, जो लोगों की तवज्जोह का मरकज़ बनें, इस तरह के तमाम पहनावे भी बिला शुबा ना जाइज़ व हराम बल्कि अशद हराम होंगे।* 


हदीस शरीफ़ में है

हज़रते आयशा सिद्दीक़ा रज़िअल्लाहू तआला अन्हा से रिवायत है कि हज़रते असमा बिन्ते अबू बकर रज़िअल्लाहू तआला अन्ह एक बारीक कपड़ा पहनकर हुज़ूर के सामने आईं हुज़ूर ने उनकी जानिब से मुंह फेर लिया और फ़रमाया *"ऐ असमा औरत जब बालिग हो जाए तो उसके बदन का कोई हिस्सा हरगिज़ ना दिखाई देना चाहिए, सिवाए इसके और उसके और इशारा फ़रमाया अपने मुंह और हथेलियों की जानिब।"* 

📗 _मिश्कात सफ़ह 377_ 


और इसी लिए औरतों को चूड़ी दार पायजामा पहनना और खूब चुस्त क़मीस पहनने से सख़्ती के साथ मना किया गया है कि इससे औरत के जिस्म की बनावट लंम्बाई गोलाई और उतार चढ़ाव खूब ज़ाहिर रहता है, और जब औरतें इस क़दर चुस्त लिबास पहनकर निकलेंगी तो नागह लोगों की नज़रें उनकी तरफ उठेंगी जिसे हरीस क़िस्म का इंसान बग़ौर देखेगा और गुनाहगार होगा और उसका गुनाह औरत के भी सर आएगा इसलिए कि उसने ऐसा लिबास पहन रखा है जो शराफ़ते इंसानी के ख़िलाफ़ और शरअ् में ममनू व हराम है।


हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं *"अगर चुस्त कपड़े पहने हों के जिस्म का नक्शा खिच जाता हो मसलन चुस्त पायजामा में पिंडली और रान की पूरी हैइयत नज़र आती है तो इस सूरत में नज़र करना ना जाइज़ है।"* 

📚 _बहारे शरिअत जिल्द 3, सफ़ह 448_ 


*अल इन्तिबाह👇*

औरतों को ऐसा लिबास पहनना जिससे बदन के अक्सर अअ्ज़ा ज़ाहिर होते हैं हराम है, औरतों को खूब ढीले ढाले कपड़े पहनना चाहिए और ज़्यादा नीचे तक हों ताकि क़दम छुप जाएं उनके लिए जहां तक पांव का ज़्यादा छुपे अच्छा है, इन्तिहाई चुस्त व तंग बुरक़ा व नक़ाब कमीस कुर्ती और पायजामा वग़ैरह पहनने से इज्तिनाब लाज़िम है वरना गुनाहगार और मुस्तहिक़े अज़ाबे नार होंगी।


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🤔 *सवाल 28*➖औरत इस तरह पायजामा पहने के टख़्ना खुला रहे तो क्या हुक्म है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ *टख़्ना खुला हुआ पायजामा पहनना औरतों के लिए नाजाइज़ व हराम है* इसलिए कि औरत का टख़्ना व गट्टा भी सतरे औरत में दाखिल है जैसा कि रद्दुल मोहतार में है।

अरबी इबारत असल किताब में मुलाहिजा हो


और आलाहज़रत अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं कि

औरत के गट्टे सतरे औरत में दाखिल हैं, ग़ैर मेहरम को उनका देखना हराम है कि औरत को हुक्म है कि उसके पायचे खूब नीचे हों के चलते में साक़ या गट्टे खुलने का एहतेमाल न रहे।

📚 _फ़तावा रज़वियह जिल्द 9, सफ़ह 147- निस्फ़ आखिर_ 


लिहाज़ा औरतों को चाहिए कि उनको भी छुपाकर रखें


बहारे शरिअत में है

आज़ाद औरतों और ख़न्शा मुश्किल यानी जिसमें मर्द व औरत दोनों की अलामतें पाई जाएं और यह साबित न हो कि मर्द है या औरत के लिए सारा बदन औरत है, सिवाए मुंह की शक्ल और हथेलियों और और पांव के तलवों के सर के लटकते बाल और गर्दन और कलाईयां भी औरत हैं, उनका छुपाना भी फ़र्ज़ है।

📚 _बहारे शरिअत जिल्द 2, सफ़ह 481_ 


तो साबित हुआ कि टखने और गट्टे का छुपाना लाज़िम और खुला रखना या दिखाना हराम व गुनाह है।

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल, सफ़ह 41-42-43_


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🤔 *सवाल 29*➖औरतों को ऊन और बाल का कपड़ा पहनना कैसा है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ ऊन और बाल का कपड़ा पहनना औरत और मर्द सबके लिए शरअ् में कोई मुमानअ्त नहीं, और अम्बिया अलैहिमुस्सलाम की सुन्नत भी है।

📚 _फ़तावा आलमगीरी, जिल्द 5, सफ़ह 333_ 


और ऊन और बाल का लिबास पहनना अजिज़ व इनकिसारी की निशानी है।


हदीस शरीफ़ में है

आक़ा सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं

ऊन के कपड़े पहनकर अपने दिलों को मुनव्वर करो कि यह दुनिया में मुज़िल्लत है (यानी दुनिया वालों के नज़दीक ऐसे कपड़े पहनना हक़ीर समझा जाता है लेकिन आख़िरत में इज़्ज़त का बाइस है) और आख़िरत में नूर है।

📚 _ब हवाला, आलमगीरी जिल्द 5 सफ़ह 333_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह अल्लामा अमजद अली अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

ऊन और बालों के कपड़े अम्बिया ए किराम अलैहिमुस्सलाम की सुन्नत है, सबसे पहले हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलातू वस्सलाम ने यह कपड़े पहने।

📚 _बहारे शरिअत जिल्द 3, सफ़ह 416_ 


लिहाज़ा ऊन और बाल के कपड़े पहनने में हर्ज नहीं बल्कि बेहतर है और तवाज़ो की निशानी है।


🤔 *सवाल 30*➖औरतों को नमाज़ में कितना बदन ढकना ज़रूरी है❓

👉🏻 *जवाब* ➖आज़ाद औरतों को सर से पांव तक तमाम बदन का छुपाना फ़र्ज़ है, मगर चेहरा यानी पेशानी से ठोड़ी और एक कनपटी से दूसरी कनपटी तक (जिसमें सर के बालों या कान का कोई हिस्सा दाख़िल नहीं, ना ठोड़ी के नीचे का) यह तो बिल इत्तिफ़ाक़ नमाज़ में छुपाना फ़र्ज़ नहीं, और गट्टों तक दोनों हाथ, टखनों तक दोनों पांव, इनमें इख़्तिलाफ़े रिवायात है, इनके सिवा अगर किसी उज़ू का चौथाई हिस्सा नमाज़ में क़सदन (यानी जानबूझकर) खोले अगरचे एक आन को बिला क़स्द ब क़दर अदाए रुक्न यानी तीन बार सुब्हानअल्लाह कहने की देर तक खुला रहे तो नमाज़ ना होगी और बारीक कपड़े जिनसे बदन नज़र आए या रंगत दिखाई दे या सर के बालों की स्याही चमके तो नमाज़ ना होगी।

📔 _अल मलफ़ूज़ जिल्द 1, सफ़ह 21_ 

📘 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफ़ह 45_ 


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🤔 *सवाल 31*➖बअ्ज़ औरतें सोग मनाने के लिए अशरा ए मुहर्रम में सियाह (काला, ब्लैक) और सब्ज़ (हरा, ग्रीन) कपड़े पहनती हैं और अपने बच्चों को पहनाती हैं तो क्या हुक्म है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ अशरा ए मुहर्रम में तीन रंग के कपड़े पहनना दुरुस्त नहीं,

1-सियाह यानी काला,

2-सब्ज़ यानी हरा,

3-सुर्ख़ यानी लाल, (रेड)


इन तीनों से इज्तिनाब लाज़िम है। अव्वलन तो औरत को शौहर के अलावा के लिए सोग करना ही जाइज़ नहीं।


मुजद्दिदे आज़म सरकार आलाहज़रत अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

शरिअत ने औरत को  शौहर की मौत पर चार महीने दस दिन सोग का हुक्म दिया है, और उनकी मौत के तीसरे दिन तक इजाज़त दी है, बाक़ी हराम है और हर साल सोग की तजदीद तो किसी के लिए असलन हलाल नहीं, फिर हक़ीक़त देखिए तो दअ्वाए ग़म भी झूटा, यूं ही अशरा ए मुहर्रम के सब्ज़ रंगे हुए कपड़े भी नाजाइज़ हैं यह भी सोग की ग़र्ज़ से हैं सोग में असल सियाह लिबास है, वह तो राफ़ज़ियों (यानी शिओं) ने किया और उन्हें ज़ैबा भी था के एक तो उनके दिलों की भी यही रंगत है, (यानी शिओं के दिल भी काले हैं) दूसरे यह कि सैय्यदना इमाम शाफ़ई रज़िअल्लाहू तआला अन्ह ने फ़रमाया कि


الشيعة نساء هذه الامة،


यानी शिआ इस उम्मत की औरतें हैं सोग व मातम औरतों ही को ख़ूब आते हैं।

अशरा ए मुबारक में तीन रंगों से बचे- सियाह, (यानी काला, ब्लैक) सब्ज़ (यानी हरा, ग्रीन) सुर्ख़ (यानी लाल, रेड)

📚 _फ़तावा रज़वियह जिल्द 9, सफ़ह 36, निस्फ़ आखिर_ 


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह बदरुत्तरीक़ा अल्लामा अमजद अली अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

अशरा ए मुहर्रम में तीन रंग के लिबास अहले बिदअत पहनते हैं, इन तीनों से इज्तिनाब चाहिए।

अव्वल-सुर्ख़ या गुलाबी के यह ख़वारिज दुश्मनाने अहले बैत इज़हारे मुशर्रत के लिए पहनते है।


दोम- सियाह के उसको राफ़़ज़ी (यानी शिआ) पहनते हैं।

सोम- सब्ज़ या दहानी के यह ताज़ियादारों का शैवह है, अगर कपड़ा मुख़्तलिफ़ रंग है तो वह इन तीनों से ख़ारिज है।

📚 _फ़तावा अमजदियह जिल्द 4, सफ़ह 167_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफ़ह 45-46_ 


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🤔 *सवाल 33*➖बाज़ औरतें मय्यत होने पर इज़हारे ग़म के लिए सियाह (यानी काले) कपड़े पहनती हैं तो क्या हुक्म है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖किसी के मौत पर इज़हारे ग़म में काला कपड़ा पहनना नजाइज़ है, चाहे मर्द हों या औरत।

📚 _फ़तावा आलमगीरी जिल्द 5, सफ़ह 333_ 


और सियाह बिल्ला लगाना और बाज़ू पर सियाह पट्टी बांधना भी जाइज़ नहीं क्योंकि वह सोग की सूरत है।


और हुज़ूर सदरुश्शरिअह बदरुत्तरीक़ा अल्लामा अमजद अली अलैहिर्रहमा तहरीर फ़रमाते हैं

जिसके यहां मय्यत हुई उसे इज़हारे ग़म में सियाह कपड़े पहनना नाजाइज़ है, सियाह बिल्ले लगाना भी नाजाइज़ है, के अव्वलन तो वह सोग की सूरत है दोम यह के नसारा (इसाइयों) का तरीक़ा है।

📚 _बहारे शरिअत जिल्द 3 सफ़ह 416_ 


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🤔 *सवाल 34*➖आजकल औरत व मर्द वालों को सियाह (यानी काला) करने के लिए काली मेहंदी और तेल लगाते हैं तो क्या हुक्म हैं❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖बालों को काला करने के लिए मेहंदी, तेल, और नील वगैरह का इस्तेमाल करना नाजाइज़ व हराम है, मर्द व औरत सबके लिए एक ही हुक्म है, इस बारे में किसी की कोई तख़्सीस नहीं।


हदीसे पाक में है

हजरत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़िअल्लाहू तआला अन्ह से रिवायत है के हजरत अबू क़हाफ़ा को फतह मक्का के दिन आक़ा सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम की बारगाह में लाया गया, उनके सर और दाढ़ी के बाल सग़ामा (यानी सफ़ेद फूलों) की तरह सफ़ेद थे, तो आप सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम ने फ़रमाया

किसी चीज़ से इसका रंग बदल दो और काले रंग से बचो।

📚 _मुस्लिम, जिल्द 2, सफ़ह 199_ 

📗 _निसाई जिल्द 2 सफ़ह 236_


और हुज़ूर आला हज़रत अलैहिर्रहमतू वर्रिज़वान तहरीर फ़रमाते हैं

के आहादीस व रिवायात में मुतलक़ सियाह (यानी काला) रंग से मुमानअत फ़रमाई तो जो चीज़ बालों को सियाह करे ख्वाह निरा नील या मेहंदी का मैल या कोई तेल ग़र्ज कुछ हो सब नाजाइज़ व हराम और उन वईदों में दाखिल है।

📚 _फ़तावा रज़वियह जिल्द 9, सफ़ह 32_ 


और आलमगीरी में है

जो काले ख़िज़ाब से औरतों के लिए अपने आप को आरास्ता करे और उनको लुभाने के लिए तो यह मकरूह है यही आम मशाइख़े किराम का मज़हब है।

📚 _आलमगीरी जिल्द 5, सफ़ह 309, मुलख़सन_ 


और दुर्रे मुख़्तार में है


و يكره بالسو اداى لغيرالحرب،


📚 _दुर्रे मुख़्तार जिल्द 9, सफ़ह 605_ 


और हुज़ूर आला हज़रत अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं

के आम्मा ए मशाइख़े किराम व जमहूरे अइम्मा ए आलाम के नज़दीक सियाह यानी काला ख़िज़ाब मना है,

उल्मा जब कराहत मुतलक़ बोलते हैं उससे कराहते तहरीम मुराद लेते हैं, जिसका मुर्तकिब गुनाहगार व मुस्तहिक़े अज़ाब है।

📚 _फ़तावा रज़वियह जिल्द 9, सफ़ह 41_ 


नीज़ तहरीर फ़रमाते हैं

शाहिद अदल है, कि औरत उसकी ज़्यादा मोहताज है कि शौहर की निगाह में आरास्ता हो जब उसे यह उमूर तग़इय्युर ख़ल्क़ुल्लाह के सबब हराम व मोजिबे लानत है तो मर्द पर ब दर्जा औला।

📘 _अर्रज़वियह जिल्द 9 सफ़ह 192, निस्फ़ आखिर_ 


लिहाज़ा मर्द व औरत दोनों को बालों को काला करने के लिए काला खिज़ाब, काली मेहंदी, तेल और नील वगैरह इस्तेमाल करना हराम व नाजाइज़ है।

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफ़ह 49-50_ 


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🤔 *सवाल 35*➖क्या काला ख़िज़ाब लगाने वाले जन्नत की ख़ुशबू नहीं पाएंगे❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ *हां, सहीह् आहादीस व रिवायात से यह साबित है कि काला ख़िज़ाब लगाने वाले औरत मर्द जन्नत की ख़ुशबू नहीं पाएंगे।* 


हदीस शरीफ़ में है

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़िअल्लाहू तआला अन्हुमा से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया

आख़री ज़माने में कुछ लोग होंगे जो काला ख़िज़ाब इस्तेमाल करेंगे जैसे कबूतर के पोटे वह लोग जन्नत की खुशबू नहीं पाएंगे।

📚 _अबू दाऊद, बाबुल माजा फ़ी ख़िज़ाबुस्सवाद, जिल्द 2 सफ़ह 578_ 


आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा बरेलवी रज़िअल्लाहू तआला अन्ह फ़रमाते हैं

सियाह (यानी काला) ख़िज़ाब मुतलक़न हराम है, और सियाह मुकूल बित्तश्कीक नीला और औदा (यानी शुर्ख़ लिए हुए काले रंग का) कासनी, सब सियाह है और बफ़र्ज़ ग़लत सियाह ना हो तो क़रीब सियाह क़तअन है, और हदीसे सहीह् का इरशाद है,


لا تقربواالسواد،


सियाही के पास ना जाओ


रवाहुल इमाम अहमद अन अनस रज़िअल्लाहू तआला अन्ह और हदीस अबू दाऊद व निसाई में कबूतर के पोटे से तश्बीह भी इसी तरफ़ नाज़िर जंगली कबूतरों के पोटे अक्सर नीलगों होते हैं, ख़ास मेंहदी की रंगत गहरी नहीं होती, जब उसमें कुछ पत्तियां नील की मिलादी जाएं तो सुर्ख गहरा रंग हो जाता है, यह हसन है ना यह के इतना नील मिला दिया जाए कि सियाह करदे या पहले मेंहदी से रंग कर जब बाल खूब साफ़ हो गए उसपर नील थोपा कि यह सब वही हराम सूरतें हैं जिनको

اجتنبوا،، 

फ़रमाया


 لايجدون راءحة جنة،،

 फ़रमाया,


जिस पर

 سواد الله وجه،

 आया

📚 अर्रज़वियह जिल्द 9 सफ़ह 191, निसफ़ आखिर


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                 ♻️ *पोस्ट :- 29* ♻️

 

🤔 *सवाल 36*➖क्या औरतों को टिकली (बिंदिया), सिन्दूर या इस तरह का कोई रंग लगाना जाइज़ है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖पेशानी पर टिकली (बिंदिया) लगाना और मांग में सिंदूर वगैरह भरना हराम है।

हुज़ूर सदरुश्शरिअह अलैहिर्रमह फ़रमाते हैं।

सिंदूर लगाना मसलह में दाखिल और हराम है, नीज़ उसका जुर्म पानी बहने से मानेअ् होगा, जिससे गुसल नहीं उतरेगा।

📗 _फ़तावा अमजदियह जिल्द 4, सफ़ह 60_ 


और इस लिए भी टिकली (बिंदिया) वगैरह लगाना हराम है कि उसमें ग़ैर मुस्लिमों से मुशाबहत है।


हदीसे पाक में है नबी ए पाक सल्लल्लाहू तआला अलैही वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं

من تشبه بقوم فهو منهم،

यानी जो किसी क़ौम से मुशाबहत रखे वह उसी में से है।

📗 _मिश्कात सफ़ह 375_ 


फ़तावा अमजदियह में है

अफ़शां या टिकली भी वुज़ू व  ग़ुसल के अदा करने में मानेअ् हैं, और टिकली (बिंदिया) में हिन्दुओं से मुशाबहत होती है कि मुसलमान औरतें इस्तेमाल नहीं करतीं-- उनसे एहतराज़ चाहिए।

📘 _अल मर्जउस्साबिक़_ 


*अल इन्तिबाह*

मालूम हुआ कि टिकली (यानी बिंदिया) लगाना और मांग में सिंदूर या कोई और रंग लगाना सब हराम है।


🤔 *सवाल 37*➖क्या ख़ूबसूरती के लिए औरतों को भवों के बाल नोचना और दांतों को रेतना जाइज़ है❓ 

👉🏻 *जवाब* ➖ *औरतों को ख़ूबसूरती के लिए भवों के बाल नोचकर अबरू को ख़ूबसूरत और बारीक बनाना यूंही दांतों को रेतकर ख़ूबसूरत बनाना हराम है* 

और एसी औरतों पर अल्लाह व रसूल की लानत है।


हदीस शरीफ़ में है हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़िअल्लाहू तआला अन्हुमा ने फ़रमाया

अल्लाह तआला की लानत गोदने वालियों पर और गुदवाने वालियों पर और बाल नोचने वालियों पर और ख़ूबसूरती के लिए दांत रेतने वालियों पर,

यानी जो औरतें दांतों को रेतकर ख़ूबसूरत बनाती हैं और अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ल की पैदा की हुई चीज़ों को बदल डालती हैं।

📚 _बुख़री शरीफ़, किताबुल्लिबास जिल्द 2 सफ़ह 880_ 


और अबू दाऊद शरीफ़ में है हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़िअल्लाहू तआला अन्हुमा ने फ़रमाया

लानत की गई बालों को जोड़ने और जुड़वाने वालियों पर, और पेशानी के बाल नोचने और नुचवाने वाली पर और गोदने और गुदवाने वाली पर, जबकि बग़ैर किसी मर्ज़ व उज़्र के ऐसा करे।

📗 _अबू दाऊद बाबुल सिलतुश्शअर जिल्द 2 सफ़ह 574_ 


और फ़तावा रज़वियह शरीफ़ में है

मर्द ख़्वाह औरत भवें


كما يفعله كفرة الهند فى الحداد"


या सियाह (यानी काला) ख़िज़ाब करे


كما فى المنادى والعزيزى والخفى شروح الجامع الصغير،،


यह सब सूरतें मसलह मो में दाखिल हैं और सब हराम।

📚 _फ़तावा रज़वियह जिल्द 9, सफ़ह 133_ 

📔 _औरतों के जदीद और अहम मसाइल सफ़ह 51-52-53_ 


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