गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

करीना ए जिन्दगी


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👉🏻कुदरत ने हर नर (male) के लिए मादा (female) और हर मादा के लिए नर पैदा फरमा कर बहुत से जोड़े आ़लम में बनाए और हर के बदन के मशीन पर मुख्तलिफ़ पुर्जों को इस अंदाज के साथ सजाया की वोह हर इक की फ़ितरत के मुताबिक़ एक दूसरे को फायदा पहुँचाने वाले और जरूरत को पूरा करने वाले हैं।
👉🏻अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने मर्द और औरत को एक दूसरे के ज़रिये सुकून हासिल करने की ख्वाहिश रखी है। चुनान्चे मज़हबे इस्लाम ने इस ख्वाहिश का एहतिराम करते हुए हमें निकाह करने का तरीका़ बताया ताकि इंसान जाइज़ तरीकों से सुकून हासिल कर सकें।

👉🏻इस जमाने में अक्सर मर्द निकाह के बाद ला इल्मी और मज़हब से दूर रहने की वजह से तरह तरह की गलती करते हैं। और नुकसान उठाते है इन नुकसानात से उसी वक्त बचा सकता है। जब के इसके मुत्अल्लिक सही इल्म हो अफसोस इस जमाने में लोग किसी आ़लिमे दीन या जानकार  शख्स से मियाँ, बीवी के खास तआल्लुकात के मुत्अल्लिक पूछने या माअलूमात हासिल करने से कतराते हैं। हालाँकि दीन की बातें और शरई मसाइल माअलूम करने में कोई शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए।
   
❣️ हमारा रब अज़्ज़ व जल्ला इर्शाद फरमाता है। 
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👉🏻  तो अए लोगों इल्म वालों से पूछो अगर इल्म न हो। 
📕 (तर्ज़ुमा कन्जुल इमान पारा १७ सूरए "अम्बिया" आयत नं ७)
 
❣️ हमारे आक़ा ﷺ इर्शाद फ़रमाते है। 
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👉🏻 इल्मे [दीन] सीखना हर मुसलमान मर्द औरत पर फर्ज है। 
📕(मिश्क़ात शरीफ जिल्द १, सफा नं ६८, कीम्या -ए- सआ़दत सफा नं १२७)
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👉🏻अक्सर देखा येह गया है के लोग मियाँ बीवी के दरमियान होने वाली खास चीज़ो के बारे में पूछने में शर्म महसूस करते हैं। और इसे बेहूदापन और बेशर्म समझते हैं। यही वह शर्म और झिझक है जो गलतियों का सबब बनते हैं। और फिर सिवाय नुकसान के कुछ हाथ नही आता है।

👉🏻एक साहब मुझसे कहने लगे "क्या यह शर्म की बात नहीं ? के आपने एसी किताब लिखी है। जिसमें सोहबत के बारे में साफ़ साफ़ खुले अनदाज़ में बयान किया गया है। अगर मैं यह किताब अपने घर पर रखूँ तो वह मेरी माँ,बहनो के हाथ में लग जाएँ तो वोह मेरे मुत्अल्लिक किया सोचेंगे कि मे कैसी गन्दी किताब पढ़ता हूँ। उनकी बात सुनकर मुझे उनकी कम अक़्ली पर अफ़सोस हुआ। मैंने उनसे सवाल किया-क्या आपके घर टीवी (t.v.)है ? कहने लगे_ _"हाँ है" मैंने कहा ।  मुझे आप बताइए "जब आप एक साथ इक ही क़मरे में अपने माँ,बहन के साथ टीवी पर फिल्म देखते हैं। और उसमें वोह सब देखते हैं। जो अपनी माँ बहनों के साथ तो क्या अकेले भी देख़ना ज़ायज़ नही तो उस वक्त आपको शर्म क्यों नहीं आती" !!

👉🏻मेरे प्यारे भाईयों शरई रोशनी  में अ़दब के दाइरे मे ऐसी माअ़लूमात हासिल करना और उसे बयान करना ज़रूरी है। और इसमें किसी किस्म की शर्म व बेहूदापन नही है।

👉🏻 देखो हमारा अल्लाह अज़्ज़ व ज़ल्ला किया इर्शाद फरमाता है।--- 
👉🏻 तर्ज़ुमा :-  और अल्लाह हक़ फ़रमाने में नही शर्माता। 
📕 [तर्जुमा :- कन्जुल इमान पारा २२, सूरए अहज़ाब, आयात ५३, ]

👉🏻हदीसो में है कि हुज़ूरे अकरम  ﷺ के  जाहिरी जमाने में औरतें तक आज्दवाज़ी [शादी शुदा ज़िन्दगी में] आने वाले मसाइल के बारे में हुज़ूर ﷺ से पूछा करती थी।

👉🏻 उम्मुलमोमेनीन हज़रत आइशा सिद्दीक़ा  [रदीअल्लाहो तआ़ला अन्हु] इर्शाद फरमाती है। 

 👉🏻 अन्सारी [मदीने मुनव्वराह की औरतें] क्या खूब है । के उन्हें दीन समझने में हया [शर्म] नही रोकती"। [यानी वोह दीनी बातें माअ़लूम करने में नहीं शर्माती]
📕 (बुख़ारी शरीफ,जिल्द १, सफा नं १५०, इब्ने माज़ा जिल्द १, सफा नं २०२]

👉🏻मअ़लूम हुआ। के दीन सीखने मे किसी किस्म की हया [शर्म] नहीं करनी चाहिए। अगर यह बात [मियाँ बीवी के दरमियान होने वाली चीजें] बेहूदा या गन्दी होती तो उसे हमारे आक़ा व मौला ﷺ क्यों बयान फरमाते और फिर सहाब-ए-किराम, आइम्म-ए-दीन, बुजुर्गाने दीन, लोगों तक इसे क्यों पहुँचाते? और इन बातों को अपनी किताबों में क्यों लिखते। क्या कोई शर्म व हया में हमारे आक़ा व मौला ﷺ से ज्यादा हो सकता है।

                  "यकीनन नही" 
 हमारा अक़ीदह  है के सरकार ने बिला झिझक वोह तमाम चीज़े हमें साफ़ साफ़ बयान फरमा दिया जिस के करने से हमारी ही ज़ात को नुकसान है। [अल्लहमदुलिल्लाह]
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👉🏻 [आयत] अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है!
👉🏻 तर्जुमा :- तो निकाह मे लाओ जो औरतें तुम्हें खुश आए! 
[तर्जुमा कन्जुल इमान पारा 4, सूरए निसा, आयात नं 3]

✍🏻  [हदीस] नूरे मुजस्सम, रसूले खुदा, हबीबे किब्रिया, नबी-ए-रहमत, शाफ-ए-महशर, फख़रे दो आलम, फख़रे बनी -ए-आदम, मालिके दो जहाँ, ख़ातमुल अम्बिया, ताजदारे मदीना राहते कल्बो सीना, जनाबे अहमदे मुज़्तबा, मुहम्मद मुस्तफा ﷺ ने इरशाद फरमाया-------
👉🏻 निकाह मेरी सुन्नत है! 
📚 [इब्ने माज़ा जिल्द 1, हदीस नं 1913, सफा नं 518,]

📚 [हदीस] और इरसाद फरमाते है हमारे मद़नी आक़ा ﷺ-------
👉🏻 "बन्दे ने जब निकाह कर लिया तो आधा दीन मुक़म्मल हो जाता है। अब बाकी आधे के लिए अल्लाह तआला से डरे" । 
📕 [मिश्कात शरीफ जिल्द 2, हदीस नं 2962, सफा नं 72,]

📚 [हदीस] हज़रत सहल बिन सअ़द [रदिअल्लाहो तआला अन्हे] से रिवायत है। कि नबी-ए-करीम ﷺ ने इरसाद फरमाया-----
👉🏻 "निकाह करो चाहे [महेर देने क लिए ] एक लोहे की अँगूठी ही हो ।" 
📕 [बुखारी शरीफ जिल्द 3, हदीस नं 136, सफा नं 80,]

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👉🏻[ हदीस ] हज़रत अब्दुल्ला बिन मसऊद [रदिअल्लाहो तआला अन्हो] से रिवायत है। सरकार ﷺ ने इरशाद फरमाया

👉🏻"एे ज़वानो तुम मे से जो औरतों के हुक़ूक़ [हको़ को] अदा करने की ताक़त रखता हो तो वोह निकाह जरूर करे। क्यों कि यह निगाह को झुक़ाता और शर्मगाह की हिफ़ाज़त करता है जो इसकी ताक़त न रखे वोह रोज़ा रखे क्यों कि यह शहवत [वासना sex] को कम करता है।"
📕 [बुखारी शरीफ जिल्द 3, सफा नं 52, तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 1, सफा नं 553,]

✍🏻 [ मसअला].... शहवत का गल़्बा [ज़वानी का जोश] ज़्यादा है और मआजअल्लाह अंदेशा है की जिना (निकाह किये बिना किसी भी शादीशुदा या गैर शादी शुदा औरतो से नाजायज शारीरीक सबंध बनाना या जबरदस्ती किसी भी औरत को वासना का शिकार बनाना) हो जाएंगा! और बीवी का महेर व ख़र्चा वगै़रह दे सकता है तो निकाह करना वाज़िब है। यु ही जब की अजनबी औरत की तरफ निगाह उठने से रोक नही सकता या माआजअल्लाह! हाथ से काम लेना पडेगा  (हस्तमैथुन किया तो भी गुनाह मे मुब्तीला होंगा) तो निकाह करना वाजीब है!

✍🏻  [ मसअला]  यह यक़ीन है कि निकाह नही करेगा तो ज़िना वाके हो जाएगा तो ऐसी हालत मे  निकाह करना फ़र्ज़  है।

✍🏻  [ मसअला ]. अगर यह अंदेशा (डर) है कि निकाह करेंगा तो बीवी का महेर, खर्चा वगैरह नही दे सकेंगा तो एसी हालत मे निकाह करना मक़रूह है।

✍🏻 [ मसअला ] यक़ीन है कि महेर और खर्चा दे ही नही सकेगा तो ऐसी हालत में निकाह करना हराम है।
📕 [बहारे शरीअ़त जिल्द 2, हिस्सा 7, सफा नं 6, (Android-software करीना-ए-जिंदगी) क़ानूने शरीअ़त जिल्द 2, सफा नं 44,]

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✔️ [किन लोगों से निकाह ज़ायज़ नही] ❌

 ✍🏻 .... दुनिया में इन्सान के वज़ूद को बाकी रख़ने के लिए क़ानूने खुदा के मुताबिक़ दो गै़र जिन्स [ Different sex, मर्द और औरत ] का आपस में मिलना ज़रूरी है लेकिन उसी खु़दा के कानून के मुताबिक़ कुछ ऐसे भीे इन्सान होते है। जिनका जिन्सी तौर पर मिलना कानूने खुदा के ख़िलाफ़ है।

✍🏻 [आयात :-].... चुनान्चे हमारा और सबका  ख़ुदा अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है।
👉🏻 तर्जुमा :-  हराम हुई तुम पर तुम्हारी माँऐ, और बेटियाँ, और बहनें, और फूफियाँ, और खालाऐं, और भतीज़ियाँ, और भांज़ियाँ, और तुम्हारी माँऐ जिन्होंने दूध पिलाया और दूध की बहनें,और औरतों की माँऐ।
📕 [तर्जुमा ए कुरआन कन्जुल इमान, पारा 4, सूर ए निसा, आयात नं 23] 

🌹👉🏻 क़ुरआने करीम की इस आयात से मअ़लूम हुआ कि माँ, बेटी, बहन, फुफी, ख़ाला, भतीज़ी, भांजी, दादी, नानी, पोती, नवासी, सगी सास, वगैरह से निकाह करना हराम है। 

✍🏻 [मसअला :-].... माँ सगी हो या सौतेली, बेटी सगी हो या सौतेली, बहन सगी हो या सौतेली, इन सब से निकाह करना हराम है। इसी तरह दादी, परदादी, नानी, परनानी, पोती, परपोती, नवासी, परनवासी, बीच में चाहे कितनी ही पुस्तों [पीढ़ियों ] का फासला हो, इन सब से निकाह करना हराम है।

✍🏻 [मसअला :-].... फूफी, फूफी की फूफी, खाला, खाला की खाला, भतीज़ी, भान्ज़ी, भतीज़ी की लड़की, उसकी नवासी, पोती, इसी तरह भान्ज़ी की लड़की, उसकी पोती, नवासी, इन सब से भी निकाह करना हराम है।
📕 [बहारे शरीअ़त जिल्द 2, हिस्सा 7, सफा नं 23, (Android software) कानूने शरीअ़त जिल्द 2, सफा नं 47,] 

📚 [हदीस :-]... हज़रत अमरा बिन्त अ़ब्दुर्रहमान व मौला अली [रदिअल्लाहो तआला अन्हुमा ] से रिवायत है। कि नबी-ए-करीम ﷺ  ने इरशाद फरमाया
💫  "रज़ाअ़त [ दूध के रिश्तों] से भी वही रिश्ते हराम हो जाते हैं जो विलादत से हराम हो जाते हैं। 
📕 [बुखारी शरीफ जिल्द 3, सफा नं 62, तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 1, सफा नं 587,] 

🌹🌹👉🏻....  यानी किसी औरत का दूध बचपन के आलम मे पिया हो तो उस औरत से माँ का रिश्ता हो जाता है। अब उसकी बेटी, बहन है उससे निकाह हराम है। यानी जिस तरह सगी माँ के जिस रिश्तेदारों से निकाह करना हराम है। उसी तरह उस दूध पिलाने वाली के रिश्तेदारों से भी निकाह करना हराम है।

✍🏻 [मसअला :-].... निकाह हराम होने के लिए ढ़ाई बरस का ज़माना है कोई औरत किसी बच्चे को ढाई बरस के अन्दर अगर दूध पिलाएगी तो निकाह हराम होना साबित हो जाएगा। और अगर ढाई बरस की उमर के बाद पिया तो निकाह हराम नही। अगर्चे बच्चे को ढाई बरस के बाद दूध पिलाना हराम है।

📕 [बहारे शरीअ़त जिल्द 2, हिस्सा नं 7, सफा नं 37, (Android software), कानूने शरीअ़त जिल्द 2, सफा नं 50, ] 

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✔️ [किन लोगों से निकाह ज़ायज़ नही] ❌

 ✍🏻 [हदीस :-] हज़रत अबूहुरैरा [रदिअल्लाहो तआला अन्हो] से रिवायत है। कि रसूलुल्लाह ﷺ  ने इरशाद फरमाया----
💫 "कोई शख्स अपनी बीवी के साथ उसकी भतीज़ी, या भान्जी से निकाह न करे " 
📕 [बुखारी शरीफ जिल्द 3, हदीस नं 98, सफा नं 6]

🌹👉🏻औरत [ बीवी ] की बहन, चाहे सगी हो या रज़ाई [यानी दूध के रिश्ते से बहन हो ] या बीवी की खाला, फूफी, चाहे रज़ाई फूफी या खाला हो इन सब से निकाह करना हराम है।

🌹👉🏻[हदीस :-].... हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास [ रदिअल्लाहो तआला अन्हुमा ] से इमाम बुखारी [ रदिअल्लाहो तआला अन्हो ] नेे रिवायत किया है।
📕 [बुखारी शरीफ जिल्द 3, बाब नं 54, सफा नं 48, ]

👉🏻🌹 [ क़ाफ़िर मुश्'रिक से निकाह ] 🌹👈🏻

✍🏻 [आयत :-] अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है।
 💫 [तर्जुमा :-]....  "और मुश'रिको के निकाह में न दो जब तक वोह ईमान न लाए। 
📕 [ तर्जुमा कुरआन कन्जुल इमान पारा 2, सूरए बखरा, आयात नं 221, ]

✍🏻 [ मसअला :- ] मुसलमान  औरत का निकाह मुसलमान मर्द के सिवा किसी भी मज़हब वाले से नहीं हो सकता। 
📕 [ कानूने शरीअ़त जिल्द 2, सफा नं 49, ]

🌹👉🏻 [आयत :-] अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है-----
💫 तर्जुमा :- और शिर्क वाली औरतों से निकाह न करो जब तक मुसलमान न हो जाए। 
📕 [तर्जुमा कुरआन कन्जुल इमान पारा 2, सूर ए बखरा, आयात नं 221, ]

✍🏻 [मसअ़ला :-] मुसलमान का आग की पूज़ा करने वाली,  बुत [मूर्ती] पूज़ने वाली, सूरज़ की पूज़ा करने वाली, सितारों को पूज़ने वाली, इन मे से किसी से निकाह नहीं होगा। 
📕 [ बहारे शरीअ़त जिल्द 2, हिस्सा नं 7, सफानं 32,(Android software)

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✔️ [किन लोगों से निकाह ज़ायज़ नही] ❌

 ✍🏻...... आज के इस दौर में अक्सर हमारे मुस्लिम नौजवान क़ाफ़िर मुश'रिक़ [बुत पूज़ने वाली, गैर मुस्लीम ] औरतों से निकाह करते हैं। और निकाह के बाद उन्हें मुसलमान बनाते है। यह बहुत गल़त तरीका है और शरीअ़त में हराम है। अव्वल तो निकाह ही नही होता क्यों कि निकाह के वक्त तो लड़की मुसलमान न थी! काफ़िर मज़हब पर थी। 
    
🌹👉🏻याद रखिए क़ाफ़िर मुश'रिक़ औरत से मुसलमान करके शादी करना जायज जरूर है लेकिन येह कोई फ़र्ज़ या वाज़िब  नही है। बल्कि हुज़ूर ﷺ ने इसे पसंद भी नही फरमाया इसकी बहुत सी वज़ूहात उलमा -ए- किराम ने बयान फ़रमायी है जिसमें से चन्द ये है।

✍🏻 1.... जिस औरत से आपने शादी की वोह तो मुसलमान हो गयी मगर उसके सारे मैक़े वाले क़ाफ़िर ही है और अब चूँकि वह आपकी औरत के रिश्तेदार है। इसलिए वोह उनसे तआ़ल्लुक़ रखती है। 

✍🏻 2.... औरत के नव मुसलमान होने की वजह से औलादौ की तरबियत ख़ालिस इस्लामी ढंग से नहीं हो पाती 

✍🏻 3.... अगर मुसलमान मर्द क़ाफ़िर औरतों से निकाह करेंगे तो मुसलमान औरत को ज़्यादा दिनो तक कुँवारा रहना पड़ेगा और मुसलमानों में मर्दो की क़िल्लत होगी तब जब औरतें ज़्यादा होगी। 

✍🏻 4.... दीने इस्लाम में मुश्'रिकाना रस्म का रिवाज़ बढ़ेगा। 

🌹👉🏻....इस तरह की कई बातें हैं जो यहां बयान करना मुमकिन नही - बेहतर यही है कि क़ाफ़िर व  मुश'रिक़ औरतो से निकाह न करे इस से दीन व दुनिया का बड़ा नुकसान है।  इसलिए अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने जहाँ मुश'रिक़ औरत से मुसलमान करके निकाह की इज़ाज़त दी वहीं मो'मिन लवंड़ी [ गुलाम लड़की ] से निकाह को ज्यादा बेहतर बताया। ब निस्बत इसके कि का़फ़िर व मुश'रिक़ औरत से निकाह किया जाए।

✍🏻 मसअ़ला .... जिसमे मर्द व औरत दोनों की अलामतें पायी जाए और यह साबित न हो कि मर्द है या औरत उससे न मर्द का निकाह हो सकता है न औरत का अगर किया गया बातिल [ झूठा ] है।
📕 [बहारे शरीअ़त जिल्द 2, हिस्सा नं 7, सफा नं 5,(Android software)

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 [ क्या वहाबियों से निकाह करें? ] 

✒️... वहाबियों से निकाह करने के मुताअ़ल्लिक इमाम इश्क़ो मुहब्बत मुजद्दिदे दीन व मिल्लत अज़ीमुल बरक़त आला हज़रत अश्शाह इमाम अहमद रज़ा खाँ [ रदिअल्लाहो तआला अन्हो ] अपनी "मलफ़ूज़ात" मे इरशाद फरमाते है।
✍🏻 [इरशाद :-].... सुन्नी मर्द या औरत का शिया, वहाबी, देवबन्दी, नेचरी, कादयानी, जितने भी दीन से फिरे लोग है उनकी औरत या मर्द से निकाह नहीं होगा। अगर निकाह किया तो निकाह न हो कर सिर्फ़ ज़िना होगा। और औलाद ज़ायज़ न होकर नाज़ायज़ व हरामी कहलाएगी
 फ़तावा-ए-आलमगीरी मे है-----
لا یجوز النکاح المرتد
مع مسلمة ولا كافرة اصلية ولا مرتدة وكذالایجوز نكاح المرتدة مع احد--

☝☝ अगर कहीं  लिखने मे गल़ती [mistake] हो तो जरूर बताऐं
📕 [ अ़लमलफ़ूज़ जिल्द नं 2, सफा नं 105, ]

✒️....अक्सर हमारे कुछ कम अक़्ल- न समझ सुन्नी मुसलमान जिन्हें दीन की माअ़लूमात व ईमान की अ़हमियत माअ़लूम नही होती वोह वहाबियों से आपस में रिश्ते जोड़ते है। कुछ बदनसीब सब जानने के बावजूद वहाबियों से आपस में रिश्ता करते हैं!
       
✒️.......कुछ सुन्नी हज़रात ख्याल करते हैं। कि वहाबी अ़क़ीदे की लड़की अपने घर ब्याह कर ला लो। फिर वोह हमारे माहौल में रहकर खुद ब खुद सुन्नी हो जाएगी अव्वल तो यह निकाह ही नही होता क्यों कि जिस वक्त यह निकाह हुआ उस वक्त तक लड़का सुन्नी और लड़की वहाबी अ़क़ीदे पर क़ायम थी। लिहाजा सिरे से ही येह निकाह ही नही हुआ।।।।।

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 [ क्या वहाबियों से निकाह करें? ] 

✒️सैंकड़ो जगह तो येह देखा गया है कि किसी सुन्नी ने वहाबी घराने मे येह सोचकर रिश्ता किया कि हम समझा बुझा कर हम अपने माहौल में रखकर वहाबी से सुन्नी बना लेंगे लेकिन वह समझा कर सुन्नी बना पाते इससे पहले ही उस वहाबी रिश्तेदारों ने उन्हें कुछ ज़्यादा ही समझा दिया और अपना हम ख़्याल बनाकर सुन्नी से वहाबी बना डाला [ अल्लाह की पनाह ] सारी होश़ियारी धरी की धरी रह गयी और दीन व दुनिया दोनों बर्बाद हो गये

✒️.... यह बात हमेशा याद रखिए एक ऐसे शख्स को समझाया जा सकता है तो वहाबियों के बारे में हक़ीक़त से वाकिफ न हो लेकिन ऐसे शख्स को समझा पाना मुम्क़िन ही नही जो सबकुछ जानता और समझता है। औलमा -ए- देवबन्द [ वहाबियों ] की हुज़ूरﷺ अम्बिया-ए-किराम, बुजुरगाने दीन, की शाने अ़क्दस में गुस्ताख़ियों को समझता है। उनकी किताबों में येह सब गुस्ताख़ाना बातों को पढ़ता है लेकिन इस सबके बावजूद येह कहता है कि येह [ वहाबी ]  तो बहुत अच्छे लोग हैं इन्हें बुरा नहीं कहना चाहिए। ऐसे लोगों को समझा पाना हमारे बस में नहीं।

✍🏻 [आयत :-] अल्लाह तआला---ऐसे लोगों के मुत्अ़ल्लिक़ इरशाद फरमाता है-----
👉🏻 तर्जुमा :- अल्लाह ने उनके दिलों पर और कानो पर मुहर कर दी और उनकी आँखों पर  घटा टूप है और उनके लिए बड़ा अज़ाब़ है। 
📕 [ तर्जुमा :- कन्जुल इमान पारा 1, सूरह ए बखरा, आयत नं 7,]

✒️.... लिहाजा जरूरी व अहम फर्ज है कि ऐसे लोगों से जिनके दिलों पर अल्लाह ने मोहर [ seal छाप ] लगा दी हो उनसे रिश्ता न क़ायम करें वर्ना शादी शादी न होकर ज़िना रह जाएगी।
    
    अल्हमदुलिल्लाह आज दुनिया में सुन्नी लड़कियों और लड़कों की कोई कमी नहीं है। और इन्शा अल्लाह तआला अहले सुन्नत व ज़माअत के मानने वाले क़यामत तक बड़ी तादाद में शानो शौक़त के साथ क़ायम रहेंगे

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             [जरा इसे भी पढ़िए] 

📚 हदीस :- हज़रत अब्दुल्ला इब्ने उमर [ रदिअल्लाहो तआला अन्हो ] से रिवायत है कि सरकार मद़ीनाﷺ ने गै़ब की खबर देते हुए इरशाद फरमाया
📚 "बेशक कौमे बनी इस्राईल  [हज़रत मूसा अलेहिस्सलाम की क़ौम ] बहत्तर [ 72 ] फ़िरक़ों में बट गयी और मेरी उम्मत तिहत्तर [ 73 ] फ़िरक़ों में बट जाएगी सब के सब ज़हन्नमी होंगे सिर्फ़ एक फ़िरक़ा जन्नती होगा। सहाब-ए-किराम, ने अर्ज किया वोह जन्नती फ़िरक़ा कौन सा होगा।

✍ हुजुर ﷺ ने इरशाद फरमाया "जो मेरे और मेरे सहाबा के तरीके़ पर चलेगा।" 
📕 [ तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 2, सफा नं 89,]

✒️....अल्हमदुलिल्लाह ! बेशक वह जन्नती फ़िरक़ा अहले सुन्नत वल ज़माअ़त के सिवा कोई नही ! क्यों कि हम सुन्नी अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त व हुज़ूरे अकरम ﷺ  के मरतबे व अ़ज़मत के और बुजुरगाने दीन की शान व इज़्ज़त के काएल हैं।
✒️....हम सुन्नियों का अ़क़ीदा है कि यह तमाम फ़िरक़े जैसे शिया, वहाबी, तबलीगी, देवबन्दी, मौदूदी, कादयानी, नेचरी, चक़डालवी, सबके सब गुमराह, बद दीन, क़ाफ़िर, और दीन से फिरे  हुए मुनाफ़िक़ है।
✒️अब ज़्यादा तर लोग सुन्नी, वहाबी, के इस इख़्तिलाफ़ को चन्द मौलवीयों का झगड़ा समझते हैं। या फिर फातिहा, उर्स, नियाज़ का झगड़ा समझते हैं येह उनकी बहुत बड़ी गल़त फहमी है।

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             [जरा इसे भी पढ़िए] 

✒️खुदा की क़सम सुन्नियों का वहाबियों से सिर्फ़ इन बातों पर इख़्तिलाफ़ नहीं है। बल्कि हम अहले सुन्नत का वहाबियों से सिर्फ़ इस बात पर सबसे बड़ा बुनियादी इख़्तिलाफ़ है। कि इन वहाबियों के उलमा व पेशवा ने अपनी किताबों में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त व हुज़ूर अकरम ﷺ और अम्बिया ए किराम, सहाब-ए-किराम, व बुजुरगाने दीन की शाने अ़कदस मे गुस्ताख़ियां लिखी है और उनकी अ़ज़मत व शान से खेला उन्हें बिद़अ़ती, क़ाफ़िर, व बेदीन, बताया [ माज़अल्लाह ] और मौजूदा वहाबी ऐसे ही ज़ाहिल उलामा को अपना बुज़ुर्ग व पेशवा मानते हैं। और उन्हीं की तआ़लीमात  व अकाईद ए बातील को दुनिया भर में फैलाते फिरते हैं। या कम अज कम उन्हे मुसलमान समझते है!

💎आयत :-अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है।

💎 तर्जुमा :-... जिस दिन हम हर ज़माअत को उसके इमाम के साथ बुलाएगे ।
📕 [तर्जुमा :- कन्जुल इमान पारा 15, सूरए बनी इस्राईल़, आयत नं 71,]

     अब हम आप लोगों के सामने इन लोगों के अक़ाएद [ faith ] उन्हीं की किताबों से पेश कर रहे हैं। जिसे पढ़कर आप खुद ही फ़ैसला़ कीजिए कि क्या ऐसी बातें कहने वाले यह लोग मुसलमान कहलाने का हक रखते है?  फैसला आप के हाथ में है।

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             [ क्या यह मुसलमान है ] 

✒️....वहाबी ज़माअत का बहुत बड़ा आलिम  "मौलवी इस्माईल देहलवी" अपनी किताब [ तक्वियतुल ईमान ] में लिखता है।

✍🏻 (1)जो कोई (किसी बुज़ुर्ग की)  नियाज़ करे, किसी बुजुर्ग को अल्लाह की बारगाह  में सिफारिश करने वाला समझे तो यह शिर्क है! और  वह शख्स और "अबूज़हल" शिर्क में बराबर हैं। [ माज़अल्लाह ]
📕 [ तक्वियतुल ईमान, सफा नं 20,]

✍🏻 (2)यकीन जान लेना चाहीये की हर मख़लूक ख्वाह छोटी हो या बडी [ जैसे अम्बिया, फिरिश्ते, औलिया, उलामा, आम मुसलमान] अल्लाह की शान के आगे चमार से भी ज़्यादा ज़लील है। [माज़अल्लाह ]
📕 [ तक्वियतुल ईमान, सफा नं 30, ]

✍🏻 (3) अल्लाह के मकर (मक्कारी) से डरना चाहीए की, धोके से डरना चाहिए कि अल्लाह बन्दो से मक्कारी भी करता है। [ माज़अल्लाह ]
📕 [ तक्वियतुल ईमान, सफा नं 76, ]

✍🏻 (4) तमाम नबी और खुद हुज़ूरﷺ अल्लाह के बेबस बन्दे है और हमारे बड़े भाई  है। [माज़अल्लाह]
📕 [तक्वियतुल ईमान, सफा नं 99,]

✍🏻 (5)हुज़ूर अकरमﷺ मर कर मिट्टी में मिल गए। [माज़अल्लाह]
📕 [तक्वियतुल ईमान, सफा नं 100, प्रकाशक :-दारूस्सालाफिया मुम्बई, ]

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             [ क्या यह मुसलमान है ] 

✒️....यही मौलवी इस्माईल देहलवी 👹 अपनी एक दूसरी किताब "सिराते मुस्तक़ीम" में लिखता है।📝

😡✍🏻(1) नमाज़ में हुज़ूर अकरम ﷺ का ख़्याल लाना अपने गधे और बैल के ख़्याल में डूब जाने से बदतर है। [ माज़अल्लाह ] 

📕 [ सिराते मुस्तक़ीम, सफा नं 119, प्रकाशक :- इदाराहे अलरशीद, देवबन्द जिला सहारनपुर ]

✒️....वहाबियों के एक दूसरे आलिम जिन्हें वहाबी 👹 हज़रत हुज्जतुल इस्लाम कहते नहीं थकते जनाब "मौलवी कासिम नानोतवी"  है जिसको मदरसा देवबन्द का बानी बतीया जाता है। अपनी एक किताब "तहजीरून्नास" में लिखते हैं।

 😡✍🏻(1) बिल-फर्ज हुज़ूरﷺ के बाद भी कोई नबी आ जाए तो भी हुज़ूर के ख़ात्मियत [ हुज़ूर के आख़िरी नबी होने ] मे कोई फर्क न आएगा। [ माज़अल्लाह ] 

📕 [ तहज़ीरून्नास, सफा नं 14, मत्बुआ मक्तबा फैज जामा मस्जीद देवबंद यु.पी.]

😡✍🏻(2) उम्मती अ़मल मे अंबीया से बजाहीर बराबर हो जाते है और बसा औकात बढ भी जाते है! [ माज़अल्लाह ] 

📕 [ तहज़ीरून्नास, सफा नं 5, प्रकाशक :- मक़तब-ए-फै़ज़, जामा मस्जिद, देवबन्द, यू-पी ]

👉🏻वहाबियों के नक़ली मुजद्दिद मौलवी 👹 "रशीद अहमद गंगोही" अपनी किताब में अपना ख़बीस अ़कीदह बयान करते हुए लिखते हैं।

😡✍🏻(1) जो सहाब-ए-किराम, को क़ाफ़िर कहे वोह सुन्नत ज़माअत से खारिज नही होगा। [ यानी सहाब-ए-किराम, को क़ाफ़िर कहने वाला मुसलमान ही रहेगा। ] [ माज़अल्लाह ] 

📕 [ फ़तावा-ए-रशीदीया जिल्द नं 2, सफा नं 11, ]

😡✍🏻(2) मोहर्रम में इमामे हुसैन [ रदि अल्लाहु तआला  अन्हो ] की शहाद़त का बयान करना , सबील लगाना, शरबत पिलाना ऐसे कामों में चन्दा देना येह सब हराम है। [ माज़अल्लाह ] 

📕 [ फ़तावा-ए-रशीदीया, जिल्द नं 2, सफा नं 114, प्रकाशक :- मक़तब-ए-थानवी, देवबन्दी, यू पी ]

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             [ क्या यह मुसलमान है ] 

✒️ इन्हीं रशीद अहमद गंगौही के शागिर्द और वहाबियों के बड़े इमाम 👹 "मौलवी खलील अहमद अम्बेठी" ने अपने उस्ताद "गंगौही" की इज़ाज़त और देख रेख में "बराहिनुल कातिअ़" नामी एक किताब लिखी आइये देखिए उसमें  उन्होंने किया गुल खिलाया है।

✍🏻 (1) हुज़ूर अकरम ﷺ से ज़्यादा इल्म शैतान को है। शैतान को ज़्यादा इल्म होना क़ुरआन से साबित है जबकि हुज़ूर का इल्म क़ुरआन से साबित नहीं है। जो शैतान से ज़्यादा इल्म हुज़ूर का बताए वोह मुश'रिक़ [ बुतो की पूज़ा करने वाला क़ाफ़िर ] है। [ माज़अल्लाह ] 
📕 [ बराहिनुल कातिअ़, सफा नं 55, ]

✍🏻(2) अल्लाह तआला झूठ बोलता है। [यानी अल्लाह झूठा है।] [माज़अल्लाह] 
📕 [ बराहिनुल कातिअ़, सफा नं 273, ]

 ✍🏻 (3) हुज़ूर अकरमﷺ का मीलाद [ईदे मिलादुन्नबी ] मनाना कन्हैया [ हिन्दूओ के देव ] के जन्मदिन मनाने की तरह है। बल्कि उससे भी ज़्यादा बदतर है। [ माज़अल्लाह ] 
📕 [ बराहिनुल कातिअ़, सफा नं 152, ]

✍🏻(4) हुज़ूर ﷺ ने उर्दू ज़बान मदरसा-ए-देवबन्द में आकर उलमा-ए-देवबन्द से सीख़ी  [ माज़अल्लाह ] 
📕 [बराहिनुल कातिअ़, सफा नं 30, ]

✍🏻 (5) हुज़ूरﷺ को दीवार के पीछे का भी इल्म नहीं । [ माज़अल्लाह ] 
📕 [बराहिनुल कातिअ़, सफा नं 55, प्रकाशक :- "कुतुब खाना इमदादिया" देवबन्द यू पी ]

✒️यह है "मौलवी अशरफ अली थानवी" जो वहाबियों के हकीमुल उम्मत है और वहाबियों के नजदीक इनके पैर धोकर पीने से नज़ात मिलती है। यह साहब अपनी किताब में लिखते हैं।

✍🏻 (1) नबी-ए-करीम ﷺ को जो इल्मे गै़ब है इसमें हुज़ूरﷺ का क्या कमाल ऐसा इल्मे गै़ब तो हर किसी को हर बच्चे व पागलों बल्कि तमाम जानवरों को भी हासिल है। [ माज़अल्लाह ] 
📕 [ हिफ़जुल इमान, सफा नं 8, प्रकाशक :- दारूल किताब, देवबन्द यू पी ]

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             [ क्या यह मुसलमान है ] 

✒️ ✍🏻 (2) इन्हीं  थानवी साहब की एक किताब "रिसाला-ए-अलइम्दाद" मे है कि इनके एक मुरीद ने कलमा पढ़ा "ला इलाहा इल्लल्लाह अशरफ अली रसूलुल्लाह" [ माज़अल्लाह ] और अपने पीर अशरफ अली थानवी से पूछा कि "मेरा यह कलमा पढ़ना कैसा है" ?

✒️इसके जवाब में थानवी साहब ने कहा----- तुम्हारा ऐसा कहना ज़ायज़ है तुम इसके लिए परेशान न हो तुम अगर इस तरह का कलमा पढ़ रहे हो तो सिर्फ़ इस वजह से के तुम्हें मुझ से मुहब्बत है। लिहाजा तुम्हारा ऐसे कलमा पढ़ने में कोई हर्ज नहीं । [ माज़अल्लाह ]
📕 [ रिसाल-ए-इम्दाद, सफा नं 45, ]

✒️थानवी साहब की एक और फ़तवे की किताब "बहेशती ज़ेवर"  में है। कि हाथ में कोई न
ज़िस [ ना पाक़ ] चीज़ [ पेशाब, आदमी का, जानवर का, पाखाना वगैरह ] लग जाए तो किसी ने जबान से तीन (3) मर्तबा चाट लिया तो पाक़ हो जाएगा। मगर चांटना  मना है! [ माज़अल्लाह ]
📕 [ बहेशती ज़ेवर, जिल्द नं, 2 सफा नं 18, ]

👉🏻 येह है जनाब "मौलवी इल्यास कानदहलवी" जो तबलीग़ी ज़माअत के बानी [ Founder ] है। इनका कहना है कि-----

✍🏻 (1).... अल्लाह तआला अगर किसी से काम लेना नहीं चाहते तो चाहे तमाम अंबीया (नबी) भी कितनी कोशिश कर ले तब भी ज़र्रा नही हिल सकता और अगर लेना चाहें तो तुम जैसे जईफ से भी वह  काम ले ले जो अंबीया (नबियों) से भी न हो सके। [ माज़अल्लाह ]
📕 [ मक़ातिबे इल्यास, सफा नं 107, प्रकाशक :- इदारहे इशाअ़ते दीनियात नई दिल्ली। ]

👉🏻यह है जनाब "मौलवी अबूआला मौदूदी" जिन्होंने  जमाअ़ते-इस्लामी नाम की एक नई जमाअ़त क़ायम की थी। आज इस जमाअ़त की कई ज़ायज़ व ना ज़ायज़ औलादें S-I-M S-I-O के नाम से वज़ूद में आ चुकी है। जो मौदूदी ताअ़लीमात को फैला रही है इनके नजदीक मौदूदी ही सबकुछ है चुनान्चे इन्हें मौदूदी साहब हुक़्म देते हैं।

✍🏻(1) तुम को खुदा की मरज़ी के मुताबिक ज़िन्दगी बसर करने का तरीक़ा नही माअ़लूम अब तुम्हारा फर्ज है। कि खुदा के सच्चेे पैग़म्बर की तलाश करो इस तलाश मे तुमको निहायत  होश़ियारी और समझ बुझ  से काम लेना चाहीये! क्यो के अगर किसी गलत आदमी को तुमने पैगंबर समझ लिया तो वह तुम्हे गलत रास्ते पर  लगा देंगा! मगर जब तुम्हे खुब जॉंच पडताल करने के बाद यह यकीन हो जाए के  फ़लां शख्स खुदा का सच्चा पैग़म्बर है तो उस पर तुम्हें पूरा भरोसा करना चाहिए। और उसके हर हुक़्म की इताअ़त करनी चाहिए। [ माज़अल्लाह ] 
(मुख्तसर यह के मौदुदी साहब के नजदिक इस दौर मे भी खुदा का सच्चा पैगंबर तलाश करने की जरूरत है और यह तलाश फर्ज है)
📕 [ रिसाल-ए-दीनियात, सफा नं 47, प्रकाशक :- मरक़जी मक़तबा इस्लामी, दिल्ली, ]

👉🏻 यही मौदूदी साहब अपनी दूसरी किताब में लिखते हैं।
✍🏻 (2)....जो लोग हाज़ते माँगने अजमेर [ ख़्वाज़ा ग़रीब नवाज़ की मजार पर ] या फिर सैय्यद़ सैय्यद़ सालार मसऊद गाज़ी की मजार पर या ऐसे ही दुसरे मकामात पर जाते हैं। वोह इतना बड़ा गुनाह करते हैं। कि कत्ल  और जिना भी उस से कमतर [ कम ] है। [ माज़अल्लाह ]
📕 [ तजदीदो इहया-ए-दीन, सफा नं 96 प्रकाशक :-  मरक़जी मक़तबा इस्लामी, नई दिल्ली ]

👉🏻 यही अबूआला मौदूदी अपनी एक और किताब में अपनी यह ही आला दर्ज़े की बक़वास लिखते हैं। कि
✍🏻 (3) सब जगह अल्लाह के रसूल अल्लाह की किताब लेकर आए और बहुत मुम्क़िन है। कि बुध, कृष्ण, राम, मानी, सुकरात, फ़िसा, गोरस, वगैरह इन्हीं रसूलो में से हो । [ माज़अल्लाह ]
📕 [  तफहीमात, जिल्द नं 1, सफा नं 124, प्रकाशक :- मरक़जी मक़तबा इस्लामी, नई दिल्ली, ]

👉🏻 वहाबियों के पीरो के पीर "महमूदुल हसन" ने अपनी एक किताब में लिख मारा कि

✍🏻 (1).... झूठ, ज़ुल्म व तमाम बुराइयां [ जैसे चोरी, जहालत, ज़ुल्म, गी़बत, ज़िना, वगैरा ] करना अल्लाह के लिए कोई  ऐब नही, और न इन कामों के करने की वजह से उस की ज़ात में कोई नुकसान आ सकता है। [ माज़अल्लाह ]
📕 [ जहदुलमक़्ल, जिल्द नं 3, सफा नं 77, ]

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             [ क्या यह मुसलमान है ] 

[ आयत :- ] हमारा रब जल्ला जलालहु इरशाद फरमाता है कि
💎 तर्जुमा :- तुम फ़रमाओ के अपनी दलील लाओ अगर तुम सच्चे हो।
📕 [ तर्जुमा :- कन्जुल इमान, सूरए नम्ल, पारा 20, रूकू 1, आयत नं 64, ]

✍🏻 [ आयत :-] और एक दूसरी जगह इरशाद फरमाता है। कि
💎 तर्जुमा :- जब सुबूत ना ला सके तो अल्लाह के नज़दीक वही झूठे हैं।
📕 [ तर्जुमा :- कुरआने करीम, सूरए नूर, पारा 18, रूकू 8, आयत नं 13, ]

🚫वहाबियों के यही वोह अक़ाएद [ faith ] है जिनकी वजह से ओलमा-ए-हरमैन तय्यबैन [ मक्का-ए-मुअ़ज़्ज़मा, व मद़ीना शरीफ के ] और दुनिया के तमाम ओलमा-ए-दीन ने वहाबियों को क़ाफ़िर, गुमराह, बद्'दीन, मुरतद, [ दीन से फिरे हुए ] और मुनाफ़िक़ करार दिया।

✍🏻 उलमा-ए-किराम इन लोगों के बारे में फरमाते है।
📚 "जो इन [ वहाबियों ] के क़ाफ़िर होने मे और इनके अ़ज़ाब में शक करे वोह खुद भी क़ाफ़िर है"।
📕 [ हस्सामुल हरमैन, ]

✍🏻 [ हदीस :-].... हज़रत अबूह़ुरैरा, हज़रत अनस बिन मालिक, हज़रत अब्दुल्लाह बिन ऊमर, व हज़रत जाबिर [रदिअल्लाहो तआला अन्हो ] रिवायत करते हैं। कि हुज़ूरे अक़दसﷺ  ने इरशाद फरमाया
👉🏻 "अगर बद़ मज़हब, बेदीन, मुनाफ़िक़ बीमार पड़े तो उनको पूछने  न जाओ, और अगर वोह मर जाए तो उनके ज़नाज़े पर न जाओ, उनको सलाम न करो, उनके पास न बैठो, उनके साथ न खाओ न पियो, --- न ही उनके साथ शादी करो--- न उनके साथ नमाज़ पढ़ो,"
📕 [ मुस्लिम शरीफ, अबूूदाऊद शरीफ, व इब्ने माज़ा शरीफ, मिश्क़ात शरीफ, ]

📚  [ हदीस :-].... हज़रत इब्ने अ़दी [ रदिअल्लाहो तआला अन्हो ]  हज़रत मौला अली [रदिअल्लाहो तआला अन्हो] से रिवायत करते है कि हुज़ूर अकरम ﷺ ने इरशाद फरमाया
📚  जो मेरी इज़्ज़त न करे और मेरे अन्सारी सहाबा और अ़रब के मुसलमानो का हक़ न पहचाने वोह तीन हाल से खाली नहीं,
            (1)या तो मुनाफ़िक़ है, 
            (2)या हराम की औलाद,
            (3) या हैज़ [ माहवारी ] की हालत में जना हुआ।
📕 [  बयहक़ी शरीफ, बहवाला इसअ़तुल अ़दब लफ़ाज़िलिन्नसब, सफा नं 46, अज :- आला हज़रत, ]

 📕 [ हदीस :-]....हज़रत इकरेमा [ रदिअल्लाहो तआला अन्हो ] रिवायत करते हैं।  हज़रत मौला अली [ रदिअल्लाहो तआला अन्हो ] की ख़िदमत में कुछ बद'दीन, गुस्ताख़, पेश किए गएे तो आपने उन्हें ज़िन्दा जला दिया जब यह खबर इब्ने अब्बास [ रदिअल्लाहो तआला अन्हो ] को पहुँची तो उन्होंने ने फरमाया
✒️😳के अगर मै होता तो उन्हें न जलाता क्योंकि रसूलुल्लाह ﷺ ने किसी को जलाने से मना फरमाया है बल्कि उन्हें कत्ल करता कि रसूलुल्लाह ﷺ  ने इरशाद फरमाया "जो अपना दीने इस्लाम तब्दील करे उसे कत्ल कर दो"।
📕 [ बुखारी शरीफ, जिल्द 3, हदीस नं 1814, सफा नं 658, ]

💎 [ आयत :-] अल्लाह जल्ला जलालहु इरशाद फरमाता है
💎  तर्जुमा :- ऐ गै़ब की ख़बर देने वाले [ नबी ] जिहाद [ जंग ] फ़रमाओ क़ाफ़िरो, और मुनाफ़िक़ो पर और सख़्ती करो।
📕 [ तर्जुमा :- कन्जुल इमान, सूरए तौबा, पारा 10, आयत नं 73, ]

[ आयत :-].... अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है
💎 तर्जुमा :- और तुम मे से जो कोई उनसे दोस्ती करे वोह उन्हीं मे से है।
📕 [ तर्जुमा :- कन्जुल इमान, पारा 6, सूरए माएदह, आयत नं 51, ]

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......
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           📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣7️⃣

      🙎🏻‍♂️🧕🏻 करीना-ए-ज़िंदगी 🧕🏻🙎🏻‍♂️

              🤔🔵 ज़रा सोचिए 🔵🤔
  
🤔 अब भी क्या कोई ग़ैरतमन्द इन्सान अपनी बेटी ऐसे क़ाफ़िरो, मुनाफ़िक़ो के यहाँ ब्याहना पसंद करेगा ?। 🚫

🤔 अब भी क्या कोई ग़ुलामे रसूल इन गुस्ताख़ वहाबियों की लड़कियाँ अपने घर लाना गंवारा करेगा?। 🚫
          
🤔 अब भी क्या कोई आशिके़ नबी अपने नबी के इन गुस्ताख़ो से रिश्ता जोड़ना चाहेगा?। 🚫
           
✒️❓हमारा यह सवाल उन लोगों से है। जिनमें ग़ैरत का ज़रा सा भी हिस्सा बाकी है जिन्हें दौलत से ज़्यादा अल्लाह व रसूल की खुशी प्यारी है। और रहे वोह लोग जो किसी दुनियावी लालच या हुस्न व जमामाल या फिर माल व दौलत से मुतास्सिर [ Impres ] होकर वहाबियों से रिश्ता बनाए हुए है या रिश्तेदारी  करना चाहते हैं तो उनके मुत्अ़ल्लिक़ ज़्यादा कुछ कहना फ़ुजूल है। वोह अपनी इस हवस व लालच मे जितनी दूर जाना चाहें चले जाए अब इस्लाम का कोई कानून,  शरीअ़त की कोई दफअ़, कोई ज़न्जीर उनके इस उठे हुए क़दम को नही रोक सकती।  लेकिन हाँ ! हाँ याद रहे यक़ीनन एक दिन अल्लाह और

उसके रसूल को मुँह दिखाना है।

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           📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣8️⃣

      🙎🏻‍♂️🧕🏻 करीना-ए-ज़िंदगी 🧕🏻🙎🏻‍♂️

               🤔  [ निकाह कहाँ करें ]🤔

📚 हदीस :- उम्मुलमोमेनीन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा, हज़रत अनस बिन मालिक, हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने ऊमर [ रदिअल्लाहो तआला अन्हा ] से रिवायत है। कि हुज़ूर अक़दस ﷺ ने इरशाद फरमाया
📚  "अपने नुत्फे़ [ शादी के लिए ] अच्छी जगह तलाश करो, अपनी बिरादरी में ब्याह हो, और बिरादरी से ब्याह कर लाओ कि औरतें अपने ही कुन्बे [बिरादरी] के मुशाबा [मिलते हुए बच्चे पैदा करती है।] 
📕 [ इब्ने माज़ा, जिल्द नं 1, हदीस नं 2038, सफा नं 549, बयहक़ी शरीफ़, व हाकिम, ]

👉🏻इस हदीसे पाक से पता चलता है कि अपनी ही बिरादरी में शादी करना बेहतर है। अपनी ही बिरादरी में निकाह करने के बहुत से फायदे हैं जैसे-
1️⃣ औलाद अपनी बिरादरी के लोगों के चेहरे से मिलती जुलती पैदा होंगी जिस की वजह से दूसरे लोग देखते ही पहचान लेंगे कि यह सैय्यद है, यह पठान है, यह शैख है वगैरह।

2️⃣ दूसरा यह फ़ायदा है कि बिरादरी की गरीब लड़कियों की जल्द से जल्द शादी हो जाएगी, और शादी मे खर्च कम होंगे!

3️⃣ तीसरा फायदा यह है कि अपनी ही बिरादरी की लड़की हो तो वह  बिरादरी के तौर तरीके, घर के रहन सहन तहजीब व तमद्दुन से पहले से ही जानकार होती है लिहाज़ा घर में झगड़े ना इत्तेफ़ाक़ियां का माहोल पैदा नही होगा!

4️⃣ चौथा फ़ायदा यह है कि बिरादरी की ऐसी लड़कियाँ जो देखने दिखाने में ज़्यादा खूबसूरत नहीं होती उनकी भी शादी हो जाएेगी। अक्सर देखा गया है कि लोग दूसरे बिरादरी की खूबसूरत लड़कियों को ब्याह कर लाते हैं। जब के उनके बिरादरी की बद सूरत लड़कियाँ कुंवारी रह जाती है और बहुत सी लड़कियों की जब शादी नही हो पाती तो वह किसी बदमाश, आवारा, मर्द के साथ भाग जाती है या फिर तरह तरह की बुराइयों में फँस जाती है यही वजह है कि बिरादरी में ही शादी करना बेहतर बताया गया।

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           📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣9️⃣

      🙎🏻‍♂️🧕🏻 करीना-ए-ज़िंदगी 🧕🏻🙎🏻‍♂️

               🤔  [ निकाह कहाँ करें ]🤔

📚 हदीस :- हज़रत इमाम बुखारी [ रदिअल्लाहो तआला अन्हो ] रिवायत करते हैं कि
👉🏻  "और मुस्तहब [ अच्छा बेहतर ] है के अपनी नस्ल के बेहतर औ़रत चुने लेकिन यह वाज़िब नही" [ सिर्फ मुस्तहब  है ]
📕 [  बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 41, सफा नं 56, ]

📚 हदीस :- हज़रत अनस [ रदि अल्लाहु तआला अन्हो ] से रिवायत है। कि नबी-ए-करीमﷺ ने इरशाद फरमाया
👉🏻 "अच्छी नस्ल में शादी करो [रगे खुफ़या काम करती है ]"
📕 [ दारक़ुत्नी शरीफ, बहवाला इराअतुल अदब लेफ़ाज़िलिल नसब, सफा नं 26, अज़ :- आला हज़रत ]

📚 [ हदीस :-]...और फरमाते है आक़ा ﷺ 
📚 "घोड़े की हरयाली से बचो, बुरी नस्ल में खूबसूरत औरतों से,"
📕 [ दारक़ुत्नी शरीफ, बहवाला इराअतुल अ़दब लेफ़ाज़िलिल नसब, सफा नं 26, अज़ :- आला हज़रत ]

👉🏻लड़की का खूबसूरत होना ही काफ़ी नही बल्कि ख़ूबी तो येह है कि लड़की पर्दादार,  नमाज़ रोज़े की पाबंद हो, उसका खानदान  रहेन-सेहन, तहज़ीब व अख़्लाक, मे और ख़ास तौर पर मज़हबी अक़ाएद मे बेहतर हो  (बिल खुसुस सहीउल अकीदा सुन्नी हो) । अगर आपने यह सब चीजों को देख कर निकाह किया तो आप .की दुनिया व आख़िरत कामयाब है और आगे ऐसी लड़की के जरिए, फ़रमांबरदार, मज़हबी और दुनियावी ख़ूबियों वाली बेहतर नस्ल जन्म लेती है। चुनान्चे सरकारे दो आलमﷺ  ने हमें यही हुक़्म दिया है।

📚 [ हदीस :- ]....हज़रत अबूह़ुरैरा व हज़रत जाबिर [ रदिअल्लाहो तआला अन्हुम ] से रिवायत है। कि हुज़ूर अकरमﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "औरत से चार चीजों की वजह से निकाह किया जाता है। उसके दौलत, उसके खानदान, उसके हुस्न व ज़माल, और उसके दीनदार होने की वजह से, लेकिन तू दीनदार औरत को हासिल कर"!
📕 [ बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 59, तिर्मिज़ी शरीफ. जिल्द नं 1, सफा नं 555, ]

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           📮 पोस्ट नम्बर 2️⃣🅾️

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               🤔  [ निकाह कहाँ करें ]🤔

📚 [ हदीस :-]....नबी-ए-करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया "औरतों से उनके हुस्न के सबब से शादी न करो हो सकता है उनका हुस्न तुम्हें तबाह कर दे, न उन से माल की वजह से शादी करो हो सकता है उनका माल तुम्हें गुनाहो मे मुब्तला न कर दे, बल्कि दीन की वजह से निकाह किया करो। काली चपटी, बदसूरत लौन्डी अगर दीनदार हो तो बेहतर है।"
📕 [ इब्ने माज़ा, जिल्द नं 1, हदीस नं 1926, सफा नं 522, ]

👉🏻इमाम ग़ज़ाली  [ रदि अल्लाहु तआला अन्हो ] इरशाद फरमाते है"अगर कोई औरत खूबसूरत तो है मगर दीनदार व परहेज़गार व पारसा नही तो बुरी बला है
-बद मिज़ाज औरत, ना शुक्रगु़जार, और ज़बान दराज़ होती है और मर्द पर बेजा हुकूमत करती हैं, ऐसी औरत के साथ जिन्दगी बदमज़ा हो जाती है और दीन में ख़लल पड़ता है।"
📕 [ कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 260, ]

👉🏻याद रखिये अगर आप ने सिर्फ ऐसी लड़की से निकाह किया जो माल व दौलत (जहेज) ख़ूब  साथ लाई और खूबसूरत भी बहुत थी लेकिन दीनदार नही और न ही तहज़ीब व इख़्लाक के मामले में बेहतर, तो आप उस के साथ यक़ीनन एक अच्छी और खु़शहाल जिन्दगी नहीं गुज़ार सकते, ऐसी लड़की की वजह से घर में हमेशा तनाव रहता है और आखिर कार माँ, बाप, से दूर होना पड़ जाता है इसलिए जहां आप खूबसूरती, माल व दौलत, को देखते है। इन सब से ज़्यादा जरूरी है कि आप उस का इख़्लाक, उस का खानदान और खास तौर से दीनदार है कि नही येह जरूर देखें, तभी आप कामयाब ज़िन्दगी के मालिक बन सकते हो।

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              📮 पोस्ट नम्बर 2️⃣🅾️

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          🤔  [ निकाह कहाँ करें ]🤔

➡️अगर एक 👰🏻 खूबसूरत लड़की में येह सब खूबियां नही और उसके उलट किसी 👰🏽बदसूरत लड़की में दीनदारी है तो वोह बदसूरत लड़की उस खूबसूरत लड़की 😊 से बेहतर है।

😟अक्सर हमारे भाई दौलतमन्द, 🧍🏻‍♀️फै़शन प्रस्त लड़की पर मरते हैं और 💵 दौलत को बहुत अ़हमियत देते हैं जब के दौलत से ज़्यादा 🕌 दीनदारी को अ़हमियत देनी चाहिए।

📚 हदीस :- हुज़ूर अकरमﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "जो कोई ज़माल (ख़ूबसूरती) या माल व दौलत की ख़ातिर किसी औरत से निकाह करेगा तो वोह दोनों से मेहरूम रहेगा और जब दीन के लिए निकाह करेगा तो दोनों मकसद पूरे होंगे"
📕 [ कीम्या-ए-सआ़दत, सफा नं 260, ]

📚 हदीस :- और फरमाया रसूलुल्लाह ﷺ ने
💎 "औरत की तलब दीन के लिए ही करनी चाहिए जमाल (खूबसूरती) के लिए नही"।
💟 इसके माना यह है कि सिर्फ़ खूबसूरती के लिए निकाह न करें। न यह कि खूबसूरती ढ़ून्डे़ ही नहीं, अगर निकाह करने से सिर्फ़ औलादें हासिल करना और सुन्नत पर अ़मल करना ही किसी शख़्स का मक़सद है खूबसूरती नहीं चाहता तो येह परहेज़गारी है।
📕 [ कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 260, ]

💎 आयत :- अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है
💎 तर्जुमा :- अगर वह फक़ीर (गरीब) हो तो अल्लाह उन्हें ग़नी कर देगा। अपने फज़्ल के सबब
📕 [ तर्जुमा :- कन्जुल इमान, पारा 18, सूरए "नूर", आयत नं 32, ]

➡️💟लिहाजा अगर किसी लड़की में दीनदारी ज़्यादा हो चाहे वोह कितनी ही गरीब क्यों न हो उससे शादी करना बेहतर है क्या अज़ब के अल्लाह तआला उससे शादी करने की और उस की बरक़त से आप को भी दौलत से नवाज़ दे । आप को उस नेक व गरीब लड़की से वोह ही खुशी व सुकून मिल सकता है जो एक दौलतमन्द बद मिज़ाज, मार्डन (modern) फ़ैशन की परस्त लडकी से नही मिल सकता! हाँ अगर कोई  लडकी दौलतमन्द होने के साथ-साथ ही दीनदार, नेक सिरत, अच्छे अख़्लाक वाली हो, पर्दादार हो और  ऐसी  लडकी कोई शादी करे तो यह यकीनन बडी खुश नसीबी की बात है बेशक अल्लाह तआला माल व दौलत, व चेहरों को नही देखता बल्कि तक़वा व परहेज़गारी को देखता है।

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              📮 पोस्ट नम्बर 2️⃣1️⃣

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     🔵 [ शादी के लिए इस्तेख़ारा ] 🔵

➡️किसी नये काम को शुरु करने से पहले इस्तेख़ारा करना चाहिए, इस्तेखा़रा उस अमल को कहते है जिसके करने से ग़ैबी तौर पर यह माअ़लूम हो जाता है के फु़ंला काम करने मे फ़ायदा है या नुक़सान। अगर वह काम आपके लिये अच्छा है तो इस्तेखारा की बरकत से गैब से असबाब पैदा हो जाते है❗और अगर वह काम आपके लिये बेहतर नही है तो कुदरती तौर पर इंसान इस काम से रुका रहता है❗

💟👉🏻इस्तेखा़रा और "शगून" में बहुत फ़र्क़ है इस्तेखा़रा में किसी नये काम शुरू करने में अल्लाह से दुआ़ करना और उसकी मर्ज़ी माअ़लूम करना मक़सद होता है। जबकि शगून जादूगरो, छू- छा करने वाले, सितारों से, परिन्दो से, सिफ्ली इल्म जानने वालो से,  नुजूमीयो से ज्योतिषीयों, वगै़रह , और इस तरह की दूसरी चीज़ों के जरिए लेते हैं।

🛑👉🏻इसी तरह जादुगर, नुजुमी ज्योतिषी और सिफली इल्म जानने वालो के पास आगे पेश होने वाले हालात जानने के लिये जाना और उनकी बातो पर यकीन करना कुफ्र है!

📚 हदीस :- सरकारे मद़ीना ﷺ ने इरशाद फरमाया "जो किसी काहीन (भवीष्य बताने वाला) के पास जाए और उसकी बात सच्ची समझे तो वह काफीर हुआ उस चिज से जो मुहम्मद मुस्तफा ﷺ पर नाजील हुई!
📚 (अबु दाऊद शरीफ जिल्द नं ३, बाब नं २०३, हदिस नं ५०७)

और फरमाते है नबी ए करीम ﷺ जो किसी काहिन के पास जाए और उससे कोई गैब की बात पुछे, तो उसकी चालीस दिन तौबा कबुल ना हो! और काहीन की बात पर यकीन रखे तो काफीर हो गया!

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              📮 पोस्ट नम्बर 2️⃣2️⃣

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     🔵 [ शादी के लिए इस्तेख़ारा ] 🔵

➡️फतावा तारखानीया मे है! जो कहे मै छिपी हुई चिजो को जान लेता हू, या जिन्न के बताने से बता देता हु, तो वह काफीर है!

👉🏻इसी तरह शगुन लेना शरीयत ए इस्लामी मे शिर्क बताया गया है! शिर्क करने वाला हमेशा हमेशा जहन्नम मे रहेंगा!

📚  हदिस  हजरत इब्ने मसऊद रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने रसुल ए करीम ﷺ का यह इरशाद बयान किया है! "शगुन लेना शिर्क है, शगुन लेना शिर्क है, अगरचे अक्सर लोग शगुन लेते है!
📚 (मिश्कात शरीफ, जिल्द नं २, हदिस नं ४३८०)

➡️"तबरानी" ने हजरत इब्ने उमर रदिअल्लाहु तआला अन्हु के हवाले से लिखा है!
       "शगुन लेना शिर्क शिर्क है, और यह अल्फाज तिन मरतबा अदा किये! फिर कहा  " सफर को जाने वाला किसी शगुन की वजह से लौट आए तो उसने हुजुर ﷺ पर नाजील शुदा अहकाम ए इलाही याने (कुरआन ए करीम) का इंकार किया!
(तबरानी शरीफ)

➡️    "रिवायत है के जो शख्स किसी शगुन की  रु (वजह) से अपना काम न कर सका तो यकीनन उसने शिर्क किया!
📚 (मा सबता बिसुन्नह फी अय्यामिन सुन्नह सफा नं ६३)

➡️  इस्तेखा़रा में किसी नये काम शुरू करने में अल्लाह से दुआ़ करना और उसकी मर्ज़ी माअ़लूम करना मक़सद होता है।  यह रसूलुल्लाह ﷺ, सहाबाए किराम और बुजु़र्गाने दीन का तरीक़ा है।
____________

📚 [ हदीस :- ].... हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह [ रदिअल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत करते हैं।--------
____________

      रसूलुल्लाह ﷺ हमें हर काम में हमें इस्तेखा़रा की तलक़ीन फ़रमाते थे जैसे क़ुरआन की कोई सूरत सिखाते"

📕 [ बुखारी शरीफ, जिल्द 1, सफा नं 455, तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द 1, सफा नं 292, ]   

📚 हदीस :- सरकारे मदिना ﷺ  ने इरशाद फरमाया
        "अल्लाह तआला ने इस्तेखा़रा करना औलादें आदम  [ इन्सानो ] की ख़ुशबख़्ती  है और इस्तेखा़रा न करना बद बख़्ती  है"।   
       इस्तेखा़रा किसी भी नये काम को शुरू करने से पहले करना चाहिये जैसे नया कारोबार शुरू करना हो, नया मकान बनानाया ख़रीदना हो, किसी सफ़र पर जाना हो, या कोई नयी चीज़ ख़रीदना है, वगैरह  वगैरह  इन सब  में नुकसान होगा या फ़ायदा यह जानने के लिए इस्तेखा़रा का अ़मल किया जाना चाहिए।

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     🔵 [ शादी के लिए इस्तेख़ारा ] 🔵

➡️अब चूंकि शादी एक ऐसा काम है जिस पर सारी ज़िन्दगी के आराम व सुकून का दारोमदार है बीवी अगर नेक, परहेज़गार, मुहब्बत करने वाली, ख़ुशमिज़ाज होगी तो ज़िन्दगी ख़ुशियों से भरी होगी और आने वाली नस्ल भी एक बेहतर नस्ल साब़ित होंगी। लेकिन अगर बीवी बदमिज़ाज, बदक़ार, बेवफ़ा, हुई तो सारी ज़िन्दगी झगड़ो से भरी और सुकून से खाली होगी। यहाँ तक कि तलाक़ तक नौबत पहुँच जाऐगी। लिहाजा जरूरी है कि शादी से पहले ही माअ़लूम कर लिया जाए के जिस औरत को अपनी शरीकेे जिन्दगी [ बीवी ] बनाना चाहता है। वोह दीन व दुनिया के एतेबार से बेहतर साबित होगी या नहीं।

📚 हदीस :- हज़रत इब्ने ऊमर व हज़रत सहल  बिन सअ़द [रदिअल्लाहो तआला अन्हुमा ] से रिवायत है कि हुज़ूरे अकरम ﷺ ने इरशाद फरमाया
   💫    "अगर नहुसत किसी चीज़ में है तो वह घर, औरत, और घोड़ा है [ यानी अगर दुनिया मे  कोई चीज़ मन्हूस होती तो यह हो सकती थी, लेकीन होती नही हैं ]
📕 [ मुस्नदे इमामे आ़ज़म बाब नं 121, सफा नं 211,मोता इमाम मालिक़, जिल्द नं 2, बाब नं 8, हदीस नं 21, सफा नं 207, बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 47, हदीस नं 86, सफा नं 61, तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 2, बाब नं 327, हदीस नं 730, सफा नं 295, अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 3 बाब 206, हदीस नं 524, सफा नं 186,  नसाई शरीफ, जिल्द नं 2, सफा नं 538,  इब्ने माज़ा, जिल्द नं 1, बाब नं 643, हदीस नं 2064, सफा नं 555, मिश्क़ात शरीफ, जिल्द नं 2, हदीस नं 2953, सफा नं 70, मासबता बिस्सुन्ना,  सफा नं 70, ]

👉🏻 इमाम तिर्मिज़ी [रदिअल्लाहो  तआला अन्हु ] इस हदिस के मुत्ताल्लीक इरशाद फरमाते है
💫यह हदीस हसन सही है هذا حديث حسن صحيح" यह हदीस अहादीस की और दीगर किताबों जैसे मुस्लिम शरीफ, मुस्नदे इमाम अहमद, तबरानी वगैरा में भी नक़्ल है। इस से पहले एडीशनो में हमने ये हदीस बुखारी के अ़ल्फाज़ मे नक़्ल की थी और हालाँकि अपनी तरफ से इस पर कोई तबसेरा भी नही किया था। लेकिन इस के बावजूद कुछ ना वाक़िफ़ो ने इस पर एतराज़ात किये थे। लिहाजा इस बार मज़ीद हवाले बढ़ा दिये गये है। अब भी अगर किसी साहब का हम पर इल्ज़ाम बाकी हो  तो वोह हमसे सही हवाले देख सकते हैं।

📚 शरह :- इमामे आ़ज़म अबू हनीफा [रदिअल्लाहो तआला अन्हो] इस हदीस की तशरीह में फरमाते है कि 
👉🏻घर की नहुसत यह है कि वह तंग [छोटा] हो [और बुरे पड़ोसी हो]  घोड़े की नहुसत यह है के सरकश हो! औरत की नहुसत यह है के बद अख्लाख हो, हजरत इमाम हसन बिन सुफियान रदिअल्लाहु तआला अन्हु ने उसमे इजाफा किया और कहा की बद अख्लाख और बांज हो! 
📕 [ मुस्नदे इमामे आ़ज़म, बाब नं 121, सफा नं 212,

✍🏻 शरह :- इसी हदीस की शरह में आ़ला हज़रत इमाम अहले सुन्नत हजरत अहमद रज़ा ख़ाँन कादरी, महद्दीस बरेलवी  [रदिअल्लाहो तआला अन्हु] इरशाद फरमाते है
💎 "शरीअ़त के मुताबिक़ नहूसत यह है कि घर तंग हो, पड़ोसी बुरे हो, और घोड़े की नहूसत यह है कि शरीर हो बद लगाम हो, बद रकाब हो, औरत की नहूसत यह है कि बदज़बान, बद अख़्लाक (जुहान दराज) हो, । और बाकी यह ख़्याल हो  के औरत के चेहरे से यह हुआ फु़ंला के चैहरे से यह हुआ , यह सब बातील (बकवास) है  और क़ाफ़िरों के ख़्याल है"
📕 [ फ़तावा ए रज़वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 254, ]

➡️अब आपने जान लिया के किसी शख्स के लिये कोई औरत नहुसत का सबब (यानी बद अख्लाख, और जुबान दराज) भी हो सकती है, और फित्ना भी! जाहीर है जो औरत बद अख्लाख, जुबान दराज, और फित्ना परवर हो तो तकलिफ व परेशानी का सबब होंगी! लिहाजा यह जानने के लिये की जिस लडकी से आप निकाह करना चाहते है वह आपके हक मे बेहतर साबीत होंगी या नही! सह सब जानने के लिये इस्तेखारा जरुर करे!

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   🔵 इस्तेख़ारा करने का तरीका 🔵
      
(1)  जिस से निकाह करने का इरादा हो तो पैग़ाम या मंगनी के बारे मे किसी से ज़िक्र न करें। अब रात को खूब अच्छी तरह वुज़ू कर के जितनी नफ्ल नमाज़े पढ़ सकता है दो दो रकाअत करके पढ़े । फिर नमाज़ ख़त्म करने के बाद खूब खूब अल्लाह की तस्बीह बयान करे। [जो भी तस्बीह याद हो ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ें!] जैसे.. अल्लाहु अक़बर اللٰہ اکبر, सुब्हान अल्लाह سبحان اللہ, अल्हमदुलिल्लाह الحمداللہ, या रहेमान, या रहीम یا رحیم, या करीम یا کریم, वगैरह फिर उसके बाद यह दुआ़ खुलूस व दिल की गहराई से येह दुआ पढ़ें

💎 दुआ :- अल्लाहुम्मा इन्न-का-तक़दुरू वला अक़दरू व तअ़लमु वला आ़लमु व अन-ता-अल्लामुल गु़यूबी-फ-इन-रा-एै-ता-अन्ना फी [यहां लड़की का पूरा नाम ले ] खैरल ली फी दीनी व दुनया-या-व अाख़ेरती फ़क़ दिरू हाली व इन काना गै़रू-हा-ख़ैरम मिन-हा-फी दीनी व आ़खेरती फ़क़ दिर हाली०

👉🏻 तर्जुमा :- एे अल्लाह तू हर चीज़ पर क़ादिर है। और मै क़ादिर नही और तू सब कुछ जानता है मै कुछ नही जानता! बेशक तू गै़ब की बातों को खूब जानता है अगर [लड़की का नाम ले ] मेरे लिए मेरे दीन के एतेबार से, दुनिया व आ़ख़ेरत के एतेबार से बेहतर हो तो उस को मेरे लिए मुक़द्दर फरमा दे । (अगर वह मेरे लिये बेहतर ना हो तो) इसके अलावा और कोई लड़की या औरत मेरे हक़ में मेरे दीन व आ़ख़ेरत के एतेबार से उस से बेहतर हो तो उस को मेरे लिए मुक़द्दर फ़रमा दे।
📕 [ हिस्ने हसीन, सफा नं 160 ]

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   🔵 इस्तेख़ारा करने का तरीका 🔵
      
➡️इस तरह इस्तेखा़रा करने से इन्शा अल्लाह तआला सात (7) दिनो मे ख़्वाब या फिर बेदारी मे ही अल्लाह की जानिब से कुछ ऐसा जा़हिर होगा या कुछ ऐसा वाके होंगा जिससे आपको अंदाज़ा हो जाऐगा के उस लड़की या औरत से निकाह करने में बेहतरी है या नहीं

👉🏻(2) कुछ उलमा-ए-किराम ने इस्तेखा़रा करने का तरीका यह भी नकल किया है। कि
          रात को दो रक्अ़त नमाज़ इस तरह पढ़ें के पहली रकाअत मे सूरए फ़ातिहा [अलहम्दु शरीफ] के बाद सुरह ए काफीरून [कुल या अय्युहल काफ़ेरून] और दूसरी रकाअ़त में सूरए फ़ातिहा के बाद सुरह ए इख्लास (कुल हुवल्लाहु अहद) पढ़ें। और सलाम फेर कर दुआ पढ़ें (वही दुआ जो हमने पिछली पोस्ट में बयान की है) दुआ से पहले और बाद मे सूरह ए फ़ातिहा और ग्यारह- ग्यारह मरतबा दुरूद शरीफ, जरूर पढ़ें (अव्वल व आखीर)
    
➡️ बेहतर यह है की यह काम सात मरतबा दोहराए [यानी सात (7) रोज़ लगातार रात को इस तरह अमल करें! (एक ही रात में सात मरतबा  भी कर सकते हैं) इस्तेखा़रा करने के बाद फौरन बा तहारत किब्ला की तरफ रुख करके सो जाए! अगर ख़्वाब में सफ़ेद या हरे रंग की कोई चीज़ नजर आए तो कामयाबी है! यानी उस लड़की से निकाह करना ठीक होगा। और अगर लाल या काली रंग की चीज़ नजर आए तो समझे कामयाबी नहीं! यानी उस लड़की से निकाह करने में बुराई है। [वल्लाहु तआला आ़लम]

(अरबी मे दुआ भी  अल्फाज की दुरूस्तगी के लिये इसके साथ निचे दि गयी है, उसका भी मुलाहीजा फरमाए!)

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    🔵 मंगनी या निकाह का पैग़ाम 🔵

💎 आयत :- अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है
 💎 तर्जुमा और तुम पर गुनाह नही इस बात मे जो पर्दा रख कर (पर्दे के साथ) तुम औरतों के निकाह का पयाम दो।
📕 [ कुरआन कन्जुल इमान, पारा 2, सूरह ए बखरा, आयत नंबर 235, ]

➡️जब किसी लड़की या औरत से शादी का इरादा हो तो उसे शादी का पैग़ाम देने से पहले यह जरूर देख ले के उस लड़की या औरत को किसी और शख्स (इस्लामी भाई) ने पहले से ही तो पैग़ाम नही दिया है या उस की लडकी की मंगनी तो नही हो गयी है।
     
👉🏻अगर किसी और ने उस लड़की को निकाह का पैग़ाम दिया है या उसके रिश्ते की बात किसी के मुताल्लीक  चल रही हो तो उसे हरगिज़  पैग़ाम न दे के इसे इस्लामी शरीअ़त मे सख्त नापसंद किया गया है चुनांचे हदीस पाक में है

📚  हदीस :- हज़रत अबू ह़ुरैरा व हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर [रदि अल्लाहु तआला अन्हुम ] से रिवायत है। कि हुज़ूरे अकरमﷺ ने इरशाद फरमाया
 💫 "कोई शख्स (आदमी) अपने इस्लामी भाई के पैग़ाम पर उसी लडकी को निकाह का पैग़ाम न दे!  यहां तक कि पहला खुद इरादा तर्क कर दे, या उसे पैग़ाम भेजने की इज़ाज़त दे" ।
📕 [ बुखारी शरीफ, जिल्द 3, सफा 78, मोता शरीफ, जिल्द 2, सफा 415, ]
 
➡️मंगनी असल मे निकाह का वादा है! अगर यह न भी हो तो तब भी कोई हर्ज नही! लिहाजा बेहतर तो यही है के मंगनी की रस्म (Engagement) के नाम पर होनेवाली खुराफात को  बिल्कुल ही खत्म कर दीया जाए, उसकी कोई जरुरत नही है! आजकल उसे एक जरुरी रस्म बना लिया गया है!और उसे शादी की तरह निभाते है, शादी की तरह उसमे खर्च करते है! इस रस्म मे रुपयो की बरबादी के सिवा कुछ नही! लिहाजा इस रिवाज को छोडना ही बेहतर है! मुरवज्जा मंगनी की रस्म मे मुसलमानो मे इंतेहाई मुबालेगा पाया जा रहा है! गालीबन यह रस्म हमने हिंदुस्तान मे गैरमुस्लीमो से अपनाई है! क्यो के इस अंदाज से रस्म की अदायगी सिवाए भारत और पाक के अलावा कही नही पाई जाती है! बल्की अरबी और फारसी जुबान मे इसका (रस्म) का कोई नाम भी नही है!(मसलन मंगनी, सगाई, कढाई और साख वगैरह!)
            (वल्हाहु तआला आलम)
अगर मंगनी करना जरूरी ही समझते है, तो उसे निहायत सादगी के साथ अदा करे! जिससे के माशरे के गरीब मुसलमान भाई अहसास ए कमतरी और हिन भावना का शिकार होने से बच जाए!

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♻ निकाह से पहले लड़की देखना ♻

➡️किसी लड़की या औरत को किसी गैर मर्द को दिखाने में कोई हर्ज नही जब वोह उस से शादी का इरादा रखता हो या उसने शादी का पैग़ाम भेजा हो लेकिन, उस मर्द के दूसरे मर्द रिश्तेदारों या दोस्त अ़हबाब को नही दिखाना चाहिए कि वह गैर मरहम है [जिन से पर्दा करना जरूरी है] लिहाज़ा सिर्फ़ लड़के या मर्द और उसके घर की औरतें ही लड़की  देखे

➡️निकाह से पहले लड़की को देखना मुस्तहब है लेकिन इस बात का जरूर ख्याल रखें कि लड़के को लड़की इस तरह दिखाएँ कि लड़की को भनक भी न लगे कि लड़का उसे देख रहा है [यानी खुल्लम-खुल्ला सामने न लाए] अगर इस एहतियात से दिखाया जाएगा तो उसमे कोई हर्ज नहीं  बल्की बेहतर है कि बाद में  किसी किस्म की ग़लत फ़हमी नही होती

📚 हदीस :- हज़रत मुहम्मद सलामा [रदिअल्लाहु  तआला अन्हु] फरमाते हैं  
➡️"मैं ने एक औरत को निकाह का पैग़ाम दिया मैं उसे देखने के लिए उस के बाग में छुप कर जाया करता था यहां तक कि मैंने उसे देख लिया किसी ने कहा "आप ऐसी हरकत क्यों करते हैं हालांकि आप हुज़ूर  ﷺ के सहाबी हैं?"
➡️तो मैंने कहा रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया "जब अल्लाह ताआ़ला किसी के दिल में किसी औरत से निकाह की ख्वाहिश डाले और वह उसे पैग़ाम दे तो उसकी जाने देखने में कोई हर्ज नहीं"
📕 [ इब्ने माज़ा शरीफ, जिल्द  नं 1, बाबू नं 597, हदीस नं 1931, सफा 523, ]

📚 हदीस :- हजरत जाबिर [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है कि हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "जब तुम में से कोई औरत को निकाह का पैग़ाम दे अगर उस औरत को देखना मुम्किन हो तो देख ले"
📕 [ अबू दाऊद शरीफ, बाब नं  96, हदीस नंबर 314, जिल्द 2, सफा नं 122, ]

📚 हदीस हुज़ूर सैय्यदना इमाम बुख़ारी [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने अपनी मशहूर किताब "सही बुखारी" जिल्द 3, बाब "किताबुन निकाह" मे निकाह से पहले औरत को देखने के मुत्अ़ल्लिक़ एक ख़ास बाब [Chapter] लिखा है जिसमें यह साबित किया है के निकाह से पहले औरत को देखना जाइज़ है। चुनांचे उस बाब  की एक तवील हदीस मे है के-----

(हदिस अगले पार्ट मे पेश की जाएंगी! इंशा अल्लाह तआला!)

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♻ निकाह से पहले लड़की देखना ♻

💎  हुज़ूरे अकरम ﷺ की ख़िदमते अक्दस में एक मर्तबा एक सहाबिया खातुन  हाजीर हुई और आपसे निकाह की दरख़्वास्त की, लेकिन हुज़ूर ﷺ ने अपना सर मुबारक झुका लिया और उन्हें कुछ जवाब न दिया । एक सहाबी ने खड़े होकर अ़र्ज़ किया "या रसूलुल्लाह अगर आपको उस औरत की जरूरत नही है,  तो उसका निकाह मेरे साथ फरमा  दीजिए" । हुजुर ﷺ के उन से पूछने पर मअ़लूम हुआ कि उनके पास मुफलिसी की वजह से कुछ रुपये, पैसे,  कपड़ा वगैरह नहीं है।  यहां तक की यहां महर अदा करने के लिए एक अंगूठी तक भी नहीं है! अलबत्ता क़ुरआन की कुछ सूरतें याद है! चुनांचे हुजुर ﷺ ने उनके क़ुरआन करीम जानने के सबब से उस सहाबीया खातुन का निकाह उस सहाबी से फरमा दिया!
📚 [बुखारी शरीफ जिल्द 3, बाब नं 65, हदिस नंबर    113 ]

 तंबी :-  उलमा ए किराम फरमाते है की यह खुसुसीयत उन्ही सहाबी के लिये मख्सुस थी और रसुलुल्लाह ﷺ के बाद ऐसा करने का किसी को हक नही है! क्यो की अल्लाह के रसुल का हुक्म खुद शरीयत है! आज इस तरह से निकाह करना जाइज नही!
📚 [अबु दाऊद शरीफ जिल्द 2, बाब नंबर 108 सफा नंबर 132]

➡️इसी तरह एक दूसरी हदीस में है कि रसूले अकरम ﷺ को ख्वाब में हज़रत आएशा सिद्दीका  रदिअल्लाहु तआला अन्हा को निकाह से पहले दिखाया गया।
📚 [बुखारी शरीफ जिल्द 3, बाब नं 65, हदिस नंबर  112 ]

➡️इन हदीसे मुबारका से इमाम बुख़ारी रदि अल्लाहु तआला अन्हु ने यह साबित किया है की औरत को निकाह से पहले देखना जाइज़ है

📚 हदीस :- सैय्यदना इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] फरमाते है "निकाह से पहले औरत को देख लेना इमाम शाफ़अ़ई [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] के नज़दीक सुन्नत है।

 📚  हदीस :- यही इमाम ग़ज़ाली आगे नक़्ल फरमाते है। के औरत का ज़माल मुहब्बत व उल्फ़त का ज़रीया है इसलिए निकाह करने से पहले लड़की को देख लेना सुन्नत है। बुजुर्गों का कौ़ल है कि औरत को बे देखे जो निकाह होता है उसका अंजाम परेशानी और ग़म है।
📕 [ कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 260, ]

📚 हदीस :- हुज़ूर सैय्यदना गौ़से आ़ज़म शेख अब्दुल क़ादिर ज़ीलानी [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] इरशाद फरमाते है।
➡️मुनासिब है के निकाह से पहले औरत का चेहरा और ज़ाहिरी बदन  [यानी हाथ मुँह वगैरह] देख ले ताकि बाद मे नफरत या तलाक़ की नौबत न आए क्यों कि तलाक़ और नफरत अल्लाह तआला को सख्त ना पसंद हैं।
📕 [ गुनयातुत्तालेबीन सफा नं 112, ]

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       💫 लडकी की राज़ामन्दी  💫

➡️आपने अक्सर देखा और सुना होगा कुछ ग़ैर मुस्लिम मुसलमानों को ताना देते है कि  इस्लाम ने औरतों के साथ नाइंसाफ़ी की है। हालांकि उन  कम अक्लो को यह नही सुझता  कि उनके धर्म ने औरतों के कितने ही हुक़ूक का किस बेदर्दी से गला घोंटा गया है।
      
🌹यह कम फहम औरतों को सड़कों, बाज़ारों और अपनी झूठी इबादत गांहों मे आध नंगी हालत में खुले आ़म में घूमने फिरने  को ही उनकी आज़ादी और जाइज़ हक़ समझते हैं !

🌹बेशक मज़हबे इस्लाम ऐसी बेहूदा़ हरकतो  की हरगिज़ इजाज़त नहीं देता। वह औरतों को बाजारों और सड़कों पर खुले आ़म अपने हुस्न का मुज़ाहिरा पेश करने से सख्ती से मना करता है। लेकिन याद रहे वह औरतों को उनके ज़ायज़ हुक़ूक़ देने में कोई कमी  भी नही करता और न ही औरतों के साथ बुरा सुलूक करने उनके साथ ज़बर्दस्ती करने, या किसी किस्म की ना  इन्साफ़ी करने की इज़ाज़त देता  है। वह हर मुआमले में औरतों से बराबरी और इन्सानी हुस्ने सुलूक करने का मर्दों को हुक़्म देता है।

🌹चुनान्चे शरीअ़ते इस्लामी में जहां कई मामलों में औरत की  मर्जी ज़रूरी समझी जाती है। वही शादी के लिये उसकी रज़ामंदी ज़रूरी  है

📚 हदीस :- हज़रत अबूह़ुरैरा व हज़रत अब्दुल्लाह बिन  अब्बास [रदिअल्लाहु  तआला अन्हु] से रिवायत है। के हुज़ूरे अकरम ﷺ ने इरशाद फरमाया
💎"कुंवारी का निकाह न किया जाए जब तक उसकी रज़ामंदी न हासिल कर ली जाए! और उसका चुप रहना उसकी रज़ामंदी है! और न ही निकाह किया जाए बेवा का जब तक उससे इज़ाज़त न  ली जाए।
📕 [ तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द 1, सफा 566, मुस्नदे इमामे आज़म सफा नं 214, ]

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       💫 लडकी की राज़ामन्दी  💫

📚 हदीस :- हज़रत अब्दुल्ला बिन अब्बास [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत रिवायत करते है के "एक औरत के शौहर का इंतेकाल हो  गया। उसके देवर ने उसे निकाह का पैग़ाम भेजा मगर [औरत का] बाप देवर से निकाह करने पर राज़ी न हुआ, उसने किसी दूसरे मर्द से उस औरत का निकाह कर दिया! वह औरत नबी ए करीम  ﷺ की ख़िदमत में हाजिर हुई और आपसे पूरा किस्सान बयान किया। हुज़ूर  ﷺ ने उसके बाप को बुलावाया। उससे आपने फ़रमाया "यह औरत क्या कहती है" उस ने जवाब दिया "सच कहती है, मगर मैंने इसका निकाह ऐसे मर्द से किया है जो इसके देवर से बेहतर है"। इस पर हुज़ूर ﷺ ने उस मर्द और औरत में जुदाई करवा दी और औरत का निकाह उसके देवर से कर दिया जिससे वह निकाह करना चाहती थी।
📕 [ मुस्नदे इमामे आ़ज़म बाब नं 124, सफा नं 215]

✍🏻 शरह :- हज़रत मुल्ला अ़ली क़ारी [रहमतुल् अलैह] इस हदीस के मुत्तअल्लीक तहरीर फरमाते  है कि
👉🏻"इब्ने क़त्तान [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने कहा है कि हजरत इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु तआला अन्हु की यह हदीस सही है! और यह औरत हज़रत खंसा बिन्त ख़ुज़ाम [रदिअल्लाहु  तआला अन्हुमा] थी, जिस की हदीस इमाम मालिक व इमाम बुखारी ने भी नक्ल की है की  उन का निकाह हुजुर ए अक्दस ﷺ ने रद्द फ़रमा दिया था"!

📚 हदीस :- बजरत इमाम बुखारी रहेमतुल्लाह अलैही ने बुखारी शरीफ मे यही हदीस इन अ़ल्फाजो़ के साथ नक़्ल की है। हज़रत ख़नसा बिन्त ख़ेज़ाम [रदिअल्लाहो तआला अन्हुमा] इरशाद फरमाती है
👉🏻"उनके वालिद ने उन का निकाह कर दिया जबकि वह उस निकाह को ना पसंद करती थी। वह रसूलुल्लाह ﷺ की बारगा़ह में हाजिर हों गयी आप ने फरमाया कि "वह निकाह नहीं हुआ"
📕 [ मोता शरीफ, जिल्द 2, सफा नं 424, बुखारी शरीफ, जिल्द 3, सफा नं 76, ]

🌐इन तमाम अहादीसे मुबारका से मालुम हुआ के शादी से पहले कुंवारी लड़की और बेवा (औरत) से  इज़ाज़त लेना ज़रूरी है, और हमारे आक़ा ﷺ की बहुत ही प्यारी सुन्नत भी है। चुनांचे इस हदीसे पाक में है कि
📚 हदीस :- हज़रत अबू ह़ुरैरा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है!
🌹 नबी ए करीम ﷺ अपनी किसी साहबज़ादी को किसी के निकाह में देना चाहते तो उनके पास तशरीफ लाते और फ़रमाते  "फलाम शख्स [ यहां उनका नाम लेते] तुम्हारा जिक्र करता है" और फिर [ साहबजादी की रजा़मन्दी माअ़लूम हो जाने पर] निकाह पढ़ा दिया करता
📕 [मुस्नदे इमाम ए आज़म,  बाब नं 123, सफा नं 214]  
 
➡️आज देखा यह जा रहा है मां, बाप लड़की की मर्ज़ी को कोई अहमियत नहीं देते अपनी मर्ज़ी के मुताबिक जहॉ चाहते है शादी कर देते है! अब शादी के बाद अगर लड़की को लड़का पसंद आ गया तो ठीक, और अगर पसंद न आया तो झगड़ो और नाइत्तेफ़ाक़ीयों का एक सैलाब उमड़ पड़ता है और कभी कभी नौबत तलाक़ तक आ पहुंचती है।

➡️अपनी लख्ते जिगर के लिए अच्छे लड़के की तलाश करना और फिर उसे ब्याह देना यक़ीनन यह मां-बाप की ही ज़िम्मेदारी है!  लेकिन जहां इतनी उठा पटक करते है वही अगर लड़की की मर्जी (रज़ामन्दी) मालूम कर ली जाए तो इसमें भला क्या हर्ज है। लड़की से उसकी मर्ज़ी  मालूम  भी करनी चाहिए। क्यों कि उसे ही सारी ज़िन्दगी गुजारना है।
     और हाँ अगर लडकी  खुल कर कहने मे झिझक या शर्म महसूस करती हो तो उसे भी दबे अलफ़ाज़ो में या किसी रिश्तेदार औरत के जरीये अपनी मर्जी का इज़हार करे, यह भी सुन्नत है!

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       💫 लडकी की राज़ामन्दी  💫

📚 हदीस :- हज़रत इब्ने अब्बास [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है। के हुजुर ﷺ  ने जब अपनी साहबज़ादी हज़रत फातिमा [ रदि अल्लाहु तआ़ला अन्हा ] का निकाह हज़रत अली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से करने का इरादा फरमाया तो आप हज़रत फातिमा [ रदि अल्लाहु तआ़ला अन्हा ]के पास के पास तशरीफ लाए और इरशाद फरमाया,  "अली तुम्हारा जिक़्र करते हैं"। [यानी निकाह का पैग़ाम भेजा है]।
📕 [ मुस्नदे इमामे आ़ज़म, बाब नं 122, सफा नं 213]

➡️यह इज़ाज़त हासिल करने का निहायत ही बेहतर तरीक़ा है जो पैग़ाम के वक़्त ज़रूरी है। और वैसे भी साफ खुले अल्फाजों में पूछना हिजाब व हया के ख़िलाफ़ मअ़लूम होता है। ऐसे बहुत से अल्फाज़ है जो इज़ाज़त लेते वक़्त दबे लफ़्ज़ो में कह सकते है । जैसे फलां लड़का तुम्हारा ज़िक्र करता है, फलां तुम पर बहुत मेहरबान है, फलां तुम्हारे लिए बेहतर है, फलां को तुम्हारी ज़रूरत है, फलां का पैग़ाम तुम्हारे लिए है, वगैरह वगैरा, (जहाँ जहाँ "फलां" लिखा है वहां लड़के या का नाम ले!

➡️इसका साफ मक्सद यह है की लडकी का जिससे निकाह हो रहा है उसको वह पहले से जानती भी हो और उसे देखा भी हो! वर्ना गैर मालुम शख्स के बारे मे इजजात लेना बेकार है!

💫 मसअला  लड़की या औरत से इज़ाज़त लेते वक्त़ जरूरी है की जिसके साथ निकाह करने का इरादा हो उसका नाम इस तरह ले की लडकी या औरत जान सके। अगर यूं कहा एक मर्द या लडके शादीकर दूंगा। या फलां क़ौम के एक शख्स से निकाह कर दूंगा। यह जाइज़ नही और यह इज़ाज़त सही भी नही
📕 [ कानूने शरीअ़त, जिल्द 2, सफा नं 54, ]

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       💫 लडकी की राज़ामन्दी  💫

📚  हदीस इमाम बुख़ारी [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] नक़्ल फरमाते है के हज़रत आइशा [रदिअल्लाहु तआला अन्हा]ने अ़र्ज़ किया की "या रसूलुल्लाह"! ﷺ कुंवारी लड़की तो निकाह की इज़ाज़त देने में शर्माती है ? इरशाद फरमाया "उसका खामोश हो जाना ही इज़ाज़त है"।
📕 [ बुखारी शरीफ, बाब नं 71, हदीस नं 124, जिल्द 3 सफा 76, ]

✍🏻 [मसअ़ला :-] अगर औरत कुंवारी है तो साफ़-साफ़ रजामंदी के अल्फ़ाज़ कहे या कोई ऐसी हरकत करे जिससे राज़ी होना साफ़ मअ़लूम हो जाए। मसलन मुस्कुरा दे, या हंस दे, या फिर इशारे से जा़हिर करेे!
📕 [ कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 54, ]

👉🏻 और अगर इंकार हो तो इस तरह से साफ़-साफ़ कहे "मुझे उस की ज़रूरत नहीं या फिर कहे वह मेरे लिए बेहतर नहीं" वगै़रह वगै़रह जिस तरह भी मुनासिब तौर से ज़ाहिर कर सकती हो उस तरह से जा़हिर कर दे। फिर मां बाप पर भी जरुरी है ज़्यादा दबाव ना डालें या ज़बरदस्ती ना करें बेजा दबाव डालना, या  जबरदस्ती करना जाइज़ नही

📚 [ हदीस :- ] हज़रत अबू ह़ुरैरा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है। की रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "बालीग कुंवारी लड़की से उसके निकाह की इज़ाज़त ली जाए! अगर वह खा़मोश हो जाए तो यह उसकी तरफ से इज़ाज़त है। और अगर इंकार करे तो उस पर कोई ज़बरदस्ती नही"
📕 [ तिर्मिज़ी शरीफ, हदीस नं 1101, जिल्द 1, सफा नं 567,]

✍🏻 [ मसअ़ला] बालेगा व आक़ेला औरत का निकाह बगैर उसकी इज़ाज़त के कोई नही कर सकता न उसका बाप, न इस्लामी हुकूमत का बादशाह, औरत कुंवारी हो या बेवाह, इसी तरह बालीग व आकील [पागल वगैरह न हो] मर्द का निकाह बगै़र उसकी मर्ज़ी के कोई नही कर सकता ।
📕 [ कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2 सफा 54, ]

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         💫 [ महर का बयान ] 💫

🌹 आपका और हमारा यह तर्जुबा है कि मुसलमानों में आज बड़ी तादाद में ऐसे लोग है जो शादी तो कर लेते है, महर भी बाँध लेते हैं लेकिन उन्हें इस बात की मालुमात नही होती के महर कितने क़िस्म के होते है! और उनका निकाह किस क़िस्म के महर पर हुआ है! लिहाजा मुसलमानों को यह जान लेना  जरूरी है।

  💫 महर तीन क़िस्म का होता हैं।💫
  
 1⃣ महर ए मुअज्जल (नगद) महर ए मुअज्जल यह है कि खल्वत से पहले महर देना करार पाया हो।  [चाहे दिया कभी भी जाए!]

2⃣ महर ए मुवज्जल (उधार) महर ए  मुवज्जल यह है कि महर की रक़म देने के  लिए कोई वक्त़ मुक़र्रर कर दिया जाए।

3⃣  महर ए मुतलक़ महर ए  मुतलक़ यह है कि जिस में कुछ तय न किया जाए।
📕 [फ़तावा-ए-मुस्तफ़ाविया, जिल्द नं 3, सफा नं 66, कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 60,]

👉🏻 इन तमाम महर की किस्मों में मेहर "मुअ़ज्जल (नगद)" रखना ज़्यादा अ़फज़ल है। [यानी रुख़्सती से पहले ही महर अदा कर दी जाए]
📕 [ कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 60,]

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         💫 [ महर का बयान ] 💫

✍🏻 [ मसअ़ला ] महरे मुअ़ज्जल वसूल करने के लिए अगर औरत चाहे तो अपने आपको शौहर से रोक सकती है! यानी यह इख्तियार है की वती (मुबाशरत) से रोके रखे! और मर्द को हलाल  नहीं की औरत को मजबूर करे या उसके साथ किसी तरह की जबरदस्ती करे । यह हक़ औरत को उस वक्त़ तक हासिल है जब तक महर वसूल न कर ले! इस दर्मियान अगर औरत चाहे तो अपनी मर्ज़ी से हमबिस्तरी (सोहबत) कर सकती है! इस दौरान भी मर्द अपनी बीवी का नान नफ़्क़ा [खाना, पीना, कपड़ा, खर्चा वगैरह] बंद नही कर सकता। जब मर्द औरत को उसका महर दे दे तो औरत का अपने शौहर को सोहबत करने से रोकना जाइज़ नही।
📕 [ फ़तावा-ए-मुस्ताफ़ाविया, जिल्द नं 3, सफा नं 66, कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 60, ]

✍🏻 [ मसअ़ला ] इसी तरह अगर महरे मुवज्जल (उधार) था! [यानी महर अदा करने के लिए एक ख़ास मुद्दत मुक़र्रर की गयी थी] और वह मुद्दत खत्म हो गई तो औरत शौहर को हमबिस्तरी (सोहबत) करने से रोक सकती है।

✍🏻 [ मसअ़ला ] औरत को महर माफ करने के लिए मजबूर करना जाइज़ नहीं ।
📕 [ कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 60]

 🔥🔥🔥   इस जमाने में ज़्यादा तर लोग यही समझते कि महर देना कोई ज़रूरी नहीं बल्कि सिर्फ़ एक रस्म है, और कुछ लोगों का ख़्याल है कि महर तलाक के बाद ही दिया जाता है! और कुछ लोग समझते हैं कि महर इसलिए रखते है कि औरत को महर देने के ख़ौफ से तलाक़ नही दे  सकेगा।

🌷 यही वजह है हमारे मुल्क में ज़्यादा तर लोग महर नही देते यहां तक के  इन्तिक़ाल के बाद उनके जनाज़े पर उनकी बिवी अाकर महर माफ करती है। वैसे औरत के माफ कर देने से महर माफ तो हो जाता है, लेकिन महर दिए बगै़र दुनिया से चले जाना मुनासीब नही,  खुदा न ख्वासता पहले औरत का इंतिक़ाल हो गया और अगर  वह माफ न कर सकी, या महर माफ करने की उसे मोहलत न मिली तो हक्कुल-अब्द मे गिरफ्तार और दिन व दुनियॉ मे रुसवा शर्मसार होंगा! और रोजे क़यामत में सख़्त पकड़ और सख़्त अ़ज़ाब होंगा! लिहाजा इस खतरे से बचने के लिए महर अदा कर देना चाहिए। इस मे सवाब भी है और यह हमारे आक़ा ﷺ की सुन्नत भी है

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         💫 [ महर का बयान ] 💫

👉🏻 हमारा रब जल्ला जलालाहु इरशाद फरमाता है।
💎 तर्जुमा"और औरतों को उन के महर खुशी से दो "।
📕 [कुरान :- तर्जुमा  कन्जुल इमान, सूरए निसा,  आयत नं 4]

💎 तर्जुमा" तो जीन औरतो को  तुम निकाह मे लाना चाहो उनके बंधे हुए महर उन्हे दो "।
📕 [कुरान :- तर्जुमा  कन्जुल इमान, सूरए निसा,  आयत नं 24]

👉 मसअला औरत अगर होश व हवास मे राजी खुशी से महर माफ कर दे तो हो जाएंगा! हॉ अगर धमकी देकर माफ कराया और औरत ने मारे खौफ के माफ कर दिया तो इस सुरत मे माफ नही होंगा! और अगर मरजुल-मौत मे माफ कराया, जैसा के अवाम मे राईज (रिवाज) है की जब औरत मरने लगती है, तो उससे महर माफ कराते है, तो इस सुरत मे वारीसो की इजाजत के बगैर माफ नही होंगा!
📚 [फतावा  आलमगिरी जिल्द 1 सफा नं 293, दुर्रे मुख्तार मआ शामी जिल्द 2 सफा 338]

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         💫 [ महर का बयान ] 💫

        🔥🔥 जेहालत🔥🔥
👉🏻 अक्सर मुसलमान अपनी हैसियत से ज़्यादा महर रखते है और यह ख़्याल करते हैं। कि "ज़्यादा महर रख भी दिया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है देना तो है ही नही" यह सख़्त जेहालत है और दीन से मजाक़ है! ऐसे लोगों इस हदिस को पढ कर इबरत हासील करे!

📚 हदीस अबु याला व तबरीनी व बैहकी मे हजरत उक्बा बिन आमीर रदि अल्लाहु तआला से मरवी है के हुजुर अक्दस ﷺ ने इरशाद फरमाया

💎 "जो शख्स निकाह करे और नियत यह हो की औरत को महर मे से कुछ ना देगा तो जिस रोज मरेंगा जानी (जिना करने वाला) मरेंगा!
📚 [अबु याला, तबरानी व बैहकी बहवाला बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा नंबर 7 सफा नं 32 ]

👉🏻 लिहाजा महर इतना ही रखे जितना देने की हैसियत  है और महर जितना जल्दी हो सके अदा कर दे। के यही अ़फज़ल तरीक़ा है।

📚 [हदीस] रसूले मक़बूल ﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "औरतों में वह बहुत बेहतर है जिसका हुस्न व ज़माल [खूबसूरती] ज़्यादा हो और महर कम हो।

📚 "इमाम ग़ज़ाली [रदिअल्लाहो तआला अन्हा] फरमाते है
         "बहुत ज़्यादा महर बांधना मक़रूह है लेकिन हैसियत से कम भी न हो।
📕 [कीम्या-ए-सआ़दत, सफा नं 260,]

कुछ लोग कम से कम महर बांधते है, और दलील यह देते है के रुपयो पैसो से क्या होता है! दिल मिलना चाहीये, यह भी गलत है! महर की अहमियत को घटाने के लिए अगर कोई कम महर बांधे तो यह भी ठिक नही है! औरतो को अपना महर ज्यादा लेने का हक है! और इस हक से उनको कोई मर्द रोक नही सकता!

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         💫 शादी की रस्मे 💫

✍🏻 शादी में तरह तरह की रस्में बरती जाती है! हर मुल्क में नई रस्म, हर  क़ौम और  हर  खानदान  का अपना अलग रिवाज!  यह कोई नही समझता है के शरअन यह रस्में कैसी है! मगर यह ज़रूर है के रस्मों की पाबन्दी उसी हद तक की जाए कि किसी हराम काम में मुब्तला न हो । कुछ लोग रस्मों की इस कदर पाबन्दी करते है कि नाजाइज़ व  हराम काम को भले ही करना पड़े मगर रस्म न छुटने पाए।
       👉🏻 हमारे मुल्क  में आम तौर पर बहुत सी रस्मों की पाबंदी की जाती है। जैसे ........रतजगा, हल्दी  खेलने की रस्म, नहारी, शादी के रोज़ या बाद मे जुवा खेलना, शराब पीना, ढोल बाजे, नाचना गाना, गाने बाजो और पटाखो  के साथ बारात निकालना, विडीयो रिकार्डींग वगैरह, वगैरह  जबकि इन रस्मों में बेपर्दगी, छिछोरापन, अय्याशी और हराम कामों का वज़ूद होता है!  जवान लडके लड़कियाँ हल्दी खेलते हैं नाचते गाते है बेहुदा हँसी मजाक़ और तरह तरह की तहजीब से गिरी हुई हरकत करते हैं। अगर इन तमाम रस्मों की पाबन्दी के लिए रुपए न हो तो सूद पर रुपए लेने से भी नही चूकते ।
            👉🏻 यहां मुमकिन नहीं की हर रस्म पर अलग अलग उनवान कायम करके तफ्सीली बहस  की जाए! लिहाजा हम यहॉ चंद हदीसे पेश करते हैं। इन्साफ़ पसन्द के लिए इसी क़द्र क़ाफी और हटधर्म और ज़ाहिल के लिए पूरा क़ुरआन व अहादीस के ख़ज़ाने भी नाक़ाफी!

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         💫 शादी की रस्मे 💫

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है
💎 💎 "और फ़ुजूल न उड़ा बेशक (फुजुल) उड़ाने वाले शैतानो के भाई है, और शैतान अपने रब का बड़ा नाशुक्रा है।
📕 [कुरआन तर्जुमा  कन्जुल इमान, सूरह ए बनी इस्राईल़, आयत नं 26/27,]

📚  [हदीस ] हुजुर ﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "जिसने जुवा खेला गोया उस ने ख़िन्ज़ीर [सुवर] के गोश्त व खून मे हाथ धोया" ।
📕 [ मुस्लिम शरीफ, अबूूदाऊद शरीफ, मुका़शेफातुल क़ुलूब, बाब नं 99, सफा नं 635,]

📚 [हदीस ] नबी-ए-करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "सब से पहले गाना इब्लीस [शैतान, मरदूद] ने गाया"!

📚 [हदीस :-] हज़रत इमाम मुजाहिद [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] फरमाते है
👉🏻 "गाने बाजे शैतान की आवाजें है जिसने इन्हें सुना गोया उस ने शैतान की आवाज सुनी"।
📕 [हादीयुन्नास फ़ी रूसूमिल एेरास, सफा नं 18,]

📚 [हदीस ] हज़रत  शफीक बिन सलमा  [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत करते है
💫 हजरत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रदि अल्लाहु तआला अन्हु ने इरशाद फरमाया
  💫 "गित, गाने, ढोल बाजे दिल मे यु निफाक  उगाते है! जैसे पानी सब्जा उगाता है!"

✍🏻 [मसअ़ला] उबटन मलना जाइज़ है। और दुल्हा की उम्र नव दस साल की हो तो अजनबी औरतों का उसके बदन में उबटन मलना भी गुनाह नही!  हाँ बालिग़ के बदन पर ना महरम औरतों का मलना ना जाइज़ है और बदन को हाथ तो माँ भी नही लगा सकती! यह हराम और सख़्त हराम है। और औरत व मर्द के दर्मियान शरीअ़त ने कोई मुँह बोला रिश्ता न रखा यह शैतानी व हिन्दुवानी रस्म है।
📕 [फ़तावा-ए-रज़वीया जिल्द नं 9, सफा नं 170,]

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           💫 व्हिडीयो शुटींग 💫

💫 आजकल शादी-ब्याह मे व्हिडीयो शुटींग करवाना शादी का एक हिस्सा बन चुका है! उधर काजी साहब निकाह का खुत्बा पढ रहे है, और इधर यह शैतानी आला (व्हिडीयो केमरा) आ खडा हुआ! फिर उसी पर बस नही बल्की अब यह शैतानी आला (Video Camera) जनाने कमरे मे पहुंचा, और हमारी मॉ, बहनो को बेपर्दा करने लगा! वह लोग जिन्होने हमारी मॉ, बहनो को कभी नही देखा था, या जीन से वह पर्दा करती थी वह अब व्हिडीयो के जरीये खुले आम मज्लीस मे दिखाई देने लगी!💫

💫💫 एक शादी हॉल मे व्हिडीयो शुटींग की जा रही थी! और जगह जगह टि. व्ही. सेट रखे हुए थे, जो मंजर को डायरेक्ट टेली कास्ट कर रहे थे! औरतो के क्याम की जगह व्हिडीयो शुटींग की जा रही थी! महेफील मे कोई खातुन गर्मी की वजह से अपने साडी के पल्लु को सिने से हटाकर हवा कर रही थी! के व्हिडीयो केमरे ने उस मंजर को अपने अंदर समेट लिया! एक और तरकीब मे यह वाकीया भी पेश आया की एक खातुन अपने छोटे बच्चे को दुध पिला रही थी! और उसकी तवज्जोह इस बात की तरफ न थी के केमरे का रुख उसकी तरफ भी है! केमरे ने उस मंजर को कैद करने मे कोई कंजुसी नही की! गर्ज के कभी-कभी बेख्याली मे होने की वजह से औरतो के वह मनाजीर भी व्हिडीयो फिल्म की जिनत बन जाते है की, जिसे बाद मे देखने मे शर्म व हया से सर निचे हो जाते है! 💫💫

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           💫 व्हिडीयो शुटींग 💫

🔥🔥🔥 चंद बहाने 🔥🔥🔥

👉 जब यह खराबीया मुसलमानो को बताई जाती है तो उनके चंद बहाने होते है! क्या करे साहब हमारी औरते और लडके नही मानते, हम उनकी वजह से मजबुर है! यह बहाना महज बेकार है! हकीकत यह है के आधी मर्जी खुद मर्दो की होती है! तभी तो उनकी औरते और लडके इशारा या नर्मी पाकर जिद करते है! वर्ना मुमकीन ही नही के हमारी मर्जी के बगैर कोई काम हो जाए!

👉 दुसरा बहाना यह होता है के हमे उल्माए अहले सुन्नत ने यह बाते बताई ही नही है, और न उस से रोका इसलिये हम लोग इससे गाफील रहे!अब जब की यह रस्मे चल पडी है, लिहाजा उनका बंद होना मुश्कील हो गया है! यकीनन यह बहान भी गलत है! उलमा ए अहले सुन्नत ने इन रस्मो से हमेशा अपने बयान व तकरीर मे मना किया है! इसके मुत्ताल्लीक बुरी रस्मो और बुरी बिदअतो के बारे मे किताबे लिखी है! मसलन  "हदिउन्नासे फीरुसुमिल एरास" मुजव्वजहुन्नजा ला खुरुजन्निसाई", "शिफाउल-वला फी सुवरिल-हबीबे व मजारिहु व नेआलीही" और "अतायन लेकदिरे फी हुक्मीत्तसिवीरे" और आला हजरत रहेमतुल्लाह अलैही ने सैकडो किताबे इन उन्वानात पर तस्नीफ फरमाई है! आखीर मे एक और किताब का नाम सुन लिजीये "इस्लामी जिंदगी" जो हजरत हकीमुल उम्मत मुफ्ती अहमद यार खॉं नईमी रहमतुल्लाह अलैह ने खास शादी-ब्याह की रस्मो के मुतअल्लीक लिखी है!

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     🔥🔥🔥 चंद बहाने 🔥🔥🔥

👉 बहरहाल मुसलमानो का तिसरा बहाना यह होता है की बहुत से आलीमो के यहॉ भी तो यह रस्मे होती है! इससे कतई इंकार नही की ऐसे निम मुल्ला चंद रुपयो की खातीर शरीअत के मसाईल को भी मजाक बना देते है! और अपनी झुठी मौलवियत का रुबाब झाडने के  लिये उट-पटांग मस्अले बयान करते है! और अपनी नफ्सानी ख्वाहिशात को गलत तावीलो से सही साबीत करने की कोशीश करते है! या फिर बेचारे सेठ साहब के एहसानों तले दबे है, इसलिये सेठ साहब के लडके की शादी मे जुबान नही खुलती, लेकीन ए अजीजो याद रखीये इस्लाम की बुनियाद ऐसे गुमराह मौलीयो पर नही है! के हम उनके कामो को दलील बनाए!

        👉 हर मुसलमान के लिये कुरआन व अहादीस, आइम्मा ए दीन, बुजुर्गाने दीन और उलमा ए मोतमदीन के अक्वाल ही काफी है! हमे किसी भी काम के नाजाइज व हराम होने का सुबुत कुरआन व अहादीस मे और मोतमद उलमा ए दीन व बुजुर्गो के अक्वाल मे देखना चाहीये, न की उन नफ्स परवर अमीरो के चापलुस मौलवियो के कामो से! यह भी याद रखीये बरोज महशर आपके कामो की पुछ आप से होंगी , आप यह कहकर नही बच जाएंगे की फलां मौलवी साहब ऐसा करते थे, इसलिये हमने भी ऐसा किया! इल्मे दीन हासील करना आप पर भी तो फर्ज है! हमारे आका ﷺ इरशाद फरमाते है.......

         📚 हदीस  " इल्मे दीन हासील करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज है!"

          लेहाजा मुसलमान पर जरुरी है, की वह इल्म हासील करे, और हराम व हलाल, जाइज व नाजाइज मे तमीज सिखे!

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           💫 व्हिडीयो शुटींग 💫

मुसलमानो का चौथा बहाना यह होता है की अगर हम शादी धुम-धाम से नही करेंगे तो लोग हम को तअ्ना देंगे के कंजुसी की वजह से यह रस्मे नही की! और कुछ रिश्तेदार कहेंगे की यह मातम की मज्लीस है, यहॉ नाच गाना नही गोया तिजा पढा जा रहा है! तअ्ने से कोई भी कभी भी  किसी वक्त बच नही सकता, कोई खाने मे नुक्स निकालता है तो कोई किसी और चिज मे नुक्स निकालेंगा ही

       पॉंचवा बहाना यह होता है के अल्लाह तआला ने हमे नवाजा है, हमारे अरमान है, अपनी दौलत लुटा रहे है, उसमे किसी के बाप का क्या जाता है! भला शादी भी कोई बार बार होती है, मौलवियो को तो बस इतने काम है, यह मत करो वह मत करो वगैरह वगैरह!

         इस बहाने से गरूर और तकब्बुर की बु आती है! अक्सर यह दौलतमंद हजरात कहते है! सबसे बेहतर तो यह होता की मुसलमान अपनी औलाद के निकाह मे खातुन ए जन्नत, शहजादी ए रसुल हजरत फातीमातुज्जोहरा रदी अल्लाहु तआला अन्हा के निकाहे पाक को नमुना बनाते! खुदा की कसम अगर हुजुर ﷺ की मर्जीए मुबारक होती के मेरी लख्ते जिगर की शादी बडी धुम-धाम से हो तो दुनियॉ की हर नेअमत आप अपनी साहबजादी के कदमो मे लाकर रख देते! और अगर हुजुर ﷺ सहाबा ए किराम को शादी के मौके पर धुम-धाम करने का हुक्म फरमा देते तो उसके लिये हजरत उस्मान गनी रदिअल्लाहु तआला अन्हु का खजाना मौजुद था! जो एक-एक जंग के लिये हजार ऊंट और लाखो अशरफियॉं हाजीरे बारगाह कर देते थे! लेकीन मंशा यह था के कयामत तक यह शादी मुसलमानो के लिये नमुना बन जाए, इसलिये बेहद सादगी से यह इस्लामी रस्म (निकाह) अदा की गई! लिहाजा गुजारीश है के अपनी शादी ब्याह से इन तमाम हराम रस्मो को निकाल बाहर करो और निहायत सादगी से निकाह की सुन्नत को अदा करो!जिससे के गरीब-गुरबा की मुश्कीले आसान हो जाए! और वह तुम को दुवाए दे!

📚 हदीस नबी ए करीम ﷺ इरशाद फरमाते है
💎💎💎 "शादी को इस कद्र आसान कर दो की जिना मुश्कील हो जाए! आसानी करो मुश्कील मे न डालो!"💎💎💎

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💫 [दुल्हन दूल्हे को सजाना] 💫

💫 💫 शादी के मौके पर दुल्हन, दूल्हे को मेहंदी लगाई जाती है कंगन बाँधा जाता है और शादी के दिन सेहरा बाँधा जाता  है  और जे़वरात से सजाया जाता है लिहाजा यहां मसाइल बयान कर देना निहायत जरुरी है।

✍🏻 [मसअ़ला ] औरतों को हाथ पांव में मेहँदी लगाना जाइज़ है लेकिन बिला ज़रूरत छोटी बच्चियों के हाथ पाँव में मेहँदी लगाना न चाहिए। बड़ी लड़कियों के हाथ पाँव में मेहँदी लगा सकते हैं।
📕 [ कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 214,]

👉🏻 इस मसअ़ले से पता चला कि औरतें और बडी  लड़कियाँ मेहँदी लगा सकती है चाहे शादी का दिन हो या और कोई ख़ुशी का मौक़ा हो!

📚  [ हदीस ] सरकारें मदीना ﷺ ने इरशाद फरमाया!
         "औरतों को चाहिये के हाथ और पाँव में मेहँदी लगाए ताकि मर्दों की तरह हाथ न हो। और किसी वजह से या बे अहतियाती से किसी ग़ैर मर्द को दिख जाए तो उसे पता न चले औरत किस रंग की है यानी गोरी है या काली क्यों कि हाथों के रंग को देख कर भी इंसान चेहरे के रंग का अंदाज़ लगा लेता है"। इस हदीस से इरशाद हुआ कि "ज़्यादा न हो तो मेहँदी से नाखून ही रंगीन रखे"
📕 [ फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 148,]

     👉🏻 लिहाजा औरतों को मेहँदी लगाना बेशक जाइज़ है और इसी तरह हर किस्म के जे़वरात भी जाइज़ है। चुनान्चे औरत को मेहँदी लगाने जे़वरात से सजाने में कोई हर्ज नही । लेकिन मर्दों को येह सब हराम है चाहे दुल्हा ही क्यों न हो।

✍🏻 [मसअ़ला ] हाथ पाँव मे बल्कि सिर्फ़ नाखूनो में ही मेहँदी लगाना मर्द के लिए हराम है।
📕 [फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 149,]

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   💫 [दुल्हन दूल्हे को सजाना] 💫

👉🏻 शहजादा-ए-आला हज़रत हुज़ूर मुफ़्ती-ए-आज़मे हिन्द [रहमतुल्लाह तआला अलैह] के फ़तावा-ए मे है कि आप से फ़तवा पूछा गया
 
✍🏻 [ सवाल :-].... दूल्हे को मेहन्दी लगाना दुरूस्त है कि नही। दूल्हा चाँदी के जे़वर पहनता है कंगन बांधता है, इस सूरत में निकाह पढ़ा दिया तो निकाह दुरूस्त हुआ है कि नही।

✍🏻 [ जवाब ] [इस सवाल के जवाब में आप ने फ़तवा दिया कि] मर्द को हाथ पाँव में मेहँदी लगाना ना जाइज़  है, जे़वर पहनना गुनाह है , कंगन हिन्दूओ की रस्म है। येह सब चीज़े पहले उतरवाए फिर निकाह पढाए के जितनी देर निकाह मे  होगी उतनी देर वोह [दुल्हा] और गुनाह में रहेगा। और बुरे काम, को कुदरत [ताक़त] होते हुए न रोकना और देर करना खुद गुनाह है बाकी अगर जे़वर पहने हुए निकाह हुआ निकाह हो जाएगा।
📕 [फ़तावा-ए-मुस्तफ़ाविया, जिल्द नं 3, सफा नं 175,]

      एक नीम मौलवी साहब ने हमारे एक अजीज से कहा की मर्द को मेहंदी लगाना हराम जरुरी है! लेकीन अगर अपने हाथ की छोटी अंगुली मे थोडी सी लगा ले तो हरज नही (माजअल्लाह!) हमारे इस दोस्त ने जवाब दिया! "तो फिर कोई कह सकता है की शराब हराम जरुर है, मगर थोडीसी पी ली जाए तो हरज नही!"

   🔥🔥🔥 गर्ज की आजकल के चंद मौलवियो ने यह ढोंग बना रखा है की मसाईल की किताबे पढने की बजाए अपनी नफ्स (ख्वाहीश) परस्ती मे मुज्तहिद बने फिरते है, और अपनी कमजोर अक्ल से उट-पटांग नए नए मस्अले पैदा करते रहते है! उन्हे इतनी तौफीक नही होती के जितनी देर मे वह अपनी कमजोर अक्ल पर जोर देते है, इतनी देर मे कोई मसाईल की किताब ही पढ ले और मस्अला को किताब से देख कर बताए, उन्हे तो अपनी वाह-वाही, और अपने आपको अल्लामा (उलमा) कहलवाने मे ही मजा आता है! अल्लाह तआला उन्हे तौफीक दे की वह उलमा ए हक के सहीह माने मे पैरु (Follower) बने की उसी मे उनकी नजात है! 🔥🔥🔥

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            💫💫 [सेहरा] 💫💫

👉🏻 सेहरा पहनना मुबाह है ! यानि पहने तो न कोई सवाब और अगर न पहने तो न कोई गुनाह। यह जो लोगों में मशहूर है कि सेहरा पहेनना हुज़ूर ﷺ की सुन्नत है, महज बातील,और सरासर झूठ है!

✍🏻 [कौ़ल :-] मुजद्दिदे  आ़ज़म सैय्यदना आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] इरशाद फरमाते है। कि......
        👉🏻 सेहरा न शरीअ़त में न मना है न शरीअ़त में जरूरी या मुस्तहब बल्कि एक दुनियावी रस्म है कि तो क्या! न कि तो क्या! इसके अलावा जो इसे हराम गुनाह, बिदअ़त व जलालत बताए वह सख़्त झूठा सरासर मक्कार है। और जो उसे जरूरी [लाज़िम] समझे और तर्क को [सेहरा न पहेनने को] बुरा जाने और सेहरा न पहेनने वालों का मज़ाक उड़ाए वह निरा जाहिल है।
📕 [हादिन्नास फी रूसूमिल आरास, सफा नं 42,]

👉🏻 दूल्हे का सेहरा ख़ालिस असली फूलों का होना चाहिए। गुलाब के फूल हो तो बहुत बेहतर है । कि गुलाब के फूल हुज़ूर ﷺ ने पसन्द फरमाया है।

लिहाजा सेहरा पहनना ही हो तो खालीस गुलाब या चंबेली के फुलो का सेहरा पहने! सेहरे में चमक वाली पन्निया न हो कि यह ज़ीनत है।  मर्द को ज़ीनत करना और ऐसा लिबास पहनना जो चमकदार हो  हराम है। दुल्हन के सेहरे में अगर यह चमक वाली पन्नीया हो तो कोई हर्ज नही। के औरतो को जिनत जाइज है!

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            💫💫 [सेहरा] 💫💫

👉🏻 इसी तरह आज कल कुछ लोग सेहरे में रूपये [नोट] वगैरह लगाते हैं यह फ़ुजूल ख़र्ची और गुरूर व तक़ब्बुर की निशानी है! तकब्बुर शरीअ़त में  सख्त हराम है!  लिहाजा अगर सेहरा सिर्फ़ खुशबूदार फूलों का ही हो! शादी एक दिन की होती है, दुसरे दिन सेहरे को न तो पहना जाता है, और न ही वह किसी काम का होता है! सबसे बेहतर तो यह है के गले मे  एक गुलाब के फूलों का हार डाल लिया जाए यही ज्यादा मुनासीब है! (वल्लाहो आ़लम)
       
🌳 [दुलहन दूल्हे को सजाते वक्त़ की दुआ]

👉🏻 दुल्हन को जो औरतें सजाए उन्हें चाहिए कि वह दुल्हन को दुआ़ए दे! हदीसे पाक में है। कि....

📚  [हदीस] उम्मुलमोमेनीन हज़रत आइशा सिद्दीक़ा [रदिअल्लाहु तआला अन्हा] इरशाद फरमाती है
 
       "हुज़ूर ﷺ से जब मेरा निकाह हुआ तो मेरी वालिदा माजीदा मुझे हुजुर ﷺ के दौलतकदा पर लाई वहाँ अन्सार की कुछ औरतें मौजूद थी! उन्होंने मुझे सजाया और यह दुआ दी..
 
 على الخیری والبراکة وعلى خير طائر
 
     (अलल ख़ैरे वल बराकतेे व आ़ला खै़रे त-अ-ए-रिन०
 [ तर्जुमा :-] ख़ैर व बरक़त हो अल्लाह ने तुम्हारा नसीब अच्छा किया

(बुखारी शरीफ की एक दुसरी रिवायत है के, "हुजुर ﷺ ने हजरत अब्दुर्रहमान बिन औफ रदि अल्लाहु तआला अन्हु को उनकी शादी पर इसी तरह बरकत की दुआ इरशाद फरमाई!"
📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 87, हदीस नं 142, सफा नं 82,]

 👉🏻 .... लिहाजा हमारी  इस्लामी बहनों को भी चाहिए जब वह किसी की शादी के मौके पर जाएं दुल्हन सजाते वक़्त या फिर उनसे मुलाकात करते वक्त़ बरक़त की दुआ करें  ।
             इसी तरह दूल्हे को सजाने वालो को और उससे मिलने वालो को भी चाहिए की वह भी दूल्हे को सजाते या सेहरा बांधते वक्त़ या मिलते वक्त यह दुआ दें। 

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          💫 निकाह का बयान 💫

✍🏻 आला हजरत इमाम अहमद रजा कादरी मुहद्दिस बरैलवी रदिअल्लाहु तआला अन्हु इरशाद फरमाते है
       "कुछ लोगो का खयाल है, की निकाह मुहर्रम के महीने मे नही करना चाहीये, यह खयाल फुजुल व गलत है! निकाह किसी महीने मे मना नही!"
📕 [फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 179]

  👉 मस्अला अक्सर लोग माहे सफर मे शादी ब्याह नही करते, खुसुसन माहे सफर की इब्तीदाई तेराह (1 से 13) तारीखे बहु ज्यादा मनहुस मानी जाती है! और उनको "तेराह-तेजी" कहते है! यह सब जेहालत की बाते है! हदिसे पाक मे फरमाया की सफर कोई चिज नही! यानी लोगो का इसे मनहुस समझना गलत है! इसी तरह जिल्कदा के महीने को भी बहुत लोग बुरा जानते है, और उसको "खाली का महीना" कहते है! इस माह मै भी शादी नही करते! यह भी जेहालत और लग्वीयत है! गरज की शादी हर माह के हर तारीख को हो सकती है!

(Conclusion शरीयत ए इस्लामी के मुताबीक किसी महीने की कोई तारीख मन्हुस नही होती! बल्की हर दिन हर तारीख अल्लाह अज्जा व जल्ला की बनाई हुई है! गरज की हर महीने की किसी भी तारीख को निकाह करना दुरुस्त है!) 

📕 [बहार ए शरीयत, जिल्द नं 2, हिस्सा नं 16, सफा नं 159]

 ✍🏻 हुज़ूर सैय्यदना ग़ौसुल  आजम शेख अब्दुल क़ादिर ज़ीलानी बगदादी  [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] नक्ल फरमाते है। कि....
  💫 "निकाह जुमेरात या जुमा को करना मुस्तहब है। सुबह कीे बजाए शाम के वक्त़ निकाह करना बेहतर व अ़फज़ल है।"

📕 [गुन्यतुत्तालिबीन, बाब नं 5, सफा नं 115]

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          💫 निकाह का बयान 💫

✍🏻 आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ  कादरी बरैलवी रदी अल्लाहु तआला अन्हु "फ़तावा-ए-रज़वीया" में नक़्ल फरमाते है की
 💫 "जुमा के दिन अगर जुमा की अज़ान हो गई हो तो उसके बाद जब तक नमाज़ न पढ़ ली जाए निकाह की इजाजत नहीं के अजान होते ही जुमा के नमाज के लिए जल्दी करना वाज़िब है। फिर भी अगर कोई अज़ान के बाद निकाह करेगा तो गुनाह होगा मगर निकाह सही हो जाएगा"
📕 [फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 158,]

    👉🏻 "दुल्हा दुल्हन दोनो के माँ बाप को चाहिये कि निकाह के लिए सिर्फ और सिर्फ सुन्नी का़जी को ही बुलावाए क़ाजी वहाबी, देवबन्दी, मौदूदी, नेचरी, ग़ैर मुक़ल्लिद वगैरह न हो।

✍🏻 इमामे इश्क़ो मुहब्बत मुजद्दिदे आज़म आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] इरशाद फरमाते है कि
  "वहाबी से निकाह पढ़वाने में उसकी ताज़ीम होती है जो कि हराम है लिहाजा उससे बचना ज़रूरी है।
📕 [अलमलफूज़, जिल्द नं 3, सफा नं 16,]

👉🏻 निकाह की शर्त यह है कि दो गवाह हाजिर हो इन दोनों गवाहों का भी सुन्नी सहीउल अ़कीदा होना ज़रूरी है।

✍🏻 [मसअ़ला ] एक गवाह से निकाह नही हो सकता जब तक दो मर्द या एक मर्द दो औरतें मुस्लिम [सुन्नी] समझदार बालिग न हो।
📕 [ फ़तावा ए रज़वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 163]

✍🏻 [मसअ़ला ] सब गवाह ऐसे बद-मज़हब है की, जिन की बद-मज़हबी कुफ़्र तक पहुँच चुकी हो तो निकाह नही होगा।
📕 [फ़तावा-ए-अफ्रीका, सफा नं 61,]

✍🏻 [हदीस ] हज़रत इब्ने अब्बास [रदिअल्लाहो तआला अन्हो] से रिवायत है। कि हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "गवाहों के बगैर निकाह करने वाली औरते ज़ानिया [ज़िना करने वाली] है।
📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1 बाब नं 751, हदीस नं 1095, सफा नं 563,]

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              🔵 निकाह के बाद 🔵          

✍🏻  निकाह के बाद मिसरी व खजूर बाँटना बेहतर है! यह रिवाज हुज़ूर ﷺ के जाहिरी जमाने में भी था। हजरत मुहक्कीक शाह अब्दुल हक मुहद्दीस देहलवी रदीअल्लाहु तआला अन्हु नक्ल फरमाते है.....
 
        "हुजुर ﷺ ने जब हजरत अली करमल्लाहु वज्हु और फातीमा रदि अल्लाहु तआला अन्हा का निकाह पढाया तो हुजुर ﷺ ने एक तबाक खजुरो का लिया और जमाअते सहाबा पर बिखेर कर लुटाया! इसी बिना पर फुक्हा की एक जमाअत कहती है की मिसरी व बादाम वगैरह का बिखेर कर लुटाना निकाह की ज्याफत मे मुस्तहब है!"
📕 [ मदारिजुन्नुबुवाह जिल्द २ सफा, नं 1२८,]

✍🏻 आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ [रदि अल्लाहु तआला अन्हु]  इरशाद फरमाते है
 💫 "(निकाह के बाद) छुवारे (खजूर) हदीस शरीफ में लूटने का हुक़्म है और लुटाने में भी कोई हर्ज नही और येह हदीस "दारक़ुत्नी" व "बैहक़ी" व "तहावी" से मरवी है।
📕 [ अलमलफूज़, जिल्द नं 3, सफा नं 16,]

    मालुम हुआ कि  निकाह के बाद मिसरी व खजूर लुटाना चाहिए यानी लोगों पर  बिखेरे, लेकीन लोगों को भी चाहिए कि वह अपनी जगह पर बैठे रहे और जिस क़दर उनके दामन में गिरे वह उठा ले ज़्यादा हासिल करने के लिए किसी पर न गिर पड़े।

🌺🌺🌺 दुल्हन दुल्हा को मुबारक़बाद 🌺🌺🌺

👉🏻 निकाह होने के बाद दुल्हे को उसके दोस्त व अहेबाब और दुल्हन को उसकी सहेलियॉ मुबारकबाद और बरकत की दुआ दे!
📚 [हदीस] हज़रत अबू ह़ुरैरा [रदिअल्लाहु  तआला अन्हु] से रिवायत है कि
💫💫 "जब कोई शख़्स निकाह करता तो हुज़ूर ﷺ उसको मुबारक़बाद देते हुए उसके लिए दुआ फरमाते।

: بارك الله لك ، وبارك عليك ، وجمع بينكما في خير

 ✍🏻 [दुआ :-].... ब-र-कल्लाहो लका-व-ब-र-क-अलैका व जम-आ-बै-न-कुमा फी़ ख़ैर!

 [तर्जुमा ] अल्लाह तआला तुझे बरक़त दे और तुझ पर बरक़त नाज़िल फ़रमाए और तुम दोनों में भलाई रखे!
📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, सफा नं 557, अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 2, सफा नं 139,]

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      🎁  🎁 दूल्हे को तोहफ़े 🎁🎁

👉🏻 लड़की को जहेज (तोहफा) देना सुन्नत है मगर ज़रुरत से ज़्यादा देना क़र्ज लेकर देना दुरूस्त नहीं है।  जहेज के लिये भी कोई हद होनी चाहीए के जिसकी हर गरीब और अमीर पाबंदी करे! अमीरो को चाहीये के वह अपनी बेटीयों को  बहुत ज्यादा जहेज न दे, सजा-सजा कर और दिखाकर जहेज देना बिल्कुल मुनासीब नही, नामवारी (अपना नाम करने की) लालच मे अपने घर को आग न लगाए! याद रखीये के नाम और इज्जत तो अल्लाह तआला और रसुलुल्लाह की पैरवी मे है!

 🔥 लड़के वालो को चाहीये लडकी वाले अपनी हैसियत के मुताबिक जिस क़दर भी जहेज (तोहफा) दें उसे खुशी खुशी कु़बूल करले! जहेज दरअसल तोहफा है, किसी किस्म की तिजारत (Business) नही है! लडके वालो का अपनी तरफ से मांग करना की यह चिज दो, वह चिज दो किसी हटधर्म भीखारी के भीख माँगने से किसी तरह कम नही है।

✍🏻 [मसअ़ला ] जहेज के तमाम माल पर ख़ास औरत का हक़ है। दूसरे का उस मे कुछ हक़ नही है।
📕 [ फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 529,]

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      🎁  🎁 दूल्हे को तोहफ़े 🎁🎁

👉🏻 हमारे मुल्क में यह रिवाज़ हर क़ौम में पाया जाता है। कि निकाह के बाद दुल्हन वाले दूल्हे को तोहफ़े देते हैं जिसमे कपड़े का जोड़ा, सोने की अंगूठी, घड़ी वगै़रा होती है  तोहफ़े देने में कोई हर्ज़ नहीं लेकिन इसमें चंद बातों की एहतियात ज़रूरी है। मसलन आप जो अँगूठी दूल्हे को दे वोह सोने की न हो।

[मसअ़ला :-].... मर्द को किसी भी धातु का ज़ेवर पहेनना जाइज नही है।  इसी तरह मर्द को सोने की अंगूठी पहेनना भी हराम है। औरत को सोने की अंगूठी व जे़वर पहेनना जाइज़ है। मर्द सिर्फ़ चांदी की अंगूठी ही पहेन सकता है। लेकिन उसका वज़न 4 माशा से कम होना चाहिए । दूसरी धातें मस्लन लोहा, पीतल, ताँबां, जस्त, वगै़रा इन धातु की अँगूठी मर्द और औरत दोनो को पहेनना ना जाइज़ है।
📕 [कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 196,]

📚 [हदीस ] एक शख़्स हुज़ूर ﷺ की ख़िदमत में पीतल की अँगूठी पहेन कर  हाजिर हुए। सरकार ने इरशाद फरमाया.. "क्या बात है कि तुम से बुतों की बू आती है" उन्होंने वोह अँगूठी फेंक दी। "फिर दूसरे दिन लोहे की अँगूठी पहेन कर हाजिर हुए। फरमाया.... क्या बात है कि तुम पर जहन्नमियों का जे़वर देखता हूँ"। अर्ज किया............ या रसूलुल्लाह ! फिर किस चीज़ की अँगूठी बनाऊँ ! इरशाद फरमाया....... चाँदी की और उसको साढ़े चार माशे से ज़्यादा न करना।
📕 [अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 2, बाब नं 292, हदीस नं 821, सफा नं 277,]

✍🏻 [मसअ़ला ] मर्द को दो अंगूठियां चाहे चाँदी ही की क्यों न हो पहेनना नाजाइज़ है। इसी तरह एक अँगूठी में कई नग या साढ़े चार माशा से ज़्यादा वज़न हो तो इस तरह की अँगूठी भी पहेनना ना जाइज़ है। व गुनाह है
📕 [अहकामे शरीअ़त, जिल्द नं 2,  सफा नं 160,]
           
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      🎁  🎁 दूल्हे को तोहफ़े 🎁🎁

👉🏻 लिहाजा दूल्हे को सोने की अँगूठी न दे। इस के बजाए उस की की़मत के बराबर कोई और तोहफा या सिर्फ़ चाँदी की एक अँगूठी साढ़े चार माशा से कम वज़न की ही दे वरना देने वाला और उसे पहेनना वाला दोनो गुनाहगार होंगे।
             
👉🏻 मुम्क़िन है कि आप के दिल में यह खयाल आए के अगर चाँदी की अँगूठी देंगे तो लोग क्या कहेंगे? किस कदर बदनामी होगी वगै़राह वगै़राह। तो होश़ियार ! यह सब शैतान के वसवसे है। वह इसी तरह बदनामी का खौफ दिला कर  लोगों से गल़त काम करवाता है। *हम आप से एक सीधी सी बात पूछते हैं कि आपको अल्लाह व उस के रसूल की खुशीनुदी (खुशी) चाहिए कि लोगों की वाह ! वाह ! सोंचिंए और अपने जमीर मे ही इस का जवाब तलब कीजिए।

        अब आइये हम आप को घड़ी के मुत्अ़ल्लिक़ भी कुछ ज़रूरी व अहम मालूमात दें।

✍🏻 [मसअ़ला ] सरकार सय्यदी आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] अपने एक फ़तवे में इरशाद फरमाते है
 💎 "घड़ी की जंजीर (चैन) सोने चाँदी की मर्द को हराम है। और दूसरी धातों [जैसे लोहा, स्टील, पीतल, वगै़रा] की मम्नूअ़, इन सब को पहेन कर नमाज़ [पढ़ना] और इमामत़ करना मक़रूहे तहरीमी [ना जाइज़ व गुनाह] है।
📕 [अहकामे शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 170,]

✍🏻 [मसअ़ला ] हुज़ूर मुफ़्ती-ए-आज़मे हिन्द [रहमतुल्लाह अलैह] ने अपने फ़तवे में इरशाद फरमाते है
💎 "वोह घड़ी जिस की चैन सोने, या चाँदी, या स्टील, वगै़रा किसी धातु की हो, उस का इस्तेमाल ना जाइज़ है। और उस को पहन कर नमाज़ पढ़ना गुनाह और जो नमाज़ पढी (वाजीबुल-ऐआद) है! यानी इस नमाज को दोबारा पढना वाजीब है वरना गुनाहगार होंगा!
📕 [बाहवाला माहनामा इस्तेक़ामत़ कानपुर, जनवरी 1978,]

 👉🏻 इस लिए हमेशा वही घड़ी पहेने जिस का पट्टा (चैन) चमड़े, प्लास्टिक, या रेगज़ीन का ही हो। स्टील या किसी और धातु का न हो। और शादी के मौके पर भी अगर घड़ी देना ही हो तो सिर्फ़ चमड़े, या प्लास्टिक, के पट्टे वाली ही घड़ी दें।
           
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        🚗 [रुख्सती का बयान] 🚗

👉🏻 जब कोई शख़्स अपनी लड़की की शादी करें। तो रुख्सती के वक्त़ के अपनी लड़की व दामाद [दुल्हा व दुल्हन] दोनो को अपने पास बुलाऐ फिर उसके बाद एक प्याले [गिलास] मे पानी लेकर येह दुआ पढ़ें.......

اَلّٰلهُمّٰ اِنِىّ اُعِىیْذُهَا بِكَ وَذُرِِّیِّتَھَاَ مِنَ الشَّیْطَانِ الرَّجِيمِ

✍🏻 [तर्जुमा ] एे अल्लाह!  मेेैे तेरी पनाह में देता हूँ इस लड़की को, और इसकी [जो होगी] औलादों को मरदूद शैतान से ।

  👉🏻 इस दुआ को पढ़ने के बाद प्याले में दम करें उस के बाद पहले अपनी लड़की [दुल्हन] को अपने सामने खड़ा करे और फिर उस के सिर पे पानी के छींटे मारे फिर सीने और उस की पीठ पर छींटे मारे । उसके बाद इसी तरह दामाद [दूल्हे] को भी बुलाए और प्याले में दूसरा पानी ले कर यह दुआ पढ़ें।......
 
اَلّٰلهُمّٰ اِنِىّ اُعِىیْذُهْ بِكَ وَذُرِِّیِّتَهْ مِنَ الشَّیْطَانِ الرَّجِيمِ

✍🏻 [तर्जुमा ] एे अल्लाह! मै तेरी पनाह में देता हूँ इस लड़के को, और इसकी [जो होगी] औलादें उन को शैतान मरदूद से।

👉🏻 पानी पर दम करने के बाद पहले की तरह अपने दामाद के सर और सीने पर फिर पीठ पर छींटे मारे और उस के बाद रुख़सत कर दें।
📕 [हिसने हिसीन, सफा नं 163,]
           
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        🚗 [रुख्सती का बयान] 🚗

👉🏻 ✍🏻 [हदीस ] हज़रत इमाम मुहम्मद बिन मुहम्मद बिन मुहम्मद बिन जज़री शाफ़अ़ई  [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] अपनी किताब "हिसने हिसीन" मे हदीस नक़्ल फरमाते है के
 
 📚  "जब रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत मौला अली कर्मल्लाहु  वज्हुल करीम का निकाह खातुन ए जन्नत हज़रत फातिमतुज्जहुरा  [रदि अल्लाहु तआला अन्हा] से कर दिया तो आप उन के घर तशरीफ ले गए और हज़रत फा़तिमा से फरमाया "थोड़ा सा पानी लाओ"। चुनांचे वह एक लकड़ी के प्याले में पानी लेकर हाजिर हुई आप ने उन से वह प्याला लिया और एक घूँट पानी दहने मुबारक [मुँह शरीफ] में ले कर प्याले में ही डाल दिया और इरशाद फरमाया "आगे आओ" । हज़रत फा़तिमा सामने आ कर खड़ी हो गई तो आपने उन के सर पर और सीने पर वोह पानी छिड़का और यह दुआ फरमाई  [वह दुआ जो उपर लिखी हैं!] और उस के बाद फरमाया "मेरी तरफ पीठ करो"। चुनान्चे वह आपकी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई तो आपने बाकी पानी भी आपने यही दुआ पढ़ कर पीठ पर छिड़क दिया। इसके बाद आप ने हज़रत अली के जानिब रूख़ करके फरमाया........"पानी लाओ"। हज़रत अली कहते है कि। मै समझ गया जो आप चाहते हैं चुनांचे मैंने भी प्याला भर कर पानी पेश किया ! आप ने फरमाया...... "आगे आए"। मै आगे आया, आप ने वही कलिमात पढ़ कर और प्याले में कुल्ली करके मेरे सर और सीने पर पानी के छींटे दिये और फिर वही दुआ पढ़कर मेरे मोंडो  [कंधों] के दर्मियान पानी के छींटे दिये उस के बाद फरमायाव"अब अपनी दुल्हन के पास जाओ"
📕 [हिस्ने हसीन, सफा नं 164,]

✍🏻 [नोट ] पानी पर सिर्फ़ दुआ कर के ही दम करें उस में कुल्ली न करें। सरकार ﷺ का लुआबे दहन हुआ मुबारक पानी पाक़ ही नही बल्कि बाइसे बरक़ात है। और बीमारियों से शिफ़ा देने वाला और ज़हन्नम की आग के हराम होने का सबब हैं। (वल्लाहु तआला आलम)
           
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   🎆 [ शबे जुफाफ सुहागरात के आदाब] 🎆

    👉🏻 जब दुल्हा, दुल्हन कमरे में जाए और तन्हाई हो तो बेहतर यह है कि सबसे पहले दोनो वुज़ू कर ले! और फिर जानमाज़ या कोई पाक़ कपड़ा बिछा कर दो (2) रकाअ़त नफ्ल, शुक्राना पढ़ें । अगर दुल्हन हैज़ (माहवारी) की हालत में हो तो नमाज़ न पढ़ें। लेकिन दुल्हा ज़रूर पढ़ें।
📚 [हदीस] हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसऊद [रदिअल्लाहु तआला अन्हु]  फरमाते है।
  "एक शख्स ने उनसे बयान किया कि मै ने एक जवान लड़की से निकाह कर लिया है और मुझे अंदेशा (डर) है के वह मुझे पसंद नही करेगी। हज़रत अब्दुल्लाह  बिन मसऊद रदि अल्लाहु तआला अन्हु  ने फरमाया । "मुहब्बत व उल्फत अल्लाह की तरफ से होती है और नफरत शैतान की तरफ से, जब तुम बीवी के पास जाओ तो सब से पहले उस से कहो कि वह तुम्हारे पीछे दो (2) रकाअ़त नमाज़ पढ़े ! इंशा अल्लाह तुम उसे मुहब्बत करने वाली और वफा करने वाली पीओंगे।
📕 [गुनीयातुत्तालिबीन, बाब नं 5, सफा नं 115,]

✍ नमाज़ की नियत :- नियत की मै ने दो रकाअ़त नमाज़ नफील शुक्राने की वास्ते अल्लाह तआला के मुँह मेरा काबा शरीफ के अल्लाहु अक़बर ।
    
         फिर जिस तरह दूसरी नमाज़े पढ़ी जाती है उसी तरह येह नमाज़ भी पढ़ें। (यानी सुरीह फातीहा, फिर उस के बाद कोई एक सूराह मिलाए) नमाज़ के बाद इस तरह दुआ करें...

    एे अल्लाह तेरा शुक्र व एहसान है के तू ने हमें यह दिन दिखाया, और हमें इस खुशी व नेमत से नवाज़ा और हमे अपने प्यारे हबीब ﷺ की इस सुन्नत पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाई! एे अल्लाह   मुझे इससे और इसको मुझसे रोजी अता फरमा! और हमपर अपनी रहमत हमेशा कायम रख, और हमे ईमान के साथ सलामत रख! आमीन"
📕 [गुन्यतुत्तालिबीन, बाब नं 5, सफा नं 115,]
           
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🎆 [शबे जुजाफ (सुहाग रात) की ख़ास दुआ] 🥛

      नमाज़ और दुआ के  बाद दुल्हा, दुल्हन सुकून व इत्मीनान से बैठ जाए फिर उसके बाद दुल्हा अपनी दुल्हन के पेशानी  थोड़े से बाल अपने सीधे हाथ मे नर्मी के साथ मुहब्बत भरे अंदाज़ में पकड़े और येह दुआ पढ़े
 
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسَْلُكَ مِنْ خَيْرِهَا ، وَخَيْرِ مَا جُبِلَتهاْ عَلَيْهِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ مَا جُبِلَتهاْ عَلَيْهِ "
 
✍🏻 [तर्जुमा] एे अल्लाह मैं तुझ से इस की (बीवी ) भलाई और  खैर व बरकत माँगता हूँ! और उस की फितरी आदतों की भलाई और तेरी पनाह चाहता हूँ  उसकी बुराई और फ़ितरी आदतों की बुराई से।

📚 हदीस हज़रत अ़म्र बिन आ़स [रदिअल्लाहो तआला अन्हो] से रिवायत है। कि हुजुर ﷺ ने इरशाद फरमाया
 💫 "जब कोई शख्स निकाह करे और पहली रात (सुहाग रात) को अपनी दुल्हन के पास जाए तो नर्मी के साथ उस के पेशानी के थोड़े सेे बाल अपने सीधे हाथ में ले कर यह दुआ पढ़ें। (वही दुआ जो ऊपर नक़्ल की गयी हैं!)
📕 [अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 2, सफा नं 150, व हिस्ने हसीन, सफा नं 164,]

✍🏻 [फ़ज़ीलत :-] शबे जुफाफ (सुहाग रात) के रोज़ इस दुआ को पढ़ने की फ़ज़ीलत में उलमा-ए-किराम इरशाद फरमाते है। के..... "अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इस के पढ़ने की बरक़त से मियाँ, बीवी  के दर्मियान इत्तेहाद व इत्तेफ़ाक़ और मुहब्बत क़ायम रखेगा! और अगर औरत में बुराई हो तो उसे दूर फ़रमा कर उस के जरिए नेकी फैलाएगा और औरत हमेशा मर्द की ख़िदमत गुजार, वफ़ादार, और फरमांबरदार रहेगी। (इन्शा अल्लाह)
     👉🏻 अगर हम इस दुआ मानो (Meaning) पर गौ़र करें तो हम पाएंगे के इसमे हमारे लिये कितने  अमन व सुकून का पैग़ाम है। यह दुआ हमे दर्स देती है की किसी भी वक्त इंसान को यादे इलाही से गाफील नही होना चाहीये बल्की हर वक्त हर मुआमले मे अल्लाह की रहमत का तलबगार रहे! लिहाजा इस दुआ को शादी की पहली (सुहागरात) को ज़रूर पढ़े!
           
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              📮 पोस्ट नम्बर 5️⃣8️⃣

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   🔥 [ एक बडी गलत फहमी] 🔥

  ✍🏻 कुछ लोगों का खयाल है कि  जब किसी कुवांरी से पहली बार सोहबत (शारीरी संबध) की जाए तो उससे (शर्मगाह से) खून निकलना जरूरी है। चुनांचे यह खून का आना उसके बाइस्मत पाक दामन (पवित्र) होने का सबूत समझा जाता है। अगर खून नही देखा गया तो औरत बदचलन, आवारा समझी जाती है। और औरत के बाइस्मत होने और उसकी दोशीजगी पर शुबह (शक) किया जाता है। कभी कभी यह शक जिन्दगी को कड़वा और बद मज़ा कर देता है। नौबत तलाक़ तक जा पहुँचती है। मुमकीन है इसका बयान जाहीर तबियत वालो को बुरी मालुम हो लेकीन तजरेबा शाहीद (गवाह) है के सैंकडो जिंदगिया इसी शक व शुबाह की बिना पर तबाह हो चुकी है! लिहाजा इस मसले पर रौशनी डालना निहायत जरुरी है! क्या अजब की हमारे इस मज्मुन (Chapter) को पढने के बाद कोई तलाक नामी दरीयॉ मे गोता जन (डुबकर) हो कर अपनी खुशियो को मौत के घाट उतारने से बच जाए!

 💫 कुंवारी लड़कियों के मकामे मख्सूस (शर्मगाह) में अन्दर की जानीब एक पतली सी झिल्ली होती है ! जिसे पर्दा-ए-इस्मत  या पर्दा-ए-बुकारत (Hymen) वगैरह कहते है। इस झिल्ली मे एक छोटा सूराख होता है जिसके जरिए लड़की के बालिग होने पर हैज़ (माहवारी) का खून अपने खास दीनो मे खारीज होता रहता है।

 👉 शादी के बाद जब कोई मर्द ऐसी कुवांरी से पहली बार सोहबत करता है तो मर्द के ऊज़ू-ए-तनासुल  के उस से टकराने की वजह से वह झिल्ली फट जाती है इस मौके़ पर औरत को थोड़ी तकलीफ़ होती है और थोड़ा सा खून भी खारिज होता है। फिर यह झिल्ली (पर्दा) हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।

     👉🏻 चूँकि यह झिल्ली पतली और नाज़ुक होती है तो कई मर्तबा किसी कुवांरी की यह मामूली चोट, या किसी हादसे की वजह से या कभी कभी खुद ब खुद भी फट जाती है। आजकल बहुत सी लड़कियाँ साइकल वगै़रह चलाती है, कुछ खेल कूद कुछ कसरत वगै़रह भी करती है जिसकी वजह से भी यह झिल्ली कई मर्तबा  फट जाती  है! जाहीर है ऐसी लडकियो की जब शादी होती है तो मर्द कुछ (खून) न पाकर शक मे मुब्तला हो जाता है

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......
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      🔥 [ एक बडी गलत फहमी] 🔥

 👉🏻 किसी किसी औरत की यह झिल्ली ऐसी लचक़दार होती है कि सोहबत के बाद भी नही फटती और सोहबत करने में रुकावट भी पैदा नही करती। और न ही खून खारिज होता है। लाखों में से किसी एक औरत की यह झिल्ली इतनी मोटी और सख़्त होती है कि फटती नही जिसके लिए (Operation) की ज़रूरत पड़ती है। लिहाजा किसी शख्स की  शादी ऐसी  कुवांरी से हो जिससे पहली मर्तबा कराबत (शरीर संबध) होने पर खुन जाहीर न हो, तो जरुरी नही के वह आवारा,  अय्याश व बदचलन रह चुंकी हो, इसलिये उसकी इस्मत, पाकदामनी पर शक करना किसी भी सुरत मे जाइज नही! जब तक की बदचलन होने का शरई सुबुत गवाहो के साथ ना हो 

✍🏻 फिक़ह की मशहूर किताब *"तन्वीरूल अब्सार" मे है!
💎 जिस का पर्दा-ए-इस्मत कूदने हैज़ आने या ज़ख़्म या उमर ज़्यादा होने की वजह से फट जाए वह औरत हक़ीक़त में बकेरा  (कुंवारी पाक दामन) है"।
📕 [तन्वीरूल अबसार, बाहवाला,फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 12, सफा नं 36,]

सुहाग रात की बातें दोस्तों से कहना 
👉 कुछ लोग अपने दोस्तों को पहली रात (सुहाग रात) में बीवी के साथ की हुई बातें मज़े ले कर सुनाते हैं। दुल्हा अपने दोस्तों को बताता है और दुल्हन अपनी सहेलियों को बताती है! और सुनाने वाला और सुनने वाला इसे बडी दिलचस्पी के साथ मजे ले ले कर सुनते है! यह बहुत ही जाहिलाना तरीक़ा है भला इस से ज़्यादा बेशर्मी और बेहयाई की बात और क्या हो सकती है।

📚  [हदीस ]  जमाने जाहिलियत मे लोग अपने दोस्तों को और औरतें अपनी सहेलियों को रात में की हुई बातें और हरकतें बताया करते थे। चुनान्चे जब हुजुर ﷺ को इस बात की ख़बर हुई तो आप ने इसे सख़्त नापसन्द फ़रमाया और इरशाद फ़रमाया
    "जिस किसी ने सोहबत की बातें लोगों में बयान की उस की मिसाल ऐसी है जैसे शैतान औरत, शैतान मर्द से मिले और लोगों के सामने ही खुले आम सोहबत करने लगे"।
📕 [अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 2, बाब नं 127, हदीस नं 407, सफा नं 155,]

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              📮 पोस्ट नम्बर 5️⃣9️⃣

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   .     🍔 [वलीमा का बयान ] 🍔

 💫 वलीमा करना सुन्नते मुअक्कदा है (जान बूझकर वलीमा न करने वाला सख्त गुनाहगार है।)
📕 [कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 261]

👉 "वलीमा यह है कि शब ए जुफाफ (सुहागरात) की सुबह को अपने दोस्त, रिशतेदारों, अजीज व अकारीब और मोहल्ले के लोगों को अपने इस्त्ताअत (हैसियत) के मुताबिक दावत करे, दावत करने वालों का मकसद सुन्नत पर अमल करना हो! न यह की वाह-वाही (शोहरत) करना हो।
📕 [कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 185,]

📚 हदीस :- हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ़ [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] का बयान है के मुझ से नबी-ए-करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया
 💎 "वलीमा करो चाहे एक ही बकरी हो।"

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 85, मोता शरीफ, जिल्द नं 2, सफा नं 434,]

 👉  इस्तेताअ़त (हैसियत) हो तो कम से कम एक बकरे या बकरी का गोश्त ज़रूर हो के हुजुर ﷺ ने इसे पसंद फरमाया! लेकिन अगर हैसियत न हो। तो अपनी हैसियत के मुताबिक किसी भी क़िस्म का खाना खिला सकते है कि इससे भी वलीमा हो जाएंगा! यह भी जाइज़ है।

📚 [हदीस :-] हज़रत सफ़िया बिन्त शैबा [रदि अल्लाहु तआला अन्हा] फरमाती है
💎 नबी ए करीम ﷺ ने अपनी बाज़ अज़वाजे मुतहरात (बीवीयों) का वलीमा दो सेर जव के साथ किया था।
📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 87,]

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              📮 पोस्ट नम्बर 6️⃣🅾️

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   .     🍔 [वलीमा का बयान ] 🍔

     ✍🏻 सैय्यदना इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] "कीमीया-ए-सआ़दत" में इरशाद फरमाते है
💫 "वलीमा में ताख़ीर (देरी) करना ठीक नही, अगर किसी श़रअई वजह से ताख़ीर हो जाए तो एक हफ़्ते के अन्दर, अन्दर वलीमा कर लेना चाहिए। उस से ज़्यादा दिन गुजरने न पाए।
📕 [कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 261]

📚 हदीस :- हज़रत इब्ने मसऊद [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है कि नबी-ए-करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया 
 💎 "पहले दिन का खाना यानी शब ए जुफाफ (सुहाग रात) के दूसरे रोज़ वलीमा करना) वाज़िब है दूसरे दिन का सुन्नत है और तीसरे दिन का खाना सुनाने और शोहरत के लिए है। और जो कोई सुनाने (शोहरत)के लिए काम करेगा। अल्लाह तआला उसे सुनाएगा (यानी इस की सजा उसे मिलेगी)
📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, बाब नं 746, हदीस नं 1089, सफा नं 559,]

📚 हदिस हजरत सईद बिन मुसैय्यीब रदि अल्लाहु तआला अन्हु को वलीमा मे पहले रोज बुलाया गया तो दावत मंजुर फरमा ली! दुसरे रोज दावत दी गई तब भी कुबुल फरमाई! तिसरे रोज बुलाया गया तो दावत मंजुर न की, बुलाने वाले को फरमाया की.... "यह शेखी बघारने वाले और दिखावा करने वाले है!
📕 [अबु दाऊद शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 131, हदीस नं 349, सफा नं 132]

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              📮 पोस्ट नम्बर 6️⃣1️⃣

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  🍪🍪 [दावत कुबूल करना :-] 🍪🍪

💫 दावत क़ुबूल करना सुन्नत है!

📚 हदीस : हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर [रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा] से रिवायत है। कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया 
    "जब तुम मे से किसी को वलीमा खाने के लिए बुलाया जाए तो वह जरूर जाए"
📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 87, मोता इमाम मालिक, जिल्द नं 2, सफा नं 434,]

📚 हदिस: हजरत अबु हुरैरा रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है के रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया
💫💫💫 "जो दावत कबुल करके न जाए उसने अल्लाह तआला और रसुल की नाफरमानी की"!

📚 हदिस: हजरत हमीद बिन  अब्दुर्रहमान हुमारी रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है के रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया
💫 "जब दो शख्स दावत देने एक वक्त आए, ते जिसका घर तुम्हारे घर से करीब हो उसकी दावत कबुल करो, और अगरलअक पहले आया तो जो पहले आया उसकी दावत कबुल करो "!
📕 [इमाम अहमद, अबु दाऊद शरीफ  जिल्द नं 3, बाब नं 136, हदिस नं 357 सफा नं  134]

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🔥🔥 बगैर  दावत जाना 🔥🔥

"दावत में बगै़र बुलाए नही जाना चाहिए। आज कल आम तौर पर कई लोग दावतों में बिन बुलाए ही चले जाते है और उन्हें न शर्म ही आती है न ही अपनी इज़्ज़त का कुछ ख़्याल होता है गोया....... मान न मान मै तेरा मेहमान"

📚 हदीस : सरकारे मदीना ﷺ ने इरशाद फ़रमाया
 💫  "दावत में जाओ जब के बुलाए जाओ"! और फरमाया
💫💫 जो बग़ैर बुलाए दावत में गया वोह चोर होकर  दाखील हुआ और गारतगीरी कर के लुटेरे की सूरत में बाहर निकला!  (यानी गुनाहो को साथ लेकर निकला)
📕 [अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 127, हदीस नं 342, सफा नं 130,]  

🔥🔥 बुरा वलीमा 🔥🔥

 🔥🔥 हदीस पाक में उस वलीमें को बहुत बुरा बताया गया है । जिस में सब अमीरो को तो बुलाया जाए और  गुरबा (गरीब) व मसाकीन को फरामोश (भुला दिया जाए) या उनके लिये अलग किस्म का  खाना और अमीरों के लिए अलग क़िस्म का खाना रखा जाए। या अमीरो की खुब खातीर तवाजु की जाए और गरीबो को नजर अंदाज कर दिया जाए, या उन्हे हिकारत की नजर से देखा जाए!

📚 हदीस हज़रत अबू ह़ुरैरा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत करते है रसूले ख़ुदा ﷺ ने इरशाद फरमाया....

💫💫 "सब से बुरा वलीमा का वह खाना है जिस में अमीरों को तो बुलाया जाए और गरीबों को नज़र अंदाज़ कर दिया जाए"।

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 88, मोता शरीफ, जिल्द नं 2, सफा नं 434,]

🔥 आजकल मुसलमानो मे एक नया रिवाज पैदा हुआ है के दावत मे दो किस्म के खाने होते है! सादा व कम लागत वाला खाना गरीब मुसलमानो के लिये और बेहतरीन खाना अमीर मुसलमान और गैर मुस्लीम दोस्तो के लिये रखे जाते है! और इस तरह खातीर तवाजु की जाती है के पुछिये मत

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       🔥🔥 बुरा वलीमा 🔥🔥

📚 हदिस : अल्लाह के रसुल ﷺ इरशाद फरमाते है!
💫 "जो काफीरो की ताजीम व तौकीर (इज्जत अफजाई और कद्र) करे यकीनन उसने दीन ए इस्लाम को ढाने (तोडने) मे मदद की!"  
📕 _[इब्ने अदी, इब्ने असाकीर, तबरानी, बैहकी शरीफ, इबु नईम फिल हिलयाती]

👉 _ बताइये जिन लोगो के मुतअल्लीक यह फरमान है! उनकी खातीर तवाजु मे इस कद्र मुबालेगा करना और मुसलमानो को उन से कम दर्जा शुमार करना कहॉ तक सही है! कुछ लोग कहते है की "साहब हमे दिन रात उनके बीच उठना बैठना है! हमारे कारोबारी ताअल्लुकात है, इसलिये यह सब कुछ करना जरूरी है!" 

     "एे मेरे भाई! जरा यह तो बताओ की क्या उमुमन यह गैर मुस्लीम भी अपनी शादी ब्याह के मौके पर मुसलमानो के लिये अलग और उनका पसंदीदा खाना रखते है? जी नही! तो फीर हम क्यो  उनसे मस्लेहत (Compromise) करे!" यकीनन ऐसे वलीमा का कोई सवाब नही मिलता जिसमे मुसलमानो से ज्यादा गैर मुसलमानो को अहमियत दी जाए!"

    💫  [टेबल कुर्सी पर खाना] 💫

📚 हदीस :- हज़रत अनस बिन मालीक [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है। कि रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया
 💎 "जब खाना खाने बैठो तो जूते उतार लो के इस में तुम्हारे पाँव के लिए ज़्यादा राहत है और येह अच्छी सुन्नत है"
📕 [तबरानी शरीफ,,]

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       🔥🔥 बुरा वलीमा 🔥🔥

आज कल टेबल कुर्सी पर जूते पहने हुए खाना-खाने का  फैशन बन गया है। जिस दावत  मे टेबल कुर्सी का इंतजाम न हो वह दावत घटीया किस्म की दावत समझी जाती है!     

टेबल कुर्सी पर खाना खाने के मुत्अ़ल्लिक़ मुजद्दिदे आज़म इमाम अहमद रज़ा खाँ रदिअल्लाहु तआला अन्हु इरशाद फरमाते है
 👉🏻 "टेबल कुर्सी पर जूता पहेने हुए खाना खाना ईसाइयों की नक़्ल है, इससे दूर भागे और रसूलुल्लाह ﷺ का वह इरशाद याद करे। 
من تشبه بقوم فهو منهم

यानी जो किसी क़ौम से मुशाबेहत (नक़्ल) पैदा करे वह उन्ही में से है।
📕 [फ़तावा-ए-अफ्रीका, सफा नं 53,]

💫 यह तो टेबल कुर्सी पर खाने के मुतअल्लीक हुक्म था! मगर मौजुदा दौर मे इतनी तरक्की हो गई है के अक्सर जगह खडे-खडे खाने का इंतेजाम होता है! इसमे ऐसे मुसलमान ज्यादा शरीक है, जिनके सर पर सोसायटी मे मॉर्डन कहलाने का भुत सवार है! हैरत बालाए हैरत इस तरह की भिकारी की दावत को स्टेंडर्ड (Standard) का नाम दिया जा रहा है!

💫💫 अल्लाह तआला ने इंसान को अशरफुल मख्लुकात बनाया, और उसे खानेे, पिने, सोने, जागने, चलने फिरने, और उठने बैठने  गर्ज की हर मुआमले मे जानवरों से अलग मुंफरीद इम्तियाज खुसुसीयत से नवाजा है! लकीन ताज्जुब! आज का इंसान जानवरो के तरीको को अपनाने मे ही अपनी तरक्की समझ रहा है!और इसपर फुले नही समा रहा है! अल्लाह तआला मुसलमानो को जानवरो की तरह खडे रहकर खाने-पिने से बचने की तौफीक अता फरमाए! आमीन!
 
✍🏻 [मसअ़ला ] *भूख से कम खाना सुन्नत है, भूख भर कर खाना मुबाह है, (यानी न सवाब है न गुनाह) और भूख से ज़्यादा खाना हराम है। ज़्यादा खाने का मतलब यह है कि इतना खाया की पेट खराब होने या  बदहज्मी होने का गुमान है।
📕 [कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 178,]

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              📮 पोस्ट नम्बर 6️⃣5️⃣

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        ✍🏻 एक नई ख़ुराफ़ात ✍🏻

👉 आज कल मुसलमानों में एक और नई चीज़ राएज़ हो गयी है वोह यह  के औरतों में जवान मर्द और लड़के खाना परोसते है! खाने के दौरान बेहूदा़ गन्दा मज़ाक, लड़कियों से छेड़ छाड़ और बदतमीज़ी की हर हद को पार कर लिया जाता है। क्या इस के हराम व गुनाह होने में किसी को कोई शक़ है।

📚 [हदीस ] रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया
 💫 अल्लाह की लाअ़नत बद निगाहीं करने वाले पर और जिस की तरफ बद निगाही की जाए।
📕 [बयहक़ी शरीफ, बाहवाला मिश्क़ात शरीफ, जिल्द नं 2 सफा नं 77,]

📚 [हदीस ] और फरमाते है हमारे प्यारे आक़ा ﷺ
 💫  "जो शख़्स किसी औरत को बद निगाही से देखेगा, क़यामत के दिन उसकी आँखों में पिघला हुआ सीसा डाला जाएगा"।

        👉🏻 इस बुरे तरीक़े पर पाबंदी लगाना हर  मुसलमान पर ज़रूरी है और ख़ास कर हमारे घर के बडे बुजुर्गों पर ख़ास जिम्मेदारी है के वह शादी ब्याह के मौके पर औरतों में मर्दों को जाने और खाना खिलाने से रोके  वरना याद रखिए महशर में सख़्त पूछ होगी। और आप से पूछा जाएगा "तुम क़ौम में बुज़ुर्ग थे तुम ने अपनी जवान नस्लों को इन हराम कामों से क्यों न रोका था। इस बेहयायी के खिलाफ तुम ने क्यो इक्दाम न किया?" बताए उस वक्त़ आप् के पास क्या जवाब होगा?

📚 [हदीस ] अल्लाह  के रसूल ﷺ ने इरशाद फरमाया
السالت عن ألحق شيطان اخرس  

💎  "बुराई देख कर हक़ बात कहने से खामोश रहने वाला गूंगा शैतान है"।

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              📮 पोस्ट नम्बर 6️⃣6️⃣

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  💫 मुबाशरत (सोहबत) के आदाब 💫 

 अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है
💎 तर्जुमा : "तो उन से सोहबत करो और तलब करो जो अल्लाह ने तुम्हारे नसीब में लिखा हो ।"
📕 [तर्जुमा :- कन्जुल इमान, पारा 2, सूरह ए बखराह, आयत नं 187,]

      👉 इस बात का हमेशा   खयाल  रखे कि जब भी मुबाशरत (सोहबत) का इरादा हो तो यह जान ले के कही औरत हैज़ (माहवारी) की हालत में तो नही है। चुनांचे औरत से साफ़ साफ़ पूछ ले और औरत की भी जिम्मेदारी है की अगर वह हैज की हालत मे है, तो बेझिजक अपने शौहर को बता दे! अगर औरत हैज़ की हालत में हो तो हरगिज़ हरगिज़ सोहबत न करे कि इस हालत में औरत से सोहबत करना बहुत बड़ा गुनाह है। (इस मसअ़ले का बयान इंशा अल्लाह आगे आएेगा)
             
 👉🏻 अक्सर औरतें शादी की पहली रात (सुहाग रात) हालते हैज (महावीरी) मे होने के बावजुद शर्म की वजह से बताती नही है। या कह भी दे तो बहत कम मर्द  होते है जो सब्र से काम लेते है!  और जो सोहबत कर बैठते है , और जल्दबाज़ी की सज़ा उम्र भर डॉक्टरों और हकीमों की फ़ीस की शक़्ल में भुगतने पडते हा!  लिहाजा मर्द और औरत दोनों को ऐसे मौक़ों पर सब्र से काम लेना चाहीये!

 👉🏻 _कुछ मर्द मतलब परस्त होते हैं। उन्हें सिर्फ़ अपने मतलब से ही लेना (काम) होता है, वह दूसरे की खुशी को कोई अहमियत नहीं देते वह यही उसूल अपनी बीवी के साथ भी रखते हैं! चुनांचे जब उनके दिल मे ख्वाहिश ए जिमा होती है, तो वह यह नही देखते की औरत उसके लिये तैयार है या नही, वह कही किसी दुख दर्द या बिमारी मे मुब्तला तो नही है? 
इन सब बातो से उन्हें कोई मतलब नहीं होता वह बेसब्री के साथ औरत  से अपनी ख्वाहिश की तक्मील कर लेते है!  इस हरकत से औरत की निगाह में मर्द की इज़्ज़त कम हो जाती है और वह मर्द को मतलब परस्त समझने लगती है! साथ ही वह मुबाशरत (सोहबत) का लुत्फ भी हासिल नही हो पाता।_

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              📮 पोस्ट नम्बर 6️⃣7️⃣

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  💫 मुबाशरत (सोहबत) के आदाब 💫 

 📚 [हदीस ] उत्बा बिन अस्सलमी रदी अल्हाहु तआला अन्हु से  रिवायत है के रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फरमाया
💎 "तुम मे से जो कोई अपनी बीवी के पास जाए तो पर्दा कर ले और गधो की तरह न शुरू हो जाए"
📕 [इब्ने माज़ा, जिल्द नं 1, बाब नं 616, सफा नं 538, हदीस नं 1990,]

📚 हदीस : सैय्यदना हज़रत इमाम ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत करते है । कि  हुजुर ﷺ ने इरशाद फरमाया      
💎 "मर्द को न चाहिए कि अपनी औरत पर जानवर की तरह गिरे, सोहबत से पहले क़ासिद (पैग़ाम पहुँचाने वाला) होता है"। सहाब-ए-किराम ने अ़र्ज़  किया "या रसूलुल्लाह ! वह क़ासिद क्या है?? आप ने इरशाद फरमाया "वह बोस व किनार (kiss) वगै़रह है"। और मुहब्बत आमोज (प्यार भरी) गुफ्तगु है! (यानी सोहबत से पहले   औरत को राज़ी करना)
📕 [कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 266,]        

📚 हदीस : उम्मुल मोमीनीन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा रदि अल्लाहु तआला अन्हा से मरवी  है। कि रसूले अकरम ﷺ ने इरशाद फरमाया          
💎 जो मर्द अपनी बीवी का हाथ उसको बहलाने के लिए पकड़ता है। अल्लाह तआला उस के लिए एक (1) नेक़ी लिख देता है!  जब मर्द मुहब्बत के साथ औरत के गले में हाथ डा़लता है, उसके हक़ में दस (10) नेक़ियां लिखी जाती है, और जब औरत से जिमा (सोहबत) करता है तो दुनिया और माफीहा से बेहतर हो जाता है।
📕 [गुनीयातुत्तालिबीन, सफा नं 113,]

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              📮 पोस्ट नम्बर 6️⃣8️⃣

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   💫 मुबाशरत (सोहबत) के आदाब 💫 

         👉🏻 सोहबत से पहले खुद बेचैन न हो जाए अपने आप पर पुरा इत्मीनान रखे!  जल्दबाज़ी न करें पहले बीवी से प्यार मुहब्बत भरी गुफ्तगु करे फिर बोस व किनार के जरीये  उसे मुबाशरत के लिये (आमदा) तैय्यार  करे और इसी दौरान दिल ही दिल में यह दुआ पढे
 
بسم الله العلى العظيم الله اكبر الله اكبر

बिस्मील्लाह्-हील  अलीयील अजीमी अल्लाहु अकबर! अल्लाहु अकबर

तर्जुमा : अल्लाह के नाम से जो बुज़ुर्ग व बरतर अ़ज़मत वाला है। अल्लाह बहुत बड़ा है अल्लाह बहुत बड़ा है

  👉🏻 इसके बाद मर्द, औरत जब सोहबत का इरादा कर ले तो कपड़े जिस्म से अलग करने से पहले एक मर्तबा "सूर ए इख़लास" पढ़े
 
                    ﷽

قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ۔ اللَّهُ الصَّمَدُ ۔ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ۔ وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ۔

    👉🏻 सूरए इख़्लास पढ़ने के बाद यह दुआ पढ़ें।
 
بِسْمِ اللَّهِ ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ ، وَجَنِّبْ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
बिसमिल्लाही अल्लाहुम्मा जन्निब्नश्शयताना व जन्निबिश्शयताना मा रजखतना
 
👉🏻 तर्जुमा : अल्लाह के नाम से!  एे अल्लाह दूर कर हम से शैतान मरदूद को और दूर कर शैतान मरदूद को उस औलाद से जो तू हमें अता करेगा।
📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3 सफा नं 473, कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 266, हिस्ने हसीन, सफा नं 165,] 

📚 हदीस : हज़रत अबदुल्लाह इब्ने अब्बास [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है। कि रसूले अकरम ﷺ ने इरशाद फरमाया
👉🏻 "जो शख़्स इस दुआ को सोहबत के वक्त़ पढे़गा (वही दुआ जो ऊपर लिखी गई है) तो अल्लाह तआला उस पढ़ने वाले को अगर औलाद अ़ता फ़रमाए तो उस औलाद को शैतान कभी भी नुकसान न पहुँचा सकेगा।
📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 85, तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, सफा नं 557,]

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              📮 पोस्ट नम्बर 6️⃣9️⃣

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   💫 मुबाशरत (सोहबत) के आदाब 💫 
     . 🔥🔥 होशियार🔥🔥

 इस हदीस की शरह (Explanation) में हुज़ूर गौ़से आ़ज़म शेख़ अब्दुल क़ादिर ज़ीलानी व मुहक़्क़िक़े इस्लाम शेख़ अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी और आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ [रदि अल्लाहु तआला अन्हुम] इरशाद फरमाते है
 👉🏻 "अगर कोई शख़्स सोहबत के वक्त़ यह दुआ न पढ़े (यानी शैतान से पनाह न माँगे) तो उस शख़्स की शर्मगाह से शैतान लिपट जाता है और उस मर्द के साथ शैतान भी उस की औरत से सोहबत करने लगता है। और इस जिमा से जो औलाद पैदा होती है वह न फ़रमान, बुरी आ़दतों वाली, बेगै़रत, बद्'दीन होती है! शैतान की इस दख़ल अंदाज़ी की सबब औलाद में तबाह कारी आ जाती है। (वल-अयाज बिल्लाह)
📕 [गुन्यतुत्तालिबीन, सफा नं 116, अश्अ़तुल लम्आ़त, फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 46,]

 हदीस : "बुखारी शरीफ" की एक हदीस में है के हज़रत सअ़द बिन ऊबादा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने फरमाया"
  👉🏻 "अगर में अपनी बीवी को किसी के साथ देख लूं तो तलवार से उस का काम तमाम कर दूँ। उन की येह बात सुन कर अल्लाह के रसूल ﷺ ने इरशाद फरमाया..."लोगों तुम्हें साअ़द की इस बात पर ताअ़ज्जुब आता है हालाँकि मैं उन से बहुत ज़्यादा ग़ैरत वाला हूँ और अल्लाह तआला मुझ से ज़्यादा ग़ैरत वाला है।
📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 137, सफा नं 104,]

       👉🏻  लिहाजा इस मुसीबत से बचने के लिये जब भी सोहबत करे तो याद करके दुआ पढ ले! या कम अज कम आऊजु-बिल्लाही मिनश्शैता-निर्रजीम बिसमिल्ला हिर्रहमानिर्रहीम जरुर पढ लिया करे!

👉 _गालिबन आज कल  बहुत से हमारे भाई ऐसे होंगे जो सोहबत के वक्त़ दुआ़ नहीं पढ़ते । शायद यही वजह है कि नस्ले (औलादें) बेग़ैरत, नाफ़रमान, और दीन से दूर नज़र आ रही है। हमारा और आप का रोज़ मर्रा का मुशाहिदा है कि औलाद से बाप कहता है बुजुर्गों की मज़ारात पर हाजिर होना चाहिए बेटा बुजुर्गों की मज़ारों पे जाने को ज़िना और कत्ल कर देने से बदतर समझता है। बाप का अ़कीदा है कि *रसूलुल्लाह ﷺ आक़ा व मौला है, बेटा रसूले अकरम ﷺ को अपने जैसा बशर और बडे भाई से ज्यादा समझने को तैयार नही! (माजअल्लाह!)_

👉 गरज के इस तरह की सैकडो मिसाले है की दुनियावी मुआमला हो या दीनी, औलाद अपने मॉं बाप और बुजुर्गो  से बाग़ी नज़र आती है! अल्लाह तआला मुसलमानों को तौफ़ीक़ दे।

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              📮 पोस्ट नम्बर 7️⃣🅾️

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💫 इन्जा़ल (मनी निकलते वक्त़)की दुआ़ 💫 

 👉🏻 जिस वक़्त इन्ज़ाल हो यानी मर्द की मनी (वीर्य) उस के आले (ऊज़ू-ए-तनासुल) से निकल कर औरत की फरज (शर्मगाह) में दाखिल होने लगे उस वक्त़ दिल ही दिल में यह दुआ़ पढ़ें!
 
اللَّهُمَّ لَا تَجْعَلْ لِلشَّيْطَانِ فِيمَا رَزَقْتَنِى نَصِيبًا

अल्लाहुम्मा ला-तज-अल लिश्शैतानी फिमा रज़खतनी नसीबा!
           
👉🏻 [तर्जुमा :-] एे अल्लाह! शैतान के लिए हिस्सा न बना इसमे में जो (औलाद) तू हमें अ़ता करें।    
📕 [हिस्ने हसीन, सफा नं 165, फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 161,]

👉🏻  इस दुआ़ की तालीम देना इस बात की शहादत है कि इस्लाम एक मुकम्मल दीन है। जो ज़िन्दगी के हर मोड़ पर अपना हुक़्म नाफ़िज़ करता है ताकि मुसलमान किसी भी मामले में किसी दूसरे मज़हब (धर्म) व कानुन  का मोहताज़ न रहे! और इस दुआ मे दुसरी हिकमत यह भी है के मुसलमान कीसी भी हाल में यादें इलाही से गा़फ़िल न रहे बल्की हर हाल मे अल्लाह की रहमत का उम्मीदवार रहे!

        साथ ही साथ यह बात भी याद रखना ज़रूरी है। कि आने वाली औलाद के लिए अल्लाह तआला की बारगा़ह में दुआ़ तो की जाए के अल्लाह तआला उसे शैतान से महफ़ूज रखे!  लेकिन जब  औलाद पैदा हो जाए और उसे शैतानी कामों से न रोके, उसे बुरी बातों से मना न करे, और अच्छी बातों का हुक़्म न दे, तो बड़ी अ़जीब व ताअ़ज्जुब खेज बात होगी। इसलिए आगाह हो जाईये! के यह दुआ़ हमें आइन्दा के लिए भी अ़मले खैर करने की दावते फिक्र देती है।

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              📮 पोस्ट नम्बर 7️⃣1️⃣

 

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❤ [इन्ज़ाल के फौरन बाद अलग न हो] ❤

📚 हदीस :- सैय्यदना इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत करते है। कि हुज़ूर ने इरशाद फरमाया.............

 💎💎 "मर्द में यह कमजोरी की निशानी है कि जब मुबाशरत (सोहबत)का इरादा करे तो बोस व किनार (चुम्मन) से पहले बीवी से सोहबत करने लगे और जब इंजाल (उस की मनी, वीर्य) निकलने लगे तो सब्र ना करे और फौरन अलग हो जाए कि औरत की जरुरत (हाजत ) पूरी नही होती"

📕 [कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 266,]

 

 👉🏻 इमाम अहले सुन्नत आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ कादरी [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] फ़रमाते है....

👉🏻 ...."इन्ज़ाल होने के बाद फौरन औरत से जुदा न हो यहाँ तक कि औरत की भी हाजत (जरुरत) पूरी हो हदीसे पाक में इस का भी हुक़्म है! अल्लाह अज़्ज़ व जल्ला की बेशुमार दुरूदे उस नबी ए रहेमत  पर जिन्हो ने हम को हर बाब में तालीमे खै़र दी और हमारी दुनियावी और दीनी हाज़तो की कश्ती को  किसी दूसरे के सहारे न छोड़ा।"

📕 [फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 161,]

 

👉🏻 चुनांचे मर्द को इंजाल हो भी जाए (मनी , वीर्य निकल जाए )तो भी फौरन औरत से अलग न हो जाए बल्कि इसी तरह कुछ देर और ठहरा रहे ताकि औरत का भी मतलब पूरा हो जाए क्योंकि कुछ औरतों को देर में इन्ज़ाल होता है।

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              📮 पोस्ट नम्बर 7️⃣2️⃣

 

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💫 🎟 [सोहबत के बाद जिस्म की सफ़ाई]

👉🏻 सोहबत के बाद मर्द और औरत अलग हो जाए फिर किसी साफ़ कपड़े से पहले दोनों अपनी अपने अपने मकामे मख्सुस को (शर्मगाह को) साफ़ करे ताकि बिस्तर पर गन्दगी लगने न पाए।  सफ़ाई के  बाद पेशाब कर ले की उसके के बहुत से फायदे है, हकीमो ने बयान किये है! जिनमे से चंद यहॉ जिक्र किये जाते है!

 

 1⃣  अगर मर्द के आले मे (ऊज़ू-ए-तनासुल ) कुछ मनी बाकी रह गयी हो तो वह पेशाब के ज़रिए निकल जाती है! और अगर थोड़ी सी मनी उज्व मे ऊपर रह जाए तो बाद में पेशाब मे जलन और  खुजली की बीमारी होने का अंदेशा  होता है।

2⃣ पेशाब जरासीम कुश होता है (क्योकी पेशाब मे  जरासीम (Germs) को ख़त्म करने वाले अज्जा पाये जाते है) इसलिए पेशाब के वहाँ से गुजरने से उस जगह  की सारी गन्दगी ख़त्म हो जाती है, और  उस जगह के जरासीम (Germs कीटाणु) ख़त्म हो जाते है!  और शर्मगाह की नाली (नली) साफ़ हो जाती है। इस तरह के और भी कई फायदे है जिनकी तफ्सील यहॉ तवालत का सबब (मुमकीन नही) है!

👉🏻 नोट :- पेशाब के उज्वे तनासुल (शर्मगाह) से जुदा होने के बाद और ठंडा होने पर खुद पेशाब मे करोडोहा जरासीम किटानु बढ कर नुक्सानदेह साबीत होते है! इसलिये शरीयत मे पेशाब का किसी भी तरह का इस्तेमाल हराम है!

 

 ➡ पेशाब कर लेने के बाद शर्मगाह और उस के आस पास के हिस्से को भी अच्छी तरह से धो लें इस से बदन तंदुरूस्त रहता है और खुजली की बीमारी से बचाव हो जाता है।

लेकिन याद रखिये! मुबाशरत  (सोहबत के फौरन बाद ठन्ड़े पानी से न धोए, उससे बुख़ार (Fever) होने का ख़तरा होता है। इसलिए कि सोहबत के बाद जिस्म का दर्जा-ए-हरारत (Body Temperature) बढ़ जाता है जिस्म में गर्मी आ जाती है अगर गर्म जिस्म पर ठन्डा पानी डाला जाए तो बुख़ार जल्द होने का ख़तरा  है।

लिहाजा सोहबत करने के बाद तकरीबन पाँच, दस मिनट बैठ जाए या लेट जाए, ताके बदन की हरारत  (Body Temperature) ऐतेदाल (Normal) पर आ जाए!  फिर उसके बाद पानी का इस्तेमाल करे! अगर जल्दी हो तो हल्के गर्म, गुन गुने पानी से शर्मगाह धोने में कोई नुकसान नही।

 

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     💫 [सोहबत के कुछ और आदाब] 💫

👉🏻 जैसा के हम पहले ही बयान कर चुके है कि मज़हब ए इस्लाम हमारी हर जगह हर हाल में रहनुमाई करता हुआ नज़र आता है! यहाँ तक कि मियाँ बीवी के आपसी तअ़ल्लुक़ात में भी एक बेहतरीन दोस्त व रहनुमा बन कर उभरता है और हमारी भरपूर रहनुमाई करता है।

 👉🏻 यहाँ हम श़रई रोशनी में  मुबाशरत (सोहबत) के कुछ और आदाब बयान कर रहे है जिसे याद रखना और उस पर अ़मल करना हर शादी शुदा मुसलमान मर्द व औरत पर ज़रूरी है।

 

💫 💫  सोहबत तन्हाई मे करे 💫

👉🏻 आपने सड़कों पर, सिनेमा हाल में और बागो  में खुले आम कुछ पढ़े लिखे कहलाने वाले मार्डन इन्सान, जो इन्सानी शक़्ल में जानवर नज़र आते है क्योंकी वह सड़को और बाग़ो में ही वह सब कुछ कर लेते है जो उन्हें नही करना चाहिये। लेकिन अल्हमदुलिल्लाह!  हम मुसलमान है और अशरफुल मख़लूकात है। इसलिए हम पर ज़रूरी है कि हम इस्लाम का हुक़्म माने और मॉर्डन (Modern) जानवर नुमा इंसानो की नक़्ल से बचे! लिहाज़ा याद रखिये सोहबत हमेशा तन्हाई में ही करे और ऐसी जगह करे जहाँ किसी के आने का कोई ख़तरा न हो। और उस  वक्त़ कमरे में अँधेरा कर ले रोशनी मे हरगिज़ न हो।

 

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     💫 💫  सोहबत तन्हाई मे करे 💫

 

✍🏻 मसअ़ला बिवी का हाथ पकड कर मकान के अंदर ले गया और दरवाजा बंद कर लिया और लोगो को मालुम हो गया की वती (मुबाशरत) करने के लिये ऐसा किया है, तो यह मकरूह है

📕 [बहारे शरीयत जिल्द नं 2,  हिस्सा नंबर 16,सफा नं 57]

 

✍🏻 मसअ़ला जहाँ कुरआ़ने करीम की कोई आयते करीमा, किसी चीज़ पर लिखी हुई हो अगर्चे ऊपर शीशा (काँच) हो जब तक उस पर  कपडे का ग़िलाफ़ न डाल लें वहाँ सोहबत करना या बरहेना (नंगा) होना बेअदबी है।

📕 [फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 258]

 

✍🏻 हुज़ूर ग़ौसे आ़ज़म़ [रदिअल्लाहु तआलाअन्हु] "गुन्यतुत्तालिबीन" में और आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] अपनी "मल्फ़ूज़ात" "अल-मसफुज" मे फरमाते है

 👉🏻 "जो बच्चा समझदार है और दूसरों के सामने बयान कर सकता है उस के सामने सोहबत करना मक़रूह (तहरीमी (यानी शरीअ़त में ना पसंद, व नाजाइज़) है"

 

✍🏻 मसअ़ला किसी की दो बीवीयां हो तो एक बीवी से दूसरी बीवी के सामने सोहबत करना जाइज़ नही। मर्द को अपनी बीवी से हिजाब (पर्दा )नही लेकीन एक बीवी को दूसरी बीवी से तो पर्दा फ़र्ज़ है और शर्म व हया ज़रूरी है"

📕 [फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 207,]

 

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              📮 पोस्ट नम्बर 7️⃣5️⃣

 

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      🌈 🌈 मुबाशरत से पहले वुज़ू 🌈🌈

 

👉🏻 मुबाशरत (सोहबत) से से पहले वुज़ू कर लेना चाहिये इस के बहुत से फ़ायदे है जिन में से चन्द हम यहाँ बयान करते है।

 

1⃣ अव्वल वुज़ू करना सवाब और बाइसे बरकत है।

 

2⃣ सोहबत से पहले वुज़ू करने की हिक्मत एक यह भी है के मर्द और औरत दोनो मे यह एहसास पैदा हो कि सोहबत हम सिर्फ़ अपनी ख्वाहिशाते नफ्सानी पुरा करने के लिये नही कर रहे है (मज़ा लेने के लिए नही कर रहे हैं।) बल्कि नेक सालेह औलाद पैदा करना मक़्सद है! दुसरी हिक्मत यह है की किसी भी वक्त़ यादें इलाही से हमें गा़फ़िल नही होना चाहिए।

 

3⃣ मर्द बाहर के कामों से और औरत घर के कामों की वजह से दिन भर के थके मांदे होते हैं। थका जिस्म दूसरो के लिये  फ़ायदा बख्श साबीत नही होता है! लिहाजा वुज़ू कर लेना  चुस्तीक़ुव्वत और खुद ऐतेमादी का सबब बनता है!

 

4⃣ दिन भर की भागदौड मे जिस्म व चेहरे पर धुल मिट्टी जरासीम (किटाणु) मौजूद रहते है!  जब मर्द व औरत बोस व किनार (चुम्मन) करते है। तो यह जरासीम मुँह में और सांसो के जरीए जिस्म मे दाखील हो सकते है! जिस से आगे मुख्तलिफ अमराज (बीमारियॉ) के पैदा होने का ख़तरा होता है। ऐसे सैकड़ों फ़ायदे है जो वुज़ू कर लेने से हासिल होते हैं।

 

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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   .   🌈 [नशे की हालत में सोहबत] 🌈

 

            शरीअ़ते इस्लामी मे हर किस्म का नशा हराम है! और इस्लाम मे शराब को तो उम्मुल-खबाईस (यानी तमाम बुराइयों की माँ) तक बताया गया है। दो हदीसे पाक का हासिल है के

 

📚 हदीस  "जिसने शराब पी गोया उस ने अपनी माँ के साथ जिना किया"।

📕 [ब हवाला फ़तावा-ए-मुस्तफ़्वीया, जिल्द नं 1, सफा नं 76,]

 

📚 हदीस रसूलुल्लाह ने इरशाद फरमाते है!

💎 "शराब पीते वक्त़ शराबी का ईमान ठीक नही रहता"।

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 614]

 

 

📚 हदीस और फरमाते है आक़ा

💎 "शराबी अगर बगै़र तौबा किये मरे तो अल्लाह तआला के हुज़ूर इस तरह से हाज़िर होगा जैसे बुतो की पूजा करने वाला"

📕 [अहमद, इब्ने हब्बान, बहवाला फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 10, सफा नं 47]

 

📚 हदीस हज़रत अबू ह़ुरैरा [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है। कि रसूलुल्लाह ने इरशाद फरमाया.......

💎 "जो ज़िना करे या शराब पीये अल्लाह तआला उससे ईमान खींच लेता है जैसे आदमी अपने सर से (आसानी के साथ) कुर्ता खींच लेता है।

📕 [हाक़िम शरीफ, बहवाला फ़तावा-ए-रज़वीया, जिल्द नं 10, सफा नं 47,]

 

📚 हदीस हज़रत अबू उमामा [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है। के रसूलुल्लाह ने इरशाद फरमाया..........

 💎 "अल्लाह ताआ़ला फरमाता है क़सम है मेरी इज़्ज़त की, जो मेरा कोई बन्दा शराब का एक घूँट भी पीयेगा मै उस को उतना ही पीप पिलाऊंगा"।

📕 [इमाम अहमद, बहवाला बहारे शरीअ़त, जिल्द नं 1, हिस्सा 9, सफा नं 52]

 

 👉🏻 "हक़ीमों और डॉक्टरों ने कहा है की नशे की हालत में सोहबत करने से रेहुमेटीक पैन (Rehumetic Pain) नामी बीमारी पैदा हो जाती है और औलाद अपाहिज़ (लंगड़ी लूली) पैदा होती है"    

 

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❌ [मुबाशरत (सोहबत) खड़े खड़े न करें!]

 

     👉🏻 मुबाशरत (सोहबत) खड़े खड़े न करे कि यह जानवरों का तरीक़ा है! और न ही बैठे बैठे कि यह औरत और मर्द दोनो के लिये नुकसानदेह है! इस तरीके से मुबाशरत करने से बदन कमजोर और खासकर मर्द  का ऊज़्व -ए-तनासुल  जड़ से कमज़ोर हो जाता है! अगर हमल करार पा जाए तो बच्चा    कमजोर, अपंग  (हाथ पैर से अपाहिज़) पैदा होता है। या फिर जिस्म का कोई हिस्सा अधुरा रह जाएंगा!

 

💫💫💫 कुछ मोतमद उलमा-ए-दीन ने फरमाया है कि.......!

 "खडे-खडे मुबाशरत करने से अगर औरत को हमल करार पा जाए तो औलाद बद दिमाग़ और बेवकूफ़ होंगी। या पैदाईशी तौर पर निम पागल (Half Mental) पैदा होंगी!

           👉🏻 हकीमों की इस  मुताल्लीक तहकीक यह है के  "खड़े रहकर सोहबत करने से रअशा (बदन हिलने) की बीमारी हो जाती है।" वल - अयाज बिल्लाह (अल्लाह की पनाह!) 

 

         👉🏻 सोहबत करने का सही तरीक़ा यह है कि बिस्तर पर लेटे लेटे हो, औरत नीचे की जानीब और मर्द ऊपर की जानीब हो! जैसा कि कुरआने करीम मे भी इस बारे मे इशारा किया गया है!

 

💎 तर्जुमा:- फिर जब मर्द उस पर छाया उसे एक हल्का सा पेट रह गया

 📕  कुरआन ए करीम तर्जुमा कन्जुल इमान, पारा 9, सूरए, आराफ़, रूकू 14, आयत नं 189

 

👉🏻 इस आयते करीमा से हमें यह सबक मिलता है कि सोहबत के वक्त़ औरत चित लेटे और मर्द उस पर पट (उल्टा) लेटे कि इस तरीके सेे मर्द के जिस्म से औरत का जिस्म भी ढ़क जायेगा। जैसा की आयत ए करीमा मे इशारा किया गया है! और इस तरीके से मुबाशरत कानुन ए फितरत के मुताबीक है! अब अगर इसकी खिलाफ वर्जी की गई तो बहरहाल नुक्सान तो जरूर होंगा! देखा जाए तो इस तरीक़े में ज़्यादा राहत व आसानी है! औरत को इसमे मशक्कत नही होती और मर्द की मनी आसानी से निकल कर औरत की शर्मगाह में दाख़िल होती है और हमल जल्द करार पाता है।(ठहर जाता है!)

 

     हकीम बु अली सीना जो  अपने जमाने के एक मशहुर व मारूफ हकीम गुजरे है उन्होने लिखा है की......

 

💫💫 "अगर औरत उपर और मर्द निचे हो तो इस सुरत मे मर्द की कुछ मनी उसके उज्व मे बाकी रह कर तअफ्फुन पैदा करेंगी और बाद मे तकलिफ व अजीयत की वजह बनेंगी!

 

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     🕋 [किब्ला की तरफ रूख़ न हो] 🕋

 

 ✍🏻  हुज़ूर सैय्यदना इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] फरमाते है

 💫💫 "सोहबत करने के आदाब में से एक अदब यह भी है कि सोहबत के वक्त़ मुँह क़िब्ला की तरफ से फेर लें।

 

📕 [कीम्या-ए-सआ़दत, सफा नं 266,]

 

       ✍🏻 आला हज़रत [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] इर्शाद फरमाते है

 💫💫 "सोहबत के वक्त़ क़िब्ला की तरफ मुँह या पीठ करना मक़रूह व ख़िलाफ़े अ़दब है जैसा के "दुर्रे मुख़्तार" मे बयान हुआ"

📕 [फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 9, सफा  140]

 

     👉🏻 सोहबत के वक्त़ क़िब्ला की तरफ से रुख  फेरने के लिए गालीबन इस लिए कहा गया है की क़िब्ला की ताज़ीम हर मुसलमान पर ज़रूरी है, उस की तरफ़ रूख़ कर के बन्दा अपने परवरदिगार  की इबाद़त करता है! और क़िब्ला की तरफ थूकने, पेशाब, पाख़ाना करने और बरहेना (नंगा) उस की तरफ रूख़ करने की सख़्त मुमानियत आई है।

 

📚 हदीस एक हदीसे पाक मे पाक में है कि नबी-ए-करीम ने इरशाद फरमाया

💎 "जब बन्दा नमाज़ पढ़ता है तो वह अपने रब से मुनाजाक कर रहा होता है! या उसका  परवरदिगार उसके और क़िब्ला के दर्मियान होता है! (यानी क़िब्ला की जानिब अल्लाह तआला की रहमत ज़्यादा मुतवज्जहे होती है)

 

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 1, बाब नं 274, हदीस नं 393, सफा नं 233,]

           

                👉 अब चूँकि सोहबत के वक्त़ मर्द और औरत बरहेना (नंगी) हालत में होते है तो भला उस हालत में भला क़िब्ला की तरफ रूख़ कैसे किया जा सकता है। इसलिये मुबाशरत के वक्त अदबन किब्ला की जानीब रूख करने से मना फरमाया गया है!

 

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      🔥 नंगे होकर सोहबत करना🔥

 

👉🏻 सोहबत के वक्त़ मर्द और औरत कोई चादर वगैरह ओढ़ ले, जानवरों की तरह बरहेना (नंगे होकर) सोहबत न करे।

 

📚  हुज़ूरे अकरम   इरशाद फरमाते है

 💎 "जब तुम मे कोई अपनी बीवी से सोहबत करे तो पर्दा कर ले बेपर्दा होगा तो फ़रिश्ते हया की वजह से बाहर निकल जाएंगे और शैतान आ जाएंगा, अब अगर कोई बच्चा हुआ तो शैतान की  उसमे शिर्कत होगी।

📕 [गुनीयातुत्तालिबीन, सफा नं 116]

 

✍🏻 इमामे अहलेसुन्नत आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ कादरी मुहद्दीस बरैलवी  [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने अपनी किताब *"फ़तावा-ए-रज़वीया" में फरमाते है

💫💫 सोहबत के वक्त़ अगर कपड़ा ओढ़े है बदन छुपा हुआ है तो कुछ हर्ज नही और अगर बरहेना (नंगी हालत मे) है तो एक तो बरहेना सोहबत करना खुद मक़रूह है हदीस में है कि रसूलुल्लाह ने सोहबत के वक्त़ मर्द व औरत को कपड़ा ओढ़ लेने को हुक़्म दिया और फरमाया! "यानी गधे की तरह नंगे न हो"

📕 _[फ़तावा ए रज़्वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 140,]

 

✍🏻 आला हज़रत [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] एक दूसरी जगह इरशाद फरमाते है!

  💫💫 "बरहेना (नंगी हालत मे) रह कर सोहबत करने से औलाद के बेशर्म व बेहया होने का ख़तरा है"।

📕 [फ़तावा ए रज़्वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 46,]

 

         👉🏻 सोचीये इंसान की जरा सी लापरवाही कहॉ तक नुकसान का सबब बन जाती है! गालीबन इस जमाने मे जो शर्म और हया का जनाजा उठता जा रहा है, उसकी सैकडों वुजुहात मे से यह भी एक वजह रही हो की मुबाशरत बरहाना (नंगे) होकर की गयी हो, और उपर से कोई चादर या कपडा न लिया गया हो! और यह असर नस्ल (बच्चो) मे आया, नतीजा यह हुआ की शर्म व हया को मौजुदा नस्ल ने जिंदा ही दफन कर दिया है!

 

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दौराने जिमा (सोहबत) शर्मगाह देखना

 

  ✍🏻 मसअ़ला मियाँ बीवी का सोहबत के वक्त़ एक दूसरे की शर्मगाह को छुना बेशक जाइज़ है बल्कि नेक नियत से हो तो मुस्तहब व सवाब है"।

📕 [फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 570, और जिल्द नं 9, सफा नं 72,]

 

✍🏻 मसअ़ला मर्द अपनी बीवी के हर उज्व (Part) को छु सकता है, और औरत भी अपने शौहर के हर उज्व को छु सकती है! चाहे शहवत से हो या बिला शहवत! यहॉ तक के एक दुसरे की शर्मगाह को भी देख सकते है! मगर बगैर जरूरत शर्मगाह का देखना और छुना खिलाफे ऊला मकरूह है!

📕 [फ़तावा आलमगिरी जिल्द नं 5, सफा नं 227, बहारे शरीयत जिल्द नं 2, सफा नं 57,]

  

👉🏻 दौराने सोहबत मर्द व औरत को एक दूसरे की शर्मगाह की तरफ नही देखना चाहिये, इसके बहुत से नुक़सानात है

 

📚 हदीस : उम्मुल मोमिनीन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा [रदि अल्लाहु तआला अन्हा] फरमाती है कि

 💫 ....हुज़ूरे अकरम का विसाल हो गया लेकिन न कभी आप ने मेरा सतर देखा और न मैंने आप का (सतर )देखा।

📕 [इब्ने माज़ा शरीफ़, जिल्द नं 1, बाब नं 616, हदीस नं 1991, सफा नं 538,]

 

📚 हदीस :_ _हज़रत इब्ने अ़दी [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत करते है की हज़रते इब्ने अब्बास ने इर्शाद फरमाया_

 💫 *"तुम मे से कोई जब अपनी बीवी से सोहबत करे तो उस की  फरज (शर्मगाह) को न देखे कि इस से आँखों की बीनाई (रौशनी) ख़त्म हो जाती है!

📕 [हाशिया, मुसनद इमामे आ़ज़म, सफा नं 225,]

 

✍🏻 *आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] नक़्ल फरमाते है

      👉🏻 "सोहबत के वक्त़ शर्मगाह देखने से हदीस में मुमानेअत (मनाई) फ़रमायी और फ़रमाया  "फइन्नहु युरेसुल-उम्मीये!" यानी वह अंधे होने का सबब है। उलमा ए किराम  ने फरमाया है कि......  "इससे अंधे होने का सबब या तो वह औलाद अंधी हो, जो इस जिमा (सोहबत) से पैदा हुई, या माज़अल्लाह! दिल का अंधा होना है, के जो सब से बदतर है।"

📕 [फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 570,]

 

✍🏻 क़ानूने शरीअ़त में है कि

     👉🏻 "औरत की शर्मगाह की तरफ नज़र न करें क्योंकि इस से निस्यान (भूलने की बीमारी) पैदा होती है और नज़र भी कमज़ोर होती है"।

 

📕 [कानूने शरीअ़त, 2, सफा नं 202,]    

 

 👉🏻 सोहबत के आदाब मे से एक यह भी है के सोहबत के दौरान मर्द औरत की शर्मगाह की तरफ न देखे.।

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       💫 पिस्तान (स्तन) चुमना💫

 

 👉 मुबाशरत के वक्त बीवी की छाती चुमने या चुसने मे कोई हर्ज नही, लेकीन खयाल रहे की दुध हलक मे न जाए! अगर हलक मे दुध आ गया तो फौरन थुक दे, जान बुझकर दुध पिना नाजाइज व हराम है!

 

        इमाम अहले सुन्नत आला हजरत अहमद रजा खॉन कादरी रदि अल्लाहु तआला अन्हु फतावा रज्वीया मे नक्ल फरमाते है

💫 "सोहबत के वक्त अपनी बीवी के छाती (स्तन) मुँह मे लेना जाइज है बल्की अच्छी नियत से हो तो सवाब की उम्मीद है, जैसा के हमारे इमाम, इमाम ए आजम अबु हनीफा रदि अल्लाहु तआला अन्हु  ने मियॉ-बीवी का एक दुसरे की शर्मगाह को छुने के बारे मे फरमाया "अर्जु अन्नहा युवज्जेराने अलैहे" यानी मै उम्मीद करता हु के वह दोनो उसपर अज्र (सवाब) दिये जाएंगे! हॉ अगर दुध वाली औरत हो तो ऐसा चुसना न चाहीये जिससे दुध हलक मे चला जाए! और अगर मुँह मे आ जाए और हलक मे न जाने दे तो हर्ज नही की औरत का दुध हराम है नजीस (नापाक) नही!

📕 [फतावा रज्वीया जिल्द 1, सफ नं 72]

 

       👉 कुछ लोगो मे यह गलत फहमी है के दौरान ए जिमा (सोहबत) अगर औरत का दुध मर्द के मुँह मे चला गया तो औरत मर्द पर हराम हो जाती है, और खुद ब खुद तलाक वाके हो जाती है! यह बात गलत है, इसकी शरीयत मे कोई असल नही! फिक्ह की मशहुर किताब "दुर्रे मुख्तार" मे है

 

💫💫 "मर्द ने अपनी औरत की छाती (स्तन) चुसी तो निकाह मे कोई खराबी न आई चाहे दुध मुँह मे आ गया हो, बल्की हलक से उतर गया हो तब भी निकाह न टुटेंगा! लेकीन हलक मे जान बुझकर लेना जाइज नही!"

 

📕 [दुर्रे मुख्तार ब हवाला, कानुन ए शरीयतजिल्द 2, सफ नं 52]

 

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      🎆 _[जिमा के दौरान बात करना] 🎆

 

✍🏻 जिमा के दौरान बात चीत न करे ख़ामोश रहे!इमामे अहले सुन्नत आ़ला हज़रत [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] इरशाद फरमाते है...

 💫 "सोहबत के दौरान बात चीत करना मक़रूह है! बल्कि बच्चे के गूंगे या तोतले होने का ख़तरा है"।

📕 _[फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 9, सफा नं 76,]

 

🔥 [दौराने मुबाशरत किसी और का ख़्याल]

 

👉🏻 सोहबत के दौरान मर्द किसी दूसरी औरत का और औरत किसी दूसरे मर्द का ख़याल न लाऐ। यानी ऐसा न हो कि मर्द जिमा तो अपनी बीवी से करे और तसव्वर करे कि फलां औरत से जिमा कर रहा हूँ। और इसी तरह औरत किसी और मर्द का तसव्वर करे तो यह सख़्त गुनाह है।

            

✍🏻 ....हुज़ूर पुरनूर सैय्यदना ग़ौसे आ़ज़म शेख अब्दुल क़ादिर ज़ीलानी [रदि अल्लाहु तआला अन्हु]*" नक़्ल फरमाते है कि.....

 

 💎 "सोहबत के दौरान मर्द अपनी बीवी के अलावा किसी दूसरी औरत का ख़याल लाऐ तो यह सख़्त गुनाह है और एक तरह का छोटू क़िस्म का जिना है"

📕 _[गुनीयातुत्तालिबीन,]

 

    🥛 [सोहबत के बाद पानी न पीये] 🥛

 

           👉🏻 जैसा कि  पहले बयान कीया जा चुका है कि सोहबत करने के बाद जिस्म का दर्जा-ए-हरारत (temperature) बढ़ जाता है इस लिए उस वक्त़ प्यास भी शिद्दत से महसुस होती है।लेकिन ख़बरदार ! सोहबत के फ़ौरन बाद पानी हरगिज न पीये। हकीमों ने लिखा है...

 

💫 "सोहबत के फ़ौरन बाद पानी नही पीना चाहिये क्योंकि इस से दमा (साँस) की बीमारी होने का खतरा है।

 

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    🎆 [दोबारा सोहबत करना हो तो] 🎆

 

  👉🏻 एक रात मे  मुबाशरत (सोहबत) के बाद उसी रात में दूसरी मरतबा सोहबत करने का इरादा हो तो मर्द और औरत दोनो वुज़ू करले कि यह फ़ायदेमन्द है, और अगर सोहबत न भी करना हो तो वुज़ू करके सो जाए।

 

📚 हदीस : हज़रत उमर व अबू सईद खुदरी [रदि अल्लाहु तआला अन्हुम] से रिवायत है कि नबी-ए-करीम ने इर्शाद फरमाया

 💎💎 "जब तुम मे से कोई अपनी बीवी से एक बार सोहबत करने के बाद दोबारा सोहबत का इरादा करे तो उसे वुज़ू करना चाहिए।

📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, सफा नं 139, इब्ने माज़ा, जिल्द नं 1, सफा नं 188,]

 

✍🏻 इमाम ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] फरमाते हैं_

💫 "एक बार सोहबत कर चुके, और दोबारा (सोहबत) का इरादा हो तो चाहिए कि अपना बदन धो डालें (वुज़ू कर ले) और अगर ना पाक़ आदमी कोई चीज़ खाना चाहे तो चाहिए कि वुज़ू कर ले फिर खाये! सोने का इरादा हो तो भी वुज़ू करके  सोएहालाकीं (वुज़ू करने के बाद) नापाक़ ही रहेगा (जब तक ग़ुस्ल न कर ले) लेकिन सुन्नत यही है"।

📕 [कीमीया ए सआ़दत, सफा नं 167,]

 

         🎆 [वुज़ू करके सोए] 🎆

 

     👉🏻 मुबाशरत (सोहबत)  के बाद सोने का इरादा हो तो मर्द और औरत दोनो पहले अपने मकाम ए मख्सुस (शर्मगाह) को धो ले और वुज़ू करले फिर उस के बाद सो जाए।

 

📚 हदीस : उम्मुल मोमीनीन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा [रदि अल्लाहु तआला अन्हा] फरमाती है

 💎 "रसूलुल्लाह हालते जनाबत मे (मुबाशरत के बाद) सोने का इरादा फ़रमाते तो अपनी शर्मगाह धो कर नमाज़ जैसा वुज़ू कर लेते थे" (फिर आप सो जाते)

 

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 1, सफा नं 194, तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, सफा नं 129,]

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 .      🎆 [बीमारी मे मुबाशरत] 🎆

 

       👉🏻 औरत अगर किसी दुख, परेशानी व बीमारी में मुब्तला हो तो उस की सेहत का ख़याल किये बगै़र हरगिज़ सोहबत न करे, वैसे  इन्सानियत का तकाज़ा भी यह है कि दुखी या बीमार इन्सान को और तकलीफ़ न दी जाए बल्कि उसे आराम और सुकून फरहाम करे।

 

             👉🏻 औरत कीसी बिमारी मे या तकलीफ मे हो तो उसकी सेहत का खयाल किए बगैर मुजामेअत करना मुनासीब नही! तिब की बाज किताबो मे नक्ल है की.....

 

💫 "बुखार की हालत मे मुबाशरत न करे की बदन मे हरारत बस जाती है, और फेफडों के खराब होने का कवी अंदेशा है!"

 

    🎆 [सोहबत मज़े के लिए न हो] 🎆

 

💫💫 _हज़रत मौला अली मुश्किलकुशा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने अपनी "वेसाया" (वसीयत) मे और हज़रत इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने अपनी किताब "कीमीया-ए-सआ़दत" में नक़्ल किया है कि_

 👉🏻 "जब कभी सोहबत करे तो नियत सिर्फ़ मज़ा लेने या शहवत (हवस) की आग बुझाने की न हो बल्कि नियत यह रखे कि जिना से बचूँगा और औलाद सालेह व नेक सीरत पैदा होगीं। अगर इस नियत से सोहबत करेगा तो सवाब पाएंगा।

📕 [वसाया शरीफ, कीम्या-ए-सआ़दत, सफा नं 255,]

 

👉🏻  हजरत उमर फारुख ए आजम रदि अल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है

💫💫 "मै निकाह सिर्फ इसलिये करता हु की सालेह औलाद हासील करु!"

📕 [इहया उल उलुम जिल्द 2 सफा नं 44,]

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 .      🎆 [बीमारी मे मुबाशरत] 🎆

 

       👉🏻 औरत अगर किसी दुख, परेशानी व बीमारी में मुब्तला हो तो उस की सेहत का ख़याल किये बगै़र हरगिज़ सोहबत न करे, वैसे  इन्सानियत का तकाज़ा भी यह है कि दुखी या बीमार इन्सान को और तकलीफ़ न दी जाए बल्कि उसे आराम और सुकून फरहाम करे।

 

             👉🏻 औरत कीसी बिमारी मे या तकलीफ मे हो तो उसकी सेहत का खयाल किए बगैर मुजामेअत करना मुनासीब नही! तिब की बाज किताबो मे नक्ल है की.....

 

💫 "बुखार की हालत मे मुबाशरत न करे की बदन मे हरारत बस जाती है, और फेफडों के खराब होने का कवी अंदेशा है!"

 

    🎆 [सोहबत मज़े के लिए न हो] 🎆

 

💫💫 _हज़रत मौला अली मुश्किलकुशा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने अपनी "वेसाया" (वसीयत) मे और हज़रत इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने अपनी किताब "कीमीया-ए-सआ़दत" में नक़्ल किया है कि_

 👉🏻 "जब कभी सोहबत करे तो नियत सिर्फ़ मज़ा लेने या शहवत (हवस) की आग बुझाने की न हो बल्कि नियत यह रखे कि जिना से बचूँगा और औलाद सालेह व नेक सीरत पैदा होगीं। अगर इस नियत से सोहबत करेगा तो सवाब पाएंगा।

📕 [वसाया शरीफ, कीम्या-ए-सआ़दत, सफा नं 255,]

 

👉🏻  हजरत उमर फारुख ए आजम रदि अल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है

💫💫 "मै निकाह सिर्फ इसलिये करता हु की सालेह औलाद हासील करु!"

📕 [इहया उल उलुम जिल्द 2 सफा नं 44,]

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     🎆 ज़्यादा सोहबत नुकसानदेह 🎆

 

       मसअ्ला बीवी से जिन्दगी मे एक मरतबा सोहबत करना कतअन वाज़िब है। और हुक्म यह है कि औरत से सोहबत कभी कभी करता रहे इसके लिए कोई हद नही है!मगर इतना तो हो कि औरत की नज़र औरों की तरफ़ न उठे, और इतना ज़्यादा भी जाइज़ नही कि औरत को नुक़्सान पहुँचे।

📕 [कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 2, सफा नं 63,]

 

             👉🏻 हद से ज़्यादा मुबाशरत (सोहबत) करने से मर्द और औरत दोनो के लिए नुक़सान है! ज्यादा सोहबत से मर्द की सेहत पर ज्यादा असर पडता है! सेहत की कमजोरी फिर तरह-तरह की बिमारीयो की वजह बनती है!   अक्सर शहवत परस्त औरतो के शौहर मुसस्सल मुबाशरत की वजह से अपनी सेहत खो बैठते है! और सेहत की कमजोरी की वजह से जब वह औरत की ख्वाहिश (पहले की तरह) पुरी नही कर पाते, और औरत को जब आदत के मुताबीक तसल्ली नही हो पाती है, तो वह फिर पडोस और बाहर वह चीज तलाश करने की कोशीश करती है! फिर एक नई बुराई का जन्म होता है!  इसलिये जरूरी है के कुदरत की इस अनमोल चिज (सेहत व कुव्वत) का इस्तेमाल बेदर्दी से न किया जाए!।

 

      👉🏻 हकीमों ने लिखा है कि ज़्यादा से ज़्यादा हफ्ते में दो मरतबा सोहबत की जाए। *हकीम बुक़रात जो एक बहुत बड़े हकीम थे और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम से 450 साल पहले गुजरे है उनसे किसी ने पूछा "सोहबत हफ़्ते में कितनी मरतबा करनी चाहिये"? उन्होने जवाब दिया- "हफ़्ते में सिर्फ एक मरतबा" पूछने वाले ने फिर पूछा... "एक मरतबा ही क्यों ?" बुक़रात ने झल्ला कर जवाब दिया "तुम्हारी ज़िन्दगी है तुम जानो मुझसे क्या पूछते हो" गोया यह इशारा था ज़्यादा सोहबत करोगे तो कमज़ोर होगे जाओंगे और जिन्दगी ख़तरे में पड़ सकती है! गालीबन हकीम राजी ने अपनी किताब मे लिखा है की

 

💫💫 "ज्यादा सोहबत मोटो को दुबला, और दुबलो को मुर्दा, जवानो को बुढा और बुढो को मौत की तरफ ढकेल देती है!"

 

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     🎆 ज़्यादा सोहबत नुकसानदेह 🎆

 

✍🏻 _हजरत फक़ीह अबूल्लैस समरक़न्दी [रदिअल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत करते है। कि हज़रत मौला अ़ली [कर्रमल्लाहु वज्हुल करीम] ने इरशाद फरमाया_

💫 "जो शख़्स इस बात का ख़्वाहिश मन्द हो कि उसकी सेहत अच्छी हो और ज़्यादा दिन तक क़ायम रहे तो उसे चाहिए कि वह कम खाया करे और औरत से कम सोहबत किया करे"।

📕 [बुस्तान शरीफ,]

 

      👉🏻 आज के इस फ़ैशन और नंगाई के दौर में ज़ज़्बात बहुत जल्द बे क़ाबू हो जाते है इसलिए ध्यान रखे कि बीवी की अगर ख़्वाहिश हो तो इंकार भी न करे वरना ज़ेहन भटकने का अंदेशा है!

 

💫 इमाम मुहम्मद गजाली रजी अल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है

 

💫 "मर्द चार दिनो मे एक बार औरत से जिमा कर सकता है, और औरत की जरुरत पुरा करना और उसकी परहेजगारी के ऐतेबार से इस हदसे कमो बेश भी मुबाशरत कर सकता है, क्यो की औरत को पाक दामन रखना मर्द पर वाजीब है!

📕 [अहया-उल-उलुम जिल्द 2, सफा नं 95]

 

👉🏻 कुछ लोग शादी के बाद शुरू शुरू में औरत पर अपनी क़ुव्वत और मर्दानगी का रौब डालने के लिए दवाओं का या किसी स्प्रे या तेल वगै़रह का इस्तेमाल करते है, जिससे औरत और वह खुब लुत्फ अंदोज होते है! लेकिन बाद में इसका उल्टा असर होता है। मर्द और औरत उस चीज़ की आदी हो जाते है!  फिर बाद में अगर मर्द वह दवा या स्प्रे इस्तेमाल न करे तो औरत को तसल्ली नही होती। और वह अपनी ख्वाहीश को पुरा करने के लिए मर्द को इसका इस्तेमाल करने पर मजबूर करती है। दवाओं के मुसलसल इस्तेमाल से मर्द की सेहत पर बुरा असर पडता है! और वह दवाओं का आदी हो कर जल्द ही तरह तरह की बीमारियों मे मुब्तीला हो जाता है! मर्द अगर यह दवाएँ इस्तेमाल न करे तो औरत को पहले की तरह इत्मीनान नही होता जिसकी वह आदी हो चुकी हैचुनांचे व ऐसी हालत मे औरत के बदचलन होने का भी ख़तरा होता है या फिर वह दिमाग़ी मरीज़ होने का भी खतरा है!

 

    लिहाजा क़ुव्वते मर्दाना को बढ़ाने के लिए और उसे बरकरार रखने के लिये मस्नुई दवाओं, स्प्रे, तेल वगै़रा के बजाए ताक़तवर ग़िज़ाओं का इस्तेमाल करे। ग़िज़ा के जरिए बढ़ाई हुई ताक़त ख़त्म नही होती और न ही इस से किसी तरह का नुक़सान होता है।

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      🔵 [मुबाशरत के औकात ]  🔵

 

       👉🏻 शरीयत ए इस्लामी मे सोहबत करने के लिए कोई ख़ास वक्त़ नही बताया गया है। शरीअ़त मे (अलावा नमाज के औकात) दिन और रात के हर हिस्से में सोहबत करना जाइज़ है, लेकिन बुजुर्गों ने कुछ ऐसे अवक़ात (वक्त़) बताए है जिन में सोहबत करना सेहत के लिए फ़ायदेमन्द है।

 

         हज़रत इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली रजी अल्लाहु तआला अन्हु   "इहयाउल ऊलूम" मे उम्मुल मोमीनीन हज़रत आएशा सिद्दीका [रदि अल्लाहु तआला अन्हा] से रिवायत है के फरमाती है

 💫   रसूले करीम रात के आख़िरी हिस्से में (तकरीबन रात 2 बजे से लेकर फ़ज्र की अ़जान से पहले) जब वित्र की नमाज़ पढ़ चुके होते तो अगर आप को अपनी किसी बीवी की हाज़त होती तो उनसे मुबाशरत फ़रमाते ।

📕 [इहयाउल ऊलूम,]

 

💫💫   हदीसों मे है कि हुजुर ईशा की नमाज़ पढ़ते और सिर्फ़ ईशा की वित्र नही पढ़ते फिर आप कुछ घंटे आराम फ़रमाते फिर उठते और  "तहज्जुद" की नमाज़ पढ़ते और कुछ नफ़्ल नमाज़े अदा फरमाते और आखिर में ईशा की वित्र पढ़ते, उसके बाद अगर आप को अपनी किसी बीवी की हाज़त होती तो उनसे सोहबत फ़रमाते या अगर हाज़त न होती तो आप आराम फ़रमाते यहाँ तक कि हज़रत बिलाल [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] नमाज़े फ़ज्र के लिए अ़जान के वक्त़ आप को इत्तेला देते।

 

✍🏻 इस हदीस के तहत इमाम ग़ज़ाली रदी अल्लाहु तआला अन्हु फ़रमाते है

      👉🏻 रात के पहले हिस्से (तकरीबन 9 से 12 बजे के दरम्यान) मे सोहबत करना मक़रूह है कि सोहबत करने के बाद पूरी रात नापाक़ी की हालत मे सोना पड़ेगा।

📕 [इहयाउल ऊलूम]

 

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      🔵 [मुबाशरत के औकात ]  🔵

 

✍🏻 हजरत इमाम फक़ीह अबूललैस [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] अपनी किताब "बुस्तान शरीफ" में नक़्ल फरमाते है कि

💫 सोहबत के लिए सबसे बेहतर वक्त़ रात का आख़िरी हिस्सा है (यानी तकरीबन 2 से बजे से 4  बजे के दर्मीयान) क्योंकि रात के पहले हिस्से में पेट ग़िज़ा (खाने) से भरा होता है और भरे पेट सोहबत करने से सेहत को नुक़सान है! जब के रात के आख़िरी हिस्से में सोहबत करने से फ़ायदे है! (जैसे आदमी दिन भर का थका हुआ होता है और रात के पहले और दूसरे हिस्से में उस की नींद पुरी हो जाती है! जिस की वजह से उस की दिनभर की थकावट दूर हो जाती है, इसके अलावा दूसरा एक यह भी फ़ायदा है कि रात के आख़िरी हिस्से तक खाना अच्छी तरह हज़्म हो जाता है।)

📕 [बुस्तान शरीफ]

 

💫💫 "हकीमो की तहकीक के मुताबीक पेट भरा होने की हालत मे मुबाशरत नही करना चाहीये की इससे औलाद कुंद जेहन पैदा होती है!"

 

           ✍🏻 यह तमाम बातें हिक़्मत के मुताबिक़ है! शरीयत मे सोहबत के लिये कोई ख़ास वक्त़ मुतैय्यन नही की इसी वक्त पर सोहबत की जाए! शरीअ़त मे हर वक्त़ सोहबत की इज़ाज़त है। हुजुर अज्वाजे मुतह्हरात (बिवीयों) से दिन और रात के दिगर वक्त़ो में सोहबत करना साब़ित है। हॉ कुछ दिनो की फजीलत अहादिस मे वारीद है, जैसा की हज़रत इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली रजी अल्लाहु तआला अन्हु  नक्ल फरमाते है.... "बाज उलमाओ ने शबे जुमा और दिन को मुबाशरत करना मुस्तहब कहा है!" *(इहया उल उलुम जिल्द 2 सफा नं 94)

 (वल्लाहो तआला आ़लम)

 

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🔵[इन रातों में सोहबत न करें]🔵

 

✍🏻 अमीरूल-मोमिनीन हज़रत अली और हज़रत अबू ह़ुरैरा और हज़रत अमीर मुआ़विया [रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा] से रिवायत किया है कि!

 💫 "(हर महीने की) चाँद रात, और चाँद की पन्द्रहवी शब, और चाँद के महीने की आख़िरी शब, सोहबत करना मकरूह है, कि इन रातों मे जिमा के वक्त़ शैतान मौजूद होते है"

📕 [कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 266]

 

✍🏻  तहक़ीक़ यह है कि इन रातों में सोहबत करना जाइज़ है, लेकिन एहतियात इसी मे है कि सोहबत करने से इन रातो मे परहेज करे। (वल्लाहु तआला आ़लम)

 

      🔵[रमज़ान-उल मुबारक मे मुबाशरत]🔵

 

💎 आयत : अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इर्शाद फरमाता है.................. तर्जुमा रोज़ों की रातों में अपनी औरतों के पास जाना तुम्हारे लिए हलाल हुआ ।

📕 [तर्जुमा कन्जुल इमान, सूर ए बखरा आयत नं 187,]

 

     👉🏻 रमज़ान के महीने मे रात को सोहबत कर सकते है नापाक़ी की हालत मे सेहरी किया तो जाइज़ है और रोज़ा भी हो जाता है। लेकिन नापाक रहना सख़्त गुनाह है।

 

  ✍🏻 मसअ़ला : रोज़े की हालत मे मर्द औरत ने सोहबत की तो रोज़ा टूट गया मर्द ने औरत का बोसा लिया, गले लगाया और इन्ज़ाल हो गया तो रोज़ा टूट गया!औरत को कपडे के उपर से छुआ और कपडा इतना मोटा है की बदन की गर्मी महसुस नही होती तो रोजा न टुटा, अगरचे मर्द को इंजाल हो गया और अगर औरत ने मर्द को छुआ और मर्द को इंजाल हो गया तो रोजा न गया!

📕 [बहार ए शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा नं 5, सफा नं 59]

 

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🔵[इन रातों में सोहबत न करें]🔵

 

✍🏻 मसअ़ला : किसी ने मर्द को या औरत को रोजे की हालत मे मजबुर किया की जिमा करे, नही तो कत्ल करने की उज्व काट डालने की या किसी और तरह की जानी नुक्सान पहु्ंचाने की धमकी दी, और रोजदार को यह यकीन है के अगर उसका कहेना न माना तो जो कहता है कर गुजरेंगा लिहाजा उसने जिमा किया तो रोजा टुट गया, लेकीन कफ्फारा लाजीम न हुआ, सिर्फ कजा रोजा रखना होंगा!

📕 [बहार ए शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा नं 5, सफा नं 61]

 

✍🏻 मसअ़ला : औरत ने मर्द को जिमा करने पर मजबुर किया तो मर्द औरत का रोजा टुट गया, लेकीन औरत पर कफ्फारा वाजीब है मर्द पर नही बल्की वह सिर्फ कजा रोजा रखेंगा

📕 [बहारे शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा नं 5, सफा नं 62]

 

✍🏻 मसअ़ला : जान बूझकर मर्द ने  रोजे की हालत मे औरत से जिमा किया, इंजाल हो न हो (यानी मनी निकले या न निकले) तो रोज़ा टूट गया और कफ़्फ़ारा भी लाजीम हो गया।

 

📕 [बहार ए शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा नं 5, सफा नं 61]

          

💎💎 कफ़्फ़ारा: कफ़्फ़ारा यह है कि एक गुलाम आजाद करे! (मौजुदा दौर मे यह किसी भी मुल्क मे मुमकीन नही) दुसरी सुरत यह है के लगातार साठ (60) रोज़े रखे! अगर यह भी न हो सके तो फिर 60 मिस्कीनो (गरीब मोहताज़ों) को पेट भर कर दोनो वक्त़ो का खाना खिलाए। और अगर रोज़ा रखने की सूरत में अगर बीच में एक दिन का भी रोज़ा छूट गया तो अब फिर से साठ (60) रोज़े रखने होगें पहले रखे हुए रोज़ों को गिना नही जाएगा। मसलन (59) रख चुका था साठवॉं नही रख सका तो फिर से रोज़े रखे। पहले के उन्सठ (59) बेकार हो गए। लेकिन अगर औरत को रोज़े रखने के दौरान हैज़ (माहवारी) आ गई तो हालते हैज़ मे रोज़े रखना छोड़ दे फिर बाद में पाक़ होने के बाद बचे हुए रोज़े रखे यानी पहले के रोज़े और हैज़ के बाद वाले रोज़े  पुरे कर ले! हैज से पहले और हैज के बाद के दोनों को मिला कर साठ (60) रोजे हो जाने से कफ़्फ़ारा अदा हो जाएेगा अगर कफ़्फ़ारा अदा न किया तो सख़्त गुनाहगार होगा और बरोज़े महशर सख़्त अज़ाब़ होंगा।

📕 [बहार ए शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा नं 5 सफा नं 62]

 

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 🔵 [हैज़ (माहवारी) का बयान]  🔵

 

             👉🏻 बालेग़ा औरत के आगे के मक़ाम (शर्मगाह) से जो खून आदत के मुताबिक़ निकलता है उसे हैज़ (माहवारी MC Period) कहते है। लड़की को  जिस उम्र से यह खून आना शुरू हो जाएे तो शरई रू से वह उस वक्त़ से बालिग़ समझी जाएंगी।

 

             ✍🏻 मसअ़ला हैज़ (माहवारी) की मुद्दत कम से कम तीन दिन और तीन रातें है यानी पूरे बहत्तर (72) घंटे, एक मिनट भी अगर कम है तो हैज़ नही। और ज़्यादा से ज़्यादा दस (10) दिन और दस रातें है।

📕 [बहार ए शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा 2, सफा नं 42, कानूने शरीयत, जिल्द नं 1, सफा नं 51]

 

✍🏻 मसअ़ला : हैज़ में जो खून आता है उस के छह (6) रंग है, काला, लाल, हरा, पीला, गदला, (कीचड़ के रंग जैसा) और मटीला (मिट्टी के रंग जैसा) उन रंगों मे से किसी भी रंग का खून आए तो हैज़ है ! सफ़ेद रंग की रूतूबत (गीलापन) हैज़ नही।

📕 [बहारे शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा 2, सफा नं 43, कानूने शरीयत, जिल्द नं 1 सफा नं 52]

 

✍🏻 मसअ़ला : हैज़ और निफ़ास (निफ़ास का बयान आगे तफ्सील मे आएगा) की हालत में क़ुरआने करीम को छूना, देख कर या ज़बानी पढ़ना, नमाज पढना, दीनी किताबों को छूना, यह सब हराम है!  लेकिन दुरूद शरीफ, कलीमा शरीफ, वगै़रह पढ़ने मे कोई हर्ज नही ।

📕 [बहारे शरीअ़त, जिल्द नं 1, हिस्सा 2, सफा नं 46,]

 

✍🏻 मसअ़ला : हालते हैज़ मे औरत को नमाज़ मुआ़फ है! और उसकी कज़ा भी नही यानी पाक होने के बाद छूटी हुयी नमाज़ पढ़ना भी नही है। इसी तरह रमज़ान शरीफ के रोज़े हालते हैज़ मे न रखे लेकिन बाद में पाक होने के बाद जितने रोज़े छूटे थे वोह सब क़ज़ा रखने होंगे।

📕 [फ़तावा-ए-मुस्तफ़विया, जिल्द नं 3, सफा नं 13, कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 1, सफा नं 46,]

 

           ✍🏻 मसअ़ला : यह जरूरी नही के मुद्दत मे हर वक्त खुन जारी रहे, बल्की अगर कुछ-कुछ वक्त आए जब भी हैज है!

📕 [बहारे शरीअ़त, जिल्द नं 1, हिस्सा 2, सफा नं 42,]

 

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🔵 [हालत ए हैज़ मे मुबाशरत (सोहबत) हराम है!]  🔵

 

💎 आयत: अल्लाह   तआला इर्शाद फरमाता है...

 

وَ یَسۡئَلُوۡنَکَ عَنِ الۡمَحِیۡضِ ؕ قُلۡ ہُوَ اَذًی  ۙ فَاعۡتَزِلُوا النِّسَآءَ فِی الۡمَحِیۡضِ  ۙ وَ لَا تَقۡرَبُوۡہُنَّ حَتّٰی یَطۡہُرۡنَ ۚ فَاِذَا تَطَہَّرۡنَ  فَاۡتُوۡہُنَّ مِنۡ حَیۡثُ اَمَرَکُمُ اللّٰہُ  ؕ اِنَّ اللّٰہَ یُحِبُّ التَّوَّابِیۡنَ  وَ یُحِبُّ الۡمُتَطَہِّرِیۡنَ

 

💎तर्जुमा : (ए महेबुब!) और तुम से पुछते है हैज का हुक्म! तुम फरमाओ के वह नापाकी है!  तो औरतों से अलग रहो हैज़ के दिनों, और इनसे नज़दीकी न करो, जब तक पाक न हो लें, फिर जब पाक हो जाए तो इनके पास जाओ जहाँ से तुम्हे अल्लाह ने हुक़्म दिया। बेशक अल्लाह पसंद करता है बहुत तौबा करने वालो को, और पसंद रखता है सुथरो (पाक रहने वालो) को!

 

📕 [तर्जुमा :- कन्जुल इमान सूर ए बखरा, आयत नं  222]

 

👉  जब औरत हाइजा (हैज की हालत मे हो तो उससे जिमा करना सख्त गुनाहे कबीरा, नाजाइज व सख्त हराम है! इस बात का खयाल हमेशा रखे की जब कभी सोहबत का इरादा हो तो पहले औरत से दर्याफ्त कर ले, और औरत पर लाजीम है की अगर वह हाइजा है, तो मर्द को इस बात से आगाह कर दे! और मुबाशरत से बाज रखे! "और औरत पर वाजीब है के अगर वह हाइजा हो तो अपनी हालत से शौहर को वाकीफ कर दे ताकी शौहर मुबाशरत न करे वर्ना औरत सख्त गुनाहगार होंगी!

 

✍🏻 अक्सर मर्द शादी की पहली रात बेसब्री का मुजाहरा करते है, और बावजुद इसके के औरत हाइजा होती है जिमा कर बैठते! अगर औरत हाइजा हो तो उससे मुबाशरत करना जाइज नही, चाहे शादी की पहली ही रात क्यो न हो! इसलिये मर्द की जिम्मेदारी है के वह शादी की पहली रात से ही अपनी बिवी को इन मसाईल से आगाह कर दे!

 

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🔵 [हालत ए हैज़ मे मुबाशरत (सोहबत) हराम है!]  🔵

 

💎 आयत: अल्लाह   तआला इर्शाद फरमाता है...

 

وَ یَسۡئَلُوۡنَکَ عَنِ الۡمَحِیۡضِ ؕ قُلۡ ہُوَ اَذًی  ۙ فَاعۡتَزِلُوا النِّسَآءَ فِی الۡمَحِیۡضِ  ۙ وَ لَا تَقۡرَبُوۡہُنَّ حَتّٰی یَطۡہُرۡنَ ۚ فَاِذَا تَطَہَّرۡنَ  فَاۡتُوۡہُنَّ مِنۡ حَیۡثُ اَمَرَکُمُ اللّٰہُ  ؕ اِنَّ اللّٰہَ یُحِبُّ التَّوَّابِیۡنَ  وَ یُحِبُّ الۡمُتَطَہِّرِیۡنَ

 

💎तर्जुमा : (ए महेबुब!) और तुम से पुछते है हैज का हुक्म! तुम फरमाओ के वह नापाकी है!  तो औरतों से अलग रहो हैज़ के दिनों, और इनसे नज़दीकी न करो, जब तक पाक न हो लें, फिर जब पाक हो जाए तो इनके पास जाओ जहाँ से तुम्हे अल्लाह ने हुक़्म दिया। बेशक अल्लाह पसंद करता है बहुत तौबा करने वालो को, और पसंद रखता है सुथरो (पाक रहने वालो) को!

 

📕 [तर्जुमा :- कन्जुल इमान सूर ए बखरा, आयत नं  222]

 

👉  जब औरत हाइजा (हैज की हालत मे हो तो उससे जिमा करना सख्त गुनाहे कबीरा, नाजाइज व सख्त हराम है! इस बात का खयाल हमेशा रखे की जब कभी सोहबत का इरादा हो तो पहले औरत से दर्याफ्त कर ले, और औरत पर लाजीम है की अगर वह हाइजा है, तो मर्द को इस बात से आगाह कर दे! और मुबाशरत से बाज रखे! "और औरत पर वाजीब है के अगर वह हाइजा हो तो अपनी हालत से शौहर को वाकीफ कर दे ताकी शौहर मुबाशरत न करे वर्ना औरत सख्त गुनाहगार होंगी!

 

✍🏻 अक्सर मर्द शादी की पहली रात बेसब्री का मुजाहरा करते है, और बावजुद इसके के औरत हाइजा होती है जिमा कर बैठते! अगर औरत हाइजा हो तो उससे मुबाशरत करना जाइज नही, चाहे शादी की पहली ही रात क्यो न हो! इसलिये मर्द की जिम्मेदारी है के वह शादी की पहली रात से ही अपनी बिवी को इन मसाईल से आगाह कर दे!

 

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🔵 [हालत ए हैज़ मे मुबाशरत (सोहबत) हराम है!]  🔵

 

✍🏻 हजरत इमाम मुहम्मद गजाली रदि अल्लाहु तआला अन्हु इर्शाद फरमाते है.......

💫 "इल्मे दीन जो नमाज रोजा, तहारत वगैरह मे काम आता है, औरत को सिखाए! अगर न सिखाएंगा तो औरत को बाहर जाकर आलीम ए दीन से पुछना वाजीब और फर्ज है! अगर शौहर ने सिखा दिया है तो उसकी इजाजत के बगैर बाहर जाना और किसी से पुछना औरत को दुरूस्त नही, अगर दीन सिखाने मे कसुर करेंगा तो खुद गुनाहगार होंगा की हक तआला ने इर्शाद फरमाया.. ए इमान वालो! अपनी जानो और अपने घर वालो को जहन्नम की आग से बचाओ!

📕 [किमीया ए सादात, सफा नं 265]

 

           👉 हालते हैज मे औरत से सोहबत करना सख्त हराम है! जो की कुरआन से साबीत है! अल्लाह अज्जा व जल्ला और उसके रसुल ने ऐसे शख्स से बेजारी का इजहार फरमाया है, जो हाइजा औरत से हम बिस्तरी करता है!

 

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     🔵[हैज़ में मुबाशरत से नुकसान]🔵

 

      👉🏻 हकीमों ने लिखा है कि औरत से हैज़ की हालत में सोहबत करने से मर्द और औरत को जुज़ाम (कोढ) की बीमारी हो जाती है। और कुछ हकीमों  का कहेना है, कि हैज़ की हालत में सोहबत किया और अगर हमल ठहर गया तो औलाद नाकिस (अधूरी) या फिर जुजामी पैदा होगी।

📕 [इहया उल उलुमजिल्द नं 2, सफा नं 95]

 

  👉🏻 हालते हैज़ मे सोहबत करने से औरत को सख्त नुक्सान है, क्योंकि औरत की फरज से  लगातार गंदा खून खारीज होता रहता है, जिस की वजह से वह मकाम नर्म और नाजुक़ हो जाता है! अब अगर ऐसी हालत मे जिमा किया गया तो इस मकाम मे रगड की वजह से वहां ज़ख़्म बन जाता है! फिर मजीद यह की जख्म मे गर्मी की वजह से पीप भर जाता है! बाद मे मुख्तलीफ बिमारीयॉ पैदा होने लगती है!

 

    👉🏻 हकीमो के मुताबीक हैज मे मुबाशरत करने से सोजीशे रहम, सुजाक व आतिश्क जैसे मर्ज लाहिक हो जाते है! इसलिये हालते हैज मे जिन्सी इख्तिलात सेहत के लिये नुक्सानदेह है!

 

✍🏻 मसअ़ला : औरत हैज़ की हालत मे है और मर्द को शहवत (Sex) का ज़ोर है, और डर यह है कि कही   जिना मे न फंस जाऊ, तो ऐसी हालत मे औरत के पेट पर अपने आले (लिंग) को मस कर के इंजाल कर सकता है, जो जाइज़ है लेकिन रान पर नाजाइज़ है कि हालते हैज़ मे नाफ़  के नीचे से घुटने तक अपनी औरत के बदन से फाइदा हासील नही कर सकता।

📕 [इहया उल उलुमजिल्द नं 2, सफा नं 95, फ़तावा-ए-अफ़्रीक़ा, सफा नं 171]

 

          👉🏻 याद रहे यह मसअ़ला ऐसे शख़्स के लिए है जिसे ज़िना हो जाने का गालीब गुमान हो तो वह इस तरह से फरागत हासिल कर सकता है। लेकिन सब्र करना और उन दिनों (हैज) मे सोहबत से परहेज करना ही अफ़जल है।

📕 [बहार ए शरीयत, जिल्द नं 1 सफा नं 42]

 

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   🔵हैज़ में औरत अछूत क्यों 🔵

 

          ✍🏻 कुछ लोग औरत को हालते हैज़ (माहवारी) में  ऐसा नापाक और अछुत समझ लेते है के, उसके हाथ का छुआ पानी, खाने पिने से परहेज करते है! यहॉ तक के उसके साथ बैठना भी छोड देते है! यह आम खयाल है की जिस कमरे मे हाईजा औरत हो वह कमरा नापाक है और अगर ऐसे मौके पर किसी बुजुर्ग  की फातीहा आ जाए तो उस घर मे फातीहा नही होती! या अगर फातीहा दी  भी जाए तो यह खयाल रखा जाता है के ऐसी औरत का हाथ भी इन चिजो को नही लगना चाहीये जो फातीहा के लिये रखी जाती है! गरज के हाइजा औरत के के मुतअल्लीक कई तरह की जाहीलाना बाते आज कौम ए मुस्लीम मे देखी जा सकती है! यह सब लग्व व फुजुल व जेहालत है! याद रखीये हाइजा औरत फातीहा का खाना पका सकती है, इसमे कोई कबाहत नहीं, हॉ फातीहा नहीं दिला सकती की इसमे कुरआने करीम की सुरते पढी जाती है

 

                👉🏻 ऐसे लोग जो हालते हैज मे औरत को अछुत समझते है, उनके मुतअल्लीक शहज़ाद-ए-आला हज़रत हुज़ूर मुफ़्ती-ए-आज़मे हिन्द [रहमतुल्लाह तआला अलैह] अपने फ़तवे में इरशाद फरमाते है ........

 💫 "जो लोग ऐसा करते है वह नाजाइज़ व गुनाह का काम करते है, और मुशरेकीन यहूद, मजुस की रस्मे मरदूद की पैरवी करते है। हालते हैज़ मे सिर्फ़ सोहबत करना नाजाइज़ है बस इससे परहेज़ ज़रूरी है ! मुशरेकीनयहूद, और मजूस की तरह हैज़ वाली औरत को  Sweeper से भी बदतर समझना बहुत ना पाक ख़याल निरा, जुल्म अजीम वबाल है, यह उन की मनघडत है।

📕 [फ़तावा-ए-मुस्तफ़्विया, जिल्द नं  3, सफा नं 13]

 

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  .  🔵हैज़ में औरत अछूत क्यों 🔵

 

📚 हदीस :  उम्मुल मोमीनिन हजरत आइशा सिद्दीका रजी अल्हाहु तआला अन्हा इर्शाद फरमाती है.....

💫 हुजुर ए अक्रम ने मुझ से फरमाया की "ए आइशा! हाथ बढाकर मस्जीद से मुसल्ला उठा कर  दो" मैने अर्ज किया "मै हैज से हु!" हुजुर ने फरमाया "तुम्हारा हैज तुम्हारे हाथ मे नही!"

📕 [सही मुस्लीम शरीफ जिल्द नं 1, किताबुल हैज, बाब नं 3 सफा नं 143,]

 

📚 हदीस : हालते हैज़ मे सोहबत करना बहुत बड़ा गुनाह हराम व नाजाइज़ है! लेकिन औरत का बोसा ले सकते है। ख़बरदार बात बोस व कनार तक ही रहे उससे आगे मुबाशरत तक  न पहुँच जाए। इसी तरह एक ही प्लेट में साथ खाने पीने यहां तक कि हाइजा औरत  का झूठा खाने पीने मे भी कोई हर्ज नही है। गरज कि औरत से वैसा ही सुलूक रखे जैसा आम दिनो मे रहता है।

 

📕 [मुलख्खस तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, सफा नं 136,]

 

📚 हदीस :  उम्मुल मोमीनिन हजरत आइशा सिद्दीका रजी अल्हाहु तआला अन्हा इर्शाद फरमाती है.....

💫 "जमानाए हैज (हैज के दौरान) मे मै पानी पिती फिर हुजुर को देती तो जिस जगह मेरे लब लगे होते हुजुर वही दहने मुबारक रख कर पीते, और हालते हाज मे मै हड्डी से गोश्त मुंह से तोड कर खाती फिर हुजुर को देती तो हुजुर अपना दहन शरीफ उस जगह पर रखते जहॉ मेरा मुंह लगा था!"

 

✍🏻 मसअ़ला : हालते हैज़ मे औरत के साथ शौहर का सोना जाइज़ है। और अगर साथ सोने में शहवत (Sex) का ग़लबा और अपने आपको को क़ाबू मे न रखने का शुबह (शक) हो तो साथ न सोए । और अगर खुद पर ऐतमाद व पक्का यक़ीन हो तो साथ सोना गुनाह नही है।

📕 [बहारे शरीअ़त, जिल्द नं 1, हिस्सा 2, सफा नं 74,]

 

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🔵 हैज़ के बाद सोहबत कब जाइज है  

             👉🏻 हमारे इमाम, इमामे आ़ज़म अबू हनीफ़ा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] के नज़दीक औरत को हैज का खुन  (10) दस दिनो के बाद आना बन्द हो जाए तो ग़ुस्ल से पहले भी सोहबत करना जाइज़ है, लेकिन बेहतर यह है के औरत ग़ुस्ल कर ले उस के बाद ही मुबाशरत की जाए।

          

📚 हदीस : हज़रत सालिम बिन अब्दुल्लाह और हज़रत सुलेमान बिन यासीर रदी अल्लाहु तआला अन्हुमा से हैज़ वाली औरत के बारे में पूछा गया की.........

 💫 "क्या उस का शौहर उसे पाक देखे तो ग़ुस्ल से पहले सोहबत कर सकता है या नही"? दोनों ने जवाब दिया...."न करे यहाँ तक कि वह ग़ुस्ल कर ले।

📕 [मोअत्ता इमाम मालिक, जिल्द नं 1, बाब नं 26, हदीस नं 90, सफा नं 79,]

 

✍🏻 मसअ़ला : दस (10) दिन से कम मे खून आना बंद हो गया हो तो जब तक औरत ग़ुस्ल न करे सोहबत जाइज़ नही।

📕 [बहारे शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा नं 2, सफा नं 47,]

 

✍🏻 मसअ़ला : आदत के दिन पूरे होने से पहले ही हैज़ का खून आना बंद हो गया तो अगर्चे औरत ग़ुस्ल कर ले सोहबत जाइज़ नही, मसलन किसी औरत की हैज़ की आ़दत चार दिन व चार रात थी और इस बार हैज़ आया तीन दिन व रात तो चार दिन व रात जब तक पूरे न हो जाए सोहबत जाइज़ नही।

📕 [बहारे शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा नं 2, सफा नं 47,]

 

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     🔵 हैज़ से पाक होने का तरीका  🔵

 

✍🏻 मसअ़ला : औरत को जब हैज़ (खुन आना) बंद हो जाए तो उसे ग़ुस्ल करना फ़र्ज़ है।

📕 [कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 1, सफा नं 38,]

 

💫 हैज से फरागत के फौरन बाद गुस्ल करना जरुरी है! बिला कीसी उज्रे शरई गुस्ल मे ताखीर (देरी) करना सख्त हराम है!

 

📚 हदीस : उम्मुल मोमीनीन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा [रदि अल्लाहु तआला अन्हा] से रिवायत है कि.......

 

أن امرأة سألت النَّبيّ - صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ - عَن غسلها مِن المحيض، فأمرها كيف تغتسل، قالَ: خذي فرصة مِن مسك فتطهري بها . قالت: كيف أتطهر بها؟ قالَ: تطهري بها . قالت: كيف؟ قالَ: سبحان الله، تطهري ، فاجتذبها إلي، فقلت: تتبعي بها أثر الدم

 

💫💫        "एक औरत ने रसूलुल्लाह से हैज़ के ग़ुस्ल के बारे मे पूछा । आप ने उसे बताया.. "यूं गुस्ल करें" और फिर फ़रमाया..... "मुश्क (कस्तूरी) मे बसा हुआ रूई का फाया ले और उस से तहारत हासिल करे"! वह औरत समझ न सकी और अर्ज किया..... "किस तरह से  तहारत करूँ"? फरमाया....... "सुब्हानल्लाह! उससे तहारत करो " (हज़रत आएशा सिद्दीका फरमाती है) "मैंने उस औरत को अपनी तरफ़ ख़ींच लिया और उसे बताया कि उसे खून के मुक़ाम पर फेरे "।

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 1, बाब नं 215, हदीस नं 305, सफा नं 201,]

 

          ✍🏻 नोट :- इस ज़माने में मुश्क मिलना मुश्किल है इसलिए उसकी जगह गुलाब जल या इत् वगैरह का फाया लें।

 

💫 इसी हदीस के तहत इमाम अहमद रजा कादरी रजी अल्लाहु अन्हु नक्ल फरमाते है

 

👉 हैज वाली औरत को मुस्तहब  है की बाद फरागे हैज जब गुस्ल करे, पुराने कपडे से फर्जे दाखील (गुप्तांग) के अंदर से खुन का असर साफ करले

📕 [फतावा रज्वीया जिल्द नं 1, किताबुत्तहारत बाबुल वजु सफा नं 54]

 

💫 आगे मजीद "रद्दुल मुहतार, फतावा शामी, और फतावा तातर खानीया वगैरह के हवाले से फरमाते है......

💫 गुस्ल मे औरत को मुस्तहब है के फरजे दाखील (गुप्तांग) के अंदर उंगली डालकर धो ले, हॉ वाजीब नही बगैर उसके भी गुस्ल उतर जाएंगा!

 

          👉🏻 इस हदीस से मालुम हुआ कि हैज़ का खून आना बंद हो जाए तो, जब औरत ग़ुस्ल करने बैठे तो पहले रूई (Cotton,) को इत्र वगै़रा की ख़ूशबू में बसा ले फिर उससे खून के मक़ाम पर   अच्छी तरह फेरे ताकि वहॉ की गंदगी अच्छी तरह से साफ़ हो जाएफिर उस के बाद ग़ुस्ल कर ले! (गुस्ल का तरीका आगे आऐंगा)

 

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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🔥 दुबूर (पीछे के मकाम) में सोहबत 🔥

 

          👉🏻 कुछ कम अक़्ल जाहिल, हालते हैज़ मे औरत से उस के दुबुर (पीछे के मक़ाम, पाख़ाने की जगह) में सोहबत कर बैठते है और दीन व दुनिया दोनो अपने ही हाथों बरबाद करते है। होश में आईये यह कोई मामूली सा गुनाह नही बल्कि शरीअ़त मे सख़्त हराम है और गुनाहे कबीरा है। बल्कि कुछ हदीसो में तो इस फे'ल को कुफ़्र तक बताया गया है।

 

📚 हदीस : हज़रत अबु ज़र [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ने इर्शाद फरमाया..........

💎 "पीछे के मकाम मे    औरत से वती (सोहबत) करना हराम है।"

📕 [मुस्नदे इमामे आ़ज़म, सफा नं 223,]

 

📚 हदीस : हज़रत अबू ह़ुरैरा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है की ..... रसूलुल्लाह ने इर्शाद फरमाया..........

💎 "जिस ने औरत या मर्द से उस के पीछे के मुक़ाम में (जाइज़ समझते हुए) सोहबत की उस ने यक़ीनन कुफ़्र किया"।

📕 [अबूूदाऊद शरीफ, अहमद शरीफ, नसाई शरीफ वगै़रा]

 

📚 हदीस :   रसूलुल्लाह ने इर्शाद फरमाया.........

لاينظر الله يوم القيامة إلى رجل أتى رجلاً، أو امرأة في دّبرها

 

💎 "अल्लाह तआ़ला क़ियामत के दिन ऐेैसे शख़्स की तरफ़ नज़रे रहमत नही फरमाएगा जिसने औरत के पीछे के मक़ाम से सोहबत की"।

📚 [ बुखारी शरीफ, तिर्मिज़ी शरीफ, अबूू दाऊद शरीफ, इब्ने माज़ा शरीफ, मुस्लिम शरीफ, नसाई शरीफ (जिसे स्याह ए सित्ता शरीफ कहा गया है मोअत्तेबर हदिस की  (6) किताबे]

 

📚 हदीस : हज़रत अबू ह़ुरैरा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है की ..... रसूलुल्लाह ने इर्शाद फरमाया..........

💎 "दुबूर (पिछे के मकाम ) मे जिमा करने वाला मलऊन है"!

📕 [अबूू दाऊद शरीफ, जिल्द 2, बाब नंबर 123, हदीस नं 395]

 

💫 इमाम मुहम्मद गजाली रदी अल्लाहु तआला अन्हु नक्ल फरमाते है.........

👉  "औरत के दुबुर मे (सोहबत) दुरुस्त नही, इसलिये की उसका हराम होना ऐसा ही है जैसे हैज मे जिमा हराम है! दूबूर (पिछे के मकाम) मे जिमा से औरत को तक्लीफ पहुंचती है!चुनांचे उसका हराम व नाजाईज होना यह निस्बते हैज की हुरमत से ज्यादा सख्त तर है!"

📕 [इहया उल उलुमजिल्द 2, सफा नं  95]

 

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🔥 दुबूर (पीछे के मकाम) में सोहबत 🔥

 

अगर हम गौ़र करे तो मालूम होगा कि अक़्ल की रू से भी यह काम निहायत ही गंदा और ना पसंदीदा है। हर मिजाजे सलीम और तबअे मुस्तकीम इससे  खुद ब खुद घिन आती है। और इसको एक करीह, बदमजा काम जानती है! उलमा-ए-किराम ने औरत से उस के दुबुर मे सोहबत करने के होनेवाले कई नुक़्सानात पर तफ्सीली तब्सीरा  किया है जिनमें से चंद यहाँ बयान किये जाते हैं।

✍🏻 अव्वल तो यह गिलाज़त, और गन्दगी के निकलने का मकाम है! वती (सोहबत) की लज्जत व लुत्फ अंदोजी को इस गंदगी और गिलाजत की जगह से क्या इलाका (काम)! बल्के ऐसे मौके पर तो इंसान लताफत व पाकीजगी को मुतलाशी (ढुढना) होता  है!

 

✍🏻 दूसरा यह कि वती औरत का मर्द पर एक हक होता है! और वह हक इस शक्ल मे तबाह होता है 

 

✍🏻 तीसर यह कि कुदरत ने इस मकाम को इस बुरे, बेहुदा काम के लिये नही बनाया है, गोया ऐसे काम का इर्तिकाब  कुदरत के बनाए हुए उसुल (नियम) से बगावत करना है!

 

 ✍🏻 चौथा यह की मर्द के लिये जिमा की यह शक्ल निहायत ही मुजीर सेहत (सेहत के लिये नुक्सान देह) है! हालीया रिसर्च (AIDS) Acquired Amino Deficiency Syndrome होने की भी एक वजह है!

 

 ✍🏻 पॉंचवा यह है कि इस सूरत में ऊज़ू-ए-तनासुल (लिंग) की रगो और जिस्म के दूसरे हिस्सों पर ख़िलाफ़े फितरत जोर पड़ता है जो रगों के लिए नुकसानदेह है! इस तरह के दिगर कई और ऐब, नुक़्सानात व बुराईयॉ के पेशे नजर  शरीयत ने इस काम को हराम करार दिया है और इस अमले बद से मना किया है!

 

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         🔵 इस्तेहाज़ा का बयान  

 

              👉🏻 वोह खून जो औरत के आगे के मक़ाम से निकले और हैज़ व निफ़ास का न हो वोह इस्तेहाज़ा है। इस्तेहाज़ा का खून बीमारी की वजह से आता है।

 

✍🏻 मसअ़ला : हैज़ की मुद्दत ज़्यादा से ज़्यादा दस दिन और दस राते है! और कम से कम तीन दिन और तीन राते रात है। अगर खुन दस दिन, दस रात से कुछ ज्यादा आया,या तीन दिन, तीन रात से कुछ भी कम आया तो वोह खून हैज़ का नही इस्तेहाज़ा का है। अगर किसी औरत को पहली मर्तबा हैज़ आया है तो दस दिन, दस रात  हैज़ है, और   बाद का इस्तेहाज़ा है ! और अगर पहले उसे हैज़ आ चुके है और आ़दत दस दिन, दस रात से कम की थी तो आ़दत से जितने ज़्यादा दिन आया वोह इस्तेहाज़ा है। उसे यूं समझिए  कि किसी औरत को पाँच दिन, पॉंच रात  की आ़दत थी (यानी उसे हमेशा हैज़ पाँच दिन पॉंच रात आता   फिर बंद हो जाता था) लेकिन अगर बाराह दिन आया तो पॉंच दिन व रात (जो आदत के थे) बाकी सात दिन व सात  राते इस्तेहाज़ा के है । और अगर हालत मुक़र्रर न थी बल्कि हैज़ कभी चार दिन, कभी पाँच दिन, और कभी छह दिन वगैरह आता था, तो पिछली मर्तबा जितने दिन आया इतने ही दिन हैज़ के समझे जाएंगे और बाकी इस्तेहाज़ा के।

📕 [बहार ए शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा 2, सफा नं 42, कानूने शरीयत सफ नं 52]

  

✍🏻 मसअ़ला : इस्तेहाज़ा मे नमाज़ माफ नही (बल्कि नमाज़ छोड़ना गुनाह है) न ही रमजान शरीफ के रोजे माफ है, ऐसी हालत मे औरत से जिमाअ भी हराम नही।

 

✍🏻 मसअ़ला : अगर इस्तेहाज़ा का खून इस क़दर आ रहा हो कि इतनी मोहलत नही मिलती कि वुज़ू करके फ़र्ज़ नमाज़ अदा कर सके, तो एक वुज़ू से इस एक वक्त़ में जितनी नमाज़े चाहे पढ़े, खून आने से भी इस पूरे वक्त़ के अंदर वुज़ू न जाऐगा अगर कपड़ा वगै़रह रख कर नमाज़ पढ़ने तक खून रोक सकती है तो वुज़ू करके नमाज़ पढ़े।

📕 [कानूने शरीयत, जिल्द नं , सफा नं 54,]

 

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        💎 तहारत का बयान 💎

 

💎 अल्लाह रब्बुल इज्जत इर्शाद फरमाता है...

 

اِنَّ اللّٰہَ یُحِبُّ التَّوَّابِیۡنَ  وَ یُحِبُّ الۡمُتَطَہِّرِیۡنَ ﴿۲۲۲

 

💎 "बेशक अल्लाह! पसंद करता है, बहुत तौबा करने वालो को, और पसंद करता है सुथरो को!"

📕 [ सुरह ए बखराह आयत 222, तर्जुमा कंजुल इमान]

 

📚 हदिस : अल्लाह के रसुल इर्शाद फरमाते है

 "पाकीजगी आधा इमान है!"

          और फरमाते है हमारे प्यारे आका     " दीन की बुनियाद पाकीजगी पर है!"

📕 [ किमीया ए सआदत सफ नं 132]

 

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   🔵 गुस्ल कब फर्ज होता ह🔵

 

      👉🏻 गुस्ल पॉंच चीजों से फर्ज होता है! यानी इन पॉंच चीजो मे से कोई एक भी सुरत पायी जाए तो गुस्ल फर्ज है! हर एक के बारे मे तफ्सील यह है!

 

1⃣ मनी निकलने से : मर्द ने औरत को छुआ, या देखा, या सिर्फ औरत के खयाल से ही मजे के साथ मनी (विर्य) अपने मकाम से निकली तो गुस्ल फर्ज हो गया! चाहे सोते मे हो या जागते मे, इसी तरह औरत ने मर्द को छुआ, या देखा, या उसका खयाल लाई और लज्जत के साथ मनी निकली तो औरत पर भी गुस्ल फर्ज हो गया!

 

 💫 इन तमाम बातो का हासील यही है की अगर शहवत और मजे के साथ मनी अपने मकाम से निकले चाहे औरत से हो या मर्द से तो गुस्ल फर्ज हो जाता है

 

2⃣ एहतलाम से : यानी सोते मे मनी का निकलना जिसे (Nightfall) भी कहते है, इससे भी गुस्ल फर्ज हो जाता है! यह मर्द और औरत दोनो को होता है! चुनांचे हदीस पाक मे है......

 

📚 हदीस : हजरत उम्मे सलमा रदी अल्लाहु तआला अन्हा ने रसुल ए करीम से अर्ज किया... "या रसुलुल्लाह! अल्लाह तआला हक बात बयान करने मे हया नही फरमाता, जब औरत को एहतलाम हो जाए यानी वह मर्द को ख्वाब मे देखे तो उसके लिये गुस्ल जरुरी है"? हुजुर ने इर्शाद फरमाया...... " हॉं अगर वह तरी (गिलापन) देखे तो गुस्ल करे"! 

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द 1, बाब नं 195, हदीस नं 275, सफ नं 193, तिर्मीजी  शरीफ, जिल्द 1, बाब नं 89, हदीस नं 114, सफ नं 130]

 

✍🏻 मस्अला : रोजे की हालत मे था, और एहतलाम हो गया, तो रोजा न टुटा और न ही रोजे मे कोई खराबी आई, लेकीन गुस्ल फर्ज हो गया!

📕 [बहार ए शरीयत, व कानुन ए शरीयत]

 

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   🔵 गुस्ल कब फर्ज होता है 🔵

 

 3⃣ मुबाशरत (सोहबत) करने से : मर्द ने औरत से जिमाअ किया और अपने आले (लिंग) को औरत के आगे के मकाम (योनी) मे हश्फा दाखील किया चाहे शहवत के साथ हो या बगैर शहवत, इंजाल (Discharge) हो या न हो (सिर्फ मर्द का अपने उज्व (लिंग) को औरत की फरज (योनी) मे हश्फा तक दाखील कर देने से ही) मर्द और औरत दोनो पर गुस्ल फर्ज हो गया!

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द 1, बाब नं 201, हदीस नं 284, सफ नं 195]

 

4⃣ हैज के बाद : औरत को हैज का खुन आना जब बंद हो जाए, तो उसके बाद उसे गुस्ल करना फर्ज है!

 

5⃣ निफास के बाद : औरत को बच्चा पैदा करने के बाद जो खुन फरज से आता है, उसे निफास कहते है! उस खुन के बंद हो जाने के बाद औरत पर गुस्ल करना फर्ज है! यह जो मशहुर है की औरत बच्चा पैदा करने के चालीस दिन बाद पाक होती है, यह गलत है! (उसकी तफ्सील और निफास का मुफस्सल बयीन आगे आएंगा)

 

📕 [कानुन ए शरीयत जिल्द 1 सफ नं 38]

 

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   🔵 गुस्ल कब फर्ज होता है 🔵

 

💫 इन पॉंच चिजो से गुस्ल फर्ज हो जाता है! इसके अलावा चंद जरुरी मसाइल है जिनका जानना और याद रखना हर मुसलमान को जरुरी है!

 

1⃣ मनी : मनी वह है जो शहवत के साथ निकलती है!

 

2⃣ मजी : मजी वह है जो बगैर मजा के ऐसे ही उज्व ए तनासुल (लिंग) मे से चिप-चिपा सा माद्दा निकलता है! नरीयल के तेल की तरह का माद्दा कभी कब्ज से कभी हाज्मे की खराबी से भी निकलता है!

 

3⃣ वदी : गाढे पेशाब को कहते है, जो गालीबन देखने मे गाढे दुध की तरह होता है!

 

       💫मनी निकलने से गुस्ल फर्ज होता है, जब की मजी और वदी के नीकलने से गुस्ल फर्ज नही होता लेकीन वुजु टुट जाता है!

 

✍🏻 मस्अला : अगर मनी इतनी पतली पड गई के पेशाब के साथ या वैसे ही कुछ कतरे बगैर शहवत (बगैर मजे) के निकल जाए तो गुस्ल  फर्ज न हुआ!

📕 [कानुन ए शरीयत जिल्द 1 सफ नं 38]

 

✍🏻 मस्अला (बिमारी से मनी निकलना) : किसी ने बोझ उठाया, या ऊंचाई से निचे गिरा, या बिमारी की वजह से बगैर किसी मजे के मनी निकल गई तो गुस्ल फर्ज न हुआ, अल्बत्ता वुजु टुट गया!

📕 [कानुन ए शरीयत जिल्द 1 सफ नं 38]

 

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   🔵 गुस्ल कब फर्ज होता है 🔵

 

✍🏻 मस्अला पेशाब के साथ मनी निकलना) : अगर किसी ने पेशाब किया और मनी निकली, तो देखा जाए उस वक्त उज्व ए तनासुल (लिंग) मे तनाव था या नही! अगर तनाव था तो गुस्ल फर्ज हो गया, और अगर तनाव न था और बगैर किसी मजे के पेशाब के साथ मनी(विर्य) निकल गई तो गुस्ल फर्ज न हुआ

📕 [फतावा आलमगिरी बहार ए शरीयत व कुतुब ए कसीरा]

 

✍🏻 मस्अला : मर्द और औरत एक ही बिस्तर पर सोए! बेदारी के बाद बिस्तर पर मनी के निशान पाया गया और दोनो मे से किसी को एहतलाम (Nightfall) याद नही तो एहतियात यह है के दोनो गुस्ल करे, यही ही सही है!

📕 [बहार ए शरीयत जिल्द 1, हिस्सा नं 2,सफ नं 21]

 

✍🏻 मस्अला :  किसी औरत ने अपने शौहर से सोहबत की, मुबाशरत के बाद गुस्ल कर लिया! फिर उसकी शर्मगाह (योनी) से उसके शौहर की मनी निकली तो उसपर गुस्ल वाजीब न होंगा लेकीन वुजु टुट जाएंगा!

📕 [बहार ए शरीयत जिल्द 1, हिस्सा नं 2,सफ नं 22]

 

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💫नापाकी के हालत मे कौन सी बाते हराम है! 💫

 

     👉🏻 जिस को नहाने (गुस्ल) की जरुरत हो, उसको मस्जीद मे जाना, काबा का तवाफ करना, कुरआन ए करीम को छुना, बे देखे या जुबानी पढना, या किसी आयत का लिखना, या ऐसी अंगुठी पहनना या छुना जिसपर कुरआन की कोई आयत या अदद या हुरुफे मुकत्तआत लिखे हुए हो, दिनी किताबे जैसे हदीस, तफ्सीर, और फिक्ह वगैरह की कितीबे छुना यह सब हराम है!अगर कुरआन ए करीम जुज्दान मे हो या कपडे मे लिपटा हुआ हो तो उसपक हाथ लगाने मे हर्ज नही! अगर कुरआन की कोई आयत कुरआन पढने की नियत से न पढी सिर्फ तबर्रुक के लिये बिस्मिल्लाह!अलहम्दु लिल्लाह! या सुरह ए फातीहा या आयतल कुर्सी या ऐसी कोई आयत पढी तो कोई हर्ज नही! इसी तरह दरूद शरीफ और कलमा भी पढ सकते है!

📕 [कानुन ए शरीयत जिल्द 1, सफा नं 28]

 

📚 हदीस : (मस्अला : नापाक का झुठा)  नापाक मर्द व औरत का और हैज व निफास वाली औरत का झुठा पाक है! इसी तरह उसका पसीना या थुक किसी कपडे या जिस्म से लग जाए तो नापाक न होंगा

📕 [बुखारी शरीफ जिल्द 1 सफ: 193, कानुन ए शरीयत जिल्द 1, सफा नं 46, ]

 

 

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💫नापाकी के हालत मे कौन सी बाते हराम है! 💫

 

✍🏻 मस्अला : नापाक का नमाज पढना) रात मे सोहबत की हो तो नमाजे फज्र से पहले, और अगर दिन मे सोहबत की हो तो अगली नमाज से पहले गुस्ल करले ताकी नमाज कजा न हो जाए, और ज्यादा वक्त तक नापाकी की हालत मे रहना न पडे की नापाक शख्स से रहमत के फरीश्ते दुर रहते है! गुस्ल की जरुरत है, और वक्त तंग है की अगर गुस्ल करता है तो फज्र की नमाज का वक्त खत्म हो जाएंगा और नमाज कजा हो जाएंगी ऐसी हालत मे तयम्मुम करके घर पर ही नमाज पढले, फिर उसके बाद गुस्ल करके उसी नमाज को दुबारा पढे! (इस तरह से अदा नमाज पढने का ही सवाब मिलेंगा)!

📕 [अहकाम ए शरीयत जिल्द 2, सफा नं 172, ]

 

👉🏻 जिस घर मे नापाक हो : अक्सर मर्द और औरते शर्म व हया से गुस्ल नही करते और नापाकी की हालत मे कई कई दिन गुजार देते है! यह बहुत ही बडी नहुसत और जाहीलाना तरीका है! हदीस ए पाक मे है जिस घर मे नापाक मर्द या औरत हो, उस घर मे रहेमत के फरीशते नही आते, उस घर मे नहुसत व बेबरकती आ जाती है, कारोबार रिज्क से बरकत दुर हो जाती है और मुफ्लीसी, गुरबत, तंगदस्ती का बसेरा हो जाता है!

 

👉🏻 गुस्ल से पहले बाल काटना : गुस्ल करने से पहले नापाकी की हालत मे जेरे नाफ, बगल, सर, नाक के बाल और नाखुन वगैरह न काटे

 [किमीया ए सआदत सफ नं 267, ]

 

💫"नापाक हालत मे जेरे नाफ के बाल, नाखुन, और सर के बाल वगैरह कांटना मना है, क्यु की आखीरत मे तमाम अज्जा उसके पास वापस आऐंगे तो नापाक अज्जा का मिलना अच्छा नही! यह भी लिखा है के हर बाल इंसान से अपनी नापाकी का मुतालबा करेंगा!"

 [ इहया उल उलुम जिल्द 2, सफा नं 96, ]

 

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🔵नजासतो के पाक करने का तरीका 🔵

 

✍🏻 गुस्ल से पहले कपडो को पाक करना जरुरी है! 

 

       👉🏻 कपडो को पाक करना : वह कपडा जिस पर नजासत (गंदगी) लगी हो, उस पर पहले साफ पानी बहा कर खुब अच्छी तरह मले! फिर कपडे को अच्छी तरह निचोड ले, फिर दुसरा साफ पानी ले और कपडे पर बहाए, फिर साबुन या सर्फ  से अच्छी तरह धोए, फिर उस कपडे को निचोड ले! अब तिसरी मर्तबा साफ पानी लेकर कपडे पर बहाए और निचोड ले! अब आपका कपडा शरई रु से पाक हो गया! यानी तिन मर्तबा नया (साफ) पानी लेना और तिन मर्तबा अच्छी तरह कपडे पर बहाना और फिर अच्छी तरह निचोड लेना जरुरी है

 

           ✍🏻 मस्अला :  नजासत अगर पतली है, तो कपडा तिन मर्तबा धोने और तिन मर्तबा निचोडने से पाक होंगा! कपडे को अच्छी तरह निचोडने का मतलब यह है के हर बार अपनी कुव्वत से इस तरह निचोडे के पानी के कतरे टपकना बंद हो जाए! अगर कपडे का खयाल करके अच्छी तरह न निचोडा तो कपडा शरीयत के मुताबीक पाक नही समझा जाएंगा

 

           ✍🏻 मस्अला : कपडे को तिन मर्तबा धो कर हर बार खुब निचोड लिया है की, अब निचोडने से पानी के कतरे नही टपके, फिर उसको लटका दिया और उससे पानी टपका तो यह पानी पाक है!

 

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🔵नजासतो के पाक करने का तरीका 🔵

 

✍🏻 मस्अला : अगर एक शख्स ने नापाक कपडे धोकर अच्छी तरह निचोड लिया, मगर एक दुसरा शख्स ऐसा है जो उस पहले शख्स से ज्यादा ताकतवर है! अगर वह कपडा निचोडे तो कुछ बुंदे टपक सकती थी, तो वह कपडा पहले वाले शख्स के लिये पाक है, और इस दुसरे ताकतवर शख्स के लिये नापाक है, क्यु के अगर वह धोता और निचोडता तो वह कपडा उसके लिये और पहले शख्स के लिये भी पाक होता

 

        👉🏻 इस मस्अले से मालुम हुआ के मर्द को अपने नापाक कपडे खुद ही धोने चाहीये! बीवी से न धुलवाए, क्यो केआम तौर पर औरत की ताकत मर्द की ताकत से कम होती है! अगर मर्द उन कपडो को निचोडे तो पानी की कुछ बुंदे कपडे से निकल सकती है, इसलिये मर्द के हक मे कपडे नापाक ही होंगे! लेकीन किसी की बीवी उस से ज्याजा ताकतवर हो और उसने अच्छी तरह से निचोडा है, तो मर्द के लिये कपडा पाक है! ऐसे मर्द जिनकी बीवी उन से ज्यादा ताकतवर है, उसके हाथो धुले कपडे पहनने मे कोई हर्ज नही!

 

           ✍🏻 मस्अला : कपडे को पहली मर्तबा धोने, निचोडने के बाद हाथ दुसरे नये पानी से अच्छी तरह धोए, फिर दुसरी मर्तबा कपडा धोने और निचोडने के बाद हाथ दुसरे पानी से फिर अच्छी तरह धोए! तिसरी मर्तबा कपडा धोने और निचोडने से कपडा और हाथ दोनो पाक हो गये!

 

           ✍🏻 मस्अला : ऐसी चिजे जिन्हे निचोडा नही जा सकता, जैसे रूई का गद्दा, चटाई, कार्पेट, शतरंजी वगैरह, उन्हे पाक करने का तरीका यह है के, उन पर पहले इतना पानी बहाए की वह पुरी तरह भिग जाए, और पानी बहने लगे, उसके बाद हाथ से अच्छी तरह मले, और उसे उस वक्त तक छोड दे जब तक की पानी गद्दे, चटाई वगैरह से टपकना बंद हो जाए! फिर दुसरी मर्तबा पानी बहाए फिर छोड दे! जब पानी की बुंदे टपकना बंद हो जाए, तो अब तिसरी मर्तबा उस पर पानी बहाए और सुखने के लिये छोड दे! अब वह गद्दा या चटाई पाक हो गयी! तिन मर्तबा नया पानी उस चिज पर बहाना और हर मर्तबा पानी टपकने तक इंतजार करना जरुरी है

📕 [उपर के तमाम मसाईल अहकाम ए शरीयत जिल्द 3, सफा नं 252,  कानुन ए शरीयत 1, सफा नं 56, 75]

 

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           🔵गुस्ल का बयान 🔵

 

        💎 अल्लाह रब्बुल इज्जत इर्शाद फर्माता है!

 

وَإِن كُنتُمْ جُنُبًا فَاطَّهَّرُو ۚ

💎 तर्जुमा : और अगर तुम्हें नहाने की हाज़त हो तो खूब सुथरे हो लो।

📕 [कुरआन शरीफ, तर्जुमा कन्जुल ईमान, पारा 6, सूर ए मायेदा, आयत नं 6,]

 

📚 [हदीस : उम्मुल मोमिनीन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा (रदि अल्लाहु तआला अन्हा) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ने इर्शाद फ़रमाया..........!

 

 💫 "जब मर्द मुबाशरत  के बाद ग़ुस्ल करता है तो बदन के जिस बाल पर से पानी गुज़रता है! उस हर बाल के बदले उसकी एक नेकी लिखी जाती है एक गुनाह कम कर दिया जाता है और एक दर्जा ऊँचा कर दिया जाता है। और अल्लाह तआला उस बंदे पर फख़्र फर्माता है, और फ़रिश्तों से फर्माता है कि "मेरे इस बंदे की तरफ देखो के इस सर्द रात में ग़ुस्ल ए जनाबत के लिए उठा है, उसे मेरे परवरदिगार होने का यक़ीन है, तुम गवाह हो जाओ कि मैने इसे बख़्श दिया"।

 

👉🏻 यहॉ गौर करने वाली बात यह है के रात मे गुस्ल के लिये उठने की दो ही वजुहात नजर आती है! एक नमाजो की फिक्र या दुसरी माहे रमजान के लिये सेहरी के लिये

📕 [गुनीयातुत्तालिबीन, बाब नं 5, सफा नं 113,]

 

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           🔵गुस्ल का बयान 🔵

 

ग़ुस्ल में तीन फ़र्ज़ है इन में से अगर कोई एक भी फर्ज छूट गया तो चाहे समंदर  में भी नहा ले तो भी ग़ुस्ल न होगा, और इस्लामी शरीयत के मुताबिक़ नापाक ही रहेगा    ग़ुस्ल में तीन फ़र्ज़ है।

 

      1⃣ गरारा करना : मुँह भर कर गरारा करना, इस तरह की हलक़ का आख़िरी हिस्सादाँतों की खिड़कियाँ, मसूढ़े, वगै़रह सब से पानी बह जाए। दाँतों में अगर कोई चीज़ अटकी हुई हो तो उसे निकालना ज़रूर है! अगर वहां पानी न लगा तो ग़ुस्ल न होगा। अगर रोज़ा हो तो गरारा न करे सिर्फ़ कुल्ली करे, कि अगर गलती से भी पानी हलक़ के नीचे चला गया तो रोज़ा टूट जाएंगा।

 

           ✍ मसअ़ला : कोई शख़्स पान, कथ्था वगै़रह खाता है और चूना व कथ्था दाँतों की जड़ों में ऐसा जम गया कि उसका छुड़ाना बहुत ज़्यादा नुक़्सान का  सबब है तो माफ है! और अगर बगै़र किसी नुक़्सान के छुड़ा सकता है तो छुड़ाना वाज़िब है बगै़र उस के छुड़ाए ग़ुस्ल न होगा।

📕 [फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 2, किताबुत्तहारत, बाबुल ग़ुस्ल सफ नं 18,]

 

           2⃣ नाक में पानी डालना : नाक के आख़िरी नर्म हिस्से तक पानी पहुँचाना फ़र्ज़ है! नाक की गन्दगी को उँगली से अच्छी तरह से निकाले। पानी नाक  की हड्डी तक लगाना चाहिए और नाक में पानी महसुस  होने लगे।

 

       3⃣ तमाम बदन पर पानी बहाना : तमाम बदन पर पानी बहाना कि बाल बराबर भी बदन का कोई हिस्सा सूखा न रहे, बग़ल, नाफ, कान के सूराख वगैरह तक पानी बहाना ज़रूरी है

📕 [बहारे शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा 18, कानूने शरीयत, जिल्द नं 1, सफा नं 37]

 

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       🔵गुस्ल करने का तरीका 🔵

 

             👉🏻 ग़ुस्ल में नियत करना सुन्नत है! अगर न भी  की तब भी ग़ुस्ल हो जाएगा। ग़ुस्ल की नियत यह है कि  "मैं पाक होने और नमाज़ के जाइज़  होने के वास्ते ग़ुस्ल कर रहा हूँ / या कर रही हूँ।

 

     👉🏻 नियत के बाद पहले दोनों हाथ गट्टो (कलाई) समेत  तीन मरतबा अच्छी तरह धोए, फिर शर्मगाह और उसके आस पास के हिस्सों को धोए ! चाहे वहां गंदगी लगी हो या न लगी हो, फिर बदन पर जहाँ जहाँ गन्दगी  हो उन जगह को  धोए, उस के बाद गरारा करे कि पानी हलक़ के आख़िरी हिस्से, दाँतों की खिड़कीयो, मसूढ़ो वगै़रह में बह जाए, कोई चीज़ दाँतों में अटकी हो तो लकड़ी वगै़रह से उसे निकाल ले, फिर नाक में पानी डाले, इस तरह की नाक की आख़िरी हिस्सा (हड्डी) तक पहुँच जाए और वह नाक में हल्का तेज़ मालुम हो! फिर चेहरा को धोए इस तरह के पेशानी से लेकर ठोढी तकऔर एक कान की लौ से दूसरे कान की  लौ तक, फिर तीन मर्तबा कोहनियो समेत हाथों पर पानी बहाए फिर सर का मसह करे, जिस तरह वुज़ू में करते है!

             उस के बाद बदन पर तेल की तरह पानी मले। फिर तीन मर्तबा सर पर पानी डाले फिर तीन मर्तबा सीधे मोन्ढ़े (कान्धे) पर और तीन मरतबा दाएँ मोन्ढ़े पर लोटे या मग वगै़रह से पानी डाले और जिस्म को मलते भी जाए इस तरह कि बदन का कोई हिस्सा सूखा न रहे! सर के बालों की जड़ों, बगल में शर्मगाह और उसके आस पास के हर हिस्सो पर सब    जगह पानी पहुंच जाए! इसी तरह औरत अपने कान की बाली, नाक की नथुनी वगैरह को घुमा घुमा कर  वहाँ पानी पहुँचाए! सर की जडो तक पानी जरुर पहुंचे! अब आप इस्लामी शरीअ़त के मुताबिक़ पाक हो गये और आपका ग़ुस्ल सही हो गया! इसके बाद साबुन वगै़रह जो भी जाइज़ चीज लगाना हो तो वह लगा सकते है, आखिर में पैर धो कर अलग हो जाए।

📕 [फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 2, सफ नं 18, बहार ए शरीयत, जिल्द नं 1, हिस्सा 2 सफा नं 36,]

 

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       🔵गुस्ल करने का तरीका 🔵

 

मसअ़ला : नहाने के पानी में बे वुज़ू शख़्स का  हाथ, उँगली, नाखून, या बदन का कोई और हिस्सा पानी में बे  धोए चला गया तो वह पानी ग़ुस्ल और वुज़ू के लाएक नही रहा! इसी तरह जिस शख़्स पर  (ग़ुस्ल) फ़र्ज़ है उसके जिस्म का भी कोई हिस्सा बे धोए पानी से छू गया तो वह पानी ग़ुस्ल के लाएक नही। इस लिए टाकी वगै़रह का पानी जिस मे घर के कई लोगों के हाथ बगै़र धुले हुए पड़ते है उस पानी से ग़ुस्ल व वुज़ू नही हो सकता! ग़ुस्ल के लिए पहले से ही एहतियात से किसी बाल्टी या ड्रम मे अलग ही  नल से पानी भर ले। अगर ऐसी टाकी है जिसमे किसी का हाथ नहीं जाता और उसमे नल वगैरह लगा है, जैसे अमुमन मस्जीद मे होते है या आजकल बिंल्डींग मे छत के उपर प्लास्टीक के बडे-बडे टाकी (Water Tanks) लगाए जाते है, तो ऐसे टाकी के पानी से गुस्ल करना सही है! अगर गुस्ल के पानी मे धुला हुआ हाथ या बदन का कोई हिस्सा पानी में चला गया या छू गया तो कोई हर्ज नही। इसी तरह ग़ुस्ल करते वक्त़ यह भी एहतियात रखे कि नापाक बदन से पानी के छींटे बाल्टी में मौजूद पानी जिस से ग़ुस्ल कर रहे है उसमें  न जाने पाए 

📕 [कानूने शरीयत, जिल्द नं 1, सफा नं 39,]

 

मसअ़ला : ऐसा हौज़ या तालाब जो कम से कम दस हाथ लम्बा, दस हाथ चौड़ा, (यानी कम अज कम 10X10 fits का) हो तो उसके पानी में अगर हाथ या नजासत (गन्दगी) चली गई तो वह पानी नापाक नही होगा, जब तक कि उस का रंग, या मज़ा, और बू (Smell) न बदल जाए। उससे ग़ुस्ल और वुज़ू जाइज़ है। हॉ अगर नजासत इतनी चली गई के पानी का रंग, या मज़ा या बू (Smell) बदल गई तो उस पानी से ग़ुस्ल व वुज़ू न होगा।

📕 [कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 1, सफा नं 39,]

 

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      🔵गुस्ल करने का तरीका 🔵

 

मसअ़ला : ग़ुस्ल करते वक्त़ किबले की तरफ रुख़ कर के नहाना मना है। ग़ुस्लखाने में छत हो और बंद दरवाजे हो, या ऐसी जगह जहॉ किसी के अचानक देखने का गुमान न हो तो वहॉ बरहाना (नंगे) नहाने में कोई हर्ज नही है! औरतों को ज़्यादा एहतियात की ज़रूरत है यहाँ तक कि बैठ कर नहाना बेहतर है। ऐसी जगह नहाए जहाँ किसी के देखने का अंदेशा न हो। नहाते वक्त़ बात चीत करना, कुछ पढ़ना, चाहे कोई दुआ ही क्यों न हो, कलमा शरीफ, दुरूद शरीफ़, वगै़रा पढ़ना सख्त मना है।

 

                🔥 कुछ लोग नहाते वक्त फिल्मी गित गाते है! और कुछ तो मआजअल्लाह! बे खयाली मे नात वगैरह गुनगुनाने लगते है! याद रखीये अव्वल तो गाना ही गाना जाइज नही! इसी तरह गुस्ल करते वक्त नात शरीफ वगैरह पढना भी सख्त ना जाइज व गुनाह है!

 

                 🔥कुछ लोग चड्डी पहने कर सड़कों के किनारेे  नल में नहाते है यह जाइज़ नही! बल्कि सख़्त नाजाइज व गुनाह व हराम है! क्योंकि मर्द को मर्द से भी घुटने से नाफ़ तक का बदन का हिस्सा छुपाना फ़र्ज़ है

📕 [कानूने शरीअ़त, जिल्द नं 1, सफा नं 37,]

 

              ✍  मसअ़ला : कुछ लोग नापाक चड्डी या कपड़ा पहने हुए ही ग़ुस्ल करते है! और यह समझते है कि नहाने में सब कुछ पाक हो जाएगा। यह बेवकूफ़ी है! इससे तो गंदगी फैल कर पूरे बदन को नापाक कर देती है। और वैसे भी इस तरीक़े से चड्डी पाक नही समझी जाएगी, क्योंकि नापाक कपड़े को तीन बार धोना, और हर बार अच्छी तरह निचोड़ना ज़रूरी है (जिस का बयान पहले ही आ चुका है) इसलिए नापाक चड्डी या कपड़े को उतार ले, पाक चड्डी या कपड़ा ही बाँध कर ग़ुस्ल करें।

 

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💫नाखून पॉलिश होने पर ग़ुस्ल न होगा 💫

 

👉🏻   कुछ मर्द और अक्सर   औरतें अपने हात पांव के नाखूनो पर पॉलिश (Nail Polish) लगाते है! नाखून पॉलिश में  स्प्रीट ( Alcohol) होता है जो कि शरीअ़त में  हराम है! मर्दों के लिए तो बहुत ही ज़्यादा सख्त हराम व गुनाह है की यह औरतो से मुशाबहत (नकल) पैदा करना है! नाखूनो पर पॉलिश होने की वजह से वुज़ू और ग़ुस्ल करते वक्त़ पानी नाखूनो पर नही लगता बल्कि पॉलिश पर लग कर फिसल जाता है! और सिरे से ही ग़ुस्ल नही होता। जब ग़ुस्ल ही न हुआ तो नापाक ही रहा और नापाकी की हालत में नमाज़ पढ़ी तो नमाज़ न होगी, और जान बूझकर नापाक रहना सख़्त गुनाह है! अल्लाह न करे अगर इस हालत में मौत आ गई तो उस का वबाल अलग, और नापाकी मे अक्सर शैतान जिन्न का असर हो जाता है! इस लिए औरतों को चाहिए कि नाखून पॉलिश न लगाए।   

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     🔵मिया बीवी के हुकुक 🔵

          

              💎 आयत : अल्लाह रब्बुल इज्जत  इर्शाद फरमाता है..........

 

هُنَّ لِبَاسٌ لَكُمْ وَأَنْتُمْ لِبَاسٌ لَهُنَّ

 

       💎 तर्जुमा : वह तुम्हारी लिबास है और तुम उनके लिबास!

📕 [तर्जुमा :- कन्जुल ईमान शरीफ, पारा 2, सूरए बक़र, आयत नं 187,]

 

       👉🏻 इस आयते करीमा मे अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने क्या ही बेहतरीन मिसाल के जरीए मियाँ बीवी के एक दूसरे पर हुकूक़ के मुत्अ़ल्लिक़ अपने बंदो को समझाया है।

 

💫     लिबास जिस्म के ऐबो छुपाता है! इसी तरह बीवी अपने शौहर के ऐबो को और शौहर अपनी बीवी के ऐबो को छुपाने वाले बने! एक मुहज्जब इंसान बगैर लिबास के नहीं रह सकता, इसी तरह तमद्दुन याफ्ता मर्द या औरत बगैर निकाह के नहीं रह सकते! लिबास को मैला होने पर धोया जाता है, इसी तरह शौहर और बीवी गम व परेशानी के मौके पर एक दुसरे का मुकम्मल सहारा बने! और गमो को धो डाले!    लिबास मे अगर कोई मामुली सा दाग लग भी जाए तो लिबास फैंका नही जाता बल्की उसे धोकर साफ कर लिया जाता हैइसी तरह मियॉ बीवी एक दुसरे की छोटी मोटी गल्तीयो को माफ करे और गल्तीयो के दाग को माफी के पानी से धो कर साफ कर ले!

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          🔵 [शौहर के हुकुक़]                 

 

👉🏻      बीवी का फ़र्ज़ है कि अपने शौहर की इज़्ज़त का ख्याल रखे, और उसके अ़दब व एहतराम मे किसी किस्म की कोताही न बरते! और जुबान से ऐसी कोई बात न निकाले जो शौहर की शान के ख़िलाफ़ हो।

 

 📚 हदीस : हज़रत आएशा सिद्दीक़ा व हज़रत अबू ह़ुरैरा रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ने इर्शाद फरमाया........

 

💫   "अगर मै किसी को किसी के लिए सज्दे का हुक़्म देता तो औरतों को हुक़्म देता कि अपने शौहर को सज्दा करे"।

📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, बाब नं 788, हदीस नं 1158, सफा नं 594,]   

👉🏻      इस हदीस शरीफ से दो बाते मालूम हुई कि खुदा के सिवा किसी के लिये सज्दा करना जाइज नहीऔर दूसरी बात यह के शौहर का दर्जा इतना बुलंद है कि अगर मख़्लूक में अगर किसी के लिए सज्दा करना जाइज़ होता तो औरतों को हुक़्म दिया जाता कि वह अपने शौहर को सज्दा करे।

 

📚 हदीस : एक शख्स ने हुज़ूर ए अक्रम  से दर्याफ्त किया "बेहतरीन औरत की पहचान क्या है"? हुज़ूर ने इर्शाद फरमाया........

 

 "जो औरत अपने शौहर की इताअ़त व फ़रमाबरदारी करे"।

📕 [नसाई शरीफ, जिल्द नं 2, सफा नं 364,]

 

👉🏻    औरत का फ़र्ज़ है कि अपने शौहर की ख़िदमत से किसी किस्म की कोताही न करे! बल्कि जिन्दगी के हर मोड  पर निहायत ही खन्दा पेशानी से शौहर की ख़िदमत करके अपनी वफ़ादारी का अ़मली सुबूत दे। यहाँ तक की अगर शौहर अपनी औरत को किसी ऐसे काम का हुक़्म दे जो उसे बेकार व फ़ुजूल महसुस हो तब भी औरत का फ़र्ज़ है कि शौहर के हुक़्म की तामील करे।        

 

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          🔵 [शौहर के हुकुक़]                 

 

📚 हदीस : उम्मुल मोमीनीन हज़रत मैमूना रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि हुजुर ने इर्शाद फरमाया.....

💫 "मेरी उम्मत में सब से बेहतर वह औरत है जो अपने शौहर के साथ अच्छा सुलूक करती है! ऐैसी औरत को ऐैसे एक हज़ार शहीदों का सवाब मिलता है जो खुदा की राह में सब्र के साथ शहीद हुए, उन औरतों में से हर औरत जन्नत की हूरों पर ऐैसी फ़जीलत रखती है जैसे  मुझे (यानी मुहम्मद ) को तुम पर फजीलत हासील है!"

📕 [गुनीयातुत्तालिबीन, बाब नं 5, सफा नं 113,]

 

📚 हदीस : हजरत सय्यदना इमाम हसन रदी अल्लाहु तआला अन्हु रिवायत करते है...... हुजुर ने इर्शाद फर्माया.....

💫        "कोई औरत अपने खावींद के घर से भाग निकले तो उसकी नमाज कुबुल नही होती! और औरत जब नमाज पढे मगर अपने खावींद के लिये दुआ न करे तो उसकी दुआ मर्दुद होती है!"

📕 [तंबीहुल- गाफेलीन  सफा नं 541]

 

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          🔵 [शौहर के हुकुक़]                 

 

📚 हदीस : हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है की हुजुर ने इर्शाद फरमाय..........

 

💫|    "मुझे दोजख दिखाई गई मैने वहॉ औरतो को ज्यादा पाया वजह यह है के वह कुफ्र करती है!" सहाबा किराम ने अर्ज किया  "क्या वह अल्लाह के साथ कुफ्र करती है?" इर्शाद फरमाया "नही वह शौहर की नाशुक्री करती है! (जो एक तरह का कुफ्र है) और एहसान नहीं मानती, अगर तुम किसी औरत से उम्र भर एहसान और नेकी का सुलुक करो लेकीन एक बात भी खिलाफे तबीयत हो जाए तो झट कह देंगी मैने तुझ से कभी आराम और सुकुन नही पाया!"

📕 [बुखारी शरीफ जिल्द १ बाब नं २१, हदीस नं २८ सफ नं १०९]

 

📚 हदीस : हजरत उमर फारुख रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है की हुजुर ने इर्शाद फर्माया.........

💫|         "क्या तुमको नही मालुम की औरत के लिये शिर्क के बाद सब से बडा गुनाह शौहर की नाफर्मानी है!"

📕 [गुनीयातुत्तालेबीन बाब नं ५, सफ नं ११४]

 

📚 हदीस : हजरत अबु हुरैरा रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है के हुजुर ने इर्शाद फर्माया.........

"शौहर अपनी बीवी को जिस वक्त बिस्तर पर बुलाए, और वह आने से इंकार कर दे, तो उस औरत पर खुदा के फरिश्ते सुबह तक लानत करते है!"

📕 [बुखारी शरीफ जिल्द ३ बाब नं ११५, हदीस नं १७८ सफ नं ९६, मुस्लीम शरीफ जिल्द १, सफ नं ४६४]

 

👉🏻      अफसोस! आज कल ज्यादा तर औरते अपने शौहर को बुरा भला कहती है, गालीयॉ देती है! और कुछ बेबाक औरते अपने शौहर को मारने से भी नही चुकती! कुछ मजे की खातीर बिमार शौहर को घर पर छोड कर दुनीयॉ की थोडी सी मस्ती की खातीर हमेशा हमेशा रहने वाली आखीरत की जिंदगी को बर्बाद कर बैठती है!

 

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      🔵 [बीवी के हुकुक़]             

 

👉🏻 जिस तरह बीवी पर लाज़िम है कि शौहर के हुकूक़ अदा करे उसी तरह शौहर पर भी फ़र्ज़ है कि बीवी के हुकूक़ अदा करने में किसी किस्म की कोताही न करे।

 

 💎 अल्लाह तआला इर्शाद फरमाता है......

 

وَعَاشِرُوهُنَّ بِالْمَعْرُوفِ ۚ

 

💎 तर्जुमा :        और उनसे (औरतों से) अच्छा बर्ताव करो

📕 [तर्जुमा :- कुरआन कन्जुल ईमान, पारा 4, सूरए निसा, आयत नं 19,]

 

💫       शौहर पर बीवी की जो जिम्मेदारीयॉ आइद है इन सब मे एक  बड़ी जिम्मेदारी यह भी है कि वह बीवी का महर अदा करे।

 

📚 हदीस : हुज़ूर ने इर्शाद फर्माया.......

 

  💫         "निकाह की शर्त यानी महर अदा करने का सब से ज़्यादा खयालल रखो।

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, सफा नं 80,]

 

👉🏻 बीवी का महर शौहर के ज़िम्मे अदा करना वाज़िब और जरुरी है! अगर उसके अदा करने मे कोताही होंगी तो क़ियामत के दिन सख़्त गिरिफ़्त सजा होंगी! शौहर का अपनी बीवी को सताना, गालीयॉ देना, और उस पर जुल्म व ज्यादती  करना बदतरीन गुनाह है!

 

📚 हदीस : रसूले ख़ुदा ने इर्शाद फर्माया

 

 💫 "सब से बुरा आदमी वह है जो अपनी बीवी को सताए।"

📕 [तबरानी शरीफ,]

 

📚 हदीस : हजरत अनस बिन मालीक रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है की हुजुर ए अकरम ने इर्शाद फर्माया...........

 

💫 "वह शख्स कामील ईमान वाला है जो अपनी बीवी के साथ हुस्ने सुलुक मे अच्छा है! और मै तुम सब मे अपनी बीवीयों के साथ बेहतर सुलुक करने वाला हु!"

📕 [ तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, बाब नं 789, हदीस नं 1161 सफा नं 595,]

 

💫 हजरत इमाम तिर्मीजी व हजरत इमाम इब्ने माजा रदी अल्लाहु तआला अन्हुम ने इन लफ्जो के साथ रसुले करीम का इर्शाद नक्ल किया है, की.........

 

 خیر کم خیر کم لا ھبله وانا خير كم لاهلى

 

 💫 "तुम मे वह बेहतर है जो अपनी बीवी के साथ बेहतर है और में अपनी बीवीयों के साथ तुम सब से बेहतर हूँ"।

 

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      🔵 [बीवी के हुकुक़]  

      

📚 हदीस : "तुम मे से वह बेहतर है जो अपनी बीवीयों के साथ बेहतर है और में अपनी बीवीयों के साथ तुम सब से ज़्यादा बेहतर हूँ"।

📕 [इब्ने माज़ा, जिल्द नं 1, हदीस नं 2047, सफा नं 551, तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, सफा नं 595,]

 

👉🏻       शौहर को चाहिए कि अपनी बीवी के साथ (बर्ताव मे) खुश मिज़ाज़ी, नर्मी, और मेहरबानी से पेश आएे और अपने प्यारे नबी   के फरमान  पर अ़मल करे ।

     

🔥 लेकिन आज कल आम तौर पर  मौजुदा दौर मे यह देखा जा रहा है कि मर्द हज़रात बाहर तो चूहा बने फिरते है! लेकिन घर आते ही शेर की तरह दहाडना शुरू कर देते है! और बे वजह बीवी पर रौब झाड़ते रहते है! बीवी से हमेशा मुहब्बत का सुलुक रखे। हाँ अगर वह  नाफ़र्मानी करे, या जाइज़ हुक़्म न माने तो उस पर नाराजगी का इजहार  कर सकते हैं।

 

💫|     हुज़ूर सैय्यदना ग़ौसे आ़ज़म "गुन्यतुत्तालिबीन" मे और इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली  [रदि अल्लाहु तआला अन्हुम] "कीमीया-ए-सआ़दत" में फरमाते है..........

💫              "अगर बीवी शौहर की इताअ़त न करे तो शौहर नर्मी व मुहब्बत और समझा बुझा कर अपनी इताअ़त करवाए। अगर इस के बाद भी न माने   तो शौहर गुस्सा करे और उसे ड़ाँट ड़पट कर समझाए! अगर फिर भी न माने तो सोने के वक्त़ उस की तरफ पीठ करके सोए। अगर  उस पर भी न माने तो फिर तीन रातें उससे अलग सोए। अगर इन तमाम बातो से भी न माने और अपनी हटधर्मी पर अड़ी रहे तो उसे मारे! मगर मुँह पर न मारे, और न ही इतने जोर से मारे की जख्मी हो जाए। अगर इन सब से भी फ़ायदा न हो तो फिर एक महीने तक नाराज रहे फिर भी कुछ बात न बने तो अब एक तलाक़ दे

📕 [गुन्यतुत्तालिबीन, सफा नं 118, कीम्या-ए-सआ़दत, सफा नं 265,]

 

👉🏻 अगर किसी शख्स की दो बीवीयां या उससे ज़्यादा हो तो, सब के साथ बराबरी का सुलूक रखे! खाने, पीने, औढने, कपडे वगै़रह सब में इन्साफ़ से काम ले, हर बीवी के घर बराबर बराबर वक्त़ गुज़ारे और उसके लिए उनकी बारी मुक़र्रर कर ले।

 

📚 हदीस : हज़रत अबू ह़ुरैरा [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] से रिवायत है कि रसूले अकरम ने इर्शाद फरमाया.........

💫          "जब किसी के निकाह में दो बीवीयां हो और वह एक ही की तरफ माइल (चाहना) हो तो वह क़ियामत के दिन जब आऐगा तो उस का आधा धड़ गिरा हुआ होंगा"।

📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1,  हदीस नं 1137, सफा नं 584, इब्ने माज़ा,  जिल्द नं 1, सफा नं 549,]

 

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      🔵 [बीवी के गुलाम]             

 

👉🏻        आजकल अक्सर देखा जा रहा है की मर्द अपनी बीवी की इताअत (कहने पर चलना) करता है! और कुछ मर्द तो इसे अपनी शान समझते है! इसका तज्कीरा बडे पुरजोश अंदाज मे अपने यार दोस्तो को करते है! और कुछ तो अपनी बीवी से इस तरह खौफजदा रहते है के भरे मज्मे मे डॉंट चुप चाप सुनने मे ही अपनी खैरीयत समझते है!

 

 💎 रब तबारक तआला इर्शाद फर्माता है..........

  اَلرِّجَالُ قَوّٰمُوۡنَ عَلَی النِّسَآءِ بِمَا فَضَّلَ اللّٰہُ بَعۡضَہُمۡ عَلٰی بَعۡضٍ وَّ بِمَاۤ اَنۡفَقُوۡا مِنۡ اَمۡوَالِہِمۡ ؕ

 

💎तर्जुमा : मर्द अफ़सर है औरतों पर, इसलिये के अल्लाह ने इन मे एक को दुसरे पर फजीलत दी, और इसलिये के मर्दो ने इन पर अपने माल खर्च किये!

📕 [तर्जुमा कुरआन, कन्जुल ईमान सूर ए निसी, आयत नं 34,]

 

📚 हदीस : रसूलुल्लाह ने इर्शाद फर्माया.........

تعس عبدالزوجة

 

💫 "बीवी का ग़ुलाम बद बख़्त है

📕 [कीमीया ए सआ़दत, सफा नं 263,]

 

💫        इमाम ग़ज़ाली रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है...........

 💫 "बुजुर्गों ने फर्माया है औरतों से मशवरा करो लेकिन अ़मल उस के ख़िलाफ़ करो" (यानी ज़रूरी नही की औरत के हर मशवरे पर अ़मल किया जाए)

📕 [कीमीया ए सआ़दत, सफा नं 263,]

 

💫    और इमाम गजाली   "इहया उल उलुम" मे हजरत हसन बसरी रदी अल्लाहु तआला अन्हु  का कौल नक्ल फर्माते है......

 

💫      "जो शख्स अपनी बीवी का फर्माबरदार बना रहे, की वह जो चाहे करे तो अल्हाह तआला उसे दोजख मे औंधा गिरा देंगा"!

 

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      🔵 [बीवी के गुलाम]             

 

👉🏻 सद अफ़सोस! आज कल लोग औरत के बहकावे मे आकर ख़िलाफ़े शरीअ़त काम तक कर लेते है! कुछ तो औरत के इस क़द्र ग़ुलाम बन जाते है कि बीवी के कहने पर अपने माँ बाप को छोड़ देते है! अगर घर में किसी मुआमले मे झगड़ा हो जाए तो बीवी को समझाने के बजाए उल्टा अपने ही माँ बाप को झिड़कते है। और अपनी आख़िरत की बर्बादी का सामान अपने हाथों से जुटाते है! याद रखिए बीवी भले ही नाराज़ हो जाए लेकिन माँ बाप नाराज़ न होने पाए।

 

📚 हदीस : हज़रत अबू उमामा रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि हुजुर ने इर्शाद फर्माया.........

💫 "माँ बाप तेरी जन्नत भी है और दोज़ख भी"

📕 [इब्ने माज़ा शरीफ, जिल्द नं 2, बाब नं 621, हदीस नं 1456, सफा नं 395,]

 

👉🏻 इस हदीस का महफुम यह है कि तू अपने माँ बाप की फ़र्मांबरदारी करेगा तो जन्नत मे जाएगा और अगर नाफ़र्मानी करेगा तो दोज़ख मे जाकर सज़ा पाएगा।

 

📚 हदीस : और मजीद फर्माते है आक़ा .....

💫 "खुदा शिर्क और कुफ़्र के अलावा जिस गुनाह को चाहेगा बख़्श देगा मगर माँ बाप की नाफ़र्मानी को नही बख़्शेगा! बल्कि मौत से पहले दुनिया में भी सज़ा देगा।

📕 [बैहक़ी शरीफ,]

👉🏻 लिहाजा माँ बाप की फ़र्मांबरदारी को ही हमेशा अहमियत दे । औरत का भी फ़र्ज़ है कि वह अपने सास ससुर को अपने माँ बाप की ही तरह समझे! और उन से नेक सुलूक करे! साथ ही मर्द पर भी जिम्मेदारी है कि वह अपनी बीवी से अपने माँ बाप की इताअ़त करवाए।

📚 हदीस : हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि हुजुर ने इर्शाद फरमाया......

💫                 जब कोई फर्माबरदार लड़का अपने माँ बाप की तरफ मुहब्बत की नज़र से देखता है,तो अल्लाह तआला उस के लिए हर नज़र के बदले एक हज़्जे मक़बूल का सवाब लिखता है"। सहाब-ए-किराम, ने अर्ज किया----"या  रसूलुल्लाह ! अगर कोई रोजाना सौ (100) देखे तो क्या उसे रोज़ाना सौ हज़ का सवाब मिलेगा"? नबी करीम ने फर्माया.... हाँ! बेशक अल्लाह तआला बुजुर्ग व बरतर है उस को यह बात कुछ मुश्किल नही"।

 

📚 [बैहक़ी शरीफ,]

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➡➡➡ अपनी बात ⬅⬅⬅

 

सूर ए निसा, आयत नं 34 मे रब तबारक तआला ने इर्शाद फर्माया है.........._

 

  اَلرِّجَالُ قَوّٰمُوۡنَ عَلَی النِّسَآءِ بِمَا فَضَّلَ اللّٰہُ بَعۡضَہُمۡ عَلٰی بَعۡضٍ وَّ بِمَاۤ اَنۡفَقُوۡا مِنۡ اَمۡوَالِہِمۡ ؕ

 

💎तर्जुमा : मर्द अफ़सर है औरतों पर, इसलिये के अल्लाह ने इन मे एक को दुसरे पर फजीलत दी, और इसलिये के मर्दो ने इन पर अपने माल खर्च किये!

 

➡  अब जरा हमारे नौजवान और वालेदैन भी अल्लाह तआला के इस इर्शाद पर भी जरुर जरुर गौर और फिक्र करे........

 "और इसलिये के मर्दो ने इन पर अपने माल खर्च किये!" यहॉ पर अल्लाह तआला वाजेह तौर पर उस मर्द के बारे मे बता रहा है जो के अपने माल औरत पर खर्च करता है यह भी मर्द को औरत पर अफसर होने की अलामत बताई गयी है!

 

 👉🏻         अब इस बात पर नौजवान ध्यान दे जो कमाऊ पुत होता है, चाहे थोडा ही क्यु न कमाता हो, जिससे गुजर बसर आसान हो जाता है! उसके वालेदैन भी उसपर फक्र करते है, के नही मेरा बेटा कुछ न कुछ तो जरुर कमाता है!

 

👉🏻 और यही कमाऊ पुत अगर किसी औरत का शौहर हो तो यकीन जानीये वह औरत भी अगर उसे बेशक तंगी का सामना ही क्यु न करना पड रहा हो उस मर्द की जरुर इज्जत एहतराम करेंगी, और कद्र करेंगी के नही मेरा शौहर मेरे लिये कितनी मुसीबत से कमा रहा है! और वह थोडे मे ही इंशा अल्लाह तआला गुजारा कर लेंगी

 

👉🏻       अब अगर किसी को बगैर मेहनत, मुफ्त का खाने की ही आदत हो तो क्या उसे उसके वालदैन बर्दाश्त करेंगे या उसकी बीवी बर्दाश्त करेंगी  यकीनन नही! और इसी वजह से उसका अफसर होना भी खतरे मे ही पड जाएंगा के नही

 

👉🏻             अब जरा इस बात पर भी गौर करे जो नौजवान चाहता है के मेरी बीवी नौकरी करने वाली हो और मै कुछ न करते हुए बैठ कर खाऊ? क्या वह अफसर रह पाएंगा

 

👉🏻               अब जरा वह वालेदैन भी इस बात पर गौर करे... क्या कमाऊ बहु क्या आपके बेटे को आपसे जुदा करने की कभी नही सोचेंगी

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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🔵 [बी.एफ. (Blue Film) नंगी फिल्में]  🔵 

         

👉  हमारा और आपका मुशाहेदा है कि आज कल लोग सेक्स (Sex) की मालूमात के लिए ब्ल्यू फ़िल्में (B.F) देखते है। मख्सुस नौजवान लडके, और कुछ  बेवकूफ़ शबे जुफाफ (सुहाग रात) के रोज अपनी बीवी   को ख़ास तौर पर ब्ल्यू फ़िल्म दिखाते है! ताकि औरत को जिस तरह  फ़िल्म मे दिखाया गया है उसी तरह वह उन से पेश आए! और यह खुद भी हर वह काम और तरीक़ाअपनाने की कोशिश करते है जो फ़िल्म में होता है! चाहे उसमें कितनी ही तकलीफ़ और परेशानी क्यों न हो। आप को मालूम होना चाहिये किसी भी मुश्किल से मुश्किल काम को फ़िल्माया जाना अलग बात है और उसको हक़ीक़त मे कर लेना अलग बात है । ब्ल्यू फ़िल्में तो सरासर आँखों की अय्याशी और धोखे के सिवा कुछ नही। आज तकरीबन हर मुसलमान यह जानता है कि यह इस्लाम में सब हराम व गुनाह है, लेकिन परवाह किसे है!

 

👉🏻  फ़िल्मों मे देख कर उसकी बातों को सीख कर अमल करना ऐसा ही है जैसे किसी फ़िल्म में हीरो को मोटर साइकील इस तरह चलाते हुए दिखाया जाए कि हीरो सड़कों से होते हुए मोटर सायकिल को उछाल उछाल कर लोगों की बिल्डींग और मकानों की छत पर चला रहा है, कभी इस बिल्डींग पर तो कभी उस बिल्डींग पर। इसी मंजर को किसी बेवकूफ़ ने देखा और इसी तरह करने के लिए उसने अपनी मोटर सायकील अपने घर की छत पर खड़ी करके शुरू की और क्लच दबा कर गियर बदला एक्सिलेटर क्लच के साथ छोड़ दिया, ऐसे बेवकूफ़ शख़्स का जो हाल होगा वही हाल उस शख़्स का होता है जो ब्ल्यू फ़िल्में (Blue Film) देखता है और उस पर अमल करता है! ऐसा शख़्स ग़ैरत और मर्दानगी की ऊँची छत से, बेहयाई और नामर्दी के ऐसे गढ़े में गिरता है के जिससे निकलना जिंदगी भर मुश्किल होता है।

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   🔵 [बद निगाही और बेपर्दगी]  

 

👉  आजकल के नौजवानों मे तरह-तरह की बुराइयॉ जन्म ले चुकी है! जिसकी सबसे बड़ी वजह दीन की तालीम से दूरी है! इसके अलावा फिल्में देखने का फैशन, गंदे नावेल, गंदी तस्वीरो से पुर मेगजीन पढने का आम चलन मख्सुस औरतों और कुंवारी लड़कियों का बेपर्दा फैशन (सज धज) कर सड़कों पर खुले आम घूमना जैसी बुराइयां है

 

👉🏻     आज के मार्डन नौज़वान ग़ैर औरतों को देखने, छुने और  छेड़ छाड़ करने जैसे गुनाह को गुनाह ही नही समझते बल्की उसे फैशन और मॉर्डन कल्चर (Modern Culture) का नाम देकर मामुली बात समझते है!  कुछ बेवकुफ तो लडकीयो को ऐसा घुरते है, गोया वह ऑंखो के जरीये अपना माद्दा ए मन्वीया लडकी के पेट मे ही डाल देंगे! मौजुदा  दौर की कुछ फैशन परस्त लडकियॉ भी किसी तरह लडको से कम नहीं! वह लडको को ऐसा घुरती है गोया वह ऑंखो ही ऑंखो ही से हामीला होना चाहती है! कुछ नौज़वान तो पेशावर औरतों (Call Girl) के पास जाने मे भी शर्म व हया तक महसूस नही करते, बल्कि उसे मर्दानगी का सुबूत व सनद  (Certificate) समझते है, और जो शख़्स यह सब नही करता वह इन अय्याशों की नज़रों मे बेवकूफ़, बुजदिल, नामर्द और न जाने क्या क्या समझा जाता है।

 

💎       देखो हमारा रब तबारक तआला इर्शाद फर्माता है

 

قُلۡ لِّلۡمُؤۡمِنِیۡنَ یَغُضُّوۡا مِنۡ  اَبۡصَارِہِمۡ وَ یَحۡفَظُوۡا فُرُوۡجَہُمۡ ؕ ذٰلِکَ اَزۡکٰی لَہُمۡ ؕ اِنَّ اللّٰہَ خَبِیۡرٌۢ  بِمَا یَصۡنَعُوۡنَ ﴿۳۰

 

💎 तर्जुमा: मुसलमान मर्दो को हुक्म दो, अपनी निगाहे कुछ निची रखे! और अपनी शर्मगाहो की हिफाजत करे! यह इनके लिये बहुत सुथरा है! बेशक अल्लाह को इन के कामो की खबर है!

📕 [तर्जुमा कुरआन  कन्जुल ईमान सूर ए नूर (24), आयत नं 30]

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     🔵 [बद निगाही और बेपर्दगी]  

 

💎      देखो हमारा रब तबारक तआला इर्शाद फर्माता है

 

قُلۡ لِّلۡمُؤۡمِنِیۡنَ یَغُضُّوۡا مِنۡ  اَبۡصَارِہِمۡ وَ یَحۡفَظُوۡا فُرُوۡجَہُمۡ ؕ ذٰلِکَ اَزۡکٰی لَہُمۡ ؕ اِنَّ اللّٰہَ خَبِیۡرٌۢ  بِمَا یَصۡنَعُوۡنَ ﴿۳۰

 

💎 तर्जुमा: मुसलमान मर्दो को हुक्म दो, अपनी निगाहे कुछ निची रखे! और अपनी शर्मगाहो की हिफाजत करे! यह इनके लिये बहुत सुथरा है! बेशक अल्लाह को इन के कामो की खबर है!

 

وَ قُلۡ  لِّلۡمُؤۡمِنٰتِ یَغۡضُضۡنَ مِنۡ اَبۡصَارِہِنَّ وَ یَحۡفَظۡنَ فُرُوۡجَہُنَّ وَ لَا یُبۡدِیۡنَ  زِیۡنَتَہُنَّ  اِلَّا مَا ظَہَرَ  مِنۡہَا وَ لۡیَضۡرِبۡنَ بِخُمُرِہِنَّ عَلٰی جُیُوۡبِہِنَّ ۪ وَ لَا یُبۡدِیۡنَ زِیۡنَتَہُنَّ  اِلَّا  لِبُعُوۡلَتِہِنَّ  اَوۡ اٰبَآئِہِنَّ اَوۡ اٰبَآءِ بُعُوۡلَتِہِنَّ اَوۡ اَبۡنَآئِہِنَّ  اَوۡ اَبۡنَآءِ بُعُوۡلَتِہِنَّ اَوۡ اِخۡوَانِہِنَّ اَوۡ بَنِیۡۤ  اِخۡوَانِہِنَّ اَوۡ بَنِیۡۤ اَخَوٰتِہِنَّ اَوۡ نِسَآئِہِنَّ اَوۡ مَا مَلَکَتۡ اَیۡمَانُہُنَّ اَوِ التّٰبِعِیۡنَ غَیۡرِ اُولِی الۡاِرۡبَۃِ مِنَ الرِّجَالِ اَوِ الطِّفۡلِ الَّذِیۡنَ لَمۡ  یَظۡہَرُوۡا عَلٰی عَوۡرٰتِ النِّسَآءِ ۪ وَ لَا یَضۡرِبۡنَ بِاَرۡجُلِہِنَّ لِیُعۡلَمَ  مَا یُخۡفِیۡنَ مِنۡ زِیۡنَتِہِنَّ ؕ وَ تُوۡبُوۡۤا اِلَی اللّٰہِ جَمِیۡعًا اَیُّہَ الۡمُؤۡمِنُوۡنَ لَعَلَّکُمۡ تُفۡلِحُوۡنَ  ﴿۳۱

 

💎           तर्जुमा :  और मुसलमान औरतों को हुक़्म दो अपनी निगाहें कुछ नीची रखे! और अपनी पारसाई की हिफ़ाज़त करे, और अपना बनाओ न दिखाएमगर जितना खुद ही ज़ाहिर है!और वह दुपट्टे अपने गिरेबानों पर डाले रहेंऔर अपना सिंगार जाहिर न करे मगर अपने शौहरों पर, या अपने बाप, या शौहरो के बाप, या अपने बेटो, या अपने शौहरो के बेटे, या अपने भाई, या अपने भतीजे, या अपने भांजे, या अपने दीन की औरतेया अपनी कनीजे जो अपने हातो की मिल्क हो, या नौकर बशर्ते के शहवत वाले मर्द न हो, या वह बच्चे जिन्हे औरतो के शर्म की चिजो की खबर नही!और जमीन पर पॉंव जोर से न रखे की जाना जाए इनका छिपा हुआ सिंगार! और अल्लाह की तरफ तौबा करो ऐ मुसलमानो सब के सब इस उम्मीद पर के तुम फलह पाओ!

 

📕 [तर्जुमा : कुरआन कन्जुल ईमान, पारा नं 18, सूर ए नूर  (24), आयत नं 30 और 31]

 

👉🏻         उपर की इन दोनो आयते करीमा मे अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने साफ़ साफ़ हुक़्म दिया है कि मर्द अपनी निगाहें नीची रखे, यानी बद निगाही से बचे, और अपनी शर्मगाहो की हिफाजत करे यानी जिना की तरफ न जाए!

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     🔵 [बद निगाही और बेपर्दगी]  

 

👉🏻       इसी तरह अल्लाह तआला औरतो को भी हुक्म फर्माता है की वह अपनी निगाहे नीची रखे, इसी तरह अपने बनाव सिंगार की भी  इजाजत फर्माई है के अपना बनाव सिंगार कहॉ और किसके सामने करे! और खुसुसी तौर पर देखा जाए तो अल्लाह ने शौहर को दर्जा अता किया है, तो यकीनन औरत का बनाव व सिंगार अपने शौहर के लिये ही होना चाहीये न की गैर मर्दो के लिये! और सिने व सर पर दुपट्टे डाले रहे!

🔥    लेकिन आज कल मुआमला उल्टा ही नज़र आ रहा है! अक्सर औरतें घर में तो सादी (Simple) रहती है, लेकिन जब बाहर निकलना होता है तो खुब बन संवर कर निकलती है! गोया के  सिंगार व सफाई बाहर वालो को दिखाने के लिये है, लेकीन अपने शौहर के लिए नही!

 

हादसे पाक में मुहम्मद मुस्तफा  ने औरतों को घर में पाक व साफ़ और सिंगार करके रहने का हुक़्म दिया ताकि उनके शौहर इन्ही मे दिलचस्पी रखे! और गैर औरतो की तरफ न जाए!_*  

 

💫              इमाम अहमद रजा खॉ, आला हजरत रहेमतुल्लाही अलैही अपनी तस्नीफ "इरफाने शरीयत" मे नक्ल फर्माते है....

💫          "औरत का अपने शौहर के लिये गहने पहनना, बनाव सिंगार करना बाईस ए अज्रे अजीम है! और उनके हक मे नमाजे नफ्ल से अफ्जल है!  कुछ नेक औरते जिनके शौहर औलिया ए किराम से थे और वह खुद वलीयॉ थी हर शब नमाजे इशा पुरा सिंगार करके अपने शौहर के पास आती अगर उन्हे अपनी तरफ हाजत पाती वही हाजीर रहती वर्ना नमाज मे मश्गुल हो जाती   

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     ➡➡➡ अपनी बात ⬅⬅⬅

 

👉🏻 सूर ए नुर की आयत नं 30 मे अल्लाह तआला ने मर्दो के लिये और आयत नं  31मे औरतो के लिये वाजेह तौर पर हुक्म फरमा दिया है!

 

➡  अब इन दोनो आयात पर गौर करे तो आप पाएंगे की बनाव व सिंगार करने की इजाजत वह भी  (Conditional)   सिर्फ और सिर्फ औरतो को ही फरहाम की है! मर्दो को नही!

 

🔥    अब जरा इस बात पर भी गौर करे आजकल के नौजवान और वह मर्द हजरात जो कॉलेजो मे बाजारो मे और खुसुसी तौर पर जहॉ लडकियो की आवाजाही होती है! अलग अलग ढंग के और उट- पटांग, अजीबो गरीब तरह के हेअर स्टाईल, अलग अलग रंगो से सर के बालो को रंगना, गले मे चैन, हाथ मे ब्रेसलेट, कान मे बाली, गले मे रुमाल लटकाना, फैशन के नाम पर खिलाफ ए शरह कपडे इस्तेमाल करना, मोटार बाईक को रेस करके अपनी तरफ मुतवज्जेह करना वगैरह वगैरह क्या यह मर्द का बनाव (सिंगार ) नहीं

 

💫 और रही बात मर्दो के लिये (बनाव) की तो अल्लाह रब्बुल इज्जत ने इसके लिये क्या खुब हुक्म फर्माया है मर्दो के लिये..

 

یٰبَنِیۡۤ  اٰدَمَ خُذُوۡا زِیۡنَتَکُمۡ عِنۡدَ کُلِّ مَسۡجِدٍ  وَّ کُلُوۡا وَ اشۡرَبُوۡا وَ لَا  تُسۡرِفُوۡا ۚ اِنَّہٗ لَا  یُحِبُّ الۡمُسۡرِفِیۡنَ ﴿٪۳۱﴾             

 

اے آدم کی اولاد! اپنی زینت لو جب مسجد میں جاؤ اور کھاؤ اور پیو  اور حد سے نہ بڑھو ، بیشک حد سے بڑھنے والے اسے پسند نہیں ،

 

💎   तर्जुमा : ऐ आदम की औलाद जिनत (सजावट) लो जब मस्जीद मे जाओ! खाओ और पियो, और हद से न बढो, बेशक हद से बढने वाले इसे पसंद नही!

 

👉🏻     जिनत (सजावट) से मुराद यानी सजधज और सिंगार का लिबास (मसलन शरह के मुताबीक उम्दा व पाक  साफ लिबास पहनना, खुश्बु लगाना, कंघी करना, सुरमा लगाना, वगैरह!) और सुन्नत यह है के आदमी अच्छी सुरत के साथ नमाज के लिये हाजीर हो!

 

👉🏻 खाने पिने से मुराद वह तमाम चिजे हलाल है, सिवाय उनके जिसपर शरीयत ने पाबंदी लगाई हो, और उसकी हुरमत दलीले मुस्तकील से साबीत हो!

 

👉🏻    हद से बढने से मुराद हराम की पर्वाह न करना! जो चिज अल्लाह तआला ने  हराम न की उसे हलाल करलो! या जो हलाल चिजे है उसे हराम करलो! और फिजुल खर्ची करना, रियाकारी (घमंड) करना!

📕 [तर्जुमा : कुरआन कंजुल इमान सुर ए अल आराफ नं 7, आयत नं 31]

 

👉🏻        वालेदैन भी इस तरफ तवज्जो दे, और गौर फिक्र करे....... और अपनी औलाद को बचपन से ही सही तर्बीयत दे

 

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    🔵 [बद निगाही और बेपर्दगी]  

 

💫            औरत का जेवर होने के बावजुद बगैर जेवर रहना मकरुह है की मर्दो से मुशाबहत है! हदीस मे है रसुलुल्लाह ने मौला अली कर्रमल्लाहु वज्हु से फर्माया "एे अली अपनी घर की औरतो को हुक्म दो की बगैर  गहने नमाज न पढें!"

 

💫          उम्मुल मोमीनीन हजरत आइशा सिद्दीका रदि अल्लाहु तआला अन्हा औरत का बेजेवर नमाज पढना मकरूह जानती और फर्माती है की... " कुछ न पाए तो एक डोरा ही गले मे बांध ले!"

📕 [इर्फाने शरीयत  जिल्द 1, मस्अला नं 75, सफ 19-20]

 

👉🏻    इस्लाम ने  औरतो को सजने संवरने से कभी मना नहीं किया है, बल्की सजने, संवरने, सिंगार करने का हुक्म दिया है! यहॉ तक की कुवांरी लडकियो को जेवर व लिबास से सजाए रखना की उनके रिश्ते आए यह सुन्नत है

 

👉🏻            गर्ज की इस्लाम औरतो के फैशन या सिंगार के खिलाफ नही, बल्की वह बेपर्दगी व बेहुदगी के खिलाफ है! ऐ  मेरी प्यारी इस्लामी बहनो! याद रखो इस्लाम तुम्हे फैशन करने , सजने संवरने से नही रोकता बल्की वह सिर्फ और सिर्फ यह चाहता है की अगर तुम शादी-शुदा हो तो अपने शौहर के लिये सिंगार करो की उन्ही का तुम पर हक है! इस्लाम तुम्हारी इज्जत व आब्रु की हिफाजत और फलाह के लिये तुम से यह मुतालबा करता है की सडको, बाजारो, बागो, मेले, और सिनेमा घरो मे इठलाती बल खाती फिर कर अपने हुस्न को नुमाईश का जरीया न बनाओ!

     

📚      हदीस : सुनो रसूले करीम क्या  इर्शाद फर्माते है

"और, औरत है यानी छुपाने की चीज़ है, जब वह बाहर निकलती है, तो उसे शैतान झाँक कर देखता है

📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द 1, बाब नं 796, हदीस नं 1173, सफा नं 600,]

 

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    🔵 [बद निगाही और बेपर्दगी]  

 

👉🏻बद निगाही मे मर्द और औरत दोनो कुसूरवार है और गुनाह मे बराबर के हकदार है! मर्द इस तरह कि वह उनसे बद निगाही करते है, उन्हें छेड़ते है! और औरतें इस तरह कि वह बेपर्दा सड़को पर खुले आम निकलती है ताकि मर्द उसे देखे ।

 

📚 हदीस : हुजुर फर्माते है..........

💫"जिस गै़र औरत को जान बूझ कर देखा जाए, और जो औरतें अपने को जान बूझ कर गै़र मर्दों को दिखाए, उस मर्द और औरत पर अल्लाह की लानत"।

📕 [मिश्क़ात शरीफ, जिल्द नं  2, हदीस नं 2991, सफा नं 77,]

 

📚हदीस : हज़रत मैमूना बिन्ते साअ़द  [रदि अल्लाहु तआला अन्हा]  रिवायत करती है कि हुज़ूरे अकरम ने इर्शाद फर्माया.....

✨  "अपने शौहर के सिवा दूसरों के लिए ज़ीनत के साथ दामन घसिटते हुए (इतराकर) चलने वाली औरत क़ियामत के अँधेरो की तरह है जिसमें कोई रौशनी नहीं"।

📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, बाब नं 791, हदीस नं 116, सफा नं 597,]

 

📚    हदीस : रसूलुल्लाह ने इर्शाद फर्माया.....

 

💫 (जब मर्द गै़र औरत को देखता है और औरत गै़र मर्द को देखती है) दोनों की आँखें जिना करती है।

📕 [कशफ़ुल महजूब, सफा नं 568,]

 

📚 हदीस : फर्माया हमारे आक़ा मदनी ने........

💫   "मर्द का गै़र औरतों को, और औरतो का गै़र मर्दों को देखना आँखों का ज़िना है, पैरों से उस की तरफ चलना पैरों का ज़िना है, कानो से उस की बात सुनना कानो  कानो  का ज़िना है, ज़बान से उस के साथ बात करना ज़बान का ज़िना है, दिल में ना जाइज़ मिलाप की तमन्ना करना दिल का ज़िना है, हाथों से उसे छूना हाथों का ज़िना है"।

📕 [अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 2 बाब नं 121, हदीस नं 385, सफा नं 147,]

 

📚 हदीस : फर्माते है हमारे मदनी आक़ा

💫     "जब गै़र मर्द और गै़र औरत तन्हाई में किसी जगह एक साथ होते है तो उनमे तीसरा शैतान होता है।

📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1,  बाब नं 794, हदीस नं 1171, सफा नं 599,]

 

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    🔵 [बद निगाही और बेपर्दगी]  

 

📚 हदीस : हजरत उक्बा बिन आमीर रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है.. सैय्यदे आलम  ने इर्शाद फर्माया......

💫"तन्हा गै़र औरत के पास जाने से परहेज़ करो!" एक सहाबी ने अर्ज किया..... "या रसूलुल्लाह! देवर के बारे में क्या इर्शाद है"? फर्माया.... "देवर तो मौत है"!

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 141, हदीस नं 216, सफा नं 108, तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, बाब नं 794, हदीस नं 1171, सफा नं 599, मिश्क़ात शरीफ, जिल्द नं 2, हदीस नं 2968, सफा नं 73,]

 

👉🏻अब आप खुद ही अंदाज़ा लगाईये जब देवर के सामने भी भाभी को आने से मना किया गया यहाँ तक कि उसे मौत की मिस्ल बताया गया तो फिर बताईये दोस्तो की बिवीयों को मुंह बोली भाभी बनाकर उनसे हंसी मजाक करना, शादि ब्याह में, और दीगर मुक़ामात पर गै़र मर्दों का औरतों के सामने आना और औरतों का गै़र महरम मर्दों के सामने बे हिजाब आना, बातचीत करना और यही नहीं बल्की उन्हे छुना, उन से हंसी मजाक करना किस क़द्र ख़तरनाक है!

               

👉🏻लिहाजा मर्दो पर जरूरी है कि वह अपनी औरतो को और  इसी तरह से मॉ-बाप अपनी जवान कुंवारी लड़कियों को पर्दा करवाए! और अपने दोस्तो के सामने भी बेहिजाब आने से मना करे! और बिला जरूरत बाजारों, तफ्रीगाहो (Picnic Spot) और सिनेमा हॉलो मे जाने से रोके।

 

📚 हदीस : हज़रते उम्मे सलमा [रदि अल्लाहु तआला अन्हा] फर्माती है....

✨  "एक दिन एक नाबीना सहाबी हुजुर से मिलने आए मै और हुजुर की दूसरी बीवीयां वही बैठी थी! हुजुर   फर्माया...."पर्दा करो"....फर्माती है हम ने अर्ज किया........."या रसूलुल्लाह! यह तो देख नही सकते?" फर्माया....... "तुम तो नाबीना नही हो तुम तो देख सकती हो"।

📕 [अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 258, हदीस नं 711, सफा नं 246, तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 2, सफा नं 279,]

 

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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    🔵 [बद निगाही और बेपर्दगी]  

 

👉🏻      अब जरा अंदाजा लगाइए जब नाबीना से भी हुजुर ने अपनी अज्वाजे मुतह्हरात जिनके बारे मे कुरआने करीम का ऐलान है की नबी की बीवीयॉं तमाम मुसलमानो की मॉंए है, उन से भी पर्दा करवाया तो क्या आज की औरतो को पर्दा करना जरुरी न होंगा यकीनन जरूरी होंगा! और अगर औरते उसके लिये तैयार नहीं तो जहन्नम के शदीद नाकाबील बर्दाश्त अजाब के लिये तैयार रहे!

 

✍🏻       इमाम ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] ने क्या खूब फर्माया है....... 

👉"मर्द अपनी औरतों को घर की छत और दरवाज़े पर जाने न दे ताकि वह गै़र मर्दों को और गै़र मर्द उसे न देखे, क्यो की बुराइयो की इब्तीदा घर की खिड़की व  दरवाजे़ से शुरु होती है, औरतो को खिडकी, दरवाजे से मर्दों का तमाशा देखने की इज़ाज़त न दे कि तमाम आफ़ते आँख से पैदा होती है घर में बैठे बैठे नही पैदा होती!" 

📕 [कीमीया-ए-सआ़दत, सफा नं 263,]

 

📚 हदीस : हज़रत जरीर बिन अब्दुल्लाह रदि अल्लाहु तआला अन्हु का बयान है............

💫 "मैंने रसूलुल्लाह से अचानक नज़र पड़ जाने के मुतअल्लिक़ पूछा तो फ़र्माया कि......"अपनी नजर फेर लिया करो"।

📕 [मिश्क़ात शरीफ, जिल्द नं 2, हदीस नं 2970, सफा नं 73,]

 

📚 हदीस : हमारे प्यारे आका हुजुर  ने इर्शाद फर्माया........

💎   "जब मर्द के सामने कोई अजनबी औरत आती है तो शैतान की सूरत में आती है! जब तुम मे से कोई किसी अजनबी औरत को देखे और वह उसे अच्छी मालूम हो तो चाहिये कि अपनी बीवी से सोहबत कर ले (ताकि गुनाह से बच जाए) तुम्हारी बीवी के पास भी वही चीज़ मौजूद है जो उस अजनबी औरत के पास मौजूद है! (अगर कोई कुंवारा हो तो तो वह रोज़ा रख ले की रोज़ा गुनाह को रोकने वाला और शहवत को मिटाने वाला है!)

📕 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, सफा नं 594, मिश्क़ात शरीफ,  जिल्द नं 2, सफा नं 73,]

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     🌐 बद निगाही और बेपर्दगी 🌐

✍🏻 मस्अला : कुछ औरतें अपने मर्दों के सामने मनीहार (चूड़ी बेचने वालों) के हाथ से चूड़ीयां पहनती है, यह हराम है। हाथ दिखाना गै़र मर्द को हराम है। उस के हाथ में हाथ देना हराम है। जो मर्द अपनी औरतों के साथ इसे जाइज़ रखते है दैयूस (यानी बेग़ैरत, बेशर्म) है।

📕 [फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं  9, सफा नं 208]

 

✍🏻 मस्अला : औरत अगर किसी ना महरम के सामने इस तरह आए की उसके बाल, गला, गर्दन या पीठ, पेट या कलाई का कोई हिस्सा जाहीर हो, या लिबास ऐसा बारीक हो के इन चीजों मे से कोई उसमे से चमके (बाहर दिखाई दे) तो यह बिल-इज्मा हराम है!और ऐसी वजह व लिबास की आदी औरते फासीकात है!और उनके शौहर अगर उस पर राजी हो, और ताकत होने के बावजुद औरत को उससे मना न करे तो दय्युस (बेगैरत बेशर्म) है! और ऐसो को इमाम बनाना गुनाह है! अगर तमाम बदन सर से पॉंव तक मोटे कपडे मे खुब छिपा हुआ हो, सिर्फ मुंह की टिकली खुली हुई है, जिसमे कुछ हिस्सा कान का या ठोढी के निचे का या पेशानी का जाहीर नहीं तो अब फत्वा उससे भी मुमानेअत पर है! और औरत का ऐसा रहना शौहर की रजा से हो तो उसके पिछे भी नमाज पढने से परहेज जरूरी है की फित्ना को खत्म करना शरीअत के वाजीबात मे से अहम वाजीब है!

📕 [इरफाने शरीअत, जिल्द नं  2, सफा नं 4]

 

👉🏻आजकल मर्द हजरात खुद अपनी बीवी को बाजारो, बागो, सिनेमा हॉल और दिगर मकामात पर ले जाते है! और पर्दे का एहतमाम नही करते और औरतो को  गैर मर्दो के सामने नुमाइश का जरीया बनाते है! इस बात पर भी तवज्जो और गौर फिक्र करने की जरूरत है!

 

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        🔵 ज़िना का बयान                  

 

💎अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इर्शाद फर्माता है

وَ لَا تَقۡرَبُوا الزِّنٰۤی اِنَّہٗ کَانَ فَاحِشَۃً ؕ وَ سَآءَ  سَبِیۡلًا ﴿۳۲

💎तर्जुमा: "और बदकारी के पास न जाओ, बेशक वह बेहयाई है, और बहुत ही बुरी राह!"

📕 [तर्जुमा कुरआन कन्जुल ईमान सूर ए बनी इसराईल आयत नं 32]

 

💎अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इर्शाद फर्माता है

 وَ الَّذِیۡنَ ہُمۡ  لِفُرُوۡجِہِمۡ حٰفِظُوۡنَ ﴿ۙ۲۹﴾ اِلَّا عَلٰۤی  اَزۡوَاجِہِمۡ  اَوۡ مَا مَلَکَتۡ اَیۡمَانُہُمۡ  فَاِنَّہُمۡ  غَیۡرُ  مَلُوۡمِیۡنَ ﴿ۚ۳۰﴾ فَمَنِ  ابۡتَغٰی وَرَآءَ ذٰلِکَ فَاُولٰٓئِکَ ہُمُ الۡعٰدُوۡنَ ﴿ۚ۳۱

💎तर्जुमा : "और वह जो अपनी शर्मगाहो की हिफ़ाज़त करते है!" (29) "मगर अपनी बीवीयों या अपने हाथ के माल कनीजो से के इन पर कुछ मलामत नही!" (30) "तो जो इन दो के सिवा और चाहे वही हद से बढने वाले है!"(31)

📕 [तर्जुमा कुरआन कन्जुल ईमान सूर ए मआरीज आयत नं  29, 30 और 31]

 

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        🔥 जिना किसे कहते है🔥

 

👉🏻कोई भी मर्द (Male)किसी भी ऐसी औरत से सोहबत (संभोग) करे जिसका वह मालिक नही, (यानी उस से निकाह नही हुआ हो) या  कोई भी औरत (Female)किसी ऐसे मर्द से मुबाशरत   करे जीस की वह जौजीयत मे ना हो (यानी उस से निकाह नही हुआ हो) उसे ज़िना कहते है। जिना करने वाले मर्द को जिनाकार कहते है! और जिना करने वाली औरत को जानीयॉ कहते है! चाहे मर्द और औरत दोनो राज़ी हो! चाहे इस मे (नाजाइज जिस्मानी रिश्ता बनाने मे) पहल कोई मर्द करे या औरत! इसी तरह पेशा करने वाली बाज़ारी औरतों (Call Girl) और तवाएफ़ो के साथ भी मुबाशरत (सोहबत) करने को भी ज़िना ही कहा जाएगा।

 

👉🏻उपर दी हुई सुर ए बनी इसराईल की आयत मे अल्लाह रब्बुल इज्जत ने वाजेह तौर पर इर्शाद फर्मा दिया है के...... "बदकारी के पास न जाओ बेशक वह बेहयाई है! और बहुत ही बुरी राह!"

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        🔵 ज़िना का बयान                  

 

👉🏻यक़ीनन ज़िना गुनाहे अजीम (बडा) और  बहुत बड़ी बला है! यह इन्सान की दुनिया और आखिरत को तबाह व बर्बाद कर देता है! 

 

👉🏻वह नौजवान  जो काफीरों  (नास्तीको) की लड़कियों से नाज़ाइज़ ताल्लुक़ात रखते है! (और यह समझते है के यह कोई गुनाह नही इसलिये के वह काफीरा (नास्तीक) है!)   यह सख़्त जेहालत है! काफीरा (नास्तीक) लड़की से मुबाशरत (सोहबत) भी ज़िना ही कहलाएगी!

 

👉🏻इसी तरह  काफीर, (नास्तीक)मजुसी, बुत परस्त, सितारा परस्तउन  से  निकाह किया तो निकाह ही नही होंगा बल्की वह भी महज जिना मे ही शुमार होंगा!

 

👉🏻इसी तरह  जितने भी दीन से फिरे हुए बदमजहब  बातील फिर्के है!  उन  से  निकाह किया तो निकाह ही नही होंगा बल्की वह भी महज जिना ही कहलाएंगा जब तक की वह अकाइद ए बातीला से सच्ची तौबा न करे!

 

📚   हदीस : अल्लाह के रसूल ने इर्शाद फर्माया........

💫"शिर्क के बाद अल्लाह के नज़्दीक इस गुनाह से बड़ा कोई गुनाह नही की, एक शख्स किसी ऐसी औरत से सोहबत करे जो उस की बीवी नही!

 

और फर्माते है हमारे प्यारे आका हुजुर .......

💫"जब कोई मर्द और औरत ज़िना करते है तो ईमान उन के सीने से निकल कर सर पर साए की तरह ठहर जाता है"।

📕 [मुका़शीफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 168,]

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        🔵 ज़िना का बयान                  

 

📚 हदीस : हज़रत इकरमा ने हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास [रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा]से पूछा

💫 "ईमान किस तरह निकल जाता है" हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास ने अपने एक हाथ की उंगलियॉ दुसरे हाथ की उंगलियो मे डाली और फिर निकाल ली और फर्माया "इस तरह !"

📕 [बुखारी शरीफजिल्द नं 3, बाब नं 968, हदीस नं 1713, सफा नं 614, अशअ़तुल लम्आत, जिल्द नं 1, सफा नं 287,]

 

  हदीस : हज़रत अबूह़ुरैरा व इब्ने अब्बास [रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा] से रिवायत है कि ताजदार ए मदिना ने इर्शाद फर्माया

💎 "मोमिन होते हुए तो कोई ज़िना कर ही नही सकता"!

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 968, हदीस नं 1714, सफा नं 614,]

 

👉🏻 हज़रत इमाम ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत करते है

💫    " जिसने किसी गैर शादी-शुदा औरत का बोसा लिया, उसने गोया सत्तर कुवांरी लडकियों से जिना किया! और जिसने कुवांरी लडकी से जिना किया, तो गोया उसने सत्तर हजार शादी-शुदा औरतों से जिना किया!"

 [मुका़शीफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 169,]

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        🔵 ज़िना का बयान                  

 

👉🏻   हज़रत इमाम ग़ज़ाली और हजरत इमाम अबुल्लैस समरकंदी  [रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा] नकल करते है की........

💫 "बाज सहाब-ए-किराम, से मरवी है कि ज़िना से बचो  इस में  "छह" (6) मुसीबतें है जिन मे से तीन का तअ़ल्लुक़ दुनिया से और तीन का आख़िरत से है। दुनिया की मुसीबतें यह है......

 

1⃣     ज़िन्दगी मुख़्तसर (कम) हो जाती है।

2⃣ दुनिया में रिज़्क़ कम हो जाता है।

 3⃣ चेहरे से रौनक (नुरानियत) ख़त्म हो जाती है।

 

👉🏻 और आख़िरत की मुसीबतें येह है कि......

4⃣ आख़िरत में खुदा की नाराज़गी

 5⃣ आख़िरत में सख़्त पूछ ताछ होगी।

 6⃣ ज़हन्नम में जाएगा और सख़्त अज़ाब़ पाएंगा!

📕 [तंबीहुल गाफेलीन सफ 381, मुका़शीफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 168,]

 

👉🏻 रिवायत हजरत मुसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह अज्जा व जल्ल से जिना करने वाले की सजा के बारे मे पुछा, तो रब तबारक व तआला ने इर्शाद फर्माया.

💎"ऐ मुसा! जिना करने वाले को मै आग की जिरह (आग का लिबास) पहनाऊंगा! जो ऐसा वजनी है की अगर बहुत बडे पहाड पर रख दिया जाएंगा तो वह (पहाड) भी रेजा-रेजा हो जाए"

📕 [मुका़शीफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 168,]

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     .     🔵 ज़िना का बयान                  

 

💎अल्लाह तबारक तआला इर्शाद फ़र्माता है!..

وَ الَّذِیۡنَ لَا یَدۡعُوۡنَ مَعَ اللّٰہِ  اِلٰـہًا اٰخَرَ  وَ لَا یَقۡتُلُوۡنَ النَّفۡسَ الَّتِیۡ حَرَّمَ اللّٰہُ  اِلَّا بِالۡحَقِّ وَ لَا یَزۡنُوۡنَ ۚ وَ مَنۡ یَّفۡعَلۡ  ذٰلِکَ  یَلۡقَ  اَثَامًا ﴿ۙ۶۸

💎तर्जुमा : और वह लोग अल्लाह के साथ किसी दुसरे माबूद को नही पुजते, और इस जान को जिसकी अल्लाह ने हुरमत रखी नाहक नही मारते, और बदकारी नही करते, और जो यह काम करे वह सजा पाएंगा! (यानी ज़िना करने वाले असाम में डाले जाएंगे!)

📕[तर्जुमा :  क़ुरआन कंजुल इमान सूर ए फ़ुरक़ान, आयत नं 68,]

 

👉🏻असाम के बारे में उलमा-ए-किराम ने कहा कि वह ज़हन्नम का एक ग़ार है, जब उस का मुँह खोला जाएगा तो उस की बदबू से तमाम ज़हन्नमी चीख उठेंगे ।

📕 [मुका़शफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 167,]

 

📚 हदीस : अल्लाह के रसुल इर्शाद फरमाते है....

"सातों आसमान और सातों जमीन और पहाड़ (उम्र दराज) ज़िनाकार पर लानत भेजते है और क़ियामत के दिन ज़िनाकार मर्द व औरत की शर्मगाह से इस कद्र बदबू आती होगी के ज़हन्नम मे जलने वालों को भी उस (बदबु) से तकलीफ़ पहुँचेगी।

📕 [बहारे शरीअ़त, जिल्द नं 1,  हिस्सा 9, सफा 43,]

 

👉🏻यह तमाम सज़ाए तो आख़िरत मे मिलेगी लेकिन ज़िना करने वाले पर शरीअ़त ने दुनिया में भी सज़ा मुक़र्रर की है। इस्लामी हुकूमत हो तो बादशाहे वक्त़ या फिर क़ाज़ी शरअ पर ज़रूरी है कि जानी  (ज़िना करने वाले ) पर जुर्म साबित हो जाने पर शरीअ़त के हुक़्म के तहत सजा दे! हदीसे पाक में है कि अगर किसी को  दुनिया में सज़ा न मिल सकी (सजा से बच गया) तो आख़िरत मे उस को सख़्त अज़ाब़ दिया जाएगा, और अगर दुनिया में सज़ा मिल गई तो फिर अल्लाह चाहे तो उसे मुआ़फ फरमा दे।

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     .     🔵 ज़िना का बयान                  

 

✍🏻    [दुनिया में सज़ा :] अल्लाह और उसके  रसूल ने ज़िनाकार  मर्द और औरत को सज़ा का हुक़्म दिया और उस पर रसुलुल्लाह ने अमल भी करवाया। चुनांचे कुरआन ए पाक मे

💎अल्लाह तबारक तआला इर्शाद फ़र्माता है!..

اَلزَّانِیَۃُ وَ الزَّانِیۡ فَاجۡلِدُوۡا کُلَّ وَاحِدٍ مِّنۡہُمَا مِائَۃَ جَلۡدَۃٍ ۪ وَّ لَا  تَاۡخُذۡکُمۡ بِہِمَا رَاۡفَۃٌ  فِیۡ  دِیۡنِ اللّٰہِ  اِنۡ کُنۡتُمۡ تُؤۡمِنُوۡنَ بِاللّٰہِ وَ الۡیَوۡمِ الۡاٰخِرِ ۚ وَ لۡیَشۡہَدۡ عَذَابَہُمَا طَآئِفَۃٌ مِّنَ الۡمُؤۡمِنِیۡنَ ﴿۲

💎       तर्जुमा : जो औरत बदकार हो, और जो मर्द तो, इन मे हर एक को सौ (100) कोडे लगाओ, और तुम्हे उन पर तरस न आए! अल्लाह के दीन मे अगर तुम ईमान लाते होअल्लाह और पिछले दीन पर! और चाहीए की उनकी सजा के वक्त मुसलमानो का एक गिरोह हाजीर हो!

📕 [तर्जुमा :  क़ुरआन कंजुल इमान , सूर ए नुर आयत नं 2]

 

👉(यह सजा गैर शादी-शुदा (जिसकी शादी न हुई हो!) मर्द और औरत के लिये मुकर्रर है!)

 

 💫हुजुर  इर्शाद फरमाते है.......

📚     हदीस : ज़िना करने वाले शादी शुदा है तो खुले मैदान में संगसार किया जाए! (यानी पत्थरों से मार-मार कर जान से खत्म कर दिया जाए!) और गै़र शादी शुदा हो तो सौ (100) दुर्रे (कोडे, चाबुक)मारे जाए

 

📚    हदीस : हजरत शोअबी रदि अल्लाहु तआला अन्हु ने हजरत अली रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत की है की......

  हजरत अली ने जुमा के रोज एक जानी औरत को संगसार किया तो फर्माया की मैने उसे रसुलुल्लाह की सुन्नत के मुताबीक संगसार किया है!

📕 [बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 968, 980, हदीस नं 1715, सफा नं 615, 625,]

 

👉  शादी शुदा जानी मर्द व औरत को संगसार करने और गैर शादी-शुदा जानी (जिनाकार) मर्द व औरत को सौ कोडे लगाने का हुक्म स्याहे सित्ता के अलावा अहादीस की तकरीबन सभी किताबो मे मौजुद है! जिससे इंकार की कोई गुंजाइश नही! यहा पर (Topic)  के लंबाई के खौफ से बुखारी शरीफ की उपर की दो हदिसों पर ही इत्तेफाक किया जाता है!

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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     .     🔵 ज़िना का बयान                  

 

👉🏻 जिना कैसे साबीत होंगा?

 

💎 अल्लाह तबारक तआला इर्शाद फ़र्माता है!..

وَ الَّذِیۡنَ یَرۡمُوۡنَ اَزۡوَاجَہُمۡ وَ لَمۡ  یَکُنۡ لَّہُمۡ شُہَدَآءُ  اِلَّاۤ  اَنۡفُسُہُمۡ فَشَہَادَۃُ اَحَدِہِمۡ  اَرۡبَعُ شَہٰدٰتٍۭ بِاللّٰہِ ۙ اِنَّہٗ  لَمِنَ الصّٰدِقِیۡنَ ﴿۶

وَ الۡخَامِسَۃُ اَنَّ لَعۡنَتَ اللّٰہِ عَلَیۡہِ  اِنۡ کَانَ مِنَ  الۡکٰذِبِیۡنَ ﴿۷

وَ یَدۡرَؤُا  عَنۡہَا الۡعَذَابَ اَنۡ تَشۡہَدَ اَرۡبَعَ شَہٰدٰتٍۭ بِاللّٰہِ ۙ اِنَّہٗ لَمِنَ الۡکٰذِبِیۡنَ ۙ﴿۸

وَ الۡخَامِسَۃَ  اَنَّ غَضَبَ اللّٰہِ عَلَیۡہَاۤ  اِنۡ  کَانَ مِنَ  الصّٰدِقِیۡنَ ﴿۹

💎     तर्जुमा आयत नं 6 : और वह जो अपनी औरतो को ऐब लगाए, और इनके पास अपने बयान के सिवा गवाह न हो तो, ऐसे किसी की गवाही यह है के,चार बार गवाही दे अल्लाह के नाम से के वह सच्चा है!

💎 तर्जुमा आयत नं 7 : और पॉंचवी यह के अल्लाह की लानत हो इस पर अगर झुठा हो!

💎 तर्जुमा आयत नं 8 : और औरत से युं सजा टल जाएंगी के वह अल्लाह का नाम लेकर चार बार गवाही दे के मर्द झुठा है!

💎 तर्जुमा आयत नं 9 : और पॉंचवी युं के औरत पर गजब अल्लाह का अगर मर्द सच्चा हो!

📕 [तर्जुमा :  क़ुरआन कंजुल इमान सूर ए नुर आयत नं, 6, 7, 8 और 9]

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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      🙎🏻‍♂️🧕🏻 करीना-ए-ज़िंदगी 🧕🏻🙎🏻‍♂️                   🔵 ज़िना का बयान                  

 

👉🏻 किन लोगो की गवाही मोतब्बर मानी जाएंगी?

 

💫        जिना का सुबुत बाशरअ, नमाजी, परहेजगार, मुत्तकी, जो न कोई गुनाहे कबीरा करते हो, न किसी गुनाहे सगीरह पर इसरार रखते हो, न कोई बात खिलाफे मुरव्वत छिछोरे पन की करते हो, और न ही बाजारो मे खाते पिते हो, और न ही सडको पर पेशाब करते हो, ऐसे चार मर्दो की गवाही से जिना साबीत होता है! या जिना करने वाले के चार मर्तबा इकरार कर लेने से, फिर भी इमाम बार बार सवाल करेंगा और दर्याफ्त करेंगा की........ तेरी जिना से मुराद क्या है? कहॉं किया? किससे किया? कब किया? अगर इन सबको बयान कर दिया तो जिना साबीत होंगा वर्ना नही!

 

👉🏻 झुठी गवाही देने वालो की सजा  और गवाहो को खुल कर साफ साफ अपना चश्मदीद मुआइना बयान करना होंगा की हमने मर्द का बदन औरत के बदन के अंदर खास इस तरह देखा जैसे  सुरमे दानी मे सलाई अगर इन बातो मे से कोई भी बात कम होंगी मसलन चार गवाहो से कम हो या उन मे एक आला दर्जा का न हो, या मर्द तीन हो और औरते दस-बिस ही क्यो न हो, इन सब सुरतो मे यह गवाहिंयॉ नही मानी जाएंगी! अगर्चे इस किस्म की सौ दो सौ गवाहियॉ गुजरी हरगिज जिना का सुबुत न होंगा और ऐसी तोहमत लगाने वाले खुद ही सजा पाएंगे! और उन्हे बतौर सजा अस्सी कोडे लगाए जाएंगे!

[फतावा रज्वीया, जिल्द 5 सफा नं. 974]

 

 وَ الَّذِیۡنَ یَرۡمُوۡنَ الۡمُحۡصَنٰتِ ثُمَّ لَمۡ یَاۡتُوۡا بِاَرۡبَعَۃِ  شُہَدَآءَ فَاجۡلِدُوۡہُمۡ ثَمٰنِیۡنَ جَلۡدَۃً  وَّ لَا تَقۡبَلُوۡا لَہُمۡ شَہَادَۃً  اَبَدًا ۚ وَ اُولٰٓئِکَ ہُمُ  الۡفٰسِقُوۡنَ ۙ﴿۴

💎  तर्जुमा: जो लोग पाक दामन औरतो पर जिना की तोहमत (इल्जाम) लगाए, फिर चार गवाह न पेश कर सके, तो इन्हे 80 कोडे लगाओ, और कभी भी इनकी गवाही कबुल न करो यह फासीक (झुठे) लोग है!

📕       [तर्जुमा :  क़ुरआन कंजुल इमान सूर ए नुर आयत न. 4]

 

आला हजरत इमाम अहमद रजा कादरी और हजरत सदरूल-अफाजील अल्लामा नईमुद्दीन मुरादाबादी रहमतुल्लाह अलैही "फतावा रज्वीया" और तफ्सीर कुरआने करीम  "खजाएनुल-इर्फान" मे  गैर शादी-शुदा जानी मर्द और जानी औरत के सजा के बारे मे नक्ल  करते है............

 

"जानी मर्द को कोडे लगाते वक्त खडा किया जाए! और उसके तमाम बदन के कपडे उतार दिये जाए, सिवाए लुंगी के और उसके तमाम बदन पर कोडे लगाए जाए सिवाए चेहरा और शर्मगाह के! और औरत को कोडे लगाते वक्त खडा न किया जाए न उसके कपडे उतारे जाए अगर पोस्तीन या रूईदार कपडे पहने हुए हो तो उतार लिया जाए!"

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🌹🌹🌹 अपनी बात  🌹🌹

 

👉  जिनाकार मर्द और औरते अल्लाह और उसके रसुल के मुजरीम तो है ही साथ ही साथ माशराए इस्लाम को नुक्सान पहुचाने मे कोई कसर न छोडने वाले मुजरीम भी है

 

सभी हजरात जरा गौरो फिक्र और तवज्जो फर्माए!

 

अल्हा तआला ने जो तासीर, जज्बा वफादारी और जोश सच्चे मुसलमानो के खुन मे अता फर्माया है, वह किसी दुसरे मे नही! इस की बात ही न्यारी है!

 

313  सच्चे मुसलमानो के लश्कर ने एक हजार काफीर ए मक्का जो आला हथीयार, और साजो सामान से लैस थे उसे भी अल्लाह के फज्ल से धुल चटा दी!

 

 

💫 💫 याद रहे "लोहा लोहे को काटता है" बस ए नौजवान मर्दो सिर्फ तुम अपने इसी खुन की हिफाजत करलो, गैरो मे इस के बीज ना बोओ (जिना से बचो) यकीन जानीये मुसलमान खवातीन के तरफ कोई नजर उठा कर भी नही देखेंगा इंशा अल्लाह तआला!

 

💫💫 ए नौजवान औरतो अपने खेतीयो मे कोई ऐरा गैरा पौधा लगाने के लिये कभी भुलकर भी कदम न बढाओ! (जिना से बचे) कौम बुजदिली से उभर जाएंगी और जिल्लत और रुसवाई से बच जाएंगी इंशा अल्लाह तआला!

 

अल्लाह तआला से दुआ है अपने महेबुब सल्ललाहु अलैही व सल्लम के सदके और तुफैल जो सच्चे दिल से तौबा करे उनकी तौबा को खुबुल फर्माए! और जिना जैसे बदतरीन गुनाह से हमारी और दुनीयॉ के तमाम मुसलमानो की हिफाजत फर्माए! आमीन!

 

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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        🔵 पेशावर औरते (वेश्याए                  

 

 👉🏻     अक्सर नौजवान अपनी जवानी पर काबु नही रखते है! गलत संगत और सोहबत मे पडकर अपनी हवस को मिटाने के लिये पेशावर (वेश्याओ) का सहारा लेते है! और कुछ शादी-शुदा भी अपनी बिवी के होते हुए पेशावर औरतो के पास जाना नही छोडते!

 

      अगर एक ही प्लेट मे तरह -तरह के खाने खट्टा, मिठ्ठा, तेज और कडवा सब मिलाकर रख दिया जाए तो यकीनन उसमे बदबु और किडे पड ही जाएंगे! बस इन पेशावर औरतो की मिसाल इसी प्लेट की मानींद है! एक वक्त की जरा सी लज्जत के लिये उस प्लेट से एक बार भी कुछ चखा नही के वह एक ऐसी दलदल मे फंस जाता है, के जितना बाहर निकलने की कोशीश करता है, उतना ही और दलदल मे फंसता चला जाता है! नतीजा उसकी उम्र भर की सेहत, तंदरुस्ती, इज्जत, शौहरत, दौलत, आराम, सुकुन व चैन सब कुछ बर्बाद होकर रह जाता!

💎       हमारा रब तबारक तआला इर्शाद फर्माता है...

 

قُلۡ لِّلۡمُؤۡمِنِیۡنَ یَغُضُّوۡا مِنۡ  اَبۡصَارِہِمۡ وَ یَحۡفَظُوۡا فُرُوۡجَہُمۡ ؕ ذٰلِکَ اَزۡکٰی لَہُمۡ ؕ اِنَّ اللّٰہَ خَبِیۡرٌۢ  بِمَا یَصۡنَعُوۡنَ ﴿۳۰

 

 

मुसलमान मर्दो को हुक्म दो, अपनी निगाहे कुछ निची रखे! और अपनी शर्मगाहो की हिफाजत करे! यह इनके लिये बहुत सुथरा है! बेशक अल्लाह को इनके कामो की खबर गै!

 

💎   और अल्लाह तआला इर्शाद फरमाता है......

اَلۡخَبِیۡثٰتُ لِلۡخَبِیۡثِیۡنَ وَ الۡخَبِیۡثُوۡنَ لِلۡخَبِیۡثٰتِ ۚ وَ الطَّیِّبٰتُ لِلطَّیِّبِیۡنَ وَ الطَّیِّبُوۡنَ لِلطَّیِّبٰتِ ۚ

💎    गंदियॉं गंदो के लिये, और गंदे गंदीयों के लिये और सुथरीयॉ सुथरो के लिये, और सुथरे सुथरीयो के लिये!

📕 [तर्जुमा : कुरआन कंजुल इमान सुर ए नुर आयत नं. 30 और 20]

 

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        🔵 पेशावर औरते (वेश्याए)                  

              

💫    इन आयतो की तफ्सीर मे उलमा ए किराम इर्शाद फर्माते है की......

   "बदकार और गंदी औरते, गंदे और बदकार मर्दो के लायक है! इसी तरह बदकार और गंदे मर्द इसी काबील है के उनका ताल्लुक उन जैसे ही गंदी और बदकार औरतो से हो! जबकी सुथरे (पाक), नेक मर्द सुथरी (पाक), और नेक औरतो के लायक है! इसी तरह सुथरी, नेक औरत सुथरे और नेक मर्द के लायक है! और सुथरे, नेक का रिश्ता सुथरी, नेक औरतो से और सुथरी और नेक औरत का रिश्ता सुथरे और नेक मर्द से ही किया जा सकता है!

 

📚 हदीस हमारे प्यारे मदनी आका इर्शाद फर्माते है.........

💫   "जिसने जिना किया या शराब पी अल्लाह तआला उसमे से ईमान को ऐसे निकालता है, जैसे इंसान सर से अपना कुर्ता निकालता है!

 

👉🏻     इस हदीस पाक से वह लोग दिल से सोचे जो पेशेवर औरतो के पास जाते है, और जिना जैसे खबीस गुनाह का इर्तीकाब करते है! ताज्जुब है कोई मुसलमान होकर जिना करे! खुदारा ऐसे लोग अब भी होश मे आ जाए मौत के आने से पहले! बाद मे होश भी आया तो किस काम का!

 

👉🏻 इससे पहले भी यह बयान हो चुका है के पेशावर (वेश्याओ) से मुबाशरत जिना ही कहलाएगी, हॉलांकी वह इस काम के रुपए लेती है, और इस काम के पर राजी भी होती है! लेकीन फरीखैन की आपसी रजा भी इस काम को जिना से अलग न कर पाएंगी! जिना के बारे मे बहुत सारी हदीसे "जिना" के बाब (Chapter) मे पहले ही बयान हो चुकी है!

 

💫💫 बदकार को नेक बनाने के लिये अमल :अगर किसी औरत का मर्द बदचलन हो और दुसरी औरतो के साथ हरामकारी करता हो! ऐसी औरत अपने बदकार मर्द से सोहबत से पहले बावुजु ग्यारह (11) "अल-वलीयो" पढे! अव्वल आखीर एक-एक मर्तबा दरुद शरीफ पढे! फिर शैहर से मुबाशरत करे! (यह अमल हर बार जब भी उसका शौहर उससे सोहबत करना चाहे कर लिया करे) इंशा अल्लाह तआला वह मर्द परहेजगार हो जाएंगा! इसी तरह किसी शख्स की औरत बदचलन हो या बदकारी करती हो तो वह भी अपनी औरत से सोहबत करने से पहले यह अमल हर बार कर लिया करे! इंशा अल्लाह तआला  वह औरत नेक व परहेजगार बन जाएंगी!

📚 [वजाइफे रज्वीया सफा नं. 219]

 

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🔵 लिवातत या इ़ग्लाम बाजी (हिजडो से मुबाशरत)

 

👉🏻     कुछ दुनियॉ मे ऐसे भी लोग  है, जो जिन्सी (जिस्मानी) ताल्लुकात मे हलाल व हराम की तमीज नहीं रखते यह ऐसे दरींदा सिफत इंसान है! जो  कम उम्र लडके, मर्द या फिर हिजडे (Third Genders) से मुंह काला करते है!

 

📚     रिवायत : हजरत इमाम कलबी रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है.....

 

"सबसे पहले यह काम (यानी मर्द का मर्द से मुबाशरत करना) शैतान मर्दुद ने किया! वह कौम ए लुत अलैहिस्सलाम मे एक खुबसुरत लडके की शक्ल मे आया और लोगो को अपनी तरफ माईल (आकर्शीत) किया, और उन्हे गुमराह करके सोहबत करवाई! यहॉ तक की कौम ए लुत अलैहिस्सलाम की यह आदत बन गयी, अब वह औरतो से मुबाशरत करने की बजाए खुबसुरत मर्दो से ही फैल ए हराम करने लगे! जो भी मुसाफीर उनकी बस्ती मे आता वह उसे न छोडते, और अपनी हवस का शिकार बना लेते! हजरत लुत अलैहिस्सलाम ने अपनी कौम को बहुत समझाया और इस बुरे काम से मना किया और उन्हे अजाबे इलाही से डराया, लेकीन कौम न मानी हत्ता के हजरत लुत अलैहिस्सलाम ने अल्लाह रब्बुल इज्जत से अजाब की दुआ मांगी और कौम ए लुत अलैहिस्सलाम पर पत्थरो का अजाब नाजील हुआ, और पत्थरो की बारीश होने लगी! हर पत्थर पर कौम के एक शख्स का नाम लिखा था और वह उसी को आकर लगता जिससे वह वंही हलाक हो जाता! इस तरह यह कौम जिनकी आबादी चार लाख थी तबाह व बर्बाद हो गई!"

📚 [मुकाशफतुल-कुलुब, बाब नं. 22, सफ नं. 169, इस वाकीये की मुकम्मल तफ्सील कुरआन करीम के पारा नं 14, सुरह हुजर मे मौजुद है!]

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🔵 लिवातत या इ़ग्लाम बाजी (हिजडो से मुबाशरत)

 

📚    रिवायत : हजरत इमाम अबुल फजल काजी अयाज उन्दुलुसी रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है.....

_"मैने कुछ मशाइखे किराम से सुना है की, औरत के साथ एक शैतान और खुबसुरत लडके के साथ अठ्ठारह शैतान होते है!

📚 [मुकाशफतुल-कुलुब, बाब नं. 22, सफ नं. 169]

 

📚     रिवायत : हजरत इमाम अहमद खॉं रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है.....

"मन्कुल है की औरत के साथ दो शैतान और हिजडे के साथ सत्तर शैतान होते है!"

📚 [फतावा रज्वीया जिल्द  9, निस्फ अव्वल, सफ नं. 64]

 

📚     रिवायत : हजरत शैख फरीदोद्दीन अत्तार रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है.....

"हजरत सिमाक रदि अल्हाहु तआला अन्हु के विसाल के बाद किसी ने आपको ख्वाब मे देखा की आपका चेहरा आधा काला पड गया है! आपसे जब इसका सबब पुछा गया तो आप ने फर्माया "एक मर्तबा दौर ए तालीबे इल्म मे मैने एक खुबसुरत लडके को गौर से देखा था चुनांचे जब मरने के बाद मुझे जन्नत की तरफ ले जाया जा रहा था, तो जहन्नम की तरफ से गुजारा गया तभी एक सांप ने मेरे चेहरे पर कांटा और कहा की बस यह एक नजर देखने की ही सजा है! और अगर कभी तु उस लडके को ज्यादा तवज्जोह से देखता तो मै तुझे और तक्लीफ पहुंचाता!"

📚 [तज्किरातुल औलीया बाब नं.  8,  सफ नं. 41]

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🔵 लिवातत या इ़ग्लाम बाजी (हिजडो से मुबाशरत)

 

📚      रिवायत : हुज्जतुल इस्लाम सैयदना इमाम मुहम्मद गजाली  रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है.....

"रिवायत है.... जिसने शहवत के साथ किसी लडके को चुमा, तो वह पॉंच सौ बरस दोजख की आग मे जलेंगा!"

📚 [मुकाशफतुल-कुलुब, बाब नं. 22, सफ नं. 169]

 

👉🏻     "अल्लाह ने अपनी कुदरत से इंसान के बदन के हर हिस्से मे एक खास काम की कुदरत रखी है! चुनांचे इंसान के पाखाने के मकाम मे अंदर से बाहर फेंकने की कुव्वत रखी है!अज्लात (Limps) इस मकाम पर निगहबानी के लिये हर वक्त तैय्यार रहते है की कोई बाहर की चिज अंदर न जाने पाए! लेकीन जब खिलाफे फितरत  इस मकाम से सोहबत की जाती है तो वह सिमटने और कभी फैल जाने से जख्मी हो जाते है! रगे चमकने लगती है, और बार बार की रगड से जख्म पैदा कर देती है! और इंसान मुख्तलीफ किस्म के मर्जो मे मुब्तला हो जाता है!

 

                 इसी तरह वह शख्स अपने उज्वे तनासुल (लिंग) को मर्द के पिछे के मकाम मे दाखील करता है, इससे उसके उज्वे मख्सुस (लिंग) की नसे कमजोर हो जाती है! नसे ढिली पड जाती है! पठ्ठे ढिले हो जाते है!

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🔵 लिवातत या इ़ग्लाम बाजी (हिजडो से मुबाशरत)  

 👉🏻        इसी तरह वह शख्स अपने लिंग को मर्द के पिछे के मकाम मे दाखील करता है, इससे उसके उज्वे मख्सुस (लिंग) की नसे कमजोर हो जाती है! नसे ढिली पड जाती है! पठ्ठे ढिले हो जाते है!और पेशाब की नाली मे जख्म पढकर पेशाब मे जलन, झिल्ली मे खराश पैदा हो जाती है! कसरत के साथ इस ख्वाहिश को पुरा करने की वजह से लगातार मनी (विर्य) के बहने की बिमारी हो जाती है, ऑंखो मे गढ्ढे, चेहरे पर बेरौनकी, दिल व दिमाग कमजोर हो जाता है! और ऐसा इंसान फिर औरत को मुंह दिखाने के काबील ही नही रहता!

 

💫💫 "हकीमो का इस बात पर इत्तेफाक है के..... जो मर्द लिलावत (लमलैंगीक संभोग) करता है, उसको जल्द इंजाल (शिघ्रपतन, Premature Discharge) हो जाने की बिमारी हो ही जाती है!

 

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🔵 लिवातत या इ़ग्लाम बाजी (हिजडो से मुबाशरत)  

🔥 ऐसे शख्स की सजा : ऐसे शख्स के मुत्ताल्लीक शरीयत ए इस्लामी का फैसला यह है के उसे दुनीयॉ मे जिंदा रहने का कोई हक नही! उसका मर जाना ही समाज के लिये बेहतर है!

 

📚 हदीस : हुजुर फ़र्माते है..........

 💫 "जो मर्द किसी मर्द से सोहबत करे, उन्हें इतने पथ्थर मारो कि वोह मर जाए, ऊपर वाले और नीचे वाले दोनो को मार डालो"।

📚 [तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द नं 1, बाब नं 983, हदीस नं 1487, सफा नं 718, इब्ने माज़ा शरीफ, जिल्द नं 2, बाब नं 143, हदीस नं 334, सफा नं 109,]

 

📚 हदीस : हज़रत इकरमा ने हज़रत  रदि अल्लाहु तआला अन्हु ने हजरत अब्बास रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत किया है कि रसूलुल्लाह ने इर्शाद फर्माया...........

💫 "जिन को तुम पाओ के उसने दूसरे मर्द से सोहबत की है तो उन्हे क़त्ल कर दो करने वाले और करवाने वाले दोनो को "।

📚 [अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 3 बाब नं 348, हदीस नं  1050, सफा नं 376,]

 

📚 हदीस : हज़रते इब्ने शिहाब रदि अल्लाहु तआला अन्हु से ऐसे मर्द के मर्द के बारे में पूछा गया जो मर्द से ही सोहबत करे! फर्माया..... 

 💫 "उसे संगसार किया जाए (पथ्थरों से मार मार कर क़त्ल कर दिया जाए) चाहे शादी शुदा हो या गै़र शादी शुदा"।

📚 [मोता शरीफ, जिल्द नं 2, किताबुल हुदूद, हदीस नं 11, सफा नं 718,]

 

📚 हदीस : हज़रत अली कर्रमल्लाहु वज्हु ने तो इस ख़बीस काम करने वालों को क़त्ल कर देने पर ही बस न कीया बल्कि उन्हें आग  मे जलाया

 

📚 हदीस : हज़रते सिद्दीक़े अकबर रदि अल्लाहु तआला अन्हु ने उन पर दीवार गिराई जिस के नीचे वोह दब कर मर गये।

📚 [बहारे शरीअ़त, जिल्द नं 1 हिस्सा 9, सफा नं 44,]

 

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        🔵 लिवातत या इ़ग्लाम बाजी             

 

👉🏻    इस दौर में मगरीबी तहजीब  (Western Culture)  जो साइंस (Science) की तरक्क़ी पर अपने आप को सब से ज़्यादा मोअज्जज और तहज़ीब, व तमद्दुन मे आला समझते है! उनके यहाँ आज इस काम के करने वाले ज़्यादा पाए जा रहे  है! और वह इसे कोई ऐब या गुनाह नही समझते जिस के नतीजे अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने "एड्स" (AIDS) नाम की खतरनाक ला इलाज बिमारी नाजील कर दी है! और गौर और फिक्र करने वाली बात यह है के जो कोई इस मगरीबी तहजीब (वेस्टर्न कल्चर) को देखकर अपना रहा है वह भी इस ला इलाज बिमारी का शिकार हो रहा है! 

 

📚 हदीस : हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने ऊमर रदि अल्लाहु तआला अन्हु  ने रिवायत किया है कि रसूले अकरम ने इर्शाद फ़र्माया.......

🔥        "ऐसे लोग जो मर्द से सोहबत करे या सोहबत करवाए उन की तरफ देखना, उन से बात करना, और उन के पास बैठना हराम है"।

📕 [मुका़शफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 168,]

 

👉🏻      इस हदीस से वह लोग इब्रत हासिल करे जो ऐसे लोगो से बाजारो मे दुकानो मे ऐसे लोगो से हंसी मजाक करते है!

 

👉🏻 सद अफसोस! कुछ लोग शादी ब्याह, बच्चे की पैदाइश या किसी और खुशी के मौक़े पर ऐसे लोगो को अपने घर बुलाना और उन से बेहूदा गाने व गंदी बातें सुनना अपनी शान समझते है! इससे उन के सीने फख़्र  और गुरूर से फूल जाते है।

 

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         🔵 [जानवरों से सोहबत]  

 

👉🏻 क्या आप ने जानवरों से भी बढ़ कर हैवान देखे है? यह वोह लोग है जिन्होंने शर्म व हया  कानून की हर जंजीर को तोड़ा है! इन्हें कुछ नहीं मिलता तो जानवरों को ही अपनी हवस का शिकार बनाते है!और यह सुबूत फरहाम करते है के हम देखने मे तो वैसे इन्सान ही नज़र आते है लेकिन हवस और  दरिन्दागी के मामले मे जानवरों से भी बढ़ कर है।

 

👉🏻 ऐसे लोग जो इस काम मे मुब्तिला है! इस हदीस शरीफ को पढ कर यकीनन खौफ़े ए  खुदा से डर कर सहम जाएंगे!.

 

📚 हदीस : हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि नबी  ए करीम ने इर्शाद फ़र्माया.......

💫 "जो शख़्स जानवर से सोहबत करे, उसे और उस जानवर दोनों को क़त्ल कर दो"

📕 [अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 349, हदीस नं 1052, सफा नं 376, इब्नेमाज़ा, जिल्द नं 2, बाब नं 143, हदीस नं 334, सफा नं 108,]

 

👉🏻            लोगों ने हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदि अल्लाहु तआला अन्हु से पूछा कि...... "जानवर ने क्या बिगाड़ा है" ? तो उन्होंने ... "इसका सबब तो मैने  रसूलुल्लाह से नही सुना मगर हुज़ूर ने ऐसा ही किया बल्कि उस जानवर का गोश्त तक खाना पसन्द न फ़र्माया"।

 

👉🏻     गालीबन  हुज़ूर ने जानवर को क़त्ल करने का हुक़्म इस लिए दिया हो कि  जब भी उसे कोई देखेगा तो गुनाह का मंजर याद आएगा! दूसरी हिक़्मत इस में यह भी हो कि उम्मत को यह तालीम देना मक़्सूद है कि यह काम किस कद्र बुरा है की उसको करने वाले को क़त्ल किया जाए और जिस से यह काम किया गया इसमे किस कद्र बुराई आ गई की इसे भी  क़त्ल कर दिया जाए।  (वल्लाहु तआला आलम )

 

👉🏻 अभी हाल ही में जदीद तहकीक से  साबित हुआ है कि जो मर्द या औरत जानवर से अपनी ख्वाहिश पूरी करते है! उन्हे एड्स (AIDS) की ना काबीले इलाज बीमारी हो जाती है!  याद रहे  एड्स (AIDS) का दूसरा नाम मौत है

 

✍🏻       मसअला किसी   नाबालिग़ ने बकरी, गाय, भैंस, (या और किसी जानवर) के साथ सोहबत की तो उसे डाँट डपट कर सख़्ती से समझाया जाए । और अगर बालिग़ ने ऐसा काम किया तो उसे इस्लामी हुकुमत हो तो उसे इस्लामी सज़ा दी जाएगी! जिसका इख़्तियार इस्लामी बादशाह को है, वह जानवर जिब्ह करके दफ़्न कर दिया जाए!

📕 [दुर्रे मुख्तार बहवाला फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 983,]


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     🔵 औरत का औरत से मिलाप  

 

📚 हदीस : रसूलुल्लाह ने इर्शाद फर्माया

 

💫      "कोई मर्द किसी ना महरम औरत की तरफ़, और कोई औरत किसी ना महरम   मर्द की तरफ़ न देखे औरएक मर्द दूसरे मर्द के साथ और, एक औरत दूसरी औरत के साथ एक कपड़ा ओढ़ कर न लेटे"

📕 [मिश्क़ात शरीफ जिल्द नं 2, हदीस नं 2966, सफा नं 73]

 

👉🏻     क़ुर्बान जाईये इस तबीबे उम्मत नबी-ए-रहमत के जिन्होंने औरत को औरत के साथ एक बिस्तर पर एक चादर ओढे आराम करने से मना फ़र्माया! मर्दों में जिस तरह इस हरकत से क़ौमे लूत अलैह हिस्सलीम के नापाक अमल का ख़तरा है, औरतों में भी इस फ़ित्ने का डर है! और जो नुक़्सान दुनियावी व दीनी मर्दों की इस  नापाक हरकत से पैदा होते हैं वही औरतों की औरत से शरारत व ख़बासत से होगें।

 

👉    औरत का औरत से मिलाप यह एक ऐसी खबासत है के  जो अपने हाथो की हर गैर मामुली हरकत जिस्म को हर हाल मे तबाह करने वाली है!   और उम्र भर के लिए जिन्दगी बेकार बनाने वाली, और मर्ज मे मुब्तला करने वाली है !जैसे घबराहट, बेचैनी व पागल पन के आसार पैदा होना दिल का कमज़ोर होना, बेहोशी के दौरे पड़ना आखिरकार मेदा, जिगर, गुरदा, सब के काम ख़राब करेगा, आँखों में गड्डे, चेहरे पर बेरौनकी, हर वक्त़ कमर में दर्द, बदन का कमज़ोर होना, जरा सा काम से सर चकराना, दिल घबराना, बात बात में चिड़चिड़ा पन और फिर इन सब के बाद तपेदिक (Chronic fever) की बीमारी में गिरफ्तार हो कर मौत का शिकार होना है। और फिर मौत के बाद भी सुकून नही ज़हन्नम का अज़ाब़ बाकी।

 

   शायद औरतों ने यह ख़्याल कर रखा है कि यह कोई गुनाह नही या है भी तो मामूली सा, सुनो अल्लाह के रूसूल क्या इर्शाद फ़र्माते है........

 

📚      हदीस :  "न औरत, औरत के साथ नज़्दीकी करे, न औरत अपने हाथों अपने आप को खराब करे, जो औरत अपने हाथों अपने आपको खराब करती है वह भी यक़ीनन ज़ानिया (ज़िना करने वाली) है।

 

👉🏻                   इस गुनाह के लिए दुनिया का कोई बदतरीन अज़ाब़ भी काफी नही हो सकता इसके लिए ज़हन्नम के वह दहकते हुए अंगारे और दोज़ख के वह ड़रावने जहरीले साँप और बिच्छू ही सज़ा हो सकते हैं जिनकी तकलीफ़ ना काबीले बर्दाश्त और इतिहाई तकलिफ पहुचाने वाली है!

📕 [बहवाला :- जवानी की हिफ़ाज़त, सफा नं 76, 77, 78]

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     🔵 अपने हाथों अपनी बर्बादी                   

 

👉  यह इंसानी आदत व फितरत का तकाजा है की वह अपने कमाल का इज्हार करना चाहता है! यही जज्बा इस खास दौलत व मख्सुस कुव्वत के पैदा होने और कमाल की सुरत अख्तियार करने के बाद उसके इज्हार की तरफ माइल करता है! और ख्वाह म ख्वाह दिल मे वसवसा समाता है की इस दौलत को इस्तेमाल करने की लज्जत उठाए! कभी-कभी यह लज्जत उठाने का जज्बा इंसान को इस कद्र मजबुर कर देता है बल्की ऐसा अज खुद रफ्ता बना देता है की, अगर इस हालत को जुनुन से ताबीर किया जाए तो बेजा न होंगा! अश्शबाबु सअ्बतुन मिनल जुनुन! जवानी दिवानी के इस अरबी मकुले (कहावत) के मुताबीक आजका हमारा नौजवान अपनी जवानी को दिवानगी की इस बुलंद चोटी पर ले जा चुका है की जहॉं पहुंचने के बाद शहवत और हवस के सिवा उसे कुछ दिखाई नही देता! और फिर जब वह इस चोटी से फिसल कर गिरता है तो उसकी मस्खशुदा मर्दानगी की लाश की शिनाख्त कर पाना भी मुश्कील हो जाता है!

 

👉🏻       बताईये इस दौर मे जिस कद्र बुराईयॉं फैल रही है इसकी सबसे बडी वजह क्या है? फिल्मे जी हॉं! आज समाज का और मुसलमानो का तक्रीबन हर मकान एक सिनेमा घर बन चुका है! जब एक बच्चा होश की मंजील को छुता है तो वह अपने घर मे TV के जरीये वह सब कुछ देखता और जान लेता है जो उसे इस उम्र मे नहीं जानना चाहीये! TV ही क्या कम था जो कुछ कसर बाकी थी तो उस बची कुची कसर को इस जमाने के समार्ट फोन (Mobile) ने पुरी कर दी! TV पर तो कम अज कम घर के बडो और बुजुर्गो का काफी हद तक Control होता था! मगर इस मोबाईल मे उसे कोई रोक-टोक नही! खुली आजादी!

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     🔵 अपने हाथों अपनी बर्बादी                   

👉🏻 जब एक बच्चा होश की मंजील को छुता है, तो वह अपने घर TV और मोबाईल के जरीए वह सब कुछ देखता और जान लेता है जो इस उम्र मे नही जानना चाहीये! जब होश संभीलते ही एक मर्द और औरत के बीच के खास तअल्लुकात को देखता है तो उसमे भी फितरी तौर पर वही सब कुछ करने की ख्हाहिश पैदा होने लगती है! फिर यह ख्वाहिश तरक्की करके उम्र के साथ साथ ज्यादा बढती जाती है! और वह खुद को उम्र से पहले ही जवान समझने लगता है! मुसीबत बालाए मुसीबत की स्कुल, कॉलेज, बाजार और सडको पर फैशन की नुमाईश उसको जज्ब ए शहवत को जुनुन की हद तक पहुंताने मे आग पर पेट्रोल का काम करती है! और जब वह इस नफ्सानी ख्वहिश को पुरा करने के असबाब नही पाता है तो, वह गलत तरीको का इस्तेमाल करने लगता है! जब भी वह तन्हा होता है, तो यह जिंसी ख्वाहिश उसे परेशान करने लगती है! फिर वह तस्कीन के लिये अपने ही हाथो अपनी कुव्वत को बर्बाद करके मजा हासील करने की बुरी आदत मे मुब्तीला हो जाता है!

 

🔥     हाथो की यह हरकत (उज्वे तनासुल) को कमजोर बना देती है! और ऐसा शख्स इस करतुत के सबब औरत के काबील नहीं रहता!

 

👉🏻     याद रखीये यह वह किमती खजाना है जो खुन से बनता है, और खुन भी वह जो तमाम बदन को गिजा पहुंचाने के बाद बचा, बस अगर इस मनी के खजाने को इस तेजी के साथ बर्बाद किया गया तो दिल कमजोर होंगा! और दिल पर तमाम इंसानी जिस्म का दारोमदार है! जिस्म को खुन नही पहुंचा यानी यह आदत इस हद तक पहुंच चुकी के खुन बनने भी न पाया था की निकालने की नौबत आ गयी तो जिगर का काम खराब हुआ!


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     🔵 अपने हाथों अपनी बर्बादी                   

🌹   एक  तजरूबेकार डॉक्टर ने अपनी तहकीक मे लिखा है.....

 

👉🏻 "एक हजार तपेदीक (TB) के मरीजो को देखने के बाद साबीत हुआ की एक सौ छियास्सी (186) मरीज औरतो से ज्यादा सोहबत करने की वजह से इस मर्ज मे मुब्तला है! और चार सौ चौदह (414) सिर्फ अपने हाथो अपनी कुव्वत को बर्बाद करने की वजह से और बाकी दुसरे मरीजो की बिमारी की वजह दुसरी थी! हमने एक सौ चौबीस (124) पागलो का मुआयना किया, उनके मुआयना करने से मालुम हुआ की उनमे चौबीस (24) सिर्फ अपने हाथो अपनी कुव्वत को बर्बाद करने की वजह से पागल हुए है, और बाकी एक (100) सौ पागल दुसरी वुजुहात से!"

(बहवाला जवानी की हिफाजत अज मौलाना शाह मुहम्मद अब्दुल हलीम अलैहिर्रहमा सफा नं. 67)

 

👉🏻 इंसानी दौलत का अनमोल खजाना अगर इंसानी जिस्म की संदुक मे चंद दिनो तक अमानत रहे, तो दुबारा खुन  मे जज्ब होकर खुन को कुव्वत देने वाला, सेहत को दुरुस्त और बदन को मजबुत बनाने वाला, रुआब और हुस्न व जमाल को बढाने वाला और कव्वत ए बाह मे चार चॉंद लगाने वाला साबीत होंगा! दिमाग की तेजी तरक्की पाएंगी, याद दाश्त तेज होंगी, ऑंखो मे सुर्खी दौडेंगी, हिम्मत और बुलंद हौसला की सर बुलंदी इस दौलत मे इजाफा की अलामत होंगी! कुछ हकीमो ने कहा है......

 

"जिसे हद से ज्यादा दुबला, और कमजोर, वहशीयाना (डरावनी) शक्ल व सुरत का पाओ, जिसकी ऑंखो मे गढे पड गये हो, ऑंखो की पुतलियॉं फैल गई हो, हद से ज्यादा शर्मीला हो, तन्हाई पसंद करता हो, उसके बारे मे यकीन करलो की उसने अपने हाथो खुन (अपने हाथो खुद को बर्बाद किया है) बहाया है!"

 

💫    आज लोगो से छिपकर यह बुराई कर रहे हो, माना की तुम्हारी इस बुरी हरकतो को किसी ने नहीं देखा! लेकीन यह तो सोचो की जाहीर व बातीन का जानने वाला अल्लाह तआला तुम्हारे इस करतुत को देख रहा है! अल्लाह तआला ने जिना की सजा बताई अगर यह सजा जिनाकार दुनियॉ मे पा जाए तो आखीरत के अजाब से बच जाए! लेकीन अपने हाथो इस अनमोल खजाने को बर्बाद करना सख्त गुनाह है!

 

  अगर खुदा न ख्वास्ता कोई नसीब का दुश्मन इस बुरी आदत का शिकार हो तो उसे दर्दमंदाना मशवरा है की, खुदारा इश्तेहारी दवाओ की तरफ न जाए! पहले सच्चे दिल से तौबा करे! और किसी अच्छे तजरुबेकार, तालीम याफ्ता हकीम या डॉक्टर के पास जाए, और बगैर किसी शर्म व झिजक के उसे पुरी बात बताए! जब तक वह कहे बाकायदा पुरे परहेज के साथ उसके इलाज पर अमल करे!


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     🔵 ताकत बख्श गिजाए!  🔵                 

 

💫 अहादीस ए मुबारका मे ऐसी बहुत सी चीजों के बारे मे बताया गया है, जिनके खाने से जिस्मानी कुव्वत मे इजाफा होता है! जिस्म हमेशा सेहतमंद और चुस्त रहता है! और खास कर मर्दो की कुव्वते बाह मे तरक्की होती है!

 

📚 हदीस उम्मुल मोमीनिन हजरत आइशा सिद्दीका रदि अल्लाहु तआला अन्हा से रिवायत है

"रसुल ए अकरम ने इर्शाद फर्माया"

💫   "शहद से बढकर कोई दवा नही!" (यानी हर बिमारी के लिये शहद बेहतरीन इलाज है!)

 

👉🏻 शहद के बेशुमार फायदे है! शहद मे हजारो फुलो का रस होता है! अगर पुरी दुनियॉ के तमाम हकीम व डॉक्टर मिल कर भी ऐसा रस तैय्यार करना चाहे तो लाख कोशीश करले वह ऐसी चीज तैय्यार नही कर सकते! यह अल्लाह रब्बुल इज्जत का अपने हबीब के सदके मे खास करम है की वह छोटी-छोटी मक्खीयॉ से अपने बंदो के लिये ऐसी बेहतरीन और नफा बख्श चीज तैय्यार करवाता है!

 

 📚 हदीस हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है

💫 "हुजुरे अक्दस को पीने की चीजों मे सब से ज्यादा दुध पसंद था!"

 

📚 हदीस उम्मुल मोमीनिन हजरत आइशा सिद्दीका रदि अल्लाहु तआला अन्हा ने इर्शाद फर्माया

"हुजूर खजुर, मक्खन, और दही मिला कर खाते थे! और यह आपको बहुत पसंद था!"

(तिनो चिजे बराबर मात्रा मे मिलाकर हलवा सा बना ले)

 

📚 हदीस "रसुलुल्लाह (अक्सर) खजुर को मक्खन के साथ खाया करते!"

📚 हदीस हजरत अब्दुल्लाह बिन जाफर रदि अल्लाहु तआला अन्हु "शमाइले तिर्मीजी" से रिवायत है

"हुजुर तर खजुर (पेंड खजुर) के साथ खरबुजा मिलाकर तनावुल फर्माते!"

 

  हदीस हजरत अनस  रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है

💫 "रसुलुल्लाह कद्दु शरीफ पसंद फर्माते थे! जब आपके लिये खाना लाया जाता या आप खाने के लिये बुलाए जाते तो मै तलाश करके  कद्दु शरीफ आपके सामने रखता था क्योकी मुझे इल्म था की आप उसे पसंद करते है! को मक्खन के साथ खाया करते!"

(शमाइले तिर्मीजी)

 

📚 हदीस हजरत उमर फारूख  रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है

💫    "रसुल्लाह ने इर्शाद फर्माया"

"जैतुन (Olive Oil) का तेल खाया करो और बदन पर भी लगाया करो! क्योकी वह मुबारक दरख्त से निकलता है!"

 

📚 हदीस हुजूर  इर्शाद फर्माते है

💫| "मसुर और जैतुन सालेहिन की गिजा है! मसुर से दिल नर्म और बदन हल्का रहता है! और शहवत ऐतेदाल पर रहती है!"

📕 [करीना ए जिंदगी सफा नं 151]


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    🔵 ताकत बख्श गिजाए!  🔵                 

                🔵 गोश्त  

💫 कुछ लोग गोश्त को बहुत बुरा समझते है! जबकी अल्लाह तआला ने उसे हलाल फर्माया और उसमे बर्कत अता फर्माई! उसे जहालत के सिवा क्या कहा जा सकता है, की जिस चिज को अल्लाह तआला हलाल फर्माए उसे बंदा नाजाईज और बुरा समझे! अगर किसी शख्स को कोई चीज पसंद न हो तो वह उसे न खाए लेकीन इस्लाम किसी को यह इजाजत नही देता की वह सिर्फ अपने नापसंद होने की वजह से उसे बुरा जाने और जो लोग खाते है उन्हे हिकारत की नजर से देखे!

 

💎 आयत: अल्लाह रब्बुल इज्जत इर्शाद फर्माता है....

یٰۤاَیُّہَا الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡا لَا تُحَرِّمُوۡا طَیِّبٰتِ مَاۤ  اَحَلَّ اللّٰہُ لَکُمۡ وَ لَا تَعۡتَدُوۡا ؕ اِنَّ اللّٰہَ لَا  یُحِبُّ الۡمُعۡتَدِیۡنَ ﴿۸۷

 💫 तर्जुमा : ऐ ईमान वालो हराम न ठहराओ वह सुथरी चींजे की अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की, और हद से न बढो, बेशक हद से बढने वाले अल्लाह को नापसंद है!

📕 [तर्जुमा कुरआन कंजुल इमान सुरह माइदा, आयत नं 87]

 

👉  गोश्त हलाल जरूर है, और उसके फायदे भी बहुत है! लेकीन उसके इस्तेमाल मे ऐतदाल बरते क्योकी किसी भी चीज का ज्यादा से ज्याद इस्तेमाल बजाए फायदे के नुक्सान का सबब बन जाता है!

 

📚 हदिस : अमीरुल मोमिनीन हजरत अली रदि अल्लाहु तआला से मरवी है!..

💫     "रसुलुल्लाह ने चालीस रोज लगातार गोश्त खाने से मना फर्माया!"


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    🔵 ताकत बख्श गिजाए!  🔵                 

👉🏻    इन चीजो का भी इस्तेमाल हमेशा अपनी गिजाओ मे रखे की इन के खाने से बहुत फायदे है! यह चिजे कुव्वते बाह मे इजाफा करती है! यहॉ हर एक के फायदे बयान करना मुम्किन नहीं लिहाजा उनके नाम ही लिखने पर इक्तिफा किया जाता है!

 

1 अनाज : गेहुं, तिल, मुंगफल्ली, मुंग, चना, और  खशखश

2 सब्जी : प्याज, लहसुन, आलु, अरवी, भिंडी, शल्जम, कद्दु शरीफ, लौकी, गाजर और शकरकंद

3 पकी चींजे : मुर्गी का गोश्त  मुर्गी के अंडे, बत्तख के अंडे, ताजा मछली, बकरे का गोश्त, गोश्त, पाये, कलेजी, दुध, दही, मक्खन

4 फल : आम, अंगुर, अनार, केला, सेब, अमरुद, खरबुज और तरबुज

5 मेवे : खजुर, पिस्ता, बादाम, मखाना, किशमिश, अखरोट, खोपरा, चिलगुजा और जैतुन

 

🔵 ताकत कम करने वाली गिजाए!  🔵

 

👉  कई ऐसी चीजे है जिनका इस्तेमाल कुव्वते बाह मे कमी का सबब होती है! लिहाजा कुव्वते बाह को हमेशा कायम रखने के लिये इन चिजो का इस्तेमाल न करे और अगर कभी  करना  ही पड जाए तो बहुत कम इस्तेमाल करे की इन  चीजो के इस्तेमाल से मर्द मे कमजोरी पैदा होती है! और इंजाल जल्द हो जाता है! इमली, खट्टा आम, निंबु, आम का अचार, चटनी, आम की खटाई और दिगर खट्टे फल, ज्यादा चाय, कॉफी, बीडी, सिग्रेट, गुटका वगैरह! इन तमाम चींजो का ज्यादा इस्तेमाल करना मर्द की कुव्वते बाह के लिये नुक्सानदेह है! खास कर शराब, अफीम, और हर वह चींज जो नशा पैदा करे उसका इस्त्माल तो कुव्वते बाह के हक मे जहर ए कातिल है


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🔵 मर्दाना बिमारीयॉ और उनका इलाज             


👉🏻 मौजुदा दौर मे बदकारी और अय्याशी बहुत ज्यादा बढ चुकी है! जिसकी अहम वजह फिल्मे, TV सिरीयल, समार्ट फोन (Mobile) देखकर उस से सिखकर अपने आपको मॉर्डन कहलाने की एक अंधी होड  (खुसुसी तौर पर फैशन के नाम पर उल्टे सिधे कपडे पहनकर अपने जिस्म की नुमाईश करके, बालो को अजीबो गरीब रंग मे रंगकर, अजीब हुलीयॉ बनाकर अपने आप को मॉर्डन कहलवाने का जुनुन सवार है जिसमे लडके लडकियॉ दोनो बराबर के जिम्मेदार है!) , नौजवान लडके लडकियो का गंदे मेगजिन और नावील पढना, स्कुल और कॉलेज मे लडके, लडकियो का एक साथ रहना वगैरह जैसी चींजे!


💫    नतीजा बदकारीयों और अय्याशियो मे इजाफा! रिझल्ट अक्सर मर्द और औरते का कई  खतरऩाक जिन्सी बिमारीयों का शिकार होकर बिमारीयो मे फंस जाते है! अव्वल तो ऐसी हरकते ही नही करनी चाहीये के जिससे इन बिमारीयो मे फंस जाने का खतरा हो! और अगर कोई ऐसी गल्ती कर ही चुका है, तो पहले सच्चे दिल से तौबा किजीए, और किसी इश्तेहारी और सडक छाप निम हकीम खतरे जान के पास जा कर अपनी बची कुची सेहत को बर्बाद करने की बजाए, किसी अच्छे पढे लिखे काबील और माहीर डॉक्टर या हकीम से ही इलाज करवाइए! 


💫 यहॉ कुछ मर्दाना और जनाना बिमारीयों के बारे मे और उनके इलाज के मुतअल्लीक तहरीर की जा रही ह! इन बिमारीयो के इलाज के लिये वैसे तो बुजुर्गाने दीन और हकीमो ने कई तरह के नुस्खे और दवाईयॉ बयीन की है! लेकीन यहॉ कुछ ऐसे ही नुस्खे बयान कर रहे है, जिनमे इस्तेमाल होने वाली चीजें आपको आसानी से मिल जाए! और आप उसे अपने घर पर ही खुद तैय्यार कर सकते है! हकीमी इलाज के साथ साथ रूहानी इलाज भी जरूरी है! इसके लिये किसी सुन्नी सहीउल अकीदा माहीर आलीम से राबता करे!


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                 🔵 नामर्दी 🔵


👉🏻     कुछ लोग अपने लडकपन मे गल्तियॉ और बुरी संगत की वजह से अपनी ताकत गंवा देते है! और शर्म व झिजक की वजह से अपना हाल किसी से बता भी नही पाते! शादी होने या शादी की बात चलने के वक्त ऐसे लोगों की परेशानी और बढ जाती है! अगर ऐसी हालत मे उसकी शादी हो जाए तो ऐसी हालत मे औरत मुत्मइन नही हो पाती जो औरत को नागवार मालुम होता है, और वह आसबी बिमारी जिसे हिस्ट्रेरिया (Hysteria) कहते है! जिससे जिस्म के पठ्ठे कमजोर हो जाते है इस मर्ज मे मुब्तला हो जाती है और जिमा से बेरगबती और शौहर से नफरत करने लगती है!


👉🏻 ज्यादा मुबाशरत से भी नामर्दी की सुरत पैदा हो जाती है! ऐसी हालत मे मर्द को इलाज की तरफ ध्यान देना चाहिये! लेकीन फिर भी कीसी इश्तेहारी सडक छाप दवा बेचने वाले हकीमो और डॉक्टर से भुल कर भी इलाज न करवाए! यह लोग जिस किस्म की दवा बनाते है उनमे अक्सर अफीम, धतुरा, भांग वगैरह जैसी चिजो की मिलावट होती है! जिन से फौरन तो फायदा हो जाता है लेकीन बाद मे इसके शदीद नुक्सान हेते है! और उनका बार-बार इस्तेमाल जल्द ही कब्र के गड्ढे तक पहुंचा देता है! इसलिये हुजुर ﷺ और बुजुर्गाने दीन ने की गई हिदायतो से फायदा हासील करना चाहीये और दवाओ की बजाए गिजाओ का इस्तेमाल करके कुदरती तौर पर कमजोरी को दुर करना चाहीये!


📚 हदीस : हुजुर ﷺ ने इर्शाद फर्माया

"बदन से जेरे नाफ के बालो को जल्द दुर करना कुव्वते बाह मे इजाफा करता है!"


💫 मसअला : नाफ के निचे के बाल को दुर करना सुन्नत है! और बेहतर यह है के हफ्ते मे जुमा के दिन दुर करे! पंद्रहवे रोज करना भी जाइज है! और चालीस दिनो से ज्यादा गुजारना मकरुह व सख्त गुनाह है!

📕 [कानुन ए शरीयत जिल्द  2 सफ 211]

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🔵 मर्दाना बिमारीयॉ और उनका इलाज             

                  🔵 नामर्दी 🔵


📚 हदीस : हुजुर ﷺ ने इर्शाद फर्माया......


"बदन से जेरे नाफ के बालो को जल्द दुर करना कुव्वते बाह मे इजाफा करता है!"


💫 मसअला : नाफ के निचे के बाल को दुर करना सुन्नत है! और बेहतर यह है के हफ्ते मे जुमा के दिन दुर करे! पंद्रहवे रोज करना भी जाइज है! और चालीस दिनो से ज्यादा गुजारना मकरुह व सख्त गुनाह है!

📕 [कानुन ए शरीयत जिल्द  2 सफ 211]


💫 नुस्खा नं. 1⃣ : माश की दाल (उडद की दाल) एक पाव किसी कॉंच या चिनी के बर्तन मे डालकर उसमे सफेद प्याज का रस इतना डाले की दाल रस मे अच्छी तरह भीग जाए! एक दिन, रात उसे भीगा रहने दे! फिर जब वह सुख जाए तो सफेद प्याज का रस फिर पहले की तरह दाल मे पुरी भीगने तक डाले, फिर एक दिन, रात उसे सुखने के लिये रख दे! इसी तरह यह अमल कुल सात बार करे, यानी सात मर्तबा सफेद प्याज का रस डाले और दाल भीगने और सुखने दे! अब दाल को बारीक पीस ले फिर और उसके चालीस हिस्से बनाए! फिर रोजाना एक हिस्से मे 25 ग्रॉम असली घी (देसी घी) और 25 ग्रॉम चिनी (शक्कर) मिला कर सुबह फांक ले! और उस पर एक पाव दुध पी ले! यह दवा चालीस दिन तक खाए, और उस अरसे मे औरत से जिमाअ न करे!


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🔵 मर्दाना बिमारीयॉ और उनका इलाज             

                  🔵 नामर्दी 🔵


💫 नुस्खा नं. 2⃣ : प्याज का रस एक पाव, असली शहद एक पाव दोनो को मिलाकर हल्की आग पर पकाए और जब प्याज का रस सुख कर सिर्फ शहद बाकी रह जाए तो बोतल मे भर ले, 20-30 ML पानी मे मिलाकर पी लिया करे!

💫 नुस्खा नं. 3⃣ : खजुर और भुने ह्ए चने दोनो को हम वजन (बराबर मात्रा) मे लेकर पिस ले! फिर छानकर उसमे थोडा सा प्याज का रस मिलाकर लड्डु बना ले! (चाहे तो इसमे बादाम भी मिला सकते है!) और सुबह शाम एक-एक लड्डु खा लिया करे!

💫 नुस्खा नं. 4⃣ : हल्के गरम दुध मे शहद मिलाकर निहार मुह (खाली पेट) पिने से कुव्वते बाह मे इजाफा होता है!

💫 नुस्खा नं. 5⃣ : चने की दाल एक पाव लेकर आधा पाव गाय के दुध मे मीला कर अच्छी तरह पकाए! जब सारा दुध सुख कर दाल मे समा जाए तो उसे सिलपर बारीक पीस ले! फिर पाव भर असली घी मे थोडा सा भुनकर पाव भर शक्कर मिला कर हलवे की तरह बना ले! फिर इस हलवे को रोजाना एक छटाक (50 ग्रॉम) सुबह नाश्ते मे लिजीए!

💫 नुस्खा नं. 6⃣ : हकीमो ने प्याज के इस्तेमाल को कुव्वते बाह के इजाफा के लिये मुफीद बताया है, लेकीन उसका इस्तेमाल इतना ही करना चाहीये जितना हजम हो सके! हद से ज्यादा इस्तेमाल भी नुक्सानदेह है!

📕 [शमा शबिस्तान ए रजा जिल्द 1, सफ 104]_


💫 रहेमानी इलाज : अगर कोई शख्स किसी वजह से नामर्दी का शिकार हो चुका हो, तो उसे चाहीये की हर रोज बाद नमाज ए फज्र सुराह ए इब्राहिम (पारा तेराह मे है) की तिलावत करे! और सुराह ए इब्राहीम के नक्श को किसी सही उल अकीदा सुन्नी आलीम से हासील करके अपने पास रखे!


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🔵 मर्दाना बिमारीयॉ और उनका इलाज 

        🔵 सुरअते इंजाल 🔵 


     सुरअते इंजाल (शिघ्रपतन) इस हालत को कहते है जब मर्द जिमाअ का इरादा करे, या मुबाशरत शुरु करे उसे जल्द ही इंजाल (Discharge) हो जाए! अगर मर्द को सुरअते इंजाल की शिकायत हो जाए तो ऐसी सुरत मे औरत की तसल्ली नही हो पाती है! क्योकी अमुमन इतनी जल्दी औरत को इंजाल नही होता! यह हालत औरत के लिये तक्लीफदेह होती है!


👉🏻  जब यह मर्ज बढ जाता है तो किसी खुबसुरत औरत को देखने से या किसी का सिर्फ खयाल आ जाने से,  या उज्वे तनासुल के किसी नर्म व नाजुक कपडे से छु जाने से भी इंजाल हो जाता है! इस मर्ज के होने की कई वुजुहात है! जैसे जलक (अपने हाथो अपनी मनी निकालने की बुरी आदत) हर वक्त हमेशा गंदे व बेहुदा खयालात जहन मे रखना, गंदी फिल्मे देखना, या किसी वजह से मनी का पतला होना! वगैरह जैसी वुजुहात है! इस बिमारी के होने की एक सबसे बडी वजह ज्यादा सोहबत करना भी है! इस मर्ज को दुर करने के लिये तेज, गरम चिजो का खाने मे परहेज करना चाहीये, इसी तरह गंदी बाते, गंदी फिल्मे, और गंदे नावील पढने से बचना चाहीये!


1⃣  अंडे और गोश्त का इस्तेमाल भी ऐसे मरीजो के लिये फाइदेमंद होता है

2⃣   ऐसे मरीज घी, मक्खन, मलाई का खाने मे ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करते रहे! और सुबह हल्की वर्जीश (कसरत) Exercise जरुर करे

3⃣  वह नुस्खा जो इससे पहले नामर्दी के बाब मे नुस्खा नंबर-5⃣ मे लिखा है! उसका इस्तेमाल भी सुरअते इंजाल के मरीज के लिये काफी फाइदामंद साबीत होंगा

4⃣  ज्यादा देर रात तक जागना सुरअते इंजाल के मरीज के लिये काफी नुक्सानदेह है! इसलिये रात को जल्दी सोना और सुबह को जल्दी उठना सुरअते इंजाल के मरीजो के लिये बहुत फाइदामंद है!


💫 रहमानी इलाज सुरअते इंजाल के मर्ज से छुटकारा पाने के लिये एक नक्श तहरीर किया जा रहा है! उसे किसी सही उल अकीदा सुन्नी आलीम से जाफरान से लिख कर कमर मे बांध ले! अल्लाह ने चाहा तो भरपुर ताकत पैदा होंगी! इंजाल देर से होंगा साथ ही साथ कुव्वते बांह मे इजाफा होंगा!


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🔵 मर्दाना बिमारीयॉ और उनका इलाज

                 🔵 जिरयान 🔵

 

       हमारी मौजुदा नस्ल मे यह बिमारी बहुत ज्यादा पाई जा रही है!इस बिमारी मे पाखाना या पेशाब से पहले, या उसके बाद पेशाब की नली से मनी, मजी या फिर वदी निकलती है! या पेशाब के बाद कभी कभी सफेद रंग का धागा सा भी निकलता है! इस बिमारी मे मरीज को कमर मे दर्द, घुटनो मे तक्लीफ और ऑंखो के सामने अंधेरा छा जाता है! या फिर चक्कर आते है! और कमजोरी दिन ब जिन बढती रहती है! भुख नही लगती, और जो खाया वह हजम नही होता, और कितनी ही बेहतरीन गिजा खाई जाए तो वह बदन को नही लगती! इस बिमारी के होने की बहुत सी वुजुहात हो सकती है जिन मे से कुछ इस तरह है!


🔷 मनी मे तेजी आ जाना

🔷 शहवत का ज्याद होना

🔷 मुबाशरत ज्यादा करना!

🔷 हमेशा बुखार ज्यादा रहना!

🔷 हर वक्त दिल व दिमाग मे सोहबत की बाते बैठाए रखना, या उसके बारे मे सोचते रहेना!

🔷 कब्ज होना!

🔷 अपने हाथो अपनी मनी निकालना!

🔷 हिजडो से बुरा काम करना वगैरह वगैरह!


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🔵 मर्दाना बिमारीयॉ और उनका इलाज

             🔵 नुस्खा जात 🔵


1⃣ गवरान (देसी) मुर्गी का एक अंडा फोडकर किसी बर्तन मे ले, फिर अंडे की जर्दी और सफेदी के बराबर गाजर का रस ले! फिर उसमे इतनी ही (मात्रा) मिक्दार मे शहद और देसी घी डाले, अब सबको मिलाकर हल्की ऑंच पर पका कर हलुवा बना ले! इस तरह 21 इक्कीस दिनो तक हलुवा बना कर खाते रहे! खट्टी चिजे, दही, अचार, इम्ली और मछली के इस्तेमाल से पुरी तरह परहेज करे! और शादी शुदा हो तो इस दौराम बीवी से मुजामेअत न करे!


2⃣ बरगद (बड) का दुध (बड की टहनी या पत्ता तोडने पर जो रस निकलता है) चार माशा बताशे या चिनी (शक्कर) मे डाल कर रोजाना सुबह को खा लिया करे!


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🔵 मर्दाना बिमारीयॉ और उनका इलाज

                   🔵 सुजक 🔵


💫    यह बिमारी ज्यादा तर नौजवानो मे बुरी संगत व बुरी आदतो की वजह से होती है! इसकी वजह से नौजवानो की सेहत धिरे धिरे घटती जाती है! उनमे कमजोरी आ जाती है! बिमारी की पहचान यह है के पेशाब की नली मे सुजन सा वर्म आ जाता है, और अंदर घाव (जख्म) हो जाते है! उससे पिप निकलता रहता है! और जब भी पेशाब को जाए तो उस वक्त  पेशाब मे सख्त जलन होती है!


           🔵 नुस्खा जात 🔵


1⃣ सफेद राल बारह ग्राम शक्कर बारह ग्राम ले दोनो को पिस कर चुर्न बना ले! दो ग्राम चुर्न पानी के साथ दिन मे दो बार ले!

2⃣  कपडे धोने की मिट्टी (जिसे रय कहते है) साठ ग्राम ले, निम की ताजा पत्तीयॉ का रस बारह ग्राम ले! इन दोनो को 120 ML मे भिगोकर रात भर रखे! सुबह छान ले और थोडा सा और नीम का रस मिला कर सुबह पी ले

3⃣ हल्दी और सुखा आमला (आंवला) दोनो बीस ग्राम ले! दोनो को बारीक पीसकर पाउडर बना ले! फिर दो ग्राम पाउडर पानी के साथ दिन मे दो बार इस्तेमाल करे!

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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣7️⃣🅾️


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🔵 मर्दाना बिमारीयॉ और उनका इलाज

            🔵 पेशाब की जलन 🔵 


     पैशाब के बाद तहारत न करने या मुजामेअत के बाद शर्मगाह के न धोने की वजह से पेशाब मे जलन होती है! ज्यादा गर्म खाने के इस्तेमाल से भी पेशाब मे जलन की शिकायत होती है!इस बिमारी के मरीज को पेशाब जल्दी नही होता है!बल्की थोडा-थोडा जलन के साथ आता है, और बडी तक्लीफ के साथ आता है!


              🔵 नुस्खा जात 🔵


1⃣ सफेद संदल का बुरादा (पाउडर) छह (6) ग्राम ले, धनिया छह (6) ग्राम, सुखा आमला (आंवला) छह (6) ग्राम इन तिनो चिजो को 120 ML पानी मे रात भर भिगो कर रखे! सुबह को छान कर उस पानी मे चिनी (शक्कर) मिला कर शर्बत बना ले और सुबह, दोपहर को पी लिया करे!

     

2⃣ खिरे के बीज छह (6) ग्राम, ककडी के बीज छह (6) ग्राम दोनो को 120 ML पानी मे अच्छी तरह उबाल कर छान ले और उस पानी को ठंडा करके सुबह को पी लिया करे!


3⃣  एक देसी अंडे की सफेदी ले, जर्दी (पिलक) अलग कर ले! इस सफेदी को अच्छी तरह फेंट ले और एक प्याली हल्के गर्म दुध मे मिला कर सुबह को पी लिया करे!

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🔵 जनाना (औरतो के) मर्ज और उनका इलाज 


👉🏻 औरतो मे भी बहुत तरह की जिन्सी बिमारियॉं होती है! यहॉ चंद बिमारियॉं और उनके इलाज के मुत्तल्लीक लिख रहे है!


            🔵 सैलानुर्रहम (लिकोरिया 🔵


       औरतो की यह बिमारी उसके बदन को कांटे की तरह कर देती है! इस बिमारी मे औरत की शर्मगाह से चिपचिपा अंडे की सफेदी या नाक की रतुबत जैसा पानी निकलता रहता है! इस पानी के साथ बदन की ताकत कम होने लगती है! कभी-कभी यह बदबुदार पानी इतनी केजी से और ज्यादा मिक्दार मे आता है की कपडे तक भिग जाते है!पानी टखनो तक बहता रहता है! इस वजह से बिमारी मे मुब्तला औरत ज्यादा परेशान रहने लगती है! कमर मे दर्द, जिस्म के हिस्से खिंचे-खिंचे से लगते है! मिजाज मे चिडचिडा पन और गुस्सा बढ जाता है! घबराहट ज्यादा होती है!खाना हज्म नही होंता, पेशाब बार- बार आता है, दिल की धडकन बढ जाती है! इस मर्ज मे मुब्तला औरते खाने मे चावल, बैगन, गोभी, माश (उडद की दाल) वगैरह से परहेज करे!


              🔵 नुस्खा जात 🔵


1⃣ कुछ मिक्दार मे देसी बबूल की फल्ली सुखा कर बारीक पाउडर बना ले! 2 ग्राम  सुबह मे और 2 ग्राम दोपहर मे पानी के साथ ले!


2⃣ पच्चीस ग्राम मुल्तानी मिट्टी आधा लिटर पानी मे दो घंटे तक भिगोए रखे फिर उसे छान ले! रोजाना यह पानी 125 ML पानी चार बार पिए!


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/12/blog-post_10.html

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🔵 जनाना (औरतो के) मर्ज और उनका इलाज


       🔵 हैज का बंद हो जाना 🔵


     औरत को हर महिने पाबंदी से जो गंदा खुन आता है, वह मकर्रर वक्त पर आता है! अगर औरत हामेला हो तो यह खुन आना बंद हो जाता है! जो कुदरती तौर पर होता है!बच्चे को दुध पिलाने के दिनो मे और ज्यादा उम्र हो जाने के बाद भी हैज का खुन बंद हो जाता है!इस मे कोई फिक्र की बात नही! ना ही उस वक्त किसी इलाज की जरुरत है! लेकीन बगैर हमल के ही खुन आना बंद हो जाए तो यह बिमारी है! जिसका फौरन इलाज करना चाहिये! इस मर्ज की पहेचान यह है की सर, कमर, और पैरो मे दर्द रहता है, और मिजाज मे चिड चिडापन वगैरह!


              🔵 नुस्खा जात 🔵


 👉🏻     सोए (सोया) के बिज तिन ग्राम, गाजर के बिज तिन ग्राम, मेथी के बिज तिन ग्राम इन सबको 250 ML पानी मे इतना उबाले की आधा रह जाए, फिर छान ले और दिन मे दो बार उस पानी को पिए!


💫    रहोमानी इलाज : यहॉ एक नख्श दिया जा रहा है! जिसे मोम जामा करके मर्ज  मे मुब्तला औरत के बाएं रान पर बांध दे! इंशा अल्लाह तआला हैज हस्बे मामुल जारी हो जाएंगा! नख्श इस पोस्ट के बाद भेजा जाएंगा! 


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🔵 जनाना (औरतो के) मर्ज और उनका इलाज


🔵 हैज दर्द से आना 🔵


👉🏻     कुछ औरतो को हैज आने से पहले कुल्हो और रानो मे सख्त दर्द होता है! कभी- कभी मतली और उल्टी भी होती है! हैज का खुन बहुत कम मिक्दार मे आता है, दर्द के साथ आता है!


              🔵 नुस्खा जात 🔵


💫 हिंग पॉंच ग्राम, गुड छह ग्राम ले! दोनो को मिला कर हैज के दिनो मे (5 या 6 दिन) तक रोजाना सुबह खाए!


         🔵 पेशाब मे जलन  🔵


👉🏻     इस बिमारी मे औरतो को काफी तक्लीफ होती है! और मकामे मख्सुस मे खुजली और जलन होती है! और खास कर पेशाब करते वक्त जलन और एक तरह की बेचैनी होती है! पेशाब के बाद तहारत न करने या ज्यादा गर्म चिजे खाने मे इस्तेमाल करने से भी पेशाब मे जलन की शिकायत पैदा होती है! शादी-शुदा औरतो मे पेशाब मे जलन की शिकायत ज्यादा तर मुजामेअत के बाद शर्मगाह को न धोने के वजह से होती है!


              🔵 नुस्खा जात 🔵


1⃣ निम के ताजा पत्ते 125 ग्राम ले, पत्तो को एक लिटर पानी मे उबाल कर छान ले! फिर उस पानी मे 3 ग्राम ि हुआ सुहागा मिलाकर शर्मगाह और खुजली के मकाम को सुबह व शाम धोए!


2⃣ काफुर (कपुर) 3 ग्राम, गुलाब जल (पानी) 25 ML ले! काफुर को पिसकर गुलाब जल मे घोल दे! एक साफ कपडा लेकर उसमे भिगोए, और जलन कू जगह रखे, जितनी बार और जबतक जरुरत हो इस अमल को दोहराते रहे!


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣7️⃣4️⃣


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🔵  अज़ल (निरोध, Condom) का इस्तेमाल


     ज्यादा बच्चे पैदा न हो, उसके लिये मौजुदा दौर मे निरोध, कॉपर टी, माला-डी (खाने की गोलीयॉं) वगैरह इस्तेमाल मे लाई जा रही है! अहदे रिसालत मे सिलसिला पैदाईश को रोकने को या कम करने के लिए कुछ हजरात अपनी बांदियों से अज़ल किया करते थे!


💫  अज़ल क्या है? :- अज़ल उस कहते है की मुबाशरत के वक्त जब मर्द को इंजाल होना करीब हो, तो मर्द अपने आले को औरत की फर्ज से निकाल कर मनी रहम के बाहर खारीज कर दे! इस तरह जब मर्द की मनी औरत के रहम मे नहीं पहुंचती है तो हमल करार नही पाता!


     हदीसों के मुताअला से मालुम होता है के नबी ए करीम ﷺ के जाहीरी जमाने मे भी कुछ सहाबा ए किराम औलाद की पैदाईश को रोकने के लिये अज़ल किया करते थे! चुनांचे इसका सुबुत अहादीस की सैकडों किताबो मे मिलता है!


📚 हदीस : हजरत जाबीर रदि अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है..........

"हम नबी ए करीम ﷺ के मुबारक जमाने मे अज़ल किया करते थे, हालांकी कुरआन ए करीम नाजील हो रहा था!" हजरत मुहद्दीस इमाम तिर्मीजी रदि अल्लाहु तआला अन्हु इस हदीस के मुतअल्लीक इर्शाद फर्माते है के यह हदीस हसन सही है!

📚 [तिर्मीजी शरीफ,जिल्द 1 सफ: नं-583] 


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🔵  अज़ल (निरोध, Condom) का इस्तेमाल


📚 हदीस : मिश्कात व मुस्लीम शरीफ मे सहाबी ए रसुल हजरत जाबीर रदि अल्लाहु तआला अन्हु से यह रिवायत मरवी है के "इज़ल के मुतअल्लीक हुजुर ﷺ को खबर पहुंची लेकीन आपने हमे मना न फर्माया!"

📚 [मुस्लीम शरीफ,जिल्द 1 सफ: नं-465, मिश्कात शरीफ जिल्द 2 सफ: नं-87] 


💫 खुलासा अज़ल करने का मक्सद यह होता है की हमल न ठहरे (यानी औलाद की पैदाईश को रोका जा सके) इस मक्सद के तहत मर्द अपनी मनी को औरत के रहम मे जाने से रोकता है! यही मक्सद निरोध  से हासील होता है! चुनांचे अज़ल पर क्यास करके यह कहा जा सकता है की जिस तरह अज़ल नाजाइज नही इसी तरह निरोध का इस्तेमाल भी नाजाइज नही होंगा! क्यो के अज़ल और निरोध दोनो से एक ही मक्सद हासील होता है!


👉🏻  अहादिस व फिक्ह की मुस्तनद किताबो मे यह नक्ल है की अज़ल अपनी बीवी की इजाजत के बगैर नही कर सकता!


📚 हदीस : इमाम अबदुर्रज्जाक और इमाम बैहकी  हजरत इब्ने अब्बास और इमाम तिर्मीजी, इमाम मालीक बिन अनस  रदी अल्लाहु तआला अन्हुम रिवायत करते है की.........

"आजाद औरत  (यानी बीवी) से बगैर उसकी इजाजत के अज़ल मना है!"

📚 [बैहकी, तर्मीजी शरीफ,जिल्द 1 बाब नं- 773 हदीस नं-1134 सफ: नं-583] 


📚 हदीस : अमीरुल मोमिनीन हजरत उमर फारुख रदी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है.........

" रसुलुल्लाह ﷺ ने आजाद औरत (बीवी) से बगैर उसकी इजाजत के अज़ल करने से मना फर्माया"!

📚 [इब्ने माजा जिल्द 1, बाब नं-618, सफ नं-539] 


📚 हदीस : हजरत इमाम मालीक  रदी अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है.........

"कोई अपनी बीवी से अज़ल न करे मगर उसकी इजाजत से"

📚 [मुअत्ता इमाम मालीक  जिल्द 2, बाब नं-34, सफ नं-476] 


👉🏻 मुसन्नीफ ने अपने तौर पर जो तहकीक की उसमे यह पाया की मसअला अज़ल मे हन्फीया,मालकीया और शाफई के दर्म्यान इख्तिलाफ है! हनफी और मालीकी आजाद औरत से (यानी बीवी) से अज़ल बगैर उसकी इजाजत के मकरुह जानते है! जबकी शाफई बगैर किसी कराहत के बिला इम्तियाज जाइज ख्याल करते है! मगर यह की औलाद से बचने की गर्ज से हो तो उस वक्त यह उनके नज्दीक भी मकरूह है!


💫 इन तमाम अहादीस से मालुम हुआ की औरत से जिमआ से पहले अज़ल करने या निरोध के इस्तेमाल की इजाजत जरुरी है! हनफी मजहब की बिना इस वज्हे अक्ली पर है की जिमाअ दरअसल बीवी का शौहर पर हक है! और बजाहीर जिमआ वही माना जाता है जिसमे अज़ल न हो लिहाजा अगर उसके खिलाफ यानी अज़ल की सुरत मत्लुब हो तो साहीबे हक (यानी अपनी बीवी) से अज़ल की इजाजत तलब करनी जरुरी है, और अगर बीवी अज़ल से या मौजुदा दौर मे निरोध (कंडोम) के इस्तेमाल से मना करे तो फिर उसे इस्तेमाल मे नही ला सकता!


💫 अभी आप पढ चुके की अज़ल नाजाइज नही लेकीन तस्वीर का एक दुसरा रुख और भी है! वह इंशा अल्लाह तआला अगले पार्ट मे पढे.......


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       🔵  औलाद के कातील  🔵   


 बच्चे की पैदाईश का सिलसिला हमेशा के लिये खत्म करने के लिये मर्द का नसबंदी कराना और औरत का ऑप्रेशन (Operation) करा लेना, या ऐसी दवा का इस्तेमाल करना जिससे बच्तो की पैदाइश हमेशा के लिए बंद हो जाए इस्लाम मे सख्त नाजाइज व हराम है


💦  आजकल लोगो मे यह खयाल आम तौर पर पाया जा रहा है, की ज्यादा बच्चे होंगे तो खाने पीने की किल्लत होंगी, खर्च बढेंगे, रहने के लिये जगह की कमी होंगी वगैरह वगैरह! अफसोस! यह खयालात सिर्फ गैर मुस्लीम कौमो के नही बल्की उनमे जदीदुल खयाल मुसलमानो की अक्सरीयत भी शामील है! यकीनन ऐसे खयालात शरीअत ए इस्लाम के खिलाफ है! मुसलमानो को ऐसा अकीदा रखना किसी तरह जाइज नही! भला इंसान की हैसियत ही क्या है की वह किसी को खिलाए और किसी की परवरीश करे, बेशक हकीकी रज्जाक और पालने वाला खालीक बारी तआला ही है! क्या आपने नही देखा की इंसान अपनी सारी तदबीरे मुकम्मल कर लेता है! लेकीन चंद दिनो का कहत (सुखा, आकाल) इंसान को भुकमरी पर मजबुर कर देता है! इसी तरह कभी-कभी ज्यादा बारीश भी इंसान के किए कराए पर पानी फेर देती है और हाथ कुछ नही आता! मालुम हुआ की हकीकत मे खिलाने और परवरीश करने वाला सिर्फ अल्लाह अज्जा व जल्ला है!


💎 आयत : रब तबारक तआला इर्शाद फर्माता है......

وَ مَا مِنۡ دَآبَّۃٍ  فِی الۡاَرۡضِ  اِلَّا عَلَی اللّٰہِ  رِزۡقُہَا.....

       "और जमीन पर चलने वाला कोई ऐसा नहीं जिसका रिज्क अल्लाह के जिम्मे करम पर न हो!"

📕 [सुराह हुद, आयत नं. 6]


💎  आयत : और एक दुसरे मकाम पर रब तबारक तआला इर्शाद फर्माता है

وَ لَا تَقۡتُلُوۡۤا  اَوۡلَادَکُمۡ  خَشۡیَۃَ  اِمۡلَاقٍ ؕ نَحۡنُ نَرۡزُقُہُمۡ  وَ  اِیَّاکُمۡ ؕ اِنَّ  قَتۡلَہُمۡ کَانَ خِطۡاً کَبِیۡرًا ﴿۳۱﴾

     "और अपनी औलाद को कत्ल न करो मुफ्लीसी (गरीबी) के डर से हम उन्हे भी रोजी देंगे और तुम्हे भी, बेशक कत्ल बडी खता (गुनाह) है!"

📕 [सुराह बनी इस्राईल,  आयत नं. 31]


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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣7️⃣7️⃣


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       🔵  औलाद के कातील  🔵   


 👉🏻 अपनी बात : पिछली पोस्ट की दो आयतो पर गौर करे तो निशानीयॉं हमारे सामने मौजुद है! हमे जिंदा रहने के लिये सांस लेना जरुरी है! अब जरा गौर करे जब बच्चा मॉ के शिकम मे होता है! जिसके लिये अल्लाह तआला ने उस बच्चे के लिये सांस लेने का भी इंतेजाम किया है! बेशक वही पालने वाला है! और उस बच्चे की गिजा (खाने) का भी इंतेजाम किया है! वही रिज्क देने वाला है!


        अब उससे बडी बात अल्लाह तआला कितना निगेहबान है के उसने मॉ के पिस्तान (स्तन) मे उस बच्चे के दुनीयॉं मे कदम रखने से पहले उसके लिये दुध (रिज्क) का इंतेजाम भी कर दिया! और यह दुध कोई ऐसा वैसा नही आज की Medical Science तो आज Doctor के जरीये मॉ का पहला दुध बच्चे को जरुर  पिलाने के लिये कह रही है! इस दुध से बच्चे मे कुव्वते मुदाफीयत (रोग प्रतिकारक शक्ती Immunity Power) बढती है!  उस बच्चे को पालने का इंतजाम भी अल्लाह तआला ने अपनी कुदरत से कर रखा है! सुभ्हान अल्लाह!


📚 हदीस : हजरत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रदी अल्लाहु तआला अन्हु ने फर्माया की मैने हुजुर ए अक्रम ﷺ से अर्ज किया........


"या रसुलुल्लाह! कौन सा गुनाह सबसे बडा है? फर्माया "तु अल्लाह का किसी को शरीक ठहराए, हांलाकी उसने तुझे तुझे पैदा किया है!"  फिर अर्ज किया की फिर कौन सा? फर्माया.......... "तु अपनी औलाद को इस डर से कत्ल करे की वह तेरे साथ खाएंगी!"

📚 [बुखारी शरीफ जिल्द 3,  बाब नं. 576, सफ: नं. 345]


💫 देखा आपने औलाद को कत्ल करना कितना बडा गुनाह है! काश मुसलमान इस हदीसे पाक से इबरत हासीव करे और नसबंदी व ऑप्रेशन के जरीये इस कत्ल गिरी से बचे!


📚 हदीस : हजरत सैय्यदना इमाम गजाली रदी अल्लाहु तआला अन्हु फर्माते है के हुजुर ए अक्रम ﷺ ने इर्शाद फर्माया........

"औलाद की खुशबू जन्नत की खुशबु है!"

📚 [मुकाशफतुल कुलुब सफ: नं. 515]


👉🏻 इस बारे मे बहुत सी हदीस वारीद है!हक पसंद के लिये इसी कद्र काफी और शाफी! अल्लाह तबारक तआला तौफीक अता फर्माए! आमीन!


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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣7️⃣8️⃣


      🙎🏻‍♂️🧕🏻 करीना-ए-ज़िंदगी 🧕🏻🙎🏻‍♂️


        🔵  सोनो ग्राफी या (X-Ray)  🔵   


इस दौर मे हर शख्स अपने आपको तरक्की याफ्ता और मॉर्डन कहलवाना ज्यादा पसंद करता हैै! लेकीन कुछ लोग हरकतो के ऐतेबार से आज से 1450 पहले अरब के जाहीलो से बढकर बल्की उन से कुछ ज्यादा ही जाहिल नजर आते है! अरब मे हुजुर ﷺ के ऐलान ए नबुवत से पहले वहॉ के काफीर और मुशरीकीन के यहॉ जब लडकी की पैदाईश होती तो वह उसे जमीन मे जिंदा गाड देते थे! और अगर लडका पैदा होता तो उसकी परवरीश बडे लाड प्यार से किया करते! बस वही काम इस दौर मे कुछ पढे लिखे और मॉर्डन कहलाने वाले जाहिल कर रहे है! तरीका थेडा मुख्तलीफ इख्तीयार किया है! एक्सरे सोनोग्राफी के जरीये यह मालुम कर लेते है के औरत के पेट मे लडका है या लडकी! अगर लडकी हो तो उसे खत्म कर दिया जाता है, यानी हमल गिरा दिया जाता है!


🔥 किस कद्र जालीम है वह औरत और मर्द जो एक नन्ही सी जान को दुनीयॉ मे ऑंख खोलने से पहले ही मौत की निंद सुला देते है! उन औरतो पर सैकडो लानते जो खुद एक औरत हो कर अपने जैसी एक जिन्स को कत्ल करती है! और उस मर्द पर भी सैंकडो लानते जो यह काम करने के लिये अपनी औरत (बीवी) को मजबुर करता है! क्या यह जमाना ए जाहीलीयत के काफीरो और मुशरीको की पैरवी नही? क्या यह एक खुला हुआ कत्ल नही?


💎 आयत : अल्लाह तबारक तआला इर्शाद फर्माता है...........

قَدۡ خَسِرَ الَّذِیۡنَ قَتَلُوۡۤا  اَوۡلَادَہُمۡ سَفَہًۢا بِغَیۡرِ عِلۡمٍ 

    "बेशक तबाह हुए वह जो अपनी औलाद को कत्ल करते है अहमकाना जिहालत से!" 

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣7️⃣9️⃣


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        🔵  सोनो ग्राफी या (X-Ray)  🔵   


📚   हदीस : सहाबी ए रसुल हजरत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु तआला अन्हु "अल-असराउल-मेहराज" मे नक्ल फर्माते है..........

हुजुर ए अक्रम ﷺ ने इर्शाद फर्माया!............

"मेहराज की शब मैने जहन्नम मे दरख्तो मे लटकी हुई औरते देखी की उन पर खौलता हुआ गर्म पानी डाला जाता तो उनका गोश्त झुलस जाता और तुकडो मे गिर पडता, मैने पुछा ऐ जिब्राईल! यह कौन औरते है? तो जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) ने मुझे बताया "या रसुलुल्लाह! यह वह औरते है जो अपनी औलाद को खाने पिने और उनकी परवरीश व तर्बीयत के खौफ की वजह से दवाएे पिकर अपनी औलाद को मार डालती थी!"

📚 [अल-असराउल-मेहराज, उर्दु तर्जुमा, सफ नं 23]


💫 दुनीयॉ के तमाम मुहज्जब ही नही मुहज्जब कौमो मे भी इंसान का कत्ल करना, उसकी जान लेना सख्त जुर्म करार दिया जाता है! कातील की सजा कत्ल ही करार पाई है! इसलिये की कातील हकीकत मे समाज मे एक फर्द की जान लेकर आलम ए इंसानियत पर जुल्म कर रहा है! कत्ल मे जवान, बुढा, हत्ता के एक दिन का बच्चा सब बराबर है! तो फिर रहम ए मादर के महफुज कमरे मे आराम करने वाला नौनिहाल जो इंसानी शक्ल अख्तियार करके एक बेहतरीन काबील दिमाग लेकर आलम ए इंसानियत के लिये नफा बख्श हो सकता हो, उसको खाक मे मिलाने वाला, उसको बर्बाद करने वाला, उसको जहर देकर हलाक करने वाला, जमीन मे दफ्न या जंगल और नालीयों मे डालने वाले को किस उसुल के मुताबीक मुजरीम और कातील न करार दिया जाए?????


👉🏻  इन बातो से नसीहत हासील करे, जो जान बुझकर हमल गिरा देते है! अभी यहॉ दुनीयॉ मे मन-मानी कर लो लेकीन याद रहे इंसाफ जरुर होना है ऐसी अदालत मे जहॉ न कोई रिशवत काम आएंगी न ही कीसी वकील की जिरह! वह अल्लाह रब्बुल इज्जत की अदालत है जहॉ ना इंलाफी नही होती!


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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣8️⃣🅾️


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अल्लाह और उसके रसूल पर है जब तेरा इमान क्यों मायूस होता है और क्यों होता है परेशान ए मुसलमान।।


ए मुसलमान जरा गौर तो कर, देख जरा अपने जिस्म की तरफ तवज्जों तो कर..... हात, पांव, सर, चेहरा, कान, नाक ऑंखें मुंह जबान...... जिसे मेरा-मेरा कहते हुए कभी थकती नहीं तेरी जबान।।


  पर जरा देखतो तेरी औकात जिसे तु अपना कहता है,  दो मिनट के लिए भी तो तु रोक नही सकता अपनी मर्ज़ी से अपनी सांसों को ए नादान इंसान।


जिस्म जिसे मेरा मेरा कहते थकती नहीं तेरी जबान, यह तो अमानत है अल्लाह की वहीं तो इसे चलाता है वही तो है हकीकी बादशाह। अल्लाह उसका रसुल है जब तेरा निगेहबान फिर क्यों होता है परेशान... ए नादान ।।


अरे हौसला हारे न इन्सान परेशानी में।।

हर बना काम बिगड जाता है नादानी में।।


सब्र हर हाल में हासील है परेशानी में।।

डुब सकती नहीं तुफान की तुगयानी में।।

जिसकी कश्ती हो मुहम्मद  ﷺ की‌ निगेहबानी में।।


👉🏻 एक पैगाम मुहम्मद मुस्तफा ﷺ के गुलामों के नाम


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📚 हदीस हज़रत अब्दुल्ला इब्ने मसऊद रिवायत करते कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया "सबसे बड़ा गुनाह येह है कि अल्लाह का किसी को शरीक ठहराए फिर उसके बाद का गुनाह येह है कि अपनी औलाद को खाने पीने के ख़ौफ से कत्ल किया जाए।" 

📚(बुखारी शरीफ, जिल्द 3, बाब नं. 576, हदीस नं. 939, सफा नं. 345) 


🌹👉🏻 रिवायत - एक रिवायत में है कि, बरोजे कियामत जब हिसाब किताब होगा तो कुछ ऐसे मॉ - बाप भी होंगे जिन के आमाल अच्छे होंगे लिहाजा उन्हें जन्नत में जाने का हुक्म दिया जाएगा। जब येह लोग जन्नत की तरफ जा रहे होंगे तभी कुछ सर कटे बच्चे वहाँ पहुँचेगे जिन के सिर्फ धड़ होंगे सर न होंगे उन के धड़ों से आवाज़ आएगी 

"ए रब्बुल इज्जत ! हमें इन्साफ चाहिये" 

 रब तआला इरशाद फरमाएगा  "हाँ कहो आज इन्साफ़ का ही दिन है" वोह अर्ज करेगे अए अल्लाह येह जन्नत में जाने वाले लोग हमारे मॉ बाप है, और हमें इन से तकलीफ पहुंची है" वोह माँ बाप हैरत से कहेंगे" तुम्हें तो हम जानते भी नहीं तुम हमारी औलाद कैसे हो सकते हो" वोह सर कटे बच्चे जवाब देंगे "हाँ तुम हमें पहचान भी नही सकते क्योंकि तुम ने हमें देखा ही नहीं हम वही है जिन्हें तुम ने दुनिया में आने से पहले ही मार डाला था और हमल गिरा कर हमारी येह हालत कर दी" 

👉🏻अल्लाह तआला इरशाद फरमाएगा "कहो तुम क्या चाहते हो वोह कहेंगे" 

ए हमारे रब ! भला वोह लोग जन्नत में कैसे जा सकते है जिन्होंने हमें इस हाल को पहुँचाया ! चुनानचे हुक्मे रब्बी होगा इन्हें ( माँ, बाप को ) जहन्नम में डाल दो और इन बच्चों को दुरूस्त कर के जन्नत में दाखिल कर दो "इन हदीसों से और इस रिवायत से वोह फैशन प्रस्त औरतें ईबरत हासिल करे जो जान बूझ कर हमल गिरा देती है। हॉ , हाँ ! अभी तो यहाँ अपनी मन मानी कर लो लेकिन याद रहे इन्साफ ज़रूर होगा और ऐसी अदालत में जहाँ न कोई रिश्वत काम आएगी और न ही किसी वकील की बहेस, यकीनन वोह एक ऐसी वाहिद अदालत है जहाँ कभी ना इन्साफी नहीं होती।


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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣8️⃣2️⃣


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👨‍👩‍👦 औलाद होने के लिए अमल 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻जैसा कि हम पहले भी बयान कर चुके हैं कि हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम को बच्चों से बहुत मुहब्बत थी और आप ने बच्चे पैदा करने को पसंद फरमाया।

👉🏻 लेकिन अफसोस आज कल ज्यादा तर औरतें बच्चे पैदा करने से कतराती है कुछ बेवकूफ औरतों का ख्याल है कि बच्चा पैदा करने से औरत की खूबसूरती ख़त्म हो जाती है और वोह मोटी भद्दी और बद सूरत हो जाती है! येह सब जहालत की बातें, और शैतानी वसवसे है। 


📚 हदीस :- उम्मुलमोमेनीन हज़रत आएशा सिद्दीका रदोयल्लाहो तआला अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया "जो हमला (पेट वाली) औरत हमल की तकलीफ को बरदाश्त करती है उसे अल्लाह की राह में जिहाद करने वाला सवाब मिलता है और जब उसे बच्चा पैदा होने का दर्द होता है तो हर दर्द के बदले उसको एक गुलाम आज़ाद करने का सवाब दिया जाता है।" 

📚 (गुन्यतुत्तालेबीन बाब नं. 5, सफा नं. 173) 


📚👉🏻 हदीस :- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया "काली बच्चे देने वाली मुझ को ज़्यादा पसंद है खूबसूरत बांझ से।"

📚 (मुस्नदे इमामे आजम, बाब नं. 120, सफा 211, कीम्या - ए - सआदत) 


इमाम गज़ाली रदीयल्लाहो तआला अन्हो फरमाते है हुजूरे अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया "औलाद की खूशबू जन्नत की खूशबू है।"


📚 (मुकाशेफतुल कुलूब, सफा नं. 515)

 इस हदीस से येह साबित होता है कि जो बच्चे पैदा करने को अयेब समझते है वोह जन्नत की खूशबू से महरूम है।


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👨‍👩‍👦 औलाद न होने की वजूहात 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻कुछ लोगों को औलाद नहीं होती इस की बहुत सी वजूहात हो सकती है 

👉🏻 मसलन - अल्लाह तआला की मर्जी येही है कि औलाद न हो।

 चुनानचे इस बात के सुबूत में येह दलील सब से ज़्यादा अहेम होंगी के हुज़रे अकरम मल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम की कुल ग्याहरा ( 11 ) बीवीयाँ थी लेकिन आप को औलाद सिर्फ दो बीवीयों से ही हुई बाकी बीवीयों से आप को कोई औलाद न हो सकी, अल्लाह तआला की मर्जी यही थी। 

🌹👉🏻येह नहीं कि मआजल्लाह हुजूर की दूसरी बीबीयों में कोई नुक्स था और न ही मआजल्लाह सरकार में। 


🌹👉🏻 हदीस :- हज़रत इमाम अबूल फ़ज़ल काजी अय्याज़ रदीअल्लाहो तआला अन्हो अपनी सनद के साथ हज़रत अनस रदीअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत करते है "हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम को कुव्वते मर्दाना तीस मर्दो के बराबर अता की गई थी। और हज़रत इमाम ताऊस रदोअल्लाहो तआला अन्हो से मरवी है कि हुजूर को चालीस मर्दो की ताकत अता फरमाई गई थी"

📚 (शिफा शरीफ, जिल्द 1 बाब नं. 2, फसल नं. 8, सफा नं. 155)


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👨‍👩‍👦 औलाद न होने की वजूहात 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻लिहाजा इन तमाम बातों से येह साबित होता है कि औलाद से नवाजने वाला हकीकत में अल्लाह रब्बुल ईज्जत ही है वोह जिसे चाहे अता करता है और जिसे न चाहे अता नहीं करता। उसके अता करने में और महरूम रखने में भी हज़ारों हिकमते है जिसे वही सब से बेहतर जानता है। अगर वोह देना चाहे तो कोई उसे रोक नहीं सकता


🌹👉🏻 हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व हज़रत सारा रदीअल्लाहो अन्हा को जब अल्लाह ने बेटे (हज़रत इसाक अलैहिस्सलाम) से नवाज़ा तो उस वक्त हज़रत इब्राहीम की उमर 120 साल और हज़रत सारा की उमर 99 साल थी। 


📚👉🏻 बच्चे न होने की वजह येह भी हो सकती है कि 

1️⃣👉🏻मर्द की मनी में बच्चा पैदा करने वाले कीड़े ही न हो या फिर कमजोर हो। 

2️⃣👉🏻बचपन या जवानी की गलतीयों की वजह से ना मर्द हो चुका हो। 

3️⃣👉🏻औरत बान्झ हो, यानी उसकी बच्चादानी में औलाद पैदा करने वाले अन्डे (Ova) न हो।

4️⃣👉🏻औरत की बच्चा दानी का मुँह बन्द हो।


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       👨‍👩‍👦 औलाद न होने की वजूहात 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻इस तरह की कई वजूहात हो सकती है जिस की वजह से औलाद की पैदाईश में रूकावट हो सकती है। अगर मियाँ, बीवी दोनों ही सेहतमन्द हो तो दो (2) साल के अन्दर पहला हमल करार पा जाता है। अक्सर घरों में जब 4 या 5 साल गुज़र जाने पर भी औरत को हमल नहीं ठहरता तो घर की बूढ़ी औरतें औरत को बान्झ समझने लगती है।

 कोई भी औरत हो अगर उसे शुरू ही से हैज़ (माहवारी) का खून हर महीने मुकर्ररा तारीख़ (Fix Period) पर बगैर किसी तकलीफ के आता है और कम से कम तीन दिन और ज़्यादा से ज्यादा दस दिन तक जारी रहता है तो ऐसी औरत को बान्झ नहीं कहा जा सकता। बच्चा न होनी की वजह और कोई दूसरी हो सकती है इस लिए अल्लाह से औलाद के लिए दुआ करे और मर्द व औरत दोनों अपना चेकअप (मुआइना) कराए और इलाज की तरफ रूख़ करें। हम यहाँ चन्द वज़ीफे नक्ल कर रहे है जो आसान भी है और इन्शाअल्लाह इस की बरकत से घर में खूशीयाँ भी आएगी। 


📚 हदीस :- हज़रत मौला अली रदीअल्लाहो तआला अन्हो रिवायत करते है कि "एक शख्स रसूले खुदा सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम की खिदमत में आया और अर्ज किया "या रसूलुल्लाह ! मेरे घर औलाद नहीं होती" हुजूरे अकरम सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया "तो अंडे खाया कर" 


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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣8️⃣6️⃣


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       👨‍👩‍👦🤔 औलाद होगी या नहीं 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻अक्सर बे औलाद, औलाद की ख्वाहिश में बड़ी बड़ी रकम बरबाद कर देते हैं इस लिए दवाओं पर रूपये लगाने से पहले इम्तिहान ज़रूरी है। इसके लिए हम यहाँ एक अमल लिख रहे है जिस से इन्शाअल्लाह पता चल जाएगा कि औलाद किस्मत में है या नहीं। 


🌹👉🏻 अमल :- औरत को चाहिये कि जुमेरात को रोज़ा रखें, इफ्तार के वक्त इतना दूध ले जो पेट भर कर पी सके, फिर सात (7) बार सूरए "मुजम्मिल" पढ़े। बेहतर येह है कि औरत खूद पढ़े अगर सही न पढ़ संके तो किसी आलिम या हाफ़िज़ से पढ़वा कर दूध पर दम करवाए फिर इसी दूध से रोजा इफ्तार करे। अगर दूध हज़म हो जाए तो इन्शाअल्लाह औलाद होगी। और अगर दूध हज़म न हुआ तो (अल्लाह न करे) फिर सब करे। यानी औलाद न होगी। लेकिन फिर भी अल्लाह चाहे तो अता फरमा सकता है, अल्लाह की कुदरत से मायूस न हो कि मायूसी मुसलमान का काम नहीं।

📚 (शम् शबिसताने रजा, जिल्द 1, सफा नं. 3)


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              📮 पोस्ट नम्बर 1️⃣8️⃣7️⃣


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       👨‍👩‍👦 औलाद होने के लिए अमल 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻 अमल (1) :- जिस औरत को औलाद न होती हो या हमल न रहता हो तो चाहिये कि वोह सात दिन लगातार रोजे रखें और इफ्तार के वक्त एक गिलास पानी ले कर "अल मुसव्विरो" एक्कीस (21) बार पढ़ कर पानी पर दम करे और उसी पानी से इफ्तार करे। इन्शाअल्लाह सात रोज़ न गुज़रने पाएगे कि हमल रह जाएगा और फरज़न्द (लड़का) पैदा होगा।

📚 (वज़ाइफ रजविया, सफा नं. 214) 


🌹👉🏻 अमल (2) :- जो कोई अपनी बीवी से सोहबत करने से पहले “अलमुता कब्बिरो" दस (10) बार पढ़े फिर उस के बाद सोहबत करे तो खुदा उसे फरमाबरदार लड़का इनायत करें। 

📚(वजाइफ़ रज़वीया, सफा नं. 214) 


🌹👉🏻 अमल (3) :- अच्छी किस्म का एक अनार ले कर उस के चार टूकड़े करे हर टूकड़े पर "सूरए यासीन शरीफ" पढ़े और उस पर दम करता जाए। उस के बाद पाव भर किशमिश और पाव भर भुने हुए चने ले कर फातिहा दे, फिर उसे बच्चों में तकसीम कर दें, और अनार का एक टुकड़ा मर्द खाए और एक औरत खाए रात को सोहबत करे, सुबह बचे हुए वोह दो टूकड़े दोनों मर्द व औरत खा लें और गुस्ल कर के नमाजे फजर अदा करे।

📚 (शम् शबिसताने रज़ा, सफा नं. 30)


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       👨‍👩‍👦 इन्शाअल्लाह लड़का ही होगा 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻 अगर किसी औरत को सिर्फ लड़कियाँ ही लड़कियाँ पैदा होती हो तो उस हालत में लड़के की ख्वाहिश और ज़्यादा बड़ जाती है फिर कुछ लोग ऐसी हालत में लड़के के लिए रूपये पानी की तरह बहा देते है यहाँ तक के कुछ कम अक्ल जादू टोने और गन्दे इलाज से भी बाज नहीं आते। हम यहाँ चन्द ऐसे अमल लिख रहे है जो जाइज़ और फायदेमन्द व सौ फिसद कामयाब है। इन्शाअल्लाह इस से फायदा ज़रूर होगा। लेकिन याद रहे येह अमल जब ही करे जब लड़का न हो और बहुत ज्यादा लड़कियाँ हो। 


🌹👉🏻 अमल ( 1 ) :- कच्चे सूती धागे के सात ( 7 ) तार ले फिर हर तार औरत की पेशानी के बाल से पांव की उंगली तक नाप ले अब सातों धागों को मिला कर उन पर ग्यारह ( 11 ) बार "अयतलकुर्सी" इस तरह पढ़े के हर एक बार एक गिठान लगाता जाए और दम करता जाए ग्याराह गिठान बान्धने के बाद इन धागों को औरत की कमर पर बान्ध दे। जब तक बच्चा पैदा न हो जाए हरगिज़ न खोले यहाँ तक कि गुस्ल के वक्त भी जुदा न करे जब हमल ज़ाहिर हो तो घर, की पकाई हुई सफेद मीठी चीज़ पर जैसे सफेद मीठा हलवा, पेड़े वगैरा पर हुजूर सैय्यदना गौसे आजम व हज़रत शेख मुहम्मद अफज़ल कानपूरी और सैय्यदना आला हज़रत रदीअल्लाहो तआला अन्हुम की फातिहा दिलाए और दो रकअत नफिल नमाज अदा करे। फिर खड़े हो कर बगदाद शरीफ की तरफ मुँह कर के दुआ करे "या हुजूर गौसे आजम ! मुझे लड़का हुआ तो हुजूर की (यानी गौसे पाक को) गुलामी में दे दूंगा और उसका नाम गुलाम मोहियुद्दीन रलूँगा" इस के बाद यकीन रखें कि लड़का ही होगा। इन्शाअल्लाह तआला जब लड़का हो तो वोह धागा माँ की कमर से खोल कर बच्चे के गले में डाले। बच्चे की हर सालगिरह पर एक रूपया एक डब्बे में डालते रहें जब बच्चा 11 साल का हो जाए तो इन 11 रूप्यों की शीरनी या इस में जितना चाहे और रूपये डाल कर नियाज दिलाए और उस धागे को किसी महफूज जगह दफन कर दे।

📚 (शम्शबिस्ताने रजा, सफा नं. 26)


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       👨‍👩‍👦 इन्शाअल्लाह लड़का ही होगा 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻 अमल (2) :- हज़रत अबू सुएब हरानी ने इमाम अता رضی اللہ عنہ से (जो इमामे आजम अबू हनीफा के उस्ताद है) रिवायत किया है कि "जो चाहे के उस की औरत के हमल में लड़का हो तो उसे चाहिये कि अपना हाथ अपनी औरत के पेट पर रख कर कहे।

🌹👉🏻 दुआ :- इन काना ज़क रन फकद सम्मैताहू मुहम्मादा।

👉🏻 तर्जमा :- अगर लड़का है तो मैं ने उस का नाम "मुहम्मद" रखा। 

जब लड़का पैदा हो जाए तो उस का नाम "मुहम्मद" रखें।

📚 (अहकामं शरीअत, जिल्द 3. सफा नं .83)


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       👨‍👩‍👦 इन्शाअल्लाह लड़का ही होगा 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻 अमल (3) :- हामला (हमल वाली औरत) के पेट पर सुबह के वक्त उसका शौहर ऊन्नीस (19) मरतबा “अलमुबदीओ" शहादत (सीधे हाथ के अंगूठे से लगी हुई पहली उंगली) से लिखे तो बफजलहि तआला हमल गिरने का ख़ौफ़ जाता रहेगा। और जिस का हमल देर तक रहे यानी महीने से (थोड़ा) ज्यादा गुज़र जाए तो उस औरत के पेट पर लिखने से जल्द लड़का पैदा होगा।

📚 (वजाइके रजावीया , सफा नं. 220) 


🌹👉🏻 अमल (4) :- इस नक्श को ज़अफरान से लिख कर हामला औरत अपने पास रखे या कमर में बान्धे। इन्शाअल्लाह लड़का पैदा होगा। वोह नक्श पोस्ट के साथ सेंड किया गया है।

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          👨‍👩‍👦 हमल की हिफाजत 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻 अमल ( 1 ) :- अगर किसी औरत के कच्चे हमल गिर जाते है तो कुछ काली मिर्च और अजवाइन ले और उसपर सत्तर (70) बार

 ثُمَّ خَلَقۡنَا النُّطۡفَۃَ عَلَقَۃً  فَخَلَقۡنَا الۡعَلَقَۃَ مُضۡغَۃً فَخَلَقۡنَا الۡمُضۡغَۃَ عِظٰمًا فَکَسَوۡنَا الۡعِظٰمَ لَحۡمًا ٭ ثُمَّ اَنۡشَاۡنٰہُ خَلۡقًا اٰخَرَ ؕ فَتَبٰرَکَ اللّٰہُ  اَحۡسَنُ  الۡخٰلِقِیۡنَ ﴿ؕ۱۴﴾ 

📚(सूरए मोमेनून, पारा 18, आयत 14)


 पड़े फिर “सूरए काफ़ेरून" और "सूरए मुजम्मिल" सात बार और "सूरए अलम नशराह" 11 बार पढ़े अब उन काली मिर्चो और अजवाइन पर दम करे। सात दाने काली मिर्च और थोड़ी अजवाइन औरत को खिलाए जब तक बच्चा पैदा न हो उस वक्त तक हर रोज़ येह काली मिर्च और अजवाइन खाते रहे। इन्शाअल्लाह बच्चा सही सलामत पैदा होगा।

📚 (शम्अ शबिशताने रजा, जिल्द 1, सफा नं. 33)


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      👨‍👩‍👦 हमल के दौरन अच्छे काम 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻जब औरत हमल (पेट) से हो तो उसे चाहिये कि उन दिनों बेहूदा फुजूल बातों, झूट, गीबत, वगैरा से बिल्खुसूस बचे। अच्छी दीनी - गुफतुगू करे, खाने पीने पर ज्यादा ध्यान दे ऐसी गिज़ाएं (खाने) इस्तेमाल करे जो ताकत पहुंचाने वाली हो। ज्यादा से ज्यादा खूश रहे नमाज़ की पाबन्दी रखें कुरआने करीम की तिलावत ज्यादा से ज्यादा करते रहे, जिस क़द्र हो सके खूब खूब दुरूद शरीफ पढ़े। इन सब बातों का बच्चे पर बड़ा असर पड़ता हुजूर गौसे आजम रदीअल्लाहो तआला अन्हा का वाकि इस बात की दलील है कि - “हुजूर गौसे पाक जब अपनी माँ के शिकमे मुबारक ( पेट ) में थे तो वोह काम काज करते करते कुरआने करीम की आयतें पढ़ती रहती थी आप अपनी वालिदा ( माँ ) के पेट में ही सुन कर याद कर लिया करते थे । जब आप की वालिदा 14 पारे पढ़ चुकी थी तब ही आप की विलादत ( पैदाईश ) हो गई। चुनानचे आप 14 पारों के माँ पेट से ही हाफिज़ थे बाकी बचे हुए पारे आप ने बाद में उस्ताद से पढ़े। येह हमारे गौसे आजम की एक अदना सी करामत है। वैसे तो आज कल ऐसी करामत का दोबारा होना मुश्किल नज़र आता है लेकिन इस वाकिओ में हमारे लिए येह सबक ज़रूर है कि माँ को चाहिये कि फरमाबरदार, नेक और परहेज़गार औलाद हासिल करने के लिए खूद भी नेक और परहेज़गार बने। क्योंकि माँ की नेकी का औलाद पर बड़ा असर पड़ता है। (वल्लाहो आलम)


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     👨‍👩‍👦 हमल के दौरान सोहबत करना 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻औरत जब हमल से हो तो उस हालत में सोहबत करना शरीअते इस्लामी की रू से मना नहीं है और इस पर कोई गुनाह भी नहीं। लेकिन हकीमों के नजदीक सोहबत न करना बेहतर है कि सोहबत करने से नये हमल के ठहरने का ख़तरा होता है।


🌹👉🏻 हदीस :-) इमामे आजम अबू हनीफा रदीयल्लाहो अन्हो अपनी मुस्नद में हज़रत इब्ने उमर रदीयल्लाहो अन्ही से रिवायत करते है ---- "रसूलुल्लाह صلی اللہ علیہ وسلم ने मना फरमाया हामला ( पेट वाली ) औरतों से सोहबत की जाए जब तक कि वोह जन न लें अपने पेटों के बच्चे।" 

📚(मुस्नदे इमाम आज़ाम, बाब नं. 131, सफा नं. 227) 


🌹👉🏻इन हामला औरतों से मुराद जिहाद में कैद की गई कनीजें है क्यों कि इमामे आज़म से दूसरे तरीक़ से और रिवायत है जिस में हुबली के साथ मीनलसाबी की भी कैद है जिस से साबित होता है कि इससे मुराद कैद की गई औरतें है येह हुक्म अपनी बीवी के लिए नहीं (यानी अपनी मला बीवी से सोहबत कर सकता है)


🌹👉🏻ओलमा - ए - किराम फरमाते है कि --- "वोह औरत जिस का हमल ज़िना से हो उस से सोहबत जाइज़ नहीं (हॉ जिसका शौहर खूद जानी हो उसे सोहबत करने में हर्ज नहीं)


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     👨‍👩‍👦 हमल के दौरान सोहबत करना 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻बच्चा पैदा होने के बाद जब तक बच्चा दूध पीता है उन दिनों तक हकीम हज़रात सोहबत करने से मना करते है। उनके नज़दीक दूध पीते बच्चे की मौजूदगी में बीवी से सोहबत करने से बच्चे को नुकसान है वोह इस तरह कि बच्चा जन्ने के बाद अगर औरत से सोहबत की जाए तो औरत का दूध ख़राब हो जाता है जिस को पीने से बच्चे की सेहत पर असर पड़ता है। शरीअत भी हमें ऐसी बातें इख्तियार करने की हिदायत करती है जो हमारे लिए ही फायदे मन्द हो और उन बातों से मना करती है जिस में हमारे लिए ही नुकसान हो।


🌹👉🏻 हदीस- हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया- "पोशीदा ( छूपे ) तौर पर अपनी औलाद को कत्ल न करो कसम है उस ज़ात की जिसके कबजे में मेरी जान हैं दूध पिलाने के वक्त में बीवी से सोहबत करना सवार को घोड़े की पीठ पर से गिरा देता है।

📚 (अबूदाऊद शरीफ, जिल्द 3, बाब नं. 198, हदीस नं. 484 सफा 172, इब्ने माजा, जिल्द 1, बाब नं. 649, हदीस नं. 2083, सफा नं. 560)


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     👨‍👩‍👦 हमल के दौरान सोहबत करना 👨‍👩‍👧


🌹👉🏻तहकीक येह है कि दूध पीलाने के दौरान औरत से सोहबत करना जाइज़ है और इस हदीस में हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने नसिहतन मना फरमाया है आप का इरशाद ना जाइज़ या मुमानियत के दरजे में नहीं। इस लिए भी कि अगर औरत के दूध पिलाने की वजह से सोहबत करना ना जाइज़ कर दिया जाता तो मर्दो को इससे तकलीफ होती क्योंकि औरत बच्चे को आम तौर पर दो (2) साल तक दूध पिलाती है और मर्द का दो (2) साल अपने आप को औरत से रोकना मुश्किल होता।

🌹👉🏻लिहाज़ा शरीअत ने इसे ना जाइज़ न कहा और सोहबत की इजाजत दी। जैसा कि "इब्ने माजा" व "मिश्कात शरीफ़" की दूसरी एक और हदीस से ज़ाहिर है, वोह हदीस येह है 

🌹👉🏻 हदीस :- नबी - ए - करीम सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम फरमाते है " मैं ने इरादा किया था कि दूध पिलाने वाली औरत से सोहबत करने से मना कर दूं लेकिन फारसी और रूमी भी इस ज़माने में अपनी बीवीयों से सोहबत करते है तो उनकी औलाद को कोई नुकसान नहीं पहुँचता।"

📚 (इब्ने माजा, जिल्द 1, बाब नं. 649, हदीस नं. 2082, सफा नं. 560, मिश्कात शरीफ, जिल्द 2, हदीस नं. 3051, सफा नं.88)


🌹👉🏻 लेकिन बेहतर येह है कि उन दिनों बार बार सोहबत न करे और न ही ज्यादा सोहबत करे।

🤲🏻 ( वल्लाहो तआला आलम )


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     🤰🏻 आसानी से विलादत के लिए 🤰🏻

🌹👉🏻 जब औरत के बच्चा जन्ने का वक्त करीब आता है तो उसे दर्द होता है। कभी कभी किसी औरत को इस कदर ज्यादा दर्द होता है कि औरत उसे बरदाश्त नहीं कर पाती और औरत का इन्तेकाल भी हो जाता है ( अल्लाह महफूज रखे ) 


कुछ औरतों का बच्चा आधा बाहर और आधा अन्दर ही अटक जाता है फिर उसे सही सलामत ज़िन्दा निकाल पाना डॉक्टरों के लिए बड़ा मुश्किल हो जाता है और औरत व बच्चे दोनों की जान पर बन आती है। 


कई बार औरत को दर्द होता रहता हैं लेकिन बच्चा बाहर नहीं आता जिसे ऑपरेशन (Opretion) कर के निकालना पड़ता है। हम यहाँ चन्द ऐसे अमल नक्ल कर रहे है जिनको इस्तेमाल में लाने से इन्शाअल्लाह आसानी से बच्चे की पैदाइश होंगी। 


🌹👉🏻 अमल ( 1 ) :- जब औरत को दर्द शुरू हो तो "मोहरे नुबुवत" और "नअलैन शरीफ" (हुजूर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की जूतीयों) के अक्स (तस्वीर) के बारीक तअवीज़ औरत मुट्ठी में दाब ले या फिर बाजू पर बान्ध ले। इन्शाअल्लाह 5 मिन्ट में बच्चा पैदा होगा।


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     🤰🏻 आसानी से विलादत के लिए 🤰🏻


🌹👉🏻 अमल ( 2 ) :- जब औरत को बच्चा पैदा होने के वक्त ज्यादा दर्द हो रहा हो और विलादत ( जन्ने ) में इन्तेहाई परेशानी हो रही हो तो चाहिये कि येह नक्श ज़अफरान से लिख कर मोमजामा कर के औरत की रान पर बान्ध दिया जाए और जैसे ही बचा पैदा हो जाए। खोल देना चाहिये। इन्शाअल्लाह इस नक्श की बरकत से तकलीफ ख़त्म हो जाएगी । 

वह नक्श पोस्ट के साथ मे सेंड किया जा रहा है।

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     🤰🏻 आसानी से विलादत के लिए 🤰🏻


🌹👉🏻 बच्चे की पैदाईश जब बच्चा पैदा हो जाए तो उसे पहले गुस्ल दे फिर उस के बाद नाल काटी जाए और जिस कदर जल्दी हो सके उस के दाहिने (सीधे) कान में अज़ान और बाए (उल्टे) कान में तकबीर कही जाए। चाहे घर का कोई आदमी ही अज़ान और तकबीर कह दें या कोई आलिमे दीन या फिर मस्जिद का इमाम कहे।


🌹👉🏻 हदीस शरीफ में है जो शख्स ऐसा करे तो बच्चा बचपन की बीमारियों से महफूज रहेंगा फिर अपनी गोद में बच्चे को लिटा कर खजूर या शहेद वगैरा कोई भी मीठी चीज़ अपने मुँह में चबा कर या घुला कर उंगली से उस के मुँह में तालू से लगा दे कि वोह चाट लें।


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        🤱🏻 बच्चे की पैदाईश 🤱🏻


🌹👉🏻 कोशिश येह की जाए के बच्चे को पहली घुटटी (खजूर, शहेद या कोई भी मीठी चीज़ वगैरा) कोई नेक आदमी अपने मुँह में चबा कर अपनी जुबान से पहुँचाए और सब से पहले जो गिज़ा बच्चे के मुँह में पहुँचे वोह खुर्मा हो और किसी बुजुर्ग के मुँह का लुआब (झुटा), कि "तफसीरे रूहुल बयान" में है कि बच्चे में पहली घुट्टी देने वाले का असर आता है और उसके जैसी आदतें पैदा होती है। और येह सुन्नत भी है। 


🌹👉🏻हदीसे मुबारका में है कि सहाबा - ए - किराम, अपने बच्चों की पैदाईश पर हुजूरे अकदस सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम के पास लाते थे और सरकार अपना लुआबे दहन (थूक मुबारक) या दहने मुबारक की कोई चीज़ बच्चे के मुँह में डाल देते।

📚 ( हिस्तं हसीन, सफा नं. 166, फतावा-रज़वीया, जिल्द 9 सफा 46, इस्लामी जिन्दगी, 11)


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   👨‍👩‍👧 लड़की के लिए नाराजगी क्यों ?


🌹👉🏻कुछ लोग लड़कियों को अपने उपर बोझ समझते हैं और लड़कियों को हकीर व जलील जानते हैं, यह बात इस्लामी तअलीमात के सरासर खिलाफ है। लड़की हो या लड़का दोनों का पैदा करने वाला अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ही है। लड़की भी रब तआला की अजीम नेअमत है इसे खूशी खूशी कुबूल करना चाहिये।


🌹👉🏻 हदीसे पाक में है हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदीअल्लाहो तआला अन्हां से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने फरमाया "जिसे लड़की हो फिर वोह उसे जिन्दा दफन न करे, न उस को ज़लील समझे और न तड़के को उस पर अहमीयत दे तो अल्लाह तआला उस को जन्नत में दाखिल करेंगा।" 

📚(अबूदाऊद शरीफ, जिल्द 3, बाब नं. 548, हदीस नं. 1705, सफा नं. 616) 


🌹👉🏻इस हदीस से मअलूम हुआ कि बेटे को बेटी से ज्यादा अहमियत देना मना है बल्कि दोनों के साथ बराबरी का सुलूक करना चाहिये।


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   👨‍👩‍👧 लड़की के लिए नाराजगी क्यों ?


🌹👉🏻 हदीस हज़रत अनस रदीअल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि हुजूरे अकरम सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया जिस ने दो लड़कियों की परवरिश किया यहाँ तक के वाह बालिग हो  गई तो मैं और वोह कियामत के दिन इस तरह करीब होंगे फिर आप ने अपनी दो उँगलियों को मिला कर बताया। 

📚( मुस्लिम शरोफ़ ) 


🌹👉🏻 हदीस:- एक दूसरी हदीस में है कि हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम फरमाते हैं "जिस ने अपनी एक भी लड़की या बहेन की परवरिश की और उसे शराई आदाब सिखाया, उन से प्यार व मुहब्बत से पेश आया और फिर उन की शादी कर दी तो अल्लाह तआला उसे ज़रूर जन्न्त में दाखिल करेगा" 

📚( अबूदाऊद शरीफ, जिल्द 3, बाब नं. 578, हदीस नं. 1706, सफा नं. 677, कीम्या-ए- सआदत, सफा नं. 267 )


🌹👉🏻 हदीस :- बुख़ारी व तिर्मिज़ी शरीफ की एक हदीस में है-- : 

 "जो लोग अपनी बच्चियों को प्यार व मुहब्बत से परवरिश करेगे तो वोह बच्चियाँ उन के लिए जहन्नम से आड़ बन जाएगी"

📚 ( बुख़ारी शरीफ़, तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 1, बाब नं. 1279, हदीस नं. 1980, सफा नं. 907 ) 


रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम के इन इरशादात से मअलूम हुआ कि लड़कियों से मुहब्बत करना और उन को पालना, फिर उन की शादी कर देना बड़े सवाब का काम है और रसूले पाक से करीब होने का जरिया हैं।


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          🧬 निफास का बयान🧬


🌹👉🏻 वोह खून जो औरत को बच्चा जन्ने के बाद आता है उसे निफास का खून कहते है।

 खून आने की कम से कम मुद्दत मुकर्रर नहीं आधे से ज्यादा बच्चा निकलने के बाद एक लम्हे (पल) के लिए भी खून आया तो वोह निफास है। ज्यादा से ज्यादा निफास का जमाना चालीस ( 40 ) दिन, रात है। 


👉🏻 चालीस दिन, रात के बाद जो खून आए वोह निफास नहीं इस्तेहाज़ा है।


👉🏻 मसअला :- निफास की गिनती उसवक्त से होगी जब बच्चा आधे से ज्यादा निकल आया। बच्चा पैदा होने के बाद जिस वक्त खून बन्द हो जाए अगर चालीस दिनों के अन्दर फिर न आए तो उसी वक्त से औरत पाक हो जाती है।


👉🏻 मसलन सिर्फ एक मिन्ट भर खून आया फिर न आया तो बच्चा पैदा होने के उसी एक मिन्ट तक ना पाकी थी फिर पाक हो गई, नहा के नमाज़ पढ़े (अगर रमज़ान हो तो) रोजा रखें फिर अगर चालीस दिनों के अन्दर खून न आया तो येह नमाज़ रोजे सब सही हो गए और अगर फिर आ गया तो नमाज़ रोजे फिर छोड़ दे। अब पूरे चालीस दिन या उस से कम पर जा कर बन्द हुआ तो बच्चे की पैदाइश से उस वक्त तक सब दिन निफास के समझ जाएँगे वोह नमाजे जो पढ़ो बेकार हो गई (लेकिन नमाजों की क़ज़ा नहीं) और फर्ज रोजे थे तो क़ज़ा रखे जाएँगे।

📚 (फतावा-ए-रजवीया, जिल्द 9, निस्फ आखिर, सफा नं. 153)


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          🧬 निफास का बयान🧬


🌹👉🏻 मसला :- अगर किसी को चालीस दिन से ज्यादा खून आया तो अगर उस को पहली बार बच्चा पैदा हुआ है तो चालीस दिन निफास के और बाद के दिन इस्तेहाज़ा के है। इसी तरह किसी को याद नहीं के इस से पहले बच्चा पैदा होने के कितने दिनों तक खून आया था तो इस सूरत में चालीस दिन, रात निफास के और उस के बाद के इस्तेहाज़ा के है। अगर किसी औरत को तीस दिन, की आदत थी (यानी इस से पहले वाले बच्चे की पैदाइश पर तीस दिन खून आया था) लेकिन इस बार चालीस दिन, रात आया तो तीस दिन निफास के समझे और बाकी के दस दिन इस्तेहाज़ा के हैं। 


🌹👉🏻 मसअला :- बच्चा पैदा होने से पहले जो खून आया वोह निफास नही इस्तेहाजा है। हमल गिरने से पहले कुछ खून आया कुछ हमल गिरने के बार तो हमल गिरने से पहले का खन इस्तेहाज़ा है और हमल गिरने के बाद का खून निफ़ास है। लेकिन जब के बच्चे का कोई आजु (जिस का कोई हिस्सा) बन चुका हो वरना पहले वाला हैज़ हो सकता है तो हैल है नहीं तो इस्तेहाज़ा है। 


🌹👉🏻 मसअला :- चालीस दिन के अन्दर कभी खून आया कभी नहीं तो सब निफ़ास ही है चाहे पंद्रह (15) दिनों का फासला (Gap) हो जाए।


🌹👉🏻 मसअला :- निफस के खून का रंग लाल, काला, हरा, पीला, मिट्टी के रंग जैसा गदेला (कीचड़ के रंग जैसा) वगैरा भी हो सकते हैं। 

📚(कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 52, 53)


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          🧬 निफास का बयान🧬


🌹👉🏻 मस्अला :- निफास वाली औरत को नमाज़ पढ़ना, रोज़ा रखना हराम है इन दिनों में नमाजे मुआफ है और उन की कज़ा भी नहीं। अलबत्ता फर्ज़ रोज़ों की कज़ा और दिनों में रखना फर्ज है। इसी तरह निफास वाली औरत को कुरआने मजीद पढ़ना देख कर हो या ज़ुबानी, और इस का छूना चाहे उस के हाशिये को उंगली की नोक या बदन का कोई हिस्सा ही लगें, येह सब हराम है इसी तरह दीनी किताबों का छूना भी हराम है।


 कुरआने करीम के अलावा तमाम वज़ीफे, दुरूद शरीफ कलमा शरीफ वगैरा पढ़ने में कोई हर्ज नहीं। 


🌹👉🏻 मस्अला :- हालते हैज़ (माहवारी) में जिस तरह सोहबत करना हराम है उसी तरह इस में भी (यानी हालते निफास में भी) सोहबत करना सख्त हराम व गुनाहे कबीरा है। लेकिन निफास वाली औरत के साथ खाने पीने और बोसा (चुम्मन) लेने में हर्ज नहीं। (वल्लाहो आलम) 


📚(कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 54)


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               🧬 कुछ ररमें🧬


🌹👉🏻 बच्चे की पैदाईश के मौके पर अलग अलग मुल्कों में तरह तरह की रस्में है। मगर चन्द रस्में ऐसी है जो तकरीबन किसी कदर थोड़े फर्क से हर जगह पाई जाती है। जैसे लड़का पैदा हुआ तो छ रोज़ तक खूब खूशियाँ मनाई जाती है औरतें मिल कर ढोल बजाती है, येह सब हराम है। खूशी मनाने की शरीअत में मनाई नहीं लेकिन ख़िलाफे शरअ काम करने से ज़रूर बचना चाहिये।


 पैदाईश के दिन लड्डू या कोई मीठाई तकसीम करना, सदका खैरात करना कारे सवाब है मगर बिरादरी के डर से और नाक कटने के खौफ से मीठाई तकसीम करना बे फायदा है और अगर सूद पर कर्ज ले कर येह काम किया तो आख़िरत का गुनाह भी। इस लिए इन रस्मों को बन्द करना चाहिए। 

एक रस्म येह भी है कि औरत के मैके के लोग अपने दामाद को अईर करते हैं जिसमें कपड़े के जोड़ें, बच्चे को झूला और कुछ नगदी रूपये व जेवर देते हैं। अक्सर देखा गया है कि मालदार लोग येह सब ख़र्च बरदाश्त कर लेते है लेकिन गरीब लोग इन रस्मों को पूरा करने के लिए सूद पर कर्ज लेते है अगर बच्चा पैदा होने पर किसी औरत के मैके वाले येह रस्में पूरी न करें तो सास व नन्दों के ताने सहने पड़ते है और घर में खाना जंगी शुरू हो जाती है लिहाणा ज़रूरी व बेहतर है कि इन रस्मों को मुसलमान छोड़े ताकि फुजूल ख़र्ची से भी बचा जा सके और ना इत्तेफाकियों का दरवाज़ा भी बंद हो जाए।


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               🧬 कुछ ररमें🧬


🌹👉🏻 आम तौर पर लोग अकिका नहीं करते बल्कि “छट्टी" करते है। छट्टी येह है कि बच्चे कि पैदाईश के छटे रोज़ रात को औरतें जमा हो कर मिल कर गाती बजाती है फिर जच्चा को बाहर ला कर तारे दिखा कर गाती है फिर मीठे चावल तकसीम किए जाते है येह भी मशहूर है कि औरत का पहला बच्चा उसके मैके में ही पैदा हो और सारा ख़र्च औरत के माँ बाप बरदाशत करें अगर वोह ऐसा न करें तो सख़त बदनामी होती है। 


छट्टी करना और दिगर इस तरह कि रस्में जो हमने उपर बयान कि वोह ख़ालिस हिंदुओं की रस्में है जो उन्होंने अकीके के मुकाबले में ईजाद की है। 

लड़की लड़के का अक़ीक़ा करना सुन्नत है और सुन्नत इबादत है और इसी तरह हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम से साबित है अपनी तरफ से इस में रस्में दाखिल करना फुजूल है लिहाज़ा बेहतर है कि मुसलमान इन रस्मों को छोड़ कर अल्लाह और उसके रसूल की खूशनुदी हासिल करे। 

अगर बच्चे की पैदाईश पर मीलाद शरीफ या वअज शरीफ या फातिहा कर दी जाए तो बहुत अच्छा है इसके सिवा तमाम रूसुमात बंद कर देना चाहिये।

📚 ( इस्लामी जिन्दगी )


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               🧬 अकीका🧬


🌹👉🏻 बच्चा पैदा होने के बाद अल्लाह के शुक्र में जो जानवर जबह किया जाता है उसे अकीका कहते हैं।


🌹👉🏻 अकीका करना सुन्नत है। सुन्नत तरीका येह है कि बच्चे की पैदाईश के सातवें (7) रोज़ अकीका हो और अगर न हो सके तो पन्द्रवे (15) दिन या एक्कीसवें (21) रोज़ या जब भी हैसीयत हो करे, सुन्नत अदा हो जाएगी।

📚 (कानूने शरीअत, जिल्द 1 सफा में 160 इस्लामी जिन्दगी 17 ) 


🌹👉🏻लड़के के लिए दो बकरे और लड़की के लिए एक बकरी जबह करे। लड़के के लिए बकरा और लड़की के लिए बकरी ज़बह करना बेहतर है। अगर लड़का लड़की दानों के लिए बकरा या बकरी भी ज़बह करे तो हर्ज नहीं।


📚 (कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफा नं . 160 )


🌹👉🏻 लड़के के लिए दो बकरे न हो सके तो एक बकरे में भी अकीका कर सकते है। इसी तरह अगर गाये, भैस ज़बह करे तो लड़के के लिए दो हिस्से और लड़की के लिए एक हिस्सा हो। अकीके के जानवर के लिए भी वही शर्ते है जो कुरबानी के जानवर के लिए ज़रूरी है।

📚 (कानूने शरीअत, जिल्द 1. सफा नं. 160)


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               🧬 अकीका🧬


🌹👉🏻 अकीके के जानवर के तीन हिस्से किये जाए। एक हिस्सा गरीबों को खैरात कर दे दूसरा हिस्सा दोस्त व रिश्तेदारों में तकसीम करे और तीसरा हिस्सा खूद रखें।

📚 (इस्लामी जिन्दगी सफा नं 17 )


🌹👉🏻 अकीके का गोश्त गरीबों फकीरों, दोस्त व रिश्तेदारों को कच्चा तकसीम करे या पका कर दे या फिर दावत कर के खिलायें सब सूरतें जाइज़ है। 

📚( कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 160) 


🌹👉🏻अकीके का गोश्त मॉ, बाप, दादा, दादी, नाना, नानी, वगैरा सब खा सकते है। अकीके के जानवर की खाल अपने काम में लाए , गरीबों को दे या मदरसा या मस्जिद में दें। यानी इस खाल का भी वही हुक्म है जो कुरबानी की खाल का हुक्म है।

📚 ( कानूने शरीअत, जिल्द 1. सफा नं. 160 ) 


🌹👉🏻बेहतर है कि अकीके के जानवर की हड्डीयाँ तोड़ी न जाए बल्कि जोड़ों से अलग कर दी जाए और गोश्त वगैरा खा कर ज़मीन में दफन कर दी जाए।

📚 (किम्या - ए - सआदत, सफा नं . 267, इस्लामी ज़िन्दगी, सफा नं. 17 )


🌹👉🏻 नेक फ़ाल के लिए हड्डी न तोड़ना बेहतर है और तोड़ना भी ना जाइज नहीं। ( कानूने शरीअत , जिल्ट - गानं 160 ) 


🌹👉🏻 अकीके में बच्चे के सर के बाल मुंडवाए और उस के बालों के वज़न के बराबर चांदी या (हसीयत हो तो ) सोना सदका करे।

📚 ( कीम्या - ए - सआदत, सफा नं 267)


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               🧬 अकीका🧬


🌹👉🏻 हदीस :- इमाम मुहम्मद इमाम मुहम्मद बाकर रदीयल्लाहो अन्हो से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम की साहबजादी हजरत फ़ातिमा ने इमाम हसन, इमाम हुसैन, हज़रत जैनब और हजरत उम्मे कुलसूम (रदीअल्लाहो तआला अन्हुमा) के बाल उतरवा कर उन के वजन के बराबर चांदी खैरात फरमाई।

📚(इमाम मलिक, जिल्द 1, बाब किताबुल अकीका, हदीस नं. 2, सफा न. 402) 


🌹👉🏻अकीका फर्ज या वाजिब नहीं है सिर्फ सुन्नते मुस्तहेबा है गरीब आदमी को हरगिज़ जाइज़ नहीं कि सूद पर कर्ज ले कर अकीका करे कर्ज ले कर तो ज़कात भी देना जाइज़ नहीं अकीका ज़कात से बड़ कर नहीं।

📚 (इस्लामी जिन्दगी, सफा नं. 18) 


🌹👉🏻अकीके के जानवर को ज़बह करते वक्त की दुआएँ बहुत से मसाईल की किताबों में आई है लिहाजा वोह दुआएँ वही देखे।


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               🧬 खतना🧬


🌹👉🏻 लड़कों की ख़तना करना सुन्नत है और येह इस्लाम की अलामत है मुस्लिम व गैर मुस्लिम में इससे फर्क होता है। 


 💠रसूले खुदा सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने फरमाया हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी ख़तना किया तो उस वक्त उन की उम्र शरीफ अस्सी ( 80 ) बरस की थी। 


🌀ख़तना का सुन्नत तरीका येह है कि बच्चा जब सात ( 7 ) साल का हो जाए उस वक्त ख़तना करा दिया जाए ख़तना कराने की उम्र सात (7) साल से ले कर बारह ( 12 ) बरस तक है। यानी बारह ( 12 ) बरस से ज्यादा देर लगाना मना है और अगर सात साल से पहले खतना कर दिया जब भी हर्ज नहीं। ख़तना कराना बाप का काम है, वोह न हो तो फिर दादा, मामू, चचा, कराए। 


🌀👉🏻खतना करने से पहले नाई की उजरत तय होना ज़रूरी है जो कि उसको ख़तना के बाद दी जाए इलाज में ख़ास निगरानी रखी जाए तजरूबेकार नाई से ख़तना कराया जाए।

 

🌀👉🏻 ख़तना सिर्फ इस काम का ही नाम है बाकी येह धूमधाम से बारात निकालना, रिश्तेदारों को फुजूल में कपड़ों के जोड़ें देना, गाने बाजे और लाईटींग वगैरा सब फ़जूल काम है और फुजूल ख़र्ची इस्लाम में हराम है येह सब मुसलमानों की कमजोर नाक ने पैदा कर दिये है जिसे बचाने के लिए कर्ज तक लेते हैं और कर्ज दार बन कर बाद को परेशानी मोल लेते हैं । लिहाजा इन सब चीज़ों को बंद किया जाए ।


💠 अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है तर्जमा : - और फुजूल ना उड़ा, बेशक उड़ाने वाले शैतानों के भाई है। 

📚(तर्जमा :- कन्जुल इमाम, पारा 15 , सूरए बनी इस्राईल , आयत 26 ) ( आयत : ॥


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         👃🏻👂🏻 कान नाक छेदना📌


🌹👉🏻 लड़कियों के कान नाक छीदवाने में कोई हर्ज नहीं इसलिए की हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम के ज़माने ज़ाहिरी में भी औरतें कान छीदवाती थी और हुजूर ने इससे मना नहीं फरमाया।

📚 ( फतावा - ए - रजवीया, जिल्द 9, निस्फ़ अव्वल, सफा 57, कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफा 213) 


💠👉🏻एक रिवायत में है कि ---- "सब से पहले नाक कान हज़रत सारा रदीयल्लाहो तआला अन्हा ने हज़रत हाजरा रदीयल्लाहो तआला अनहा के छेदे थे हज़रत सारा व हज़रत हाज़रा हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की बीवीयों थी। जब से ही औरतों में कान नाक छीदवाने का रिवाज चला आ रहा है।

 ( वल्लाहो तआला आलम ) 


💠 कुछ लोग किसी मन्नत के लिए या फिर फिरंगी फैशन के लिए लड़कों के कान छेद देते हैं। येह सख़्त ना जाइज़ व हराम व सख़्त गुनाह है और ऐसी मन्नत की शरीअत में कोई हैसियत नहीं यकीनन अल्लाह व रसूल इस से नाराज़ होते है। 

इसलिए मुसलमानों को इस से बचना चाहिये।


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         👶🏻▪️ काला टीका लगाना


🌹👉🏻 हमारा और आप का येह मुशाहेदा है कि घर की औरतें अपने छोटे बच्चों को किसी कालक, काजल, या सुरमें वगैरा से उनके गाल पर काला टीका ( छोटा सा नुक्ता ) लगाती हैं ताकि किसी की बुरी नज़र न लगे। येह बेअस्ल बात नहीं है, नज़र का लगना हदीस से साबित है यानी बुरी नज़र लगती है। 


💠चुनानचे हदीसे पाक में है --- हदीस :- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम इरशाद फरमाते है- "नज़र का लगना ठीक है अगर कोई चीज़ तकदीर परं गालिब होती है तो नज़र गालिब होती है"

📚 ( मोता शरीफ़, जिल्द 1, बाब किताबुल ऐन, हदीस 3, सफा 782, कौलुलजमील, सफा 150) 


💠 हदीस :- एक रिवायत में है कि हज़रत ऊसमाने गनी रदीयल्लाहो तआला अन्हो ने एक खूबसूरत बच्चे को देखा तो फरमाया --- "इस की थुड्डी में काला टीका लगा दो कि इसको नज़र न लगे "

📚 ( कौलुल जमील, सफा नं. 153 )


 "तिर्मिज़ी शरीफ" की एक रिवायत से साबित है कि काला टीका लगाना बच्चों को बुरी नज़र से बचाता है।

 ( वल्लाहो आलम )


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         👶🏻▪️ बच्चे की परवरिश


🌹👉🏻 बच्चे की परवरिश का हक माँ को है चाहे वोह निकाह में हो या निकाह से बाहर हो गई हो। हाँ अगर मुरतद (यानी दीने इस्लाम से फिर कर काफ़िर) हो गई तो परवरिश नहीं कर सकती, या जिना करने वाली (तवाएफ) हो या चोर या मातम यानी चीख चीख कर रोने वाली है तो उसकी भी परवरिश में बच्चे को न दिया जाएगा। 


💠यहाँ तक कि कुछ फुकाह - ए - किराम ने फरमाया है कि --- "अगर औरत नमाज़ की पावन्द नहीं तो उसकी भी परवरिश में 7 दिया जाएगा" 


💠! मगर सही येह है कि बच्चा उसकी परवरिश में उस वक्त रहेगा जब तक ना समझ है, और जब कुछ समझने लगे तो अलग कर लिया जाए इसलिए कि बच्चा मॉ को देख कर वही आदते इख़ितयार करेगा जो माँ की है। यूँ ही उस माँ की परवरिश में भी नहीं दिया जाएगा जो बच्चे को छोड़ कर इधर उधर चली जाती हो चाहे उसका जाना किसी गुनाह के लिए न हो। 


(बहारे शरीअत, जिल्द , हिस्सा नं. 7, सफा नं. 19, इस्लामी ज़िन्दगी, सफा नं. 23)


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         👶🏻🍼 बच्चे को दूध पिलाना


🌹👉🏻 मस्अला :- लड़की हो या लड़का दानों को दूध दो साल तक पिलाया जाए। 

माँ बाप चाहे तो दो साल से पहले भी दूध छूड़ा सकते है मगर दो साल के बाद पिलाना मना है।


📚 (बहारे शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा नं. 7, सफा नं. 19)


💠अक्सर देखा गया कि कुछ औरतें येह समझती है कि बच्चों को अपना दूध पिलाने से औरत की खूबसूरती ख़त्म हो जाती है, इसलिए वोह अपना दूध नहीं पिलाती बल्कि गाय, भैस, का दूध या फिर कई महीनों से पड़े हुए पवडर का दूध पिलाती हैं। येह सख्त जहालत और उस बेकुसूर बच्चे के साथ ना इन्साफी है हाँ अगर किसी औरत को कम दूध आ रहा हो या आ ही नहीं रहा हो तो उस हालत में औरत को अपना इलाज कराना चाहिये।


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         👶🏻🍼 बच्चे को दूध पिलाना


🌹👉🏻 हदीस :- हज़रत इमाम जलालुद्दीन सुयूती رضی اللہ عنہ अपनी मशहूर जमाना किताब "शरहुस्सुदूर" में हज़रत अबू उमामा رضی اللہ عنہ से रिवायत करते हैं कि हुजूरे अकरम صلی اللہ علیہ وسلم ने इरशाद फरमाया "( मेराज की रात ) मैं ने कुछ औरतें ऐसी भी देखी जिन के पिस्तान लटके हुए थे और सर झुके हुए थे। उन के पिस्तानों को सॉप डस रहे थे।

 जिब्रील ( अलैहिस्सलाम ) ने मुझे बताया - या रसूलुल्लाह ! येह वोह औरते है जो अपने बच्चों को दूध नहीं पिलाती थी। 

📚( शरहुस्सुदूर, बाब “अजाये कत्र के बयान में सफा नं. 153)


💠 डॉक्टरों की तहकीक से यह बात साबित हो चुकी हैं कि माँ का ही दूध उसके बच्चे के लिए सब से ज्यादा मुफीद होता है और बच्चे को दूध पिलाने से औरत में न किसी किस्म की कमजोरी आती है और न ही उसकी खूबसूरती पर कोई फर्क पड़ता है। मुशाहेदा है कि जो बच्चे अपनी माँ का दूध पीते है वाह ज्यादा सेहतमन्द और तन्दुरूस्त रहते हैं, जबकि जो बच्चे अपनी माँ के दूध से महरूम रहते है वोह कमज़ोर होते है और तरह तरह की बीमारियों में हमेशा गिरफतार रहते है।


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         👶🏻🍼 बच्चे को दूध पिलाना


🌹👉🏻 हदीस : उम्मुल मोमेनीन हज़रत आएशा सिद्दीका रदीयल्लाहो तआला अन्हा से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया- "जो औरत अपने बच्चे को दूध पिलाती है और जब बच्चा मा के पिस्तान से दूध की चुस्की लेता है तो हर चुस्की के बदले उस औरत को एक गुलाम आज़ाद करने का सवाब दिया जाता है। जब औरत बच्चे का दूध छूड़ाती है तो आसमान से निदा आती है कि ए औरत ! तेरी पिछली ज़िन्दगी के सारे गुनाह मुआफ कर दिए गए अब तू अब तू नये सिरे से नेक ज़िन्दगी शुरू कर" 


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         👶🏻 बच्चे का नाम


🌹👉🏻बच्चे की पैदाइश के सात रोज बाद बच्चे का नाम रखा जाए, बच्चा चाहे जिन्दा पैदा हो या मरा हुआ, पुरा बना हो या अधूरा, हर सूरत में उसका नाम रखा जाएगा, और कयामत के दिन उसका हश्र होगा। 

📚(कानूने शरीअत, बिल्द 2, सफा 125) 


💠बुज़ुर्गाने दीन फरमाते है "अपने बच्चों के अच्छे नाम रखो कि अच्छे नामों का असर बच्चों पर पड़ता है और बुरे नाम का बुरा असर पड़ता है।"


💠 सय्यदना आला हजरत इमाम अहमद रज़ा खाँ रदियल्लाहो तआला अन्हो फरमाते है "फकीर ने आपनी आँखों से खूद देखा है कि बुरे नामों का सख्त बुरा असर बड़ता है।

📚 (अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 76) 


💠 हदीस :- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि  व सल्लम फ़रमाते है- "अम्बिया - ए - किराम के नामों पर नाम रखों।" 

📚(बुख़ारी शरीफ, अबूदाऊद शरीफ, नसाई शरीफ) 


💠अहादीसे करीमा में "मुहम्मद" नाम रखने की बहुत ज्यादा फजीलत आई हैं, हम यहाँ सिर्फ चन्द हदीसे ही बयान कर रहे है। 

👉🏻हदीस हुजूरे अकरम सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम इरशाद फरमाते हैं "अल्लाह तआला ने मुझे से फरमाया -- "मुझे अपने ईज्जत व जलाल की कसम जिस का नाम तुम्हारे नाम पर होगा उसे दोज़ख़ का अज़ाब न दूंगा।" 

📚 (ब हवाला अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 81)


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         👶🏻 बच्चे का नाम


🌹👉🏻 हदीस :- इमाम मालिक रदीयल्लाहो तआला अन्हो फरमाते है "जिस घर वालों में कोई मुहम्मद नाम का होता है उस घर की बरकत ज्यादा होती है।" 

📚 ( ब हवाला अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 83)


💠 हदीस - हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम इरशाद फ़रमाते है "जिसे लड़का पैदा हो और वोह मेरी मुहब्बत और मेरे नामे पाक से तबरूंक के लिए उसका नाम मुहम्मद रखे वोह और उसका लड़का जन्नत में जाएगे।" 

📚 (ब हवाला अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 80) 


💠हदीस और फरमाते सरकार सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम "जिस के तीन बेटे पैदा हो और वोह उनमें से किसी का नाम मुहम्मद न रखे तो जरूर जाहिल है।"

📚 (तबरानी शरीफ, ब हवाला अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 83) 


💠हदीस और फरमाते है आका सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम "तुम में किसी का क्या नुकसान है अगर उसके घर में एक मुहम्मद या दो मुहम्मद या तीन मुहम्मद हो।

📚(ब हवाला अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 82) 


💠आला हज़रत रदीयल्लाहो तआला अन्हो इस हदीस को नक्ल करने के बाद फरमाते है- "फकीर ने अपने सब बेटों , भतीजों का अकीके में सिर्फ मुहम्मद नाम रखा। फिर नाम की तअज़ीम के लिए और पुकारने के लिए अलग अलग नाम रखे। बहमदुलिल्लाहि तआला फकीर के यहाँ पॉच (5) मुहम्मद अब भी मौजूद है। 

📚( अहकामे रीअत, जिल्द 1 , सफा नं. 82)


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         👶🏻 बच्चे का नाम


🌹👉🏻 हमें भी चाहिये की अपन बच्चों के सिर्फ "मुहम्मद" नाम रखे और घर में पहचान और पुकारने के लिए दूसरे नाम रख दें, लेकिन याद रहे वोह पुकारने के नाम भी इस्लामी ढंग के हो।


😖 अफ्सोस ! आज कल लोग अपने बच्चों के नाम फिल्मी हीरो हीरोइन या फिर किसी फिरंगी के नाम से मुतासिर ( प्रभावित ) हो कर रखते है 

😡जैसे --- टिंकू, पिंकू, रिंकू, चीकू, मीकू, चीकू, कल्लू, लल्लू, भूरू, राहूल, काजोल, मीना, टीना, बीना, लीना, और न जाने क्या क्या बकवास नाम। 


💠 हदीस :- प्यार आका सल्लाल्लाह तआला अलैहि व सल्लम इरशाद फरमाते है "बेशक तुम रोजे कियामत अपने नामों और अपने बापों के नामों से पुकारे जाओगें तो अपने नाम अच्छे रखा करो।" 

📚( इमाम अहमद, अबूदाऊद शरीफ, जिल्द 3, बाब नं. 485, हदीस नं. 1513, सफा नं. 550)


💫 इस हदीस से साबित हुआ कि अगर किसी का नाम टीकू होगा तो उसे रोजे कियामत टीकू के नाम से पुकारा जाएगा।

 आह ! उस वक्त किस कदर शर्मीन्दगी होगी, आज वक़्त है जिन्हों ने अपने बच्चों के नाम ऐसे बेहूदा रखे है वोह आज से ही उसे तबदील कर दें और अच्छा सा कोई इस्लामी नाम रख लें।


💠 हदीसे पाक में है “नबी - ए - करीम सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम की आदते करीमा थी कि आप बुरे नाम को बदल दिया करते थे।" 

📚( तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द 2, बाब नं. 335, हदीस नं. 746, सफा नं. 301, अबूदाऊद शरीफ़ , जिल्द 3, बाब नं. 486, हदीस नं. 1577, सफा नं. 551)


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         👶🏻 बच्चे का नाम


🌹👉🏻 अक्सर मुसलमान ऐसे नाम रखते हैं कि जो बज़ाहिर तो अच्छे मअलूम होते है लेकिन या तो हराम है या फिर ऐसे कि जिनके कोई मअने नहीं होते।


💠 इमामे अहले सुन्नत आला हज़रत रदीयल्लाहो तआला अन्हो ने अपने फतवे में ऐसे बहुत से नामों के बारे में लिखा है जो नहीं रखना चाहिये। हम यहाँ मुख्तसर तौर पर कुछ का जिक्र कर रहे है। 


💠आला हज़रत फरमाते है "मुहम्मद नबी, अहमद नबी, नबी अहमद, येह नाम रखना हराम है कि येह हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम के लिए ही जेबा (लायक) है" 

📚 (अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 73)


👉🏻 "यूँ ही यासीन, ताहा, नाम रखना मना है। येह ऐसे नाम है जिनके मअनी मअलूम नहीं इन नामों के आगे "मुहम्मद" लगाने से भी फायदा नहीं होगा कि अब भी यासीन, व ताहा, न मअलूम माअनों में रहें।'' 

📚 ( अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं 74)


💠 "गफूरूद्दीन, नाम भी सख़ बुरा और अयेबदार है। गफूर के मअने "मिटाने वाला, बरबाद करने वाला के होते हैं, गफूर अल्लाह का नाम है और अल्लाह अपनी रहमत से बन्दों के गुनाह मिटाता है (अब अगर किसी शख्स का येह नाम हो तो) गफूरूद्दीन के मअने हूए “दीन का मिटाने वाला" येह ऐसे ही हुआ जैसे शैतान नाम रखना।" 

📚(अहकामे शरीअत, जिल्द 1 सफा नं. 76)


💠इसी तरह कलब अली, कलब हसन, कलब हुसैन, गुलाम अली, गुलाम हसन, गुलाम हुसैन, वगैरा नामों से पहले "मुहम्मद" लगाना जाइज़ नहीं। (जैसे मुहम्मद कलब अली , या मुहम्मद गुलाम अली वगैरा येह जाइज़ नहीं) अगर सिर्फ कलब अली, कलब हसन, गुलाम अली, गुलाम हसन वगैरा ही रहने दे तो कोई हर्ज नहीं।

📚 (अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 7)


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               👶🏻 बच्चे का नाम


🌹👉🏻इसी तरह निजामुद्दनी, मोहीयूद्दीन, शमसुद्दीन, बदरूद्दीन, नूरूद्दीन, फखरूद्दीन, शमसुल इस्लाम, मोहियुल इस्लाम, बदरूल इस्लाम, वगैरा नामों को ओलमा - ए - किराम ने सख्त ना पसंद रखा और मकरूह व मम्नुअ (मना) फ़रमाया कि येह बुज़ुर्गाने दीन के नाम नहीं बल्कि उनके अलकाब ( पदवी ) हैं जिस से मुसलमानों ने उनकी तअरीफ में इन्ही लकबों से याद किया।

📚 (अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 7) 


💠👉🏻" अली, हुसैन, गौस, जीलानी, और इस तरह के तमाम नाम जो बुज़ुर्गाने दीन के नाम हैं उन नमों से पहले लफ्ज़ "गुलाम " हो तो बेशक जाइज़ है।" (जैसे गुलाम अली, गुलाम हुसैन, गुलाम गौस, गुलाम जीलानी, वगैरा)

📚 (अहकामे शरीअत, जिल्द 1, सफा नं.7 ) 


💠👉🏻अब्दुल्लाह, अब्दुर्रहमान, अब्दुल करीम, अबदुल रहीम , वगैरा नाम और अम्बिया - ए - किराम व सहाबा - ए - किराम के नामों पर नाम रखना अच्छा हैं।

💠👉🏻 हदीस हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर रदीयल्लाहो तआला अन्हो से रिवायात है कि रसूलुल्लाह सल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फ़रमाया- "अल्लाह तआला को तमाम नामों में से अब्दुल्लाह और अब्दुर्रहमान सब से ज्यादा पसंद है।"

📚 (अबूदाऊद शरीफ, जिल्द 3 बाब नं. 485, हदीस न. 1573, सफा. 550) 


💠👉🏻और ऐसे नाम जो बे मअनी है जैसे ------- बुदधू, कल्लू, लल्लू, जुमेराती, खैराती, वगैरा 


और इसी तरह वोह नाम जिन में फख्र जाहिर होता हो न रखे जाए जैसे -- शाहजहाँ, नवाब, राजा, बादशाह, वगैरा 


इसी तरह लड़कियों में -- कमरून्निसा, जहाँआरा बेगम, वगैरा नाम न रखे, बल्कि उनके नाम --- कनीज़ फ़ातिमा, आमना, आएशा, ख़दीजा, मरयम, जैनब, कुलसूम, वगैरा रखें

📚 (इस्लामही जिन्दगी, सफा नं.17)


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         👶🏻 बच्चे की तअलीम व तरबीयत


🌹👉🏻 किताब "हिस्ने हसीन" में है कि "जब बच्चा बोलना शुरू करे तो उस को सब से पहले कलमा शरीफ सिखाए।" पहले ज़माने में मॉऐं अपने बच्चों को अल्लाह =, अल्लाह कह कर सुलाती थी अब घर के रेडियो, टी - वी, और बाजे वगैरा बजा कर सुलाती है। कुछ बेवकूफ अपने बच्चों को गाली बकना सिखाते हैं और उस पर बड़े खूश होते है। (मआजल्लाह)

 बच्चों के सामने ऐसी हरकतें न करें जिस से बच्चों के इख़्लाक ख़राब हो क्योंकि बच्चों में नकल करने की ज्यादा आदत होती है वोह जो कुछ अपने माँ बाप को करते हुए देखते है वोह खूद भी वही करने लगते हैं, इस लिए उनके सामने नमाजें पढ़े, कुरआन की तिलावत करे ताकि येह सब देख कर वोह भी ऐसा ही करे। बच्चों को झूटी कहानियों व किस्से सुनाने की बजाए बुज़ुर्गाने दीन के सच्चे वाकिआत सुनाए ताकि उन के दिल व दिमाग पर इस का अच्छा असर पड़ें और उनके दिलों में इस्लाम से मुहब्बत पैदा हो। माँ बाप का फर्ज है कि अपनी औलाद की तअलीम व तरबियत के बारे में अपनी ज़िम्मेदारी का ख़ास ख्याल रखे। दुनियावी तअलीम से पहले शरई आदाब सिखाए और मज़हबी तअलीम दें। अगर में ज़रा भी कोताही करेगा तो कियामत के रोज़ औलाद से ही पूछ न होगी बल्कि माँ बाप भी पकड़े जाएगे।


💠 आयत रब तआला इरशाद फरमाता है ए ईमान वालों अपनी जानों और अपने घर वालों को उस आग से बचाओं।

📚कन्जुल ईमान, पारा 18, सूरए तहरीम, आयत 6)


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         👶🏻 बच्चे की तअलीम व तरबीयत


🌹👉🏻 शरह :- इस आयत की तफ्सीर में हज़रत इब्ने अब्बास रदीयल्लाहो तआला अन्हो से रिवायत है कि "तुम खूद गुनाहों से बचो, खुदा की फरमाबरदारी करो अपनी औलाद को भलाई का हुक्म दो, बुराई से मना करो और शरई आदाब सिखाओं और मज़हबी तअलीम दो।" 


💠जब बच्चा होश सम्भाले तो किसी बअमल मुत्तकी परहेज़गार आलिम या हाफ़िज़ के पास बीठा कर कुरआने पाक और उर्दू की दीनी किताबें ज़रूर पढ़ाए। अगर अल्लाह तआला ने आप को एक से ज्यादा लड़के दिये हैं तो कम अज़ कम एक लड़के को ज़रूर आलिमे दीन या हाफिजे कुरआन बनाए। 


💠हदीसे पाक में हैं "बरोजे कियामत एक हाफिज अपनी तीन पीड़ियों को और एक आलिमे दीन अपनी सात पुशतों ( पिड़ियों ) को बख़्शवाऐगा।" येह ख्याल गलत है कि आलिमे दीन को रोटी नहीं मिलती। ज़रूरी नहीं कोई दुनियावी इल्म हासिल करे तो उसे रोटी ( यानी रोजगार ) भी मिल जाए। सैकड़ों गिरेजवेट मारे मारे फिरते नज़र आते है। यकीनन हर किसी को वोह ही मिलता है जो अल्लाह तआला ने उस की किस्मत में लिख दिया है।

📚 (इस्लामी जिन्दगी, सफा नं. 24)


💠जब बच्चा सात ( 7 ) साल की उमर का हो जाए तो उसे नमाज़ पढ़वाए और नमाज़ न पढ़ने पर मुनासिब सज़ा भी दें और नव ( 9 ) बरस की उमर में उसका बिस्तर अलग कर दें।

📚 (हिस्ने हसीन, सफा नं.167)


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         👶🏻 बच्चे की तअलीम व तरबीयत


🌹👉🏻बच्चों को बुरे लोगों में बैठने, बुरे बदमाश लड़कों में खेलने से रोके उस पर इतनी सख्ती भी न करे कि वाह बागी हो जाए और इस कदर लाड़ प्यार भी न करे कि वोह ज़िद्दी व गुस्ताख़ बन जाए।


💠 मुहब्बत के वक्त मुहब्बत से पेश आए और सख्ती के वक्त सख्ती से पेश आए। 


💠 हदीस :- हुजूरे अकरम सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया "कोई बाप अपनी औलाद को इससे बेहतर तोहफा नहीं दे सकता कि वोह उसको अच्छी तअलीम दे।" 

📚 (तिर्मिज़ी शरीफ, जिल्द 1, बाब नं. 1299, हदीस नं. 2018, सफा नं. 913) 


💠बच्चों से मुहब्बत करना सुन्नते रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम है। अगर एक से ज्यादा बच्चे हो तो सब बच्चों के साथ बराबरी और इन्साफ का सुलूक करें चाहे वोह लड़का हो या लड़की।


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         👶🏻 बच्चे की तअलीम व तरबीयत


🌹👉🏻 हदीस :- अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया "अल्लाह तआला पसंद करता है कि तुम अपनी औलाद के दरमियान अदल (बराबरी व इन्साफ़) करो यहाँ तक कि उनका बोसा (चुमने) में भी बराबरी रखो।

📚 (कानूने शरीअत, जिल्द 2, सफा नं. 243)


💠👉🏻 हदीस और फरमाते है आका सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम "तोहफे देने में अपनी औलाद के दरमियान इन्साफ करो (यानी सब बच्चों को बराबर बराबर दो) जिस तरह तुम खूद येह चाहते हो कि वोह सब तुम्हारे साथ एहसान व मेहरबानी में इन्साफ करे।

📚 ( तबरानी शरीफ ) 


💠👉🏻औलाद के हुकूक में से सब से अहम हक येह है कि उन्हें हलाल कमाई से खिलाएँ हराम की कमाई से खूद भी बचे और अपनी औलाद को भी बचाए।


💠👉🏻 अल्लाह रब्बुल ईज्जत अपने हबीब और हमारे आका व मौला सल्लल्लाहो तआला व आलैहि व असहाबेही व बारिक व सल्लिम के सदके तुफैल में हमें सिराते मुस्तकीम पर चलने की तौफीक अता फरमाए और सुन्नियत, हनफियत व मस्लके आला हज़रत पर मजबूती से कायम व दायम रखें और ईमान के साथ अहले सुन्नत व जमाअत पर मौत नसीब फरमाए 🤲🏻आमीन। 

                 💠 The End💠


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