सोमवार, 30 नवंबर 2020

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

                    🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

                  🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

                         📮पोस्ट  नं. 🅾️1️⃣📮

                       ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

        अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

☝🏻 अल्लाह तआला को ऊपर वाला कहना ?

👨‍👨‍👦‍👦 कुछ लोग अल्लाह तआला का नाम लेने की बजाय उसको ऊपर वाला बोलते हैं, ये निहायत ग़लत बात है, बल्कि अगर ये अक़ीदा रखकर ये लफ्ज़ बोला कि अल्लाह ऊपर है, तो ये "कुफ़्र" है

✍🏻 क्योंकि अल्लाह की ज़ात ऊपर, नीचे, हर सिम्त, हर जगह मौजूद है, और उसी ने इन सभो को पैदा किया है। इसलिए अल्लाह के लिए ये नहीं बोला जा सकता कि अल्लाह ऊपर है या इन सिमतों मै है।


👉 कोई कहता है कि अल्लाह "अर्श" पर है, तो कोई उस से पूछे कि जब अर्श नहीं था तब अल्लाह कहाँ था ?


🍁 हां! अगर कोई शख़्स अल्लाह तआला को "ऊपर वाला" इस ख़्याल से कहे कि, वो सबसे बलन्दो बाला है, उसका मर्तबा सबसे ऊपर है, तो ये "कुफ़्र" नहीं है। लेकिन फिर भी अल्लाह तआला के लिए ऐसे अलफ़ाज़ बोलना सही नहीं, जिनसे कुफ़्र का शुब्हा (शक) हो, और अल्लाह तआला को ऊपर वाला कहना बेहरहाल मना है, जिस से बचना ज़रूरी है।


👉🏿 कुछ लोग अल्लाह तआला को अल्लाह कहने के बजाय सिर्फ़ "मालिक" कहते हैं, तो ये भी अच्छा और इस्लामिक तरीक़ा नहीं है।

👉 सबसे ज़्यादा सीधी सच्ची और अच्छी बात ये है की "अल्लाह" को "अल्लाह" ही कहना चाहिए, क्योंकि उसका नाम लेना भी इबादत है, और उसका ज़िक्र करना ही इंसान की ज़िन्दगी का सबसे बड़ा मक़सद, और मुसलमान की पहचान है,


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 17)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 🅾️2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


✍🏻 बोल चाल (बातचीत) मै कुफ़री कलिमात (शब्दों) का इस्तेमाल ?


👨‍👨‍👦‍👦 आम लोग (कम पढ़े लिखे) बातचीत मै कलिमाते कुफ़्र (कुफ़्र वाले शब्द) बोल कर इस्लाम से ख़ारिज हो जाते हैं। और बिला वजह ईमान से हाथ धो बैठते हैं, इसका ख़्याल रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हर गुनाह की बख़्शिश है, लेकिन कुफ़्र बोलकर अगर ईमान खो दिया तो बख़्शिश ओ मग़फ़िरत और जन्न्त मै जाने की कोई सूरत नहीं, बल्कि सब दिन जहन्नम मै जलना लाज़मी है।


📚 हदीस शरीफ़ मै:- हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि, शाम को आदमी मोमिन होगा तो सुबह को काफ़िर, और सुबह को मोमिन होगा तो शाम को काफ़िर।


☘ कलिमाते कुफ़्र तो बहुत हैं लेकिन यहाँ सिर्फ़ चंद हिदायात लिख देते हैं, ईमान की हिफ़ाज़त के लिए।


1⃣ हिदायत न.1- आप बाअदब हो जाइये, अल्लाह तआला और उसके नबी ओ रसूल (तमाम अम्बिया और रसूल) फ़रिश्ते, खाना-ए-काअबा, तमाम मस्जिदें, क़ुरआने करीम, अहादीस की किताबें, बुज़ुर्गाने दीन, उलमा-ए-किराम, वालिदैन (माँ बाप) इन सबका अदब ताज़ीम और मुहब्बत दिल मै बिठा लीजिये, (क्योंकि) बा-अदब इंसान का दिल एक खरे खोटे (अच्छे बुरे) को पहचानने की तराज़ू हो जाता है। कि न ख़ुद उसके मुँह से ग़लत बात निकलती है,,और कोई बोले तो उसको ना-गवार गुज़रती है,।

इसलिए अनपढ़ "अदब करने वाला अच्छा है" पढ़े लिखे "बेअदब" से।

चुनांचे:- अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है,

तर्जमा:- जो अल्लाह की निशानियों की ताज़ीम करे तो ये दिलों की परहेज़गारी है।

📚 (सूरह-ए-हज आयत न. 32)


2⃣ हिदायत न. 2- हंसी, मज़ाक़, तफ़रीह, और दिल लगी की आदत मत बनाओ, और कभी हो (हंसी मज़ाक़) तो उसमे क़ुरआनो हदीस की बातें, मज़हबी, दीनी बातें न लाइए, क्योंकि शआइरे इलाहियाह (अल्लाह तआला के बनाये हुए एहकाम) के साथ मज़ाक़ ओ इस्तिहज़ा (तफ़रीह) करना कुफ़्र है।


3⃣ हिदायत न. 3

👉🏿 कुछ लोग इस किस्म की बातें सबको ख़ुश करने के लिए बोल देते हैं, जिनका बोलना और राज़ी ख़ुशी के साथ सुनना कुफ़्र है,

जैसे: सब धर्म समान (बराबर) हैं, ख़िदमते ख़ल्क़ (समाज सेवा) ही धर्म है, देश पहले है धर्म बाद मै, हम पहले फूलां मुल्क के वासी हैं मुस्लमान बाद मै, राम रहीम दोनों एक ही हैं, वैद और क़ुरआन मै कोई फ़र्क़ नहीं, मस्जिद और मंदिर दोनों खुदा के घर हैं या दोनों जगह ख़ुदा मिलता है, नमाज़ पढ़ना बेकार आदमियों का काम है, रोज़ा वो रखे जिसको खाना न मिले, मुस्लमान वही जो रोज़े रखे 2 ही, नमाज़ पढ़ना न पढ़ना सब बराबर है हमने बहुत पढ़ ली कुछ नहीं होता, ये सब कलिमाते कुफ़्र (कुफ़्रिया शब्द) हैं, ग़ैर इस्लामी काफ़िरों की बोलियाँ हैं, जिनको बोलने से आदमी काफ़िर और इस्लाम से ख़ारिज हो जाता है।


⚠ सियासी (Politicians) लोग इस किस्म की बातें ग़ैर मुस्लिमों को ख़ुश करने के लिए, उनके वोट हासिल करने के लिए बक देते हैं, हालांकि देखा ये जाता है कि, वो उनसे खुश भी नहीं होते और अपने ही धर्म वालों को उमूमन वोट देते हैं, और इस तरह इन नेताओं को न दुनिया मिलती है न दीन।

🎯 अगर ग़ैर मुस्लिमों के वोट आपको मिलने ही हैं तो अपना दीन ईमान बचाकर भी मिल सकते हैं, फिर ये कि चंद रोज़ की दुनियां इक़्तिदार, नोटों और वोटों की ख़ातिर क्या अपना ईमान बेचा जाए।


4⃣ हिदायत न. 4

_👉 मुसलमानों मै जो नए-नए फ़िर्के राइज हुए हैं उनसे दूर रहना निहायत ज़रूरी है, ये ईमानो अक़ीदे के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं, मज़हबे अहले सुन्नत के बुज़ुर्गों की रविश पर क़ाइम रहना ईमानो अक़ीदे की हिफ़ाज़त के लिए निहायत लाज़िम है,

और मज़हबे अहले सुन्नत की सही तर्जुमानी इस दौर मै "आलाहज़रत मौलाना अहमद रज़ा खान बरेलवी अलैहिर्रहमा ने फ़रमाई है, उनकी तालीमात ख़ालिस इस्लाम है।"


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 18)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 🅾️3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


       ✍🏻 फ़िल्मी गानो में कुफ्रियात ✍🏻


🌍 आज कल हिंदुस्तान मै फ़िल्मी मनाज़िर और उनके गानों के ज़रिये भी मुसलमानों को काफ़िर बनाने और इमानों अक़ीदे को तबाह करने की मुनज़्ज़म साज़िश (सोंची समझी प्लानिंग) चल रही है,

फ़िल्म की मज़ेदारियों और उसकी लज़्ज़त और गानों की लुत्फ़-अन्दोज़ी के सहारे ऐसे-ऐसे कड़वे घूंट मुस्लिम नस्लों की घांटी से उतारे जा रहे हैं, जिनसे कभी वो बहुत दूर भागते थे। लेकिन अब मुसलमान उन्हें बड़ी आसानी से हज़म करते चले जा रहे हैं। बल्कि सही बात तो ये है कि आज कल फिल्मों और टेलिविज़नो के ज़रिये काफ़िर अपने धर्मों का प्रचार कर रहे हैं।


👇🏿नीचे कुछ गानों के अशआर पढ़कर आप ख़ुद अंदाज़ा लगा सकते हैं, कि ये कुफ़्र हैं या नहीं।


ख़ुदा भी "आसमां" से जब ज़मीं पर देखता होगा।

मेरे मेहबूब को किसने बनाया "सोंचता" होगा।


अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जायेगा।

ख़ुदा "तराश" लिया और "बंदगी" करली।


रब ने भी मुझपर "सितम" क्या किया है।

सारे जहाँ का "ग़म" मुझे दे दिया है।


क़ुदरत ने बनाया होगा "फुरसत" से तुझे मेरे यार।


✍🏻 इन गानों का जाइज़ा लीजिये और सोंचिये अल्लाह जल्ला शानहु के बारे मै ये अक़ीदा रखना, कि वो "आसमान से जब देखता होगा" हालांकि मुसलमानों का अक़ीदा है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हर शै (चीज़) को हमेशा से देखता है और हमेशा देखेगा। और फ़िर ये बकवास कि "मेरे मेहबूब को बनाने वाले के बारे मै सोंचता होगा" मआज़ल्लाह।


🌹 जबकि हर चीज़ का बनाने वाला सिर्फ़ अल्लाह ही है। इसी तरह दूसरे गाने मैं, "ख़ुदा तराश लिया और बंदगी करली" कितना बड़ा कुफ़्र है, इस्लाम से मज़ाक और क़ुरआने करीम से ठिठ्ठा किया गया है, लिहाज़ा इन गानों के क़ुफ़्रिया होने मै किसी जाहिल (अनपढ़) को भी शक नहीं होगा।


🍥 तीसरे गाने मै परवरदिगारे आलम को "सितमगर" बताना उससे शिकवा करना, उसकी नाशुक्री करना, कि उसने सारे जहां का ग़म मुझे दे दिया है,

ये सब वो कुफ्रियात हैं जो न जाने कितने मुसलमानों से बुलवाकर, गानों के ज़रिये उनके ईमानों अक़ीदे ख़राब करके इस्लामी हुदूद से बहार लाकर खड़ा कर दिया है।


अल्लाह हम सबको अपनी पनाह मै रखे...........आमीन


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 18,19)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 🅾️4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


✍🏻 ईमान और अक़ीदे से ज़्यादा अमल (काम) को अहमियत देना कैसा है ?


🌍 हमारे मुआशरे मै काफ़ी लोग किसी की ज़ाहिरदारी नेकी और कोई अच्छा काम देखकर उसकी तारीफ़ करने लग जाते हैं। और उससे मुतास्सिर हो जाते हैं, जबकि इस्लामी नुक़्ताए नज़र से कोई नेकी उस वक़्त तक कारआमद (काम आने वाली) नहीं है जब तक कि उसका ईमान ओ अक़ीदा दुरस्त न हो।


👇🏿चलिए देखते हैं क़ुरआन और हदीस क्या कहते हैं इस मुआमले मै।


🌹 रसूलुल्लाह ﷺ ने जब ऐलाने नुबूव्वत फ़रमाया था, तो पहले नमाज़, रोज़ा, हज, ज़कात का हुक्म नहीं फ़रमाया था, बल्कि ये फ़रमाया था कि अल्लाह को एक मानो, बुतों की पूजा ओ परस्तिश से बाअज़ आओ, और मुझको अल्लाह का रसूल ﷺ मानों, आज भी जब किसी काफ़िर को मुसलमान बनाया जाता है तो पहले उसको नमाज़ रोज़े अदा करने या अच्छाईयां करने और बुरा काम छोड़ने का हुक्म नहीं दिया जाता, बल्कि पहले कलमा पढ़ाकर मुस्लमान किया जाता है, फिर बाद मै अच्छाई बुराई और एहकामे इस्लाम से उसको आगाह किया जाता है।


🍥 हदीस:- रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि अगर कोई शख़्श उहद पहाड़ के बराबर भी सोना राहे ख़ुदा मै ख़र्च करे,,,खुदाए तआला क़ुबूल नहीं फरमाएगा,,जब तक कि वो तक़दीर पर ईमान न ले आये।


📚 (मिश्कात शरीफ़, सफ़्हा 23)



🌴 इस हदीस से ख़ूब वाज़ेह (ख़ुलासा) हो गया कि जो इस्लाम के लिए ज़रूरी अक़ाइद न रखता हो उसकी कोई नेकी....नेकी नहीं।


📖 क़ुरआने करीम मै भी फरमाने ख़ुदावंदी है।

तर्जमा:- ये क़ुरआन हिदायत है मुत्तक़ीन (परहेज़गारों) के लिए, जो बग़ैर देखे ईमान लाये है, और नमाज़ अदा करते, और हमारे दिए हुए माल मै से (हमारी राह) मै ख़र्च करते हैं।


📚 (सूरह-ए-ब-क़ा-रा, आयात न.2/3)



🛡 इस आयते करीमा मै भी अल्लाह तआला ने नमाज़ और राहे ख़ुदा मै ख़र्च से पहले, ईमान का ज़िक्र फ़रमाया है।


🎯 ख़ुलासा ये कि जिस शख़्स का ईमान ओ अक़ीदा दुरस्त न हो, या वो ग़ैर इस्लामी ख़्यालात ओ अक़ाइद रखता हो, उससे कभी मुतास्सिर नहीं होना चाहिए, न उसकी तारीफ़ करनी चाहिए चाहें वो कितने ही अच्छे काम करे।


📖 क़ुरआने करीम मै ग़ैर इस्लामी अक़ाइद रखने वालों की नेकियों और उनके कारनामों को बेकार ओ फ़ुज़ूल फ़रमाया गया है, और उसकी मिसाल उस ग़ुबार (धुल) से दी गयी है, जो किसी चट्टान पर लग जाती है, फिर उसे बारिश धो कर बहा देती है, और उसका नामो निशान तक बाक़ी नहीं रहता।


⛲ इसलिए अमल से पहले उसका अक़ीदा देखना ज़रूरी है


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 20,21)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 🅾️5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


✍🏻 लेट्रीन (Toilet) मै किब्ले (काअबे) 🕋 की तरफ़ मुँह या पीठ करना कैसा ?


🌹 हदीस शरीफ़:- अल्लाह के रसूल ﷺ ने इरशाद फ़रमाया "जब तुम मै से कोई रफ़-ऐ हाजत (पेशाब, पैखाना) करे, तो किब्ले की तरफ़ न मुँह करे और न पीठ"।

📚 (मिश्कात शरीफ़, सफ़्हा न. 42)


🌴 इसके बरख़िलाफ़ अवाम तो अवाम बअज़ खवास (ख़ास) अहले इल्म तक मै इस बात का ख़्याल नहीं रखा जाता, और पैखाना पेशाब के वक़्त आमतौर से लोग किब्ले की जानिब मुंह या पीठ कर लेते हैं। घरों मै बैतुलखला (Toilet) बनाते वक़्त मुसलमानों को ख़ास तौर से इस काम का ख़्याल रखना चाहिए, कि बैठने की जगह (Seat) इस तरह लगानी चाहिए कि बैठने वाले का मुंह और पीठ किब्ले की तरफ़ न हो।


🇮🇳 हिंदुस्तान मै लेट्रीन (Toilet) की सीटें उत्तर, दक्खिन (North/South) रखी जाएँ, पूरब और पश्चिम (East/West) न रखी जाएँ, अगर किसी ने ग़लती से सीट पूरब, पश्चिम करवाली तो उसे चाहिए कि वो दोबारा सही तरीके से उत्तर, दक्खिन उसका रुख करवाये,


💫 👉🏿 नमाज़े जनाज़ा पढ़ने के बाद उसी वुज़ू से दूसरी नमाज़ पढ़ने का मसला। 💫


            📢 कुछ लोग समझते हैं कि जिस वुज़ू से नमाज़े जनाज़ा पढ़ी हो उस से दूसरी नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती,,,जबकि ये ग़लत और बेअस्ल बात है। बल्कि उसी वुज़ू से फ़र्ज़, सुन्नत, नफ्ल हर नमाज़ पढ़ना दुरस्त है।


💫 👉🏿 मय्यत को ग़ुस्ल देने के बाद ग़ुस्ल करने का मसला। 💫


🌊 मय्यत को ग़ुस्ल देने के बाद ग़ुस्ल (देने वाले को ग़ुस्ल) करना बेहतर और मुस्तहब (पसंदीदा) है, लेकिन ग़ुस्ल करने को ज़रूरी ख़्याल करना ये ग़लत है।

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 21,22)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 🅾️6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📢 क्या सतर (फ़र्ज़) खुल जाने से वुज़ू टूट जाता है ?


🌍 ग़लत फ़हमी:- अवाम (आम लोगों) मै जो मशहूर है कि घुटना (Knee) और सतर (मर्दो औरत की वो जगह जिसका छुपाना फ़र्ज़ है) अपना या दूसरे का देखने से वुज़ू टूट जाता है।


इस्लाह:- ये एक बेअस्ल बात है, घुटना या रान वग़ैरह खुलने से वुज़ू नहीं टूटता, हां बग़ैर ज़रूरत सतर खुला रहना/रखना मना है, और दूसरों के सामने सतर खोलना हराम है।


📚 (बहारे शरीअत, हिस्सा 2, सफ़्हा न. 28)


💧 पानी से भरे लोटे या गिलास को 5 उंगलियों से पकड़ने का मसला।


💧 पानी से बहरे गिलास या लोटे को 5 उंगलियों से पकड़ने को बुरा जाना जाता है, हालांकि ये महज़ एक जाहिलाना ख़्याल है। 5 उंगलियों से अगर पानी से भरे गिलास या लोटे को पकड़ लिया जाये तो इस से पानी मै कोई खराबी नहीं आती।


🌴 दूध पीते बच्चे का पेशाब पाक है या नापाक ?


🧠 ग़लत फ़हमी:- कुछ लोग समझते हैं कि दूध पीते बच्चे का पेशाब पाक है।


🍁 इस्लाह:- इंसान का पेशाब मुतलक़न नापाक है, ख्वाह (चाहें) वो दूध पीते बच्चों का हो या बड़ों का।


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 22,23)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 🅾️7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🐐 हलाल जानवरों के पेशाब की छींटों का हुक्म ?


🌍 ग़लत फ़हमी:- बहुत लोग हलाल जानवरों (जिनका गोश्त खाया जाता है) के पेशाब की छींटें अगर कपड़े या बदन पर लग जाये तो खुद को पूरा नापाक समझने लगते हैं, यहाँ तक कि अगर कपड़े धोने या बदलने का मौक़ा न मिले तो नमाज़ भी छोड़ देते हैं।


इस्लाह:- सय्यदी आला-हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान (रदियल्लाहु अन्हु) फ़रमाते हैं, बैलों का गोबर, और पेशाब नजासते ख़फ़ीफ़ा (छोटी गन्दगी) हैं, जब तक कपड़े का चौथाई हिस्सा (यानि एक कपड़े के 4 भाग मै से 1 भाग) नजासत से न भर जाये, या मुतफ़र्रिक़ (अलग-अलग) इतनी छींटें कपड़े पर लगी की सबको जमा करने पर कपड़े का चौथाई हिस्सा भर गया, तब कपड़े को नजासत का हुक्म देंगे और अगर उस से कम लगी तो नहीं, और ऐसे कपड़े से नमाज़ भी जाइज़ है। "और बिल्फ़र्ज़ चौथाई से ज़ाइद भी अगर धब्बे हों और धोने से सच्ची मजबूरी यानि हर्जे शदीद हो तो नमाज़ जाइज़ है"

📚 (फतावा रिज़विया, जिल्द 2, सफ़्हा न. 161)


हदीस शरीफ़:- रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

ما اكل لحمه فلا باس ببوله


"मा उकिला लहमहू फ़ला बाअ-सा बि-बौलिही"

तर्जमा: जिसका गोश्त खाया जाता है, उसके पेशाब मै ज़्यादा हरज नहीं। (यानि उसका पेशाब ज़्यादा सख़्त नापाक नहीं)


📚 (मिश्कात, बाबुत्ततहीरुन नजासत, सफ़्हा न. 53)


🌍 ख़ुलासा ये है कि हलाल जानवर जैसे: गाय, बैल, भैंस, बकरी, ऊंट वग़ैरह का पेशाब नजासते ख़फ़ीफ़ा है। कपड़े या बदन के किसी हिस्से का जब तक चौथाई हिस्सा उसमे मुलव्विस (भर) न जाये तब तक उससे नमाज़ पढ़ना जाइज़ है। और मामूली छींटें जो आम तौर पर किसानों के कपड़ों और बदन पर आ जाती हैं जिनसे बचना निहायत मुश्किल है,उनके साथ तो बिला कराहत नमाज़ जाइज़ है। और वैसे तो नमाज़ किसी हाल मै मुआफ़ नहीं है, अगर बदलने के लिए दूसरे कपड़े नहीं तो उन्ही मै पढ़े, और अगर कपड़े ही नहीं तो बरहना (नंगे) नमाज़ पढ़ें।


🧠 ग़लत फ़हमी:- ये जो जाहिल किस्म के लोग कह देते हैं कि ऐसी नमाज़ पढ़ने से तो न पढ़ना अच्छा है। ये उनकी जिहालत और गुमराही है।


👉 इस्लाह:- सही बात ये है कि मजबूरी की हालत मै नमाज़ छोड़ने से,, हर तरह नमाज़ पढ़ना अच्छा है।


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 23,24)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 🅾️8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝   परिन्दो की बीट (पाखाने) का मसला


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩


•••➲  जो परिन्दे ऊँचे नही उड़ते जमीन पर रहते हैं जैसे मुर्गी और बतख उनकी बीट या पाखाना इन्सान के पाखाने और पेशाब की तरह नजासते गलीजा यानी सख्त किस्म की नापाकी है। और जो परिन्दे ऊपर उड़ते हैं उनमे जो हलाल हैं उनकी बीट पाक है जैसे कबूतर फाख्ता मुर्गाबी मैना घरेलू चिड़िया गुलगुचिया वगैरा। जो परिन्दे हराम है। जैसे कौआ चील शिकरा बाज उनकी बीट खफीफा यानी (हल्की नापाकी) है। उसका वही हुक्म है जो हलाल जानवरो के पेशाब का है!


•••➲  हमे इस बात से यह समझना बहूत अहिम है। के हम थोड़ी सी नजासत लगने से कहने लगते है। कपड़े नपाक है नमाज नही पड पाएगे ऐसा कहना भी मुतलन गलत है। और गुनाह भी है  हम आम तौर पर देखते है। हमने या हमसे किसी ने नमाज के लिए कहा तो हम साफ जबाब देते है। हम नही जा पाएगे तुम पड़ आऔ ऐसा कहना गुनाह है। शक्त मना है। हा अगर आपका इरादा नही है  नमाज मे जाने का तो सामने बाले से ऐसा मत बोलो बल्की इस तरह से कह दो जिससे गुनाह भी न हो और सामने बाला आपके जबाब से मुतमइन हो जाए!..


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह 22 📚


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 🅾️9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


✍🏻 हर नापाकी पर ग़ुस्ल करना ज़रूरी नहीं ?


🌍 अक्सर देखा गया है कि लोगों से पूछा कि आपने नमाज़ क्यों नहीं पढ़ी, तो जवाब मिलता है,,,,,हम नहाये हुए नहीं हैं।


👉 और वजह ये होती है कि या तो उन्होंने पेशाब करने के बाद पानी या ढीले से इस्तिन्जा नहीं किया होता है या फिर उनके कपड़ों पर पेशाब या किसी जानवर के गोबर वग़ैरह या कीचड़ की छींटें वग़ैरह लग जाती हैं, और वो ये ख़्याल कर लेते हैं कि अब इन सूरतों मै उनपर ग़ुस्ल वाजिब हो गया।


👉 और बिला वजह के नमाज़ छोड़कर गुनाहगार बन जाते हैं।


🍁 जबकि इन सब सूरतों मै नहाने की ज़रूरत नहीं,,,,बल्कि बदन या कपडे के जिस हिस्से मै नापाकी लगी है उसको धो देना या किसी भी तरह उस नापाकी को दूर कर देना ही काफी है। ये भी उस सूरत मै है, जबकि नापाकी दूर करने या उसको धोने पर क़ादिर (क़ुदरत रखता) हो, वरना ऐसे ही नापाक कपड़े मै नमाज़ पढ़ी जाये।

👉 और अगर तीन चौथाई (3/4) से ज़्यादा कपड़ा नापाक हो तो बरहना (नंगे बदन) नमाज़ पढ़े (इसका तरीक़ा ये है कि बैठकर पढ़े, और सजदा सिमट कर करे) और अगर एक चौथाई (1/4) पाक है बाकी नापाक तो "वाजिब" है कि उसी कपड़े से नमाज़ पढ़े।


📚 (बहारे शरीअत, हिस्सा 3, सफ़्हा 46)


🧠 ध्यान रहे:- ये सब उसी वक़्त है जबकि नापाकी दूर करने या धोने की कोई सूरत न हो, और बदन छुपाने को कोई दूसरा पाक कपड़ा न हो।

📚 इन मसाइल की तफ़सील जानने के लिए, फतावा आलमगीरी, फतावा रिज़विया, बहारे शरीअत, क़ानूने शरीअत, निज़ामे शरीअत वग़ैरह का मुताअला करना चाहिए।

☝🏻 ख़ुलासा कलाम:- ये है कि नमाज़ किसी सूरत मै छोड़ने की इजाज़त नहीं, और हर नापाकी पर नहाना फ़र्ज़ नहीं, ग़ुस्ल फ़र्ज़ होने की क्या-क्या सूरतें है वो पहले बताया जा चुका है।


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 26,27)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


       👉 नींद से वुज़ू कब टूटता है ? 👈


🧠 ग़लत फ़हमी :- अक्सर देखा गया है कि मस्जिद के अंदर नमाज़ के इन्तिज़ार मै लोग बैठे हैं और उन्हें नींद की झपकी आ गयी, या ऊंघने लगे तो वो समझते हैं कि हमारा वुज़ू टूट गया, और वो ख़ुद या किसी के टोकने पर वुज़ू करने लगते हैं,


📚 इस्लाह:- ये ग़लत है, मसअला ये है कि ऊंघने या बैठे-बैठे झोंके लेने से वुज़ू नहीं टूटता।

📚 (बहारे शरीअत, हिस्सा 2, सफ़्हा 27)


📚 तिर्मिज़ी और अबु दाऊद की हदीस है: कि रसूलुल्लाह ﷺ के सहाबाए किराम मस्जिद शरीफ़ मै नमाज़े इशा के इन्तिज़ार मै बैठे-बैठे सोने लगते थे यहाँ तक कि उनके सर नींद की वजह से झुक-झुक जाते थे, फिर वो दोबारा बग़ैर वुज़ू के नमाज़ पढ़ लिया करते थे।


📚 (मिश्कात, बाब, मा युजीबुल वुज़ू, सफ़्हा 41)


🧠 ध्यान रहे:- नींद से वुज़ू तब टूटता है जबकि ये दोनों शर्तें पायी जाएँ।


👉 (1)- दोनों सुरीन (बटक) उस वक़्त ख़ूब जमे न हों।


👉 (2)- सोने की हालत ग़ाफ़िल होकर सोने से मानेअ (रोकती) न हो। यानि इस क़दर सो जाना कि उसको कुछ पता ही न चले।


📚 (फतावा रिज़विया, जिल्द 1, सफ़्हा 71)


⚠ नोट:- चित, या पट, या करवट से लेटकर वुज़ू टूट जाता है, उखड़ू बैठा हो और टेक लगाकर सो गया तो भी वुज़ू टूट जायेगा, पैर (दोनों टाँगे) फैलाकर बैठे-बैठे सोने से वुज़ू नहीं टूटता, चाहें टेक लगाय हुए हो। खड़े-खड़े या चलते हुए, या बहालते नमाज़ क़याम मै या रुकूअ मै, या दो ज़ानू सीधे बैठकर, या सजदे मै जो तरीक़ा मर्दों के लिए सुन्नत है उस पर सो गया तो वुज़ू नहीं जायेगा,


🍁 हां अगर नमाज़ मै नींद की वजह से ज़मीन पर गिर पड़ा अगर फ़ौरन आँख खुल गयी तो ठीक, वरना वुज़ू जाता रहा। बैठे हुए ऊंघने और झपकी लेने से वुज़ू नहीं जाता।


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 27,28)


🧠 ध्यान रहे:- ये सब उसी वक़्त है जबकि नापाकी दूर करने या धोने की कोई सूरत न हो, और बदन छुपाने को कोई दूसरा पाक कपड़ा न हो।

📚 इन मसाइल की तफ़सील जानने के लिए, फतावा आलमगीरी, फतावा रिज़विया, बहारे शरीअत, क़ानूने शरीअत, निज़ामे शरीअत वग़ैरह का मुताअला करना चाहिए।

☝🏻 ख़ुलासा कलाम:- ये है कि नमाज़ किसी सूरत मै छोड़ने की इजाज़त नहीं, और हर नापाकी पर नहाना फ़र्ज़ नहीं, ग़ुस्ल फ़र्ज़ होने की क्या-क्या सूरतें है वो पहले बताया जा चुका है।


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 26,27)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌴 क्या बीवी से हमबिस्तरी करने मै सारे कपड़े नापाक हो जाते हैं ?


🧠 ग़लत फ़हमी :- काफ़ी लोग ये समझते हैं कि, शौहर बीवी के हमबिस्तर होने से उनके सारे कपड़े नापाक हो जाते हैं,


📚 इस्लाह:- ये ग़लत है, बल्कि जिस कपड़े के जिस हिस्से पर नापाकी लगी हो सिर्फ़ वही नापाक है, बाक़ी पाक है। कपड़े के नापाक हिस्से को 3 बार धो दिया जाये, और ख़ूब अच्छी तरह निचोड़ दिया जाये तो वो पाक हो जाता है। फिर उसी से नमाज़ पढ़ सकते हैं, और जिस कपड़े पर मर्द या औरत की "मनी" न लगी हो वो बग़ैर धोये पाक है।


👉🏿 कुत्ते के बदन या कपड़े से छु जाने का मसला.......!


🧠 ग़लत फ़हमी:- कुछ लोग समझते हैं कि, कुत्ते का जिस्म अगर इंसान के जिस्म या कपड़े से लग जाये तो वो नापाक हो जाता है,,!


📚 इस्लाह:- ऐसा सोंचना उनकी ग़लत फ़हमी है, कुत्ते का सिर्फ़ छू जाना (टच हो जाना) नापाकी नहीं लाता, हां अगर कुत्ते के जिस्म पर नापाकी लगी हो, और आप जानते हैं कि वो नापाक चीज़ ही है, और वो उसके जिस्म से आपके लग गयी, तो जहाँ लगी वो जगह नापाक है। यूं ही कुत्ते का पसीना और उसका लुआब (थूक) भी नापाक है, वो भी जहाँ लगेगा नापाक कर देगा। सिर्फ़ कुत्ते का छू जाना नापाक नहीं करता।


🧠 ध्यान रहे:- कुत्ता पालना इस्लाम मै मना है, हां अगर शिकार या हिफ़ाज़त के लिए वाक़ई ज़रूरत हो, तो इजाज़त है। शौकिया और बग़ैर ख़ास ज़रूरत के लिए जाइज़ नहीं


📚 तफ़सील के लिए पढ़िए: फ़तावा रिज़विया, जिल्द 10, किस्त 1, सफ़्हा 196


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 28,29)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👉 क्या ढीले से इस्तिन्जा करने के बाद पानी से धोना ज़रूरी है ?


🧠 ग़लत फ़हमी :- काफ़ी लोग ये समझते हैं कि, ढीले से इस्तिन्जा करने के बाद अगर पानी से नहीं धोया, और यूँ ही वुज़ू करके नमाज़ पढ़ ली तो नमाज़ नहीं होगी।


📚 इस्लाह:- ढीले से इस्तिन्जा करने के बाद पानी से धोना ज़रूरी नहीं, हां दोनों को जमा करना (यानि पहले ढीले से फिर पानी से इस्तिन्जा करना अफज़ल है) अगर सिर्फ़ ढीले से इस्तिन्जा करले तो काफ़ी है, और सिर्फ़ पानी से करले तब भी काफ़ी है, और दोनों से करले तो बेहतर और अफज़ल है, और ये हुक्म दोनों के लिए है, चाहें पेशाब हो या पैख़ाना।


👉🏿हदीस शरीफ़ मै है कि, एक मर्तबा रसूलुल्लाह ﷺ ने पेशाब फ़रमाया, हज़रते उमर फारूक़-ए-आज़म रदियल्लाहु तआला अन्हु एक बर्तन मै पानी लेकर पीछे खड़े हो गए, हुज़ूर ने पूछा ये क्या है ? अर्ज़ किया इस्तिन्जे के लिए पानी है, इरशाद फ़रमाया,,,मुझ पर ये वाजिब नहीं किया गया कि हर पेशाब के बाद पानी से तहारत (पाकी) हासिल करूँ !


📚 (मिश्कात, सफ़्हा 44, सु'नने अबुदाऊद, जिल्द 1, सफ़्हा 7)


🍁 खुलासा ये है कि पैखाना या पेशाब करने के बाद, सिर्फ़ मिटटी के ढेलों या पत्थरों वग़ैरह किसी भी नजासत (गंदगी) को ज़ाइल (ख़त्म) या खुश्क करने वाली चीज़ से इस्तिन्जा कर लेना तहारत के लिए काफ़ी है, पानी से धोना ज़रूई नहीं, हां अफज़ल और बेहतर है।

*👉 या अगर नजासत मोज़ा-ए-इस्तिन्जा (जगह) से एक रुपया भर बदन के हिस्से पर फेल गयी हो तो पानी से धोना ज़रूरी है, इस मसले को तफ़सील से जानने के लिए देखिये, 

📚 (फतावा रिज़विया जिल्द 2, सफ़्हा 165,)


⚠ नोट:- 🧠 जो लोग सफ़र मै रहते हैं, वो अपने साथ इस मक़सद के लिए कोई पुराना कपड़ा रख लिया करें, ये कपड़ा पानी न मिलने की सूरत मै तहारत के लिए बहुत काम आता है


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 29,30)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌹 नमाज़ मै दाहिने (Right) पैर का अंगूठा सरकने का मसला ?


🧠 ग़लत फ़हमी : - आमतौर से गांव देहातों मै इसको बहुत बुरा जानते हैं, यहाँ तक कि नमाज़ मै दाहिने पैर का अंगूठा अगर थोड़ा बहुत सरक जाये तो नमाज़ न होने का हुक्म लगा देते हैं।

बाअज़ लोग इस अंगूठे को नमाज़ की किलयां, या खूंटा कहते भी सुने गए हैं।


📚 इस्लाह:- ये सब जाहिलाना बातें हैं, किसी भी पैर का अंगूठा सरक जाने से नमाज़ मै कोई कमी नहीं आती। हां बिला वजह नमाज़ मै "क़सदन" (जानबूझकर) कोई हरकत करना (जैसे: हाथ पैर इधर उधर चलना, निगाह इधर उधर करना वग़ैरह), ख्वाह (चाहें) जिस्म के किसी हिस्से से हो, अबस और मकरुह है।


👉🏿 हज़रत अल्लामा मुफ़्ती जलालुद्दीन साहब किब्ला अमजदी फ़रमाते हैं.......दाहिने पैर का अंगूठा अपनी जगह से हट गया तो कोई हर्ज नहीं, हां मुक्तदी (इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने वाले) का अंगूठा दाहिने या बाईं (Left Right) आगे या पीछे इतना हटा कि जिस से सफ़ मै कुशादगी पैदा हो या सीना बहार निकले तो मकरुह है (अलख)!

📚 (फ़तावा फैज़ुर् रसूल, जिल्द 1, सफ़्हा 370)


🛡 खुलासा ये है कि अवाम मै जो मशहूर है कि, नमाज़ मै दाहिने पैर का अंगूठा अगर ज़रा सा भी सरक गया तो नमाज़ नहीं होगी, ये उनकी जिहालत है, और ग़लत फ़हमी है।

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 30,31)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌹 सजदे मै पैर की उँगलियों का पेट ज़मीन पर न लगना ?


🧠 ग़लत फ़हमी :- इस मसअले से काफ़ी लोग ग़ाफ़िल हैं, और पैर की उँगलियों के सिर्फ़ सिरे ज़मीन पर लग जाने को सजदा समझ लेते हैं, और बअज़ का तो सिर्फ़ अंगूठे का सिरा ही ज़मीन पर लगता है, और बाक़ी उँगलियाँ ज़मीन को छूती भी नहीं।


📚 इस्लाह:- इस सूरत मै न सज़दा होता है न नमाज़, सज़दे मै पैर की उँगलियों के सिर्फ़ सिरे ही नहीं बल्कि उँगलियों पर ज़ोर देकर किब्ले की तरफ़ उँगलियों का पेट ज़मीन पर लगाना चाहिए।

📚 (फतावा रज़विया शरीफ़, जिल्द 1, सफ़्हा 556) पर है।


👉🏿 सजदे मै कम से कम एक ऊँगली का पेट ज़मीन से लगा होना फ़र्ज़ है, और पाऊं की अक्सर उँगलियों का पेट ज़मीन से लगा (जमा) होना वाजिब है।

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 31)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📢 आज़ान के वक़्त बातें करना ?📢


🧠 आज़ान के वक्त बातों में मशगूल रहना, एक आम बात हो गई है,,, आवाम तो आवाम बाअज़ ख़वास अहले इल्म तक इसका ख्याल नहीं रखते,, जबकि हदीस शरीफ में है जो आज़ान के वक्त बातों में मशगूल रहे उस पर खात्मा बुरा होने का खौफ है....


📢 मसअला यह है कि जब आज़ान हो तो इतनी देर के लिए सलाम बातचीत और जवाब ए सलाम,, तमाम काम बंद कर दे यहां तक कि कुरआन ए मजीद की तिलावत में अगर अजान की आवाज आए तो तिलावत रोक दें और आज़ान गौर से सुने और जवाब दें,, रास्ता चलने में आज़ान की आवाज़ आई तो इतनी देर खड़ा हो जाए सुने और जवाब दे,, अगर चंद आज़ाने सुने तो सिर्फ पहली का जवाब देना सुन्नत है और सबका देना भी बेहतर है।


📚 (बहारे शरीअत, हिस्सा 3, सफ़्हा 36)

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 31)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📢 आज़ान के वक़्त बातें करना ?📢


🧠 आज़ान के वक्त बातों में मशगूल रहना, एक आम बात हो गई है,,, आवाम तो आवाम बाअज़ ख़वास अहले इल्म तक इसका ख्याल नहीं रखते,, जबकि हदीस शरीफ में है जो आज़ान के वक्त बातों में मशगूल रहे उस पर खात्मा बुरा होने का खौफ है....


📢 मसअला यह है कि जब आज़ान हो तो इतनी देर के लिए सलाम बातचीत और जवाब ए सलाम,, तमाम काम बंद कर दे यहां तक कि कुरआन ए मजीद की तिलावत में अगर अजान की आवाज आए तो तिलावत रोक दें और आज़ान गौर से सुने और जवाब दें,, रास्ता चलने में आज़ान की आवाज़ आई तो इतनी देर खड़ा हो जाए सुने और जवाब दे,, अगर चंद आज़ाने सुने तो सिर्फ पहली का जवाब देना सुन्नत है और सबका देना भी बेहतर है।


📚 (बहारे शरीअत, हिस्सा 3, सफ़्हा 36)

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 31)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌴 जमाअत की नमाज़ के लिए तकबीर खड़े होकर सुनना ?


🧠 जब तकबीर कहने वाला "हय्या-अल्स्सलाह" और "हय्या-अलल-फ़लाह कहे" इमाम और मुक्तदि जो वहां मौजूद हो उनको उसी वक्त खड़ा होना चाहिए मगर बाअज़ जगह शुरू तकबीर से खड़े होने का रिवाज पड़ गया है, और वह लोग इस रिवाज पर इतने अड़ जाते हैं कि हदीसों और फिक़ही किताबों की परवाह नहीं करते और मनमानी ज़िद, और हठधर्मी से काम लेते हैं। फतावा आलमगीरी जो बादशाह औरंगज़ेब आलमगीर रहमतुल्लाह अलैही के हुक्म से अब से तकरीबन साढ़े तीन सौ साल पहले उस दौर के सभी बड़े-बड़े ओलमा ने मशवरे के साथ लिखी उसमें है।


يقوم القوم و الامام اذا قال المؤذن حي على الفلاح


📢 कि मुअज्ज़िन जिस वक्त "हय्या अलल फ़लाह" कहे तब इमाम और मुक्तदियों को खड़ा होना चाहिए....।

📚 (फ़तावा आलमगीरी, जिल्द 1, किताबुस्सलाह, बाबुल अज़ान, फ़स्ल 2, सफ़्हा 58)


Next:-

🏮 आने वाला पार्ट


📍जुमे की दूसरी (ख़ुत्बे की) अज़ान मस्जिद के अंदर देना (कहना) ❓🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 32)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🎤 जुमे की दूसरी आज़ान मस्जिद के अंदर देना यानि ख़ुत्बे की आज़ान ❓


🧠  फिक़्ह हनफी की तक़रीबन सारी किताबों में यह बात साफ़ लिखी हुई है कि,, कोई आज़ान मस्जिद में ना दी जाए। खुद हदीस शरीफ से भी यही साबित है। और किसी हदीस और किसी इस्लामी मौअतबरो मुस्तनद किताब में यह नहीं है कि,, कोई आज़ान मस्जिद के अंदर दी जाए। मगर फिर भी बाअज़ जगह कुछ लोग जुमे की दूसरी आज़ान मस्जिद के अंदर इमाम के सामने खड़े होकर पढ़ते हैं, और सुन्नत पर अमल करने से महरूम रहते हैं, और महज़ ज़िद और हठधर्मी की बुनियाद पर रसूले खुदा (सल्लल्लाहु ताला अलेही वसल्लम) की प्यारी-प्यारी सुन्नत छोड़ देते हैं, और बाअज़ जगह पर तो लाउडस्पीकर मस्जिद के अंदर रखकर पांचों वक्त आज़ान पढ़ने लगे हैं - इस तरह आज़ान देने वाले और दिलवाने वाले सब गुनहगार हैं। फतावा आलमगीरी में है_"ला यूअ-ज़नू फिल् मस्जिद" मस्जिद में कोई आज़ान ना दी जाए।

📚 (फ़तावा आलमगीरी, बाबुल अज़ान, फ़स्ल 2, सफ़्हा 55)


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


👉 क्या दाहिनी जानिब (Right Side) से इक़ामत कहना ज़रूरी है ❓🎤

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 33)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👉 क्या दाहिनी जानिब (Right Side) से इक़ामत (तकबीर) कहना ज़रूरी है ?


🧠 आज कल यह ज़रूरी ख़्याल किया जाता है कि,, इक़ामत या तकबीर जो जमाअत क़ाइम करने से क़ब्ल (पहले) मुअज्ज़िन लोग पढ़ते हैं,, उसमें पढ़ने वाला इमाम के पीछे दाहिनी तरफ़ (Right Side) हो, और बाई जानिब (Left Side) खड़े होकर तकबीर पढ़ने को मम्नू (मना) ख़्याल करते हैं। हालांकि तकबीर बाएं तरफ़ से पढ़ना भी मना नहीं है,, सैयदी आला हजरत फरमाते हैं "और इक़ामत की निस्बत भी ताअय्युने जहत (चुनी हुई) के दाहिनी तरफ हो या बाएं तरफ,,(ऐसी कोई बात) फ़क़ीर की नज़र से ना गुज़री। हां इस कदर कह सकते हैं कि महाज़ात इमाम फिर जानिबे रास्त मुनासिब तर है।


📚 (फ़तावा रिज़विया, जिल्द 2, सफ़्हा 465)


👉🏿 खुलासा यह कि इमाम के पीछे दाहिनी तरफ़ से पढ़ना ज़्यादा बेहतर है लेकिन बाईं तरफ से पढ़ना भी जायज़ है और इससे नमाज़ मै कोई कमी नहीं आती और दाहिनी तरफ़ को ज़रूरी ख़्याल करना ग़लत फहमी है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🌿 नमाज़ी के सामने से गुज़रना मना है हटना गुनाह नहीं🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 33,34)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌴 नमाज़ी के सामने से गुज़रना मना है हटना गुनाह नहीं।


🧠 आमतौर से मस्जिद में देखा गया है कि दो शख्स आगे पीछे नमाज़ पढ़ते हैं यानी एक पिछली सफ़ में और दूसरा उसके सामने अगली सफ़ में,, अगली सफ़ में नमाज़ पढ़ने वाला पीछे वाले से पहले फ़ारिग़ हो जाता है,, और फिर उसकी नमाज़ ख़त्म होने का इंतज़ार करता रहता है कि कब वह सलाम फेरे तब यह वहां से हटे। और उससे पहले हटने को नमाज़ी के सामने से गुज़रना ख़्याल किया जाता है। हालांकि ऐसा नहीं है,,, आगे नमाज़ पढ़ने वाला अपनी नमाज़ पढ़कर हट जाए तो उस पर गुज़रने का गुनाह नहीं है। ना वह नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाले के बारे में वारिद शुदा हदीस में मज़्कूर व-ईद का मिसदाक़ है।


🌹 ''खुलासा यह के "नमाज़ी के सामने से गुज़रना मना है हटना मना नहीं है" (सद्रुश शरीआह हज़रत मौलाना अमजद अली साहब आज़मी अलैहिर्रहमा) फरमाते हैं। अगर दो शख़्स आदमी के आगे से गुज़रना चाहते हों, और सुतरे (नमाज़ी के आगे रखने) को कोई चीज़ नहीं तो उनमें से एक नमाज़ी के सामने उसकी तरफ़ पीठ करके खड़ा हो जाए और दूसरा उस की आड़ (ओट) पकड़ कर गुज़र जाए,, फिर वह दूसरा उसकी पीठ के पीछे नमाज़ी की तरफ पुश्त (पीठ) करके खड़ा हो जाए और यह गुज़र जाए वह दूसरा जिधर से आया उसी तरफ हट जाए।


📚 (आलमगीरी, रद्दुल मुख़्तार, बहारे शरीअत, हिस्सा 3, सफ़्हा 159)



🧠 इससे ज़ाहिर है कि गुज़रने और हटने में फ़र्क़ है,, और गुज़रने का मतलब यह है कि नमाज़ी के सामने एक तरफ़ से आए और दूसरी तरफ़ निकल जाए ये यक़ीनन ना जाइज़ और गुनाह है। और अगर नमाज़ी के सामने बैठा है,, और किसी तरफ़ हट जाए तो यह गुज़रना नहीं है,, और इसमें कोई गुनाह नहीं है।


👉 (वल्लाहु तआला आलमु)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🌿 नमाज़ मै इमाम के लिए लॉडीस्पीकर का इस्तेमाल ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 34,35)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🎤 नमाज़ मै इमाम के लिए लॉडीस्पीकर का इस्तेमाल ?📢


🧠 🎤नमाज़ ए बा-जमात (जमाअत के साथ नमाज़) में इमाम के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का रिवाज आम होता जा रहा है,, और लोगों ने नमाज़ ए बा-जमात में इमाम के लिए जवाज़ (जाइज़ होने) के पहलू भी तलाश कर लिए। और बहस-ओ मुबाहिसे के ज़रिए अपने आराम का रास्ता ढूंढ लिया, और यह भी ना सोचा कि नमाज़ का इस्लाम में क्या मुकाम है ? बेशक नमाज़ इस्लाम की पहचान है, बेशक नमाज़ जाने इस्लाम है, रूह ए इस्लाम, अलामत ए अहले ईमान है, बेशक नमाज़ पैग़ंबरे इस्लाम की आंखो की ठंडक है,, और उनके मुबारक दिल का आराम है।

              🍥👉 तो कम से कम इस अहम इस्लामी फ़रीज़े और ऐसी इबादत को जिसमे बंदा हर हाल से ज़्यादा अपने रब से क़रीब होता है,, साइंसी ईजादात और जदीद (नयी) टेक्नोलॉजी के हवाले ना करके इस अंदाज पर रहने दीजिए जैसा के जमाना ए पाक ए रसूल ए गिरामी वक़ार अलैहिस सलातो वस्सलाम में होती थी।........मगर अफ़सोस सद अफ़सोस नमाज़ में लोगों ने लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करके ज़माना ए नबवी की यादों को भुला दिया। लंबी-लंबी क़तारों में मुकब्बिरीन (तकबीर कहने वालों) की गूंजती अल्लाह हू अकबर की सदाओं को ख्वाबे दीरीना बना दिया।


🌴 जदीद तहक़ीक़ात से भी यह बात खूब वाज़ेह हो चुकी है के लाउडस्पीकर से निकलने वाली आवाज़ इमाम की असल आवाज़ नहीं होती,, तो ज़ाहिर है कि जो लोग इस ख़ारजी आवाज पर इक़्तिदा करते हैं उन सब की नमाज़ ख़राब हो जाती है। बसा औक़ात (कभी) दरमियान में लाउडस्पीकर बंद हो जाता है और उसी पर भरोसा करके उसके आशिको ने मुकब्बिर (तकबीर कहने वालों) का इंतिज़ाम भी नहीं किया होता है, तो नमाज़ के साथ खिलवाड़ हो कर रह जाता है। मगर माइक्रोफ़ोन के दीवानों को इस सब से क्या मतलब ? इन के नज़दीक ज़्यादा लोगों को नमाज़ पढ़ाने के लिए,, सिवाय लाउडस्पीकर के और कोई ज़रिया ही नहीं रह गया है।


و لا حول و لا قوه الا بالله العلي العظيم 


🌿 सही बात यह है कि जिन ओलमा ने नमाज में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को नाजायज़ क़रार दिया,, उन्हीं ने नमाज़ की शान को बाक़ी रखा,,, उसके मुक़ाम को समझा और जिन्होंने छूट दे दी.....! उन्होंने नमाज़ की अहमियत ही को नहीं समझा। और वह मौलवी होकर भी नमाज़ की लज़्ज़त से ना-आशना और उसकी बरकतों, हिकमतों से महरूम रहे।


👉 (वल्लाहु तआला आलमु)


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


💦 मग़रिब और इशां की नमाज़ कब तक पढ़ी जा सकती है ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 35,36)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


☘ मग़रिब और इशा की नमाज़ कब तक पढ़ी जा सकती है ?


🧠 ग़लत फ़हमी काफी लोग थोड़ा सा अंधेरा होते ही यह ख़्याल करते हैं कि मग़रिब की नमाज़ का वक़्त निकल गया,, अब नमाज़ क़ज़ा हो गई__और बेकार मै नमाज़ छोड़ देते हैं। या क़ज़ा की नियत से पढ़ते हैं। मग़रिब की नमाज़ का वक्त गुरूबे आफ़ताब (सूरज के डूबने) से लेकर गुरूबे शफ़क़ तक है (और शफ़क़ उस सफेदी का नाम है जो पश्चिम की तरफ़ सूरज डूबने के बाद उत्तर दक्षिण सुबह सादिक़ की तरह फैलती है)


💗 हां मग़रिब की नमाज़ जल्दी पढ़ना मुस्तहब है और बिला उज़्र दो रकातों की मिक़दार देर लगाना मकरूहे तंज़ीही (यानी ख़िलाफ़ ए ऊला) है__और बिला उज़्र इतनी देर लगाना जिसमें कसरत से सितारे ज़ाहिर हो जाएं मकरूहे तहरीमी और गुनाह है,


📕 (अहकामे शरीअत, सफ़्हा 137)



🧠 हां अगर ना पड़ी हो तो पढ़े और जब तक ईशा का वक्त शुरू नहीं हुआ है तब तक अदा ही होगी। क़ज़ा नहीं-----और यह वक्त सूरज डूबने के बाद कम से कम एक घंटा 18 मिनट और ज़्यादा से ज़्यादा एक घंटा 35 मिनट है जो मौसम के लिहाज़ से घटता बढ़ता रहता है। यानी 1 घंटे के ऊपर 18 से 35 मिनट के दरमियान घूमता रहता है, ईशा की नमाज़ के बारे में भी कुछ लोग समझते हैं कि इस का वक्त 12:00 बजे तक रहता है यह भी ग़लत है ईशा की नमाज़ का वक्त फ़जरे सादिक़ तुलुअ होने यानि सहरी का वक्त ख़त्म होने तक रहता है हां तिहाई रात से ज़्यादा ताख़ीर करना (बिला वजह) मकरूह है।


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


🕌 मस्जिद मै अपनी ज़ात (ख़ुद) के लिए सवाल करना (भीख़ मांगना) ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 36,37)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🕌 मस्जिद मै अपनी ज़ात (ख़ुद) के लिए सवाल करना (भीख़ मांगना) ?🎤


🧠 आज कल मस्जिदों में सवाल करने और भीख मांगने का रिवाज बहुत बढ़ता जा रहा है_ उमूमन देखा जाता है कि इधर इमाम साहब ने सलाम फेरा उधर किसी ना किसी ने,, और बाअज़ औकात कई-कई लोगों ने अपनी-अपनी आपबीती सुनाना और "मदद करो भाइयों" की पुकार लगाना शुरु कर दिया। हालांकि यह निहायत ग़लत तरीक़ा है,,, ऐसे लोगों को इस हरकत से बाअज़ रखा जाए और मस्जिदों में भीख मांगने से सख्ती से रोका जाए

🌴 "सदरुश'शरीआह हज़रत मौलाना अमजद अली साहब क़ुद्स सिर्रहु फरमाते हैं" मस्जिद मै सवाल करना हराम है...और उस साइल (सवाल करने/भीख़ मांगने वाले) को देना भी मना है।


📕 (बहारे शरीअत, हिस्सा 3, सफ़्हा 184)


🧠 इसका तरीक़ा यह होना चाहिए कि, ऐसे लोग या तो बाहर दरवाज़े पर सवाल करें,, या इमामे मस्जिद वगैरा किसी से कह दे कि वह उनकी ज़रूरत से लोगों को आगाह कर दे।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


👉 पांच वक़्त की नमाज़ से ग़फ़लत (यानि नमाज़ न पढ़ना) और वज़ीफ़े पढ़ना ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 37,38)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💎 पांच वक़्त की नमाज़ से ग़फ़लत (यानि नमाज़ न पढ़ना) और वज़ीफ़े पढ़ना ?


🧠 काफ़ी लोग देखे गए कि वह नमाज़ों का ख़्याल नहीं रखते, और पढ़ते भी हैं तो वक्त निकालकर जल्दी-जल्दी या बगैर जमात के,, और वज़ीफ़ा और तस्बीहों मै लगे रहते हैं। उनके वज़ीफ़े उनके मुंह पर मार दिए जाएंगे, क्योंकि जिसके फ़र्ज़ पूरे ना हो उसका कोई नफिल क़ुबूल नहीं। इस्लाम मै सबसे बड़ा वज़ीफ़ा और अमल नमाज़ ए बा-जमात की अदायगी है। "हदीस शरीफ:- मै है कि हज़रत ए उमर ने एक दिन फज्र की जमात मै हज़रत ए सुलेमान बिन अबी हसमा को नहीं पाया...! दिन मैं बाज़ार को जाते वक्त उनके घर के पास से गुज़रे तो उनकी मां से पूछा कि आज सुलेमान जमात मै क्यों नहीं थे ? उनकी वालिदा हज़रत ए शिफा ने बताया कि रात भर जागकर इबादत करते रहे फज्र की जमात के वक्त नींद आ गई और जमात मै शरीक होने से रह गए। अमीरुल मोमिनीन हज़रत ए उमर फारुक़ ए आज़म रदियल्लाहु ताला अन्हु ने फ़रमाया कि "मेरे नज़दीक सारी रात जागकर इबादत करने से फज्र की जमात मै शरीक होना बेहतर है।"


📕 (मिश्कात, बाबुल जमाअत, सफ़्हा 97)



🧠"आला हज़रत" फरमाते हैं जब तक फ़र्ज़ ज़िम्मे पर बाक़ी रहता है कोई नफिल कुबूल नहीं किया जाता।


📕 (अल-मलफूज़, हिस्सा अव्वल, सफ़्हा 77)



👉🏿 जुमे के ख़ुत्बे मै उर्दू अशआर पढ़ना....?



🍥 जुमे का ख़ुत्बा सिर्फ अरबी ज़ुबान मै पढ़ना सुन्नत है, किसी और ज़ुबान में पढ़ना ख़िलाफ़ ए सुन्नत है। उर्दू अशआर अगर पढ़ना हो तो वह आज़ाने ख़ुत्बा से पहले पढ़ लिए जाएं, यानी दूसरी आज़ान के बाद जो ख़ुत्बा पढ़ा जाता है यह अरबी के अलावा और किसी ज़बान मै पढ़ना सुन्नत के ख़िलाफ़ है।


📚 (फ़तावा रिज़विया, जिल्द 3, सफ़्हा 751)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


💗 इमाम का मेहराब या दो सुतूनों के दरमियान खड़ा होना ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 38,39)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


☘ नसबंदी कराने वाले की इमामत का हुक्म ?


🧠 नसबंदी करना इस्लाम मै हराम है,,, लेकिन कुछ लोग ख़्याल करते हैं कि जिसने नसबंदी करा ली अब वह ज़िन्दगी भर नमाज़ नहीं पढ़ा सकता। हालांकि ऐसा नहीं है बल्कि इस्लाम में जिस तरह और गुनाहों की तौबा है इसी तरह इस गुनाह की भी तौबा है, यानी जिस की नसबंदी हो चुकी है अगर वह सिद्क़ दिल से (यानी सच्चे दिल से) ऐलानिया (खुले आम) तौबा करे, और हरामकारियों से बाअज़ रहे तो उसके पीछे नमाज़ पढ़ी जा सकती है,


📚 (फ़तावा फैज़ुर्रसूल, जिल्द 1, सफ़्हा 277,)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


📕 क्या जिस से ज़ाती रंजिश हो उसके पीछे नमाज़ न होगी ?🎤

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 39,40)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌹 क्या जिस से ज़ाती रंजिश हो उसके पीछे नमाज़ न होगी ?


🧠 अक्सर ऐसा होता है के इमाम और मुक्तदि के दरमियान कोई दुनियावि इख़्तिलाफ़ हो जाता है, जैसे आज कल के सियासी सामाजिक खानदानों और बिरादरियों के इख़्तिलाफ़ात और झगड़े, तो इन वुजुहात पर लोग उस इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ना छोड़ देते हैं,, और कहते हैं कि जिससे दिल न मिला हो उस के पीछे नमाज़ नहीं होगी। यह उनकी ग़लतफ़हमी है, और वह लोग धोखे में हैं। सही बात यह है कि जो इमाम शराइते इमाम का जामेअ है, बद मज़हब और फ़ासिक़-ए- मोअलिन नहीं है, तो उसके पीछे नमाज़ दुरुस्त है चाहे उससे आप का दुनियावि झगड़ा ही क्यों ना चलता हो। बातचीत दुआ और सलाम सब बंद हो फिर भी आप उसके पीछे नमाज़ पढ़ सकते हैं नमाज़ की दुरुस्तगी के लिए ज़रूरी नहीं है कि दुनियावि एतबार से मुक्तदी का दिल इमाम से मिला हुआ हो। हां 3 दिन से ज़्यादा एक मुसलमान के लिए दूसरे मुसलमान से बुराई रखना और मेलजोल ना करना अज़रुए शराअ (शरीअत के एतिबार से) ना पसंदीदा है। हदीस मै है, "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया" मुसलमान के लिए हलाल नहीं कि अपने भाई को 3 दिन से ज्यादा छोड़ रखे, जब उससे मुलाक़ात हो तो 3 मर्तबा सलाम कर ले अगर उसने जवाब नहीं दिया तो उसका गुनाह भी उसी के ज़िम्मे है,


📚 (अबूदाऊद, किताबुल अदब, जिल्द 2, सफ़्हा 673)



🌴 लेकिन उसका नमाज़ और इमामत से कोई ताअल्लुक़ नहीं रंजिश और बुराई में भी इमाम के पीछे नमाज़ हो जाएगी और जो लोग ज़ाति रंजिशों की बिना पर अपने नफ़्स और ज़ात की ख़ातिर इमामों के पीछे नमाज़ पढ़ना छोड़ देते हैं यह खुदा के घरों को वीरान करने वाले और दीन ए इस्लाम को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। इन्हें खुदाए तआला से डरना चाहिए, मरने के बाद की फिक्र करना चाहिए, क़ब्र की एक-एक घड़ी और कयामत का एक-एक लम्हा बहुत भारी पड़ेगा। "आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत फ़रमाते हैं" जो लोग नफ़्सानियत इमाम के पीछे नमाज़ ना पड़े और जमाअत होती रहे और शामिल ना हो वह सख्त गुनहगार हैं।


📚 (फ़तावा रिज़विया, जिल्द 3, सफ़्हा 221,)


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


💗 मुक़तदि के सर पर इमामा हो, और इमाम के न हो ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 40,41)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💗 मुक़तदि के सर पर इमामा हो, और इमाम के न हो ?


🧠 अगर मुक्तदी सर पर इमामा (जिसे साफ़ा और पगड़ी भी कहते हैं) बांधकर नमाज़ पढ़े, और इमाम के सर पर पगड़ी ना हो तो उसको कुछ लोग बहुत बुरा जानते हैं,, बल्कि बाअज़ यह समझते हैं कि इस सूरत में मुक्तदी की नमाज़ दुरुस्त नहीं हुई।.....यह ग़लत बात है, अगर इमाम के सर पर पगड़ी ना हो और मुक्तदी के हो तो मुक्तदी की नमाज़ दुरुस्त और सही हो जाएगी। "आला हज़रत रदियल्लाहु ताला अन्हु से यह मसला मालूम किया गया तो फ़रमाया बिला तकल्लुफ़ दुरुस्त है"


📚 (फ़तावा रिज़विया, जिल्द 3, सफ़्हा 273, 

📚(इरफ़ान-ए-शरीअत, सफ़्हा 4,)


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


💎 इमाम के लिए मुक़र्रिर (तक़रीर करने वाला) होना कितना ज़रूरी है ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 41)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💎 इमाम के लिए मुक़र्रिर (तक़रीर करने वाला) होना कितना ज़रूरी है ?


🧠 आजकल काफी जगह की अवाम (आम लोग) मस्जिद में जब किसी को इमामत के लिए रखते हैं तो उससे तक़रीर कराते हैं, अगर वह धूम-धड़ाके से खूब कूद-फांद कर हाथ पांव फेंक कर जोशीले अंदाज़ मै जज़्बाती तक़रीर कर दे तो बड़े खुश होते हैं, और उसको इमामत के लिए पसंद करते हैं, यहां तक के बाअज़ जगह तो खुशहुल-हानी और अच्छी आवाज़ से नाते और नज्में पढ़ दे तो उसको बहुत बढ़िया इमाम ख़्याल करते हैं, इस बात की तरफ़ तवज्जो नहीं देते कि उसका कुरान शरीफ ग़लत है या सही ?.

💎 इसको मसाइल-ए-दुनिया से बा-क़द्र-ए-ज़रूरत वाक़फ़ियत है या नहीं ? और इस का किरदार और अमल मनसबे इमामत के लिए मुनासिब है या नहीं ? अगरचे तक़रीर और बयान और ख़िताबत अगर उसूलों शराइत के साथ हों तो उस से दीन को तक़वियत (ताक़त) हासिल होती है और हुई है। लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं कि दीनदारी तक़वा शिआरी और ख़ौफ़-ए-ख़ुदा उमूमन कम सुख़न (कम बोलने वालों) और संजीदा मिज़ाज लोगों में ज़्यादा मिलता है। ज़ुबान ज़ोर और मुंह के मज़बूत लोग सब काम मुंह और ज़ुबान से ही चलाना चाहते हैं,, और इस्लाम गुफ़्तार से ज़्यादा किरदार से फैला है, और आजकल के ज़्यादातर मौलवियों और इमामों के लिए बजाए तक़रीरो खिताबत के' ज़िम्मेदार ओलामाए अहले सुन्नत की आम फ़हम (आसान) अंदाज़ मै लिखी हुई किताबें पढ़कर हम को सुनाना ज़्यादा मुनासिब और बेहतर है,


🧠,,,,,,, ख़ुलासा यह कि आजकल हर जगह लोग जो इमाम के लिए मुक़र्रिर (तेज़ तर्रार तक़रीर करने वाला) होना ज़रूरी ख़्याल करते हैं यह लोग ग़लती पर हैं"


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


💗 इमाम का (नमाज़ मै) मुक्तदियों से ऊँची जगह खड़ा होना ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 42)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 2️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💗 इमाम का (नमाज़ मै) मुक्तदियों से ऊँची जगह खड़ा होना ?


🧠 कई जगह देखा गया है के नमाज़ मै इमाम मुक्तदियों से ऊंची जगह पर खड़ा होता है, मसलन:- अंदर के हिस्से की कुर्सी ऊंची है और बाहर के हिस्से की नीची,, और इमाम का मुसल्ला अंदर के फर्श पर है और मुक्तदी बाहर, या दोनों अंदर हैं लेकिन इमाम के मुसल्ले के लिए फर्श ऊंचा कर दिया गया है, तो यह मकरूह है, और इस तरह नमाज़ पढ़ने से नमाज़ में कमी आती है। मसला यह है कि.... इमाम का तन्हा बलंद ऊंची जगह खड़ा होना मकरूह है,, और ऊंचाई का मतलब यह है कि देखने से अंदाज़ा हो जाए के इमाम ऊंचा है और मुक्तदी नीचे। और यह फ़र्क़ मामूली हो तो मकरूहे तंज़ीही, और अगर ज़्यादा हो तो तहरीमी है.....! हां अगर पहली सफ़ इमाम के साथ और बराबर मै हो बाकी सफें नीची हो तो कुछ हर्ज नहीं यह जाइज़ है।


⚠ नोट  इस मसले की तफ़सील जानने के लिए "फ़तावा रज़विया, जिल्द सोइम, सफा नंबर 415, देखना चाहिए"...। इस मसअले का खास ध्यान रखना चाहिए क्योंकि खुद हदीस शरीफ में भी इस से मुताअल्लिक़ मरवी है..!


📚 'हदीस: हजरत हुज़ैफ़ा रदी'अल्लाह ताला अन्हु से मरवी है कि, "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ताला अलेही वसल्लम" ने फ़रमाया कि जब इमाम नमाज़ पढ़ाए तो मुक्तदियों से ऊंची जगह खड़ा ना हो"


📚 (सुनन अबु दाऊद, जिल्द 1, सफ़्हा 88)


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


🌹 नमाज़ मै 'नफ़िलों' को फर्ज़ो वाजिब समझना ?


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 42,43)

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/919669988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌹 नमाज़ मै 'नफ़िलों' को फर्ज़ो वाजिब समझना ?


🧠 नमाज़े ज़ोहर, मग़रिब और इशा के आखिर में, और इशा में वित्रों से पहले 2 रकात नफिल पढ़ने का रिवाज है, और उनको पढ़ने में हिकमत और सवाब है,, लिहाज़ा पढ़ लेना ही मुनासिब है, लेकिन उन नफ़िलों को फर्ज़ो वाजिब और ज़रूरी ख्याल करना, और ना पढ़ने वालों को टोकना, और उन पर मलामत करना, और बुरा भला कहना ग़लत है। इस्लाम में ज़्यादती और शरई हुदूद से आगे बढ़ना है। इस्लाम में नफ़िलो मुस्तहब उसे कहते हैं जिसके करने पर सवाब हो और ना करने पर कोई गुनाह और अज़ाब नहीं,, तो जब अल्लाह तआला ने उसके न अदा करने वाले पर कोई गुनाह और अज़ाब नहीं रखा तो आपको भी उस पर मलामत करने और बुरा भला कहने का कोई हक नहीं, और जब ख़ुदा ए तआला नफिल छोड़ने पर नाराज़ नहीं तो आप टोकने वाले कौन हुए ?


👉🏿 इस्लाम में अल्लाह तआला ने अपने बंदों को जो रिआयतें और आसानियां दी है उन्हें लोगों तक पहुंचाना ज़रूरी है अगर आप ऐसा नहीं कर रहे हैं तो आप इस्लाम को बजाए नफ़ेअ के नुक़सान पहुंचा रहे हैं, और लोग यह ख्याल कर बैठेंगे कि हम इस्लाम पर चल ही नहीं सकते क्योंकि वह एक मुश्किल मज़हब है लिहाज़ा उसकी इशाअत में कमी वाक़ै होगी। आज कितने ऐसे लोग हैं जो सिर्फ इसलिए नमाज़ नहीं पढ़ते कि वह समझते हैं, हम नमाज़ पढ़ ही नहीं सकते और मसाइले नमाज़ और तहारत, पाकी और नापाकी से पूरी तरह वाक़फ़ियत ना होने और खुदा और रसूल की अता फरमाए हुई बाअज़ रीआयतों और आसानियों पर आगाह ना होने की बिना पर नमाज़ को छोड़ना गवारा कर लेते हैं,, और उन बातों से नफ़ाअ (फ़ायदा) नहीं उठाते। हालांकि एक वक्त की नमाज़ भी क़सदन (यानी जानबूझकर) छोड़ देना इस्लाम में कुफ्र और शिर्क के बाद सबसे बड़ा गुनाह है।


👉🏿 ओलामा और आइम्मा ए मसाजिद से मेरी गुज़ारिश है कि वह अवाम का ख़ौफ़ न करके उन्हें इस्लामी एहकाम पर अमल करने में मौका ब'मोका जो छूट दी गई और जो आसानियां है उन्हें ज़रूर बताएं, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस्लाम और इस्लामियात को अपनाएं। इन्हीं नफ़्लों के बारे में देखा गया है कि अगर कोई शख्स इन्हें ना पड़े तो कुछ अनपढ़ उस पर इल्ज़ाम लगाते हुए यह तक कह देते हैं कि नमाज़ पढ़ें तो पूरी पढ़ें इससे तो ना पढ़ना अच्छा है,, यह एक बड़ी जिहालत की बात है जो वह कहते हैं, हालांकि सही बात यह है कि नफिल तो नफिल अगर कोई शख्स सुन्नते भी छोड़ दें सिर्फ फ़र्ज़ पढ़ ले तो वह नमाज़ को जानबूझकर बिलकुल छोड़ देने वालों से बहुत ज़्यादा बेहतर है, और उसे बे नमाज़ी नहीं कहा जा सकता, हां सुन्नते छोड़ देने की वजह से गुनहगार ज़रूर है क्योंकि सुन्नतों को छोड़ने की इजाज़त नहीं और इन्हें जानबूझकर छोड़ देने की आदत बना लेना गुनाह और मना है।


🌹 हां अगर रवारवि में, उलझन और परेशानी और जल्दी में कोई ऐसा मौका है कि आप सुन्नतों के साथ मुकम्मल नमाज़ नहीं पढ़ सकते तो सिर्फ फ़र्ज़ और वित्र पढ़ लेने में कोई हर्ज और गुनाह नहीं है...! मसअलन:- वक्त तंग है पूरी नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती तो सिर्फ फर्ज़ पढ़ लेना काफी है।


👉🏿 खुलासा यह के ज़ोहर और मग़रीब और इशा में जो नफिल अदा किए जाते हैं उन्हें अदा करना बहुत अच्छा है मुनासिब और बेहतर है और पढ़ना चाहिए,, लेकिन उन्हें फ़र्ज़ और वाजिब और ज़रूरी समझना और ना अदा करने वालों को टोकना उन्हें उस छोड़ने पर भला बुरा कहना ग़लत है जिसकी इस्लाह ज़रूरी है।


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


👉🏻 क्या बग़ैर रुमाली का पैजामा या जांघिया पहनने से नमाज़ मै कमी आती है ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 43,44,45)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👉🏻 क्या बग़ैर रुमाली का पैजामा या जांघिया पहनने से नमाज़ मै कमी आती है ?


🧠 यह भी बाअज़ लोगों मै एक आम ख्याल है जिसकी कोई हकीकत नहीं....! पैजामे या जांघिये में रुमाली होना नमाज़ की सेहत के लिए बिल्कुल ज़रूरी नहीं है,, बगैर रुमाली के पैजामे और जांघिये से नमाज़ बिला कराहत जायज़ है।...हां जो लिबास और कपड़े गैर मुस्लिमों के लिए मख़्सूस 'यानी खास' है उनको पहनना गुनाह है, और उनमें नमाज़ मकरूह है। अंग्रेजी पेंट और शर्ट में फी ज़माना ओलामाए किराम ने नमाज़ के मकरूहे तंज़ीही होने का फतवा दिया है।

📚 (फ़तावा मरकज़ी दारुल'इफ्ता, सफ़्हा 207)


📖 ''''यह इसलिए नहीं कि पैंट में रुमाली नहीं होती बल्कि इसलिए है कि अंग्रेजों का ख़ास क़ोमी लिबास रह चुका है, और अब भी दीनदार मुसलमानों में इसको माअयूब 'यानि ऐब लगा हुआ' ख्याल किया जाता है। लिहाज़ा अब भी अंग्रेजी पेंट और शर्ट में नमाज़ अदा ना करना ही मुनासिब और बेहतर है और इस लिबास से बचना ही ऊला 'यानी अब्बल दर्जे का' बेहतर है


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🍥 नमाज़ मै लंगोट बांधने का मसला ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 45,46)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🍥 नमाज़ मै लंगोट बांधने का मसला ?


🧠 कुछ लोग समझते है कि पैजामा या तेहबंद (लुंगी) के अंदर लंगोट बांधकर नमाज़ पढ़ने से नमाज़ नहीं होती।.......ये उनकी ग़लतफहमी है, लंगोट बांधकर नमाज़ पढ़ने से नमाज़ मै कोई कमी नहीं आती।....अलबत्ता,,इतना ज़रूर ध्यान दें कि वो इतना कसा हुआ या टाइट बंधा हुआ न हो कि रूकू और सजदे मै और क़ायदे मै बैठने पर परेशानी हो।


📚 (फ़तावा मरकज़ी फैज़ुर्रसूल, जिल्द 1, सफ़्हा 252, इरफ़ाने शरीअत, सफ़्हा 4)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


👖 पेंट और पैजामे की मोरी चढ़ाकर (Fold) करके नमाज़ पढ़ना ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 46)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👖 पेंट और पैजामे की मोरी चढ़ाकर (Fold) करके नमाज़ पढ़ना ?


🧠 कुछ लोग टखनों से नीचे लटका हुआ पाजामा और पेंट पहनते हैं, अगर उन्होंने इसकी आदत डाल रखी है, और तकब्बुर और घमंड के तौर पर वह ऐसा करते हैं तो यह नाजायज़ और गुनाह है, और इस तरह नमाज़ मकरूह है। लेकिन अगर इत्तेफाक़ से हो या बेख़याली या बेतवज्जोही से हो तो हर्ज नहीं, और जो लोग इससे बचने के लिए और टखने खोलने के लिए मोरी नीचे को चढ़ाते हैं वह गुनाह को घटाते नहीं बल्कि बढ़ाते हैं, और नमाज़ में खराबी को कम नहीं करते बल्कि ज्यादा करते हैं, यह पैंट और पजामें की मोरी या पाएंचे को लपेट कर चढ़ाना नमाज़ में मकरूहे तेहरीमी है।


📚 हदीस में है:- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलेही वसल्लम ने फरमाया कि मुझे हुक्म दिया गया कि मैं 7 हड्डियों पर सजदा करूं, पेशानी, दोनों हाथ, दोनों घुटने, और दोनों पंजे, और यह हुक्म दिया गया कि मैं नमाज़ में कपड़े और बाल को ना समेटू।

📚 (बुख़ारी-ओ-मुस्लिम, मिश्कात सफ़्हा 83)


🌴 इस हदीस की रोशनी से कपड़ा समेटना और चढ़ाना नमाज़ में मना है, लिहाज़ा पेंट और पाजामे की मोरी लपेटने और चढ़ाने वालों को इस हदीस से इबरत (सबक़) हासिल करना चाहिए। लेकिन इस्लाह करने वालों से भी गुज़ारिश है कि नमाज़ में इस किस्म की कोताही बरतने वालों को नर्मी और प्यार, मोहब्बत से समझाएं मान जाए तो ठीक वरना उन्हें उनके हाल पर रहने दे, और मुनासिब तरीक़ै से इस्लाह करें उनको डांटना झिड़कना और उनसे लड़ाई झगड़ा करना बहुत बुरा है, जिसका नतीजा यह भी हो सकता है कि वह मस्जिद में आना और नमाज़ पढ़ना छोड़ दें जिसका वबाल उन झिड़कने वालों पर है। क्योंकि इसमें भी कोई शक नहीं कि बाअज़ इस किस्म की खामियों के साथ नमाज़ पढ़ने वाले,,,, बे नमाजियों से हज़ारों दर्जा बेहतर हैं। और नमाज़ में कोताहियां करने वालों को चाहिए अगर कोई उनकी इस्लाह करे तो बुरा मानने के बजाय उसकी बात पर अमल करें उस पर गुस्सा ना करें, क्योंकि वह जो कुछ कह रहा है आपकी भलाई के लिए कह रहा है अगर वह तुर्शी और सख़्ती से भी कह रहा है तो वह उसका फेल (काम) है, आपका काम तो हक़ को सुनकर अमल करना है झगड़ा करना नहीं।


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


💎 क़ुरआन पढ़ने मै सिर्फ़ होंठ हिलाना, और आवाज़ न निकालना ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 46,47)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📖 क़ुरआन पढ़ने मै सिर्फ़ होंठ हिलाना, और आवाज़ न निकालना ?


🧠 कुछ लोग क़ुरआन की तिलावत और नमाज़ या नमाज़ के बाहर कुछ पढ़ते हैं तो सिर्फ होंट हिलाते हैं, और आवाज़ बिल्कुल नहीं निकालते उनका यह पढ़ना.... पढ़ना नहीं है, और इस तरह पढ़ने से नमाज़ नहीं होगी, और इस तरह क़ुरआन की तिलावत की तो तिलावत का सवाब नहीं पाएंगे। आहिस्ता पढ़ने का मतलब यह है कि कम से कम इतनी आवाज़ ज़रूर निकले कि कोई रुकावट ना हो तो खुद सुन ले। सिर्फ होंट हिलाना और आवाज़ का बिल्कुल ना निकलना..... पढ़ना नहीं है। इस मसअले का खास ध्यान रखना चाहिए।


📚 फ़तावा आलमगीरी मिस्'री जिल्द अव्वल, सफ़्हा 65, 

📚बहारे शरीअत, जिल्द 3, सफ़्हा 69


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


🌴 क्या जमाअत से नमाज़ पढ़ने वाले को इमाम के साथ दुआ मांगना भी ज़रूरी है ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 46,47)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌴 क्या जमाअत से नमाज़ पढ़ने वाले को इमाम के साथ दुआ मांगना भी ज़रूरी है ?


🧠 हर नमाज़ सलाम फेरने पर मुकम्मल हो जाती है, उसके बाद जो दुआ मांगी जाती है यह नमाज़ में दाखिल नहीं अगर कोई शख्स नमाज़ पढ़ने यानी सलाम फेरने के बाद बिल्कुल दुआ ना मांगे तब भी उसकी नमाज़ अदा हो जाती है... अलबत्ता एक फज़ीलत से मेहरूमी और सुन्नत की ख़िलाफ़ वर्ज़ि है। बहुत जगह देखा गया है कि इमाम लोग बहुत लंबी-लंबी दुआएं पढ़ते हैं और मुक्तदी कुछ ब'खुशी और कुछ बेरगवती से मजबूरन उनका साथ निभाते हैं, और कोई बग़ैर दुआ मांगे या थोड़ी दुआ मांगकर इमाम साहब का पूरा साथ दिए बगैर चला जाए तो उस पर ऐतराज़ करते हैं और बुरा जानते हैं,, यह सब उनकी ग़लतफ़हमियां है इमाम के साथ दुआ मांगना मुक्तदी पर हरगिज़ लाज़िम और ज़रूरी नहीं है। नमाज़ पूरी होने के बाद फौरन मुख़तसर दुआ मांग कर भी जा सकता है। और कभी किसी मजबूरी की बिना पर बगैर दुआ मांगे चला जाए तब भी नमाज़ सही और पूरी हो जाती है हवाले के लिए


📚 "फतावा रज़विया जिल्द 3 सफ़्हा नंबर 278 देखें।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🌸 नमाज़ मै कोहनियां खुली रखना ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 48)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌸 नमाज़ मै कोहनियां खुली रखना ?


🧠 बिला मजबूरी:- कोहनियां खोलकर जैसे आज कल आधी आस्तीन की शर्ट पहनकर कुछ लोग नमाज़ अदा करते हैं ये मकरूह है।


📚 "फतावा रज़विया जिल्द 3 सफ़्हा नंबर 416 देखें।


🌴 और जो लोग आस्तीन चढ़ा कर (यानि फ़ोल्ड करके) और कोहनियां खोलकर नमाज़ अदा करते हैं,,उन पर दो गुनाह होते हैं। एक कपड़ा समेटने और चढ़ाने का और दूसरा कोहनियां खुली रखने का, क्योंकि नमाज़ मै कपड़ा चढ़ाना (यानि मोड़ना/या हाथो से पकड़ कर ऊपर करना) मना है, जैसे कुछ लोग सजदे मै जाते वक़्त पैजामे के पाएंचे को पकड़कर चढ़ाते हैं ये भी नाजायज़ और गुनाह है, इस किस्म के नमाज़ियों को प्यार और मुहब्बत से समझते रहना चाहिए, या बजाये एक-एक को रोकने और टोकने के सबको इकठ्ठा करके "मसला" समझा देना चाहिए, ताकि कोई अपनी तौहीन महसूस न करे। क्योंकि आज कल दीनी बातों पर टोका जाये तो लोगों मै तौहीन महसूस करने की बीमारी पैदा हो गयी है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🌹कमसिन (नासमझ) बच्चों को मस्जिद मै लाना ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 49)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌹कमसिन (नासमझ) बच्चों को मस्जिद मै लाना ?


🧠 ज़्यादा छोटे ना समझ कमसिन बच्चों का मस्जिद में आना या उन्हें लाना शरअन ना पसंदीदा नाजायज़ और मकरूह है। कुछ लोग औलाद से बेजा मोहब्बत करने वाले, नमाज़ के लिए मस्जिद में आते हैं तो अपने साथ कमसिन नासमझ बच्चों को भी लाते हैं, यहां तक के बाअज़ लोग उन्हें अगली सफ़हो में अपने बराबर नमाज़ में खड़ा कर लेते हैं, यह तो निहायत ग़लत बात है, और उससे पिछली सफ़हो के सारे नमाज़ियों की नमाज़ मकरूह होती है, और उसका गुनाह उस लाने और बराबर में खड़ा करने वाले पर है, और उन पर जो उससे हत्तल मक़दूर मना ना करें। हां जो समझदार होशियार बच्चे जो नमाज़ के आदाब से वाकिफ़, पाकी और नापाकी को जानते हो उनको आना चाहिए, और उनकी सफ़ मस्जिद में बालिग़ मर्दों से पीछे होना चाहिए, और ज़्यादा छोटे बच्चे जो नमाज़ को भी एक तरह का खेल समझते, और मस्जिद में शोर मचाते खुद भी नहीं पढ़ते और दूसरों की नमाज़ भी खराब करते हैं, ऐसे बच्चों को सख़्ती के साथ मस्जिद में आने से रोकना ज़रूरी है। "हदीस में है रसूले करीम सल्लल्लाहो ताला वसल्लम ने फरमाया"।


جنبوا مساجدكم صبيانكم ومجانينكم وشراءكم وبيعكم وخصوماتكم ورفع اصواتكم الاخ الحديث


📖 तर्जुमा: 🕌अपनी मस्जिदों को बचाओ बच्चों से, पागलों से, खरीदने और बेचने से, और झगड़े करने से, और ज़ोर-ज़ोर से बोलने से,

📖 (इब्ने माजा, बाब मा यक'रहू फिल-मसाजिद, सफ़्हा 55)



👉🏾 यानी यह सब बातें मस्जिद में नाजायज़ और गुनाह है। "सदरूश्-शरीआह हज़रत मौलाना अमजद अली साहब आ'अज़मी रहमतुल्लाहि तआला अलैहि लिखते हैं" बच्चे और पागल को, जिनसे नजासत का गुमान हो मस्जिद में ले जाना हराम है, वरना मकरूह है।

📖 (बहारे शरीअत, हिस्सा 3, सफ़्हा 182)


💗 "कुछ लोग कहते हैं कि बच्चे मस्जिद में नहीं आएंगे तो नमाज़ सीखेंगे कैसे ❓  तो भाइयों समझदार बच्चों के सीखने के लिए मस्जिद है,, और नासमझ ज़्यादा छोटे बच्चों के लिए घर और मदरसे हैं, और हदीसे रसूल (सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम) के आगे अपनी नहीं चलाना चाहिए।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🕌 मस्जिदों को सजाना, और इमामों को सताना ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 49)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🕌 मस्जिदों को सजाना, और इमामों को सताना ?


🧠 आजकल काफी देखा गया है कि लोग मस्जिदों को सजाने-संवारने में खूब पैसा खर्च करते हैं, और इमामों मौलवियों को सताते उन्हें तंग और परेशान रखते हैं, और कम से कम पैसे में काम चलाना चाहते हैं, जिसकी वजह से वह सजी-संवरी खूबसूरत मस्जिदें कभी-कभी वीरान सी हो जाती हैं और उनमें वक्त पर अजान और इक़ामत नहीं हो पाती,,, इस बयान से हमारा मक़सद यह नहीं कि मस्जिदों को सजाना और खूबसूरत बनाना मना है, बल्कि यह बताना है कि किसी भी मस्जिद की असली खूबसूरती यह है कि उसमें दीनदार खुदाए तआला का ख़ौफ़ रखने वाला, लोगों को हुस्नो खूबी और हिकमतो दानाई के साथ दीन की बातें बताने वाला, आलिमे दीन इमामत करता हो। चाहें, वह मस्जिद कच्ची और सादा सी इमारत हो, किसी मस्जिद के लिए अगर नेक और सही इमाम मिल जाए तो लोगों को चाहिए कि उसको हर तरह खुश रखें उसका खूब ख्याल रखें बल्कि पीरों से भी ज़्यादा आलिमों, मौलवियों, इमामों और मुदर्रिसीन का ख्याल रखा जाए। क्योंकि दीन की बक़ा और इस्लाम का तहफ़्फ़ुज़ इल्म वालों से है। अगर इमामों और मौलवियों को परेशान रखा गया तो वह दिन दूर नहीं कि मस्जिदें और मदरसे या वीरान हो जाएंगे, या उनमें सबसे घटिया किस्म के लोग इमामत है करेंगे, और बच्चों को पढ़ाएंगे, अच्छे घरानों और अच्छे ज़ेहन औ फिक्र रखने वाले लोग, इस लाइन से दूर हो जाएंगे।


🍥 खुलासा यह के आलिमों और मौलवियों को चाहिए वह पैसे और माल और दौलत का लालच किए बगैर दीन की खिदमत करें। और क़ोम को चाहिए कि वह अपने आलिमों मौलवियों और दीन की खिदमत करने वालों को खुशहाल रखें, उन्हें तंगदस्त और परेशान ना होने दें।.....और हमारी राय में आजकल शादीशुदा बेरुनी इमामों के लिए रिहायशी मकानों का बंदोबस्त कर देना निहायत ज़रूरी है, ताकि उन्हें बार-बार घर ना भागना पड़े, और वह नामाज़ों को पढ़ाने में पाबंदी कर सकें और अंगुष्त नुमाइयों, बदगुमानियों से महफूज़ रहें।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


❤ ईदगाह मै नमाज़े जनाज़ा पढ़ने का मसअला ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 51,52)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


❤ ईदगाह मे नमाज़े जनाज़ा पढ़ने का मसअला ?


🧠 मस्जिद में जनाज़े की नमाज़ पढ़ना मकरूह और नाजायज़ है। हदीस शरीफ में है.....!


عن ابي هريره قال قال رسول الله صلى الله تعالى عليه و سلم من صلى على جنازه في المسجد فلا شيء له


📖 तर्जुमा:- हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मर्वी है, के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने फरमाया जो मस्जिद में नमाज़ ए जनाज़ा पढ़े उसके लिए कुछ सवाब नहीं।


📖 (अबु'दाऊद, किताबुल जनाइज़, बाब, अस्सलातु अलल'जनाज़िहि फ़िल मस्जिदि, सफ़्हा 454)


🌹 "हां सख्त बारिश आंधी तूफान वगैरह किसी वाक़ई मजबूरी के वक्त मस्जिद में भी पढ़ना जायज़ है, जब के ईदगाह, मदरसा, मुसाफिर खाना, वगैरा कोई जगह ना हो। ''हजरत अल्लामा सैयद अहमद तेहतावी रहमतुल्लाहि तआला अलैहि फरमाते हैं''



🕌👉 ""जो मस्जिद सिर्फ नमाज़-ए-जनाज़ा ही पढ़ने के लिए बनाई गई हो वहां यह नमाज़ मकरूह नहीं यानी जायज़ है, यूं ही मदरसे और ईदगाह में नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ना जायज़ है"

📖 (तेहतावी अला मुराकिल'फलाही, मतबूआ क़ुसतुस-तुनिया, सफ़्हा 326)


🌴 और मौलाना मुफ्ती जलालुद्दीन साहब अमजदी फरमाते हैं "नमाज़े जनाज़ा ईदगाह के इहाते (ग्राउंड) और मदरसे में भी पढ़ी जा सकती है, लिहाज़ा जो लोग ईदगाह में नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ते हुए झिझक महसूस करते हैं वह बिला ख़ौफ़ बेझिझक वहां नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ा करें।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🕌 मस्जिद मै आवाज़ करने वाले कूलरों और पंखों का मसअला ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 52,53)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🕌 मस्जिद मै आवाज़ करने वाले कूलरों और पंखों का मसअला,? पार्ट(1)


   🧠 आजकल कितने लोग हैं जो मस्जिदों में आते हैं तो उन्हें नमाज़ से ज़्यादा अपने आराम चैन और सुकून गर्मी और ठंड की फिक्र रहती है,,, अपनी दुकानों मकानों खेतों और खलियानों,, काम-धंधों में बड़ी-बड़ी परेशानियां उठा लेने वाले मशक्कत झेल लेने वाले जब मस्जिदों में दस-पंद्रह मिनट के लिए नमाज़ पढ़ने आते हैं और ज़रा सी परेशानी हो जाए, थोड़ी सी गर्मी या ठंडक लग जाए तो बौखला जाते हैं, गोया के आज लोगों ने मस्जिदों को आरामगाह और मक़ामे ऐश-ओ-इशरत समझ लिया है। जहां तक शरीयते इस्लामिया ने इजाज़त दी है वहां तक आराम उठाने से रोका तो नहीं जा सकता,,, लेकिन बाअज़ जगह यह देख कर सख्त तकलीफ होती है कि मस्जिदों को आवाज़ करने वाले बिजली के पंखे, शोर मचाने वाले कूलरों से सजा देते हैं, और जब वह सारे पंखे और कूलर चलते हैं तो मस्जिद में एक शोर और हंगामा होता है जो सिर्फ खुशूअ और ख़ुज़ूअ के मुनाफ़ि नहीं बल्कि बसा औक़ात इमाम की किराअत ओ तकबीरात तक साफ सुनाई नहीं देती, या इमाम को पंखे और कूलर की वजह से चीख़ कर किराअत ओ तकबीर की आवाज़ निकालनी पड़ती है। और बाअज़ जगह तो यह भी देखा गया है कि मस्जिदों में अपने ऐशो-आराम की ख़ातिर भारी आवाज़ वाले जनरेटर तक रख दिए जाते हैं जो सरासर आदाबे मस्जिद के मुनाफ़ि हैं। जहां तक बर्क़ी (पंखुड़ी वाले) पंखो और कूलरों का सवाल है तो_ इब्तिदाअन (शुरू मै) अकाबिरे ओलामा ने उनको मस्जिद में लगाने को मुतलक़न ममनूअ और मकरूह फरमाया था।


   📖 जैसा के फतावा रज़विया जिल्द 6, सफ़्हा नंबर 384 पर खुद "आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना इमाम अहमद रज़ा खान साहब अलैहिर्रहमा" के क़लम से उसकी तसरीह मौजूद है। अब बाद में जदीद तहक़ीक़ात और इब्तिलाए आम की बिना पर उनकी इजाज़त दी गई, लेकिन आवाज़ करने वाले शोर मचाकर मस्जिदों में एक हंगामा खड़ा कर देने वाले कूलर और पंखों को लगाना आदाबे मस्जिद और खुज़ूअ और खुशूअ के यक़ीनन मुनाफ़ि है, उनकी इजाज़त हरगिज़ नहीं दी जा सकती। निहायत हल्की आवाज़ वाले हस्बे ज़रूरत पंखो ही से काम चलाया जाए कूलरों से मस्जिदों को बचा लेना ही अच्छा है क्योंकि उसमें आमतौर पर आवाज़ ज़्यादा होती है, ना के दर्जनों पंखे और कूलर लगाकर मस्जिदों में शोर मचाया जाए!


👉 पोस्ट 39 का पार्ट (2) अभी बाक़ी है.......


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🕌 मस्जिद मै आवाज़ करने वाले कूलरों और पंखों का मसअला ?


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 53,54)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 3️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🕌 मस्जिद मै आवाज़ करने वाले कूलरों और पंखों का मसअला,? पार्ट(2)आखिरी


 🧠 भाइयों ख़ुदा-ए-तआला का ख़ौफ़ रखो....!  ख़ाना ए ख़ुदा को ऐश ओ इशरत का मुक़ाम ना बनाओ, वह नमाज़ और इबादत और तिलावते क़ुरआन के लिए है, जिस्म परवरी के लिए नहीं......।  नफ़्स को मारने के लिए है, नफ़्स को पालने के लिए नहीं। मस्जिदों में आवाज़ करने वाले बर्क़ी (पंखुड़ियों वाले) पंखों का हुक्म बयान फरमाते हुए "आला हज़रत रदियल्लाहु ताला अनहु फरमाते हैं,,,बेशक मस्जिदों में ऐसी चीज़ का इहदास ममनूअ बल्कि ऐसी जगह नमाज़ पढ़ना मकरूह है"

📖 (फ़तावा रिज़विया, जिल्द 6, सफ़्हा 386)



👉🏿उसी जगह "आलाहज़रत ने दुर्रे मुख़्तार की इबारत भी नक़ल फरमाई है" तर्जुमा:- अगर खाना मौजूद हो और उसकी तरफ रग़बत (दिल चाहना) और ख्वाहिश हो तो ऐसे वक्त में नमाज़ पढ़ना मकरूह है, ऐसे ही हर वह चीज़ जो नमाज़ की तरफ से दिल को फेरे और खुशू में खलल डालें। मज़ीद फरमाते हैं, (चक्की के पास नमाज़ मकरूह है)। 📖 रद्दुल मुख़्तार में है: (शायद उसकी वजह यह है कि चक्की की आवाज़ दिल को नमाज़ से हटाती है) यूँही वह पंखे जो ख़राब और पुराने हो जाने की वजह से आवाज़ करने लगते हैं उन को दुरुस्त करा लेना चाहिए या मस्जिद से हटा देना चाहिए।


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


🌴 नमाज़े जनाज़ा मै तकबीर के वक़्त आसमान की तरफ़ मुँह उठाना ?🎤

📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 55,56)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🕌 नमाज़े जनाज़ा में तकबीर के वक़्त आसमान की तरफ मुँह उठाना ❓


🕌आजकल काफी लोग ऐसा करते हुए देखे गए हैं कि जब नमाज़े जनाज़ा में तकबीर कही जाती है तो हर तकबीर के वक़्त ऊपर की जानिब मुँह उठाते हैं हालाकिं इसकी कोई अस्ल नही बल्कि नमाज में आसमानकी तरफ़ मुह उठाना मकरूहे तहरीमी है l (बहारे शरीअत) और हदीस शरीफ में है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया* क्या हाल है उन लोगों का जो नमाज़ में आसमान की तरफ आँखे उठाते हैं इससे बाज़ रहें या उनकी आँखें उचक ली जायेगी* ।

📗(मिश्कात ब हवाला सहीह मुस्लिम सफ़हा 90)

खुलासा यह कि नमाज़े जनाज़ा हो या कोई और नमाज़ कसदन आसमान की तरफ नज़र उठाना मकरुह है और नमाज़े जनाज़ा मे तकबीर वक़्त ऊपर को नज़र उठाने का जो रिवाज़ पड़ गया है यह गलत है, बे अस्ल है । 


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 54)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


क्या इंजेक्शन 💉 लगवाने से रोज़ा टूट जाता है ?


🧠 इंजेक्शन चाहे गोश्त में लगवाया जाए या नस में लगवाया जाए, उससे रोज़ा नहीं टूटता। अलबत्ता ओलमा-ए-किराम ने रोज़े में इंजेक्शन लगवाने को मकरूह फरमाया। लिहाज़ा जब तक ख़ास ज़रूरत ना हो तब तक इंजेक्शन ना लगवाएं। इस मसअले की तफ़्सील ओ तहक़ीक़ जानने के लिए देखिए....!

 📚 फतावा फैज़ुर्रसूल जिल्द 1, सफ़्हा नंबर 517, और फतावा मरकज़ी दारुल इफ्ता, सफ़्हा नंबर 359


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


🌸 क्या माहे रमज़ान की रातों मै शौहर बीवी का हमबिस्तर होना गुनाह है ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 71)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💗 क्या माहे रमजान की रातों में शौहर और बीवी का  हमबिस्तर होना गुनाह है? 


💕अवाम में कुछ लोग ऐसा ख्याल करते हैं हालांकि यह उनकी गलतफहमी है । माहे रमज़ान में इफ़्तार के वक़्त से सहरी तक रात में जिस तरह खाना पीना जाइज़ है , उसी तरह बीवी और शौहर का हमबिस्तर होना और सुहबत व मुजामअत बिला शक जाइज़ है और बकसरत अहादीस से साबित है बल्कि कुरआन शरीफ में खास इसकी  इजाज़त के लिए आयते करीमा नाज़िल फरमाए गई ।


इरशादे बारी तआला है ::-


तर्जमा >तुम्हारे लिए रोज़े की रातों में  औरतों से सुहबत हलाल की गई वह तुम्हारे लिए लिबास है तुम उनके लिए लिबास ।

( पारा 2 , रूकू 7)


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 71)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👉 क्या नापाक रहने से रोज़ा टूट जाता है ?


     🧠 अगर कोई शख्स रोज़ा रखकर दिन में नापाक रहे और उस नापाकी की वजह से उसकी नमाज़ छूटती है तो उसके ऊपर नमाज़ छोड़ने का गुनाह ए अज़ीम होगा। क्योंकि फ़र्ज़ नमाज़ छोड़ना इस्लाम में बड़ा गुनाह और जहन्नम का रास्ता है,, लेकिन उस नापाकी का उसके रोज़े पर कोई असर नहीं पड़ेगा,, यानी रोज़ा हो जाएगा। यह ख्याल करना कि नापाकी की हालत में रोज़ा नहीं होगा यह ग़लतफहमी है पाक रहना नमाज़ के लिए शर्त है रोज़े के लिए नहीं। चाहे दिनभर नापाक रहे तब भी रोज़ा बाकी रहेगा लेकिन यह नापाक रहना मोमिन की शान नहीं। क्योंकि इस तरह नमाज़े क़ज़ा होंगी। 🌴 आहादीस ए करीमा की रोशनी में इस मसअले की तहक़ीक़ ओ तफ़्सील जिसे देखना हो वह

📖 "फतावा रज़विया जिल्द 4 सफ़्हा नंबर 615 का मुताअला करें।


👇 Next:- आने वाला पार्ट


💵 ज़कात से मुतअल्लिक़ कुछ ग़लतफहमियां ?🎤


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 73,74)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💵 ज़कात से मुतअल्लिक़ कुछ ग़लतफहमियां ?


     🧠 बाअज़ लोग फ़क़ीरों, मिस्कीनों, मस्जिदों, मदरसों को यूंही पैसे देते रहते हैं, और बाक़ायदा ज़कात नहीं निकालते, उनसे कहा जाता है कि आप ज़कात निकालिए तो कह देते हैं कि हम वैसे ही राहे खुदा में काफी ख़र्च करते रहते हैं..! यह उनकी सख्त ग़लतफहमी है आप हज़ार राहे खुदा में ख़र्च कर दें... लेकिन जब तक हिसाब करके नियते ज़कात से ज़कात अदा नहीं करेंगे आपके ये अख़राजात जो राहे खुदा ही में आपने किए हैं यह ज़कात ना निकालने के आज़ाब और बवाल से आपको बचा नहीं सकेंगे...! "हदीस शरीफ में कि जिसको अल्लाह तआला माल दे और वह उसकी ज़कात अदा ना करें तो कयामत के दिन वह माल गंजे सांप की शक्ल में कर दिया जाएगा जिसके सर पर दो चोटियां होंगी वह सांप उनके गले में तोक़ बना कर डाल दिया जाएगा। फिर उसकी बांछें पकड़ेगा और कहेगा मैं तेरा माल हूं, मैं तेरा खज़ाना हूं। खुलासा यह कि राहे खुदा में खर्च करने के जितने तरीके हैं उनमें सबसे अव्वल ज़कात है। नियाज़ ओ नज़र और फातिहा वगैरा भी उसी माल से की जाए जिसकी ज़कात अदा की गई हो,, वरना वह काबिले कुबूल नहीं....।अपनी ज़कात खुद खाते रहना और राहे खुदा में खर्च करने वाले बन्ना बहुत बड़ी ग़लतफहमी है, मसाइल-ए-ज़कात ओलमा से मालूम किए जाएं और बक़ायदा ज़कात निकाली जाए ताकि नियाज़ और नज़र और सदक़ा ओ खैरात भी कुबूल हो सके।


👇 Next:- आने वाला पार्ट


👉 एतिकाफ़ का बयान ?


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 73,74)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


        👉 एतिकाफ़ का बयान ?


   🧠 एतिकाफ की नियत से,, अल्लाह के वास्ते,,, मस्जिद में ठहरने का नाम एतिकाफ है। "एतिकाफ" 3 किस्म का है।


(नंबर 1-) वाजिब

(नंबर 2-)सुन्नते मुअक्किदह

(नंबर 3-) मुस्तहब


👉 "एतिकाफ वाजिब" यह नज़र का एतिकाफ है जैसे:- "किसी ने यह मन्नत मानी कि फला काम हो जाएगा तो मैं 1 दिन या 2 दिन का एतिकाफ करूंगा" तो यह एतिकाफ वाजिब है, इसका पूरा करना ज़रूरी है। ऐतिकाफ वाजिब के लिए रोज़ा रखना शर्त है, बगैर रोज़े के एतिकाफ सही नहीं। "एतिकाफ ए सुन्नत ए मुअक्किदह" यह रमज़ान के पूरे अशरा ए आख़िरह 'यानी आखिर के 10 दिन' में किया जाए। यानी 20वें रमज़ान को सूरज डूबते वक्त एतिकाफ की नियत से मस्जिद में मौजूद हुआ और तीसवीं को सूरज डूबने के बाद या 29वीं को चांद होने के बाद निकला। अगर 20 तारीख को बाद नमाज़े मग़रिब एतिकाफ की नियत की तो सुन्नते मुअक्किदह अदा ना होगी। यह एतिकाफ सुन्नते मुअक्किदह किफ़ाया है। अगर सब छोड़ दें तो सब पकड़े जाएं (यानी सब गुनहगार हो) और अगर एक ने भी कर लिया तो सब छूट जाएं। इस एतिकाफ में भी रोज़ा शर्त है मगर वही रमज़ान के रोज़े काफी हैं।

📖  (दुर्र-ओ-हिन्दयह हिदायाह वग़ैरह)


🇨🇨 "एतिकाफ ए मुस्तहब" एतिकाफ ए वाजिब, और एतिकाफ ए सुन्नत ए मुअक्किदह के अलावा जो एतिकाफ किया जाए वह मुस्तहब है। एतिकाफ ए मुस्तहब के वास्ते रोज़ा शर्त नहीं यह थोड़ी देर का भी हो सकता है,, मस्जिद में जब-जब जाए उस एतिकाफ की नियत कर ले चाहे थोड़ी ही देर मस्जिद में रह कर चला आए जब चला आएगा एतिकाफ ख़त्म हो जाएगा। नियत में सिर्फ इतना काफी है,, कि मैंने खुदा के वास्ते एतिकाफ ए मुस्तहब की नियत की।

📖(आलमगीरी और बहारो वग़ैरह)


👇 Next:-आने वाला पार्ट


🍀 मर्द और औरत के एतिकाफ मै क्या फ़र्क़ है ?


📚 (ग़लत फेहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 74,75)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🍀 मर्द और औरत के एतिकाफ मै क्या फ़र्क़ है ?


   🌴 मसअला:- मर्द के एतिकाफ के लिए मस्जिद ज़रूरी है.. और औरत अपने घर की उस जगह में एतिकाफ करें जो जगह उसने नमाज़ के लिए मुक़र्रर की हो। (हिदाया रद्दल मुख्तार और बहारे शरीयत वगैरह) मसअला:- मुअ'तकिफ़ "यानी एतिकाफ करने वाला" को मस्जिद से बगैर उज़्र निकलना हराम है, अगर निकला तो एतिकाफ टूट जाएगा चाहे 👉🏿भूल कर ही निकला हो जब भी। यूं ही औरत अगर अपने एतिकाफ की जगह से निकली तो एतिकाफ जाता रहा चाहे घर ही में रहे। (आलमगीरी और रद्दल मुख्तार) और मस्जिद से निकलने के दो उज़्र हैं एक "तब'ई" दूसरा "शरई" तब'ई उज़्र यह है जैसे:- पाखाना पेशाब इस्तिंजा फ़र्ज़ ए गुस्ल वुज़ू (जब के गुस्ल और वुज़ू की जगह मस्जिद में ना बनी हो मस्जिद में बड़ा होज़ न हो) "शरई उज़्र" यह है जैसे:- ईद या जुमे की नमाज़ के लिए जाना। अगर एतिकाफ वाली मस्जिद में जमाअत ना होती हो तो जमाअत के लिए भी जा सकता है। इन उज़रों के सिवा किसी और वजह से अगर थोड़ी देर के लिए भी एतिकाफ की जगह से बाहर निकला तो एतिकाफ जाता रहा, "अगरचे भूल कर ही निकला हो"। मसअला: मुअ'तक़िफ़ रातो दिन मस्जिद ही में रहे वही खाए-पीए सोए इन कामों के लिए मस्जिद से बाहर होगा तो एतिकाफ टूट जाएगा। (दुर्रे मुख्तार हिदाया बगैरा) मसअला: मुअतकिफ़ के सिवा और किसी को मस्जिद में खाने पीने सोने की इजाज़त नहीं है, और अगर कोई दूसरा यह काम (खाना पीना) करना चाहे तो एतिकाफ की नियत करके मस्जिद में जाए और नमाज़ पढ़े या जिक्र ए इलाही करें फिर यह काम कर सकता है,, मगर खाने-पीने में यह एहतियात लाज़िम है की मस्जिद आलूदह (गन्दी) ना हो। (रद्दुल मुख़्तार ओ बहारे शरीअत वग़ैरह) मुअतकिफ़ को अपनी ज़रूरत या बाल बच्चों की ज़रूरत से मस्जिद में खरीदना या बेचना जायज़ है जबकि वह चीज़ मस्जिद में ना हो। या हो तो थोड़ी हो कि जगह घेर ले। अगर यह ख़रीद-फरोख्त तिजारत की नियत से हो तो नाजायज़ है,, चाहे वह चीज़ मस्जिद में ना हो जब भी। (दुर्रे मुख्तार और बहारे शरीयत बगैरा) मसअला: मुअतकिफ़ न बात करे न चुप रहे, बल्कि क़ुरआन शरीफ की तिलावत, हदीस की  किराअत, और दुरूद शरीफ की कसरत करे, और इल्मे दीन का दरसो तदरीस करे,, अम्बिया ओ ओलिया ओ सालिहीन के हालात पढ़े, या दीनी बातें लिखे। (दुर्रे मुख्तार) मसअला: अगर नफ़ल एतिकाफ तोड़ दे तो उसकी क़ज़ा नहीं,, और सुन्नते मुअक्किदह एतिकाफ अगर तोड़ा तो जिस दिन तोड़ा तो फक़त उस 1 दिन की क़ज़ा करे.. पूरे दिनों की क़ज़ा वाजिब नहीं.. और मन्नत का एतिकाफ तोड़ा तो अगर किसी मुकर्रर महीने की मन्नत थी तो बाकी दिनों की क़ज़ा करे वरना अगर अलल इत्तिसाल वाजिब हुआ था तो सिरे से फिर से एतिकाफ करे, और अगर अलल इत्तिसाल वाजिब न था तो बाक़ी का एतिकाफ करे। मसअला: एतिकाफ जिस वजह से भी टूटे चाहे क़सदन या बिला क़स्द (जानबूझकर या धोखे से) बहरहाल क़ज़ा वाजिब है।

📖 (रद्दुल मुख़्तार वग़ैरह)


📚 (क़ानून-ए-शरीअत, हिस्सा 1, सफ़्हा न. 192 मकतबा ए क़ादरिया, पुराना एडिशन)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💗 मय्यत का खाना (यानि जो इंतिक़ाल कर जाये उसके दफ़न के बाद और तीजे, दसवें, बीसवें, और चालीसवें का खाना) कैसा है ?


       🧠 मय्यत के तीजे, दसवें या 40वें वग़ैरह के मौक़ै पर दाअवत कर के खाना खिलाने का जो रिवाज है यह भी महज़ ग़लत और ख़िलाफ़ ए शराअ (शरियत के ख़िलाफ़) है। हां ग़रीबों और फकीरों को बुलाकर खिलाने में हर्ज नहीं। आला हज़रत फरमाते हैं "मुर्दे का खाना सिर्फ फ़ुक़रा (फ़क़ीरों) के लिए है, आम दाअवत के तौर पर जो करते हैं यह मना है, ग़नी (मालदार) ना खाएं"

📖 (अहकामे शरीअत, हिस्सा 2, सफ़्हा 16)


🇨🇨 और फरमाते हैं मौत मै दाअवत बे माअना है, फ़तहुल-क़दीर मै इसे बिदअते मुस्तक़'बिहा (बुराइयों की जड़) फरमाया।


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


🌴 शौहर का अपनी बीवी के जनाज़े को उठाने का मसला ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 56)


✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌴 शौहर का अपनी बीवी के जनाज़े को उठाने का मसला ?


🧠 अवाम में यह ग़लत मशहूर है कि शौहर,, बीवी,, के मरने के बाद ना बीवी को देख सकता है ना उसके जनाज़े को हाथ लगा सकता है और ना कांधा दे सकता है। सही बात यह है कि शोहर के लिए अपनी बीवी को मरने के बाद देखना भी जायज़ है और उसके जनाज़े को उठाना, और कांधा देना और क़ब्र में उतारना भी जायज़ है।


📖 (फ़तावा रिज़विया, जिल्द 4, सफ़्हा 91)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


💧 फ़ातिहा मै खाना पानी सामने रखने का मसअला ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 56)

👇🏻तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे।

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 4️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💧 फ़ातिहा मै खाना पानी सामने रखने का मसअला ?


     🧠 इस बारे में दो किस्म के लोग पाए जाते हैं कुछ तो वह है कि अगर खाना सामने रखकर सूरह फातिहा बगैरा आयाते क़ुरआनिया पढ़ दी जाएं तो उन्हें उस खाने से चिढ़ हो जाती है, और वह उस खाने के दुश्मन हो जाते हैं और उसे हराम ख्याल करते हैं, यह वह लोग हैं जिनके दिलों में बीमारी है तो,,,खुदाए तआला ने उनकी बीमारी को और बढ़ा दिया। कसीर (ज़्यादा) अहादीस और अक़वाले आइम्मा और मामूलाते बुज़ुर्गाने दीन से मुंह मोड़ कर अपनी चलाते और बे'वजह मुसलमानों को मुश्रिक और बिद्अती बताते हैं।.....दूसरे हमारे कुछ वह मुसलमान भाई हैं जो अपनी जहालत और तवह्हुम (वहम) परस्ती की बुनियाद पर यह समझते हैं कि जब तक खाना सामने ना हो कुरआन की तिलावत और इसाले सवाब मना है....! बाअज़ जगह देखा गया है कि मिलाद शरीफ पढ़ने के बाद इंतजार करते हैं कि मिठाई आए तब तिलावत शुरू करें यहां तक कि मिठाई आने में अगर ताखीर हो तो गिलास में पानी ला कर रखा जाता है ताकि उनके लिए उनके जाहिलाना ख्याल में फातिहा पढ़ना जायज़ हो जाए। कभी ऐसा होता है कि इमाम साहब आकर बैठ गए हैं और मुसल्ले पर बैठे इंतजार कर रहे हैं अगर खाना आए तो कुरआन पढ़े,, यह सब तवह्हुमात है। हक़ीक़त यह है कि फ़ातिहा में खाना सामने होना ज़रूरी नहीं अगर आयातें और सूरतें पढ़कर खाना या शीरनी बगैर सामने लाए यूं ही तक्सीम कर दी जाए तब भी इसाले सवाब हो जाएगा और सवाब में कोई कमी नहीं आएगी। सय्यदि आला हज़रत मौलाना अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी फरमाते हैं,,, फातिहा और ईसाले सवाब के लिए खाने का सामने होना कुछ ज़रूरी नहीं

📖 फ़तावा रिज़विया, जिल्द 4, सफ़्हा 225


📚 और दूसरी जगह लिखते हैं अगर किसी शख्स का यह एतिक़ाद हो कि जब तक खाना सामने ना किया जाए तो सवाब ना पहुंचेगा तो यह गुमान उसका ग़लत है।

📖 फ़तावा रिज़विया, जिल्द 4, सफ़्हा 195


💧 ख़ुलासा यह के खाने पीने की अशिया (चीज़ें) सामने रखकर फातिहा पढ़ने में कोई हर्ज नहीं बल्कि अहादीस से इसकी असल साबित है, और फातिहा में खाना सामने रखने को ज़रूरी ख्याल करना कि इसके बगैर फातिहा ही नहीं होगी तो यह भी इस्लाम में ज़्यादती, वहम परस्ती और ख्याले खाम है जिस को मिटाना मुसलमानों पर ज़रूरी है।..... हज़रत मौलाना मुफ्ती ख़लील अहमद ख़ान साहब बरकाती मारेहरवि फरमाते हैं.....! "तुमने नियाज़, दुरुद ओ फ़ातिहा में दिन या तारीख़े मुकर्ररह के मुताल्लिक यह समझ रखा है कि उन्ही दिनों में सवाब मिलेगा आगे पीछे नहीं.... तो यह समझना हुक्मे शरई के ख़िलाफ़ है__यूं ही फ़ातिहा ओ इसाले सवाब के लिए खाने का सामने होना कुछ ज़रूरी नहीं। या हज़रत फातिमा खातून ए जन्नत की नियाज़ का खाना पर्दे में रखना और मर्दों को ना खाने देना यह औरतों की जहालत हैं...बे सबूत और गड़ी हुई बातें हैं। मर्दों को चाहिए के इन ख्यालात को मिटाएं और औरतों को राहे रास्त और हुक्मे शराअ पर चलाएं।


📖 (तोज़ीह ओ तशरीह, फ़स्ल हफ्त मसअला, सफ़्हा 142)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🍀 बच्चा पैदा हो जाने की वजह से जो औरत मर जाए उसको बदनसीब जानना ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 57,58)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🍀 बच्चा पैदा हो जाने की वजह से जो औरत मर जाए उसको बदनसीब जानना ?


   🧠 बाअज़ मक़ामात पर कुछ लोग ऐसी औरत को, जो बच्चा पैदा होने की वजह से मर जाए उसको बुरा ख्याल करते हैं और कहते हैं कि वह नापाकी में मरी है लिहाज़ा बदनसीब और मनहूस है,, यहां तक के सुना गया है कि कुछ लोग कहते हैं कि वह मर कर चुड़ैल बनेगी यह सब जाहिलाना बकवास है। और निरी खुराफ़ातें हैं।_हदीस शरीफ में इस हाल में मरने वाली औरत को शहादत का मर्तबा पाने वाली फरमाया गया" और यह इस्लाम में बहुत बड़ा मर्तबा है.. रही उसकी नापाकी तो वह उसकी मजबूरी है जिसका उस पर कोई गुनाह नहीं, और मोमिन का बातिन कभी नापाक नहीं और यह नापाकी भी ख़ून आने से होती है खून ना आया तो बज़ाहिर भी वह पाक है।



Next:-

👇आने वाला पार्ट


👉 फ़र्ज़ी क़ब्रें और मज़ार बनाना ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 58)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👉 फ़र्ज़ी क़ब्रें और मज़ार बनाना ?


      🧠 आजकल ऐसा काफी हो रहा है कि पहले वहां कुछ नहीं था अब बगैर किसी मुर्दे को दफन किए कब्र और मज़ार बना दिया गया और पूछो तो कहते हैं कि ख्वाब में बिशारत हुई है फुलाँ मियां ने ख्वाब में आकर बताया है कि यहां हम दफन हैं हमारा मज़ार बनाओ, सही बात यह है कि इस तरह अब और मज़ार बनाना उन पर हाज़री देना फातिहा पढ़ना उर्स करना और चादर चढ़ाना सब हराम है, मुसलमानों को धोखे देना और इस्लाम को बदनाम करना है और ख्वाब में मज़ार बनाने की शरियत मै कोई असल नहीं, और जिन लोगों ने ऐसे मज़ारात बना लिए हैं उनको उखाड़ देना और नामोनिशान खत्म कर देना बहुत ज़रूरी है। बहुत जगह देखा गया है कि किसी बुजुर्ग की छड़ी, अमामा वगैरा या कोई उससे मंसूब चीज़ दफन करके मज़ार बनाते हैं और कहीं किसी बुज़ुर्ग के मज़ार की मिट्टी दूसरी जगह ले जाकर दफ़न करके मज़ार बनाते हैं, यह सब नाजायज़ और गुनाह है सैयदी आला हज़रत फरमाते हैं फ़र्ज़ी मज़ार बनाना और उसके साथ असल का मुआमला करना नाजायज़ और गुनाह है और ख्वाब की बात खिलाफ ख़िलाफ़ ए शराअ है।

📖 (फ़तावा रिज़विया, जिल्द 4, सफ़्हा 115)


 💞 और शाह अब्दुल अज़ीज़ साहब देहलवी रिवायत फरमाते हैं 


📖 तर्जुमा:- "खुदाए तआला की लाअनत उस पर जो बे मज़ार की ज़ियारत करें"


📖 (फ़तावा अज़ीज़िया, जिल्द 1, सफ़्हा 144)


🌴 और जिस जगह किसी बुज़ुर्ग का मज़ार होने ना होने में शक हो रहा हो वहां भी ना जाए।


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


🧕🏻औरत का कफ़न मायके वालो के ज़िम्मे डालना ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 59)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🧕🏻औरत का कफ़न मायके वालो के ज़िम्मे डालना ?


      🧠👉 यह एक ग़लत रिवाज है यहां तक के बाअज़ जगह मायके वाले अगर नादार मुफ़लिस हो तब भी औरत का कफ़न उनको देना ज़रूरी ख्याल किया जाता है, और उन से ज़बरदस्ती लिया जाता है, और उन्हें बिलावजह सताया जाता है, हालांकि इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं। मसअला यह है कि मययत का कफ़न अगर मय्यत ने माल छोड़ा हो तो उसी के माल में से दिया जाए, और उसने कुछ माल ना छोड़ा हो तो ज़िनदगी में जिसके ज़िम्मे उसका नान ओ नफ़क़ा (खाना खर्चा वग़ैरह) था वह ही कफ़न दे, और औरत के बारे में खास तौर से यह है कि उसने अगचे माल छोड़ा भी हो तब भी उसका कफ़न शौहर के ज़िम्मे है।

📚(फ़तावा रिज़विया, जिल्द 23, सफ़्हा 611,

📚मतबूआ रज़ा फाउंडेशन, लाहौर, 

📚बहारे शरीअत, हिस्सा 4, सफ़्हा 139)*



💥👉 खुलासा यह के औरत का कफ़न मायके वालों के ज़िम्मे ही लाज़िम ख्याल करना और बहर हाल उनसे दिलवाना एक ग़लत रिवाज है जिस को मिटाना ज़रूरी है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🌴 मौत के बाद और बच्चे की पैदाइश के बाद पूरे घर की पुताई सफाई को ज़रूरी समझना ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 60)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌴 मौत के बाद और बच्चे की पैदाइश के बाद पूरे घर की पुताई सफाई को ज़रूरी समझना ?


       🧠 कुछ लोग घर में मय्यत हो जाने या बच्चा पैदा होने के बाद घर की पुताई कराते हैं और समझते हैं कि घर नापाक हो गया, उसकी धुलाई सफाई और पुताई करना ज़रूरी है, हालांकि यह उनकी ग़लतफहमी है और इस्लाम में ज़्यादती है। यूँ तो पुताई सफाई अच्छी चीज़ है जब ज़रूरत समझे कराएं,, लेकिन बच्चा पैदा होने या मय्यत हो जाने की वजह से उसको करना, और लाज़िम जानना जाहिलों वाली बातें हैं जिन्हें मुआशरे से दूर करना ज़रूरी है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट

🌴 मय्यत के सर मै कंघी करना ?🎤

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 60)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌴 मय्यत के सर मै कंघी करना ?


    🧠 बाअज़ जगह मय्यत को गुस्ल देने के बाद तजहीज़ ओ तकफ़ीन के वक्त उसके बालों में कंघी करने लगते हैं यह ममनूअ (मना) है। हदीस मै है कि "उम्मुल मुअमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीका रजी अल्लाह ताला अन्हा" से मय्यत के सर में कंघी करने से मुताल्लिक़ सवाल किया गया तो आप ने मना फरमाया और फरमाया के क्यों अपनी मय्यत को तकलीफ़ पहुंचाते हो।

📖 (फ़तावा रिज़विया, जिल्द 4, सफ़्हा 33, बा'हवाला किताबुल आसार लि इमामे मुहम्मद, सफ़्हा 46)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🧕🏻क्या औरत फ़ातिहा नहीं पढ़ सकती ?🎤

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 61)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


क्या औरत फ़ातिहा नहीं पढ़ सकती ❓


   🧠 फ़ातिहा और ईसाले सवाब जिस तरह मर्दों के लिए जायज़ है उसी तरह बिलाशक औरत के लिए भी जायज़ है, लेकिन बाअज़ जगह बाअज़ औरतें बिला वजह परेशान होती है और फ़ातिहा के लिए बच्चों को इधर उधर दौड़ाती है, हालांकि वह खुद भी फ़ातिया पढ़ सकती हैं.. कम से कम अल्हम्द शरीफ और क़ुलहुवल्लाह शरीफ अक्सर औरतों को याद होती है इसको पढ़कर खुदा-ए-तआला से दुआ करें कि--ऐ अल्लाह इसका सवाब (फुलाँ-फुलाँ और फुलाँ जिसको सवाब पहुंचाना हो उसका नाम लेकर कहें) उसकी रूह को अता फरमा दे। यह फातिहा हो गई और बिलकुल दुरुस्त और सही हो गई बाअज़ औरतें और लड़कियां कुछ जाहिल मर्दों से ज़्यादा पढ़ी-लिखी और नेक पारसा होती है यह अगर उन जाहिलों के बजाय खुद ही कुरआन पढ़कर इसाले सवाब करें तो बेहतर है। कुछ औरतें किसी बुज़ुर्ग की फातिहा दिलाने के लिए खाना वगैरा कोने में रख कर थोड़ी देर में उठा लेती हैं और कहती हैं कि उन्होंने अपनी फातिहा खुद ही पढ़ ली इन सब तोहमात और जाहिलाना बातों के बजाय उन्हें कुरआन की जो भी आयत और सूरत याद हो उसको पढ़कर इसाले सवाब कर दें तो यही बेहतर है और यह बाकायदा फातिहा है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


ज़िन्दगी मै ही अपने लिए क़ब्र और मज़ार बनवाना ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 61,62)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


☝🏻ज़िन्दगी मै ही अपने लिए क़ब्र और मज़ार बनवाना (1) ?


🧠 कुछ लोग अपनी ज़िंदगी में कब्र तैयार कराते हैं यह मुनासिब नहीं है। अल्लाह तबारक व तआला फरमाता है "कोई नहीं जानता कि वो कहां मरेगा" लिहाज़ा कब्र तैयार रखने का शरअन हुक्म नहीं, अलबत्ता कफन सिलवा कर रख सकता है कि जहां कहीं जाए अपने साथ ले जाए और क़ब्र हमराह (साथ) नहीं जा सकती।

📖 अल'मल्फ़ूज़, हिस्सा अव्वल, सफ़्हा 69


💗 बाअज़ ख़ानक़ाह वालो को देखा कि वह जिंदगी में पक्का मज़ार बनवा लेते हैं यह रियाकारी है। गोया के उनको यह यकीन है कि वह अल्लाह के वली और बुज़ुर्ग और बर्तर बंदे हैं और उस मरतबे को पहुंचे हुए हैं, आम लोगों की तरह कच्ची क़ब्र में नहीं बल्कि उन्हें खूबसूरत मज़ार में दफ़्न होना है,,, हालाँकि सच्चे वलियों का तरीक़ा यह रहा है कि वह खुद को गुनाहगार ख्याल करते थे जो खुद को वली ख्याल करते और अपनी बिलायत के एलान करते फिरते हैं वह लोग औलिया ए इकराम की रविश पर नहीं है। पीराने पीर सैयदना गोसे आज़म शेख अब्दुल क़ादिर जिलानी रज़ी अल्लाह तआला अनहु से बड़ा बुज़ुर्ग और बली हज़ार साल में न कोई हुआ और ना क़यामत तक कोई हो सकता है__उनके बारे में हजरत सूफी ए ज़मां शेख़ मुस्लेहुद्दीन साअदी शीराज़ी नक़ल करते हैं 'कि उनको (हुज़ूर ग़ौसे पाक को) हरमे काअबा में लोगों ने देखा कि कंकरियो पर सर रख के खुदाए तआला की बारगाह में अर्ज़ कर रहे थे उर्दू:- यानी ऐ परवरदिगार अगर मैं सज़ा का मुस्तहक़ हूँ तो तू मुझको क़यामत के रोज़ अंधा करके उठाना ताकि नेक आदमियों के सामने मुझ को शर्मिंदगी ना हो। अल्लाहुअकबर


👉 बाक़ी अगली पोस्ट मै


Next:-

👇आने वाला पार्ट

☝🏻ज़िन्दगी मै ही अपने लिए क़ब्र और मज़ार बनवाना 2 ?🎤

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 62,63)

👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


☝🏻ज़िन्दगी मै ही अपने लिए क़ब्र और मज़ार बनवाना (2) ?


     🧠 बाअज़ सहाबा-ए-किराम के बारे में आया है कि वह यह दुआ करते थे कि अल्लाह मुझे जब मौत आए तो या तो जंगल का कोई दरिंदा मुझे फाड़ कर खा जाए या मैं कहीं समंदर में डूब कर मर जाऊं और मछलियों की ग़िज़ा बन जाऊं। यानी वह शोहरत से बचना चाहते थे और नाम ओ नुमूद के बिल्कुल रवादार ना थे और यही--असल फ़कीरी दुर्वेशी है। और आज के फ़कीरों को अपने मज़ारों की फ़िक्र पड़ी है ?  साहिबों चाहने मानने वाले मुरीदीन ओ मुअतकीदीन बनाने और बढ़ाने और मज़ार और क़ब्र को और खूबसूरत बनाने या बनवाने से ज़्यादा आखिरत की फिक्र करो खुदा और रसूल को राज़ी करो, मुरीदीन और मुअतक़ीदीन की कसरत और मज़ार की उम्दगी और संगमरमरी की टुकड़ियां अज़ाबे इलाही और क़ब्र की पिटाई से बचा नहीं सकेंगे,,, अगर आपके कारनामों और ढंगों से खुदा और रसूल नाराज़ हैं। ऐसी फ़कीरी और सज्जादगी से भी क्या फायदा के क़ब्र के अंदर आपकी बदकारियों और रियाकारियों की वजह से पिटाई होती हो और ऊपर मज़ार पर मुरिदीन चादर चढ़ाते, फूल बरसाते और धूमधाम से उर्स मनाते हो,,,! कोशिश इस बात की करो कि मुरीद हो या ना हो मज़ार बने या ना बने चादरें चढ़े या ना चढ़े उर्स हो या ना हो लेकिन क़ब्र में आपको राहत मिलती हो, और जन्नत की खिड़की खुलती हो, चाहे ऊपर से क़ब्र कच्ची हो और यह नेअमत हासिल होगी इख़लासे क़ल्ब के साथ एहकाम ए इलाहीया की बजाआवुरी से।


Next:-

👇आने वाला पार्ट

🐐अपनी तरफ़ से न करके औरों की तरफ़ से क़ुर्बानी करना ?🎤

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 63)

👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🐐अपनी तरफ़ से न करके औरों की तरफ़ से क़ुर्बानी करना ?


    🧠 कुछ लोग जिन पर मालदार और साहिबे निसाब होने की बिना पर क़ुर्बानी वाजिब होती है वह क़ुर्बानी मै ज़िब्ह के वक़्त अपने नाम के बजाय अपने मां-बाप या बुज़ुर्गाने दीन का नाम लेकर उनकी तरफ़ से क़ुर्बानी करते हैं हालांकि यह ग़लत है। जिस पर जिस साल क़ुर्बानी वाजिब है वह अपने नाम से करें अगर हर साल वाजिब है तो हर साल अपने नाम से ही करें उसके बाद अगर वुसअत है तो बड़े जानवर में और हिस्से लेकर या दूसरे जानवर बुज़ुर्गने दीन (रिज़्वानुल्लाहि तआला अलेहिम अजमईन) या अपने ज़िंदा या मुर्दा मां-बाप की तरफ़ से ज़िब्ह करें और हुज़ूर सैयद ए आलम अहमद ए मुज्तबा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के नाम से क़ुर्बानी करना बड़ी फज़ीलत है लेकिन जब उस पर क़ुर्बानी वाजिब है तो यह फज़ीलतें उसी के लिए है जो खुद अपनी तरफ से पहले करे वरना उस पर क़ुर्बानी ना करने का गुनाह होगा।


Next:-

👇आने वाला पार्ट

🐏 क़ुर्बानी का बयान 

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 142

👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 5️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💖मज़ारात पर हाज़री का तरीक़ा ?


    🧠 औरतों को मज़ारात पर जाने की इजाज़त नहीं....मर्दों के लिए इजाज़त है, मगर वह भी चंद उसूल के साथ👇🏿


   (1) पेशानी (माथा) ज़मीन पर रखने को सज़्दा कहते हैं यह अल्लाह तबारक व तआला के अलावा किसी के लिए हलाल नहीं, किसी बुज़ुर्ग को उसकी ज़िन्दगी में या विसाल के बाद सज़्दा करना हराम है। कुछ लोग मज़ारात पर नाक और पेशानी (माथा) रगड़ते हैं यह बिल्कुल हराम है।


(2) मज़ारात का तवाफ़ करना (यानी उसके गिर्द खानाए काअबा के मिस्ल चक्कर लगाना) भी नाजायज़ है।


 (3) अज़ रुए अदब (अदब के लिहाज़ से) कम से कम 4 हाथ के फ़ासले पर खड़ा होकर फातेहा पढ़े, बोसा (चूमना) और छूना भी मुनासिब नहीं।

(📖 फ़तावा रिज़विया, जिल्द 4, सफ़्हा 163; एहकामे शरीअत, सफ़्हा 234)



💘(4) मज़ामीर (Instruments/ढोल, बाजे वग़ैरह) के साथ क़व्वाली सुनना हराम है। तफ़्सील के लिए देखिए (📖 फ़तावा रिज़विया, जिल्द 10, सफ़्हा 54 से 56 तक)


☝🏻 कुछ लोग समझते हैं कि सज़्दा बगैर नियत और काअबे की तरफ़ मुतवज्जेह हुए नहीं होता......यह भी जाहिलाना ख्याल है। सजदे में जिसकी ताअज़ीम या इबादत की नियत होगी उसको सज़्दा माना जाएगा और जो सज़्दा अल्लाह की इबादत की नियत से किया जाएगा अल्लाह तआला के लिए होगा और जो मज़ारात पर या किसी भी ग़ैरे खुदा के सामने किया जाए वह उसी के लिए होगा। खुलासा यह कि ज़मीन पर किसी बंदे के सामने सर रखना हराम है यूं ही रूकूअ के बराबर झुकना भी मना है.... हां हाथ बांधकर खड़ा होना जायज़ है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट

क़ब्रिस्तान मै चराग़ और मोमबत्ती जलाने और अगरबत्ती या लोबान सुलगाने का मसअला ?

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 164)

👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 6️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👉 क़ब्रिस्तान मै चराग़ और मोमबत्ती जलाने और अगरबत्ती या लोबान सुलगाने का मसअला ?


  🧠 शबे बराअत वगैरह के मौके पर क़ब्रिस्तानों में चराग बत्तियां की जाती है इस बारे में यह जान लेना ज़रूरी है कि बिल्कुल ख़ास क़ब्र के ऊपर चराग़ और मोमबत्ती जलाना या लोबान और अगरबत्ती सुलगाना मना है। क़ब्र से अलग किसी जगह ऐसा करना जायज़ है जबकि उन चीजों से वहां आने-जाने और क़ुरआन शरीफ और फातिहा वगैरह पढ़ने वालों को या राहगीरों (रास्ता चलने वालों) को फायदा पहुंचने की उम्मीद हो। यह ख्याल करना कि इसकी रोशनी और खुशबू क़ब्र में जो दफ़्न है उनको पहुंचेगी.....तो ये जिहालत, नादानी, ना'वाकिफ़ि और ग़लतफहमी है। दुनिया की रोशनी या सजावटे और डेकोरेशन वगैरह जो कब्रिस्तानों में करते हैं और यह सब मुर्दों को नहीं पहुंचती मुर्दों को सिर्फ सवाब ही पहुंचता है मुर्दा अगर जन्नती है तो उसके लिए जन्नत की खुशबू और रोशनी काफी है और जहन्नमी के लिए ना कोई रोशनी है ना खुशबू।


(📖 सही मुस्लिम, जिल्द 1, सफ़्हा 76, फतावा रिज़विया, जिल्द 4, सफ़्हा 141)


Next:-

👇आने वाला पार्ट

🇨🇨 मज़ार पर चादर चढ़ाना कब जाइज़ है ?

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 165)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 6️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨 मज़ार पर चादर चढ़ाना कब जाइज़ है ? (1)


      🧠 अल्लाह तआला के नेक और खास बंदे जिन्हें औलिया ए किराम और बुज़ुर्गाने दींन कहा जाता है उनके विसाल के बाद उनकी मुक़द्दस क़बरों पर चादर डाल देना जाइज़ और एक अच्छा काम है। इस चादर चढ़ाने में एक मसलेहत यह है कि इस तरह उनकी मुबारक क़ब्रों की पहचान हो जाती है कि यह किसी अल्लाह वाले की क़ब्र है, और अल्लाह के नेक बंदों की इज़्ज़त करना जिस तरह उनकी दुनियावि ज़िनदगी में ज़रूरी है उनके विसाल के बाद भी उनका अदब औ एहतिराम ज़रूरी है और मज़ारात पर चादर चढ़ाना भी अदब और एहतिराम है, और दूसरों से अलग उनकी पहचान बनाना है। जो लोग औलिया ए किराम के मज़ार पर चादर चढ़ाने को नाजायज़ और गुनाह कहते हैं वह ग़लती पर है, लेकिन इस सिलसिले में मसअला यह है कि एक चादर.... जो मज़ार पर पड़ी हो.... जब तक वह पुरानी और खराब ना हो जाए दूसरी चादर ना डाली जाए। मगर आजकल अक्सर जगह मज़ारों पर उसके खिलाफ़ हो रहा है,, फटी पुरानी और ख़राब तो दूर की बात है मैली तक नहीं होने देते और दूसरी चादर डाल देते हैं बाअज़ जगह तो 5 मिनट भी चादर मज़ार पर नहीं रहती इधर डाली और उधर उतार ली_ यह ग़लत है, और बेकार और फ़िज़ूल है, इस तरह चादर चढ़ाने के बजाय इस चादर की क़ीमत से किसी मोहताज को खाना खिला दे, किसी गरीब मरीज़ का इलाज करा दे, किसी ज़रूरतमंद का काम चला दे, किसी मस्जिद या मदरसे की ज़रूरत में खर्च कर दे, कहीं मस्जिद ना हो तो वहां मस्जिद बनवा दे, और उसमें उन्हीं बुज़ुर्ग के लिए इसाले सवाब की नियत कर लें जिनके मज़ार पर चादर चढ़ाना थी,, तो यह उस चादर पर चादर चढ़ाने से कहीं ज़्यादा बेहतर और अच्छा है__! हां अगर यह मालूम हो कि मज़ार पर चढ़ाई हुई चादर उतारने के बाद गरीबों, मिस्कीनों, मोहताजों के काम में आ जाती है तो इस नियत से चादर पर चादर चढ़ाने में कुछ हर्ज नहीं,, क्योंकि यह भी एक किस्म का सदक़ा और खैरात है। लेकिन आजकल शायद ही कोई मज़ार ऐसा होगा कि जिसकी चादरें गरीबों और मिस्कीनों के काम में आती हो बल्कि मुजाबिरीन और सज्जादगान उनपर क़ब्ज़ा कर लेते हैं और यह लोग अक्सर मालदार होते हैं तो यह चादरें चढ़ाना मालदारों को ही मालदार बनाना है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट

🇨🇨 मज़ार पर चादर चढ़ाना कब जाइज़ है ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 65,66)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 6️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨 मज़ार पर चादर चढ़ाना कब जाइज़ है ? (2)


   🧠 खुलासा यह  कि आजकल मज़ारात पर जब एक चादर पड़ी हो तो वहां दूसरी चादर चढ़ाने के बजाय बुज़ुर्गों के इसाले सवाब के लिए सदका और ख़ैरात करना, गरीबों, मिस्कीनों और मोहताजों के काम चलाना अच्छा है,, और यही मज़हब ए अहले सुन्नत और ओलामा-ए-अहले सुन्नत का फ़तवा है। "आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी रहमतुल्लाह अलैहि इरशाद फरमाते हैं" और जब चादर मौजूद हो और वह अभी पुरानी या ख़राब ना हुई, के बदलने की हाजत नहीं_तो चादर चढ़ाना फिज़ूल है। बल्कि जो दाम उसमें ख़र्च करें....वो वलीउल्लाह की रूहे मुबारक को इसाले सवाब के लिए मोहताज को दे।....हां जहां मामूल हो कि चढ़ाई हुई चादर जब हाजत से ज़ाइद हो खुद्दाम मसाकीन हाजतमन्द ले लेते हैं और इस नियत से डाले तो मुज़ाएक़ा नहीं कि यह भी तस्दीक़ (सदक़ा) हो गया।

(📖 एहकामे शरीअत, हिस्सा 1, सफ़्हा 72)


☝🏻 और अगर ऐसी जगह जहां पहले से चादर मौजूद हो और वह बोसीदह (पुरानी) और ख़राब ना हुई हो....और चादर चढ़ाने की मन्नत मानी हो तो उस मन्नत को पूरा करना ज़रूरी नहीं।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


📺 रेडियो, तार और टेलिफोन की ख़बर पर, बग़ैर शरई सुबूत के, चाँद मान लेना ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 66,67)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 6️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📺 रेडियो, तार और टेलिफोन की ख़बर पर, बग़ैर शरई सुबूत के, चाँद मान लेना ? (1)


   🧠 आजकल काफी लोग सिर्फ रेडियो तार टेलीफोन की ख़बर पर बगैर चांद देखे या बगैर शरई सुबूत के ईद मना लेते हैं या रमज़ान शरीफ़ का चांद हो तो रोज़ा रख लेते हैं....! यह गलत है। अगर आसमान पर धुंध गुबार या बादल हो तो रमज़ान के चांद के लिए एक, और ईद के चांद के लिए दो बा'शरा (दाढ़ी वाले) दीनदार भले मर्दों की गवाही ज़रूरी है, आसमान साफ हो तो बहुत से लोगों का चांद देखना ज़रूरी है। एक दो की गवाही काफी नहीं। महज़ रेडियो तार और टेलीफोन की ख़बर पर न रोज़ा रखें न ईद मनाए, जब तक के आप की बस्ती में शरई तौर पर चांद का सबूत ना हो या दूसरी बस्ती में चांद देखा गया हो और शरई तौर पर उसकी इत्तिला आप तक ना आ गई हो। जो लोग रेडियो और टेलीफोन वगैरह की खबरों पर ईद मना लेते हैं उनसे पूछा जाए कि अगर रेडियो तार और टेलीफोन पर ईद मनाई जाए तो आज कल पूरी दुनिया में एक ही दिन ईद होना चाहिए और हमेशा ईद का चांद 29 दिन का ही होना चाहिए क्योंकि दुनिया में ईद का चांद कहीं ना कहीं 29 का ज़रूर हर साल मान लिया जाता है और आज कल पूरी दुनिया में उसकी खबर हो जाना बज़रिया ए रेडियो टेलीफोन एक आम और आसान सी बात है तो रोज़े कभी 30 हो ही नहीं सकते।


👉 इसी का बाक़ी पार्ट जारी है...


Next:-

👇आने वाला पार्ट


📺 रेडियो, तार और टेलिफोन की ख़बर पर, बग़ैर शरई सुबूत के, चाँद मान लेना 2nd पार्ट ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 68)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 6️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📺 रेडियो, तार और टेलिफोन की ख़बर पर, बग़ैर शरई सुबूत के, चाँद मान लेना ? (2)


      🧠 सऊदी अरब में भी उमूमन हिंदुस्तान से हमेशा 1 दिन पहले ईद मनाई जाती है तो रेडियो और टेलीफोन पर अक़ीदा रखने वाले वहां के ऐलान पर ईद क्यों नहीं मनाते ? दिल्ली के ऐलान पर क्यों मनाते हैं ? इस्लामाबाद, कराची, लाहौर, ढाका, और रंगून, की इत्तलाआत क्यों नज़रअंदाज़ कर दी जाती है ? अगर कोई यह कहे कि वह दूसरे मुल्क में है तो हम पूछते हैं कि यह मुल्कों की तक्सीम और बटवारे क्या क़ुरआन और हदीस की रू (तरफ़) से है ? क्या खुदा और रसूल ने कर दिए हैं ? या आजकल की मौजूदा सियासत और अक़्वामे मुत्ताहिदा की तरफ़ से है ? और अक़्वामे मुत्ताहिदा की तक्सीम की.....शरीयत ए इस्लामिया में क्या कोई हैसियत है ? यह भी हो सकता है कि कोई क़ोमी हुक्मरां खुदाए तआला पैदा फ़रमाए और वह उन सब मुल्कों को फतह करके सब को एक ही मुल्क बना डाले,, और अगर जवाबन कोई कहे कि मुल्क दूसरा और दूरी ज्यादा होने की बिना पर मुत्तला अलग-अलग है तो ख्याल रहे कि इख़्तिलाफ़ ए मुतालेअ मोअतबर नहीं। और अगर बिल्फ़र्ज़ मान भी लीजिए तो हिंदुस्तान के वह शहर और इलाके जो अपने मुल्क के शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, और कोलकाता, वगैरा से दूर है और दूसरे मुल्कों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा, चीन, तिब्बत, नेपाल, लंका, के बाअज़ शहरों से क़रीब है तो उन्हें आप चांद के मामले में कहां की पैरवी करने का मशवरा देंगे ? अपने मुल्क की ? या जिन मुल्कों और शहरों से वह करीब है वहां की ? और वह मुत्तलेअ के बारे में दिल्ली, मुंबई, और कोलकाता, की मुआफ़िक़त करेंगे या दूसरे मुल्कों के अपने से क़रीब इलाक़ों की। ख़ुलासा यह कि बग़ैर शरई सुबूत के महज़ रेडियो और टेलीफोन की खबरों पर चांद के मामले में एतबार करना इस्लाम और क़ुरआन और हदीस के मुतलक़न खिलाफ़ है।

(📖 फ़तावा आलमगीरी मिस्री, जिल्द 3, सफ़्हा 357 मै है; "पर्दे के पीछे से अगर कोई शख्स गवाही दे तो उसकी गवाही मोअतबर नहीं क्योंकि एक आवाज़ दूसरी आवाज़ की तरह होती है" तो रेडियो और टेलीफोन पर बोलने वाला तो हजारों लाखों परदों और घेरों के पीछे हैं उसकी गवाही क्यों मोतबर होगी)


👉 इसी का बाक़ी पार्ट जारी है...


Next:-

👇आने वाला पार्ट


📺 रेडियो, तार और टेलिफोन की ख़बर पर, बग़ैर शरई सुबूत के, चाँद मान लेना 3rd पार्ट ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 69,70)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 6️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📺 रेडियो, तार और टेलिफोन की ख़बर पर, बग़ैर शरई सुबूत के, चाँद मान लेना ? (3)


🧠 फिर यह के अगर आप की बस्ती में 29 का चांद ना हुआ और किसी जगह हो गया और आप तक शरई इत्तिला ना आई आपने रोज़ा ना रखा ईद का चांद है और ईद ना मनाई बल्कि रोज़ा रखा तो आप पर हर्गिज़ कोई गुनाह और अज़ाब नहीं क्योंकि अज़ाब और सवाब की कुंजी अल्लाह जल्ला शानहू के दस्ते कुदरत में है। लिहाज़ा आप वह कीजिए जिसका उसने हुक्म दिया है और इतना कीजिए जितना उस ने फरमाया है हुदूद से आगे मत बढ़िए, और रेडियो टेलीफोन सुन-सुनकर शोर मत मचाइए कूद-फांद मत कीजिए जाने दीजिए, पूरी दुनिया में ईद हो जाएगी अगर आप तक शरई इत्तिला नहीं है आप रोज़ा रखिए आप से बरोज़े कयामत कोई पुर्सिश ना होगी,, फिर फिक्र की क्या ज़रूरत है....! फिक्र तो उसकी कीजिए जिसके बारे में क़ब्र और हश्र में सवाल होगा। "हदीस शरीफ में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं, कि महीना कभी 29 का हो जाता है तो जब तक चांद ना देखो रोज़ा ना रखो और अगर तुम्हारे सामने अब्र यानी बादल या गुबार आ जाए तो 30 दिन की गिनती पूरी करो" (📖 बुखारी और मुस्लिम और मिश्कात सफ़्हा नंबर 174) ग़ौर करने का मक़ाम है कि मौजूदा दौर की कचहरी में भी जज और हाकिम गवाहों को सामने बुलाकर गवाही लेते हैं अगर कोई घर बैठे टेलीफोन के ज़रिए गवाही दे दे तो हरगिज़ ना मानेंगे.... तो शरई अहकाम और शहादतों कि आखिर आपकी निगाह में कोई अहमियत है या नहीं ? जिन्हें आप तार टेलीफोन और रेडियो के हवाले किए दे रहे हैं खुदाए तआला का खौफ़ खाइए और आप दीनदार बनने की कोशिश कीजिए दीन का ठेकेदार बनने की कोशिश मत कीजिए वह जिसका काम है उस पर छोड़ दीजिए और अपनी-अपनी बस्ती के ओलमा और आइम्मा जो अहले हक़ से हो उनकी बात पर अमल कीजिए।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 70,71)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 6️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


_🕌 क्या इस्लाम मै ताज़ियादारी जाइज़ है ❓

 पार्ट:(1)_


🧠 कुछ लोग मोहर्रम और सफ़र के महीने में ताज़िए बनाते हैं उन्हें ढोल बाजे के साथ घुमाते, और उनके साथ सीना पीटते, मातम करते हुए उन्हें नक़ली और फ़र्ज़ी कर्बला में ले जाकर दफ़्न करते हैं, यह सब बातें इस्लाम में मना है, नाजायज़ और गुनाह है। प्यारे इस्लामी भाइयों हमारा आपका प्यारा मज़हब जो इस्लाम है वह एक साफ-सुथरा, संजीदा, और शरीफ़, अच्छा, भला, सीधा, सच्चा मज़हब है, वह खेल तमाशा, गाने बाजे, ढोल धमाकों, नाच कूद, वाला और सीना कूटने वाला मज़हब नहीं है। आजकल की ताज़िए'दारी और उस को जायज़ बताने वाले दुनिया को यह ज़हन दे रहे हैं कि इस्लाम भी दूसरे धर्मों की तरह मेलों,और खेल तमाशा और गुंडागर्दी वाला मज़हब है, कुछ लोग कहते हैं कि ताज़िया बनाना जायज़ है उसको घुमाना वगैरह नाजायज़ है, यह बात भी एकदम दुरुस्त नहीं-- बल्कि आजकल जो ताज़िया बनाया जाता है उसको बनाना भी मना है। क्योंकि यह हज़रत इमाम हुसैन के रोज़े और मज़ार का सही नक्शा नहीं है, बल्कि इजाज़त सिर्फ इतनी है कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ी अल्लाह ताला अन्हु के मज़ारे पुर'अनवार का सही नक्शा किसी कागज़ वगैरह पर बना हुआ अपने पास या घर में रखें जैसे खाना'ए' काअबा, गुंबदे खज़रा, बगदाद शरीफ, अजमेर शरीफ, वगैरह के बने हुए नक्शे कैलेंडरों वगैरह में अलग से भी आते हैं, और लोग बरकत हासिल करने के लिए उन्हें घरों में टांगते हैं।


📖हवाले और तफ़्सील से जानने के लिए देखिए, (फ़तावा रज़विया, जिल्द 10, किस्त अव्वल, सफ़्हा 36)


    🌹 मोहर्रम के महीने की 7, 12, 13 तारीख की जो मेहंदी बनाई या निकाली जाती है यह भी एक बेकार और गढ़ी हुई रस्म और शिया मज़हब की पैदावार है इस्लाम से इसका कोई ताअल्लुक़ नहीं जिहालत का नतीजा है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🕌👇🏿क्या इस्लाम मै ताज़ियादारी जाइज़ है पार्ट-2 ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 178,189)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 6️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🕌 क्या इस्लाम मै ताज़ियादारी जाइज़ है ? पार्ट:(2)


🧠 अहले सुन्नत वल जमाअत का मज़हब यह है कि हज़रत इमाम हुसैन और दूसरे शहीदाने कर्बला और बुज़ुर्गाने दीन से सच्ची मोहब्बत यह है कि उनके नक्शे क़दम पर चला जाए, और उनके रास्ते, तरीके, ढंग, और चाल-चलन को अपनाया जाए, और उसके साथ-साथ उनकी रूह को सवाब पहुंचाने के लिए नफ़्ल पढ़े जाएं, रोज़े रखे जाएं, क़ुरआने करीम की तिलावत की जाए, या सदक़ा खैरात करके अहबाब दोस्तों रिश्तेदारों या ग़रीबो मिस्कीनों को खाना, खिचड़ा, हलवा, मलीदा, या जो मयस्सर हो वह खिलाकर उसका सवाब उनकी पाक रूह को पहुंचाया जाए, जिसको फातिहा कहते हैं... तो यह बेशक जायज़ उम्दा और अच्छा काम है और इससे अल्लाह तआला राज़ी होता है, और अपने रब की रज़ा हासिल करना हर मुसलमान के लिए हर ज़रूरत से ज्यादा ज़रूरी है, और नियाज़, फातिहा, सदक़ा, खैरात में भी यह ज़रूरी है कि अपने नाम और शोहरत और दिखावे के लिए ना हो बल्कि जो भी हो और जितना भी हो खालिस अल्लाह की रज़ा हासिल करने और बुज़ुर्गों को सवाब पहुंचाने के लिए हो। आज कुछ लोग लंबी-लंबी नियाज़ दिलाते खूब देगे पका-पका कर खिलाते हैं और उनका मक़सद अपनी नामवरी और शोहरत होता है और वह दिखाने के लिए ऐसा करते हैं, उनकी नियाजें क़ुबूल नहीं होंगी।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🕌क्या इस्लाम मै ताज़ियादारी जाइज़ है पार्ट-3 ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 189,190)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🕌 क्या इस्लाम मै ताज़ियादारी जाइज़ है ? पार्ट:(3)


   🧠 यह भी सुनने में आया है कि कोई शख़्स ताज़ियादारी और उसके साथ की जाने वाली खुराफात से मना करे तो कुछ लोग उसे वहाबी कह देते हैं और समझते हैं कि ताज़ियादारी सुन्नियों का काम है और उससे मना करना वहाबियों का तरीक़ा है, हालांकि ऐसा नहीं बल्कि कभी भी किसी सही सुन्नी आलिम ने ताज़ियादारी को जायज़ नहीं कहा है बल्कि सबने हमेशा नाजायज़ और गुनाह लिखा है... और "आला हज़रत मौलाना अहमद रज़ा खान बरेलवी रहमतुल्लाही तआला अलेही" की किताबों में तो जगह-जगह इसको हराम बताया गया है और इस बारे में उनके फ़तावा का मजमूआ एक किताब की शक्ल में छप चुका है जिसका नाम "रिसाला'ए'ताज़ियादारी" है। लिहाज़ा जो हमारे भाई तफ़सील से इस मसले को पढ़ना चाहें वह सुननी कुतुब खानों से इस रिसाले को हासिल करके पढ़ें।...और जो मौलवी ताज़ियादारी को जायज़ कहते हैं वह ऐसा पब्लिक को खुश करने और उनसे प्रोग्रामों के ज़रिए नज़राने वगैरह हासिल करने के लिए करते हैं,, उन्हें चाहिए कि पब्लिक को खुश रखने के बजाय अल्लाह और उसके रसूल को राज़ी करने की फिक्र करें क्योंकि हराम को हलाल बताने वालों की जब क़ब्र और हश्र में पिटाई होगी तो यह सब पब्लिक बचाने नहीं जाएगी और जलसों प्रोग्रामों और नज़रानों की रक़मों के ज़रिए वहां जान नहीं छूटेगी, बल्कि यही ताज़ियेदार जिन को खुश रखने के लिए यह मौलवी ग़लत मस्ले बताते हैं क़यामत के दिन उनका दामन पकड़ेंगे। यह भी मुमकिन है कि ताज़ियादारी और उसके साथ की जाने वाली ख़ुराफ़ातों को जायज़ कहने वाले मौलवी वहाबियों के एजेंट हो, और उनसे खुफिया समझौता किए हुए हो, क्योंकि सुन्नियों में वाहियात और खुराफात के रिवाज से सुन्नी मज़हब बदनाम होता है और वाहियात को इस ज़रिए से फायदा पहुंचता है, और काफी लोग अपनी जहालत की वजह से हमारे माहौल में खिलाफ़'ए शराअ हरकत देखकर वहाबियों की तारीफ करने लगते हैं हालांकि यह उनकी भूल है और सुन्नी उलमा की किताबें ना पढ़ने का नतीजा है हां इतना जानना ज़रूरी है कि वहाबी ताज़ियादारी को शिर्क और ताज़ियादारों को मुशरिक और काफिर तक कह देते हैं, लेकिन  सुन्नी उन्हें मुसलमान और अपना भाई ही ख्याल करते हैं। बस बात इतनी है कि वह एक गुनाह कर रहे हैं खुदा'ए तआला उन्हें इससे बचने की तौफ़ीक़ अता फरमाए..... आमीन।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 190,191)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌹इद्त के लिए औरत को मायके मै लाना ❓


    🧠 आजकल अगर कोई औरत तलाक वाली हो जाए तो मायके वाले उसको फौरन अपने घर ले आते हैं बल्कि इस पर फ़ख्र करते हैं और अगर वह शौहर के घर में रहे तो कुछ लोग उसके मां-बाप और भाइयों को आर दिलाते हैं के तलाक़ के बाद भी लड़की को शौहर के घर छोड़ दिया है यह सब गलत बातें हैं मसला यह है के बादे तलाक़ औरत शौहर के घर में ही इद्दत गुज़ारे और शौहर के ऊपर इददत का नान'ओ नफ़का (खाना ख़र्चा) और रहने के लिए मकान देना लाज़िम है।

📖 क़ुरआने करीम में पारा न. 28 सूरह तलाक़ मै है। "यानी तलाक़ वाली औरतों को उनके घर से ना निकालो ना वो खुद निकले मगर जब कि वह खुली हुई बेहयायी करें" हां यह ज़रूरी और फ़र्ज़ है कि वह दोनों अजनबी और एक दूसरे के ग़ैर होकर रहे,, और बेहतर यह है कि उनके दरमियान कोई बूढ़ी औरत रहे और उनकी देखभाल रखें और यह भी हो सकता है के शौहर घर में ना रहे खास कर रात को कहीं और सोए, औरत के हाथ का पका हुआ खाना खाने में कोई हर्ज नहीं है शौहर के कपड़े वगैरा धोना भी तलाक़ के बाद कोई गुनाह नहीं है क्योंकि तलाक़ के बाद वह अगरचे बीवी नहीं मगर एक मुसलमान औरत है और शरई हुदूद की पाबंदी के साथ एक मुसलमान का दूसरे मुसलमान के काम में आना हुस्ने अख़लाक़ है और अच्छी बात है। जो बाअज़ जगह लोग इतनी सख्ती करते हैं कि तलाक़ के बाद इद्दत में अगर शौहर बीवी के हाथ का पका हुआ खाना भी खा ले तो हुक्का-पानी बंद कर देते हैं यह गलत है जब तक खूब यकीन से मालूम ना हो कि वह मियां बीवी की तरह मख़सूस मामलात करते हैं, सिर्फ शक की वजह से उन्हें तंग ना किया जाए और बदगुमानी इस्लाम में गुनाह है, हां अगर तलाक़'ए मुगललिज़ा या बाईना की इद्दत हो और शौहर फ़ासिक़ हो और कोई वहां ऐसा ना हो कि अगर शौहर की नियत खराब हो तो उसको रोक सके तो औरत के लिए उसके घर को छोड़ने का हुक्म है।


📖(फतावा फैज़ुर्रसूल, जिल्द 2 सफ़्हा 290)


Next:-

👇आने वाला पार्ट

👉 तलाक़ वाली की इद्दत को 3 महीने ख़्याल करना ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 80,81)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👉 तलाक़ वाली की इद्दत को 3 महीने ख़्याल करना ?


🧠 काफी लोग यह ख्याल करते हैं के मुतल्लिक़ा यानी तलाक़ वाली की इद्दत 3 महीने में पूरी हो जाती है यह ग़लत है, तलाक़ शुदा औरत की इद्दत यह है.. अगर वह हामिला (प्रेग्नेंट) ना हो तो बाद'ए तलाक़ उसको तीन बार माहवारी हो जाए चाहे यह तीन माहवारियां 3 महीने से कम में पूरी हो जाए या उससे ज्यादा में, चाहे साल गुज़र जाएं अगर तीन बार उसको माहवारी नहीं हुई तो इद्दत पूरी नहीं होगी, हां अगर वह 55 साल की हो गई हो और महीना आना बंद हो गया हो या नाबालिगा हो कि अभी महीना शुरू ही नहीं हुआ या उसको कभी किसी मर्ज़ की वजह से आया ही ना हो तो उसकी इद्दत 3 माह है, और हामिला (प्रेग्नेंट औरत) की इद्दत बच्चा पैदा हो जाना है, चाहे तलाक़ के बाद फौरन बच्चा पैदा हो जाए इद्दत पूरी हो जाएगी। खुलासा यह है कि आमतौर से जो तलाक़ की इद्दत 3 महीने या 3 महीने 13 दिन समझा जाता है ग़लत है। सही बात वह है जो हमने ऊपर बयान कर दी।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 81,82)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


❤रुट, बूट, हज़रते अली मुश्किल कुशा, और 16 सैय्यदों का रोज़ा ?


    🧠 कुछ जगहों पर रजब की 17 तारीख को रोज़ा रखते हैं और उसे रूट बूट का रोज़ा कहते हैं खास तौर से इस दिन रोज़ा रखने का शरीयत ए इस्लमिया में कोई हुक्म नहीं। नफ्ल रोज़ा साल में ममनूअ दिनों को छोड़कर कभी भी रखा जा सकता है। 17 रजब को रोज़े के लिए मख़सूस करके उसे रूट बूट का रोज़ा कहना मख़सूस वज़न की छोटी बड़ी दो रोटियां और बोटियां पकाना छोटी रोटी फातिहा पढ़ने वाले और बड़ी रोटी रोज़ेदार को खिलाना, बेअसल और गढ़ी हुई बातें हैं। "इसी तरह हज़रते अली मुश्किल कुशा और 16 सैयदों का रोज़ा" बाअज़ जगह औरतें हज़रते अली मुश्किल कुशा का रोज़ा रखती हैं,, तो रोज़ा हो या कोई इबादत सब अल्लाह के लिए ही होती है हां अगर यह नियत कर ली जाए कि इसका सवाब हज़रते अली की रूह ए पाक को पहुंचे तो यह अच्छी बात है... लेकिन इस रोज़े में इफ्तार आधी रात में करती है और घर का दरवाज़ा खोलकर दुआ मांगती है यह सब खुराफात और वाहियात और वहम परस्ती की बातें हैं


(📖 फ़तावा रिज़विया, जिल्द 4, सफ़्हा 660)


❤ यूं ही 16 रजब को 16 सैयदों का रोज़ा रखा जाता है उसमें जो कहानी पढ़ी जाती है वह गढ़ी हुई है।


Next:-

👇 आने वाला पार्ट


🌹 तीन तलाक़ों का रिवाज ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 70,71)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


     🌹 तीन तलाक़ों का रिवाज ?


  🧠 आजकल अज़ रु'ए जिहालत और नादानी,,, अपनी औरतों को 3 या उससे ज्यादा तलाक़ दे डालते हैं या कागज़ों में लिखवा देते हैं और फिर कभी बात को दोबारा बनाने के लिए उसकी सज़ा यानि हलाले से बचने के लिए झूठ सच बोलते और मुफ्तियाने किराम और ओलामए दीन को परेशान करते हैं। काश यह लोग तलाक़ से पहले ही मौलाना से मशवरा कर लें तो यह नौबत ही ना आए, तीन तलाक़ एक ही वक्त देना गुनाह है, तलाक़ का मक़सद सिर्फ यह है कि बीवी को अपने निकाह से बाहर करके दूसरे के लिए हलाल करना....! के इद्दत के बाद वह किसी और से निकाह कर सके, यह मक़सद सिर्फ एक तालक़ या दो से भी हासिल हो जाता है। एक तलाक़ देकर उसको इददत गुज़ारने के लिए छोड़ दिया जाए और इद्दत के अंदर उसको एक अजनबी और ग़ैर औरत की तरह रखा जाए और ज़ुबान से भी रजअत ना की जाए, तो इद्दत के बाद वह दूसरे से भी निकाह कर सकती है और उसके निकाह मै भी सिर्फ निकाह करने से बग़ैर हलाले के वापस आ सकती है, और तीन तलाक़ों के गुनाह और बवाल से भी बचा जा सकता है। वक़ते ज़रूरत तलाक़ देना इस्लाम में मशरूअ (यानि ज़रूरत के वक़्त तलाक़ दे सकते) है, क्योंकि मिया बीवी का रिश्ता कोई पैदाइशी ख़ूनी और फ़ितरी रिश्ता नहीं होता, बल्कि यह ताअल्लुक़ अमूमन जवानी में क़ाइम होता है, तो यह ज़रूरी नहीं कि यह मोहब्बत हो ही जाए बल्कि मिजाज़ अपने-अपने, आदतें अपनी-अपनी, तौर तरीके अपने-अपने, ख्यालात और रुजहानात अलग-अलग होने की सूरत में बजाय मोहब्बत के नफ़रत पैदा हो जाती है और एक दूसरे के साथ ज़िनदगी गुज़ारना निहायत मुश्किल, बल्कि कभी-कभी नामुमकिन हो जाता है, और नौबत रात दिन के झगड़े, मारपीट, यहां तक के कभी-कभी क़त्ल और ख़ूनरेज़ी तक आ जाती है। बीवी शौहर एक दूसरे के लिए जानी दुश्मन बन जाते हैं तो इन हालात के पेश-ए-नज़र इस्लाम में तलाक़ रखी गई है, कि लड़ाई-झगड़ों नफरतों और  मुअर्रिका आराइयों के बजाय सुलह और सफाई और हुस्न'ओ खूबी के साथ अपना-अपना रास्ता अलग-अलग कर लिया जाए। इसलिए जिन मज़हब और धर्मों में तलाक़ नहीं है (यानि जिसके साथ बंध गया वह हमेशा के लिए बंध गया जान छुड़ाने का कोई रास्ता नहीं) उनमें औरतों के क़त्ल कर दिए जाते हैं या जिंदगी चैन'ओ सुकून के बजाय अज़ाब बनी रहती है, आज औरतों की हमदर्दी के नाम पर कुछ दुश्मनाने इस्लाम ताक़तें ऐसे क़ानून बना रही हैं जिनकी रूसे तलाक़ का वुजूद मिट जाए और कोई तलाक़ ना दे सके,, यह लोग औरतों के हमदर्द नहीं बल्कि उनका क़त्ल कर रहे हैं। आज मिट्टी का तेल बदन पर डालकर औरतों को जलाने, पानी में डुबोने, ज़हरीली गोलियां खिलाकर उनको मारने वगैरा, इज़ा रसानी के होलनाक वाक्यात के जिम्मेदार वही लोग हैं जो किसी भी सूरत'ए हाल में तलाक़ के रवादार नहीं, और जब से हर हाल में तलाक़ को ऐब और बुरा जानने का रिवाज बढा तभी से यह दर्दनाक वाक्यात की शराह बढ़ गई। हम पूछते हैं क्या किसी औरत को मारना, जलाना, डुबोना, बेरहमी से पीटना, बेहतर है या उसको मेहर की रकम देकर साथ इज़्ज़त के तलाक़ दे देना ? और किसी औरत के लिए अपने शौहर को किसी तरह राज़ी करके उससे तलाक़ हासिल कर लेना ? और अपनी गुलू खुलासी कराके किसी और से निकाह कर लेना बेहतर है या यारों दोस्तों आशनाओ से मिलकर मिलकर शौहर को क़त्ल कराना ? आज इस किस्म के वाक़यात और हादसात की कसरत है जिनका अंदाज़ा अख़बारात का मुतालेआ करने से होता है। और अगर मुआशरे को बरक़रार रखने के लिए इस्लाम ने मियां बीवी के हुक़ूक़ बताए हैं उन पर अमल किया जाए तो यह नौबत ना आए। और लड़ाई झगड़े और तलाक़ तक बात ही ना पहुंचे।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


💎 शर'ए पयम्बरी महर मुक़र्रर करना ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 75,76)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💎 शर'ए पयम्बरी महर मुक़र्रर करना ?


    🧠 बहुत जगह निकाह में महर,, शर'ए पयम्बरी मुक़र्रर किया जाता है, और उससे उनकी मुराद ₹64 और 10 आने होती है या कोई और रक़म... हालांकि यह सब बेअसल बातें हैं। शरीअते पैगंबरे आज़म सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम में मैहर में ज्यादती की कोई हद मुक़र्रर नहीं है, जितने पर दोनों फ़रीक़ (दूल्हा दुल्हन वाले) मुत्तफ़िक़ हो जाए वही महर शर'ए पयम्बरी है। हां कम से कम मैहर की मिक़दार 10 दिरहम यानी तक़रीबन 2 तोले 13 आने भर चांदी है, उससे कम महर सही नहीं अगर बांधा गया तो महरे मिस्ल लाज़िम आएगा। और बाअज़ लोग महर शर'ए पयम्बरी से सय्यीदतुना फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा के अक्दे मुबारक का महर ख्याल करते हैं, हालांकि खातून ए जन्नत के निकाहे मुबारक का महर 400 मिस्क़ाल यानी डेढ़ सौ तोला चांदी था। खुलासा यह कि शरअ की तरफ़ से महर की कोई मिक़दार मुतअय्यन नहीं की गई है। हां यह ज़रूर है कि 10 दिरहम यानी 2 तोले 13 आने भर चांदी से कम क़ीमत में ना हो।


👉🏿 निकाह पढ़ाने मै इजाब'ओ क़ुबूल के बाद ख़ुत्बा पढ़ना,,,,ये रिवाज भी ग़लत है। सुन्नत ये है कि ख़ुत्बा'ए निकाह इजाब'ओ क़ुबूल से पहले पढ़ा जाये।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


💫 क्या तलाक़ के लिए औरत का सामने होना, या तलाक़ के अल्फ़ाज़ सुन्ना ज़रूरी है ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 76,77)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💫 क्या तलाक़ के लिए औरत का सामने होना, या तलाक़ के अल्फ़ाज़ सुन्ना ज़रूरी है ?


     🧠 कुछ लोग समझते हैं कि शोहर अगर बीवी को तलाक़ दे तो अल्फाज़े तलाक़ का औरत के लिए सुनना और औरत का तलाक़ के वक्त सामने होना ज़रूरी है......यह ग़लत फहमी है....। औरत अगर ना सुने और वहां मौजूद भी ना हो तब भी शौहर के तलाक़ देने से तलाक़ हो जाएगी चाहे शौहर और बीवी में हज़ारों किलोमीटर का फासला हो। आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत सैयदी शाह अहमद रज़ा खान साहब इरशाद फरमाते हैं,,, "तलाक़ के लिए औरत का वहां हाज़िर होना कुछ शर्त नहीं"।


(📖 फ़तावा रिज़विया, जिल्द 5, सफ़्हा नंबर, 618)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


💞 क्या हालते हमल (प्रेग्नेंसी) मै तलाक़ नहीं होती ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 77)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💫 क्या हालते हमल (प्रेग्नेंसी) मै तलाक़ नहीं होती ?


    🧠 हालते हमल (प्रेग्नेंसी) मे तलाक़ वाक़ै हो जाती है,, यह जो कुछ लोग समझते हैं कि औरत हमल (प्रेग्नेंट) से हो और उस हालत में शौहर तलाक़ दे तो तलाक़ वाक़ै नहीं होती....यह उनकी ग़लत फ़हमी है। सैयदी आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत सैयदी शाह अहमद रज़ा खान साहब इरशाद फरमाते हैं,,, "जाइज़ और हलाल है, चाहे अय्यामे हमल (हमल के दिनों) मै दी हो"।


(📖 फ़तावा रिज़विया, जिल्द 5, सफ़्हा नंबर, 625)


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🌴 क्या शौहर के लिए बीवी को मै हाथ लगाने से पहले महर मुआफ़ करना ज़रूरी है ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 77,78)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 7️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌴 क्या शौहर के लिए बीवी को मै हाथ लगाने से पहले महर मुआफ़ करना ज़रूरी है ?


  🧠 काफी लोग यह ख्याल करते हैं कि शौहर के लिए ज़रूरी है के निकाह के बाद पहली मुलाक़ात मै अपनी बीवी से पहले महर मुआफ़ कराए फिर उसके जिस्म को हाथ लगाए.... यह एक ग़लत ख्याल है.... इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं। महर मुआफ़ कराने की कोई ज़रूरत नहीं, आजकल जो महर राइज है, उसे ग़ैर मुअज्जल (उधार) कहते हैं, जो या तो तलाक़ देने पर या फिर दोनों में से किसी एक की मौत पर देना वाजिब होता है उससे पहले देना वाजिब नहीं... हां अगर पहले दे दे तो कोई हर्ज नहीं बल्कि निहायत उम्दा बात है, मुआफ़ कराने की कोई ज़रूरत नहीं और महर मुआफ़ कराने के लिए नहीं बांधा जाता है, अब दे या फिर दे वह देने के लिए है, मुआफ़ कराने के लिए नहीं... हां अगर महर'ए मुअज्जल (नक़द) हो यानी निकाह के वक्त नक़द देना तय कर लिया गया हो तो बीवी को इख़्तियार है कि वह अगर चाहे तो बगैर मेहर वसूल किए खुद को उसके क़ाबू में ना दे, और उसको हाथ ना लगाने दे। और चाहे तो बगैर महर लिए भी उसको यह सब करने दे माफ कराने का यहां भी कोई मतलब नहीं।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


🧕🏻जिस औरत के ज़िना (ना'जाइज़ ताअल्लुक़ात) का हमल हो, उस से निकाह का मसअला ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 78,79)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🧕🏻जिस औरत के ज़िना (ना'जाइज़ ताअल्लुक़ात) का हमल हो, उस से निकाह का मसअला ?


   🧠 ज़ानिया हामिला (यानि वो औरत जिसने किसी ऐसे मर्द से शारीरिक सम्बन्ध बनाये जो उसका शौहर ना हो और वो गर्भवती हो गयी तो उस औरत) से निकाह को कुछ लोग ना'जायज़ समझते हैं हालांकि वह जायज़ है। ज़िना इस्लाम में बहुत बड़ा गुनाह है और इसकी सज़ा बहुत सख्त है, लेकिन अगर किसी औरत से ज़िनाकारी सरज़द हुई, उससे निकाह किया जाए तो निकाह सही हो जाएगा चाहे ज़िना से हामिला (गर्भवती) हो गई हो जबकि वह औरत शौहर वाली ना हो, और निकाह अगर उसी शख्स से हो जिसका वह हमल (गर्भ) है तो निकाह के बाद वह दोनों साथ-साथ रह सकते हैं सोहबत और हमबिस्तरी भी कर सकते हैं। और किसी दूसरे से निकाह हो तो जब तक बच्चा पैदा ना हो जाए दोनों को अलग रखा जाए और उनके लिए हमबिस्तरी जायज़ नहीं। "इमामे अहले सुन्नत सैयदी आला'हज़रत फरमाते हैं"... जो औरत (मआज़'अल्लाह) ज़िना से हामिला हो, उससे निकाह सही है चाहे उस ज़ानी से हो या ग़ैर से... फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है, अगर ज़ानी (वो शख्स जिसने ये काम किया उस) से निकाह हो तो वह निकाह के बाद उससे क़ुर्बत भी कर सकता है---और ग़ैर ज़ानी से हो तो......ता'वज़'ए हमल क़ुर्बत ना करे (यानि जब तक बच्चा न हो जाये या वो हमल गिर न जाये तब तक क़रीब न जाये)।


📖 (फ़तावा रज़विया, जिल्द 5, सफ़्हा नंबर 199, फ़तावा अफ्रीक़ा, सफ़्हा 15)



📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 79,80)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🧕🏻जवान लड़कियों की शादी मै ताख़ीर (देरी) करना ?


       🧠 आजकल जवान लड़कियों को घर में बैठाए रखना और उनकी शादी में ताख़ीर (देर) करना आम हो गया है। इस्लामी नुक़ता'ए नज़र से यह एक ग़लत बात है। हदीसे पाक में है:- "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम" इरशाद फरमाते हैं, जिसकी बेटी 12 बरस की उम्र को पहुंचे और वह उसका निकाह ना करें फिर वह लड़की गुनाह में मुब्तला हो....तो वह गुनाह उस शख्स पर भी है।

(📖मिश्कात शरीफ, सफ़्हा 271)



 आजकल की फ़िज़ूल रस्मो और बेजा अखराजात ने भी शादियों को मुश्किल कर दिया है जिसकी वजह से भी बहुत सी जवान लड़कियां अपने घरों में बैठी हुई हैं, उन अखराजात पर कंट्रोल करने के लिए जगह-जगह तहरीके चलाने और तंजीमें बनाने की ज़रूरत है, चाहे अपनी-अपनी बिरादरी की सतह पर ही यह काम किया जाए तो भी कोई हर्ज नहीं। भाइयों ये दौर काम करने का है सिर्फ बातें मिलाने या नारे लगाने और मुशायरे सुनने से कुछ हासिल ना होगा। कुछ लोग आला तालीम के लिए लड़कियों की उम्र ज़्यादा कर देते हैं और उन्हें ग़ैर शादीशुदा रहने पर मजबूर कर देते हैं, यह भी निरी हिमाक़त और बेवकूफी है।  आज मुसलमानों में कुछ बदमज़हब और बातिल फ़िरके जवान लड़कियों की आला तालीम के मदारिस और स्कूल खोलने में बहुत कोसा है। उनका मक़सद अपने बातिल और मन्हूस गैर इस्लामी अक़ाइद मुसलमानों में फैलाने और घरों में पहुंचाने के अलावा और कुछ भी नहीं है, और इधर लोगों में आजकल औलाद से मोहब्बत इस क़दर बढ़ गई है कि हर शख्स उस कोशिश में है कि मेरी लड़की और मेरा लड़का पता नहीं क्या-क्या बन जाए और उनपर आला तालीम के नशे सवार है, और बनता तो कोई कम ही है लेकिन अक्सर बुरे दिन देखने को मिलते हैं। लड़के ज़्यादा पढ़कर बाप बन रहे हैं और लड़कियां मां बन रही है।


        _⚠ नोट:- हो सकता है कि हमारी इन बातों से कुछ लोगों को इख़्तिलाफ़ हो। मगर हमारा मशवरा यही है कि लड़कियों को आला तालीम से बाअज़ रखा जाए, खासकर जबकि यह तालीम शादी की राह में हाइल (रुकावट) हो। और पढ़ने पढ़ाने के चक्कर में अधेड़ कर दिया जाता हो। और खासकर गरीब तबक़ै के लोगों में, क्योंकि उनके लिए पढ़ी-लिखी लड़कियां बोझ बन जाती हैं क्योंकि उनके लिए शौहर भी A क्लास और आला मेअयार के होना चाहिए, और वह मिल नहीं पाते, और कोई मिलता भी है तो वह जहेज़ में कार या मोटरसाइकिल का तालिब है, बल्कि बारात से पहले एक दो लाख ₹ का सुवाली है।


 ✒    हिंदुस्तानी गवर्नमेंट जो बच्चों को ऊंची तालीम दिलाने पर ज़ोर दे रही है उसके लिए मेरा मशवरा है कि वह तालीम या बच्चों की नौकरी और मुलाज़िमत की ज़िम्मेदारी ले, खाली पढा-पढा कर छोड़ देना, ना घर का रखना ना बाहर का, ना खेत का ना दफ्तर का, ये गरीबों के साथ जुल्म है और समाज की बर्बादी।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


👤 लड़कों की शादी मै ब'जाए वलीमे के मूंढया करना (मांढ, मंढ या जो भी कहते हों आपकी ज़ुबान मै) ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 83,84)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👤 लड़कों की शादी मै ब'जाए वलीमे के मूंढया करना (मांढ, मंढ या जो भी कहते हों आपकी ज़ुबान मै) ?


      🧠 लड़के की शादी में ज़ुफाफ़ (यानी बीवी और शोहर के जमा होने के बाद) सुबह को अपनी विसात (हैसियत) के मुताबिक़ मुसलमानों को खाना खिलाए उसे वलीमा कहते हैं। और यह "सैयद ए आलम सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम" की मुबारक सुन्नत है। ब'कसरत हदीस में इसका ज़िक्र है, सरकार ने खुद भी वलीमे किए और सहाबा'ए किराम को भी उसका हुक्म दिया। मगर आजकल काफी लोग शादी से पहले दाअवते करके खाना खिलाते हैं जिसको मंड्या (वग़ैरह) कहा जाता है, वलीमा ना करना उनकी जगह मंडिया करना यह सुन्नत के खिलाफ़ है। मगर लोग रस्मो रिवाज पर अड़े हुए हैं और अपनी ज़िद और हटधर्मी या ना वाकिफि की बुनियाद पर "रसूले करीम सल्लल्लाहु तआला अलेही वसल्लम" की इस मुबारक और प्यारी सुन्नत को छोड़ देते हैं।


               🌟 याद रखिये....! इस्लाम के हर क़ानून में हज़ारों मसलिहतें हैं। मंड्या ममनूअ (मना) होने और वलीमा सुन्नत होने में भी एक बड़ी हिकमत यह है कि अगर निकाह से पहले ही खाना खिला दिया तो हो सकता है कि किसी वजह से निकाह ना होने पाए, और अक्सर ऐसा हो भी जाता है, तो इस सूरत में वह निकाह से पहले के तमाम अख़राजात बे'मक़सद और बोझ बन कर रह जाते हैं।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


⚡बेवाह (जिसका शौहर इंतिक़ाल कर जाये) उनके निकाह को बुरा समझना ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 84)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


⚡बेवाह (जिसका शौहर इंतिक़ाल कर जाये) उनके निकाह को बुरा समझना ?


       🧠 बेवाह औरत के लिए इस्लाम में निकाह जायज़ है। और लोगों की बदनियति, बद निगाही, और फासिद इरादों और बद कारी से बचने की नियत से हो तो बिला शुबहा बाइसे अजरो सवाब भी है, और निकाह करने पर बिना वजह किसी औरत पर लाअन और ताअन करना, उसको बुरा भला कहना या बेवाह औरत को मनहूस ख्याल करना सब गुनाह है।

🌈 दरअसल इस सिलसिले में दो किस्म के लोग पाए जाते हैं। एक तो वह जो बेवाह औरतों के निकाह को फ़र्ज़'ए क़तई (सख़्त ज़रूरी) समझते हैं और जबरन उनके निकाह कराते हैं और ना करने को हराम ख़्याल करते हैं, यह वह लोग हैं जो गुमराह और बद'दीन हो चुके हैं। दूसरे वो लोग हैं जो उस निकाह को बुरा जानते हैं और निकाह करने वाली को लानत और ताअने करते हैं, यह लोग भी सख्त गलती पर हैं।


          🔴 आजकल के माहौल में बदकारों, ज़िनाकारों, अय्याशो, होटलों क्लब घरों, रंडीखानो में अय्याशी और ज़िनाकारी करने वाले मर्दों और औरतों की कसरत के बावजूद उन्हें कोई कुछ नहीं कहता, बल्कि वह नेता, काइद और बड़े आदमी कहलाए जा रहे हैं, और कोई बेवाह औरत निकाह करे या अधेड़ उम्र का मर्द या कोई मर्द एक से ज्यादा निकाह करे तो उसको लोग बुरा जानते हैं, और मलामत करते हैं, यह सब जिहालत और इस्लाम से दूरी के नताइज है। निकाह'ए शरइ (यानि वो निकाह जो शरीअत मै जाइज़ है) जितने ज़्यादा हो उतना बेहतर, क्योंकि निकाह बदकारी को मिटाता है, ज़िनाकारी और ज़िनाकारों के रास्ते बंद करता है। आजकल लेने देने लंबी-लंबी बारातो, जहेज़ की ज्यादती और रुसूम ओ रिवाज की कसरत से निकाह, शादियां मुश्किल हो गई है, इसलिए बदकारी और ज़िनाकारी बढ़ रही है।


⚠ नोट:-

🌹 निकाह को आसान करो ताकि बदकारी मिट जाए। जहेज़ लेना और देना बंद करो।

Next:-

👇आने वाला पार्ट


✨ क़ुतुब सितारे की तरफ़ पैर करके न सोने का मसअला ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 84,85)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


✨ क़ुतुब सितारे की तरफ़ पैर करके न सोने का मसअला ?


       🧠 यह मसअला अवाम में काफी मशहूर हो गया है, और हिन्दोस्तान में काफी लोग यह ख़्याल करते हैं कि उत्तर की सिम्त पैर फैलाना मना है, क्योंकि उधर कुतुब (एक सितारा) है, यहां तक कि अगर कोई शिमाल (यानि उत्तर की जानिब) पैर करके लेटे या सोए तो उसको निहायत बुरा और मज़मूम जानते हैं, और मकानों में चारपाईया डालने में इस बात का खास ख़्याल रखते हैं कि सराहना या तो पश्चिम की तरफ़ हो या फिर उत्तर की तरफ़। शरीयत के एतबार से किब्ले की जानिब पांव फैलाना तो यक़ीनन बेअदबी और मैहरूमी है, इसके अलावा बाकी सिमतें (पूरब, उत्तर, दक्षिण) इस्लाम में बराबर है किसी को किसी पर कोई बरतरी और फज़ीलत नहीं।

               

        🏁 "आला हज़रत मौलाना शाह अहमद रज़ा खान साहब रहमतुल्लाही तआला अलेही" इरशाद फरमाते हैं, यह मसअला जुहला में बहुत मशहूर है, "कुतुब" अवाम में एक सितारे का नाम है, तो तारे तो चारों तरफ़ है किसी तरफ़ पैर ना करें।

         (📖फ़तावा रिज़विया, जिल्द 10, किस्त 2, मतबूआ बीसलपुर, सफ़्हा 158, अल'मल्फ़ूज़, जिल्द 2, सफ़्हा 57)



   🌈 यानी अगर कुतुब सितारे की वजह से उत्तर की तरफ़ पैर करके सोना मना हो जाए तो सितारे चारों तरफ़ है किसी जानिब पैर फैलाना जायज़ नहीं होगा। आजकल अगर लोग इस रिवाज को मिटाने और गलतफ़हमी को दूर करने के लिए चारपाईयों की पाएँती जानिबे उत्तर रखें तो वह अजर के मुस्तहक़ होंगे, और उन्हें एक ग़लत रिवाज को मिटाने का सवाब मिलेगा।

   🌟 कुछ लोग कहते हैं कि मय्यत को क़ब्र में लिटाते वक्त उसका सर कुतुब यानी उत्तर की जानिब क्यों किया जाता है ? तो बात यह है कि मय्यत का सर उत्तर की तरफ़ करने या क़ब्र में उसे दाहिने करवट लिटाने का मामूल इसलिए है ताकि उसका चेहरा किब्ले की तरफ़ हो जाए, और सोने या लेटने में किब्ले की तरफ मुंह रखने का कोई हुक्म नहीं, और सोने और लेटने वाला एक करवट पर रह भी नहीं सकता, लिहाज़ा उसका चेहरा किब्ले की तरफ़ नहीं रह पाता वह करवटें बदलता है, मुर्दे में यह सब नहीं है, और सोते वक्त भी अगर कोई किब्ले की तरफ़ चेहरा कर ले तो अच्छी नियत की वजह से यह अमल भी अच्छा है लेकिन शरअन ज़रूरी नहीं। और जो लोग उत्तर की तरफ़ पैर करके सोने को मना करते हैं उनका मक़सद तो क़ुतुब (सितारे) की ताज़ीम करना होता है ना के चेहरे को किब्ले की तरफ़ करना,


⚠ नोट:- 👇

🍃 क़ुतुब सितारे की ताज़ीम का हुक्म मज़हब'ए इस्लाम में कहीं आया हो तो हमें भी कोई साहिब बताएं और लिखकर भेजें।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


💫 मुरीद होना कितना ज़रूरी है ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 85,86,87)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💫 मुरीद होना कितना ज़रूरी है ?


      🧠 आजकल जो बैअत राइज है उसे बैअत'ए तबर्रुक कहते हैं, जो न फ़र्ज़ है... ना वाजि़ब... और ना ऐसा कोई हुक्मे शरइ कि जिसको ना करने पर गुनाह या आखिरत में मुआख़िज़ा हो।


  💫 हां अगर कोई मुत्तसिलुस् सिलसिला जामेअ शराइत पीर मिल जाए तो उसके हाथ में हाथ देकर उसका मुरीद होना यक़ीनन एक अमरे मुस्तहसन (अच्छा काम) और बाइसे खैरो बरकत और बेशुमार दीनी और दुनियावि फवाइद का हामिल है। लेकिन उसके बावजूद अगर कोई शख्स अक़ाइद दुरुस्त रखता हो, बुज़ुरगाने दीन और ओलामए किराम से मोहब्बत रखता हो, और किसी ख़ास पीर का मुरीद ना हो तो उसके लिए यह अक़ाइद और ईमान की दुरुस्तगी औलियाए किराम और ओलामए ज़विल एहतिराम से मोहब्बत ही काफ़ी है। और किसी ख़ास पीर का मुरीद ना होकर हरगिज़ वह कोई शरइ मुजरिम या गुनहगार नहीं है, मगर आजकल गांव देहातों में कुछ जाहिल बेशरा पीर यह प्रोपोगंडा करते हैं कि जो मुरीद ना होगा उसे जन्नत नहीं मिलेगी यहां तक के बाअज़ ना ख्वांदा पेशावर मुक़र्रिर जिनको तक़रीर करने की फ़ुर्सत है मगर किताबे देखने का वक्त उनके पास नहीं, जलसों में जाहिल पीरों को खुश करने के लिए यह तक कह देते हैं कि जिसका कोई पीर नहीं उसका पीर शैतान है, और बाअज़ ना ख्वान्दे इसको हुज़ूर सैयद ए आलम सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम का फ़रमान बताते हैं, और उससे आजकल की पीरी मुरीदी मुराद लेते हैं। पहली बात तो यह कि ऐसी कोई हदीस नहीं.... हां बाअज़ बुज़ुर्गों से ज़रूर मनकूल है कि जिसका कोई शैख़ नहीं उसका  शैख़ शैतान है। तो इस शैख़ से मुराद मुर्शिद'ए आम है ना कि मुर्शिद ए ख़ास, और मुर्शिद'ए कलामुल्लाह और कलामे आइम्मा'ए शरीयत ओ तरीक़त और कलामे आइम्मा'ए ज़ाहिर ओ बातिन है। इस सिलसिला'ए सहीहा पर के अवाम का हादी कलामे ओलमा, और ओलमा का रहनुमा कलामे आइममा, और आइम्मा का मुर्शिद, कलामे रसूल, और रसूल का पेशवा कलामुल्लाह।


       *🏁 "सय्यदी व सनदी आला हज़रत अलैहिर्रहमतु व रिद्वान" फरमाते हैं। सुन्नी सहीहुल अक़ीदा जो कि आइम्मा'ए हुदा को मानता हो, तक़लीद'ए आइम्मा को ज़रूरी जानता हो, औलिया इकराम का सच्चा मुअ'तकिद हो, तमाम अक़ाइद मै राहे हक़ पर मुस्तक़ीम हो, वह हरगिज़ बे पीर नहीं है। वह चारों मुर्शिदाने पाक, यानि कलामे खुदा और रसूल ओ आइम्मा ओ ओलामए ज़ाहिर ओ बातिन उसके पीर हैं, अगरचे ब'ज़ाहिर किसी ख़ास बंदा ए खुदा के दस्ते मुबारक पर शरफ़'ए बैअत से मुशर्रफ़ ना हुआ हो।

(📖 निक़ाउस्सलाफ़िह् फ़ी एहकामिल बैअति वल ख़िलाफ़ति, सफ़्हा 40)


☝🏻और फ़रमाते हैं रस्तगारी (जहन्नम से निजात और छुटकारे) के लिए नबी को मुर्शिद जानना काफ़ी है।

(📖 फ़तावा अफ़्रीक़ा, सफ़्हा 136)


⚠ नोट:- 👇

ख़ुलासा यह के अगर जामेअ शराइत मुत्तबा'ए शराअ पीर मिले तो मुरीद हो जाए, क्योंकि बाइसे खैरो बरकत और दराजात की बुलंदी का सबब है। और ऐसा लाइक़ और अहल पीर ना मिले तो ख्वाही ना ख्वाही गांव-गांव फ़ेरी करने वाले जाहिल, बेशराअ, ओलमा की बुराई करने वाले नाम नेहाद पीरों के हाथ में हाथ हरगिज़ ना दे, ऐसे लोगों से मुरीद होना ईमान की मौत है।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


💫 क्या पीर के लिए सय्यद होना ज़रूरी है ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 87,88)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💫 क्या पीर के लिए सय्यद होना ज़रूरी है ❓


       🧠 आजकल यह प्रोपेगंडा भी किया जाता है के मुरीद करने का हक़ सिर्फ़ सय्यदों को है.... ऐसा प्रोपेगंडा करने वालों में ज़्यादातर वह लोग हैं जो सय्यद ना होकर खुद को आले रसूल और सय्यद कहलाते हैं। सादाते किराम से मोहब्बत और उनकी  ताअ'ज़ीम अहले इमान की पहचान है। और वो लोग निहायत बदबख्त और बदनसीब हैं जिनको आले रसूल से मोहब्बत ना हो, लेकिन पीर के लिए सय्यद होना ज़रूरी नहीं। कुरान ए करीम में है" तर्जुमा: तुम मै अल्लाह के हुज़ूर (नज़दीक) शराफ़त और इज़्ज़त वाले तक़वा और परहेज़गारी करने वाले हैं।".... हज़रत सय्यदना गौसे समदानी  शैख़ अब्दुल क़ादिर जिलानी खुद नजीबुत तरफैन हसनी हुसैनी सैयद हैं, लेकिन हुज़ूर (ग़ौसे पाक) के पीर'ओ मुर्शिद शैख़ अबू सईद मख़ज़ूमी और उनके शैख़ अबुल हसन हिकारी, और उनके मुर्शिद शेख अबुल'फ़लाह तरतूसी, यूं ही सिलसिला ब'सिलसिला शेख अब्दुल वाहिद तमीमी, शैख़ अबू बकर शिब्ली, शैख़ जुनैद'ए बगदादी, शैख़ मारूफ़ करखी (रदियल्लाहु अन्हुम) मैं से कोई भी सय्यद और आले रसूल नहीं।


👑    "सुल्तान'उल हिंद ख्वाजा मोइनुद्दीन अलैहिर रहमह" के पीर ओ मुर्शिद सय्यदना ख्वाजा उस्मान हारूनी भी सय्यद नहीं थे, फिर भी यह कहना कि पीर के लिए सय्यद होना ज़रूरी है तो यह बहुत बड़ी जहालत और हिमाक़त है।


   🏁 "आला हज़रत फरमाते हैं पीर के लिए सय्यद होने की शर्त ठहराना तमाम सलासिल को बातिल करना है, सिलसिला ए आलिया क़ादरिया में सय्यदना इमाम अली रज़ा और हुज़ूर गौसे आज़म के दरमियान जितने हज़रात हैं सादात'ए किराम मै से नहीं,और सिलसिला'ए आलिया चिश्तिया मै तो सय्यदना मौला अली के बाद ही इमामे हसन बसरी हैं, जो ना सय्यद हैं ना क़ुरैशी और ना वो अरबी, और सिलसिला'ए आलिया नक़्शबन्दिया का ख़ास आगाज़ ही, सय्यदना सिद्दीक़'ए अकबर रदियल्लाहु अन्हु से है।

(📖 फतावा रिज़विया, जिल्द 9, सफ़्हा 114, मतबूआ बीसलपुर)


☀ "और हुज़ूरﷺ के सहाबा जिनकी तादाद एक लाख से भी ज़्यादा है, उनमें 2, 3, को छोड़कर कोई सय्यद और आले रसूल नहीं, लेकिन उनके मरतबे को क़यामत तक कोई नहीं पहुंच सकता।


Next:-

👇आने वाला पार्ट


👇काफ़िरों को मुरीद करना कैसा ?🎤


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 89,90)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🖤 काफ़िरों को मुरीद करना कैसा ?


       🧠 कुछ जाहिल नाम निहाद पीर काफ़िरों को मुरीद कर लेते हैं, जबकि काफ़िरों को जब तक वह कुफ्र और उसके लवाज़िमात से तौबा करके और कलमा पढ़ कर मुसलमान ना बने उनको मुरीद करना उनके लिए मुरीद का लफ़्ज़ बोलना भी जिहालत है...। जो महादेव की पूजा करे, रात दिन बुतों के सामने माथा और नाक रगड़े और मुरीद आप का कहलाए ? ताअज्जुब की बात यह है। जो खुदा और खुदा के रसूल का नहीं हुआ वह आपका कैसे हो गया ? सही बात यह है कि वह आपका मुरीद ना हुआ बल्कि उसकी मालदारी देखकर आप उसके मुरीद हो गए। "सय्यदी आला हज़रत" फरमाते हैं.... कोई काफ़िर चाहे मुस्लिम हो या मुवहहिद, हरगिज़ ना दाखिले सिलसिला हो सकता है, और ना बगैर इस्लाम उसकी बैअत मुअतबर, ना क़बल'ए इस्लाम उसकी बैअत मोअतबर, अगरचे बाद को मुसलमान हो जाए। क्योंकि बैअत हो या कोई और अमल सबके लिए पहली शर्त इस्लाम है।

(📖फ़तावा रिज़विया, जिल्द 9, सफ़्हा 157)



      🖤 काफ़िरों को मुरीद करने वाले कुछ पीर ये भी कहते हैं कि हम उन्हें इसलिए मुरीद करते हैं ताकि वह हमारी मोहब्बत में मुसलमान हो जाऐं... ठीक है... अगर आपकी यह नियत है तो उसके साथ अच्छे अख़लाक़ और किरदार के साथ पेश आइये, लेकिन जब तक मुसलमान ना हो उसे मुरीद ना कहिए और ज़रा यह भी तो बताइए कि अब तक आपने मुरीद करके कितने काफ़िर मुसलमान बनाए हैं ? आज तो वह ज़माना है गैर मुस्लिमों से गहरी दोस्ती और यारी रखने वाले मुसलमान ही काफ़िर या उनकी तरह हो रहे हैं। और मिसाल उन बुजुर्गों की पेश करते हैं जिन्होंने एक-एक सफ़र में 90-90 हज़ार गैर मुस्लिमों को कलमा पढ़ाया।


⚠ ख़्याल रहे कि तुम में और उन में बड़ा फ़र्क़ है, वह काफ़िरों को मुसलमान करते थे और तुम ताअल्लुक़ात रखकर खुद उनकी तरह हुए जा रहे हो।


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


❤ अगर जामेअ शराइत (शरीअत पर अम्ल करने वाला) पीर न मिले तो क्या करे ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 90,91)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


❤ अगर जामेअ शराइत (शरीअत पर अम्ल करने वाला) पीर न मिले तो क्या करे ?


       🧠 ख़ुद सही अक़ाइद पर क़ाइम रहे, एहकामे शरीयत पर अमल करे और तमाम औलियाए किराम और ओलमा'ए ज़विल एहतिराम से मोहब्बत करे, किसी ने हुज़ूर पुर नूर सय्यदुना गौसे आज़म रजि अल्लाह तआला अन्हु से अर्ज़ की.... अगर कोई शख्स हुज़ूर का नाम लेवा हो (यानि ग़ौसे पाक का नाम लेवा हो), और उसने ना हुज़ुर (ग़ौसे आज़म) के दस्ते मुबारक पर बैअत की हो, ना हुज़ूर (ग़ौसे आज़म) का खिरक़ा पहना हो, तो क्या वह हुज़ूर (ग़ौसे आज़म) के मुरीदों में है ? तो (ग़ौसे पाक ने) फ़रमाया जो अपने आप को मेरी तरफ़ मंसूब करे, और अपना नाम मेरे ग़ुलामों मै शामिल करे, तो अल्लाह उसे क़ुबूल फरमाएगा, और वह मेरे मुरीदों के ज़िमरे (फेहरिस्त) मै है।

(📖बा'हवाला, फ़तावा अफ्रीक़ा, सफ़्हा 140)


    ❤ अलावा इसके सय्यिदुना शैख़ अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी अलैहिर् रहमा ने फ़रमाया, कि जिसको पीरे कामिल जामेअ शराइत ना मिले वो हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पर कसरत से दुरुद शरीफ़ पढ़े।


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


💗 पीर से औरतों का पर्दा करना ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 91)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 8️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🧕🏻पीर से औरतों का पर्दा करना ?


       🧠 यह बात काफ़ी मशहूर है कि पीर से पर्दा नहीं है.... हालांकि असलियत यह है कि परदे के मामले में पीरों या आलिमों या इमामों का अलहदा (अलग) से कोई हुक्म नहीं,,,। "सय्यिदी आला हज़रत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु" फरमाते हैं... पर्दे के मामले में पीर और ग़ैर पीर हर अजनबी का हुक्म एक जैसा है। और जवान औरत को चेहरा खोल कर भी सामने आना मना है, और बुड़िया के लिए जिससे एहतिमाले फितना ना हो मुज़ाइक़ा (कोई हर्ज) नहीं।


(📖फ़तावा रिज़विया, जिल्द 10, सफ़्हा 102,)



Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


💵 मालदार होने के लिए मुरीद होना ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 91)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💵 मालदार होने के लिए मुरीद होना ?


       🧠 आजकल ज़्यादातर लोग इसलिए मुरीद होते हैं कि हम मालदार हो जाएंगे या दुनियावि नुक़सानात से महफूज़ रहेंगे, कितने लोग यह कहते सुने जाते हैं कि हम फलां पीर साहब से मुरीद होकर खुशहाल और मालदार हो गए। अफ़सोस का मक़ाम है ....  क्योंकि जो पीरी मुरीदी कभी रुश्दो हिदायत, ईमान की हिफ़ाज़त और दुख़ूले जन्नत, हुसूले शफ़ाअत का ज़रिया ख़्याल की जाती थी आज वह हुसूल'ए दौलत, और इमारत या सिर्फ नक्शो ताअवीज़, पढ़ना और फूंकना बनकर रह गई, अब शायद ही कोई खुशनसीब होगा जो अहले इल्म'ओ फ़ज़्ल ओलमा, सुलहा या मज़ारते मुक़द्दसा पर इस नियत से हाज़िरी देता हो कि उनसे गुनाहों की मग़फिरत और ख़ात्मा अलल ईमान की दुआ कराएंगे।

       🕋 इस्लाम में दुनिया की जिंदगी को महज़ एक खेल तमाशा कहा गया और आखिरत को बाक़ी रहने वाला। लेकिन जिसका पता नहीं कब साथ छोड़ जाए उसको संभालने और बनाने में लग गए, और जहां सब दिन रहना है उसको भुला बैठे। "हदीसे पाक में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया,,, जब तुम किसी बंदे को देखो कि अल्लाह उसको गुनाहों के बावजूद नया (अच्छे से अच्छा) दे रहा है जो कभी वह बंदा चाहता है, तो यह ढील है" यानी अगर कोई बंदा गुनाह करता है मगर हक़ तआला की तरफ़ से बजाए पकड़ के नेअमतें मिल रही हैं, तो यह नेअमतें नहीं_बल्कि अज़ाब है। रात दिन दौलत कमाने में लगे रहने वाले अब मस्जिदों, खानक़ाहों में भी कभी आते हैं तो महज़ दोलते दुनिया और ऐश'ओ आराम की फिकर लेकर,,, किस क़द्र महरूमी है।......ख़ुदा'ए तआला आख़िरत की फ़िक्र करने की तौफ़ीक़ मरहमत फ़रमाए....... *आमीन।


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


🇨🇨 बुज़ुर्गों की तस्वीरें घरों मै रखना ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 92)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨 बुज़ुर्गों की तस्वीरें घरों मै रखना ?


       🧠 आजकल बुज़ुर्गाने दीन की तस्वीरें और उनके फोटो घरों दुकानों में रखने का भी रिवाज हो गया है, यहां तक के बाअज़ लोग पीरों वलियों की तस्वीरें फ्रेम में लगाकर घरों में सजा लेते हैं और उन पर मालाएं डालते अगरबत्तीयां सुलगाते हैं। और कुछ जाहिल नाख्वानदे उनके सामने मुशरिकों, काफिरों, और बुत परस्तों की तरह हाथ बांधकर खड़े हो जाते हैं,, उन्हें चूमते और सजदे करते हैं। यह बातें सख्त तरीन हराम यहां तक के कुफ्र अंजाम हैं, बल्कि यह हाथ बांधकर तस्वीर के सामने खड़ा होना उन पर फूल और मालाएं डालना यह काफ़िरों का काम है।

    🏁 "सय्यदि आला हज़रत मौलाना शाह अहमद रज़ा ख़ान साहब अलैहिर् रहमा इरशाद फरमाते हैं" अल्लाह अज़्ज़ा वजल इब्लीस के मक्र से पनाह दे, दुनिया मै बुत परस्ती की इब्तिदा यूं ही हुई,, कि अच्छे और नेक लोगों की मोहब्बत में उनकी तस्वीरें बनाकर घरों और मस्जिदों में तबर्रुकन रख लेते फिर धीरे-धीरे वही माअबूद हो गये।

 (📖फ़तावा रिज़विया, जिल्द 10, निस्फ़ आख़िर, मतबूआ बीसलपुर, सफ़्हा 47)


        📕 "बुख़ारी शरीफ़ और मुस्लिम शरीफ़ की हदीस मै है_ वुद, सुवाअ, यगूस, यऊक़, और नसर जो मुशरिकीन के माअबूद और उनके बुत थे जिनकी वह परस्तिश करते थे जिनका जिक्र क़ुरआन'ए'करीम मै भी आया है_ यह सब क़ोम'ए नूह के नेक लोग थे, इनके विसाल हो जाने के बाअद क़ोम ने इनके मुजस्सिमे बनाकर अपनी नशिस्तगाहों में रख लिए, उस वक्त सिर्फ मोहब्बत में ऐसा किया गया था_ लेकिन बाअद के लोगों ने उनकी इबादत और परस्तिश शुरू कर दी। इस किस्म की अहादीस कसरत से कुतुब'ए अहादीस में आई हैं।


      🔷 "एक हदीस-ए-पाक में है के रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलेहि वसल्लम ने फरमाया" क़यामत क़ाइम ना होगी जब तक मेरी उम्मत के कुछ क़बीले मुशरिकों से ना मिल जाएं, यहां तक कि मेरी उम्मत के कुछ गिरोह बुत परस्ती करने लगेंगे।

(📖मिश्कात, किताब'उल फ़ितन, सफ़्हा 465,)


      📚 ''इस हदीस की शरह करते हुए मौलाना मुफ्ती अहमद यार ख़ान साहब नईमी मुरादाबादी फ़रमाते हैं_ हमने देखा बाअज़ लोग अपने पीरों के फ़ोटो को सजदे करते हैं, उन्हें चूमते, और उन्हें सजाकर रखते हैं, यह है इस हदीस का ज़ुहूर, और बाअज़ कलमा गो_ ताज़ियों को सजदा करते हैं, क़ब्रों को तो बहुत लोग सजदे करते हैं, बाअज़ लोग जिंदा पीरों को सजदे करते हैं, यह है बुत परस्ती। अल्लाह हमें अपनी पनाह मै रखे।

(📖मिरअतुल मनाजेह, जिल्द 7, सफ़्हा 219)


⚠ "खुलासा यह कि तस्वीर फ़ोटो इस्लाम में हराम है, और पीरों, वलियों, अल्लाह वालों के फोटो और उनकी तस्वीरें और ज़्यादा हराम हैं। काफ़िरों इस्लाम के दुश्मन ताकतों की साज़िशें चल रही हैं, वह चाहते हैं कि तुमको अपनी तरह बनाएं और तुमसे कुफ्र कराएं, खुद भी जहन्नम में जाऐं और तुमको भी जहन्नम मै ले जाऐं।


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


🇨🇨 शरीअत की मुख़ालिफ़त करने वाले पीर ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 93,94)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨 शरीअत की मुख़ालिफ़त करने वाले पीर ?1st


       🧠 आजकल ऐसे पीरों की ताअदाद भी काफी है जो नमाज़ रोज़ा और दीगर एहकामे शराअ पर ना खुद अमल करते हैं और ना अपने मुरीदों से अमल कराते हैं, बल्कि इस्लाम और क़ुरआन की बातों को यह कह कर टाल देते हैं कि यह मौलवी लाइन की बातें हैं_हम तो फ़क़ीर लाइन के हैं, यह खुलेआम शरीअत ए इस्लामिया का इनकार और नमाज़ रोज़े की मुख़ालिफ़त करने वाले पीर तो पीर मुसलमान तक नहीं है। उनका मुरीद होना ऐसा ही है जैसे किसी गैर मुस्लिम को अपना पेशवा बनाना क्योंकि शरीअत ए इस्लामिया का इनकार इस्लाम ही का इंकार है, और यह कुफ्र है।


     🌴 "सय्यिदुना आला हज़रत मौलाना शाह अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी इरशाद फरमाते हैं"_सराहतन शरीअते मुतहहिरा को मुअ'तल और मोहमल लग्व ओ बातिल कर देना यह सरीह कुफ़्र ओ इर्तिदाद और मोअजिबे लाअनत वल'इबाद है।

(📖मक़ाल इर्फ़इ, सफ़्हा 9)



     🌺 "हक़ तो यह है कि अल्लाह का वली और अल्लाह वाला वही है जो खुद भी अल्लाह के रास्ते पर चले और दूसरों को भी चलाए, और अल्लाह का रास्ता वही है जो "रसूले अकरम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो तआला अलेही वसल्लम ने बताया और खुद उस पर चल कर दिखाया" उस (रास्ते) का मुख़ालिफ़ हुज़ूर का मुख़ालिफ़ है ,और हुज़ूर का मुख़ालिफ़ अल्लाह का मुख़ालिफ़ है, और शैतान ए लईन का मुरीद है, क़ुरआने करीम में अल्लाह तआला का फ़रमान हैतर्जुमा:- महबूब तुम फ़रमाओ के अगर तुम अल्लाह से मोहब्बत करते हो तो मेरा कहना मानो तुम अल्लाह के प्यारे हो जाओगे और वह तुम्हारे गुनाहों को माफ फरमा देगा और अल्लाह बहुत बख़्शने वाला मेहरबान है।

(📖पारा 3 रुकू 12)



     🍁 "इस आयते करीमा से खूब मालूम हुआ कि अल्लाह तआला तक पहुंचने के सारे रास्ते हुज़ूर ही के क़दमों से गुज़रते हैं, वह आलिमों, मौलवियों के हो, या फ़कीरों दरवेशों के, हुज़ूर का रास्ता छोड़कर हरगिज़ कोई ख़ुदा ए तआला तक नहीं पहुंच सकता। और हुज़ूर का रास्ता ही शरीअत ए इस्लामिया है, और तरीक़त भी उसी का एक टुकड़ा है उसको शरीअत से जुदा मानना गुमराही है।


👉 इसी पोस्ट का बाक़ी अगले पार्ट मै


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


🔶 शरीअत की मुख़ालिफ़त करने वाले पीर 2nd पार्ट ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 95,96)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨 शरीअत की मुख़ालिफ़त करने वाले पीर ?2nd Part


       🧠 बाअज़ गुमराह पीरों के गुमराह मुरीदों को यह कहते भी सुना गया है कि हमने अपने पीर का दीदार कर लिया यही हमारी नमाज़ और इबादत है...! उनका यह क़ोल (कहना) सख्त बद'दीनी है। नमाज़ इस्लाम में इतनी अहम है इसको अगर मुरीद छोड़ेंगे तो वह क़ब्र व हश्र  मै अज़ाबे इलाही का मज़ा चखेंगे, और पीर छोड़ेंगे तो वह भी आख़िरत मै खूब ठोके जाएंगे,,,,और वो पीर ही नहीं जो न खुद अल्लाह की इबादत करे और न दूसरों को करने दे।

        🍁 "नमाज़ का तो इस्लाम मै इतना बुलंद मुक़ाम है,,, "हुज़ूर सय्यद ए आलम अहमदे मुज्तबा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम" जब मक्का ए मुअज़्ज़मा तशरीफ़ लाए थे तो आपने अपने और अपने घरवालों के रहने के लिए हुजरे (कमरे) और मकान बाद में तामीर फरमाए थे पहले खुदा ए तआला की इबादत यानी नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद शरीफ की तामीर फ़रमार्ई थी जो आज भी है,, उसका एक-एक हिस्सा अहले ईमान के लिए दिलो जान से बढ़कर है। हुज़ूर फरमाते हैं कि नमाज़ मेरी आंखों की ठंडक है, और नमाज़ जन्नत की कुंजी है। पहले ज़माने के बुज़ुर्गने दीन, मुर्शिदाने किराम, सूफी और दुर्वेश सब के सब नमाज़ी दीनदार और निहायत दर्जा हुज़ूर की शरीअत पर चलने वाले परहेज़गार होते थे,, यह नहीं कहते थे कि हम फ़क़ीरी लाइन के हैं, हम पर नमाज़ मुआफ़ है, बल्कि वह औरों से ज़्यादा सारी-सारी रात नमाज़ पढ़ते थे। आजकल के कुछ जाहिल नाम नेहाद सूफियों और पीरों ने सोचा कि पीरी भी चलती रहे और आज़ादी और आराम में भी कोई कमी ना आए, इसलिए वह एहकामे शराअ नमाज़ और रोज़े बगैरह की मुख़ालिफ़त करते हैं।


👉इसी पोस्ट का बाक़ी अगले पार्ट मै


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


🔶 शरीअत की मुख़ालिफ़त करने वाले पीर 3rd पार्ट ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 96,97)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨 शरीअत की मुख़ालिफ़त करने वाले पीर ?3rd Part


       🧠 ग़ौर करने की बात है कि पहले के बुज़ुर्गों के आस्ताने और मज़ारात जहां मिलेंगे वहां मस्जिद भी ज़रूर मिलेंगी..... अजमेर शरीफ में ख्वाजा गरीब नवाज़ मोइनुद्दीन चिश्ती का आस्ताना, दिल्ली में हज़रत ख्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख्तियार काकी, हज़रत निज़ामुद्दीन महबूब ए इलाही, हज़रत नसीरुद्दीन चिराग देहलवी, हज़रत शेख अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी बगैरहुम की खांनक़ाहें....! लाहौर में हज़रत शेख दातागंज बख्श का आस्ताना, नागौर शरीफ़ में हज़रत सूफी हमीदुद्दीन नागोरी, किछौछा में हज़रत शेख मख़दूम अशरफ़ सिम्नानी, पाकपटन में हज़रत फरीदुद्दीन गंज शकर, कलियर शरीफ में हज़रत शेख अलाउद्दीन साबिर कलियरी वगैरहुम के, इन सब आस्तानों पर आपको जहां मज़ारात मिलेंगे वहां मस्जिदे भी उनसे मुत्तसिल (मिली हुई) नज़र आएंगी। इसमें राज़ यह है कि यह हज़रात जहां क़याम फरमाते ठहरते और बिस्तर लगाते वहां खुदा का घर यानी मस्जिद बनाकर अज़ान और नमाज़ से उसको आबाद फरमाते, और जब उन्होंने ख़ुदा ए तआला की इबादत कर के उसके घरों को आबाद किया तो ख़ुदा ए तआला ने उनके दर आबाद कर दिए,


      🔶 और इस्लाम इन्हीं दो चीज़ों का नाम है कि खुदा ए तआला की इबादत और इताअत भी होती रहे और उसके महबूब बंदों खासाने ए ख़ुदा हज़रात ए अंबिया और ओलिया की ताअज़ीम और उनसे मोहब्बत भी होती रहे। जो ख़ुदा ए तआला के अलावा किसी और की इबादत, पूजा और प्रस्तिष करे वह मुसलमान नहीं, और जो ख़ुदा वालों से मोहब्बत का मुतलक़न (बिल्कुल ही) इंकार करे उनकी बारगाहों में बेअदबी से पेश आए, गुस्ताखी करें वह भी इस्लाम से ख़ारिज है।


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


👉 मामूली इख़्तिलाफ़ात को बाइसे नज़ाअ बनाना ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 97,98)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨मामूली इख़्तिलाफ़ात को बाइसे नज़ाअ बनाना 1st Part


       🧠 बाअज़ फुरूई और नव'पैद (नए) मसाइल जिनका जिक्र सराहतन खुले अल्फ़ाज़ मै क़ुरआन और हदीस और फ़िक़्ह की मुस्तनद किताबों मै नहीं मिलता,,,,, उनके मुताअल्लिक़ कभी-कभी आलिमों की राय अलग-अलग हो जाती है, खासकर आज साइंस के दौर में नव'इजदात की बुनियाद पर ऐसे मसाइल कसरत से सामने आ रहे हैं तो कुछ लोग ओलाम के दरमियान इख़्तिलाफ को लड़ाई झगड़े, गाली गलौज, लाअन ओ ताअन का सबब बना लेते हैं, और आपस मै गिरोह बंदी कर लेते हैं.... यह उनकी सख़्त ग़लतफहमी है। फुरुइ मसाइल मै इख़्तिलाफ़ की बुनियाद पर पार्टी बंदी कभी नहीं करना चाहिए, ना एक दूसरे को बुरा भला कहना चाहिए, बल्कि जो बात आपके नज़दीक सही और दुरुस्त है वह दूसरों को भी समझा देना काफी है, अगर मान जाए तो ठीक वरना उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए, और उन्हें अपना मुसलमान भाई ही ख़्याल करना चाहिए.... मगर आजकल छोटी-छोटी बातों पर आपस में लड़ाई झगड़े दंगे करना और पार्टी बनाने की मुसलमानों में बीमारी पैदा हो गई, यह इसलिए भी हुआ कि आजकल लोग नमाज़ और इबादत और क़ुरआन की तिलावत और दीनी किताबों के मुताअले में मशगूल नहीं रहते, ख़ाली रहते हैं, इसलिए उन्हें ख़ूराफात सूझती है और बिना वजह की बातों में लड़ते और झगड़ते हैं। कुछ लोग इन फुरुइ इख़्तिलाफ़ात को ओलामए दीन की शान में गुस्ताखी करने और उन्हें बुरा भला कहने का बहाना बना लेते हैं, ऐसे लोग गुमराह और बद्दीन हैं, उनसे दूरी बहुत ज़रूरी है और उनकी  सोहबत (साथ) दीन की मौत है, क्योंकि ओलामए दीन की शान में गुस्ताखी और मौलवियों को बुरा भला कहना बद'मज़हबी है, गुमराहों की गुमराही की शुरुआत यहीं से होती है।

           💗 "अहले इल्मो फ़ज़्ल असहाब दयानत और अमानत मै अगर किसी बात पर इख़्तिलाफ हो जाए तो आम लोगों को चाहिए कि ख़ुदा ए तआला की तौफीक़ से जिधर झुकाओ होजाए उसकी बात पर अमल करना चाहिए, लेकिन दूसरे की शान मै भी बेअदबी ना करें उसका भी एहतिराम करते रहना चाहिए, और ख़ुदा ए तआला से रो-रो कर तौफीक़ ए ख़ैर और सीधे रास्ते पर क़ायम रहने की दुआ करते रहना चाहिए।


🔷 "हदीस मै है कि रसूले पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब जंगे ख़न्दक़ से वापस मदीना तशरीफ लाए और फ़ौरन यहूदियों के क़बीले बनू क़ुरेज़ाह पर हमले का इरादा फ़रमाया...  सहाबा को हुक्म दिया कि बनु क़ुरेज़ाह मै चलकर नमाज़े असर पढ़ी जाए, लेकिन रास्ते ही में नमाज़ का वक्त हो गया तो कुछ सहाबा ने नमाज़ का वक्त जाने के ख़ौफ से रास्ते में ही नमाज़ अदा फरमा ली और उन्होंने ख़्याल किया कि हुज़ूर का मक़सद यह नहीं था कि चाहे वक्त निकल जाए लेकिन नमाज़ बनू क़ुरेज़ह ही में पढ़ी जाए, और कुछ लोगों ने वक्त निकल जाने की परवाह ना की और नमाज़े असर बनू क़ुरेज़ाह ही में जाकर पड़ी, हुज़ुर के सामने जब यह ज़िक्र आया तो दोनों क़ीस्म के लोगों को सही और दुरुस्त बताया।

(📖सही बुख़ारी, जिल्द 1, बाब सलातुत'तालिबि बल मतलूब सफ़्हा 129)


        🔶 "एक और हदीस मै है कि दो सहाबा सफ़र पर गए रास्ते में पानी ना मिलने की वजह से दोनों ने पाक मिट्टी से तयम्मुम करके नमाज़ पढ़ी फिर आगे बढ़े तो पानी मिल गया और नमाज़ का वक्त बाक़ी था, एक साहिब ने वुज़ू करके नमाज़ दोहराली... लेकिन दूसरे ने नहीं दोहराई, वापसी में हुज़ूर की ख़िदमत मै हाज़िर होकर किस्सा बयान किया तो हुज़ूर ने नमाज़ न दोहराने वाले साहिब से फ़रमाया तुमने सुन्नत के मुताबिक़ काम किया, और दोहराने वाले से फ़रमाया तुम्हारे लिए दोगुना (डबल) सवाब है।

(📖निसाई, अबू दाऊद, बा'हवाला ए मिश्कात, बाब'उत् तयम्मुम, सफ़्हा 55)


      🇨🇨 "यानी हुज़ूर ने दोनों को हक़ और दुरुस्त फ़रमाया,, इन हदीसों से पता चलता है कि फुरुइ इख़्तिलाफ़ात के बाद भी दो गिरोह हक़ पर हो सकते हैं जबकि दोनों की नियत सही हो, इन हदीसों से तक़लीद का इनकार करने वाली नाम निहाद "जमाअते अहले हदीस" को सबक़ लेना चाहिए कि जो यह कहते हैं कि इख़्तिलाफ़ के बावजूद चारों मसलक "हनफी, शाफ़ई, मालिकी, हंबली" कैसे हक़ पर हो गए ?

    🌺 हज़रत मौला ए कायनात सैयदना व मौलाना अली मुर्तज़ा रदीयल्लाहु तआला अन्हु, और सैयदना अमीर मुआविया रदियल्लाहु तआला अन्हु मै जंग ओ जिदाल के बावजूद दोनों का ही एहतिराम किया जाता है, और दोनों मै किसी को बुरा भला कहना सख़्त गुमराही और जहन्नम का रास्ता है, इसकी मिसाल यूँ समझना चाहिए कि जैसे मां और बाप मै अगर झगड़ा हो जाए तो औलाद अगर मां को मारे पीटे, गालियां दे, तब भी बदनसीब और मेहरूम और अगर बाप के साथ ऐसा बर्ताव करे तब भी। यानी औलाद को इस झगड़े में इजाज़त ना होगी के एक की तरफ़ होकर दूसरे की शान में बेअदबी करे,, बल्कि दोनों का एहतिराम ज़रूरी होगा। या किसी शागिर्द के दो उस्तादों में लड़ाई हो जाए तो शागिर्द केलिए दोनों में से किसी के साथ बदसुलूकी और बदतमीज़ी की इजाज़त ना होगी, मक़सद यह के बड़ों के झगड़े में छोटों को बहुत एहतियात और होशियारी की ज़रूरत है।


🍁 इसी पार्ट का अभी बाक़ी है...


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


👉 मामूली इख़्तिलाफ़ात को बाइसे नज़ाअ बनाना 2nd पार्ट ?  ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.98-101)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨मामूली इख़्तिलाफ़ात को बाइसे नज़ाअ बनाना 2nd Part


       🧠 इस उन्वान के तहत (पहले पार्ट मै) हमने जो कुछ लिखा है उस सब का हासिल यह है कि जब तक कोई शख्स ज़रूरीयाते दीन का मुनकिर और अक़ीदे में ख़राबी की वजह से उस मंज़िल को ना पहुंच जाए कि उसको ख़ारिज ए इस्लाम और काफ़िर कह सकें तब तक उसके साथ नरमी का ही बर्ताव करना चाहिए, और समझाने की कोशिश करते रहना चाहिए और ख़ुदा आए तआला से उसकी हिदायत की दुआ करते रहना चाहिए....। हां वह लोग जो ज़रूरीयाते दीन के मुंकिर हों कुरआन और हदीस से साबित सरीह उमूर के क़ायल ना हों, या अल्लाह तआला और उसके हबीब और दीगर अंबिया ए किराम और औलिया इज़ाम और ओलामए ज़विल एहतराम की शान मै तौहीन और गुस्ताखी करते या गुस्ताखाने रसूल की तहरीकों और जमाअतो से क़सदन जुड़े हुए हों, उनकी मदहो सताइश करते हों वह यक़ीनन इस लायक़ नहीं, बल्कि उनसे जितनी नफ़रत की जाए कम है।


         ☝🏻क्योंकि अल्लाह और अल्लाह वालों की शान में गुस्ताखी और बेअदबी इस्लाम में सबसे बड़ा जुर्म है, और ऐसे शख्स की सोहबत ईमान के लिए ज़हरीला नाग है। ओलामए अहले हक़ के दरमियान फुरूई इख़्तिलाफ़ात की सूरत में दोनों जानिब का एहतराम और अदब मलहूज़ रखने का मशवरा जो हमने दिया है यह उन्हीं के लिए है जो वाक़ई आलिम हों फ़क़ीह और मुहद्दिस हों, वरना आजकल के बाअज़ वह ना ख्वान्दे जो दो चार उर्दू की किताबें पढ़कर आलिम बनते या सिर्फ तक़रीरे करके स्टेजों पर अल्लामा कहलाते कुरआन और हदीस में अटकलें लगाते हैं मसाईल में ओलमा से टकराते हैं अपनी दुकान अलग सजाते हैं यह उस में दाखिल नहीं बल्कि यह तो उम्मते मुस्लिमा में रुखनाअंदाज़ी करने वाले और फ़ितना परवर हैं।


        💎 ऐसे ही वह मुंकिरीन जो चारों आइम्मा से अलग राह निकालते और अहले हदीस कहलाते हैं, यह सब वह हैं जिनके बारे में हदीस में आया..... "हुज़ूर ने फ़रमाया कि जब तुम एक की इत्तिबा पर मुत्तफ़िक़ हो जाओ और कोई शख्स तुम्हारी लाठी चीरना चाहे तो उसको क़त्ल कर दो।

(📖मिश्कत, सफ़्हा 320)


      👑 सैयदी आला हज़रत फ़रमाते हैं "जहां इख़्तिलाफ़ाते फ़रइय्या हों, जैसे हनफ़ी और शाफ़ई फ़र्क़ै अहले सुन्नत मै वहां हरगिज़ एक दूसरे को बुरा कहना जायज़ नहीं।

(📖अल'मल्फ़ूज़, हिस्सा 1, सफ़्हा 51)


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


📢 ख़ानक़ाही इख़्तिलाफ़ात और इस सिलसिले मै सही बात क्या है ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.101,102)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📢 ख़ानक़ाही इख़्तिलाफ़ात और इस सिलसिले मै सही बात क्या है ?


       🧠 आजकल खानक़ाही इख़्तिलाफ़ात का भी ज़ोर है, और एक पीर के मुरीद दूसरे के मुरीदों को और एक सिलसिले वाले दूसरे सिलसिले के लोगों को एक आंख नहीं भाते और उन्हें अपना दुश्मन जानते हैं और यह इसलिए कि उन्हें इस्लाम व क़ुरआन व अल्लाह व रसूल से मोहब्बत नहीं वरना यह हर मुसलमान और अल्लाह और रसूल पर ईमान रखने वाले से मोहब्बत करते। आजकल कुछ पीर भी ऐसे हैं कि उन्हें अपने मुरीद ही अच्छे लगते हैं और दूसरों के मुरीदों को देखकर उनका ख़ून खोलता है,..... जबकि पीरी और उस्तादी के आदाब और उसूल से है कि वह अपने शागिर्दों और मुरीदों को जहां अपनी ज़ात से अकीदत और मोहब्बत सिखाऐं वही दूसरे अहले इल्म व फ़ज़ाइल व मसाईल व सुलहा (नेक लोगों) की बेअदबी और गुस्ताख़ी से बचाए, बल्कि मुरीद करने का मक़सद उसे बेअदबी से बचाना है क्योंकि उसमें ईमान की हिफ़ाज़त है और इमान बचाने के लिए ही तो मुरीद किया जाता है और ईमान अदब ही का दूसरा नाम है।


          🌺 जो पीर मुसलमानों से नफ़रत की तालीम दे रहे हैं और कौमे मुस्लिम को टुकड़ों में बांट रहे हैं मुरीदों को मशाइख़ व ओलमा का बेअदब बना रहे हैं वह हरगिज़ पीर नहीं हैं बल्कि वह शैतान का काम कर रहे हैं और इबलीस का लश्कर बढ़ा रहे हैं, अंदरी सिलसिला हक़ और दुरुस्त बात यह है कि जो मुसलमान किसी भी सिलसिला ए सहीहा में मुत्तसिलुस्'सिलसिला मुत्तब'ए शराअ पीर से बैअत है और उसके अक़ाइद दुरुस्त हैं, वो हमारा भाई है और मुरीद ना भी हुआ हो लेकिन अक़ाइद सही रखता हो, अंबिया व औलिया अल्लाह से मोहब्बत करता हो वह भी यक़ीनन मुसलमान है और उसकी निजात के लिए यह काफी है।


        👑 "दरअसल पीरी मुरीदी"..... लड़ाई और झगड़े और गिरोह बंदी का सबब उस वक्त से बनी जब से यह ज़रिया'ए मआश और सिर्फ खाने कमाने और लंबे-लंबे नज़रानों के हासिल करने का धंधा बन कर रह गई है, आज ज्यादातर पीरों को इस बात की फिक्र नहीं के मुरीद नमाज़ पढ़ता है कि नहीं, ज़कात निकालता है कि नहीं, सुन्नी है कि बदअक़ीदा, मुसलमान है कि ग़ैर मुस्लिम, उन्हें तो बस नज़राना चाहिए, जो ज़्यादा लंबी नज़र दे वही मियां के क़रीब है, वरना वह मियां के नज़दीक बदनसीब है।



Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


💗 क्या हर दीवाना मजज़ूब वली है ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.102,103)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💗 क्या हर दीवाना मजज़ूब वली है ?


       🧠 अल्लाह तआला के नेक बन्दों और ओलिया ए किराम में एक ख़ास किस्म मजज़ूबों की भी है यह वह लोग हैं जो खुदा ए तआला की मोहब्बत और उसकी याद में इतने ग़र्क़ हो जाते हैं कि इन्हें अपने तन बदन का होश नहीं रहता और दुनिया वालों को पागल और दीवानों जैसे नज़र आते हैं, लेकिन हर पागल और दीवाने को मजज़ूब नहीं ख्याल करना चाहिए। आजकल आम लोगों में यह मर्ज़ पैदा हो गया है कि जिस पागल को देखते हैं उस पर विलायत और मजज़ुबीयत का हुक्म लगा देते हैं और उसके पीछे घूमने लगते हैं और अगर कोई है भी तो उसको उसके हाल पर छोड़ दीजिए वह जाने और उसका रब।


        ☝🏻बेहतर तरीक़ा यह है कि अगर किसी शख्स के बारे में आपको ऐसा शक हो जाए तो उसकी बुराई भी मत करो और उसके पीछे भी मत घूमो आप तो वह करो जिसका आपको खुदा ए तआला ने हुक्म दिया है, एहकामे शराअ की पाबंदी करो और बुरे कामों से बचो इस्लाम में ऐसा कोई हक़ नहीं है कि दीवानों में तलाश करो कि उनमें कौन मजज़ूब है और कौन नहीं।

     💗 बाअज़ जगह ऐसी सुनी सुनाई बातों पर यक़ीन करके कुछ लोग मजज़ूब क़रार दे देते हैं और फिर लाखों लाख रुपया खर्च करके उनके मरने के बाद मज़ार बना देते हैं और उर्सों के नाम पर मेले ठेले और तमाशे शुरू कर देते हैं और उर्सों के नाम पर यह मेले और तमाशे अब दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं और इस्लाम और इस्लामियात के हक़ में यह अच्छा नहीं हो रहा है।


           🌺 खुलासा यह के अगर कोई मजज़ूब है और वह खुदा ए तआला की याद में बेहोश हुआ है तो उसका सिला और बदला उसको अल्लाह तआला देने वाला है आपके लिए तो दूरी ही बेहतर है और यह जो अहले इल्म'ओ फ़ज़्ल औलिया और ओलमा की सोहबत इख़्तियार करने की फ़ज़ीलतें आई है, यह मजज़ूबों के लिए नहीं, मजज़ूब की सोहबत से कोई फ़ायदा नहीं है। "हुज़ूर मुफ्ती ए आज़म हिंद मौलाना मुस्तफ़ा रज़ा खां अलैहिर् रहमा" फ़रमाते हैं "हर किस और नाकिस को मजज़ूब नहीं समझ लेना चाहिए और जो मजज़ूब हो उससे भी दूर ही रहना चाहिए कि उससे नफा कम और ज़रर ज़ाइद पहुंचने का अंदेशा है।

(📖फ़तावा मुस्तफ़विया, हिस्सा सोम, सफ़्हा 175)


       💎 कुछ दीवाने सतर खोले नंगे पड़े रहते हैं और लोग उनके पास जाकर उनकी ख़िदमत करते हैं यह गुनाह है, क्योंकि वह अगर मजज़ूब भी है तब भी उसकी ऐसी हालत देखना नाजायज़ है, क्योंकि वह मजज़ूब है आप तो होश में हैं, मजज़ूब होने की बिना पर अगरचे उस पर गुनाह नहीं लेकिन आप उसके बदन के वह हिस्से देखेंगे जिनका छुपाना फ़र्ज़ है तो आप ज़रूर गुनहगार होंगे।


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


🐱 बिल्ली रास्ता काट जाये तो क्या होता है ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.103,104,105)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 9️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🐱 बिल्ली रास्ता काट जाये तो क्या होता है ?


       🧠 कुछ जगहों पर देखा गया है कि कोई शख्स गली और रास्ते में जा रहा है और सामने से बिल्ली गुज़र गई जिसे रास्ता काटना कहते हैं तो वह कुछ देर के लिए ठहर जाता है और फिर बाद में चलने लगता है और वह समझता है कि बिल्ली ने रास्ता काट दिया शगुन खराब हो गए अब कोई नुक़सान हो सकता है,, हालांकि यह सब बेकार की बातें हैं और इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं और एक मुसलमान को इस किस्म के ख्यालात कभी नहीं रखना चाहिए और यह नहीं समझना चाहिए कि बिल्ली के रास्ता काटने से कुछ होता है।


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


🗓 कुछ तारीखों को शादी ब्याह के लिए मन्हूस जानना ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.105)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🗓 कुछ तारीखों को शादी ब्याह के लिए मन्हूस जानना ?


       🧠 बाअज़ लोग कुछ तारीखों में शादी ब्याह और खुशी का काम करने को मना करते हैं और खुद भी नहीं करते हैं जैसे 3, 13,18,23, और 28, इन तारीखों को शादी और खुशी के लिए बुरा जाना जाता है हालांकि यह सब बेकार की बातें हैं और काफिरों और गैर मुस्लिमों की वहम परस्तियां है इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं है, निकाह और शादी हर दिन और हर तारीख में जाइज़ है। माहे मोहर्रम में निकाह को बुरा जानना राफ़ज़ियों और शियों का तरीक़ा है जो बाअज़ जगह अहले सुन्नत में भी फैल गया।


⚠ मुसलमानों इस्लाम को अपनाओ और सच्चे पक्के मुसलमान बनो वहम परस्तियाँ छोड़ दो खुदा और रसूल की पैरवी करो, मोहर्रम और सफ़र में निकाह को बुरा मत जानो।


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


👔 टाई बांधना और बच्चों को बंधवाना ?


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.105)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👔 टाई बांधना और बच्चों को बंधवाना ?


       🧠 टाई बांधना इस्लाम में सख्त गुनाह है यह ईसाईयों का मज़हबी शीआर है उनके अक़ीदे के मुताबिक़ हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को यहूदियों ने फांसी दी थी इसाई उस फांसी के फंदे को गले में आज तक डाले हुए हैं जिसे टाई कहा जाता है,


       📖 लेकिन क़ुरआने करीम में फ़रमाया गया कि हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को ख़ुदा'ए तआला ने ज़िंदा उठा लिया, और काफी हदीसों से यह बात साबित है वह अब भी हयात ए ज़ाहिरी के साथ आसमानों में तशरीफ़ फ़रमा है, क़यामत के क़रीब ज़मीन पर तशरीफ़ लाएंगे और इस्लाम फैलाएंगे। लिहाज़ा इस्लामी नुक्ता ए नज़र से फांसी का वाक़या मनगढ़ंत है और गलत है, और जो यह अक़ीदा रखे कि ईसा अलैहिस्सलाम को फांसी दे दी गई वह मुसलमान नहीं बल्कि काफ़िर है, क्योंकि वह क़ुरआन और हदीस का मुंकिर है।

👔 टाई बांधने वाले मुसलमान यह अक़ीदा तो नहीं रखते लेकिन बहर हाल ईसाइयों का एक मज़हबी अंदाज़ अपनाने की वजह से वह एक बहुत बड़े गुनाह में मुब्तिला हैं, और टाई बांधने को हराम होने में कोई शुब्हा नहीं, मुसलमानों को चाहिए कि वह उससे दूर रहें और ऐसे स्कूलों में जहां टाई बांधना बच्चों के लिए लाज़िम हो अपने बच्चों को ना पढ़ाएं  या टाई का क़ानून वहां से कोशिश करके ख़त्म कराएं।


  ⚠     मुसलमानों अब तो आंखें खोलो तुमने काफ़िरों की नक़ल की उनके अंदाज अपनाए लेकिन मौजूदा दौर के हालात से यह ज़ाहिर हो गया है कि वह फिर भी तुम्हारे दुश्मन ही रहे और तुम्हें मिटाने और क़त्ल करने में कोई कमी नहीं कर रहे हैं, अब खुदारा अपने इस्लामी तरीके अपनाओ सच्चे पक्के मुसलमान बनो फिर देखना ख़ुदा और रसूल भी राज़ी होंगे और दुनिया में भी इज़्ज़त और अज़मत नसीब होगी, इस मौके पर यह भी जान लें कि जो लोग छोटे बच्चों में लड़कों को लड़कियों की तरह, और लड़कियों को लड़कों की तरह लिबास पहनाते हैं उसका गुनाह और अज़ाब भी उन्हीं पहनाने वालों पर है।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.106,107)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🇨🇨 महफ़िल'ए'मीलाद मै ज़िक्रे शहादत करना ?


       🌹 कुछ लोग मह्फिले मीलाद मे सय्यिद्ना इमाम हुसैन रदिअल्लहो अन्हो और आपके,भाइयो, भतीजो,भान्जो कि शहादत के वक़ियात बयान कर देते है, हालान्की ये मुनासीब नहीं है !_


🇨🇨 मह्फिले मीलाद रसूलुल्लाह सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम कि विलादत कि ख़ुशी की महफिल है, इसमे ऐसे वाक़ियात नही बयान करने चाहिये, जिनको सुनकर रन्ज व् मलाल, गम और दुख हो।_


💖 आ'ला हज़रत इमाम अहमद रज़ा इमा अह्ले सुन्नत फरमाते है :-_

ओलमा ए इकराम ने मह्फिले मीलाद शरिफ मे ज़िक्रे शहादत से मना फरमाया है कि वह मजलिसे सुरुर है ज़िक्रे हुज़्न मुनासिब नही_


(#📖अह्कामे शरीयत,हिस्सा2, सफह 145)


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


💰 अमानत मे तसर्रुफ ❌


📗 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.108)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💰 अमानत में तसर्रुफ ?😈


       🔮 आज कल अमानत में तसर्रुफ आम हो गया है,उमुमन् ऐसा होता है कि एक शख्स ने दूसरें के पास कोई रकम ,रूपया,पैसा बतौरे अमानत रख दिया और वो उसकी इजाज़ात के बगैर उसमे से ये सोच कर खर्च कर देता है,या तिजारत में लगा देता है कि देने वाले के मै अपने पास से दे दूंगा ,या अभी निकाल लू बाद में फिर पुरे कर दूंगा,यह सब गुनाह् है और ऐसा करने वाले सब गुनाहगार है । ख्वाह वह बाद में वह रकम उसे पूरी वापस करदे , क्योंकि अमानत में तसर्रुफ की इजाज़त नही।_


🕌मस्जिद के मुतवल्लियो और मदरसे के मुहतमिमो में देखा गया कि वह चन्दे के पैसो को इधर से उधर करते रहते है । कभी खुद अपनी ज़रूरतों में खर्च कर डालते है । और ख़याल करते है कि बाद में पूरा कर देंगे ,ये सब खुदा की यहाँ के पकडे जाएंगे ।


👉🏻कुछ मुत्तकी परहेज़गार वा दीनदार बनने वाले तक इस बात का ध्यान नहीं रखते ।और हराम को हलाल की तरह खाते हैं ,और अमानत में तसर्रुफ ही आदमी को एक दिन नियत खराब और खयानत करने वाला बना देता है, वो ये सोच कर खर्च कर देता है की बाद में अपने पास से पूरा कर दूंगा और फिर नियत खराब हो जाती हैं और फिर बड़े -बड़े परहेज़गार ,हरामखोर हो जाते है । और खुदा की अज़ाब की फ़िक्र किये बगैर पराये माल को अपने की तरह खाने लगते है ।_


📚फतावा आलमगिरी में है :-

एक शख्स ने मस्जिद बनाने के लिए चंदा किया फिर उसमे से कुछ रकम अपने लिए खर्च कर ली,फिर इतनी ही रकम अपने पास से मस्जिद में खर्च कर दी ,तो ऐसा करना उसके लिए जायेज़ नही ।_


📗फतावा रज़विया ,जिल्द 8 ,सफह 26

📗फतावा आलमगिरी ,जिल्द 2,किताबुल वक़्फ , बाब 13 ,सफह 480



🌹आ'ला हज़रत इमाम ए अहले सुन्नत फर्माते है :

ज़रे अमानत में तसर्रुफ हराम है ,यह उन मवाज़ेह में है,जिसमे दराहिम वा दनानिर मुतयिय्न होते है उसको जायेज़ नहीं कि उस रूपए के बदले रूपये रखदे ,अगरचे बेएनेही वैसा ही हो, अगर करेगा अमिन नहीं रहेगा ।_


👉🏻फिर आगे ख़ास मदरसो के मुह्तमिम के बारे में फरमाते है :

मुह्तमिमाने अंजुमन ने अगर सराहतन भी इजाज़त दे दी हो की तुम जब चाहना खर्च करलेना और उसके एवज़ दे देना जब भी ना उसको तसर्रुफ जायेज़ और ना ही मुह्तमिमो को इजाज़त देने की इजाज़त है ,क्योंकि मुहतमिम मालिक नहीं और  क़र्ज़ तबररुअ है और गैरे मालिक को तबररुअ का इख्तियार नहीं ,हाँ चन्दा देने वाले इजाज़त दे जाए तो हर्ज नहीं ।_

#📗फतावा रज़विया ,जिल्द 8 सफह 39


⛲👉🏻पहले अमानत रखने वाले मुसलमानों का तरिका था कि वो  थैलिया 💰 रखते थे,और हर अमानत अलग अलग 1-1 थैलियो में मह्फूज़ रखते और फिर जो लिया था,ख़ास उसी को लौटा देते ।


❤ भाइयों :- ऐसे ही तरीके अपनाओ, अगर कुछ आखिरत की फ़िक्र है ,वरना आज तसर्रुफ करने वाले होंगे और कल खाइन वा नियत खराब क्योंकि हर नफ्स के साथ शैतान लगा हुआ है


Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


🌝रात को देर तक जागना और सुबह को देर से उठना !⏰


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.108,109,110)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌝रात को देर तक जागना और सुबह को देर से उठना !⏰_


       🌚 आजकल रातो के जागने और दिन के सोने के माहोल बनता जा रहा है । हालांकि, कुरान करीम की बाज़ आयात का मफ्हुम् है कि हमने रात आराम करने के लिए बनायी और दिन काम करने के लिए,इस्लामी मिजाज़् ये है कि रात को ईशा की नमाज़ पढ़ कर जल्दी सो जाओ और सुबह के जल्दी उठ जाओ ।  इशा कि नमाज़ के बाद गैर ज़रुरती बाते करना मकरुह् व ममनुअ है ।


📜 हदीस शरीफ में है  :- 

🌹रसुलुल्लाह् ﷺ  इशा की नमाज़ के पहले सोने और इशा कि नमाज़ बाद बात करने को नापसन्द फर्माते थे। यह हदीस् बुखारी और मुस्लिम् में भी है ।

📗मिश्कात, बाब-तअज़िलुस्सलात ,फरले अव्वल, सफह 60



👉🏻 बाज़ मुदर्रेसिन और तल्बा को देखा गया है की वो रात को किताबे देखते है और काफी काफी रात तक किताबो और उनके हाशिये में बिज़ी रहते है यहाँ तक की सुबह फज्र की नमाज़े कज़ा कर देते है या नमाज़ पढ़ते भी है तो इस तरह की घडी देखते रहते है ,जब देखा कि २-४ मिनट् रह गए और पानी सर से ऊँचा हो गया तो उठते जल्दी जल्दी वुज़ु करते है और नमाज़् में परिंदो की तरह चोचे मार कर मुसल्ले से अलग हो जाते है !


👉🏻 दरअस्ल ये वो लोग है जो किताब पढ़ते हैं मगर ये नहीं जानते की इल्म क्या है ,ये तबलिसे ईब्लीस का शिकार है और शैतान ने इन्हे धोके में ले रखा है, कुछ का कुछ सुझा रखा है , 

👉🏻ऐसे ही वो वायज़ीन और मुकर्ररिन ,जलसे करवाने वाले और जल्से करने वाले,तकरीरे करवाने वाले सुनने और सुनाने वाले, इस ख़याल में ना रहे की उनके जल्से उनके नमाज़ छोड़ने के अज़ाब से नजात दिलायेंगे ,होश उड़ जाएंगे बरोज़े क़यामत नमाज़ में लापरवाही करने वालो के,और जल्दी जलदी मुनफिको की तरह नमाज़ पढ़ने वालो के चाहे वो अवाम हो या ख़ास ,मुकर्ररि हो या शायर,मुदर्रिस हो या मुफ्ती, सज्जादानशिन हो या किसी बड़े बाप के बेटे या किसी बड़ी से बड़ी खानकाह के मुजावर ,और बरोज़े कयामात जब नमाज़ो का हिसाब लिया जाएगा तब पता चलेगा कि कौन कौन कितना बड़ा खादिमे दीनऔर इस्लाम का ठेकेदार था ।_


📝दौरे हाज़िर के हालात :-

आजकल के नौजवान रातो को चैटिंग और फोन् पर बातें करने में गुज़ारते है ,या रातो को उलटी सिधी फिल्मे या गलत वेब साइट देख्ते है (यूट्यूब,फेसबुक,tiktok,like, sharechat, mussically etc) और रात भर उनके माँ बाप कोइ फ़िक्र नहीं करते की उनकी औलाद क्या कर रही है,और अगर देख भी लिया सुबह के वक़्त उनके माँ बाप ने तो ये कहते है कि अब तो सो जा सुबह हो गई है जबकि कहना तो ये था कि उठ नमाज़ पढ़ , तो जब आलिमे दीन की किताब से मुहब्बत नमाज़ ना पढ़ने के अज़ाब से नहीं बचा सकती तो ये ऐसे काम आज कल के मुसल्मानो को कैसे बचा लेंगे ? , औलाद के साथ साथ माँ बाप भी इस की गिरफ्त् में आएंगे की तुमने अपनी औलाद की तर्बियत् कैसे की जो वो नमाज़ से गाफिल रहा  ????_


🤲🏻 अल्लाह हमें सुनने समझने और उस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाये !


🌷आमीन


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.110,111,112)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💰💵क्या नकद और उधार की अलग-अलग किमत रखना मना है !💳📝


📦 अगर कोई शख्स अपना माल किसी के हाथ बेचे,और कहे कि अभी किमत अदा कर दोगे तो इतने में और अगर उधार खरीदोगे तो इतने पैसे होंगे , मसलन अभी 300 रुपये और , उधार खरीदोगे पैसे बाद में अदा लरोगे तो 350 रूपए देने होंगे ,तो यह जायेज़ है । इसको कुछ लोग नाजायज़ ख़याल करते है ,और सूद समझते हैं ये उनकी गलतफहमी है , यह सूद नहीं है ।


❓हाँ अगर खरीददारी के वक़्त इस बात को खोला नही, और माल 300 रूपये में फरोखत(बेच) कर दिया, और रक़म अदा करने में उसने देर की तो उससे पैसे बढ़ा कर वसुल किये , मसलन 350 रूपये लिए तो यह सूद हो जायेगा ।  मतलब यह है की उधार और नकद का भाव अगर अलग अलग है तो खरीददारी के वक़्त ही इसकी वजाहत करदे ,बाद में उधार की वजह् से रकम बढ़ाकर लेना सूद और हराम है ।


(#📗फतावा रज़विया जिल्द 17,सफह 97,मतबुआ रज़ा फाउंडेशन-लाहोर)

(#📗फतावा फैज़ुर्रसुल ,जिल्द 2 ,सफह 380)


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.112)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


👅 चापलुसी पसंद मुतवल्ली और मुहतमिम ✂


            🕌 बाज़ वक़्त कुछ जगहो पर मस्जिद के के मुतवल्लियो और मदर्सो के मुहतमिमो का मिजाज़ बन गया है कि उन्हें अच्छे भले पढ़ें लिखे ,बासलाहियत और दीनदार् इमाम और मुदर्रिस् अच्छे नहीं लगते और उनसे उनकी पटती नहीं_

 📝बल्कि वो अच्छे लगते है जो उनकी चापलुसी करते है ,उनकी हाँ में हाँ मिलाते है ,जब वो आये तो उनको अपनी मसनद पर बैठाते है ,खुद किनारे खिसक जाए और कभी कभी उनकी डाट और फटकार भी सुनले ,ऐसे मुदर्रिस और इमाम ऐसे मुतवल्लियो और मुहतमिमो का बहोत पसंद होते है खवाह् वो न कुछ जानते हो , या ना बच्चो को पढ़ाते हो,या वक़्त गुज़ारते हो नमाज़ की पाबंदी करे या ना करें , कुराआने करीम  गलत पढ़ते हो ,उनसे उन्हें उससे कोई मतलब नहीं,बस उनकी खुशामद करते  रहे ।


🕋 दुआ है कि खुदाए-ताला उनको होश अता फरमाये,और ज़ात और नफ्स् से ज़्यादा उन्हें दींन और उसकी तरक्की से प्यार हो जाए,खयाल रहे की इमामो,आलीमो,मोलवीयो, को परेशान करने वाले दुनिया वा आखिरत में रुसवा होंगे ।


👉🏻यह भी आज बैठ कर रोने की बात है की बाज़ मदरसो में चंदा कर लेना मक़्बुलियत का मेयार बन गया है ,जो घूम फिरकर ज़्यादा से ज़्यादा चंदा लाकर जमा करदे वो ज़्यादा महबूब और मक़्बुल है और भले सच्चे, पढ़े लिखे,काबिल ,और बासलाहियत आलिम साहब बेचारे गिरी नज़रो से देखे जा रहे हैं ।


📜हदीस ए पाक मे हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने कियामत् की निशानीयो में से एक बात यह भी फरमायी थी कि ''जब मुआमलात ना अहलो के सुपुर्द किये जाने लगे ।''


👉🏻यह आज खूब हो रहा है ,अह्ले इल्म वा फज़्ल को कोई पूछने वाला नहीं और नाअहल ,बेइल्म,चापलुस,खुशामदी बाते बनाने वाले मसाजिद वा मदारिस ,मराकिज़ वा दफातिर पर क़ब्ज़ा जमाये बैठे हैं ।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.113,114)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💶 चन्दो की ज़्यादती  🗳


🔮 आज कल चन्दे बहोत बढ़ते जा रहे है ,इनपर रोक लगाना बहोत ज़रुरी हो गया है ,जहाँ तक मस्जिदो और मदरसो के मुआम्ला है तो ये कौम् की ऐसी ज़रुरतो में से है कि जिनके बगैर दींन बाकि नहीं रह सकता,लिहाज़ा उनके लिए चंदा किया जाए तो कोई हर्ज नहीं ।

👉🏻 अल्बत्ता गाँव गाँव मोल्वीयत् की पढ़ाई के लिए मदारिस खोलना मुनासिब नही है ,एक जिला में आलिम व फाज़िल बनाने वाले दो -चार मदारिस काफी है,हां बासलाहियत इमाम मस्जिद में रखे जाएं, और वो बगैर लम्बी पूरी चन्दे की तहरीक चलाए, इमामत् के साथ साथ 2 -3 जमाअत् तक बच्चों को मौलवीयत की  इब्तेदाई तालीम दे ,और फिर बड़े मदरसो में दाखिल करा दे तो यह निहायत् मुनासिब बात है और खाली हाफ़िज़ बनाना और उन्हें इल्मे दींन और लिख्ने पढ़ने से महरूम रखना और इसी में उनकी उम्र गुज़ार देना उनके और कौम के हक़ में अच्छा नहीं ।

👉🏻हाँ गाँव गाँव इस्लामी मकतब याअनी इस्लामी अंदाज़ के प्राइमरी स्कूल काईम करना बहोत ज़रुरी है,जिसमे दीं न की ज़रुरी तालीम के साथ साथ दुनिया की भी तालीम हो ।


👉🏻मस्जिद की जहा ज़रूरत हो वहा अगर कोई सेठ साहब यूँही बगैर किसी की मदद के बनवा दे तो यक़िनन वो बहोत बङे सवाब के मुस्तहीक होंगे ,और ऐसा ना हो सके तो मस्जिद के लिए चंदा करना और मस्जिद बनवाना निहायत् बेहतर और उम्दा काम है ,लेकिन मस्जिद की तज़ईन और उसकी सजावट और उसकी खूबसूरती के लिए गरीब ,मज़दूर और नादार मुस्लमानो पर चन्दे डालना (मांगना)और उनपर गाँव बस्ती का दबाव बनाकर वसूलयाबी करना हरगिज़ मुनासिब नही है, दुनिया भर में रसीद बुक लेकर घूमने और गरीब मज़दूर पर दबाव बनाकर चन्दा वसुल करने से सादा सी मस्जिद में नमाज़ पढ़ना बेहतर है ।


👑उल्माओ ने कुछ बाते कही है जिसे शार्ट में लिखा जा रहा है :-


❶  मस्जिदो और मदर्सो की सजावट ज़रुरी नहीं है और इसके लिए गाँव और शहर में घूम घूम कर गरीबों से चंदा मांगना सही नहीं है ।


❷ भारी भारी उर्स करने ,मज़ार की और खानकाहो की तामिर के लिए चन्दे की ज़रुरत नहीं है ।


❸ बल्कि अगर कुछ लोग हलाल की कमाई से उस बुज़ुर्ग हस्ती की मज़ार में  कुछ खर्चा करे और मुहब्बत के साथ इसाले सवाब करे और कुरान खानी वगैरह् करके गरीब मिस्कीनो को खिलाये तो इसमें कोई हर्ज नहीं है ।


❹ और बाखुशी कोई खर्च करे इन सभी पर तो इन्द्ल्लाह् माज़ुर् है और सवाब का मुस्तहिक् है ।


❺ जल्से ,जुलुस और कान्फ्रेन्स करने के लिए मुस्लमानो पर चन्दे की लिए ज़ोर डालना जबकि हिन्दुस्तान में मुस्लमान पैसे की माम्ले में कमज़ोर् और बदहाल है उनसे  मांगना और गरिबो से मांगकर , दस दस ,बीस बीस ,पचास पचास लाख की हैसियत रखने वाले पेशेवर नात ख्वान् , मुकर्रिर को बड़े बड़े नज़राने की भेट चढ़ाना कौम् के हक़ में नहीं है ।


❻ टेन्ट वालो और स्जावट के लिए बगैर ज़रूरत चंदा करना सही नहीं है ।


❼ जो मुकर्ररिन तकरीर कम रंग रोगन ज़्यादा करते है उनका मुशायरे वालो की तरह आना फिर उनके नाज़ नखरो को उठाना ,उनके लिए खूब लाइट सजाना और खूब दिखावा करना रियाकारी कह्लाता है और रियाकारी करने पर सवाब नहीं अज़ाब है ।


❽ ऐसी कमेटी जो पब्लिक इकट्ठा करने और अपनी की वाह-वाही के लिए खूब चन्दे करे और फिर उनको सिर्फ सिर्फ नाम और दिखावे के लिए खर्च करे , तो कोई सवाब नहीं जबकि ऐसे कमेटी के मेंबर खुद भी नमाज़ी परहेज़गार नही होते मगर रियाकारी पसंद करते है ।


❾ बाज़ वक़्त ऐसे लोगो से शराब ,सिनेमा ,जूआ तक नहीं छूटता ,और ये लोग चन्दे करके कम पैसा जल्सो में लगाते हैं बाकि हजम कर जाते है ।


❿ ये सब लिख्ने का मकसद ये नहीं कि जल्से बंद कर दिए जाए बल्कि इसके लिए ज़रूरत के हिसाब से चंदा करे और फिर इसको खर्च भी सही तरीके से करे अच्छे मुकर्ररिन और नात ख्वान को बुलाये जो जिनको पैसे से मुहब्बत ना हो बल्कि जो हमारे दिलो मे इस्लाम और नाते पाक से इल्म का जज़्बा बढ़ा दे,


⓫ जल्से करना फ़र्ज़ या वाजिब् नहीं है ,लम्बी लम्बी रकम देकर जल्से करना ठीक नहीं है  ।


⓬ इमाम बासलाहियत रखे जो जुमा नमाज़ के अलावा तकरीर से इल्म सिखाये और दीनि किताबों को पढ़ने की तरगीब् दे ।


⓭ लड़कीयो की शादी के लिए चंदा करने की बिमारी आम बात हो गयी है ,हालांकि चंदा गैर जरूरी खर्चो और नामवारी के लिए होता है ।


⓮ इस्लाम में ना जहेज़ वाजिब् है और ना ही बारातीयो को खाना खिलाना, इसमें दखल् लड़के वालो की ज़्याद्ती का है ।


⓯ खुलासा ये है कि बिल्कुल सादा निकाह भी कर दिया जाए तो ये बिला शुबह् जाएज़् बल्की आज के हालात के मुनासिब है ।


⓰ लड़कीयो की शादी के लिए भीख मांगने वाले अगर भीख मांगने के बजाये किसी ऐसे के साथ बेटी का निकाह् करदे ,जो दूसरी बीवी का ख्वाइश-मन्द हो और दो बिवियो का कफील हो सके , या तलाक दे चूका हो ,या उसकी बीवी मर गयी हो, या वो गरीब और उम्ररसिदा हो,और अपनी इन कम्ज़ोरियो की वजह से शादी में इखराजात् का तालिब ना हो ।


⓱ आजकल के माहोल में भीख मांगने से हज़ारों दर्जे बेहतर है , क्योंकि लड़की की शादी के लिए भीख मांगना गुनाह वा नाजायज़ है , और जिन लोगो का हमने ज़िक्र किया उनसे निकाह बिल-शुबह् जायेज़ है ।


⓲ हाँ बगैर सुवाल किये कोइ खुद ही से किसी कि मदद करे तो इसमें कोई रोक टोक नहीं ।


⓳ लेकिन सुवाल करना और भीख मांगना ,इस्लाम में सिवाये चन्द मख्सुस सूरतो के जो अहादीस और फिक़ह् की किताबों में मज़कूर है, हराम है ।


⓴ और जो सूरते मज़कूर हुई ,उन्मे शादी ब्याह के गैर जरूरी मरासिम अदा करना हरगिज़ शामिल नहीं ।



Next:-

🎤 👇आने वाला पार्ट


💰 ह़राम तरीके से कमा कर राहे खुदा में खर्च करना 🚯

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.114,115,116,117,118)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


💰 ह़राम तरीके से कमा कर राहे खुदा में खर्च करना 🚯_


🧠 यह बिमारी भी काफी आम हो गयी है,और लोग कमाते वक़्त यह नहीं सोचते की यह हराम है या हलाल , झूट ,फरेब ,मक्कारी,धोकेबाज़ी,बेईमानी, रिश्वतखोरी,सूद ,ब्याज़्,और मज़्दुरो की मज़्दुरी रोक कर कमाते हैं और माल जमा कर लेते है ।_

और फिर राहे खुदा में खर्च करने वाले सखी बन जाते है ,और खूब मज़े से खाते और यार दोस्तो को खिलाते हैं। मस्जिद ,मदर्सो, और खानकाहो को भी देते है ! मांगने वाले को भी दे देते है ,यह हराम खाकर राहे खुदा में खर्च करने वाले ,ना सखी है ना दीनदार ,बल्कि बड़े बेवकूफ और निरे अहमक् है ।_

📜 हदीस पाक में है  ''हराम कमाई से सद्का और खैरात क़ुबुल नहीं''

#📗मिश्क़ात बाब् उल कस्ब ,सफह-२४२



👉🏻ये ऐसा ही है जैसे कोई बे वजह जान बूझ कर किसी की आँख फोड दे ,और फिर पट्टी बांधकर उसे खुश करना चाहे !

🙏भाइयों ! खूब याद् रखो अस्ल नेकी और पहली दीनदारी नेक कामो में खर्च करना नहीं बल्कि ईमानदारी से कमाना है ,


👉🏻जो हलाल तरीके और दयानतदारी से कमाता है, और ज़्यादा राहे खुदा में खर्च नहीं कर पाता है वह उससे लाखो दर्जा बेहतर है ,जो बेरहमी के साथ हराम कमाकर इधर उधर बाट्ता फिरता है ।                                   बाज़ दफा ऐसा देखा गया है की इस तरह हराम कमाने वाले लोगो में कुछ मदिना शरीफ , और कुछ अजमेर शरीफ ,और कलियर शरीफ के चक्कर लगा रहे है, हलान्कि हदीस शरीफ में है :-👇🏻


🌹ह्ज़रत् सयिद्द्ना माज़ इब्ने जबल रदि अल्लहो अन्हो को जब हुज़ूर ﷺ ने यमन् का हाकिम और गवर्नर बना कर भेजा तो आप् उनको रुख्सत् करते हुए नसिहत फरमाते हुए उनकी सवारी के साथ साथ मदीना तैय्यबा से बाहर तशरीफ लाये,जब हुज़ूरﷺ वापस होने लगे तो फरमाया '' ऐ माअज़ जब इस साल के के बाद तुम वापस आओगे तो मुझको नहीं पाओगे बल्की मेरी कब्र् और मस्जिद के देखोगे,हज़रत माज़् ये सुनकर शीद्द्ते फिराक की वजह से रोने लगे ,तो रसुलअल्लाह ﷺ ने फरमाया :- ''लोगो में मेरे सबसे ज़्यादा क़रीब परहेज़गार लोग है ,चाहे वो कोई हो और कही भी हो ! ''


(#📗मिशकात ,सफह 445)



👉🏻यानी हुज़ूर ﷺ ने सीधे तौर पर फरमा दिया कि अस्ल नेकी,और दीनदारी और मुहब्बत ,नजदीकी और पास रहना और हाज़ीरी नहीं है बल्कि परहेज़गारी यानी बुरे कामो से बचना ,अच्छे काम करना ,ख्वाह् वो कहीं रह कर हो  ।_

हज़रत उवैस करनी रदि अल्लहो तालाअन्हो हुज़ूर ﷺ के ज़माने में थे लेकिन कभी मुलाकात के लिए हाज़िर ना हुए ,मगर हुज़ूर ﷺ को इतने पसंद थे की उनसे मिलने और दुआए मगफिरत ,कराने की वसियत सहाबा ए इकराम को फरमाई थी ,_


#📗सहीह मुस्लिम,जिल्द -2 ,सफह 399



❣एक हदीस शरीफ में तो हुज़ूर  ﷺ ने यहाँ तक फरमा दिया कि मेरी उम्मत के एक शख्स की शफाअत् से इतने लोग जन्नत में जाएंगे की जितनी तादाद कबिलाए बनु तमीम के अफ्राद् से भी ज़्यादा होगी ।

#📗मिश्क़ात, बाबुलहौज़ वश्श्फाअह , सफह 464


👉🏻इस हदीस की शरह में उल्मा ने लिखा है कि '' उस शख्स् से मुराद हज़रत सयिद्द्ना उवैस करनी रदि अल्लहो तालाअन्हो है  ।_

#📕मिरक़ात जिल्द 5 सफह 278


👆🏻इन अहादिसो से खूब वाज़ेह हो गया कि अस्ल मुह्ब्ब्त रहना नहीं ,हाज़ीरी वा चक्कर लगाना नहीं,बल्की वो काम करना है जिससे महबुब राज़ी हो ।


⚠खुलासा ए कलाम ये है कि जो लोग नमाज़ और रोज़े और दिगर् अह्कामे शराअ के पाबन्द हैं ,हरामकारियो और हराम कामो से बचते हैं ,वो ख्वाह बुज़ुर्गो कि मज़ारात पर बार बार हाज़िरी ना देते हो,वो उनसे बदरजहा बेहतर और मोहब्बत करने वाले है ! जो खुदा वा रसूल की नाफरमानी करते ,हराम खाते और खिलाते ,रात दिन नाच गानो,तमाशो और जुएँ ,शराब लाटरी और सिनेमो में लगे रहते हैं , ख्वाह हर वक़्त ही मज़ार पर ही पड़े रहते हो ,

👉🏻अल्बत्ता वो लोग जो अम्बिया एकराम् और औलिया एज़ाम की शान मे गुस्ताखीया करते हैं, बेअदबी से बोलते हैं ,और उनकी बारगाह में हाज़ीरी को शिर्क वा बिद'अत् करार देते है ,उनके अकीदे इस्लामी नहीं ! उनकी नमाज़ -नमाज़ नहीं ,उनके रोज़े -रोज़े नहीं ,उनकी तिलावत क़ुरआन् नहीं ,उनकी दीनदारी इत्तीबाए रसूले अनाम नहीं , '' क्योंकि अदब ईमान की जान है ,और बे-अदब नाम का मुस्लमान है ''


📝 इस्लिये इन बातो पर गौर करे और हराम तरह से कमाई से तौबा करे और हक़ और ईमान पर कायम रहते हुए ज़िन्दगी गुज़ारे_


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.118,119,120)


🤲🏻 अल्लाह हमें सुनने समझने और उस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाये !


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣🅾️9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


⚡हराम तरीके से कमाकर राहे खुदा में खर्च करना


💵 यह बीमारी भी काफी आम हो गई है । लोग कमाते वक़्त यह नहीं सोचते कि यह हराम है या हलाल । झूट, फरेब, मक्कारी, धोकेबाज़ी, बेईमानी, रिश्वतखोरी, सूद व ब्याज और मजदूरों की मज़दूरी रोक रोक कर कमाते हैं और माल जमा कर लेते हैं और फिर राहे खुदा में ख़र्च करने वाले सख़ी बनते हैं , खूब मजे से खाते हैं और यारों दोस्तों को खिलाते हैं, मस्जिद मदरसों और खानकाहों को भी देते हैं, माँगने वालों को भी दे देते हैं । यह हराम कमा कर राहे खुदा में खर्च करने वाले, न हरगिज़ सखी हैं, न दीनदार । बल्कि बड़े बेवकूफ़ और निरे अहमक हैं । हदीस पाक में है, "हराम कमाई से सदका और खैरात कबूल नहीं ।"

📚(मिश्कात बाबुल कस्ब सफा २४२)


👉 यह ऐसा ही है जैसे कोई बेवजह जान बूझ कर किसी की आँख फोड़ दे और फिर पट्टी बाँध कर उसे खुश करना चाहे । 

👉 भाईयो ! खूब याद रखो अस्ल नेकी और पहली दीनदारी नेक कामों में खर्च करना नहीं है बल्कि ईमानदारी के साथ कमाना है । जो हलाल तरीके और दयानतदारी से कमाता है और ज्यादा राहे खुदा में खर्च नहीं कर पाता है वह उससे लाखों दर्जा बेहतर है जो बेरहमी के साथ हराम कमा कर इधर उधर बाँटता फिरता है

👉 इन हराम कमाने वालों, रिश्वतखोरों, बेईमानों, अमानत में ख्यानत करने वालों में यह भी देखा गया है कि कोई मदीना शरीफ जा रहा है और कोई अजमेर शरीफ़ और कलियर शरीफ के चक्कर लगा रहा है, हालांकि

👉 हदीस शरीफ में है: हज़रत सय्यिदेना मआज़ इब्ने जबल रदियल्लाहु तआला अन्हु को जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने यमन का हाकिम व गवर्नर बना कर भेजा आप उनको रुख़सत करने के लिए नसीहत फ़रमाते हुए उनकी सवारी के साथ साथ नदीना तय्यिबा से बाहर तक तशरीफ लाये । जब हुजूर वापस होने लगे तो फरमाया कि ऐ मआज ! इस साल के बाद जब तुम वापस आओगे तो मुझको नहीं पाओगे बल्कि मेरी कब्र और मस्जिद को देखोगे । हज़रत मआज यह सुनकर शिद्दते फ़िराक की वजह से रोने लगे तो *रसूलुल्लाह ने फरमाया : "लोगों में मेरे सबसे ज़्यादा करीब परहेज़गार लोग हैं, चाहें वो कोई हों और कही भी हों ।" 

📚( मिश्कात सफा ४४५ )


👉 यअनी हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने साफ़ तौर पर फ़रमा दिया कि अरल नेकी और दीनदारी और महब्बत, नजदीकी और पास रहना और हाज़िरी नहीं है बल्कि परहेजगारी यअनी बुरे कामों से बचना, अच्छे काम करना है ख्वाह वो कहीं रह कर हों । 

👉 हज़रते उवैस करनी रदियल्लाहु तआला अन्हु हुजूर के ज़माने में थे लेकिन कभी मुलाकात के लिए हाज़िर न हुए मगर हुजूर को इतने पसन्द थे कि उनसे मिलने और दुआए मगफिरत कराने की वसीयत सहाबए किराम को फ़रमाई थी। 

📚 (सहीह मुस्लिम जिल्द २ सफा ३११)


👉 एक हदीस शरीफ में तो हुजूर ने उनके बारे में तो यहाँ तक फरमा दिया कि मेरी उम्मत के एक शख्स की शफाअत से इतने लोग जन्नत में जायेंगे कि जितनी तादाद कबीलए बनू तमीम के अफराद से भी ज़्यादा होगी । 

📚 (मिश्कात बाबुलहौज़ वश्शफाअह सफा ४६४)

👉 इस हदीस की शरह में उलेमा ने फ़रमाया कि 'उस शख्स' से मुराद हज़रत सय्यिदेना उवैस करनी रदियल्लाहु तआला अन्हु  है

📚 (मिरकात जिल्द ५ सफा २७८)

👉 इन अहादीस से खूब वाजेह हो गया कि अस्ल महब्बत पास रहना नहीं, हाज़िरी व चक्कर लगाना नहीं, बल्कि वह काम करना है, जिससे महबूब राजी हो। 

👉 खुलासा यह कि जो लोग नमाज़ और रोजे व दीगर अहकामे शरअ के पाबन्द हैं, हरामकारियों और हराम कामों से बचते हैं, वो ख्वाह बुजुर्गों के मज़ारात पर बार बार हाज़िरी न देते हों, वो उनसे बदरजहा बेहतर और महब्बत करने वाले हैं जो खुदा व रसूल की नाफरमानी करते, हराम खाते और हराम खिलाते, रात दिन गानों, तमाशों, जुए, शराब और लाटरी, सिनेमों में लगे रहते हैं ख्वाह हर वक्त मज़ार पर ही पड़े रहते हों । अलबत्ता वो लोग जो हज़राते अम्बियाए किराम और औलियाए इज़ाम की शान में गुस्ताखियाँ करते हैं, वेअदबी से बोलते हैं और उनकी बारगाहों में हाज़िरी को शिर्क व बिदअत करार देते हैं, उनके अकीदे इस्लामी नहीं, उनकी नमाज़ नमाज़ नहीं, उनके रोज़े रोज़े नहीं, उनकी तिलावत .कुआन नहीं, उनकी दीनदारी इत्तिबाए रसूले अनाम नहीं, क्यूंकि अदब ईमान की जान है और बेअदब नाम का मुसलमान है ।

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 118,119,120)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌟 अजीम शख्सियतों को मनवाने का तरीका


👉 कुछ लोग जो शख़्सियत परस्ती में हद से आगे बढ़े हुए हैं, वो अपनी महबूब और पसन्दीदा शख्सियतों को दूसरों से मनवाने के लिए लड़ाई झगड़ा करते हैं । और जो महब्बत उन्हें है, वो अगर दूसरा न करे तो बुरा मानते और उसे गुमराह और बद्दीन तक ख्याल कर बैठते हैं, और ज़बरदस्ती उससे मनवाना चाहते हैं । हालाँकि महब्बत कभी भी ज़बरदस्ती नहीं पैदा की जा सकती और न सिर्फ़ फ़तवे लगाकर और न उन महबूब बन्दों और बुजुर्गों के नाम के नारे लगा कर और न जोशीली और जज़्बाती तकरीरें करके ।


👉 बल्कि तरीका यह है कि जो वाकेई बुजुर्ग साहिबे किरदार, अल्लाह वाले लोग हैं यअनी हकीकत में वह इस्लामी नुक्तए नजर से अजीम शख्सियत के मालिक हैं तो उनका वह किरदार और तरीकए ज़िन्दगी, कारनामे और दीनी खिदमात, खुदातरसी और नफ्सकुशी संजीदा अन्दाज़ में समझाने के तौर पर तकरीर या तहरीर के जरीए लोगों के सामने लाइये और जिन बातों की बुनियाद पर आपको उस साहिबे इल्म व फज्ल से महब्बत है, वो बातें दूसरों को बताइये । अगर वह भी उनका आशिक व दीवाना हो जाये तो ठीक और न हो तो कोशिश आपका काम, अब आप ज़बरदस्ती मनवाने की कोशिश न कीजिए । हाँ जो लोग आमतौर - पर बुजुर्गों की शान में गुस्ताखी करते हैं या ऐसे आलिम व बुजुर्ग कि जिनकी बुजुर्गी व बरतरी पर पूरी उम्मते मुस्लिमा इत्तिफाक कर चुकी हो उनकी शान में बकवास करते हैं, वो यकीनन गुमराह व बददीन हैं । वो अगर समझाने से न समझें तो उनसे दूरी और बेज़ारी ज़रूरी है । और जो गुस्ताखी व बेअदबी न करता हो लेकिन आपकी तरह अकीदत व महब्बत भी न रखता हो तो उसके मुआमले में ख़ामोशी बेहतर है । और उसके ख्यालात बेहतर हैं, इस्लामी हैं तो उसको मुसलमान ही ख्याल किया जाये, और अपना इस्लामी भाई समझा जाये ।


👉 इस्लामी शख्सियतों और अपने बुजुर्गों, पीरों या मशाइख़ को दूसरों से मनवाने के लिए सबसे ज़्यादा उम्दा तरीका और बेहतर ढंग आपका किरदार है । आज ऐसे लोग बहुत हैं जो हराम व हलाल में तमीज़ नहीं रखते, नमाजें छोड़ते, गाने, बजाने और तमाशों में लगे रहते हैं, उनकी नियतें ख़राब हो चुकी हैं, उनमें इस्लामी अखलाक नाम की कोई चीज़ नहीं है और फिर ये बुजुर्गों के नाम के ठेकेदार बनते हैं, उर्स कराते, मज़ार बनवाते और उनके नाम की लम्बी लम्बी नियाजें दिलवाते हैं, उनके नाम पर जलसे, जुलूस और महफ़िलों का इनइक़ाद करते हैं तो ये लोग कौम को बुजुर्गों से करीब करने के बजाय दूर कर रहे हैं और उनके ये ढंग लोगों के दिलों में अल्लाह वालों की महब्बत कभी भी पैदा न कर सकेंगे ।


👉 भाईयो ! अल्लाह वालों से महब्बत करने वाले और उनकी महब्बत का बीज दूसरों के दिलों में बोने वाले वो हैं जिन्हें देखकर अल्लाह वालों की याद आ जाये । और अल्लाह वाले वो हैं जिन्हें देखकर अल्लाह की याद आ जाये । वरना ये पराये माल पर नजर रखने वाले, हरामखोर, बेईमान, नियत ख़राब लोग खुदाए तआला के उन बन्दों की अज़मत व इज़्ज़त लोगों के दिलों में नहीं बिठा सकेंगे कि जिन्होंने अपना सब कुछ राहे खुदा में लुटा दिया । और लालच के पिटारे, करोड़पति बनने की तमन्ना रखने वाले मुकरीन, शाइरों, कव्वालों, नाम निहाद पीरों, फ़कीरों के जरीए से अल्लाह वालों की अज़मत व इज़्ज़त के झन्डे नहीं गाड़े जा सकते ।


👉 ज़रूरी है कि मुरीद अपने पीर का, शागिर्द अपने उस्ताद का और हर मुअतकिद अपने महबूब का नमूना हो तो तभी उससे अपने शैख़ और उस्ताद के कारनामे उजागर होंगे, और उससे उनकी अज़मत लोगों के दिलों में बैठेगी । और जो लोग किसी बुजुर्ग के कारनामे और उसकी इस्लामी खिदमात अपने चाल व चलन, किरदार व गुफ्तार के जरीए बताये बगैर ज़बरदस्ती उस बुजुर्ग शख्सियत को लोगों से मनवाने में लगे हैं, वो कौम में गिरोहबन्दी, तिफरकाबाज़ी कर रहे हैं और क़ौमे मुस्लिम को बिखेर रहे हैं, मुसलमानों को बाँट रहे हैं ।

📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 122,123)


👇🏻 तमाम पिछली पोस्ट शुरू से पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


✍🏻 कुछ गलत नामों की निशानदेही❓


✨ कुछ लोग अपने बच्चों के नाम, अहमद नबी, मुहम्मद नबी, रसूल अहमद, नबी अहमद रख देते हैं, यह ग़लत है इसके बजाय गुलाम मुहम्मद या गुलाम रसूल या गुलाम नबी कर लें या मुहम्मद नबी और अहमद नबी में नबी के आगे 'ह' बढ़ा कर मुहम्मद नबीह या अहमद नबीह कर लें। 


👉 गफूरुद्दीन नाम रखना भी ग़लत है क्यूँकि गफूर के माअना मिटा देने वाले के हैं लिहाज़ा गफूरुद्दीन के माअना हुए 'दीन को मिटाने वाला'। लाहौला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाह।

✨ अल्लाह जल्ला शानुहू का नाम गफूर इसलिए है कि वह गुनाहों को मिटाता है, नाम रखने से मुताल्लिक क्या जाइज़ है और क्या नाजाइज़ इसको तफसील से जानने के लिए आलाहज़रत मौलाना शाह इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ अलैहिर्रहमतो वरिंदवान की तसनीफ मुबारक 📙अहकामे शरीअत में सफा ७२ से सफा ६८ तक का मुतालआ करना चाहिए।

 

⚠️ नोट : - कुछ लोगों के नाम इस किस्म के होते हैं जिनमें अल्लाह तआला के मखसूस नामों के साथ 'अब्द' लगा होता है जैसे अब्दुल्लाह, अब्दुर्रहमान, अब्दुर्रज़्ज़ाक, अब्दुल खालिक वगैरहा तो इन नाम वालों को बगैर 'अब्द' लगाये ख़ाली रहमान, रज्जाक या ख़ालिक हरगिज़ नहीं कहना चाहिए और यह इस्लाम में बहुत बुरी बात है जिसका ध्यान करना निहायत ज़रूरी है। वलइयाजुबिल्लाहि तआला।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.148)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


☝🏻मखलूके खुदा को सताना और दुआ तावीज कराना❓


📿 आज कितने ही लोग हैं जो लोगों पर जुल्म व ज़्यादती करते हैं और फिर पीरों, फकीरों के यहाँ दुआ तावीज़ात कराते हैं और मज़ारों पर मुरादें मांगते घूमते हैं और मस्जिदों में जाकर लम्बी लम्बी दुआयें मांगते हैं ।

📿 कितने शौहर हैं जो बीवियों पर जुल्म ढाते और उनका ख्याल नहीं रखते उन्हें बान्दियों और नौकरानियों से बंदतर ज़िन्दगी गुज़ारने पर मजबूर कर देते हैं न उन्हें तलाक़ देते हैं और न उनका हक अदा करते हैं ।

📿 कितनी बीवियां हैं जो अपने शौहरों का खून पीती उनके लिए घरों को जहन्नम का नमूना बना देती हैं । सासों और नन्दों के साए से जलती हैं, कितनी सास और नन्दें हैं जो अपने घरों में आने वाली दुल्हनों के लिए जीना मुश्किल कर देती हैं शौहर बीवी के दरमियान महब्बत उन्हें कांटों तरह खटकती और कलेजे में चुभती है ।

📿 कितने अमीर कबीर रईस ज़मींदार व मालदार लोग हैं जो मज़दूरों का गला घोंटते, नौकरों को मारते, पीटते, झिड़कते, उनकी मज़दूरियां और तनख्वाहें रोकते और खुद ऐश करते और उनके घर वालों बीवी बच्चों की बददुआयें लेते हैं । कितने ही लोग वह हैं जो जानवरों को पालते हैं लेकिन उनकी भूक, प्यास, जाड़े, गर्मी की परवाह नहीं करते उन्हें बेरहमी से मारते पीटते हैं उनकी ताकत से ज़्यादा उनसे काम लेते और बोझ लादते हैं । ख़ास कर ज़िबह का पेशा करने वाले ज़िबह करने से पहले उन्हें भूका प्यासा यह रखते हैं और उन पर ऐसे ऐसे जुल्म करते हैं कि जिन्हें देखा नहीं जा सकता ।

📿 खुलासा यह कि कोई भी ज़ालिम अत्याचारी बे रहम हो जो अपने ऐश व आराम और मालदारी की ख़ातिर दूसरों को सताता और उनका खून पीता है उसकी न खुद अपनी दुआ कबूल होती है न उसके हक में दूसरों की । यह मर्द हों या औरतें, यह शौहर हों या बीवियां, यह सासें और नन्हें हों या बहुएं और भावजें, मालदार और ज़मींदार हों या हुक्काम व अधिकारी । अगर यह ज़ालिम व बेरहम और अत्याचारी हैं तो उन्हें चाहिए कि यह लम्बी लम्बी दुआयें मांगने, पीरों फकीरों और मज़ारात पर चक्कर लगाने और दुआ तावीज़ कराने से पहले जिसको सताया है उससे माफ़ी मांग लें जिसका हक दबाया है । वह उसे लौटा दें और जुल्म व ज़्यादती व बेरहमी की आदत छोड़ दें फिर आयें ये मस्जिदों में दुआओं के लिए और ख़ानकाहों में मुरादें मांगने और मियां और मौलवियों के पास गन्डे तावीज़ कराने के लिए । जिस ने किसी गरीब, कमज़ोर को सताया है और जिसके पीछे किसी मज़लूम की बददुआ लगी है उसके लिए न कोई दुआ है न तावीज़ ।

📿 हदीस में है कि फ़रमाया रसुलुल्लाह ﷺ ने "अल्लाह तआला उस पर रहम नहीं फ़रमाता जो लोगों पर रहम नहीं करता ।"

📿 और फ़रमाते हैं :- मज़लूम की बददुआ से बचा वह अल्लाह से अपना हक़ मांगता है और खुदाए तआला हक़ वाले को उसका हक अता फ़रमाता है ।

📚 (मिश्कात, सफहा ४३५)


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.149,150)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📖 कुरआने करीम हिफ़्ज़ करने से मुतअल्लिक कुछ जरूरी बातें


✍🏻 बगैर मानी व मतलब समझे हुए सिर्फ कुरआने करीम को ज़बानी याद कर लेना यह एक फजीलत व बरतरी की बात है लेकिन सिर्फ इसे ही इल्म नहीं कहा जा सकता । लिहाज़ा बच्चों को पूरा कुरआने करीम हिफ़्ज़ कराने के बजाय उनको दीनी उलूम अकाइदे इस्लामिया और फिक्ह के मसाइल सिखाये जायें तो यह ज़्यादा बेहतर है।


✍🏻 हज़रत सदरुश्शरीअह मौलाना अमजद अली साहब अलैहिर्रहमह फरमाते हैं "कुछ कुरआन मजीद याद कर चुका है और उसे फुरसत है तो अफ़ज़ल यह है कि इल्मे फिकह सीखे कि .कुरआन मजीद हिफ़्ज़ करना फ़र्जे किफाया है और फिकह की ज़रूरी बातों का जानना फर्जे ऐन है।"

📚 (बहारे शरीअत हिस्सा १६, सफा २३३)


⚠️नोट : फर्जे किफ़ाया वह फ़र्ज़ है कि शहर का एक भी मुसलमान कर ले तो सब पर से फर्ज़ उतर गया और अगर सबने छोड़ दिया तो सब गुनहगार हुए।


✍🏻 खुलासा यह कि हर शहर और इलाके में कुछ न कुछ हाफ़िज़ होना भी ज़रूरी है क्यूँकि इसके ज़रिये कुरआन के अल्फाज़ की हिफाज़त है लेकिन इसके साथ साथ हमारी राय यह है कि जो बच्चे ज़हीन और याद्दाश्त के पक्के हों उन्हें, अगर कम उम्री में हिफ़्ज़ कराया जा सकता है तो करा दिया जाये वरना १५, १५ और २०, २० साल की उम्र तक का सारा वक्त .कुरआने करीम हिफ़्ज़ कराने में ख़र्च करा देना ज़्यादा बेहतर नहीं है। क्यूँकि आजकल उमूमन ग़रीबों और मुफ़्लिसों के बच्चे दीनी मदारिस में आते हैं। उन्हें इस लाइक कर देना भी ज़रूरी है कि रोज़ी कमाने पर कादिर हों और दीनी और ज़रूरत के लाइक दुनियवी उलूम भी हासिल किये हुए हों जिन्हें पढ़ा लिखा कहा जा सके।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न.152,153)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🐬 क्या मछली और अरहर की दाल पर फातिहा नहीं होगी ?


🌷गलतफ़हमी- हमारे कुछ अवाम भाई अपनी नावाकिफ़ी की वजह से यह ख्याल करते हैं कि मछली और अरहर की दाल पर फ़ातिहा नहीं पढ़ना चाहिए हालाँकि यह उनकी गलतफ़हमी है। 


✍🏻 इस्लाह - इस्लाम में जिस चीज़ को खाना हलाल और जाइज़ है तो उस पर फ़ातिहा भी पढ़ी जा सकती है। लिहाज़ा अरहर की दाल और मछली चूंकि इनका खाना हलाल व जाइज़ है तो उन पर फ़ातिहा पढ़ने में हरगिज़ कोई बुराई नहीं हैं, बल्कि मछली तो निहायत उम्दा और महबूब गिज़ा है।


📚 जैसा कि हदीस में आया है कि जन्नत में अहले जन्नत को पहली गिज़ा मछली ही मिलेगी और जो खाना जितना उम्दा और लज़ीज़ होगा फातिहा में भी उसकी फजीलत ज़्यादा होगी।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 153)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


✍🏻 सुअर के नाम लेने को बुरा जानना❓ 


✍🏻 मज़हबे इस्लाम में सुअर खाना हराम है और उसका गोश्त पोस्त, खून, हड्डी, बाल, पसीना, थूक वगैरा पूरा बदन और उससे ख़ारिज होने वाली हर चीज़ नापाक है और इस मअना कर सुअर से नफरत करना ईमान की पहचान और मोमिन की शान है, लेकिन कुछ लोग जिहालत की वजह से इसका नाम भी ज़बान से निकालने को बुरा जानते हैं। यहाँ तक कि बाज़ निरे अनपढ़ गंवार यह तक कह देते हैं कि जिसने अपने मुँह से सुअर का नाम लिया, चालीस दिन तक उसकी ज़बान नापाक रहती है। जहालत यहाँ तक बढ़ चुकी है कि एक मरतबा एक गाँव में इमाम साहब ने मस्जिद में तकरीर के वक़्त यह कह दिया कि शराब पीना ऐसा है जैसे सुअर खाना, तो लोगों ने इस पर खूब हंगामा किया कि इन्होंने मस्जिद में सुअर का नाम क्यूँ लिया यहाँ तक कि इस जुर्म में बेचारे इमाम साहब का हिसाब कर दिया गया।


✍🏻 भाईयो! किसी बुरी से बुरी चीज़ का भी बुराई के साथ नाम लेना बुरा नहीं है। हाँ अगर कोई किसी बुरी चीज़ को अच्छा कहे, हराम को हलाल कहे तो यह यक़ीनन गलत है बल्कि बुरी चीज़ की बुराई बगैर नाम लिए हो भी नहीं सकती। शैतान, इब्लीस, फ़िरऔन, हामान, अबूलहब और अबूजहल का नाम भी तो लिया जाता है। ये हों या और दूसरे खुदा व रसूल के दुश्मन वह सबके सब सुअर से बदरजहा बदतर हैं, बल्कि इब्लीस, फ़िरऔन, हामान और अबूलहब का नाम तो .कुरआन में भी है और हर कुआन पढ़ने वाला उनका नाम लेता है। खुदाए तआला और उसके महबूब सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के जितने दुश्मन हैं और उनकी बारगाहों में गुस्ताख़ी और बेअदबी करने वाले हैं, ये सब सुअर से कहीं ज़्यादा बुरे हैं । ये सब जहन्नम में जायेंगे और जानवर कोई भी हो हराम हो हलाल हो वह हरगिज़ जहन्नम में नहीं जायेगा बल्कि हिसाब व किताब के बाद फना कर दिये जायेंगे।


✍🏻 खुलासा यह है कि सुअर का नाम लेकर उसके बारे में हुक्मे शरञ् से आगाह करना हरगिज़ कोई बुरा काम नहीं, ख्वाह मस्जिद में हो या गैरे मस्जिद में, वाज़ व तकरीर में हो या गुफ्तगू में। आख़िर .कुरआन में भी तो उसका नाम कई जगह आया है, क्यूँकि अरबी में जिसको खिन्जीर कहते हैं उसी को हिन्दुस्तान वाले सुअर कहते हैं, तो अगर नमाज़ में वही आयतें तिलावत की गई जिनमें सुअर के हराम फरमाने का जिक्र है तो उसका नाम नमाज़ में आयेगा और मस्जिद में भी।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 154,55)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


 👉 क्या जो इस्लामी बातों की जानकारी न होने की वजह से अमल नहीं करते उन की पकड़ न होगी ❓


✍🏻 गलतफहमी- आजकल काफी लोग ऐसे हैं जो दीनी बातों, इस्लामी अकीदों, पाकी, नापाकी, नमाज़ व रोज़ा और ज़कात वगैरहा के मसाइल नहीं जानते और सीखने की कोशिश भी नहीं करते और खुदा व रसूल ने किस बात को हराम फ़रमाया और किसे हलाल, किसे जाइज़ और किसे नाजाइज़ उन्हें इसका इल्म नहीं और न इल्म सीखने की परवाह, और ख़िलाफ़े शरअ हरकतें करते हैं। गलत सलत नमाज़ अदा करते हैं, लेन देन ख़रीद व फरोख्त और रहन सहन में मजहबे इस्लाम के खिलाफ चलते हैं और उनसे कोई कुछ कहे या उन्हें गलत बात से रोके, ख़िलाफ़ शरअ पर टोके तो वो कहते हैं, हम जानते ही नहीं हैं लिहाजा हम से कोई मुआख़ज़ा और सुवाल न होगा और हम बरोजे कियामत छोड़ दिये जायेंगे।


✍🏻 इस्लाह- यह उन लोगों की सख्त गलतफहमी है, सही बात यह है कि अन्जान गलतकारों की डबल सज़ा होगी, एक इल्म हासिल न करने की और उलमा से न पूछने की और दूसरे गलत काम करने की। और जो जानते हैं लेकिन अमल नहीं करते, उन्हें एक ही अज़ाब होगा यअनी अमल न करने का, इल्म न सीखने का गुनाह उन पर न होगा।


✍🏻 आजकल आदमी अगर कोई सामान गाड़ियाँ, कपड़े, जेवरात, खाने पीने की चीज़ ख़रीदे और उसको उस चीज़ के ग़लत व ख़राब या उसमें धोखेबाज़ी का शुबह हो जाये तो जाँच परख करायेगा, लोगों से मशवरा करेगा, जानकारों को लाकर दिखायेगा, खूब छान फटक करेगा लेकिन इस्लाम के मुआमले में मनमानी करता रहेगा, उल्टी सीधी नमाज़ पढ़ता रहेगा। वुजू व गुस्ल, नहाने धोने में इस्लामी तरीके का ख्याल नहीं रखेगा, लेन देन और मुआमलात में हराम को हलाल और हलाल को हराम समझता रहेगा लेकिन आलिमों मौलवियों से मालूम नहीं करेगा कि मैं जो करता हूँ यह ग़लत है या सही ❓


✍🏻 यह इसलिए हुआ कि अब इन्सान को दुनिया के नुकसान की तो फिक्र है लेकिन आख़िरत के घाटे की कोई फिक्र नहीं हालाँकि वह मौत से किसी सूरत बच न सकेगा और कब व हन व जहन्नम के अज़ाब से भाग निकलना उसके बस की बात न होगी। 

✍🏻 दुनियवी हुकूमतों और सल्तनतों की ही मिसाल ले लीजिए अगर कोई शख़्स किसी हुकूमत के किसी कानून के खिलाफ वर्जी करे और फिर कह दे कि मैं जानता ही नहीं हूँ तो हुक्काम और पुलिस उसकी बात नहीं सुनेंगे और उसे सज़ा दी जायेगी । मिसाल के तौर पर कोई शख्स बगैर लाइसेंस के ड्राइवरी करे या बगैर रोड टैक्स जमा करे गाड़ियाँ और मोटर चलाये और जब पकड़ा जाये तो कहे मुझको पता नहीं था कि गाड़ी चलाने के लिए ये काम करना पड़ते हैं, तो हरगिज़ उसकी बात नहीं सुनी जायेगी। ऐसे ही कोई शख़्स बगैर टिकट के रेल में सफर करने लगे या पैसेन्जर का टिकट ले और एक्सप्रेस में सफर करने लगे, सेकेन्ड क्लास का टिकट लेकर फरीट क्लास में बैठ जाये और जब पकड़ा जाये तो कह दे कि मैं जानता ही नहीं रेल में सफ़र के लिए टिकट लेना पड़ता है या यह एक्सप्रेस है मैं नहीं पहचान सका और यह फट क्लास है मुझको नहीं मालूम तो क्या चेक करने वाले उसको छोड़ देंगे ? हरगिज़ नहीं। ऐसे ही दीन के मुआमले में जो लोग गलत सलत करते हैं वो भी यह कहने से नहीं छूटेंगे कि हम जानते ही न थे और कियामत के दिन उन्हें दुहरी सज़ा होगी, एक न जानने की और दूसरी न करने की।

✍🏻 इन सबकी तफ़सील व तहकीक के लिए देखिए आलाहज़रत के फ़रमूदात अलमलफूज़ हिस्सा अव्वल सफा २७ पर। 


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 155,156)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


✍🏻 घर वालों को तंगी और परेशानी में छोड़ कर नफ़्ल इबादत करना❓


✍🏻 कुछ लोगों को देखा गया है कि वह इबादत व रियाज़त में लगे रहते हैं। इश्राक़, चाश्त, अव्वाबीन और तहज्जुद की नमाज़ों को अदा करते, तस्बीह व वज़ीफे पढ़ते हैं और उनके बीवी बच्चे या बूढ़े और मुफलिस माँ बाप रोटी के टुकड़ों के लिए मुहताज और तेरा मेरा मुँह देखते नज़र आते हैं। यह ऐसे लोगों की भूल हक है और वह नहीं जानते, बन्दगाने खुदा में से हक वालों के अदा करना भी खुदाए तआला की इबादत और उसकी खुशनूदी हासिल करने का ज़रीया है। नफ्ल इबादत में मशगूलियत अगर बीवी बच्चों और मुफलिस माँ बाप के ज़रूरी इख़राजात से रोकती हो तो पहले बीवी बच्चों की किफालत करे फिर वक़्त पाये तो नवाफ़िल में मशगूल हो। अलबत्ता पाँचों वक्त की फर्ज नमाज़ हरगिज़ किसी सूरत माफ नहीं, उसकी अदाएगी हर हाल हर एक पर निहायत लाज़िम व ज़रूरी है, ख़्वाह कैसे भी करे और कुछ भी करे।

✍🏻 और आजकल इस दौर में अगर कोई शख़्स सिर्फ फ़र्ज़ नमाज़ों को पाबन्दी के साथ बाजमाअत अदा करता हो, रमज़ान के रोजे रखता हो अगर ज़कात फर्ज हो तो ज़कात निकालता हो, हज फ़र्ज हुआ हो तो ज़िन्दगी में सिर्फ एक बार हज़ कर चुका हो, और हराम काम मसलन शराब, जुआ, चोरी, ज़िनाकारी, सूदखोरी, गीबत व बदकारी, खयानत व बदअहदी, सिनेमा, गाने बाजे और तमाशों वगैरह से बचता हो और हत्तल इमकान यअनी जहाँ तक हो सके सुन्नतों का पाबन्द हो और इसके साथ साथ जाइज़ पेशे के जरीए बीवी बच्चों की किफालत करता हो और ईमान व अकीदा दुरुस्त रहे तो यकीनन वह अल्लाह वाला है, अल्लाह का प्यारा है और वह अल्लाह का मुकद्दस व नेक बन्दा है। ख्वाह वह नफ्ल नमाजें और नफ़्ली इबादत अदा न कर पाता हो, वज़ीफ़ और तस्बीह, इश्राक व चाश्त व अव्वाबीन वगैरहा में मशगूल न रहता हो।


✍🏻 हदीस पाक में है रसूलुल्लाह ने फरमाया : "फ़र्ज़ इबादत के बाद हलाल रोज़ी की तलाश फर्ज है।" 

📚 ( मिश्कात शरीफ़ सफा २४२)  


✍🏻 और फरमाते हैं : "सबसे ज़्यादा उम्दा व अफ़ज़ल वह माल है जो तुम अपने घर वालों पर खर्च करो ।"

📚 (मिश्कात सफा १७०)


🌷 सदरुश्शरीआ हज़रत मौलाना अमजद अली अलैहिर्रहमह फरमाते हैं, "इतना कमाना फर्ज है जो अपने लिए और अहल व अयाल के लिए और जिन का नफका उसके जिम्मे वाजिब है, उनके नफ़के के लिए और कर्ज अदा करने के लिए किफायत कर सके।"

📚 (बहारे शरीअत हिस्सा १६ सफा २१८)

👉 और फ़रमाते हैं, "कद्रे किफायत से ज़्यादा इसलिए कमाता है कि फुकरा व मसाकीन की ख़बरगीरी कर सके या करीवी रिश्तेदारों की मदद करे तो यह मुसतहब है और यह नफ्ल इबादत से अफ़ज़ल है।"

📚 (बहारे शरीअत हिस्सा १६ सफा २१८)

✍🏻 फिर फ़रमाते हैं जो लोग मसाजिद और ख़ानकाहों में बैठ जाते हैं और बसर औक़ात (गुज़ारे) के लिए कुछ काम नहीं करते और खुद को मुतवक्किल बताते हैं हालाँकि उनकी निगाहें इसकी मुन्तज़िर रहती हैं कि कोई हमें कुछ दे जाये, वह मुतवक्किल नहीं। इससे बेहतर यह था कि वह कुछ काम करते और उससे बसर औकात यअनी गुज़ारा करते। 

✍🏻 इसी तरह आजकल बहुत से लोगों ने पीरी, मुरीदी को पेशा बना लिया है। सालाना मुरीदों में दौरा करते हैं और मुरीदों से तरह तरह की रकमें खसोटते हैं और उनमें कुछ ऐसे हैं कि झूट फरेब से भी काम लेते हैं, यह नाजइज़ है। 

📚 (बहारे शरीअत हिस्सा १६ सफा २१८)


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 156,157,158)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🔪 क्या औरतों को जानवर जुबह करना नाजाइज़ है ❓


🌹औरत भी जानवर जुबह कर सकती है और उसके हाथ का जुबह किया हुआ जानवर हलाल है । मर्द और औरत सब उसे खा सकते हैं ।

📙 मिश्कात शरीफ किताबुस्सैद वलज़िबाह सफा ३५७ पर बुख़ारी शरीफ़ के हवाले से इसके जाइज़ होने की साफ हदीस मौजूद है जिसमें यह है कि रसूलुल्लाह सल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने एक लड़की के हाथ की जुबह की हुई बकरी का गोश्त खाने की इजाज़त दी ।

🌷 मज़ीद तफसील के लिए देखिए सय्यिदी मुफ्ती आज़म हिन्द अलैहिर्रहमह का फ़तावा मुस्तफ़विया जिल्द सोम सफा १५३ और फ़तावा रज़विया जिल्द ८ सफा ३२८ और सफा ३३२, 


✍🏻 खुलासा यह कि औरतों के लिए भी मर्दो की तरह हलाल जानवरों और परिन्दों को जुबह करना जाइज़ है जो इसे गलत कहे, वह खुद गलत और निरा जाहिल बल्कि शरीअत पर इफ्तिरा करने वाला है

✍🏻 समझदार बच्चे का जुबह किया हुआ जानवर भी हलाल है और मुसलमान अगर बदकार और हरामकार हो तो ज़बीहा उसका भी जाइज़ है, नमाज़, रोजे का पाबन्द न हो, उसके हाथ का भी जुबह किया हुआ जानवर हलाल है । हाँ नमाज़ रोज़ा छोड़ना और हराम काम करना इस्लाम में बहुत बुरा है ।


✍🏻 दुर्रमुख्तार में है : ज़िबह करने वाले के लिए मुसलमान और आसमानी किताबों पर ईमान रखने वाला होना काफ़ी है अगरचे औरत ही हो ।

📚 (दुर्रेमुख़्तार, किताबुज्जबाएह, जिल्द २, सफ़हा २२८, मतब मुजतबाई)


🏁 आलाहजरत मौलाना शाह अहमद रजा खां अलैहिरहमह फरमाते हैं : जिब्ह के लिए दीने समावी (आसमानी दीन) शर्त है, आमाल शर्त नही

📚 (फतावा रजविया जिल्द , सफा ३३३)


✍🏻 हाँ जो लोग काफिर गैर मुस्लिम हों या उनके अकीदे की खराबी या रसूलुल्लाह सल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की शान में गुस्ताखी की वजह से उन्हें इस्लाम से खारिज व मुरतद करार दिया गया है, उनके हाथ का ज़बीहा हराम व मुरदार है ।


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 160,161)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣1️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌷औरत का नामहरम मनिहारों के हाथ से चूड़ियाँ पहनना❓


✍🏻 यह हरामकारी काफी राइज है । औरतों को मनिहारों के हाथों में हाथ देकर चूड़ियाँ पहनना सख्त हराम है । बल्कि इसमें दो हराम हैं, एक गैर मर्द को हाथ दिखाना और दूसरा उसके हाथ में हाथ देना ।

✍🏻 हमारी इस्लामी माँ बहनों को चाहिए कि अल्लाह तआला से डरें, उसके अज़ाब से बचें और इस फ़ेले हराम को फौरन छोड़ दें । बाज़ार से चूड़ियाँ ख़रीद लिया करें और घर में या तो औरतें एक दूसरे को पहना दें या घर वालों में से किसी महरम से पहन लें या शौहर अपनी बीवी को पहना दें तो गुनाह से बच जायेंगी ।

✍🏻 जो मर्द अपनी औरतों को मनिहारों से चूड़ियाँ पहनवाते हैं या उससे मना नहीं करते वह बहुत बड़े बेगैरत और दय्यूस हैं । 


🌷 सय्यिदी आलाहज़रत अलैहिर्रहमह इस मसअले के मुताल्लिक फ़रमाते हैं : हराम हराम हराम हाथ दिखाना गैर मर्द को हराम, उसके हाथ में हाथ देना हराम, जो मर्द अपनी औरतों के साथ उसे रवा रखते हैं दय्यूस हैं ।

📚 (फतावा रज़विया जिल्द १० निस्फ़ आख़िर सफा २०८)


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 161)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌷मर्द और औरतों का एक दूसरे की मुशाबहत करना


🖊️ आजकल मर्दों में औरतों की और औरतों में मर्दो की मुशाबहत इख़्तियार करने और उनके अन्दाज़ व लिबास व चाल ढाल अपनाने का मर्ज़ पैदा हो गया है हालाँकि हदीसे पाक में ऐसे लोगों पर रसूलुल्लाह ने लानत फ़रमाई है जो मर्द होकर औरतों की और औरत होकर मर्दो की वज़अ कता अपनायें ।


🖊️ एक हदीस में है कि हुजूर ने फ़रमाया कि हमारे गिरोह से नहीं वह औरत जो मर्दाना रखरखाव अपनाये और वह मर्द जो ज़नाना ढंग इख़्तियार करे ।


🖊️ अबू दाऊद की हदीस में है कि एक औरत के बारे में सय्यिदा आइशा सिद्दीका रदियल्लाहु तआला अन्हा को बताया गया कि वह मर्दाना जूता पहनती है तो उन्होंने फ़रमाया कि रसूलुल्लाह ने मर्दानी औरतों पर लानत फ़रमाई है ।


🖊️ खुलासा यह है कि जो वज़अ कतझ रखरखाव लिबास वगैरह मर्दो के साथ ख़ास हों उनको औरतें न अपनायें और जो औरतों के साथ ख़ास हो उसको मर्द न अपनायें । आजकल कुछ औरतें मर्दो की तरह बाल कटवाने लगी हैं यह उनके लिए हराम है और यह मरने के बाद सख़्त अज़ाब पायेंगी । ऐसे ही कुछ मर्द औरतों की तरह बाल बढ़ाते हैं सूफ़ी बनने के लिए लम्बी लम्बी लटें रखते हैं, चोटियाँ गूंधते और जूड़े बना लेते हैं, ये सब नाजाइज़ व ख़िलाफ़े शरअ है । तसव्वुफ़ और फ़कीरी बाल बढ़ाने और रंगे कपड़े पहनने का नाम नहीं बल्कि रसूलुल्लाह की सच्ची पैरवी करना और ख्वाहिशाते नफ़्सानी को मारने का नाम है ।

📚 (बहारे शरीअत हिस्सा १६ सफा १६८)


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 162)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


🌷अकीके का गोश्त दादा दादी और नाना नानी के लिए नाजाइज़ समझना 


👥 कुछ लोग अकीके का गोश्त दादा दादी और नाना नानी के लिए खाने को नाजाइज़ ख़्याल करते हैं यह बहुत बड़ी जहालत नादानी और गलतफहमी है । अकीके का गोश्त दादा दादी और नाना नानी के लिए खाना बिला शुबा जाइज़ है बल्कि जहाँ इस खाने को बुरा जानते हों वहाँ उनके लिए खाना ज़रूरी है । और वह खायेंगे तो रिवाज मिटाने का सवाब पायेंगे ।


📝 आलाहज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना अहमद रज़ा ख़ाँ साहब अलैहिर्रहमतु वरिंदवान से इस बारे में पूछा गया तो फ़रमाया : सब खा सकते हैं, उकूदुददरिया में है :

 

📚(अलमलफूज़ हिस्सा अव्वल सफा ४६)


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 162)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


  🌷 नस्ब और बिरादरी बदलना


✍🏻 यह बीमारी भी काफी आम हो गई है कि हैं किसी काम और बिरादरी के और खुद को दूसरी कौम व बिरादरी का ज़ाहिर कर रहे हैं और चाहते हैं कि इस जरीए से बरतरी, फजीलत और इज्जत हासिल होगी हालाँकि ऐसा करने से न इज्जत मिलती है न फजीलत। इज़्ज़त व जिल्लत तो अल्लाह तआला के दस्ते कुदरत में है जिसे जो चाहता है अता फरमाता है। ये अपना नसब बदलने वाले बहुत बड़े बेवकुफ, अहमक, जाहिल, बेगैरत व बेशर्म हैं। 


✍🏻 हदीस शरीफ में है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया जो जानते हुए अपने बाप के सिवा दूसरे को अपना बाप बताये, उस पर जन्नत हराम है। 

📚(सहीह बुख़ारी जिल्द २ सफा १००१, सहीह मुस्लिम जिल्द १ सफा ४४२)


✍🏻 और एक दूसरी हदीस में अपना नस्ब बदलने वाले और अपने बाप के अलावा किसी दूसरे को बाप बताने वालों के बारे में हुजूर ने फ़रमाया कि उन पर अल्लाह तआला और फ़िरिश्तों और सारे लोगों की लानत है। 

📚(सहीह मुस्लिम जिल्द १ सफा ४६५)


✍🏻 आजकल खुद को सय्यिद कहलाने और आले रसूल बनने का शौक बहुत ज़ोर पकड़ गया है। देखते ही देखते हज़ारों लाखों जो सय्यिद नहीं थे वह सय्यिद बन गये जिसकी वजह से अब सय्यिदों का इहतिराम भी मुश्किल होता जा रहा है क्यूँकि नकली सय्यिदों की भरमार है। खुद मेरी मालूमात में ऐसे काफी लोग हैं जो अब तक कुछ और थे और अब चालीस और पचास की उम्र में वह सय्यिद और आले रसूल बन गये। ये सब बहुत बड़े वाले मक्कार और धोकेबाज़, अय्यार, फरेबी और जालसाज़ हैं जिन पर खुदाए तआला की लानत है। 

✍🏻 मुरादाबाद शहर में अभी जल्द ही एक मौलवी ने ५५ साल की उम्र में खुद को आले रसूल और सय्यिद कहलवाना शुरू कर दिया है और कहा है कि मेरे पीर ने मुझे सय्यिद बना दिया गोया कि सियादत के साथ मज़ाक हो रहा है। और इसमें काफी दख़ल हमारी कौम के बाज़ अफ़राद की इस बेजा अकीदत का भी है कि उनकी नज़र में इल्म व अमल, तक़वा व तहारत की कोई कद्र नहीं बस जो किसी बड़े बाप का बेटा है वही सब कुछ है। हालाँकि इस्लामी नुक्तए नज़र से और तो और खुद सादाते किराम, जिनका इहतिराम व अदब ईमान की पहचान है। आलिमे दीन जो तफसीर व हदीस व फिक्ह का इल्म काफ़ी रखता हो वह उन सादात से अफ़ज़ल है जो आलिम न हों।


📚 हदीस में है रसूलुल्लाह ने फ़रमाया : "जिसका अमल उसे पीछे ढकेल दे, वह नसब से आगे नहीं बढ़ सकता।"

📚(सहीह मुस्लिम जिल्द २ सफा ३४५)


✍🏻 आलाहज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना अहमद रज़ा ख़ाँ साहब अलैहिर्रहमह फ़रमाते हैं, फज्ले इल्म फज्ले नसब से अशरफ व आज़म है। सय्यिद साहब कि आलिम न हों अगरचे सालेह हों आलिम सुन्नी सहीहुल अकीदा के मरतबे को नहीं पहुँच सकते।

📚 (फ़तावा रज़विया जिल्द ६ सफा ५६)


📚 (ग़लत फहमियां और उनकी इस्लाह, सफ़्हा न. 163,164)


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝   इमाम के लिए मुक़र्रिर होना कितना जरूरी है ?❓


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩ 


•••➲  आज कल काफ़ी जगह अवाम मस्जिद मे किसी को इमामत के लिए रखते है। तो उस से तकरीर कराते हें अगर वह धूम धड़ाके से ख़ूब कूद फांद कर हाथ पांव फेंक कर जोशीले अन्दाज़ मे जज़्बाती तकरीर कर दे तो बड़े खुश होते है। और उसको इमामत के लिए पसन्द करते हैं।यहां तक कि बाज़ जगह तो खुश इलहानी और अच्छी आवाज़ से नाते और नज्में पढ़ दे तो उसको बहुत बढ़िया इमाम ख़्याल करते है। इस बात की तरफ़ तवज्जोंह नहीं देते कि उसका कुर्आन शरीफ गलत या सही । उसको मसाइल दीनिया से बकद्रे जरूरत वाक़फियत है या नही। और उसका किरदार व अमल मनसबे इमामत के लिए मुनासिब है या नही।


              ⊆ ↬ बा - हवाला ↫ ⊇


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह - 40 📚


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝   इमाम के लिए मुक़र्रिर होना कितना जरूरी है ?❓


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩ 


पहला हिस्सा पिछले पोस्ट 123 में जरुर पढ़ें।


•••➲  अगरचे तकरीर व बयान व ख़िताबत अगर उसूल व शराइत के साथ हो तो उससे दीन को तक़वियतहासिल होती है। और हुई है। लेकिन इसमे भी कोई शक नही कि दीनदारी तक़वा शिआरी और खौफे खुदा अमूमन कम सुखन और सन्जीदा मिजाज लोगो मे ज़्यादा मिलता है। ज़बान जोर और मुँह के मज़बूत लोग सब काम मुँह और ज़बान से ही चलाना चाहते है। और इस्लाम गुफ्तार से ज़्यादा किरदार से फैला है। और आजकल के ज़्यादातर मौलवियो और इमामो के लिए बजाए तकरीर व खितावत के जिम्मेदार उलमाए अहलेसुन्नत की आम फहम अन्दाज़ मे लिखीं हुई किताबें पढ़ कर अवाम को सुनाना ज़्यादा मुनासिब और बेहतर है। खुलासा यह कि आज कल बाज़ जगह लोग जो इमाम के लिए मुक़र्रिर होना जरूरी ख़्याल करते है यह लोग गलती पर है।..✍️


              ⊆ ↬ बा - हवाला ↫ ⊇


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह - 41


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝   हैज व निफास वाली औरतो को मनहूस समझना


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩


•••➲  ज़च्चा पन और महावारी मे औरतो के साथ खाने पीने और उनका झूटा खाने मे हरज नही। हिन्दुस्तान मे जो बाज़ जगह उनके बरतन अलग कर दिये जाते है। उनके साथ खाने पीने को बुरा जाना जाता है या उनके बरतनो को नापाक ख्याल किया जाता है। यह हिन्दुओं की रस्मे है  ऐसी बेहूदा रस्मो से बचना जरूरी है। अलबत्ता इस हालत मे मर्द का अपनी बीबी से हम बिस्तरी करना हराम है  जिससे बचना हमे बहुत जरूरी है।


•••➲  करीना ए जिन्दगी की लगभग 40 से ऊपर पोस्ट किया है। जिसमे शोहर बीबी की शोहबत करने के तरीके बयान किए है। अपनी बीबी के साथ इस्लामी कानून के तहित शोहबत करना इबादत मे सुमार होता है। यह लज्जत जन्नत की लज्जतो मे सुमार हे कुछ मुसलमान ऐसे होते है। जिन्हे दीन का इल्म नही होता है। यहा तक के बह शराब जेसी हराम चीज को पीकर अपनी बीबी के साथ शौहबत करते है। उनहे इससे कुछ मतलब नही रहता बीबी हैज से या नही उनहे अपनी ख्वाहिश हफस पूरी करने के लिए बीबी के साथ शोहबत करना है!...✍


              ⊆ ↬ बा - हवाला ↫ ⊇


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह 22


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝   हैज व निफास वाली औरतो को मनहूस समझना


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩


पहला हिस्सा पिछले पोस्ट (125) में जरुर पढ़ें।


•••➲  चाहे बीबी इसके लिए तैयार हो या न हो उन लोगो को बता दू इस तरीके से शोहबत करना गुनाह मे सुमार होता है  और इसका असर हमारी औलाद पर पड़ता है  जिससे अक्सर देखा जाता है। कही किसी का बच्चा कुपोसित पैदा हुआ किसी का पेर से अपाहिज हाथ से लूला आंख से अन्धा या शरीर मे कोई न कोई कमी जरूर होती है। या दिमागी संतुलन खराब रहता है। इस लिए हमे इस चीज से बचना चाहिए जब तक बीबी अपने हैज के दिन पार न करले तब तक शोहबत नही करनी चाहिऐ अल्लाह हमे इस गुनाह से बचने की तोफीक अता फरमाऐ ज्यादा बारीकी से जानने के लिए जो मेने करीना ए जिन्दगी की पोस्ट की है  उन्हे पडिऐ इन्शा अल्लाह हर बात आपके समझ मे आ जाइगी।...✍


              ⊆ ↬ बा - हवाला ↫ ⊇


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह 22


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝   निफास की मुद्दत


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩


•••➲  अक्सर औरतो मे यह रिवाज है। कि बच्चा पैदा होने के बाद जब तक चिल्ला पूरा न हो। चाहे खून आना बन्द हो गया हो न नमाज पढ़े न रोज़ा रखें और न अपने को नमाज के लायक जाने यह महज जहालत है। जब निफास यानी खून आना बन्द हो जाए उसी वक़्त से नहा कर नमाज शुरू करदे। और अगर नहाना नुकसान करे तो तयम्मुम करके नमाज पढ़े। यानी निफास की मुद्दत चालीस दिन जरूरी ख़्याल करना गलतफहमी है। जब तक ख़ून आए तभी तक औरत निफास मे मानी जाएगी ख्वाह चन्द दिन ही हुए हो। हां अगर चालीस दिन गुजरने के बाद भी ख़ून आना बन्द न हो तो चालीस दिन के बाद नहा कर नमाज पढ़ेगी और जिन दिनो मे उस पर नमाज रोजा फ़र्ज है  उन दिनों मे शौहर और बीवी का हमबिस्तर होना भी जाइज है।


              ⊆ ↬ बा - हवाला ↫ ⊇


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह 22-23


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣8️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝   निफास की मुद्दत


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩


पहला हिस्सा पिछले पोस्ट (127) में जरुर पढ़ें।


•••➲  खुलाशा यह है। खास कर कम इल्म बाले लोग ऐसी हरकत करने से बाज नही आते है। आज के दौर भे बेसे भी देखा जाता है। मर्द हो चाहे औरत सबने नमाज को तर्क कर दिया है। जेसे तेसे हमारी कुछ बहिने नमाज को पढ़ना फर्जेएन समझती है। तो कुछ कम इल्म वाले उनको इस मुद्दत मे नमाजे तर्क करवाने मे नही चूकते नजर आते है। आपको बता दू नमाज किसी भी हाल मे माफ नही है। अगर खुद नमाज की अहिमयत नही समझती तो कम से कम अपनी बेटी और बहू को तो मत रोको हो सके तो उनको देख कर खुद भी अल्लाह की बारगाह मे हाथ फैलाना चालू करदो इससे पहले की तुम्हारी या हमारी नमाज पढ़ी जाए!


•••➲  दुआ है। रब तबारक तआला से हम सबको दीन की सही समझ अता फरमा और हम सबको हमारी माँ बहनो को सच्चा पक्का नमाजी बनाए..✍


              ⊆ ↬ बा - हवाला ↫ ⊇


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह 22-23


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣2️⃣9️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝   क्या बच्चे को दूध पिलानेसे औरत का वुज़ू टूट जाता है!


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩


•••➲  बाज जगह जाहिलो मे यह मशहूर हो गया है। कि औरत अगर बच्चे को दूध पिलाए और बावुज़ू हो तो उसका वुज़ू टूट जाता है। यह महज़ गलत है। बच्चे को दूध पिलाना हरगिज़ वुज़ू नही तोड़ता और उसके बाद वुज़ू फिर से किये बगैर नमाज़ पढ़ सकती है। दोबारा वुज़ू करने कि हाजत नहीं।


•••➲  बहुत सी छोटी बाते है। जो हमारी माँ बहनो को मालूम नही रहती जिसके चलते वो नमाज़ो को तर्क कर दिया करती है। और उसका गुनाह अपने सर पर लाद लेती है।...✍


              ⊆ ↬ बा - हवाला ↫ ⊇


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह 23


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣🅾️📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝क्या बच्चे को दूध पिलाने से औरत का वुज़ू टूट जाता है!


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹 ⇩


पहला हिस्सा पिछले पोस्ट (129) में जरुर पढ़ें।


•••➲  आज कल हमारी माँ बहनो को ज्यादा तर देखी जाती है। जो फ़र्ज नमाजो को ज्यादा तवज्जो न देकर कई ऐसे कामो मे अपने आपको मशरूफ कर लेती है। जिससे उन्हें लगता है। इस काम को करने के बाद मेरी हर मुराद पूरी हो जाएगी जेसे सोलह सैय्यदो के रोजे कहानी यह और नूर नामा दस बीबियो की कहानी यह सब करना नजायज व हराम है। पर हमारी माँ बहने इनको करने मे इतना सबाब समझती है। अगर इनके नजदीक अजान भी हो रही हो तो इन्हे नमाज़ से फिर कोई वास्ता नही रहता इतनी मसगूल हो जाती है।


•••➲  इन किताबो को पढ़ने मे के फ़र्ज को भी तर्क करने मे इन्हे देर नही लगती मेरी बहनो अल्लाह रब्बुल इज्जत इसकी भी पकड़ करेगा फिर किस मुँह से अल्लाह के सामने जबाब दोगी के खातूने जन्नत की कनीज हूँ कह पाओगी अपने आपको नही कह पाओगी बल्की सर्म से अपनी नजरो को झुका लोगी अभी वक़्त है। मेरी बहनो इस्लाम की सच्चाई को सही तरीके से पहचानो इस्लाम हमे फर्ज नमाज़ो को अदा करने के बाद नफ्ल नमाजो का हुक्म देता है।


•••➲  दुआ है। रब तबारक तआला से हमे और हमारी माँ बहनो को अमल की तौफीक अता फरमाए और मसलके आला हजरत का पाबंद बनाए

आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन ...✍


              ⊆ ↬ बा - हवाला ↫ ⊇


📬 गलत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह सफह 23


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣1️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝 क्या  किसी  महीनें  की  मुबारक़  बाद  देने  से  जहन्नम  हराम  औऱ  ज़न्नत  वाज़िब  हो  जाती  है।..❓


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹⇩

              

 •••➲  किसी भी इस्लामिक महीने की खुश खबरी देने से जन्नत और दोज़ख का फैसला नहीं होता।


 •••➲  अल्हम्दुलिल्लाह सभी इस्लामिक महीने बा-बरकत व अज़ीम ही होते है। लेकिन जो ये बोलता है के ऐसा रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया के जो सबसे पहले इसकी खबर देगा उस पे जहन्नम हराम या जन्नत वाज़िब हो जाएगी। इस तरह की कोई बात हदीसे मुबारका में मौजूद नहीं है।


 •••➲  बल्कि ऐसे बे बुनियादी मैसेज भेजने वाला अल्लाह के रसूल पर झुठ बांध रहा है। और अपने आप को जहन्नम की तरफ धकेल रहा हैं। और जो शख्स हर सुनी सुनाई बात को आगे बढा देता है वो झुठा है और जहन्नम का हक़दार हैं।


 •••➲  रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “मत झूट बाँधो मेरे ऊपर, जो कोई मुझ पे झूट बाँधेगा वो जहन्नम में जाएगा।


📬 सही बुखारी ,किताबुल इल्म हदीस नं 106   


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣2️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝 क्या  किसी  महीनें  की  मुबारक़  बाद  देने  से  जहन्नम  हराम  औऱ  ज़न्नत  वाज़िब  हो  जाती  है।..❓


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹⇩

              

पहला हिस्सा पिछले पोस्ट (131) में जरुर पढ़ें।


 •••➲  रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया किसी शख्स के झुठा होने के लिए यही बात काफी है की वो हर सुनी सुनाई (बगैर तहक़ीक़ किये) बात को आगे बयांन करें।


📕 मुक़द्दमा सही मुस्लिम हदीस नं 9


         ⇩   याद  रखने  वाली  बातें ⇩


 •••➲   कोई भी खुश खबरी अल्लाह पाक ही दे सकता है। 10 लोगो को मैसेज सेंड करने से खुश खबरी नहीं मिलती।


 •••➲   प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की क़सम दे कर मैसेज फॉरवर्ड करने को कहना हराम है। क्योंकि क़सम सिर्फ अल्लाह की खाई जा सकती है।


 •••➲   प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और बीबी फातिमा और बीबी जैनब (रदिअल्लहु अन्हुम) के ख्वाब में आने वाले मैसेज को फॉरवर्ड न करे।


 •••➲   कोई भी क़ुरआन की आयत या हदीस या किसी सहाबा का क़ौल तहक़ीक़ किये बग़ैर फॉरवर्ड न करे।


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣3️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝  आला  हज़रत  पर  ऐतराज़  तारीखे  विलादते  नबी  अलैहिस्सलाम


आला हज़रत पर इलज़ाम लगाने वाले वहाबी कहते हैं की आला हज़रत ने फ़तावा रजविया में नबी अलैहिस्सलाम की विलादत 8 रबि उल अव्वल ही लिखी है, और 12 रबि उल अव्वल को विशाल ..?❓


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹⇩


 •••➲  ये एक झूठा इल्ज़ाम है, और वहाबियो की मक्करी है।


 •••➲  आला हज़रत ने तमाम अक़वाल को शुमार किया, की विलादत पर 2, 8, 10, 12,17, 22 तारीख़ के अक़वाल भी मौजूद है, फ़िर इसके बाद मवाहिबुल लदनिया और मदारीजन नबुव्वा के हवाले से 12 रबिउल अव्वल को ही मशहूर और ज़्यादा सही क़रार दिया है।


📔 फ़तावा रज़विया, ज़िल्द - 26, पेज 411 


 •••➲  अंधे वहबियो, देखो फ़तावा रजविया में क्या लिखा है??


 •••➲  आईये कुछ और अइम्मा-इ-मुज्तहदिन के अक़वाल पर भी नज़र डालते हैं की 12 रबीउल अव्वल ही विलादत का दिन हैं,


 •••➲  इमाम इब्न-इ-इश्क़ (85-151 H): अल्लाह के नबी (صلى الله عليه وآله وسلم) 12 रबी-उल-अव्वल को आम-उल -फील में पैदा हुए।


📘 इब्न-ए-जोजी इन अल-आफ़, पेज 87


 •••➲  अल्लामा इब्न-ए-हिशाम (213 H): अल्लाह के नबी (صلى الله عليه وآله وسلم) पीर के दिन 12 रबी-उल-अव्वल में आम-उल-फील में पैदा हुए।

📕 इब्न-ए-हाशम इन अस-सीरत-उन-नबविया, ज़िल्द 1 पेज 158


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣4️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝  तुझ  से  कुत्ते  हज़ार  फ़िरते  हैं, आला  हज़रत  शेर  की  तशरीह


आला हज़रत का एक कलाम है जिसमे कहते है कि, कोई क्यों पूछे तेरी बात रजा तुझसे कुत्ते हज़ार फिरते है इसमें कुत्ते है या कित्ते..?❓


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹⇩


 •••➲  ये वही कलाम हैं जो सरकार आला हज़रत ने सरकारे दो जहां हुज़ुर ﷺ की ज़ियारते जमाल से सरफ़राज़ होने की उम्मीद से लिखा था और इसके बाद आप को हालते बेदारी में आक़ा ए कौनैन हुज़ुर ﷺ का दीदार नसीब हुआ।  ये आक़ा ए कौनैंन ﷺ की तरफ से वो एजाज हैं जो बड़े नाज़ के पालों को ही मयस्सर आता हैं।


कोई क्यों पूछे तेरी बात रजा

तूझसे कुत्ते हज़ार फ़िरते हैं।


 •••➲  जिस की शरह फ़रमाते हुये अल्लामा फैज़ अहमद ओवैसी अलैहिर रहमतो रिज़वान फ़रमाते हैं, आला हज़रत अलैहिर रह्मा ने खुद को और अपने जैसे दूसरे उश्शाक़े रसूल ﷺ को कुत्ता कहा हैं।


 •••➲  ये सहीह और हक़ हैं फकीर ने(अल्लामा फैज़ अहमद ओवैसी ने) इसी शरह में इस पर तवील बहस लिखी हैं लेकिन आशिकाने रजा यहाँ झिझकते हैं, बाज़ तो "शायदा हज़ार फ़िरते हैं" से तब्दिल करके पढते हैं ये ना-मुनासिब हैं इस लिए की आशिक़ उसी लफ्ज़ से ज़्यादा खुश होता हैं जो वो अपने महबूब के लिए खुद इंतेखाब करे सैय्यदना अली उल मुर्तुज़ा रदिअल्लहु अन्हु को अबू तुराब से मसर्रत होती न की अबुल हसन से।


 •••➲  इसी लिए मेरा ख़याल हैं की लफ्ज़ को जो का तूँ रहने दीजिए ऐसे ही ख्वाजा सैयद माहेर अली शाह रहमतुल्लाह अलैही का शे'अर  "गुस्ताख़ अख्खियान किथ्थे जा लऱयान" वहां भी बाज़ लोग "मुश्ताक़ अखियान" पढते हैं में ये समझता हु के इस तबदीली से उन आशिक़ों की रूह राज़ी नहीं होगी।


 •••➲  औऱ फ़रमाते हैं, एक साहब ने फ़रमाया की यहाँ कित्ते बकसरा काफ होगा। इस लिए की कित्ते बा मा'यना कितने। मैंने कहा आप की त'अभीर बसरो चश्म लेकिन मेरा इमाम अहमद रजा इस त'अभीर से खुश न होगा।


📬 माखूज़: ( शारह हादिके बख्शीश, ज़िल्द 4 सफ़ह 338 


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣5️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝  तुझ  से  कुत्ते  हज़ार  फ़िरते  हैं, आला  हज़रत  शेर  की  तश्रीह


आला हज़रत का एक कलाम है जिसमे कहते है कि, कोई क्यों पूछे तेरी बात रजा तुझसे कुत्ते हज़ार फिरते है इसमें कुत्ते है या कित्ते..?❓


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹⇩


 •••➲  इमामे इश्क़ो मुहब्बत सरकार आला हज़रत सरकारे मुस्तफ़ा सरवरे क़ायनात हुज़ुर ﷺ की बरगाह का अपने आप को "कुत्ता" कहलाने में कोई आर नहीं बल्कि फख्र महसूस फ़रमाते हैं।


 •••➲  सकरार आला हज़रत ही क्या ! हर आशिक़ ए रसूल का यही तरीका रहा हैं की वो मदीना मुनव्वरा के बा कमाल कुत्तो का भी अदब और उनसे प्यार रखते हैं।


 •••➲  औऱ यही एक आशिक़े सादिक़ की अलामत हैं।


 •••➲  जैसा के हज़रत हाफिज शीराज़ी अलैहिर रह्मा हुज़ुर ﷺ के सगान कुए (गली के कुत्तो) का इज़हारे आरज़ू इस तरह करते हैं,


شنیدہ ام کہ سگانرا قلادہ می بندید,


چرا بگردن قاضی حافظ نیگفتی رسنے,


 •••➲  तर्जुमा : मैंने सुना हैं की कुत्तो के गले में पट्टा ड़ालते है, फिर अये यारो ! हाफिज की गर्दन में रस्सी क्यों नहीं बांधते ?


 •••➲  हज़रत शैख़ सा'दी अलैहिर रह्मा बारगाहे रिसालते म'आब ﷺ में यु अर्ज़ करते हैं:


چہ کند سعدی مسکین کہ صد جان،

سازیم فدائے سگ دربان محمدﷺ


 •••➲  तर्जुमा : सा'दी (रादिअल्लाहु अन्हु) की एक जान क्या हैं? सो जान हो तो हुज़ुर ﷺ के दरबान के कुत्तो पर वार दू।


 •••➲  हज़रत नूरुद्दीन अल्लामा अब्दुर रहमान आरिफ जामि रहमतुल्लाह अलैही जो दरसी किताब "शारह जामि" के अलावा बेसो किताबो के मुसन्निफ़ है फ़रमाते हैं:


سگ تو دوش بجامی فغاں کناں می گفت,


خموش باش کہ از نالئہ است بدردسریم,


 •••➲  तर्जुमा : अये महबूबे मदीना  ﷺ गुज़िश्ता शब् को जामि आप के हुज़ुर में आन्ह व फागा कर रहा था की आप के दरे अक़दस का कुत्ता कहता था की खामोश हो जाओ, इस लिए के तेरे शोरो फाग और आह व नाला से मेरे सर में दर्द होता हैं।


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣6️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝  ग़ुस्ल के वक़्त कलमा न पढ़ने से पाक नही होते ?❓


आवाम में मशहूर हैं कि जब तक (ग़ुस्ल करते हुए) कलमा शरीफ़ न पढ़ा जाएं तो वो पाक नही होता ना-पाक ही रहता है!


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹⇩


 •••➲  ये आवाम की गलत फ़हमी और फ़िज़ूल बात है सही मसला ये हैं कि ग़ुस्ल करते वक़्त न कलमा शरीफ़ पढ़ें न किसी किस्म की गुफ़्तुगू करें बल्कि फ़राइज़ सुन्नत व मुस्ताहबात को अदा करें!


 •••➲  हज़रत मुफ़्ती अमजद अली आज़मी फ़रमाते हैं ग़ुस्ल करते वक़्त किसी किस्म का कलाम न करें औऱ न ही दुआ पढ़ें!


📬 फ़तावा आलमगीरी - बहारे शरीअत ज़िल्द 2


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845


⩴⩴⩴⩴❀⩴❀✨﷽✨❀⩴❀⩴⩴⩴⩴

🌹الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ اللهﷺ

      🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामीं ग्रुप🌹🎍

               📮पोस्ट  नं. 1️⃣3️⃣7️⃣📮

               ❖✦✺✦❖✦✺✦❖✦✺

     

╔═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╗

अवाम की गलतफमिया और उनकी इस्लाह

╚═══❖❖•ೋ°❤️ °ೋ•❖❖═══╝


📝  बच्चों को बदमज़हबों से तालीम दिलाना कैसा ?❓


 •••➲  कुछ लोग अपने बच्चो को तालीम के लिए वहाबी देवबंदी आलिम के पास भेज देते हैं और मना किया तो कहते हैं हम अपने बच्चो’ को दीनी तालीम के लिए भेजते हैं तालीम लेना तो वहाबी देवबंदी आलिम से भी जाइज़ है! 


⇩ 🕹 शरीयत का हुक़्म हमारी इस्लाह  🕹⇩


 •••➲  हालांकि उनका ये कहना बिल्कुल ग़लत है सही बात ये है के अपने बच्चो को वहाबी देवबंदी आलिम के पास पढ़ाना जाइज़ नहीं क्योंकि वो तालीम ही ऐसी देंगे जो उनका अक़ीदा होगा!

 •••➲  आला हज़रत इमाम ए अहले सुन्नत मुजद्दिद ए आज़म से किसी ने पूछा : वहाबी के यहाँ’ बच्चो को पढ़ाना कैसा है? 

 •••➲  तो आपने इरशाद फ़रमाया हराम हराम हराम 

 •••➲  आला हज़रत ने वहाबी आलिम से बच्चों’ को तालीम दिलाने वालो’ को सख्ती से रोका और 3 मर्तबा फ़रमाया हराम हराम हराम

 •••➲ इसलिए अपने बच्चो” को किसी सुन्नी सहीहुल अक़ीदा आलिम से तालीम दिलाये!

📬 अहकाम ए शरीअत, हिस्सा 3, सफह 237 📚


👉🏾📚“गलत फहमियो की इस्लाह” पिछली सभी पोस्ट को पढ़ने के लिये 👇🏿इस लिन्क पर क्लिक करे

https://galaxyislamigroup.blogspot.com/2020/11/blog-post_30.html

✐°°•. इंशाअल्लाह पोस्ट जारी रहेगी .......

▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬

    🎍🌹 गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप 🌹🎍

🅝🧕🏻 ख़्वातीनो के लिए अलग ग्रुप 🧕🏻🅝

👤 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए 👤

        📲 wa.me/9196 69988845



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

रमजानुल मुबारक के अहम मसाइल

▪️▫ ◾  🔲   *﷽*   🔲  ◾ ▫    🎍🌹 *गैलेक्सी इस्लामी ग्रुप* 🌹🎍   ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿    🔅 *रमज़ानुल मुबारक के अहम मसाइल* 🔅               ♻️ *पोस्ट ...